Author: bharati

  • पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में पीएम मोदी का संबोधन, बड़ी भीड़ और स्थानीय उत्साह के बीच चुनावी गतिविधियों में तेजी

    पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में पीएम मोदी का संबोधन, बड़ी भीड़ और स्थानीय उत्साह के बीच चुनावी गतिविधियों में तेजी


    नई दिल्ली। बारुईपुर पश्चिम बंगाल में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दूसरे चरण के तहत एक जनसभा को संबोधित किया। पूरे क्षेत्र में सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियों का वातावरण देखने को मिला और जैसे जैसे समय आगे बढ़ा, सभा स्थल पर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती गई। स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती सुनिश्चित की गई ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था की गई और गर्मी को देखते हुए लोगों के लिए पानी तथा प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं का भी प्रबंध किया गया।

    सभा स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने राजनीतिक माहौल को और अधिक सक्रिय बना दिया। दूरदराज के क्षेत्रों से भी लोग इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि वे इस चुनाव को राज्य के भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि विकास की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। भीड़ में मौजूद लोगों ने यह भी बताया कि वे प्रधानमंत्री के विचारों और कार्यशैली से प्रभावित हैं और उन्हें विश्वास है कि उनके नेतृत्व में विकास की गति को मजबूती मिल सकती है।

    कार्यक्रम के दौरान एक भावनात्मक दृश्य भी सामने आया जब एक स्थानीय नागरिक प्रधानमंत्री के लिए बांग्ला भाषा में लिखी गई एक पुस्तक लेकर पहुंचा। उसने बताया कि इस पुस्तक में प्रधानमंत्री के कार्यों और उनसे जुड़ी जन अपेक्षाओं का वर्णन किया गया है। उसका कहना था कि यह एक व्यक्तिगत प्रयास है जिसमें उसने अपने विचार और अनुभव शामिल किए हैं। उसने यह भी उम्मीद जताई कि यह संदेश किसी माध्यम से प्रधानमंत्री तक पहुंच सकेगा। इस पहल ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और माहौल में एक अलग तरह की भावनात्मक जुड़ाव की भावना दिखाई दी।

    स्थानीय लोगों के बीच राजनीतिक चर्चाओं का माहौल भी काफी सक्रिय रहा। कई लोगों ने कहा कि राज्य में विकास और स्थिरता की आवश्यकता है और इसके लिए बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है। कुछ नागरिकों का मानना था कि पिछले वर्षों में कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता महसूस हुई है और अब वे एक स्थिर और विकासोन्मुखी शासन की उम्मीद कर रहे हैं। इसके साथ ही लोगों ने यह भी कहा कि चुनावी माहौल अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण दिखाई दे रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

    सभा में मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि वे नियमित रूप से सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक भाषणों को देखते और सुनते हैं, जिससे उन्हें नीतियों और योजनाओं को समझने में मदद मिलती है। उनके अनुसार इस तरह की जनसभाएं जनता और नेतृत्व के बीच संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

    बारुईपुर की यह जनसभा क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बनी रही और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने चुनावी माहौल को और अधिक सक्रिय बना दिया।

  • इंदौर में जनगणना की तैयारी तेज तीसरे चरण का प्रशिक्षण शुरू 2000 अधिकारी बने प्रक्रिया का हिस्सा

    इंदौर में जनगणना की तैयारी तेज तीसरे चरण का प्रशिक्षण शुरू 2000 अधिकारी बने प्रक्रिया का हिस्सा


    इंदौर । इंदौर में आगामी जनगणना को लेकर प्रशासन ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है और इसी कड़ी में प्रशिक्षण का तीसरा चरण शुरू कर दिया गया है। इस चरण में लगभग 2000 अधिकारी और कर्मचारी भाग ले रहे हैं जिन्हें जनगणना की पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझाने और लागू करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शहर में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम होलकर साइंस कॉलेज में आयोजित किया जा रहा है जहां मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रतिभागियों को विस्तृत और व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।

    इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जनगणना प्रक्रिया को अधिक सटीक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है ताकि एकत्रित की जाने वाली जानकारी पूरी तरह विश्वसनीय हो सके। बदलते समय के साथ अब जनगणना की प्रक्रिया भी डिजिटल होती जा रही है और इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार डिजिटल डेटा कलेक्शन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों को यह बताया जा रहा है कि किस प्रकार डिजिटल माध्यम से डेटा को सही तरीके से एकत्रित किया जाए और फॉर्म भरने की प्रक्रिया को सरल और त्रुटिरहित बनाया जाए।

    प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को अलग अलग मॉड्यूल के माध्यम से तैयार किया जा रहा है ताकि वे फील्ड में जाकर बिना किसी परेशानी के अपना कार्य कर सकें। उन्हें यह भी सिखाया जा रहा है कि जनगणना के दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है और किस प्रकार प्रत्येक परिवार से सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी मौके पर ही किया जा रहा है जिससे उन्हें किसी भी प्रकार की उलझन न रहे।

    प्रशासन का मानना है कि यदि प्रशिक्षण मजबूत होगा तो फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे और जनगणना की पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न होगी। यही कारण है कि इस बार प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और हर स्तर पर अधिकारियों को तैयार किया जा रहा है।

    जनगणना किसी भी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है क्योंकि इसके आधार पर ही भविष्य की नीतियां और योजनाएं तैयार की जाती हैं। ऐसे में डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बेहद जरूरी हो जाती है। इंदौर में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो आने वाले समय में जनगणना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

    प्रशासन को उम्मीद है कि इस तरह के व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सशक्त प्रशिक्षण के माध्यम से जनगणना प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी और शहर में इसे बिना किसी त्रुटि के पूरा किया जा सकेगा। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा बल्कि विकास योजनाओं को भी सही दिशा देने में मदद मिलेगी।

  • भारतीय सिनेमा के ये बड़े नाम नियम से करते हैं हनुमान चालीसा का पाठ, देखें पूरी लिस्ट..

    भारतीय सिनेमा के ये बड़े नाम नियम से करते हैं हनुमान चालीसा का पाठ, देखें पूरी लिस्ट..


    नई दिल्ली।भारतीय संस्कृति में हनुमान चालीसा की महिमा अपरंपार है और इसका प्रभाव केवल आम जनता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मनोरंजन और खेल जगत की बड़ी हस्तियां भी इसकी शक्ति की कायल हैं। हाल के दिनों में एक मशहूर क्रिकेटर का वीडियो खूब चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि वे अपनी सबसे महंगी कार में सफर करते समय भी हनुमान चालीसा सुनना पसंद करते हैं। इंटरनेट पर हनुमान चालीसा के विभिन्न संस्करणों को मिलने वाले अरबों व्यूज इस बात का प्रमाण हैं कि यह स्तुति लोगों के दिलों में कितनी गहराई तक बसी है। ताज्जुब की बात यह है कि केवल हिंदू कलाकार ही नहीं, बल्कि कई मुस्लिम सेलिब्रिटीज भी हनुमान चालीसा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा मानते हैं और इसे सुनने से मिलने वाली मानसिक शांति का जिक्र कर चुके हैं।

    अभिनय की दुनिया के दिग्गज अक्षय कुमार ने अपनी पसंद का खुलासा करते हुए बताया कि वे वर्कआउट के दौरान और सामान्य समय में भी हनुमान चालीसा और भजनों को सुनना पसंद करते हैं। उनके अनुसार, यह उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। वहीं, मशहूर गायक सोनू निगम का हनुमानजी के प्रति अटूट विश्वास किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने एक पुराने वाकये को याद करते हुए साझा किया था कि एक बड़े हादसे में वे बाल-बाल बचे थे, जिसका पूरा श्रेय वे संकटमोचन की कृपा को देते हैं। वे अपने हर बड़े मंच पर जाने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करते हैं। अपनी फिटनेस के लिए मशहूर शिल्पा शेट्टी भी साझा कर चुकी हैं कि ऊर्जा के स्तर को बढ़ाए रखने के लिए हनुमान चालीसा का श्रवण उनके लिए सबसे अच्छा विकल्प है।

    युवा पीढ़ी के लोकप्रिय अभिनेता विकी कौशल ने भी बताया है कि सुबह जल्दी शूटिंग पर जाते समय वे अपनी गाड़ी में हनुमान चालीसा चलाकर ही दिन की शुरुआत करते हैं। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन न केवल इसे सुनते हैं, बल्कि एक विशेष सामूहिक गायन में उन्होंने इस पावन स्तुति को अपनी आवाज भी दी है। खेल जगत के उभरते सितारे सूर्यकुमार यादव भी स्नान के पश्चात नियम से इसका श्रवण करते हैं। इस सूची में सबसे प्रभावशाली नाम उन मुस्लिम कलाकारों के हैं, जिन्होंने धर्म की दीवारों से ऊपर उठकर इस स्तुति को अपनाया है। इनमें दानिश अख्तर का नाम शामिल है, जिन्होंने एक पौराणिक भूमिका निभाने के दौरान हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू किया था और अब यह उनकी आदत में शुमार है। वहीं मशहूर अभिनेत्री नरगिस फाखरी ने भी स्पष्ट किया है कि जब उन्हें मानसिक तनाव या घबराहट महसूस होती है, तो वे शांति पाने के लिए अक्सर हनुमान चालीसा सुनती हैं।

    इन सितारों की आस्था यह सिद्ध करती है कि भक्ति और श्रद्धा की कोई जाति या सीमा नहीं होती। जब बात मन की शांति और संकट से उबरने की आती है, तो हनुमान चालीसा एक ऐसा सार्वभौमिक माध्यम बन जाता है जिससे हर कोई जुड़ाव महसूस करता है। चकाचौंध से भरी इस इंडस्ट्री में ये कलाकार अपनी जड़ों और आध्यात्मिकता को इस स्तुति के माध्यम से जीवित रखे हुए हैं। संकटमोचन की यह चालीसा आज के तनावपूर्ण दौर में इन सेलिब्रिटीज के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है, जो न केवल उन्हें आत्मिक शक्ति प्रदान करती है बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने का साहस भी देती है।

  • Yami Gautam ने किरदार के लिए पढ़ी कुरान, डायरेक्टर ने डेढ़ साल किया इस्लामिक लॉ का अध्ययन

    Yami Gautam ने किरदार के लिए पढ़ी कुरान, डायरेक्टर ने डेढ़ साल किया इस्लामिक लॉ का अध्ययन


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री Yami Gautam अपने दमदार और कंटेंट-ड्रिवन रोल्स के लिए जानी जाती हैं, और फिल्म Haq में उनके किरदार की तैयारी इसका बड़ा उदाहरण है। इस फिल्म में उन्होंने शाजिया बानो नाम की एक मुस्लिम महिला का किरदार निभाया, जो तीन तलाक जैसी सामाजिक समस्या से जूझती है। इस रोल को जीवंत बनाने के लिए यामी ने सिर्फ अभिनय नहीं किया, बल्कि किरदार की गहराई को समझने के लिए उन्होंने Quran तक पढ़ डाली।

    डायरेक्टर का खुलासा: इस्लामिक लॉ समझने में लगा डेढ़ साल

    फिल्म के डायरेक्टर Suparn Verma ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए पूरी टीम ने गंभीर रिसर्च की थी। उन्होंने कहा कि करीब डेढ़ साल तक इस्लामिक कानून और उससे जुड़े पहलुओं को समझने में समय लगाया गया, ताकि फिल्म में दिखाई गई कहानी तथ्यात्मक और संवेदनशील दोनों रहे। उनका मानना था कि अक्सर लोग अधूरी या गलत जानकारी के आधार पर राय बना लेते हैं, इसलिए इस फिल्म में सटीकता बेहद जरूरी थी।

    मेथड एक्टिंग से खुद को ढाला, किरदार में डूबीं यामी

    यामी ने खुद भी स्वीकार किया था कि इस फिल्म के लिए उन्होंने मेथड एक्टिंग का सहारा लिया। उन्होंने अपने किरदार को सिर्फ निभाया नहीं, बल्कि उसे जिया। शाजिया बानो के दर्द, संघर्ष और भावनाओं को समझने के लिए उन्होंने लंबा समय दिया। यही वजह रही कि फिल्म में उनका अभिनय दर्शकों के दिल को छू गया।

    फिल्म को रिलीज के बाद दर्शकों से पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला। यामी ने सोशल मीडिया पर भी लिखा था कि “वर्ड ऑफ माउथ की ताकत सबसे बड़ी होती है”, और दर्शकों का प्यार ही किसी भी कलाकार के लिए असली सफलता है।

    बॉक्स ऑफिस पर भी दिखा असर, OTT पर भी उपलब्ध

    Haq को Junglee Pictures ने प्रोड्यूस किया था और फिल्म ने करीब 30 करोड़ रुपए का कारोबार किया। आज भी यह फिल्म OTT प्लेटफॉर्म Netflix पर देखी जा सकती है, जहां इसे नई ऑडियंस भी सराह रही है।

    ग्लैमरस इमेज से हटकर मजबूत किरदारों की ओर बढ़ रहीं यामी

    पिछले कुछ समय से यामी गौतम ने अपने करियर में अलग तरह के रोल्स चुनने शुरू किए हैं। Article 370 में उनके अभिनय को भी काफी सराहना मिली थी। इस फिल्म को उनके पति Aditya Dhar ने प्रोड्यूस किया था।

    अपकमिंग प्रोजेक्ट और पर्सनल लाइफ भी चर्चा में

    अब यामी जल्द ही Aanand L Rai की फिल्म “नई नवेली” में नजर आने वाली हैं, जो एक हॉरर-कॉमेडी बताई जा रही है। यह उनके करियर की पहली हॉरर फिल्म होगी, जिसे लेकर फैंस काफी उत्साहित हैं। पर्सनल लाइफ की बात करें तो यामी और आदित्य साल 2024 में माता-पिता बने थे। दोनों अपने बच्चे को लाइमलाइट से दूर रखते हैं और फैमिली टाइम को प्राथमिकता देते हैं।

  • Rishi Kapoor का मजेदार किस्सा: लड़की के कपड़ों में पहुंचे जेंट्स वॉशरूम, फिर हुआ ये दिलचस्प वाकया

    Rishi Kapoor का मजेदार किस्सा: लड़की के कपड़ों में पहुंचे जेंट्स वॉशरूम, फिर हुआ ये दिलचस्प वाकया


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता Rishi Kapoor ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन फिल्म Rafoo Chakkar से जुड़ा एक किस्सा आज भी लोगों को हैरान कर देता है। इस फिल्म में उन्हें कहानी के अनुसार लड़की का गेटअप लेना पड़ा था, और इसी दौरान उनके साथ एक ऐसा मजेदार वाकया हुआ जिसे सुनकर कोई भी मुस्कुरा उठे।

    फीमेल आउटफिट में मजबूरी में जाना पड़ा जेंट्स वॉशरूम

    दरअसल, फिल्म Rafoo Chakkar की शूटिंग के दौरान ऋषि कपूर पूरी तरह लड़की के लुक में थे। इसी बीच उन्हें वॉशरूम जाने की जरूरत पड़ी। अब समस्या यह थी कि वे महिला शौचालय में जा नहीं सकते थे, इसलिए मजबूरी में उन्हें जेंट्स वॉशरूम जाना पड़ा। लेकिन जैसे ही वे अंदर पहुंचे, वहां मौजूद लोगों ने उन्हें असली लड़की समझ लिया। हालात ऐसे हो गए कि वॉशरूम में मौजूद लोग खुद शर्म से असहज हो गए और समझ नहीं पाए कि आखिर क्या हो रहा है।

    विदेशी लोग ढूंढते-ढूंढते पहुंच गए सेट तक

    इस मजेदार घटना का जिक्र खुद Rishi Kapoor ने अपनी किताब में किया था। उन्होंने बताया कि वॉशरूम में मौजूद कुछ विदेशी लोग तो उन्हें “लड़की” समझकर बाहर तक ढूंढने निकल पड़े। जब वे लोग सेट तक पहुंचे, तब जाकर उन्हें सच्चाई का पता चला कि जिसे वे ढूंढ रहे थे, वह कोई और नहीं बल्कि फिल्म के स्टार ऋषि कपूर ही हैं। यह सुनकर सभी हैरान रह गए।

    चाइल्ड आर्टिस्ट से सुपरस्टार बनने तक का सफर

    ऋषि कपूर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट Mera Naam Joker से की थी, जिसे उनके पिता Raj Kapoor ने निर्देशित किया था। इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिला। इसके बाद उन्होंने बतौर लीड एक्टर Bobby से डेब्यू किया, जिसमें उनके साथ Dimple Kapadia नजर आईं। यह फिल्म सुपरहिट रही और ऋषि कपूर रातों-रात स्टार बन गए।

    रोमांटिक हीरो से लेकर मजबूत किरदारों तक

    अपने करियर में उन्होंने Amar Akbar Anthony, Karz, Chandni, Damini और Kapoor & Sons जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया। फिल्मों के दौरान ही उन्हें अपनी को-स्टार Neetu Kapoor से प्यार हुआ और दोनों ने शादी कर ली।

    कैंसर से जंग और आखिरी सफर

    साल 2018 में ऋषि कपूर को कैंसर होने का पता चला, जिसके बाद उन्होंने New York में इलाज कराया। करीब दो साल तक बीमारी से लड़ने के बाद 2020 में उनका निधन हो गया। उनकी आखिरी फिल्म Sharmaji Namkeen थी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

  • MI vs CSK Highlights: Chennai Super Kings ने वानखेड़े में मचाया तहलका, मुंबई की टीम पूरी तरह फेल

    MI vs CSK Highlights: Chennai Super Kings ने वानखेड़े में मचाया तहलका, मुंबई की टीम पूरी तरह फेल


    नई दिल्ली । Chennai Super Kings ने गुरुवार को खेले गए मुकाबले में Mumbai Indians को 103 रनों से हराकर एकतरफा जीत दर्ज की। Wankhede Stadium में खेले गए इस मैच में चेन्नई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट पर 207 रन बनाए, जिसके जवाब में मुंबई की टीम 19 ओवर में महज 104 रन पर सिमट गई।

    संजू सैमसन का तूफानी शतक, मुंबई के गेंदबाज बेबस

    चेन्नई की जीत के हीरो रहे Sanju Samson, जिन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 54 गेंदों में नाबाद 101 रन ठोके। उनकी इस पारी में चौकों-छक्कों की बरसात देखने को मिली। सैमसन ने पारी की शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और मुंबई के गेंदबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया।
    उनकी इस पारी की बदौलत चेन्नई ने मजबूत स्कोर खड़ा किया। सैमसन अब टी20 में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में Rohit Sharma की बराबरी पर पहुंच गए हैं।

    शुरुआती झटकों के बाद भी चेन्नई ने बनाई बड़ी स्कोरिंग

    हालांकि चेन्नई को कप्तान Ruturaj Gaikwad के रूप में जल्दी झटका लगा, लेकिन सैमसन ने पारी को संभाला। बीच में Shivam Dube और Dewald Brevis ने भी अहम योगदान दिया, जिससे टीम 200 के पार पहुंच सकी। मुंबई के लिए Jasprit Bumrah, Mitchell Santner और अन्य गेंदबाजों को विकेट तो मिले, लेकिन रन रोकने में वे नाकाम रहे।

    मुंबई की पारी बिखरी, लगातार गिरते रहे विकेट

    208 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी Mumbai Indians की शुरुआत बेहद खराब रही। शुरुआती ओवरों में ही टीम ने कई अहम विकेट गंवा दिए। Quinton de Kock और अन्य बल्लेबाज सस्ते में पवेलियन लौट गए। कुछ देर के लिए Suryakumar Yadav और Tilak Varma ने पारी संभालने की कोशिश की, लेकिन साझेदारी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। इसके बाद Hardik Pandya और Sherfane Rutherford बिना खाता खोले आउट हो गए, जिससे मुंबई की हार तय हो गई।

    चेन्नई के गेंदबाजों का कमाल

    चेन्नई की ओर से Akeal Hosein ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट झटके। वहीं Noor Ahmad ने 2 विकेट लेकर मुंबई की कमर तोड़ दी। अन्य गेंदबाजों ने भी किफायती गेंदबाजी कर मुंबई को दबाव में बनाए रखा, जिसका नतीजा यह रहा कि पूरी टीम 104 रन पर ऑलआउट हो गई।

    श्रद्धांजलि के साथ उतरी चेन्नई टीम

    इस मुकाबले में चेन्नई की टीम काली पट्टी बांधकर मैदान पर उतरी। यह कदम खिलाड़ी Mukesh Choudhary की मां को श्रद्धांजलि देने के लिए उठाया गया, जिनका हाल ही में निधन हुआ था।

  • अंडरग्राउंड हुआ आतंकी सरगना? मसूद अजहर की हालत और ठिकाने पर उठे सवाल..

    अंडरग्राउंड हुआ आतंकी सरगना? मसूद अजहर की हालत और ठिकाने पर उठे सवाल..


    नई दिल्ली। पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed के सरगना Masood Azhar को लेकर इस समय कई तरह की अटकलें और चर्चाएं सामने आ रही हैं। लंबे समय से सार्वजनिक रूप से नजर न आने के कारण उसके स्वास्थ्य और वर्तमान स्थिति को लेकर संगठन के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं, जिससे असमंजस का माहौल बन गया है।

    सूत्रों के अनुसार, संगठन के भीतर यह चर्चा तेज है कि मसूद अजहर की तबीयत ठीक नहीं है और वह लंबे समय से सक्रिय रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि, कुछ आकलन यह भी बताते हैं कि उसकी स्थिति को लेकर जानबूझकर जानकारी छिपाई जा रही है, ताकि संगठन के भीतर मनोबल पर असर न पड़े बताया जा रहा है कि पहले जहां वह नियमित रूप से अपने कैडरों को संबोधित करता था और गतिविधियों में सक्रिय रहता था, वहीं अब उसकी सार्वजनिक उपस्थिति लगभग समाप्त हो चुकी है। इससे संगठन के अंदर भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो गई है।

    खुफिया आकलनों में यह भी संकेत मिलता है कि हाल की घटनाओं और आंतरिक दबावों के कारण उसका प्रभाव पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

    इसी बीच यह भी कहा जा रहा है कि संगठन अब संभावित रूप से नए नेतृत्व की तैयारी कर रहा है, क्योंकि मौजूदा हालात में निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे पुराने और नए सदस्यों के बीच अनिश्चितता और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।

    अब तक मसूद अजहर की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है, और पूरा मामला रहस्य बना हुआ है। इसी वजह से उसके भविष्य और संगठन में उसकी भूमिका को लेकर लगातार अटकलें जारी हैं।

  • भारत-पाक तनाव पर बयान: क्या दोबारा Balakot Airstrike जैसा कदम संभव? पूर्व अमेरिकी राजदूत ने जताई चिंता

    भारत-पाक तनाव पर बयान: क्या दोबारा Balakot Airstrike जैसा कदम संभव? पूर्व अमेरिकी राजदूत ने जताई चिंता


    नई दिल्ली । भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत Kenneth Juster ने वैश्विक कूटनीति को लेकर एक अहम चेतावनी दी है। Hudson Institute में आयोजित ‘द न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में बोलते हुए उन्होंने कहा कि United States और Pakistan के बीच बढ़ती नजदीकियां भविष्य में भारत के रणनीतिक फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं। खासतौर पर, सीमा पार आतंकवाद के मामलों में भारत की प्रतिक्रिया पहले जैसी आक्रामक नहीं रह सकती।

    पाकिस्तान-अमेरिका रिश्तों में नई गर्माहट, भारत के लिए संकेत

    जस्टर ने अपने संबोधन में कहा कि Donald Trump प्रशासन के दौरान पाकिस्तान ने वाशिंगटन के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करने में सफलता पाई है। हालात ऐसे बने हैं कि पाकिस्तान अब अमेरिका और Iran के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की स्थिति में भी आ गया है।

    यह बदलाव केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। जस्टर के मुताबिक, यह भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि इससे दक्षिण एशिया की शक्ति-संतुलन की दिशा बदल सकती है।

    आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘कड़ी प्रतिक्रिया’ पर सवाल

    पूर्व राजदूत ने खास तौर पर भारत की आतंकवाद विरोधी नीति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में कोई बड़ा आतंकी हमला होता है, तो भारत को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ सकता है कि क्या उसे अमेरिका का वही समर्थन मिलेगा, जैसा पहले मिला था।

    उन्होंने Pulwama attack और उसके जवाब में हुई Balakot airstrike को उदाहरण के तौर पर याद किया। जस्टर के मुताबिक, उस समय भारत को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला था, लेकिन बदलते समीकरणों में भविष्य की स्थिति अलग हो सकती है।

    रणनीतिक संतुलन की चुनौती: भारत के सामने नई कूटनीतिक परीक्षा

    जस्टर का मानना है कि अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों की मजबूती भारत के लिए एक ‘डिप्लोमैटिक टेस्ट’ बन सकती है। भारत को अब अपने फैसले केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लेने होंगे।

    हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि India और अमेरिका के संबंध अभी भी मजबूत हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।

    भारत-अमेरिका साझेदारी पर भरोसा, भविष्य को लेकर उम्मीद

    करीब 26 वर्षों के अनुभव साझा करते हुए जस्टर ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते समय के साथ और मजबूत हो सकते हैं। दोनों देशों को पारस्परिक हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए, ताकि रणनीतिक साझेदारी और गहरी हो सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि 21वीं सदी में भारत का उदय एक बड़ी भू-राजनीतिक कहानी है। भारत की जनसंख्या, विशाल बाजार, तकनीकी क्षमता और सैन्य शक्ति उसे वैश्विक मंच पर एक अहम खिलाड़ी बनाती है। ऐसे में अमेरिका के लिए भी यह जरूरी है कि वह इस उभरती ताकत के साथ सकारात्मक भूमिका निभाए।

  • भारत ‘सपेरों का देश’ नहीं, ग्लोबल टेक हब: Rashtriya Swayamsevak Sangh महासचिव का बयान

    भारत ‘सपेरों का देश’ नहीं, ग्लोबल टेक हब: Rashtriya Swayamsevak Sangh महासचिव का बयान


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह Dattatreya Hosabale ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान भारत और संघ को लेकर फैली वैश्विक धारणाओं पर खुलकर बात की। Hudson Institute में आयोजित ‘न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में उन्होंने कहा कि भारत को अब भी “सपेरों और गरीबी” के नजरिए से देखना एक बड़ी भूल है, जबकि आज देश एक तेजी से उभरता हुआ टेक्नोलॉजी हब और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

    ‘RSS को KKK बताना पूरी तरह गलत’, पश्चिमी नैरेटिव पर हमला

    होसबोले ने पश्चिमी देशों में RSS को लेकर फैली गलतफहमियों पर भी तीखा जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि संघ को अमेरिका के कुख्यात संगठन Ku Klux Klan से जोड़ना पूरी तरह निराधार और भ्रामक है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से एक खास नैरेटिव के तहत RSS को ‘हिंदू वर्चस्ववादी’, ‘अल्पसंख्यक विरोधी’ और ‘आधुनिकीकरण के खिलाफ’ संगठन के रूप में पेश किया गया है, जबकि इसके सकारात्मक कार्यों को नजरअंदाज किया जाता रहा है।

    भारत की छवि पर सवाल: ‘सिर्फ गरीबी नहीं, टेक्नोलॉजी में भी ताकत’

    होसबोले ने कहा कि पश्चिमी दुनिया में भारत की जो छवि बनाई गई है, वह अधूरी और पुरानी है। उन्होंने कहा कि आज का India स्टार्टअप, डिजिटल इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    उनके मुताबिक, भारत को सिर्फ भीड़, झुग्गियों और पारंपरिक छवियों तक सीमित करना वास्तविकता से दूर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक मंच पर भारत की नई पहचान को समझना जरूरी है।

    हिंदू दर्शन: ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सोच, वर्चस्व की नहीं

    हिंदू विचारधारा पर बोलते हुए होसबोले ने कहा कि इसकी मूल भावना पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की है। उन्होंने बताया कि हिंदू संस्कृति ‘एकत्व’ में विश्वास करती है, जहां हर जीव और प्रकृति के हर तत्व को सम्मान दिया जाता है।

    उन्होंने तर्क दिया कि जब मूल दर्शन ही समावेशी है, तो ‘वर्चस्ववाद’ का आरोप स्वतः ही गलत साबित होता है।

    83 हजार शाखाएं और सेवा कार्यों का विस्तार

    RSS के कामकाज पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि संगठन देशभर में रोजाना करीब 83 हजार शाखाएं चलाता है। इनका उद्देश्य समाज में सेवा भावना, अनुशासन और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है।

    उन्होंने यह भी कहा कि संघ शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम करता है।

    आधुनिकीकरण और संस्कृति साथ-साथ संभव

    होसबोले ने इस धारणा को भी खारिज किया कि आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे के विरोधी हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि Japan और China जैसे देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बनाए रखते हुए आधुनिकता में आगे बढ़े हैं।

    उनके अनुसार, भारत भी अपनी सांस्कृतिक पहचान को कायम रखते हुए तकनीकी और औद्योगिक प्रगति कर सकता है।

  • टीम इंडिया के 'लिटिल मास्टर' के करियर का वह अनोखा मोड़ जब पाकिस्तान के लिए की फील्डिंग

    टीम इंडिया के 'लिटिल मास्टर' के करियर का वह अनोखा मोड़ जब पाकिस्तान के लिए की फील्डिंग

    नई दिल्ली। क्रिकेट की दुनिया में सचिन तेंदुलकर एक ऐसा व्यक्तित्व हैं जिनके नाम के बिना इस खेल का इतिहास अधूरा है। उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ हुई थी, लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही योजना बना रखी थी। बहुत कम क्रिकेट प्रेमी इस बात से वाकिफ हैं कि भारत के लिए नीली जर्सी पहनने से लगभग दो साल पहले ही सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान की जर्सी पहनकर मैदान पर अपना जौहर दिखाया था।
    यह घटना साल 1987 की है जब मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारत और पाकिस्तान के बीच एक विशेष मुकाबला आयोजित किया गया था। इस मैच में सचिन एक खिलाड़ी के तौर पर नहीं बल्कि एक उत्साही किशोर के रूप में मौजूद थे जो खेल की बारीकियों को समझने की कोशिश कर रहे थे।

    मैच के दौरान एक ऐसा समय आया जब पाकिस्तान की टीम को फील्डरों की कमी का सामना करना पड़ा। लंच ब्रेक के दौरान जब पाकिस्तान के प्रमुख खिलाड़ी जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर मैदान से बाहर गए, तो कप्तान इमरान खान को सब्स्टीट्यूट फील्डर की जरूरत पड़ी। उस समय वहां मौजूद 15 साल के सचिन तेंदुलकर को मैदान पर जाने का मौका मिला।

    इमरान खान ने इस फुर्तीले लड़के को लॉन्ग-ऑन बाउंड्री पर तैनात किया। यह पल बेहद रोमांचक था क्योंकि जिस खिलाड़ी को भविष्य में भारतीय क्रिकेट का आधार स्तंभ बनना था, वह उस समय अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी देश की मदद कर रहा था। यह खेल भावना का एक ऐसा उदाहरण था जो आज के दौर में शायद ही कहीं देखने को मिले।

    मैदान पर अपनी तैनाती के दौरान सचिन ने अपनी पूरी ऊर्जा के साथ फील्डिंग की। इसी दौरान भारतीय कप्तान कपिल देव ने हवा में एक ऊंचा शॉट खेला जो सीधा सचिन की ओर जा रहा था। सचिन ने उस गेंद को लपकने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी और करीब 15 मीटर तक दौड़ लगाई, लेकिन गेंद उनके हाथों से कुछ ही दूरी पर गिर गई। बाद में सचिन ने अपनी आत्मकथा में इस बात का अफसोस जताया था कि अगर वह उस समय लॉन्ग-ऑन की जगह मिड-ऑन पर तैनात होते, तो वह निश्चित ही कपिल देव का कैच पकड़ लेते। यह छोटी सी घटना उस अटूट जुनून को दर्शाती है जो सचिन के मन में बचपन से ही खेल के प्रति था।

    सचिन तेंदुलकर का यह अनसुना किस्सा न केवल उनके प्रशंसकों को रोमांचित करता है, बल्कि यह भी बताता है कि महानता की शुरुआत अक्सर अप्रत्याशित रास्तों से होती है। पाकिस्तान की ओर से कुछ देर के लिए की गई वह फील्डिंग आज क्रिकेट जगत की सबसे चर्चित कहानियों में से एक है। 15 साल के उस बालक ने तब शायद ही सोचा होगा कि जिस टीम के लिए वह आज फील्डिंग कर रहा है, उसी टीम के सबसे खतरनाक गेंदबाजों के खिलाफ वह भविष्य में विश्व रिकॉर्ड की झड़ी लगा देगा। यह ऐतिहासिक पल आज भी ब्रेबोर्न स्टेडियम की यादों में जिंदा है और सचिन के महान सफर का एक अमूल्य हिस्सा है।