Author: bharati

  • Skin Care Tips: Aloe Vera की इस खास ट्रिक से पाएं ग्लोइंग और क्लियर स्किन

    Skin Care Tips: Aloe Vera की इस खास ट्रिक से पाएं ग्लोइंग और क्लियर स्किन


    नई दिल्ली। इस समय गर्मी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। जब गर्मी बढ़ने लगती है तो चेहरे का निखार भी जाने लगता है हमें ना चाहते हुए घर से बाहर निकालना पड़ता है बाहर धूल मिट्टी तेज धूप हमारे चेहरे को धीरे-धीरे खराब करती रहती है इसके कारण हमारे चेहरे में दाग धब्बे काफी ज्यादा होने लगते हैं। इसे ठीक करने के लिए हम कई बार महंगे प्रोडक्ट्स का उपयोग करते हैं लेकिन उतना फायदा नहीं हो पता है। आज हम आपको घर पर ही एलोवेरा से जुड़ी कुछ खास बातें बताएंगे जिनका उपयोग करके आप बेदाग चेहरा का सकते हैं।

    आपके चेहरे को चमकाएगा एलोवेरा
    आपको इस गर्मी में अपने चेहरे पर ध्यान देने की जरूरत है आप हमेशा सोने से पहले अपने चेहरे को साफ करके धोकर ही सोए यह काफी अच्छा रहेगा। सोने से पहले आप आप एलोवेरा जेल से हल्के हाथों से चेहरे की मसाज करें और फिर पानी से धो लें। यह आपकी स्किन के अंदर जमी गंदगी को बाहर निकाल देता है। इसके अलावा, अगर आप अपनी स्किन को कोमल बनाना चाहते हैं, तो एलोवेरा में गुलाब जल की कुछ बूंदें मिलाकर लगाएं। इसे रात भर लगाकर छोड़ने से सुबह चेहरा एकदम फ्रेश और खिला-खिला नजर आता है।

    दाग धब्बों से इस प्रकार मिलेगा छुटकारा
    अगर इस समय आपके चेहरे में काफी ज्यादा दाग धब्बे हो गए हैं तब आपके लिए एलोवेरा और हल्दी का फेस पैक सबसे बेस्ट है। यह पैक बैक्टीरिया को खत्म करता है और चेहरे की सूजन को भी कम करता है। इसके नियमित इस्तेमाल से चेहरे की महीन रेखाएं और झुर्रियां कम होने लगती हैं। आप एलोवेरा को स्क्रब की तरह भी इस्तेमाल कर सकती हैं, जिससे चेहरे की डेड स्किन साफ हो जाती है। और आपका चेहरा धीरे-धीरे काफी अच्छा होने लगता है दाग धब्बे काफी हद तक ठीक हो जाते हैं।

  • नई दिल्ली में दिल्ली एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में गर्मी का प्रभाव लगातार बढ़ता हुआ, तापमान 44 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान

    नई दिल्ली में दिल्ली एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में गर्मी का प्रभाव लगातार बढ़ता हुआ, तापमान 44 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान

    नई दिल्ली में उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है, जहां तापमान में लगातार वृद्धि के साथ भीषण गर्मी का असर तेज होता जा रहा है। दिल्ली एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में दिन के समय चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम के मौजूदा पैटर्न को देखते हुए आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे लोगों की दिनचर्या पर सीधा असर पड़ रहा है।
    नई दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में तापमान पहले ही सामान्य से काफी ऊपर पहुंच चुका है और लगातार बढ़ती गर्म हवाओं के कारण दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार वातावरण में नमी की कमी और शुष्क हवाओं के प्रभाव से लू जैसी स्थिति बन रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ रहे हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर दिन के समय आवाजाही में कमी देखी जा रही है, जो गर्मी की तीव्रता को दर्शाता है।
    उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी मौसम का यही रूप देखने को मिल रहा है, जहां लखनऊ, प्रयागराज और कानपुर जैसे क्षेत्रों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। दिन के समय बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर सामान्य से कम गतिविधि देखी जा रही है। गर्म हवाओं के साथ तेज धूप के कारण लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता महसूस हो रही है। मौसम के इस बदलते स्वरूप ने कृषि और दैनिक कार्यों पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव डालना शुरू कर दिया है।
    बिहार और झारखंड में भी गर्मी का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जहां कई जिलों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया जा रहा है। शाम के समय कुछ क्षेत्रों में आंशिक बादल दिखाई देने से थोड़ी राहत मिल रही है, लेकिन यह स्थिति अस्थायी साबित हो रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक गर्मी का यह दौर जारी रह सकता है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
    दूसरी ओर पहाड़ी राज्यों में मौसम में कुछ राहत देखने को मिल रही है, जहां हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही से तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा बना हुआ है, जिससे मैदानी क्षेत्रों की तुलना में स्थिति अलग दिखाई दे रही है। हालांकि यह बदलाव सीमित क्षेत्रों तक ही दिखाई दे रहा है।
    पंजाब और हरियाणा में भी मौसम में अस्थायी परिवर्तन देखा जा रहा है, जहां कुछ स्थानों पर धूल भरी हवाएं और हल्की बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं। इससे तापमान में थोड़ी कमी आई है, लेकिन गर्मी का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मौसम के इस उतार चढ़ाव के कारण लोगों को लगातार बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना पड़ रहा है।
    पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी हैं, जिससे वहां का मौसम अपेक्षाकृत संतुलित बना हुआ है। हालांकि भारी बारिश के कारण कुछ स्थानों पर जनजीवन प्रभावित हो रहा है, लेकिन तापमान नियंत्रण में रहने से गर्मी का असर कम महसूस किया जा रहा है। इस प्रकार देश के अलग अलग हिस्सों में मौसम का भिन्न स्वरूप देखने को मिल रहा है।
    मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर और मध्य भारत में आने वाले दिनों में सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक होगा। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए लोगों को दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचने की आवश्यकता है। शरीर में पानी की कमी को रोकने और हल्के कपड़ों का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है।
  • मध्यस्थता नाकाम, फिर भी ‘नोबेल’ की मांग-पाकिस्तान में उठा नया सियासी प्रस्ताव

    मध्यस्थता नाकाम, फिर भी ‘नोबेल’ की मांग-पाकिस्तान में उठा नया सियासी प्रस्ताव

    इस्लामाबाद। ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव और हालिया 40 दिन के संघर्ष के बीच जहां मध्यस्थता की कोशिशें ठोस नतीजे नहीं दे सकीं, वहीं पाकिस्तान में एक अलग ही सियासी पहल चर्चा में है। देश के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग उठी है।
    यह मांग मंगलवार को खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय विधानसभा में पेश एक प्रस्ताव के जरिए सामने आई। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन (PML-N) की विधायक फ़राह खान द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव में दोनों नेताओं की “कूटनीतिक कोशिशों” को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में अहम बताया गया है। “शांति प्रयासों” की सराहना प्रस्ताव में दावा किया गया है कि शहबाज़ शरीफ और आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान ने वैश्विक स्तर पर खुद को एक जिम्मेदार और शांति-समर्थक देश के रूप में पेश किया है। इसमें उनके “दूरदर्शी नेतृत्व, रणनीतिक समझ और लगातार कूटनीतिक प्रयासों” की खुलकर तारीफ की गई है। साथ ही यह भी कहा गया कि इन प्रयासों ने संभावित बड़े वैश्विक संकट को टालने और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबाव को कम करने में भूमिका निभाई। लेकिन पास होना मुश्किल हालांकि राजनीतिक जानकार इस प्रस्ताव के भविष्य को लेकर संशय में हैं।
    पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बहुमत के चलते इसके सदन में पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि प्रस्ताव पर चर्चा भी शायद ही हो पाए। पहले भी आ चुका है ऐसा प्रस्ताव गौरतलब है कि इससे पहले पंजाब प्रांत की विधानसभा 16 अप्रैल को इसी तरह का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर चुकी है। उसमें भी दोनों नेताओं को मध्य पूर्व में शांति प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की सिफारिश की गई थी। सवाल भी उठ रहे दिलचस्प बात यह है कि जिस मध्यस्थता को आधार बनाकर यह मांग उठ रही है, वही कोशिशें अब तक ठोस परिणाम नहीं दे पाई हैं। ऐसे में इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल भी उठ रहे हैं—क्या यह वास्तविक कूटनीतिक उपलब्धि है या सिर्फ सियासी संदेश देने की कोशिश? ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर जहां बहस जारी है, वहीं शहबाज़ शरीफ और आसिम मुनीर के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग ने इस मुद्दे को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया है।
  • दौलत की दौड़ में अडानी आगे: अंबानी को पीछे छोड़ बढ़ा वैश्विक रुतबा

    दौलत की दौड़ में अडानी आगे: अंबानी को पीछे छोड़ बढ़ा वैश्विक रुतबा

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    नई दिल्ली। दुनिया के अरबपतियों की ताजा रैंकिंग में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। गौतम अडानी अब संपत्ति के मामले में मुकेश अंबानी से आगे निकल गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार अडानी 18वें स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि अंबानी 20वें नंबर पर खिसक गए हैं। अडानी की दौलत में उछाल, अंबानी को झटका इस साल गौतम अडानी की संपत्ति में करीब 10.9 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है, जिससे उनकी कुल नेटवर्थ 95.4 अरब डॉलर हो गई। वहीं मुकेश अंबानी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। Reliance Industries के शेयरों में गिरावट के चलते उनकी संपत्ति 16.7 अरब डॉलर घटकर 91 अरब डॉलर रह गई है। 200 अरब डॉलर क्लब में कौन आगे दुनिया के टॉप अरबपतियों में अभी भी टेक दिग्गजों का दबदबा है, एलन मस्क करीब 654 अरब डॉलर के साथ शीर्ष परजेफ बेजोस और लैरी पेज समेत कई दिग्गज 200 अरब डॉलर क्लब में शामिलइस साल किस पर हुई ‘पैसों की बारिश’ 2026 में सबसे ज्यादा कमाई करने वालों में: माइकल डेल (36.6 अरब डॉलर की बढ़त)एलन मस्क (34.9 अरब डॉलर की बढ़त)जॉन तु (29.4 अरब डॉलर का इजाफा)किसे हुआ सबसे ज्यादा नुकसान इस साल सबसे ज्यादा दौलत गंवाने वालों में: बर्नार्ड अर्नॉल्ट (43.6 अरब डॉलर की गिरावट)स्टीव बाल्मर (19 अरब डॉलर नुकसान)मुकेश अंबानी (16.7 अरब डॉलर की कमी)इसके अलावा बिल गेट्स और वॉरेन बफेट जैसे दिग्गजों की संपत्ति में भी गिरावट दर्ज की गई है। गौतम अडानी ने तेजी से बढ़ती संपत्ति के दम पर न सिर्फ मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ा है, बल्कि वैश्विक अरबपतियों की सूची में भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यह बदलाव बाजार के उतार-चढ़ाव और कंपनियों के प्रदर्शन का सीधा असर दिखाता है।

  • 140 एकड़ जमीन का अधिग्रहण, 340 करोड़ मुआवजा: Rewa में एयरपोर्ट विस्तार से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    140 एकड़ जमीन का अधिग्रहण, 340 करोड़ मुआवजा: Rewa में एयरपोर्ट विस्तार से बढ़ेगी कनेक्टिविटी


    नई दिल्ली। रीवा में हवाई सुविधाओं को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आने वाले समय में यहां Airbus A320 जैसे 150–180 सीट क्षमता वाले बड़े विमान उतर सकेंगे। इसके लिए एयरपोर्ट के रनवे को लंबा करने और बड़े स्तर पर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

     रनवे होगा 2300 मीटर लंबा
    फिलहाल रीवा एयरपोर्ट का रनवे करीब 1800 मीटर लंबा है, जिस पर केवल ATR 72 जैसे छोटे विमान ही उतर पाते हैं।
    अब इसे बढ़ाकर 2300 मीटर किया जाएगा, जिससे बड़े जेट विमानों की लैंडिंग संभव हो जाएगी।

     140 एकड़ जमीन का अधिग्रहण, 340 करोड़ मुआवजा
    एयरपोर्ट विस्तार के लिए करीब 140 एकड़ अतिरिक्त जमीन अधिग्रहित की जाएगी।
    इस परियोजना से लगभग 830 किसान प्रभावित होंगे, जिन्हें करीब 340 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। प्रशासन ने जमीन का सीमांकन कर रिपोर्ट भोपाल भेज दी है और प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

     मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु से सीधी कनेक्टिविटी
    रनवे विस्तार के बाद रीवा से देश के बड़े शहरों—मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु—के लिए सीधी उड़ानें शुरू होने की संभावना है। इससे पूरे विंध्य क्षेत्र को बड़ा फायदा मिलेगा और यात्रा आसान हो जाएगी।

     5 महीने में 20 हजार यात्रियों ने भरी उड़ान
    रीवा एयरपोर्ट पर नियमित उड़ानें शुरू होने के बाद महज 5 महीनों में करीब 20,000 यात्रियों ने हवाई सफर किया। इससे यह साफ हो गया है कि यहां एयर ट्रैफिक की अच्छी संभावनाएं हैं, जिसे देखते हुए सरकार ने विस्तार को मंजूरी दी है।

     व्यापार, पर्यटन और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
    एयरपोर्ट के अपग्रेड होने से न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि व्यापार, निवेश और पर्यटन को भी नया बूस्ट मिलेगा। रीवा को “हवाई हब” के रूप में विकसित करने की योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

  • पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी: देश ने याद किए पीड़ित, पीएम मोदी ने दिया सख्त संदेश

    पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी: देश ने याद किए पीड़ित, पीएम मोदी ने दिया सख्त संदेश


    नई दिल्ली ।  पहलगाम आतंकी हमले को एक वर्ष पूरा होने पर देशभर में पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दर्दनाक घटना ने जम्मू कश्मीर के शांत माने जाने वाले पर्यटन स्थल को अचानक हिंसा और दहशत के केंद्र में बदल दिया था। बरसी के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पीड़ितों को याद करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की और आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत रुख को दोहराया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह घटना केवल एक आतंकी हमला नहीं थी, बल्कि देश की आत्मा पर लगा ऐसा घाव है जिसे समय भी आसानी से भर नहीं सकता।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के सामने झुकने वाला नहीं है और देश की एकता तथा संकल्प शक्ति ऐसे समय में और मजबूत होती है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा देश इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा है। यह संदेश ऐसे समय आया जब देश इस घटना की पहली बरसी पर उन सभी लोगों को याद कर रहा था जिन्होंने अपनी जान गंवाई थी।

    यह हमला 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम क्षेत्र में हुआ था, जब बड़ी संख्या में पर्यटक वहां मौजूद थे। अचानक हुए इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें अधिकतर पर्यटक शामिल थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और घाटी में पर्यटन गतिविधियों पर भी इसका गहरा असर पड़ा था। उस समय की भयावह स्थिति और उसके बाद का माहौल लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बना रहा।

    सुरक्षा एजेंसियों की जांच में इस हमले के पीछे एक आतंकी संगठन से जुड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आई थी, जो सीमा पार स्थित संरचनाओं से जुड़ा बताया गया। जांच में यह भी संकेत मिले कि यह हमला पूर्व नियोजित था और इसका उद्देश्य क्षेत्र में भय और अस्थिरता पैदा करना था। इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए गए।

    हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने एक विशेष अभियान चलाया था, जिसके तहत सीमा पार स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस कार्रवाई को रणनीतिक और सीमित उद्देश्य वाला बताया गया था, जिसका लक्ष्य केवल आतंकी ढांचे को कमजोर करना था। इस कदम ने यह संदेश दिया कि देश अब किसी भी आतंकी घटना का जवाब अधिक संगठित और निर्णायक तरीके से देगा।

    पहलगाम की इस घटना की बरसी पर देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने मौन रखकर पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। यह दिन केवल एक स्मरण नहीं रहा, बल्कि उस संकल्प का प्रतीक भी बना जिसमें आतंकवाद के खिलाफ निरंतर संघर्ष और सतर्कता की आवश्यकता को दोहराया गया। स्थानीय लोगों के लिए यह दिन आज भी उस भयावह अनुभव की याद दिलाता है जिसने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया था।

    यह बरसी इस बात की भी याद दिलाती है कि सुरक्षा और शांति केवल एक घटना के बाद की प्रतिक्रिया नहीं हो सकती, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें समाज, सरकार और सुरक्षा व्यवस्था सभी की साझा भूमिका होती है। पहलगाम की घटना ने देश को यह संदेश दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लंबी है और इसमें एकजुटता सबसे बड़ी ताकत है।

  • सीजफायर का ‘टाइम’ बना पहेली: अमेरिका-ईरान के बीच खत्म कब होगा युद्धविराम?

    सीजफायर का ‘टाइम’ बना पहेली: अमेरिका-ईरान के बीच खत्म कब होगा युद्धविराम?

    वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्धविराम को लेकर अब समय-सीमा ही विवाद का कारण बन गई है। अलग-अलग बयानों की वजह से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि आखिर सीजफायर कब और किस समय समाप्त होगा। समय को लेकर क्यों बना भ्रम?
    पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के मुताबिक, युद्धविराम 22 अप्रैल सुबह 4:50 बजे (पाकिस्तानी समय) खत्म होना तय है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप का बयान इससे अलग तस्वीर पेश करता है। उन्होंने संकेत दिया है कि सीजफायर वॉशिंगटन समय के अनुसार शाम तक जारी रह सकता है।  यानी दोनों पक्ष अलग-अलग टाइम ज़ोन के हिसाब से सीजफायर की समाप्ति को देख रहे हैं—यही इस भ्रम की सबसे बड़ी वजह है।
    ईरान की चुप्पी से बढ़ी अनिश्चितता इस पूरे मामले में ईरान की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान नहीं आया है। क्या तेहरान तय समय पर सीजफायर खत्म मानेगा?या बातचीत के लिए इसे बढ़ाने को तैयार है?इन सवालों पर सस्पेंस बना हुआ है, जिससे कूटनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है। ट्रंप की सख्त चेतावनी डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर तय अवधि तक कोई समझौता नहीं होता, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।
    उन्होंने कहा कि ईरान के पास समझौते का मौका है, लेकिन वे सीजफायर बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। बातचीत भी अधर में 11–12 अप्रैल को हुई पहली दौर की वार्ता बेनतीजा रहीदूसरे दौर को लेकर अब भी स्थिति साफ नहींपाकिस्तान ने भी कहा है कि उसे ईरान की भागीदारी पर औपचारिक जवाब का इंतजार हैघड़ी चल रही है, लेकिन समय तय नहीं इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी समस्या यही है कि सीजफायर का “एक तय समय” सभी पक्षों के बीच सहमति से निर्धारित नहीं है। जब तक ईरान अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तब तक यह दुविधा बनी रह सकती है—और इसके साथ ही युद्ध फिर भड़कने का खतरा भी।

  • बुधवार मंत्र: भगवान गणेश के इन मंत्रों के जाप से आएगी बरकत, बनकर रहेंगे काम

    बुधवार मंत्र: भगवान गणेश के इन मंत्रों के जाप से आएगी बरकत, बनकर रहेंगे काम


    नई दिल्ली। गणेश भगवान की पूजा अर्चना करने के लिए बुधवार का दिन बहुत ही खास माना गया है। आज के दिन जातक गणेश भगवान को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय करते हैं उनका व्रत रखते हैं उनके मंत्रों का उच्चारण करते हैं। ताकि उनकी कृपा उनके घर परिवार पर बनी रहे। कहां जाता है कि बुधवार के दिन अगर आप अपने घर पर ही परिवार के साथ गणेश भगवान की आरती करते हैं उनको प्रसाद चढ़ाते हैं। तो आपके घर में सकारात्मक बनी रहती है और हर समस्या धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।

    पूजा विधि
    भगवान की पूजा करने के लिए आप सुबह प्रातः काल उठे और स्नान करके भगवान की मंदिर के पास एक चौकी रखें। उसे पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान की मूर्ति की स्थापना करें। अगर आपके घर के मंदिर में भगवान पहले से ही है तो आप वहीं पर उनकी पूजा कर सकते हैं। पूजा करने के लिए आप अच्छा हल्दी दुर्वा का उपयोग करें और भगवान को भोग में बेसन अथवा मोदक के लड्डू चढ़ाएं।

    इन मंत्रों का करें जाप
    ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा’

    ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरु गणेश।

    ग्लौम गणपति, ऋद्धि पति, सिद्धि पति. करो दूर क्लेश ।।

    ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गण्पत्ये वर वरदे नमः

    ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डा धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात”

    गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बकः ।

    नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।

    धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायकः।

    भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन आपको उनके अच्छे से पूजा अर्चना करनी चाहिए। साथ ही उन्हें मोदक का लड्डू आवश्यक चढ़ाना चाहिए। इसके अलावा आप उन्हें दूर्वा और सुपाड़ी भी चढ़ाएं। इससे प्रश्न होकर भगवान आपके परिवार में सुख समृद्धि बनाए रखते हैं और आपको भी मनचाहा वरदान देते हैं। इसके अलावा आपकी ऊपर आ रही सारी विघ्न को भी हर लेते हैं।

  • 16 साल पुराने मालेगांव ब्लास्ट मामले में राहत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुना अहम फैसला

    16 साल पुराने मालेगांव ब्लास्ट मामले में राहत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुना अहम फैसला


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मालेगांव (Malegaon Blast) में साल 2006 में हुए बम धमाकों के मामले में बड़ा फैसला सामने आया है जहां Bombay High Court ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है यह फैसला करीब सत्रह साल बाद आया है जिससे यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और लोगों की नजरें इस पर टिक गई हैं।

    17 साल पुराने Malegaon Blast केस में सबूतों की कमी, कोर्ट ने आरोपियों को दी राहत—अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में असफल रहा ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी किया गया इस मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली और कई बार जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे

    यह घटना आठ सितंबर 2006 को हुई थी जब मालेगांव में सिलसिलेवार धमाके हुए थे इन धमाकों में करीब पैंतालीस लोगों की मौत हो गई थी जबकि सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे घटना के बाद पुलिस और अन्य एजेंसियों ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया और बाद में आरोपपत्र दाखिल किया गया हालांकि अदालत में पेश किए गए सबूत आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माने गए

    2006 धमाके में 45 लोगों की गई थी जान, जांच पर उठे सवाल—फैसले के बाद एक बार फिर जांच प्रक्रिया पर बहस तेज हो गई है कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इतने लंबे समय के बाद भी पुख्ता सबूत नहीं जुटा पाना गंभीर सवाल खड़े करता है वहीं पीड़ित परिवारों के लिए यह फैसला निराशाजनक माना जा रहा है क्योंकि उन्हें न्याय की उम्मीद थी

    इस निर्णय ने एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया और जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी पर ध्यान केंद्रित कर दिया है अब देखना होगा कि आगे इस मामले में कोई नई कानूनी पहल होती है या नहीं फिलहाल इस फैसले के साथ ही यह पुराना मामला एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है और देश भर में इस पर चर्चा जारी है

  • अन्नदाता बनेगा 'ऊर्जादाता': नितिन गडकरी ने बताया क्यों जरूरी है 100% एथनॉल, अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट।

    अन्नदाता बनेगा 'ऊर्जादाता': नितिन गडकरी ने बताया क्यों जरूरी है 100% एथनॉल, अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट।


    नई दिल्ली। भारत के ऊर्जा भविष्य और परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया है। एक हालिया कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि देश को निकट भविष्य में सौ प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, वैश्विक स्तर पर विशेषकर पश्चिम एशिया में जारी तेल आपूर्ति की अनिश्चितताओं को देखते हुए भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना समय की मांग है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसे कम करना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोणों से आवश्यक है।

    एथनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है जिसे गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। जब इसे पेट्रोल के साथ मिलाया जाता है, तो इसे ‘फ्लेक्स फ्यूल’ कहा जाता है। गडकरी ने जोर देकर कहा कि फ्लेक्स फ्यूल तकनीक न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने ब्राजील जैसे देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां शत-प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग का सफल प्रयोग पहले से ही किया जा रहा है। भारत में भी इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए बीस प्रतिशत एथनॉल मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद अब और बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ने का समय आ गया है।

    आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग सतासी प्रतिशत आयात करता है, जिस पर सालाना करीब बाईस लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। भारी मात्रा में जीवाश्म ईंधन का आयात न केवल अर्थव्यवस्था पर बोझ डालता है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण में भी बड़ी हिस्सेदारी रखता है। केंद्रीय मंत्री ने ऑटोमोबाइल कंपनियों से आग्रह किया कि वे लागत के बजाय गुणवत्ता और नई तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करें ताकि भविष्य के वाहनों को पूरी तरह से वैकल्पिक ईंधन पर चलाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि पेट्रोल-डीजल वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए तकनीकी विकल्प तैयार करना सबसे प्रभावी तरीका होगा।

    भविष्य के ईंधन के रूप में गडकरी ने ग्रीन हाइड्रोजन के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन पंपों के संचालन की लागत को कम करना और परिवहन की चुनौतियों का समाधान करना प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि हाइड्रोजन की उत्पादन लागत को कम कर एक डॉलर प्रति किलोग्राम के स्तर पर लाया जा सके, तो भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी करेगा बल्कि ऊर्जा के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी उभर सकता है। जैव ईंधन और हरित ऊर्जा के इन समन्वित प्रयासों से देश को प्रदूषण मुक्त बनाने और विदेशी मुद्रा भंडार की बचत करने में बड़ी सफलता मिल सकती है।