Author: bharati

  • भारत रूस राजनयिक संबंधों की 79वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में साइकिल रैली का भव्य आयोजन..

    भारत रूस राजनयिक संबंधों की 79वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में साइकिल रैली का भव्य आयोजन..


    नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच दशकों पुराने राजनयिक संबंधों की 79वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी नई दिल्ली में एक साइकिल रैली का आयोजन किया गया जिसने दोनों देशों के बीच गहरी होती मित्रता और सांस्कृतिक जुड़ाव को एक बार फिर उजागर किया। यह आयोजन एक जनभागीदारी कार्यक्रम के रूप में सामने आया जिसमें विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। रैली का उद्देश्य केवल खेल और फिटनेस को बढ़ावा देना ही नहीं था बल्कि भारत और रूस के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करना भी था।

    सुबह के समय आयोजित इस साइकिल रैली में प्रतिभागियों ने राजधानी की सड़कों पर साइकिल चलाते हुए एकता और सहयोग का संदेश दिया। आयोजन में शामिल लोगों ने इसे एक सकारात्मक अनुभव बताया और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं बल्कि विभिन्न देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास को भी बढ़ाते हैं। पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह और ऊर्जा का माहौल देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने इसे और प्रभावशाली बना दिया।

    आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियां दोनों देशों के संबंधों को केवल राजनयिक स्तर तक सीमित नहीं रखतीं बल्कि इन्हें जन स्तर तक पहुंचाने में मदद करती हैं। उनका मानना है कि सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों के बीच जुड़ाव और अधिक मजबूत होता है और यही वास्तविक कूटनीति की नींव होती है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में इस तरह के आयोजन और बड़े स्तर पर किए जाने की संभावना है जिससे अधिक लोग जुड़ सकें।

    कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने कहा कि साइकिल रैली ने उन्हें एक अलग अनुभव दिया और यह केवल एक खेल गतिविधि नहीं बल्कि एक संदेशवाहक आयोजन था जिसमें शांति और सहयोग की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कुछ प्रतिभागियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि नियमित रूप से साइकिल चलाना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है और ऐसे आयोजनों से समाज में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ती है।

    आयोजकों के अनुसार लगभग सात सौ लोगों ने इस रैली में भाग लिया जो विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों से आए थे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारत और रूस के बीच संबंधों को लेकर जनता में भी सकारात्मक भावना मौजूद है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था का भी विशेष ध्यान रखा गया जिससे आयोजन शांतिपूर्ण और सफल रहा।

    भारत और रूस के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं और समय के साथ इन संबंधों ने कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया है। इस तरह के आयोजन न केवल कूटनीतिक संबंधों को मजबूती देते हैं बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी गहरा करते हैं। राजधानी में आयोजित यह साइकिल रैली इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है जिसने एकता और मित्रता का मजबूत संदेश दिया है।

  • शारीरिक और मेडिकल टेस्ट के आधार पर होगा चयन, पूरी प्रक्रिया होगी पारदर्शी और निशुल्क

    शारीरिक और मेडिकल टेस्ट के आधार पर होगा चयन, पूरी प्रक्रिया होगी पारदर्शी और निशुल्क


    नई दिल्ली। देश सेवा के इच्छुक पूर्व सैनिकों और अनुभवी उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। 137वीं समग्र पारिस्थितिक टास्क फोर्स बटालियन, टेरिटोरियल आर्मी, 39 गोरखा राइफल्स ने वर्ष 2026 के लिए भर्ती रैली की घोषणा की है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 161 रिक्त पदों को भरा जाएगा। चयन प्रक्रिया में भाग लेने के लिए उम्मीदवारों को सीधे भर्ती रैली स्थल पर उपस्थित होना होगा और यह प्रक्रिया पूरी तरह चरणबद्ध तरीके से आयोजित की जाएगी।

    यह भर्ती रैली 5 मई से शुरू होकर 23 मई तक देश के तीन अलग अलग स्थानों पर आयोजित की जाएगी। पहला चरण पश्चिम बंगाल के बेंगदुबी में 5 से 8 मई तक होगा। दूसरा चरण उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 13 से 16 मई तक चलेगा और अंतिम चरण उत्तराखंड के देहरादून में 20 से 23 मई तक संपन्न किया जाएगा। सभी उम्मीदवारों को सुबह 7 बजे निर्धारित केंद्रों पर रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा, जिसके बाद चयन प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत की जाएगी।

    इस भर्ती अभियान में विभिन्न श्रेणियों के पद शामिल किए गए हैं जिनमें जूनियर कमीशंड ऑफिसर जनरल ड्यूटी के 7 पद, सोल्जर जनरल ड्यूटी के 143 पद, सोल्जर क्लर्क के 3 पद, शेफ के 2 पद, टेलर के लिए 1 पद, हाउसकीपर के 3 पद तथा वॉशरमैन और ड्रेसर के लिए एक एक पद शामिल हैं। यह अवसर विशेष रूप से उन उम्मीदवारों के लिए रखा गया है जिन्होंने पूर्व में सेना में सेवा दी हो या फिर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय या राज्य वन विभाग में कम से कम 20 वर्षों का अनुभव प्राप्त किया हो।

    उम्मीदवारों की आयु सीमा पद के अनुसार निर्धारित की गई है। जूनियर कमीशंड ऑफिसर पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष तय की गई है जबकि अन्य रैंकों के लिए यह सीमा 50 वर्ष निर्धारित है। सभी उम्मीदवारों का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है और मेडिकल फिटनेस के रूप में शेप वन श्रेणी अनिवार्य मानी गई है।

    चयन प्रक्रिया में कई चरण शामिल हैं। सबसे पहले उम्मीदवारों को शारीरिक दक्षता परीक्षा से गुजरना होगा जिसमें एक मील की दौड़, पुल अप्स, डिच जंप और बैलेंस टेस्ट शामिल हैं। इसके बाद संबंधित ट्रेड के अनुसार प्रोफिशिएंसी टेस्ट आयोजित किया जाएगा। इन दोनों चरणों में सफल उम्मीदवारों को मेडिकल जांच के लिए बुलाया जाएगा और अंत में इंटरव्यू के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा।

    वेतन संरचना उम्मीदवार के पद और सेवा श्रेणी पर निर्भर करेगी। चयनित कर्मियों को मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता, आवास भत्ता, बच्चों की शिक्षा भत्ता और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। हालांकि इस सेवा में पेंशन, ग्रेच्युटी या वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ शामिल नहीं होगा, लेकिन पहले से प्राप्त पेंशन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    इस भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह निशुल्क रखा गया है। उम्मीदवारों को अपने सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे डिस्चार्ज बुक, पेंशन भुगतान आदेश, पासपोर्ट साइज फोटो, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा। यह भर्ती अभियान उन अनुभवी उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जो दोबारा देश सेवा में योगदान देना चाहते हैं।

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    संक्षिप्त विवरण
    टेरिटोरियल आर्मी में 161 पदों के लिए भर्ती रैली 2026 की घोषणा की गई है। देश के तीन शहरों में चयन प्रक्रिया आयोजित होगी जिसमें पूर्व सैनिक और अनुभवी उम्मीदवार भाग ले सकते हैं।

  • महिला आरक्षण बिल पर असफलता से बढ़ा सियासी तनाव, रूपाली गांगुली का तीखा बयान..

    महिला आरक्षण बिल पर असफलता से बढ़ा सियासी तनाव, रूपाली गांगुली का तीखा बयान..


    नई दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण संशोधन बिल को आवश्यक दो तिहाई बहुमत न मिलने के बाद राजनीतिक माहौल तेजी से गरमा गया है। बिल के समर्थन में पर्याप्त संख्या में वोट न जुट पाने के कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। प्रस्ताव के लिए जहां 352 वोटों की आवश्यकता थी, वहीं 298 वोट ही पक्ष में पड़ सके। इस परिणाम के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और महिला प्रतिनिधित्व से जुड़ा यह मुद्दा फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है।

    इस घटनाक्रम पर टीवी अभिनेत्री और राजनीतिक रूप से सक्रिय रूपाली गांगुली ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस फैसले को लेकर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि जिस देश में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है, वहां वास्तविक जीवन में उनके अधिकारों को लेकर अभी भी संघर्ष जारी है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक विफलता नहीं बल्कि सामाजिक असमानता का संकेत बताया।

    अपने संदेश में रूपाली गांगुली ने कहा कि महिला आरक्षण का उद्देश्य संसद और अन्य संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में समानता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से इस विषय पर चर्चा होती रही है लेकिन ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। उनके अनुसार यह स्थिति महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सीमित करने वाली सोच को दर्शाती है।

    उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात तो अक्सर की जाती है लेकिन जब वास्तविक अवसर देने की बात आती है तो बाधाएं सामने आ जाती हैं। उनके अनुसार यह केवल एक कानून का मामला नहीं बल्कि सोच और व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं की भागीदारी किसी एक वर्ग या समूह का विषय नहीं बल्कि पूरे समाज के विकास से जुड़ा हुआ प्रश्न है।

    रूपाली गांगुली ने अपने संदेश में अपने लोकप्रिय धारावाहिक का संदर्भ देते हुए कहा कि समाज में महिलाओं को अक्सर सीमित भूमिकाओं में देखने की प्रवृत्ति रही है। उन्होंने कहा कि वास्तविक जीवन में भी कई बार महिलाओं को यही संदेश दिया जाता है कि उनकी भूमिका सीमित है, जो बदलने की आवश्यकता है।

    इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक बड़ा अवसर मानते हैं, जबकि कुछ इसे संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा बताते हैं। हालांकि यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण जैसे विषय पर देश में व्यापक सहमति अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।

  • भारत श्रीलंका संबंधों में नया अध्याय, उपराष्ट्रपति के दौरे से कूटनीतिक रिश्तों में आई नई मजबूती..

    भारत श्रीलंका संबंधों में नया अध्याय, उपराष्ट्रपति के दौरे से कूटनीतिक रिश्तों में आई नई मजबूती..

    नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के दो दिवसीय श्रीलंका दौरे ने दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई कूटनीतिक दिशा देने का संकेत दिया है। कोलंबो पहुंचने पर उनका पारंपरिक कंडियन नृत्य के माध्यम से भव्य स्वागत किया गया, जो दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव को दर्शाता है। इस दौरे के दौरान उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की।

    बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और श्रीलंका के बीच साझा इतिहास, सभ्यता और लोगों के बीच गहरे संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने पर विचार साझा किए। बातचीत में विकास सहयोग, आर्थिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी गंभीर चर्चा हुई। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय आधार पर भी अत्यंत मजबूत हैं और इन्हें और आगे ले जाने की आवश्यकता है।

    द्विपक्षीय वार्ता में भारत की ओर से चल रही आवास परियोजना और श्रीलंका में हाल ही में आए तूफान से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण से जुड़े सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। लगभग 450 मिलियन की सहायता योजना के तहत चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई, जिसमें विशेष रूप से भारतीय मूल के तमिल समुदाय के प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    इसके अलावा मछुआरों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस विषय को मानवीय दृष्टिकोण से हल करने पर सहमति जताई ताकि सीमावर्ती समुद्री क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरा समुदायों की आजीविका सुरक्षित रह सके और किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न न हो। इस बातचीत में समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

    यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह भारत के किसी उपराष्ट्रपति का श्रीलंका का पहला आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा है। इस यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति ने भारतीय सहायता से निर्मित आवास परियोजना के तीसरे चरण के तहत बनाए गए घरों का भी उल्लेख किया, जिन्हें जल्द ही लाभार्थियों को सौंपा जाएगा। यह पहल दोनों देशों के बीच विकास सहयोग की गहराई और मानवीय जुड़ाव को दर्शाती है।

    कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा भारत और श्रीलंका के संबंधों में केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी एक नई मजबूती का संकेत देता है। क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और मानवीय मुद्दों पर बढ़ती समझ भविष्य में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक गहरा कर सकती है।

  • शरीर की गर्मी शांत करने के लिए पिएं ये देसी ड्रिंक्स, पित्त भी रहेगा कंट्रोल

    शरीर की गर्मी शांत करने के लिए पिएं ये देसी ड्रिंक्स, पित्त भी रहेगा कंट्रोल


    नई दिल्ली। तेज धूप और बढ़ते तापमान का असर सीधे शरीर पर पड़ता है। आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में ‘पित्त’ बढ़ जाता है, जिससे सिरदर्द, एसिडिटी, मुंह के छाले, चिड़चिड़ापन और थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में खानपान के जरिए शरीर को ठंडा रखना बेहद जरूरी हो जाता है।

    Gulkand और पान का शरबत-ठंडक का असरदार उपाय

    गुलकंद और पान से बना शरबत शरीर को अंदर से ठंडक देता है। यह पाचन सुधारने, एसिडिटी कम करने और शरीर की ऊर्जा बनाए रखने में मददगार होता है। गर्मियों में इसे नियमित रूप से लेना काफी फायदेमंद हो सकता है।

    खजूरादी मंथ-ताकत और ठंडक दोनों

    आयुर्वेदिक पेय खजूरादी मंथ शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ कमजोरी दूर करने में मदद करता है। यह खासतौर पर एनीमिया और ज्यादा प्यास लगने की समस्या में राहत देता है।

    Amla और Sabja seeds- नेचुरल डिटॉक्स ड्रिंक

    आंवला और सब्जा सीड्स का मिश्रण एक तरह का प्राकृतिक टॉनिक है। यह पित्त को संतुलित करने के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल कम करने, दिल को स्वस्थ रखने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह शरीर को डिटॉक्स करने में भी कारगर है।

    नारियल और Kokum पेय-गर्मी से राहत

    नारियल और कोकम से बना पेय शरीर के हार्मोन संतुलन में मदद करता है और गर्मी को कम करता है। यह गैस, एसिडिटी और सीने में जलन जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में उपयोगी है।

    Sea buckthorn जूस-इम्यूनिटी बूस्टर

    सीबकथॉर्न का जूस गर्मियों में शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं और शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखते हैं।

    गर्मियों में शरीर को ठंडा और संतुलित रखने के लिए इन प्राकृतिक पेयों का सेवन बेहद फायदेमंद है। ये न सिर्फ पित्त को शांत करते हैं, बल्कि शरीर को ऊर्जा और मजबूती भी देते हैं।

  • उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की तबीयत बिगड़ने से राजनीतिक हलचल तेज अस्पताल में सफल सर्जरी के बाद राहत

    उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की तबीयत बिगड़ने से राजनीतिक हलचल तेज अस्पताल में सफल सर्जरी के बाद राहत


    नई दिल्ली।आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और जनसेना पार्टी के अध्यक्ष पवन कल्याण की तबीयत एक प्रशासनिक बैठक के दौरान अचानक बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। बैठक के दौरान उन्हें अस्वस्थता महसूस हुई और स्थिति गंभीर होने पर उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
    डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच के बाद आवश्यक सर्जरी की प्रक्रिया अपनाई जो सफलतापूर्वक पूरी की गई। सर्जरी के बाद उनकी स्थिति को स्थिर बताया गया है और उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। चिकित्सकों ने उन्हें कुछ दिनों तक पूर्ण आराम करने की सलाह दी है ताकि वे पूरी तरह स्वस्थ हो सकें और किसी भी प्रकार की जटिलता से बचा जा सके। उनकी तबीयत में सुधार के संकेत मिल रहे हैं हालांकि पूर्ण रिकवरी में समय लग सकता है।

    स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें पहले नजदीकी चिकित्सा केंद्र में प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में बेहतर सुविधा के लिए बड़े अस्पताल में स्थानांतरित किया गया जहां विशेषज्ञों की टीम ने विस्तृत जांच की। जांच के दौरान यह निर्णय लिया गया कि उनकी स्थिति को देखते हुए सर्जरी आवश्यक है। ऑपरेशन के बाद उनकी हालत स्थिर बनी हुई है और डॉक्टर लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए हैं। अस्पताल में उन्हें विशेष देखभाल में रखा गया है और मेडिकल टीम उनकी रिकवरी को लेकर सतर्क है।

    इस घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चिंता का माहौल देखा जा रहा है। उनके समर्थक और प्रशंसक लगातार उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। पवन कल्याण की पत्नी ने भी उनकी सेहत में सुधार की जानकारी देते हुए लोगों को आश्वस्त किया है कि वह चिकित्सकीय देखरेख में धीरे धीरे बेहतर हो रहे हैं। परिवार और करीबी लोग अस्पताल में मौजूद रहकर उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

    पवन कल्याण लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे थे और इसी कारण उन्होंने अपने कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी सीमित भागीदारी की थी। अचानक तबीयत बिगड़ने की इस घटना ने सभी को चिंतित कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी सफल रही है और आने वाले दिनों में उनकी स्थिति में और सुधार की उम्मीद है।

    पवन कल्याण न केवल एक सक्रिय राजनेता हैं बल्कि तेलुगु फिल्म उद्योग के एक प्रसिद्ध अभिनेता भी हैं। अपने अभिनय करियर में उन्होंने कई सफल फिल्मों के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। राजनीति में उन्होंने जनसेना पार्टी की स्थापना कर राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाल के वर्षों में वे राज्य की नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।

    उनकी तबीयत को लेकर जारी यह स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है और चिकित्सकीय टीम लगातार उनकी रिकवरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है। परिवार और समर्थक उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं और पूरे प्रदेश में उनके स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है।

  • तेज रफ्तार ने ली चार जिंदगियां ,अनूपपुर में ट्रैक्टर गड्ढे में पलटा ,बड़ा हादसा

    तेज रफ्तार ने ली चार जिंदगियां ,अनूपपुर में ट्रैक्टर गड्ढे में पलटा ,बड़ा हादसा


    अनूपपुर । अनूपपुर जिले में रविवार की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया जब एक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गहरे गड्ढे में जा पलटा। हादसा इतना भीषण था कि ट्रैक्टर के इंजन और ट्रॉली के बीच दबकर चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई और ग्रामीण बड़ी संख्या में वहां एकत्र हो गए।

    जानकारी के अनुसार यह हादसा करन पठार थाना क्षेत्र के अंतर्गत ठाड़ पाथर गांव के पास हुआ। डिंडौरी जिले के भीमकुंडी गांव से चार दोस्त सुबह लगभग साढ़े पांच बजे ट्रैक्टर लेकर अनूपपुर के पौनी गांव गिट्टी लेने के लिए निकले थे। ट्रैक्टर में ट्रॉली खाली थी और सभी युवक रोजमर्रा के काम के लिए निर्माण सामग्री लेने जा रहे थे।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही ट्रैक्टर ठाड़ पाथर गांव के पास एक मोड़ पर पहुंचा वहां सड़क का संतुलन बिगड़ गया और तेज रफ्तार के कारण वाहन अचानक नीचे उतर गया। देखते ही देखते ट्रैक्टर गहरे गड्ढे में पलट गया और उसमें सवार सभी युवक भारी मशीनरी के नीचे दब गए। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया।

    ग्रामीणों ने अपनी ओर से ट्रैक्टर को हटाने की कोशिश की लेकिन भारी वजन और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर करन पठार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जेसीबी मशीन की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद सुबह साढ़े छह बजे चारों शवों को ट्रैक्टर के नीचे से बाहर निकाला जा सका।

    हादसे में जान गंवाने वालों में अंकुश उइके उम्र चौबीस वर्ष जो ट्रैक्टर का चालक और मालिक था शामिल है। इसके अलावा ब्रजेश पेंदो उम्र अठारह वर्ष रवींद्र कुमार गोयल उम्र अठारह वर्ष और प्रकाश मार्को उम्र सत्रह वर्ष भी इस दर्दनाक हादसे का शिकार हो गए। सभी मृतक डिंडौरी जिले के भीमकुंडी गांव के निवासी बताए जा रहे हैं।

    घटना की जानकारी जैसे ही मृतकों के गांव भीमकुंडी पहुंची पूरे गांव में कोहराम मच गया। एक साथ चार युवकों की मौत से गांव में मातम का माहौल छा गया और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बताया कि सभी युवक मेहनतकश थे और रोजाना काम के लिए आसपास के क्षेत्रों में जाते थे।

    पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण तेज रफ्तार और मोड़ पर नियंत्रण खोना माना जा रहा है हालांकि पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है ताकि वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सके।

    यह हादसा क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और ग्रामीण मार्गों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि ऐसे खतरनाक मोड़ों पर सुरक्षा उपाय किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

  • बारात में रास्ते को लेकर बड़ा बवाल ,शाजापुर में दो पक्ष भिड़े छह घायल ,पांच थानों का पुलिस बल तैनात

    बारात में रास्ते को लेकर बड़ा बवाल ,शाजापुर में दो पक्ष भिड़े छह घायल ,पांच थानों का पुलिस बल तैनात


    शाजापुर । शाजापुर जिले के बेरछा क्षेत्र में शनिवार रात एक बारात के दौरान उपजा मामूली सा विवाद देखते ही देखते बड़े हिंसक टकराव में बदल गया। घटना रात लगभग नौ से दस बजे के बीच की बताई जा रही है जब बेरछा बायपास स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के पास से हिंदू समाज की बारात गुजर रही थी। इसी दौरान रास्ते से एक ट्रक निकालने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई जो धीरे धीरे उग्र हो गई और मारपीट में तब्दील हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्ष आमने सामने आ गए और लाठी डंडों के साथ हमला शुरू हो गया। इस घटना में छह बाराती घायल हो गए जिन्हें तुरंत उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्रित हो गए।

    फरियादी रवि समोरा उम्र बत्तीस वर्ष निवासी बेरछा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि ट्रक चालक शाहरूख शेख ने पहले बारात के लोगों से गाली गलौज की और कथित रूप से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। इसके बाद वह कुछ अन्य लोगों को साथ लेकर वापस आया और बारातियों पर हमला कर दिया। आरोप है कि इसी दौरान सूरज भिलाला पर चाकू से वार किया गया जबकि राजू मिस्त्री द्वारा अरिहंत जैन पर हमला किया गया जिससे स्थिति और अधिक बिगड़ गई।

    घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है जिनमें शाहरूख शेख, फखरूद्दीन का बेटा, वसीम पिता हनीफ खां, पप्पू पिता शरीफ खां, राजू पिता नसीरूद्दीन, इकरार पिता अकरम खां, अनिश पिता हन्नु पटेल, सद्दाम मंसूरी और ताजउद्दीन पिता अकबर खां शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार इनमें से चार आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है और सुरक्षा कारणों से उन्हें अन्य थाने में रखा गया है।

    एडिशनल एसपी घनश्याम मालवीय ने बताया कि यह विवाद वाहन को रास्ता देने को लेकर शुरू हुआ था जिसमें एक वाहन मुस्लिम समाज के चालक द्वारा चलाया जा रहा था। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में तनाव बढ़ा और बाद में मारपीट की स्थिति उत्पन्न हो गई। पुलिस के अनुसार घायल पक्ष की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और सभी पहलुओं की गंभीरता से पड़ताल की जा रही है।

    घटना के बाद हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने तुरंत भारी पुलिस बल तैनात किया। सुंदरसी, सलसलाई, सुनेरा, अकोदिया और शाजापुर थानों से अतिरिक्त बल बुलाया गया जिससे पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया। रात करीब एक बजे एसडीएम मनीषा वास्कले और नायब तहसीलदार गौरव पोरवाल भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

    विवाद के बाद थाने पर भी भारी भीड़ जमा हो गई जहां प्रदर्शन और नारेबाजी की स्थिति बन गई। कुछ लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए तीखी टिप्पणी की और कार्रवाई की मांग की। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

    थाने में देर रात तक हंगामे और बहस का माहौल बना रहा। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के जुलूस की मांग की जिसे लेकर अधिकारियों और भीड़ के बीच कई बार तीखी बहस भी हुई। बाद में पुलिस अधिकारियों द्वारा उचित कार्रवाई और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिए जाने के बाद स्थिति को नियंत्रित किया जा सका और लोग शांत होकर वापस लौटे।

  • भारत और दक्षिण कोरिया की साझेदारी से निवेश और तकनीक के नए रास्ते खुलने की संभावना, एशिया में बढ़ी हलचल

    भारत और दक्षिण कोरिया की साझेदारी से निवेश और तकनीक के नए रास्ते खुलने की संभावना, एशिया में बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग का भारत आगमन एशिया की बदलती राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। रविवार को उनका विशेष प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत के लिए प्रस्थान हुआ और सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी उच्च स्तरीय शिखर वार्ता प्रस्तावित है। इस बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने वाला अवसर माना जा रहा है, जहां व्यापार, तकनीक, रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

    वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मध्य पूर्व क्षेत्र में जारी तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है, जिसका प्रभाव दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर देखा जा रहा है। ऐसे में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सहयोग को ऊर्जा स्थिरता और वैकल्पिक आपूर्ति नेटवर्क विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देश मिलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित और संतुलित बनाने की कोशिशों पर जोर दे सकते हैं।

    भारत और दक्षिण कोरिया के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं और अब यह साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहकर रणनीतिक सहयोग के व्यापक दायरे में प्रवेश कर चुकी है। विशेष रूप से शिपबिल्डिंग, मैरीटाइम उद्योग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की रुचि बढ़ी है। इन क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग और निवेश को लेकर नई संभावनाएं सामने आ सकती हैं, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती प्रदान करेंगी।

    इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ली जे म्युंग भारत में कार्यरत कोरियाई कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर सकते हैं। भारत वर्तमान में दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए एक प्रमुख उत्पादन केंद्र और विशाल उपभोक्ता बाजार के रूप में तेजी से उभर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर में कोरियाई निवेश पहले से ही मजबूत स्थिति में है और आने वाले समय में इसमें और विस्तार की संभावना है। इस साझेदारी से भारत में रोजगार सृजन और तकनीकी हस्तांतरण को भी गति मिल सकती है।

    शिखर वार्ता के बाद दोनों देश ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितताओं को कम करने के लिए साझा रणनीति पर विचार कर सकते हैं। इसके साथ ही महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की उपलब्धता और उनके प्रसंस्करण में सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी चर्चा आगे बढ़ने की उम्मीद है। यह पहल वैश्विक स्तर पर औद्योगिक उत्पादन और तकनीकी विकास को नई मजबूती दे सकती है।

    इसके बाद राष्ट्रपति ली जे म्युंग का वियतनाम दौरा भी प्रस्तावित है जहां वे नई सरकार के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इस दौरान ऊर्जा सहयोग, व्यापार विस्तार और आवश्यक खनिजों की आपूर्ति जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। दक्षिण कोरिया अपनी विदेश नीति के तहत तेजी से उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ साझेदारी को गहरा करने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास दोनों को बढ़ावा मिल सके।

  • मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग ने संसद में राजनीतिक तापमान बढ़ाया, विपक्ष एकजुट

    मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग ने संसद में राजनीतिक तापमान बढ़ाया, विपक्ष एकजुट


    नई दिल्ली। संसद के मौजूदा सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर राजनीतिक माहौल तेजी से गरमाता जा रहा है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक संयुक्त रणनीति के तहत नए रिमूवल नोटिस की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके सहित INDIA गठबंधन के प्रमुख दल इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि हाल के समय में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठे हैं और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में सामने आई शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है और किसी भी प्रकार की पक्षपात की आशंका लोकतंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। इसी आधार पर विपक्ष संसद में इस विषय को औपचारिक रूप से उठाने की तैयारी कर रहा है ताकि आयोग की भूमिका और कार्यशैली पर व्यापक चर्चा हो सके। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि संस्थागत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने से जुड़ा हुआ है।

    संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया अत्यंत सख्त और जटिल मानी जाती है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव लाना आवश्यक होता है और उसे पारित करने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होती है। विपक्ष इस प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए अपने सांसदों का समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम का उद्देश्य केवल हटाने की प्रक्रिया शुरू करना नहीं बल्कि सरकार और आयोग पर नैतिक और राजनीतिक दबाव बनाना भी हो सकता है।

    सरकारी पक्ष की ओर से इस मुद्दे पर अब तक संयमित रुख अपनाया गया है। सत्ता पक्ष का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं पर इस प्रकार के गंभीर आरोप लगाने से पहले ठोस और प्रमाणित आधार होना चाहिए। वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक निगरानी और जवाबदेही का हिस्सा बताते हुए संसद के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में है।

    राजनीतिक माहौल में यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब देश में आगामी चुनावी गतिविधियों की तैयारियां भी तेज हैं। ऐसे में चुनाव आयोग की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। विपक्ष का मानना है कि यदि संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा कमजोर होता है तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। यही कारण है कि यह मुद्दा अब संसद में एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेता जा रहा है।