Author: bharati

  • भिण्ड में अवैध हथियार लाइसेंस गिरोह पकड़ा गया, सरकारी सिस्टम में सेंध का खुलासा

    भिण्ड में अवैध हथियार लाइसेंस गिरोह पकड़ा गया, सरकारी सिस्टम में सेंध का खुलासा


    भिण्ड । मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले में पुलिस ने एक बड़े और संगठित फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि जांच में कलेक्ट्रेट कार्यालय के दो कर्मचारियों की संलिप्तता भी सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि यह गिरोह लंबे समय से अवैध रूप से आर्म्स लाइसेंस तैयार कर लोगों को उपलब्ध करा रहा था। इसके बदले में आरोपियों द्वारा मोटी रकम वसूली जाती थी। जानकारी के अनुसार एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार करने के लिए करीब तीन लाख रुपए तक लिए जाते थे। इस तरह यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था और दस्तावेजों की प्रक्रिया में भी गड़बड़ी की जा रही थी।

    लहार क्षेत्र से सुनील शर्मा और उसके बेटे प्रांशु शर्मा की गिरफ्तारी इस मामले में अहम मानी जा रही है। पुलिस के अनुसार सुनील शर्मा के खिलाफ पहले से ही सात आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद उसने अपने प्रभाव और नेटवर्क का उपयोग करते हुए अपने बेटे के नाम पर भी फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवा लिया था।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस पूरे रैकेट में केवल बाहरी लोग ही नहीं बल्कि सरकारी सिस्टम के भीतर से भी सहयोग मिल रहा था। कलेक्ट्रेट में कार्यरत दो कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिनसे पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। माना जा रहा है कि इनकी मदद से ही दस्तावेजों को आगे बढ़ाया जाता था और लाइसेंस जारी कराए जाते थे।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है। इसी संभावना को देखते हुए अब पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। डिजिटल रिकॉर्ड, आवेदन फाइलें और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने फर्जी लाइसेंस जारी किए गए हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस रैकेट के जरिए कई ऐसे लोगों तक भी हथियार पहुंचे हैं जिनका आपराधिक रिकॉर्ड हो सकता है। इस कारण यह मामला सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद गंभीर माना जा रहा है।

    फिलहाल पुलिस ने सभी 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही कलेक्ट्रेट कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच तेज कर दी गई है। इस पूरे मामले ने सरकारी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी दोबारा न हो।

  • नागपुर रेलवे स्टेशन पर भटका मासूम बालक, रेलवे स्टाफ की तत्परता से चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंपा गया

    नागपुर रेलवे स्टेशन पर भटका मासूम बालक, रेलवे स्टाफ की तत्परता से चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंपा गया


    नागपुर । नागपुर रेलवे स्टेशन पर गुरुवार को एक संवेदनशील मामला सामने आया जब प्लेटफॉर्म पर एक आठ वर्षीय बालक संदिग्ध अवस्था में अकेला घूमता हुआ पाया गया। रेलवे कर्मचारियों की सतर्कता और तत्परता के चलते बच्चे को समय रहते सुरक्षित कर लिया गया और चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपुर्द कर दिया गया।

    रेलवे सूत्रों के अनुसार यह बालक विदिशा का रहने वाला कुशल बताया जा रहा है जो नई दिल्ली से चेन्नई जा रही जीटी एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 12616 से नागपुर स्टेशन पर पहुंचा था। ट्रेन के प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर रुकने के दौरान बच्चा अकेला उतरकर इधर उधर घूमता हुआ दिखाई दिया जिससे स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों को उस पर शक हुआ।

    इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात हेड टिकट परीक्षक विवेक व्यवहारे की नजर बच्चे पर पड़ी। उन्होंने तुरंत स्थिति को समझते हुए बच्चे से पूछताछ की और उसके अकेले होने की पुष्टि होने पर तत्काल रेलवे सुरक्षा बल और संबंधित अधिकारियों को सूचना दी।

    रेलवे स्टाफ ने बिना देरी किए बच्चे को अपने संरक्षण में लिया और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी गई जिसके बाद बालक को उनके सुपुर्द कर दिया गया। फिलहाल बच्चे से प्रारंभिक पूछताछ की जा रही है और उसके परिजनों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।

    इस घटना ने एक बार फिर रेलवे स्टेशनों पर बच्चों की सुरक्षा और निगरानी की जरूरत को उजागर किया है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस तरह की घटनाओं में त्वरित कार्रवाई की जाती है।

    रेलवे प्रशासन और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चा ट्रेन में अकेला कैसे पहुंचा और उसके परिजन कहां हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार संभव है कि यात्रा के दौरान बच्चा अपने परिवार से बिछड़ गया हो।

    फिलहाल बालक सुरक्षित है और उसे उचित देखभाल में रखा गया है। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा के दौरान बच्चों पर विशेष ध्यान रखें ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि रेलवे स्टाफ की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से किसी भी बड़ी अनहोनी को रोका जा सकता है और समय रहते मानवता की मिसाल पेश की जा सकती है।

  • जैकी भगनानी ने अपनी शादी पर किया दिलचस्प खुलासा, रकुल संग रिश्ते को बताया सिचुएशनशिप

    जैकी भगनानी ने अपनी शादी पर किया दिलचस्प खुलासा, रकुल संग रिश्ते को बताया सिचुएशनशिप


    नई दिल्ली। मनोरंजन जगत में चर्चित जोड़ी रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। लंबे समय तक डेटिंग के बाद 2024 में शादी के बंधन में बंधे इस कपल को अक्सर सार्वजनिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया पर एक साथ देखा जाता है। इसी बीच हाल ही में जैकी भगनानी के एक बयान ने उनके रिश्ते को लेकर नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

    एक बातचीत के दौरान जैकी भगनानी ने अपने वैवाहिक जीवन को हल्के-फुल्के अंदाज में सिचुएशनशिप बताया, जिससे लोग हैरान रह गए। हालांकि उन्होंने यह शब्द पारंपरिक अर्थ में नहीं बल्कि अपने और रकुल के बीच सहज और खुले रिश्ते को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि उनके बीच बातचीत बहुत आसान है और वे हर विषय पर बिना किसी झिझक के बात कर सकते हैं।

    जैकी भगनानी के अनुसार, उनका रिश्ता केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दोस्ती और समझदारी का मजबूत आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी पत्नी से किसी भी बात को छिपाते नहीं हैं और दोनों के बीच पारदर्शिता उनके रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत है।

    उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उनके जीवन में किसी भी तरह की स्थिति हो, वे उसे रकुल के साथ खुलकर साझा करते हैं। उनके अनुसार, यही सहजता उनके रिश्ते को मजबूत बनाती है और उन्हें एक-दूसरे के और करीब लाती है। इस बयान को उन्होंने एक हल्के अंदाज में दिया था, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं

    रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय हैं। रकुल प्रीत सिंह फिल्मी दुनिया में लगातार काम कर रही हैं और विभिन्न परियोजनाओं में अपनी भूमिका निभा रही हैं। वहीं जैकी भगनानी अभिनय के साथ-साथ फिल्म निर्माण में भी सक्रिय हैं और कई बड़ी फिल्मों से जुड़े रहे हैं।

    दोनों की जोड़ी को इंडस्ट्री में एक समझदार और संतुलित कपल के रूप में देखा जाता है। सार्वजनिक जीवन में दोनों का व्यवहार और आपसी तालमेल अक्सर चर्चा का विषय बनता है। हाल ही में दिया गया यह बयान उनके रिश्ते को लेकर लोगों की जिज्ञासा को और बढ़ा रहा है।

    हालांकि, यह स्पष्ट है कि जैकी भगनानी ने यह टिप्पणी गंभीर संदर्भ में नहीं बल्कि हल्के और मजाकिया अंदाज में की थी। इसके बावजूद यह बयान मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बन गया है और उनके रिश्ते को लेकर एक बार फिर लोगों की नजरें उन पर टिक गई हैं।

  • कानूनी मुश्किलें बढ़ीं: पवन खेड़ा की जमानत याचिका कोर्ट ने नहीं मानी..

    कानूनी मुश्किलें बढ़ीं: पवन खेड़ा की जमानत याचिका कोर्ट ने नहीं मानी..


    नई दिल्ली।कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा कानूनी झटका लगा है, जहां गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री से जुड़े विवादित बयानों और उनकी पत्नी पर लगाए गए आरोपों से संबंधित है, जिसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी एफआईआर से बचाव के लिए पवन खेड़ा ने अदालत में अग्रिम जमानत की मांग की थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी।

    यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने एक सार्वजनिक बयान में मुख्यमंत्री की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों में विदेशों में संपत्ति और कई देशों के पासपोर्ट रखने जैसे दावे शामिल थे। बयान के बाद संबंधित पक्ष की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और मामला कानूनी रूप से आगे बढ़ गया।

    एफआईआर दर्ज होने के बाद पवन खेड़ा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी रास्ता अपनाते हुए अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। इससे पहले उन्हें कुछ स्तर पर अस्थायी राहत भी मिली थी, लेकिन बाद में वह राहत आगे नहीं बढ़ सकी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनकी कानूनी स्थिति और कठिन हो गई है।

    इस निर्णय के बाद उनके खिलाफ जांच और संभावित कार्रवाई की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। अब यह मामला पूरी तरह जांच और आगे की कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगा। दूसरी ओर, इस फैसले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। एक पक्ष इसे कानूनी प्रक्रिया बता रहा है, जबकि दूसरा इसे राजनीतिक विवाद से जोड़कर देख रहा है।

    फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर है कि आगे पवन खेड़ा क्या कदम उठाते हैं और क्या वे ऊपरी अदालत में राहत के लिए फिर से अपील करते हैं या जांच प्रक्रिया का सामना करते हैं।

  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेत्री अक्षया हरिहरन का गंभीर आरोप, नाम पर पहले ही वोट डाले जाने का किया दावा

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेत्री अक्षया हरिहरन का गंभीर आरोप, नाम पर पहले ही वोट डाले जाने का किया दावा


    नई दिल्ली। तमिलनाडु में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें अभिनेत्री अक्षया हरिहरन ने मतदान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि जब वह अपना वोट डालने मतदान केंद्र पहुंचीं, तो उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर पहले ही किसी अन्य व्यक्ति द्वारा मतदान किया जा चुका है। इस घटना के बाद उन्होंने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चिंता जताई है।
    अभिनेत्री के अनुसार, वह अपने निर्धारित मतदान केंद्र पर समय से पहुंचीं और वोट डालने के लिए लाइन में भी लगीं, लेकिन जब उनका नाम सूची में जांचा गया तो अधिकारियों ने बताया कि उनके नाम पर पहले ही मतदान दर्ज हो चुका है। इस जानकारी से वह पूरी तरह हैरान रह गईं और उन्होंने तत्काल इस स्थिति की जांच की मांग की।
    उन्होंने बताया कि दस्तावेजों में उनकी सभी जानकारी सही दर्ज थी, लेकिन मतदान रिकॉर्ड में गड़बड़ी दिखाई दी। इस अंतर ने उनके मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के नाम पर पहले ही वोट डाला जा सकता है, तो यह पूरी मतदान प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठाता है।
    इस स्थिति के बाद उन्होंने कानूनी सलाह भी ली और वैकल्पिक प्रक्रिया के तहत अपना वोट दर्ज किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह अनुभव उनके लिए संतोषजनक नहीं रहा, क्योंकि मतदान जैसा महत्वपूर्ण अधिकार इस तरह की स्थिति से प्रभावित हुआ है।
    अभिनेत्री ने कहा कि मतदान केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव है, और इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी जनता के विश्वास को कमजोर कर सकती है। उन्होंने इस मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों के समक्ष दर्ज कराने की बात भी कही है, ताकि इसकी निष्पक्ष जांच हो सके।
    इस घटना के बाद आम जनता और सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग मतदान व्यवस्था में तकनीकी सुधार और अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • सच्चे समर्पण की ताकत क्या है प्रेमानंद जी महाराज का जीवन बदलने वाला उपदेश

    सच्चे समर्पण की ताकत क्या है प्रेमानंद जी महाराज का जीवन बदलने वाला उपदेश


    नई दिल्ली । आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध श्री प्रेमानंद जी महाराज ने जीवन और भक्ति को लेकर एक गहरा संदेश दिया है जिसमें उन्होंने बताया कि इंसान के जीवन में केवल एक सही निर्णय ही उसकी पूरी दिशा बदल सकता है। उनके अनुसार जीवन में प्रवचन सुनना और बोलना आसान है लेकिन असली कठिनाई अपने मन शरीर और प्राण को पूरी तरह भगवान के प्रति समर्पित करने में है।

    महाराज जी का कहना है कि अक्सर लोग यह दावा करते हैं कि वे भगवान के प्रति समर्पित हैं लेकिन जब जीवन में कठिन परिस्थितियां आती हैं तो उनका विश्वास डगमगा जाता है। ऐसे समय में व्यक्ति फिर से माया और सांसारिक चीजों की ओर झुक जाता है। उनके अनुसार इस संसार में स्थायी कुछ भी नहीं है न परिवार न धन और न ही प्रतिष्ठा। केवल एक ही सत्य है सच्चिदानंद परमात्मा जो इस पूरी सृष्टि का संचालन करता है।

    उन्होंने समझाया कि हर इंसान के सामने जीवन में एक बड़ा विकल्प हमेशा होता है कि वह दुनिया के आकर्षण यानी माया को चुने या भगवान और गुरु का मार्ग अपनाए। अधिकतर लोग सांसारिक चीजों को चुन लेते हैं और यही उनके दुख का कारण बनता है। लेकिन जो व्यक्ति भगवान का सहारा पकड़ लेता है उसके लिए यही दुनिया बंधन नहीं बल्कि मुक्ति का माध्यम बन जाती है।

    प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार सच्चा समर्पण यही है कि व्यक्ति यह भाव रखे कि उसका शरीर मन और प्राण भगवान के अधीन हैं न कि स्वयं के। जब यह भावना जीवन में आ जाती है तो इंसान अपनी इच्छाओं और मन के भटकाव से ऊपर उठ जाता है। चाहे सुख हो या दुख बीमारी हो या अपमान वह हर परिस्थिति को भगवान की इच्छा मानकर स्वीकार करता है।

    उन्होंने पौराणिक उदाहरण देते हुए राजा मोरध्वज और राजा बलि की कथा का उल्लेख किया। राजा मोरध्वज ने भगवान की परीक्षा में अपने पुत्र का बलिदान स्वीकार कर लिया जबकि राजा बलि ने अपने वचन का पालन करते हुए सब कुछ भगवान को समर्पित कर दिया। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि सच्चा समर्पण त्याग और विश्वास का दूसरा नाम है।

    महाराज जी कहते हैं कि जीवन की असली परीक्षा किसी कागज पर नहीं होती बल्कि परिस्थितियों के रूप में सामने आती है। कभी सुख और लालच के रूप में तो कभी दुख और अपमान के रूप में। जो व्यक्ति हर स्थिति में भगवान के साथ बना रहता है वही सच्चा साधक कहलाता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि यदि व्यक्ति माया के अस्थायी सहारों को छोड़कर भगवान और गुरु का सहारा पकड़ ले तो उसका जीवन पूरी तरह बदल सकता है। एक सरल लेकिन शक्तिशाली नियम उन्होंने दिया कि जो भी भगवान की इच्छा है वही स्वीकार करना चाहिए।

    अंत में उन्होंने कहा कि यह संसार केवल एक भ्रम है और जब व्यक्ति इस सत्य को समझ लेता है तो उसके भीतर का भय समाप्त हो जाता है। जो व्यक्ति सांसारिक चीजों को छोड़कर ईश्वर को अपना लेता है वही सच्ची शांति और आनंद को प्राप्त करता है। उनके अनुसार समर्पण ही वह मार्ग है जो साधारण जीवन को असाधारण आध्यात्मिक अनुभव में बदल देता है।

  • बगलामुखी जयंती 2026: मां बगलामुखी की पूजा से मिलती है शत्रुओं पर विजय और संकटों से मुक्ति

    बगलामुखी जयंती 2026: मां बगलामुखी की पूजा से मिलती है शत्रुओं पर विजय और संकटों से मुक्ति


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शक्ति उपासना का विशेष महत्व माना जाता है और इन्हीं शक्तियों में दस महाविद्याओं में से एक मां बगलामुखी की जयंती को अत्यंत पवित्र अवसर के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से मां बगलामुखी की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और साधक को विशेष सिद्धि और सफलता प्राप्त होती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। देवी बगलामुखी को स्तंभन शक्ति की देवी कहा जाता है जो शत्रुओं की शक्ति को रोकने और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने की क्षमता रखती हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई उनकी पूजा से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार मां बगलामुखी का प्राकट्य एक भयंकर तूफान को शांत करने के लिए हुआ था। देवी ने अपनी दिव्य शक्ति से विनाशकारी शक्तियों को नियंत्रित कर सृष्टि की रक्षा की थी। इसी कारण उन्हें संकट निवारण और सुरक्षा की देवी के रूप में पूजा जाता है।

    इस दिन की पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी मानी जाती है जो कोर्ट कचहरी के मामलों में सफलता चाहते हैं या जिनके जीवन में शत्रु बाधाएं या मानसिक तनाव अधिक है। माना जाता है कि मां बगलामुखी की आराधना से वाणी पर नियंत्रण प्राप्त होता है और विरोधी शांत हो जाते हैं।

    पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करें तो सुबह 7 बजकर 24 मिनट से 9 बजकर 2 मिनट तक चौघड़िया मुहूर्त शुभ माना गया है। इसके बाद 9 बजकर 3 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक अमृत काल रहेगा। दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक शुभ चौघड़िया मुहूर्त है जबकि शाम 6 बजकर 6 मिनट से 7 बजकर 38 मिनट तक प्रदोष काल पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

    पूजा विधि के अनुसार इस दिन प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है क्योंकि मां बगलामुखी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। पूजा में पीले फूल हल्दी चने की दाल और पीले प्रसाद का विशेष महत्व होता है। देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर दीपक जलाकर पूजा प्रारंभ की जाती है। इसके बाद हल्दी से तिलक कर पीले पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

    भक्त श्रद्धा पूर्वक देवी के मंत्रों का जाप करते हैं और अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई साधना और पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं। कुल मिलाकर मां बगलामुखी जयंती का यह पावन अवसर भक्तों के लिए शक्ति विश्वास और विजय का प्रतीक माना जाता है जो जीवन में नकारात्मकता को समाप्त कर सफलता और शांति प्रदान करता है।

  • भीषण गर्मी ने छीनी चित्रकूट की रौनक, श्रद्धालुओं की कमी से ठप पड़ा स्थानीय कारोबार..

    भीषण गर्मी ने छीनी चित्रकूट की रौनक, श्रद्धालुओं की कमी से ठप पड़ा स्थानीय कारोबार..

    नई दिल्ली।धर्म नगरी चित्रकूट इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के कारण जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। गर्म हवाओं और तेज धूप के चलते दिन चढ़ते ही सड़कों, घाटों और मंदिर परिसरों में सन्नाटा फैल जाता है। आमतौर पर श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहने वाला यह धार्मिक क्षेत्र अब सुनसान नजर आने लगा है, जिससे स्थानीय माहौल और अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा असर पड़ा है।

    रामघाट पर स्थिति सबसे अधिक प्रभावित दिखाई दे रही है, जहां सामान्य दिनों में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है। लेकिन मौजूदा समय में सुबह 8 से 9 बजे के बाद ही यहां गतिविधियां लगभग समाप्त हो जाती हैं। भीषण गर्मी के कारण लोग लंबे समय तक बाहर रुकने से बच रहे हैं, जिससे घाटों और आसपास के मंदिरों में पहले जैसी रौनक नहीं रही।

    इस बदलाव का सीधा असर स्थानीय व्यापार पर पड़ रहा है। घाट किनारे छोटी-बड़ी दुकानों पर निर्भर दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की कमी के कारण उनकी बिक्री लगभग ठप हो गई है। कई दुकानदार सुबह दुकान खोलने के बाद दिन भर में बहुत कम बिक्री होने पर मजबूरन जल्दी दुकान बंद कर देते हैं। हालात ऐसे हैं कि कई बार दिन में बोहनी तक नहीं हो पा रही, जिससे रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।

    धार्मिक गतिविधियों पर भी गर्मी का असर साफ दिख रहा है। जहां पहले मंदिरों में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी, अब वहां शांति और खालीपन नजर आता है। भजन-पूजन और धार्मिक वातावरण की रौनक कम हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है। पर्यटन पर आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण इस कमी का असर सीधे आजीविका पर पड़ रहा है।

    स्थानीय व्यापारियों और लोगों का मानना है कि अगर घाटों पर छाया, ठंडे पेयजल और विश्राम की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो कुछ हद तक श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत मिल सकती है और उनकी आवाजाही बनी रह सकती है। फिलहाल स्थिति यह है कि तेज गर्मी के कारण चित्रकूट की धार्मिक और सांस्कृतिक रौनक अस्थायी रूप से थमती नजर आ रही है, और सभी को मौसम में बदलाव का इंतजार है।

  • सीता नवमी 2026: माता सीता की पूजा से वैवाहिक जीवन में आती है सुख-शांति और समृद्धि

    सीता नवमी 2026: माता सीता की पूजा से वैवाहिक जीवन में आती है सुख-शांति और समृद्धि


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सीता नवमी का पर्व अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और विशेष रूप से आदर्श पतिव्रता, त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति मां जानकी को समर्पित होता है। वर्ष 2026 में यह शुभ अवसर 25 अप्रैल शनिवार को मनाया जाएगा।

    वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 24 अप्रैल 2026 की रात 7 बजकर 21 मिनट पर होगी और इसका समापन 25 अप्रैल 2026 की शाम 6 बजकर 27 मिनट पर होगा। इसी कारण इस वर्ष सीता नवमी का पर्व 25 अप्रैल को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीराम और माता सीता की पूजा करने से घर में सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से जीवन में आने वाले दुख और संकट दूर हो जाते हैं और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है। विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है क्योंकि इससे पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन की मजबूती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    सीता नवमी पर पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं जिनमें ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 35 मिनट तक रहता है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से 1 बजकर 10 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 52 मिनट से 3 बजकर 43 मिनट तक शुभ माना जाता है। वहीं अमृत काल शाम 6 बजकर 29 मिनट से रात 8 बजकर 4 मिनट तक विशेष रूप से फलदायी माना गया है।

    पूजा विधि के अनुसार इस दिन प्रातः काल स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में माता सीता और भगवान राम की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजा करनी चाहिए। उन्हें पीले फूल वस्त्र और शृंगार सामग्री अर्पित की जाती है। इसके साथ ही भोग लगाकर श्री जानकी रामाभ्यां नमः मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है। सीता नवमी की कथा का पाठ करने के बाद आरती करना आवश्यक होता है।

    मंत्रों में ॐ सीतायै नमः और ॐ श्री सीता रामाय नमः का जाप भी विशेष फलदायी माना गया है। इसके अलावा वैदिक मंत्र ॐ जनकनंदिन्यै विद्महे भूमिजायै धीमहि तन्नो सीता प्रचोदयात् का उच्चारण भी किया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सीता नवमी का पर्व केवल एक पूजा नहीं बल्कि भक्ति और आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतीक है।

    इस दिन की गई आराधना से जीवन में सुख समृद्धि धन धान्य और वैवाहिक सौहार्द बढ़ता है। कुल मिलाकर सीता नवमी का यह पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है और यह भक्तों के जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है।

  • रियलिटी शो के मंच से अक्षय कुमार ने गृहणियों पर फिल्म बनाने की इच्छा जताई, समाज को दिया उनके योगदान का नया संदेश


    नई दिल्ली। फिल्मों के साथ-साथ टेलीविजन पर भी सक्रिय अभिनेता अक्षय कुमार ने एक बार फिर समाज के एक अहम वर्ग की ओर ध्यान आकर्षित किया है। एक क्विज रियलिटी शो के सेट पर उन्होंने गृहणियों को घर का सुपरस्टार बताते हुए उनके जीवन पर आधारित फिल्म बनाने की अपनी इच्छा साझा की। उनकी यह सोच न केवल भावनात्मक बल्कि सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    कार्यक्रम के दौरान अक्षय कुमार ने कहा कि वह लंबे समय से ऐसी फिल्म बनाना चाहते हैं, जिसमें महिलाओं की भूमिका को केंद्र में रखा जाए और यह दिखाया जाए कि किस तरह घर की जिम्मेदारियां निभाने वाली महिलाएं परिवार की रीढ़ होती हैं। उन्होंने बताया कि इस विषय पर उनके पास पूरी स्क्रिप्ट तैयार है, लेकिन अभी तक इसे लेकर प्रोडक्शन स्तर पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है।

    सेट पर मौजूद महिला प्रतिभागियों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनके अनुभव सुने और महसूस किया कि उनकी वास्तविक जीवन की कहानियां उस फिल्म के विचार से काफी मेल खाती हैं, जिसे वह पर्दे पर उतारना चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गृहणियों का योगदान अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि उनका काम लगातार, जिम्मेदारी भरा और बेहद महत्वपूर्ण होता है।

    अक्षय कुमार का मानना है कि समाज में गृहणियों की भूमिका को सही पहचान मिलनी चाहिए और सिनेमा इस दिशा में एक प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्म का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं होगा, बल्कि यह उन महिलाओं के संघर्ष, समर्पण और ताकत को सामने लाने का प्रयास भी होगा, जो बिना किसी पहचान या सराहना के अपने परिवार के लिए दिन-रात काम करती हैं।

    फिलहाल इस प्रस्तावित फिल्म को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस विचार को व्यापक समर्थन मिल रहा है। दर्शक भी इस तरह की कहानी को बड़े पर्दे पर देखने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं।

    टेलीविजन पर उनकी सक्रियता भी लगातार बढ़ रही है और वह अपने क्विज शो के जरिए दर्शकों से जुड़ाव बनाए हुए हैं। शो के नए सीजन को भी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि वह छोटे पर्दे पर भी अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहे हैं।