Author: bharati

  • ‘धुरंधर’ के बाद नई तैयारी में Aditya Dhar, एक और फिल्म पर काम शुरू

    ‘धुरंधर’ के बाद नई तैयारी में Aditya Dhar, एक और फिल्म पर काम शुरू


    नई दिल्ली। बॉलीवुड डायरेक्टर Aditya Dhar अपनी हिट फ्रेंचाइजी “धुरंधर” को लेकर एक नया और अनोखा प्रयोग करने जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, “धुरंधर” और “धुरंधर द रिवेंज” की सफलता के बाद अब फिल्म की मेकिंग यानी बिहाइंड द सीन्स (BTS) पर आधारित एक अलग फिल्म बनाने की तैयारी चल रही है, जिसे थिएटर्स में रिलीज किया जा सकता है।
    क्या होगा इस खास फिल्म में?
    इस फिल्म में दर्शकों को शूटिंग के दौरान के अनदेखे पल, सेट पर हुई तैयारियां, मेकिंग प्रोसेस और कलाकारों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू देखने को मिलेंगे। खास बात यह है कि Ranveer Singh और Arjun Rampal जैसे बड़े सितारों के इंटरव्यू भी इसी फिल्म में पहली बार सामने आएंगे।
    फुल-लेंथ फीचर फिल्म की तरह रिलीज
    मेकर्स इस BTS कंटेंट को सिर्फ डॉक्यूमेंट्री तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि इसे एक पूरी फीचर फिल्म के रूप में पेश करने की योजना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फिल्म 2026 के आखिर तक सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है और बाद में इसे OTT प्लेटफॉर्म पर भी लाया जाएगा।
    पहली बार होगा ऐसा प्रयोग
    भारतीय सिनेमा में यह एक अनोखा प्रयोग माना जा रहा है। अब तक फिल्मों के BTS वीडियो सोशल मीडिया या प्रमोशन के तौर पर ही रिलीज होते थे, लेकिन पहली बार किसी फिल्म की पूरी मेकिंग को बड़े पर्दे पर अलग फिल्म की तरह दिखाने की योजना है।
    रिलीज से पहले सख्त गोपनीयता
    फिल्म की टीम इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी सतर्क है। मेकर्स नहीं चाहते कि कोई भी BTS फुटेज रिलीज से पहले लीक हो, इसलिए कलाकार भी फिलहाल मीडिया इंटरव्यू से दूरी बनाए हुए हैं। उनका उद्देश्य है कि दर्शक पहली बार पूरा अनुभव थिएटर में ही लें।
    फैंस के लिए खास तोहफा
    ‘धुरंधर’ के फैंस के लिए यह फिल्म एक अलग ही अनुभव लेकर आएगी, जहां वे अपने पसंदीदा सितारों और फिल्म के पीछे की मेहनत को करीब से देख सकेंगे।

  • सबरीमाला केस में SC को अहम टिप्पणी, पूछा- भक्त के छूने से अपवित्र कैसे हो सकते हैं देवता या मूर्ति,,,

    सबरीमाला केस में SC को अहम टिप्पणी, पूछा- भक्त के छूने से अपवित्र कैसे हो सकते हैं देवता या मूर्ति,,,


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ ने मंगलवार को सबरीमाला मामले (Sabarimala case) में सुनवाई की। पीठ ने सवाल किया कि कोई भक्त जो मंदिर में मौजूदा देवता को अपना मूल रचियता मानता है, उसके स्पर्श मात्र से मूर्ति या देवता अपवित्र कैसे हो सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय पीठ ने ये सवाल सबरीमाला मंदिर के मुख्य तांत्री (पुजारी) की दलीलों को सुनने के बाद किया।


    पुजारी की दलील

    पुजारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरि ने छठे दिन की बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि अनुच्छेद 25 के तहत किसी श्रद्धालु का पूजा स्थल में प्रवेश करने का अधिकार, उस देवता की विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए। कहा कि जब कोई भक्त पूजा के लिए मंदिर जाता है, तो वह देवता की विशेषताओं के उलट नहीं हो सकता। अदालत ने सवाल किया कि मंदिर में यदि किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश या किसी अन्य स्थिति के आधार पर मूर्ति स्पर्श से रोका जाए, तो क्या संविधान मूकदर्शक बना रहेगा?

    पीठ सबरीमाला सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई कर रही है। सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी ने ही 2018 के उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार अर्जी दी है, जिसमें महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई।


    ‘भक्त के लिए संविधान को ही आगे आना होगा’

    सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए नौ जजों की संविधान पीठ में शामिल जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह ने मुख्य पुजारी से पूछा कि जब किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश के आधार पर देवता को छूने से रोका जाए, तो क्या तब संविधान दखल दे सकता है? उन्होंने पूछा कि श्रद्धालु की सहायता के लिए कौन आगे आएगा, जिसे देवी-देवता को स्पर्श करने की अनुमति नहीं है। इस स्थिति में अदालत की क्या भूमिका होगी? इसके बार उन्होंने स्वयं इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि यह कार्य संविधान को ही करना होगा।


    रीति-रिवाज की प्रकृति धर्म का एक अभिन्न अंग

    सुनवाई के दौरान सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने पीठ से कहा कि किसी भी मंदिर में होने वाले समारोह और रीति-रिवाज की प्रकृति धर्म का एक अभिन्न अंग है। इसलिए यह एक धार्मिक प्रथा है। ऐसी प्रथा को जारी रखना, जो कि एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, पूजा के अधिकार का ही हिस्सा होगा। अधिवक्ता ने कहा कि अनुच्छेद- 25 के तहत पूजा का अधिकार केवल वही व्यक्ति मांग सकता है, जिसका उस देवता में विश्वास हो, जिसमें देवता की विशिष्ट विशेषताएं भी शामिल हों।

    उन्होंने कहा कोई भी व्यक्ति जो मंदिर की मूर्ति में विश्वास रखता है और देवता को अपना ईश्वर मानता है, वह मंदिर की मूल विशेषताओं के विपरीत कोई कार्य नहीं करेगा, क्योंकि ऐसी प्रथा को उसके धर्म की प्रथा का हिस्सा नहीं माना जा सकता। अधिवक्ता गिरी ने कहा कि अनुच्छेद 25(1) के तहत मेरा अधिकार जहां तक पूजा स्थल में प्रवेश का अधिकार शामिल है, उसे मंदिरों द्वारा की जाने वाली प्रथाओं- देवता की विशेषताओं के अनुरूप ही होना होगा।


    ‘रचयिता और उसकी रचना के बीच फर्क नहीं’

    अधिवक्ता गिरि के तर्क पर जस्टिस अमनुल्लाह ने सवाल किया कि जब मैं किसी मंदिर में जाता हूं, तो मेरा मूल विश्वास यह होता है कि वह भगवान हैं, वह मेरे रचयिता हैं। उन्होंने ही मुझे बनाया है। है ना? मैं वहां सौ फीसदी विश्वास के साथ जाता हूं और पूरी तरह समर्पित होता हूं। मेरे दिल में जरा भी अशुद्धि नहीं होती और वहां, मुझसे कहा जाता है कि विभिन्न वजहों से मुझे हमेशा के लिए देवता को छूने की इजाजत नहीं है।


    धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा से बाहर?

    संविधान पीठ ने कहा कि यह बात स्वीकार करना मुश्किल है कि धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं। पीठ ने सवाल किया कि सामाजिक सुधार के नाम पर ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाने वाले कानूनों की जांच और कौन करेगा? सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ‘हम धार्मिक मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमाओं से अवगत है और इसके लिए विस्तृत दलीलों की कोई आवश्यकता नहीं है।

  • ‘राजा शिवाजी’ में दमदार स्टारकास्ट: Riteish Deshmukh ने लिए 15 करोड़, बाकी सितारों की फीस भी चर्चा में

    ‘राजा शिवाजी’ में दमदार स्टारकास्ट: Riteish Deshmukh ने लिए 15 करोड़, बाकी सितारों की फीस भी चर्चा में


    नई दिल्ली ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म “राजा शिवाजी” इस साल की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल है। फिल्म में Riteish Deshmukh छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमिका निभा रहे हैं और साथ ही निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। 1 मई 2026 को रिलीज होने जा रही इस फिल्म की स्टारकास्ट और उनकी फीस को लेकर भी खूब चर्चा है।

    रितेश देशमुख
    फिल्म के लीड एक्टर और डायरेक्टर Riteish Deshmukh ने इस प्रोजेक्ट के लिए कथित तौर पर 15 से 18 करोड़ रुपये की फीस ली है। यह उनके करियर का एक बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

    अभिषेक बच्चन
    Abhishek Bachchan इस फिल्म में संभाजी शाहजी भोसले के किरदार में नजर आएंगे। यह उनकी मराठी सिनेमा में डेब्यू फिल्म भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने 6 से 8 करोड़ रुपये फीस ली है।

    संजय दत्त
    Sanjay Dutt फिल्म में अफजल खान की भूमिका निभा रहे हैं। उनके इस दमदार किरदार के लिए उन्हें कथित तौर पर 8 से 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

    महेश मांजरेकर
    Mahesh Manjrekar ‘राजा शिवाजी’ में लखुजी जाधव का किरदार निभा रहे हैं। उन्हें इस भूमिका के लिए करीब 2 से 3 करोड़ रुपये मिले हैं।

    फरदीन खान
    Fardeen Khan फिल्म में मुगल बादशाह शाहजहां के रोल में नजर आएंगे। उनकी फीस 2 से 3 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    भाग्यश्री
    Bhagyashree इस फिल्म में जीजाबाई (छत्रपति शिवाजी महाराज की मां) की अहम भूमिका निभा रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें 1 से 2 करोड़ रुपये फीस मिली है।

    बड़ी स्टारकास्ट, बड़ा बजट
    फिल्म की स्टारकास्ट और उनके किरदारों को देखते हुए साफ है कि “राजा शिवाजी” बड़े बजट और भव्य स्तर पर तैयार की गई है। ऐतिहासिक किरदारों और दमदार कलाकारों के साथ यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ा असर डाल सकती है।

  • ब्राह्मण लड़का कैसे बना ‘नबी अहमद’? Ravindra Kaushik की हैरान कर देने वाली कहानी

    ब्राह्मण लड़का कैसे बना ‘नबी अहमद’? Ravindra Kaushik की हैरान कर देने वाली कहानी


    नई दिल्ली। हाल ही में फिल्म “धुरंधर 2” के रिलीज के बाद भारत के चर्चित जासूस रविंद्र कौशिक एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। फिल्म में दिखाए गए किरदार की तुलना उनसे की जा रही है, लेकिन उनके परिवार का कहना है कि असल जिंदगी में जासूसी की दुनिया फिल्मी कहानी से बिल्कुल अलग होती है।
    ब्राह्मण परिवार का बेटा बना पाकिस्तान में ‘नबी अहमद’
    राजस्थान के गंगानगर में जन्मे रविंद्र कौशिक एक साधारण ब्राह्मण परिवार से थे। उनकी प्रतिभा और अभिनय कौशल को देखते हुए उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसी द्वारा चुना गया। ट्रेनिंग के बाद उन्हें पाकिस्तान भेजा गया, जहां उन्होंने अपनी पहचान बदलकर ‘नबी अहमद शाकिर’ के नाम से जिंदगी शुरू की और वर्षों तक भारत के लिए अहम जानकारियां जुटाईं।
    भारत के पहले ‘रेजिडेंट एजेंट’
    रविंद्र कौशिक को भारत का पहला ‘रेजिडेंट एजेंट’ माना जाता है। यानी वे केवल जानकारी जुटाने के लिए नहीं गए थे, बल्कि वहां स्थायी रूप से रहकर एक पूरी नई पहचान बनाई—शादी की, परिवार बसाया और समाज में घुलमिल गए। यह उस समय भारत की खुफिया रणनीति का पहला बड़ा प्रयोग था।
    फिल्मी जासूसों से क्यों अलग थे?
    परिवार के अनुसार, फिल्मों में दिखाया जाता है कि जासूस खुलकर लड़ाई करते हैं या हीरो की तरह नजर आते हैं, जबकि असल में जासूस का काम गुप्त रहना होता है। वे कभी ध्यान आकर्षित नहीं करते। दिलचस्प बात यह भी है कि जहां आमतौर पर जासूसों का व्यक्तित्व साधारण रखा जाता है ताकि वे भीड़ में खो जाएं, वहीं रविंद्र कौशिक दिखने में आकर्षक और व्यक्तित्ववान थे—जो इस पेशे के लिए असामान्य माना जाता है।
    परिवार से भी छिपाई सच्चाई
    उनकी बहन के मुताबिक, परिवार को कभी यह नहीं बताया गया कि वे जासूसी कर रहे हैं। घर पर अधिकारी आते-जाते थे, लेकिन उनकी असली पहचान का किसी को अंदाजा नहीं था। रविंद्र कौशिक ने अपनी भूमिका को आखिरी सांस तक निभाया और परिवार को सिर्फ यही बताया कि वे एक अच्छी नौकरी कर रहे हैं।
    पाकिस्तान में गिरफ्तारी और दर्दनाक अंत
    एक अन्य एजेंट की गलती से उनकी पहचान उजागर हो गई और उन्हें पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया। वहां उन्हें वर्षों तक जेल में कठोर यातनाएं दी गईं। गंभीर बीमारियों और खराब हालात के चलते उनकी मौत हो गई।
    परिवार को उनकी मौत की जानकारी भी सीधे भारत से नहीं, बल्कि पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठन के जरिए ईमेल से मिली जिसमें बताया गया कि ‘नबी अहमद शाकिर उर्फ रविंद्र कौशिक अब इस दुनिया में नहीं रहे।’
    सरकारी मदद पर उठे सवाल
    परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी और मौत के बाद उन्हें न तो पर्याप्त सहायता मिली और न ही कोई आधिकारिक सांत्वना। उनकी शहादत को लेकर भी लंबे समय तक स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
    देशभक्ति और अभिनय का अनोखा संगम
    रविंद्र कौशिक एक अच्छे कलाकार भी थे और देशभक्ति की भावना से प्रेरित थे। उन्हें अभिनय के जरिए देश सेवा का मौका मिला और उन्होंने इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाया यहां तक कि अपनी असली पहचान तक त्याग दी।
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  • मरने का सीन करते-करते सच में दुनिया छोड़ गया यह एक्टर, सेट पर छा गया सन्नाटा

    मरने का सीन करते-करते सच में दुनिया छोड़ गया यह एक्टर, सेट पर छा गया सन्नाटा



    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर के लोकप्रिय कॉमेडी एक्टर गोप ने अपनी अदाकारी से लाखों दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी, लेकिन उनकी जिंदगी का अंत इतना अप्रत्याशित था कि फिल्म इंडस्ट्री भी हैरान रह गई।

    कॉमेडी से बने दर्शकों के चहेते

    गोप अपने समय के उन चुनिंदा कलाकारों में से थे जिनकी स्क्रीन एंट्री ही लोगों को हंसा देती थी। उनकी कॉमिक टाइमिंग और अनोखे किरदार उन्हें खास बनाते थे। फिल्म “पतंगा” और अन्य कई फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाईं। मशहूर गाना “मेरे पिया गए रंगून” भी उनकी फिल्म का हिस्सा रहा, जिसने उन्हें और लोकप्रिय बना दिया।

    फिल्मों में अनोखे किरदारों से छा गए

    गोप के किरदारों के नाम भी उतने ही मजेदार और यादगार थे जितना उनका अभिनय। “मक्खी चूस” में “मानिक लाल मक्खी चूस”, “पाकेटमार” में “उधार चंद डब्बू” और “तराना” में उनकी भूमिका ने दर्शकों को खूब हंसाया। उन्होंने कुछ फिल्मों में विलेन का रोल भी निभाया, लेकिन उसमें भी कॉमिक अंदाज बनाए रखा।

    याकूब के साथ बनी हिट जोड़ी

    गोप और अभिनेता याकूब की जोड़ी उस दौर की चर्चित जोड़ियों में से एक थी। दोनों ने साथ मिलकर कई फिल्मों में काम किया और दर्शकों को खूब मनोरंजन दिया।

    निजी जीवन और व्यक्तित्व

    गोप की निजी जिंदगी भी उतनी ही दिलचस्प थी। उन्होंने अभिनेत्री लतिका से विवाह किया था, जो एंग्लो-नेपाली मूल की थीं। शादी के लिए उन्होंने धर्म परिवर्तन भी किया था। कहा जाता है कि उनके निधन के बाद उनकी पत्नी बच्चों के साथ विदेश चली गई थीं।

    फिल्म ‘तीसरी आंख’ और वह दर्दनाक घटना

    सबसे चौंकाने वाली घटना उनकी अंतिम फिल्म “तीसरी आंख” की शूटिंग के दौरान हुई। एक सीन में उन्हें हार्ट अटैक का अभिनय करना था। उन्होंने बेहद वास्तविक अभिनय करते हुए गिरने का सीन किया। क्रू को लगा कि यह बेहतरीन परफॉर्मेंस है और “कट” बोलने के बाद भी वे नहीं उठे। बाद में पता चला कि गोप को सच में दिल का दौरा पड़ा था और उनकी मृत्यु हो चुकी थी।

    सेट पर तालियां, लेकिन लौट नहीं सके

    सबसे दुखद बात यह रही कि जिस सीन में उन्होंने मौत का अभिनय किया, उसी सीन के बाद लोग उनकी परफॉर्मेंस की तारीफ में तालियां बजाते रहे, जबकि वास्तव में वह इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे।

    एक युग का अंत

    गोप का जाना फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा झटका था। दर्शक जो उन्हें हमेशा हंसते हुए देखते थे, उनकी अचानक हुई मृत्यु से गहरे सदमे में चले गए।

  • चारधाम यात्राः इंतजार की घड़ियां खत्म…. भक्तों के लिए खुले केदारनाथ धाम के पट

    चारधाम यात्राः इंतजार की घड़ियां खत्म…. भक्तों के लिए खुले केदारनाथ धाम के पट


    देहरादून।
    इंतजार की घड़ियां अब खत्म हो चुकी है। आज 22 अप्रैल 2026 को सुबह केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) के कपाट खोल दिए गए हैं। भगवान शिव (Lord Shiva.) के भक्तों के लिए आज का दिन बेहद ही खास है। मंदिर के द्वार खुलने से पहले ही धाम में भक्ति का माहौल बन गया। वहीं बीती शाम ही यहां पर ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से बाबा केदार की चल विग्रह डोली पहुंचीं। बता दें कि ये परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल 6 महीने के लिए बाबा केदार की इस डोली को ठंडी के दिनों में केदारनाथ धाम से ऊखीमठ ले जाया जाता है। मौसम सही होते ही इस डोली को वापस केदारनाथ लाया जाता है।

    आज सुबह से ही केदारनाथ में हर हर महादेव के जयकारों से साथ हजारों भक्त पहुंचते रहें। बता दें कि ये सिर्फ एक मंदिर या ज्योतिर्लिंग नहीं है बल्कि आस्था और विश्वास का अटूट केंद्र है। इसी वजह से केदारनाथ मंदिर का कपाट खुलना भक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। आइए जानते हैं कि इस मंदिर से जुड़ी जानकारियां-


    इतने बजे खुले केदारनाथ मंदिर के कपाट

    आज सुबह 8 बजे शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रों और पूरे विधि-विधान के साथ बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के खास मौके पर मंदिर को कई क्विंटल फूलों से बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया जिससे इसकी भव्यता देखते ही बन रही है। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।


    भोग 25 अप्रैल से शुरू

    केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के पहले दिन मंदिर में खास पूजा और आरती की गई। वहीं परंपरा के अनुसार नियमित भोग और पूरी तरह से तय दिनचर्या वाली पूजा 25 अप्रैल से शुरू होगी। यानी शुरुआती कुछ दिनों में यहां विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके बाद रोज की पूजा सामान्य तरीके से होती है।


    केदारनाथ से पहले किनके दर्शन करना जरूरी?

    मान्यता है कि केदारनाथ जाने से पहले भगवान भैरवनाथ के दर्शन करना जरूरी है। भैरवनाथ मंदिर केदारनाथ धाम के पास ही ऊंचाई पर स्थित है। कहा जाता है कि जब सर्दियों में केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं तब भैरवनाथ ही पूरे धाम की रक्षा करते हैं। उन्हें यहां का क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। ऐसे में लोग केदारनाथ के दर्शन करने से पहले भैरवनाथ मंदिर में ही मत्था टेकते हैं। ऐसा माना जाता है कि भैरवनाथ के दर्शन के बिना केदारनाथ यात्रा अधूरी है। लोगों का मानना है कि भैरवनाथ मंदिर में दर्शन करने से केदारनाथ यात्रा सफल और सुरक्षित होती है।

    केदारनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां पर मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। ऐसे में यहां दर्शन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। कपाट खुलते ही देश-विदेश से तमाम श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।


    कब खुलेंगे बद्रीनाथ के कपाट

    केदारनाथ के बाद अब सबकी नजरें भगवान विष्णु के पवित्र धाम बद्रीनाथ पर हैं। बद्रीनाथ धाम के कपाट कल यानी 23 अप्रैल 2026 को खुलेंगे। कपाट के खुलने का समय सुबह 6:15 बजे है। बता दें कि ये चारधाम यात्रा का सबसे अहम पड़ाव है। बद्रीनाथ को धरती का बैकुंठ यानी भगवान विष्णु का निवास स्थान कहा जाता है।

  • MP समेत पूरा उत्तर-पश्चिम भारत इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में… इन राज्यों में हीटवेव का अलर्ट

    MP समेत पूरा उत्तर-पश्चिम भारत इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में… इन राज्यों में हीटवेव का अलर्ट


    भोपाल।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 22 अप्रैल को देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज अलग-अलग रहेगा। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत (North-west and central India.) में भीषण गर्मी और लू (Extreme heat and heat wave.) का असर जारी रहेगा। पूर्वोत्तर, दक्षिण और कुछ पश्चिमी हिस्सों में बारिश व आंधी-तूफान की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। पहले बात उत्तर-पश्चिम भारत की करें तो राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में गर्मी का प्रकोप बना रहेगा। इन इलाकों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तक जा सकता है और लू चलने की संभावना है।

    IMD के अनुसार, खासतौर पर पश्चिमी राजस्थान (Western Rajasthan.) और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में आज भी हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 24 घंटों के दौरान भी लगभग पूरे उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ने और लू चलने का अनुमान है। राजधानी लखनऊ में दिन का तापमान लगभग 42 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है, जबकि रात का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने का अनुमान है।


    मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में गर्मी, कुछ इलाकों में बारिश

    मध्य भारत यानी मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में भी मौसम काफी गर्म रहेगा। यहां तापमान में और बढ़ोतरी के संकेत हैं। कई जगहों पर लू जैसी स्थिति बन सकती है। कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बादल छाने से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन यह राहत अस्थायी होगी और कुल मिलाकर गर्मी का असर बना रहेगा। वहीं, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मौसम का मिजाज थोड़ा अलग रहेगा। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों (जैसे- असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश) में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इससे तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि आंधी-तूफान और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा।


    असम में भारी बारिश जारी रहने की संभावना

    अधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, असम में भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने भूस्खलन प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहने और जान-माल की हानि से बचने के लिए सावधानियां बरतने के लिए कहा है। इसमें कहा गया कि आने वाले दिनों में छिटपुट बारिश और आंधी चलने की संभावना है। सभी एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है। वहीं, दक्षिण भारत और तटीय इलाकों की बात करें तो केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में गर्म और उमस भरा मौसम रहेगा। इसके साथ ही कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। महाराष्ट्र और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों में भी 22 अप्रैल को हल्की बारिश और आंधी की संभावना है, जिससे अस्थायी राहत मिलेगी लेकिन उमस बनी रहेगी।

  • MP: पीथमपुर में हजार्गो इंडस्ट्रीज में लगी भीषण आग… आसपास की दो फैक्ट्रियां भी चपेट में आई

    MP: पीथमपुर में हजार्गो इंडस्ट्रीज में लगी भीषण आग… आसपास की दो फैक्ट्रियां भी चपेट में आई


    धार।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक इंडस्ट्रियल एरिया (Industrial Area) में मंगलवार रात आग की भीषण घटना सामने आई है। जिस कंपनी से आग शुरू हुई उसमें खतरनाक औद्योगिक कचरा रखा था। साथ ही उसमें ई-कचरा की रीसाइक्लिंग (Recycling) भी होती है। अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। जिला प्रशासन आग बुझाने की कोशिश कर रहा है।

    मंगलवार रात पीथमपुर इंडस्ट्रियल एरिया (Pithampur Industrial Area) में स्थित हजार्गो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड में भीषण आग लग गई। आग तेजी से आसपास की दो फैक्ट्रियों में भी फैल गई। आग के फैलाव को देखते हुए आसपास की यूनिट्स को तुरंत खाली कराना गया। अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। जिला प्रशासन पानी और रेत का इस्तेमाल करके आग बुझाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, दूर से ही रुक-रुककर धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं।

    धार के पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने कहा कि यह कंपनी खतरनाक और गैर-खतरनाक औद्योगिक कचरे के निपटान के साथ ई-कचरा रीसाइक्लिंग में विशेषज्ञता रखती है। उन्होंने कहा कि साइट पर बड़ी मात्रा में जमा केमिकल्स के कारण आग लगी। प्रशासन कंपनी के प्रबंधन से संपर्क करने का प्रयास कर रहा है, ताकि यह पुष्टि की जा सके कि घटना के समय परिसर के भीतर कोई कर्मचारी मौजूद था या नहीं।

    एसपी ने बताया कि अब तक किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। आसपास के चॉल इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया है। पुलिस ने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घटनास्थल के पास के रास्तों को बंद कर दिया है।

    उन्होंने कहा कि पीथमपुर थाने के सेक्टर 3 में ‘हजार्गो’ नाम की एक इंडस्ट्रियल वेस्ट डिस्पोजल कंपनी है। आग दूसरी कंपनी तक भी फैल गई है। फिलहाल यह आग इन्हीं दो कंपनियों तक सीमित है। दमकल की गाड़ियां लगातार आग बुझाने की कोशिश कर रही हैं। हम आग को और ज्यादा फैलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। हमने आसपास के चॉल इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया है। अब तक किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।

    उन्होंने आगे कहा कि आग बुझने के बाद विशेषज्ञों की टीम आग लगने के कारणों की जांच करेगी। हमने फिलहाल घटनास्थल के पास के रास्तों को बंद कर दिया है। लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस की टीमें तैनात कर दी गई हैं और ट्रैफिक के लिए वैकल्पिक रास्ते बनाए गए हैं।

  • MCD: दिल्ली में आज BJP की अहम बैठक….मेयर-डिप्टी मेयर के नामों का हो सकता है ऐलान

    MCD: दिल्ली में आज BJP की अहम बैठक….मेयर-डिप्टी मेयर के नामों का हो सकता है ऐलान


    नई दिल्ली।
    एमसीडी (MCD) में महापौर (Mayor), उपमहापौर (Deputy Mayor) और सदन से चुने जाने वाले स्थायी समिति के सदस्यों के नामों का फैसला बुधवार को होने की संभावना है। इस संबंध में एमसीडी में सत्तारूढ़ भाजपा (Ruling BJP) की बुधवार को एक बैठक होगी। लिहाजा सभी की निगाहें बैठक पर टिकी हैं। भाजपा (BJP) ने इन पदों पर पार्षदों के नामों पर फैसला करने के लिए आठ सदस्यीय कमेटी बनाई है।

    प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा (Virendra Sachdeva) की अगुवाई में बनाई गई कमेटी में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Chief Minister Rekha Gupta), केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, सांसद व प्रदेश महामंत्री योगेंद्र चांदोलिया व कमलजीत सहरावत और विष्णु मित्तल, प्रदेश सहप्रभारी अल्का गुर्जर और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन राणा शामिल हैं। हालांकि इनमें कई नेता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचार करने गए हैं। इस कारण वह विडियो एप के माध्यम से बैठक से जुड़ेंगे।

    पार्टी इस बार संतुलन और अनुभव दोनों को ध्यान में रखते हुए फैसपा लेने की तैयारी में है। महापौर और उपमहापौर जैसे अहम पदों के लिए वरिष्ठ पार्षदों के साथ-साथ पहली बार चुने गए पार्षद भी जोर-आजमाइश में लगे हैं। पिछले करीब 20 दिनों से संभावित उम्मीदवार अपने-अपने राजनीतिक आकाओं के चक्कर काट रहे हैं और समर्थन जुटाने में जुटे हैं।

    इस तरह भाजपा के भीतर इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प बना हुआ है। एक ओर अनुभवी पार्षद अपनी दावेदारी को मजबूत बता रहे हैं, वहीं नए चेहरे भी संगठन में अपनी सक्रियता और प्रदर्शन के आधार पर मौका मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने चुनौती है कि ऐसा चेहरा चुना जाए जो न केवल संगठन में संतुलन बनाए रखे, बल्कि एमसीडी के कामकाज को भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सके।

    सदन से चुने जाने वाले भाजपा कोटे के दो सदस्यों के पद को लेकर भी खासी दिलचस्पी बनी हुई है। इन पदों पर चयन के जरिए पार्टी संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है, जिसमें क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों का भी ध्यान रखा जाएगा।

  • MP: ग्वालियर में महिला का हाई-वोल्टेज ड्रामा…. 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़कर आत्मदाह की दी धमकी

    MP: ग्वालियर में महिला का हाई-वोल्टेज ड्रामा…. 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़कर आत्मदाह की दी धमकी


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में जनसुनवाई में आई एक महिला 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गई और हाथ में पेट्रोल की बोतल लेकर आत्मदाह करने की धमकी (Threatening commit suicide) देने लगी. कलेक्ट्रेट परिसर (Collectorate Complex) के पीछे स्थित पानी की टंकी पर चढ़ने से अचानक अफरा-तफरी मच गई. बताया गया कि महिला कलेक्टर जनसुनवाई में आई थी, 20 लाख रुपये की आर्थिक मदद मांग रही थी।

    ग्वालियर में मंगलवार दोपहर एक महिला के हंगामे से कलेक्ट्रेट परिसर के पीछे अफरा-तफरी मच गई। करीब 3:30 बजे एक महिला पांच मंजिला (लगभग 60 फीट) ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गई और हाथ में पेट्रोल की बोतल लेकर आत्मदाह की धमकी देने लगी। महिला कलेक्टर की जनसुनवाई में आई थी और 20 लाख रुपए आर्थिक मदद मांग रही थी। शाम 6 बजे के करीब महिला को टंकी से नीचे उतार लिया गया।

    महिला भूरी बानो खान का कहना है कि उसके पति और दो बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसके चलते वह आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी है। उसने जिला प्रशासन से 20 लाख रुपए की आर्थिक मदद की मांग की है। महिला ने चेतावनी दी थी कि यदि उसकी मांग पूरी नहीं की गई तो वह अपनी जान दे देगी।

    जानकारी के मुताबिक महिला मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में सहायता की मांग लेकर पहुंची थी। जब उसे तुरंत मदद नहीं मिली, तो उसने यह कदम उठा लिया और पेट्रोल की बोतल लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गई।

    पुलिस ने उसकी बात सुनने और उसकी डिमांड पूरे करने को लेकर उसे झांसा दिया था, महिला को मिलने पहले एक महिला कांस्टेबल उसके पास टंकी पर चढ़कर गई थी और उसे बातों में उलझाया। कुछ देर बाद दूसरी महिला पुलिसकर्मी ऊपर पहुंची थी और उसे समझाने का प्रयास किया था, लेकिन महिला नहीं मानी थी, जिस पर महिला पुलिसकर्मी ने महिला को समय रहते पकड़ लिया। उसके हाथ से पेट्रोल की बोतल चीन का नीचे फेंक दी थी।

    महिला बानो ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वह काफी दिनों से परेशान थी। उसके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। वह उन्हें पालने में असमर्थ थी। उसके पति की मौत 4 साल पहले हो गई थी। वह ट्रांसपोर्ट नगर में ट्रक चलाने का काम करता था। उसकी मौत की रिपोर्ट करने में बहोड़ापुर थाने गई थी, लेकिन वहां पर मौजूद महिला पुलिस कर्मी ने उसे पीटा और भगा दिया था।

    इसके बाद में कई बार एसपी ऑफिस शिकायत करने गई थी, लेकिन वहां भी उसकी कोई सुनवाई नहीं की गई। इसके बाद आर्थिक सहायता के लिए कई बार कलेक्ट कार्यालय की जनसंख्या में भी पहुंची, लेकिन वहां भी उसकी कोई मदद की नहीं की गई। महिला का कहना है कि उसे आर्थिक सहायता में प्रशासन से 20 लाख रुपए की मांग की थी। प्रशासन ने उसे कागज पर लिखकर दिया है कि 3 महीने के अंदर वह उसकी मांग पूरी कर देंगे।