Author: bharati

  • नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई भिण्ड में अल्ट्रासाउंड मशीन सील

    नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई भिण्ड में अल्ट्रासाउंड मशीन सील


    भिण्ड । मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले में स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए हाउसिंग कॉलोनी क्षेत्र में संचालित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील कर दिया है यह कार्रवाई नियमों के उल्लंघन और एक ही डॉक्टर के दो राज्यों में पंजीयन होने की शिकायत के बाद की गई है जिससे पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है

    प्राप्त जानकारी के अनुसार यह अल्ट्रासाउंड सेंटर डॉक्टर धर्मेंद्र धनखड़ के नाम पर संचालित हो रहा था शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि संबंधित डॉक्टर ने न केवल भिण्ड में बल्कि उत्तरप्रदेश के बाराबंकी जिले में भी अल्ट्रासाउंड सेंटर के संचालन के लिए पंजीयन करा रखा था जो कि नियमानुसार गंभीर अनियमितता मानी जा रही है

    स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी चिकित्सक को एक ही समय में दो अलग अलग स्थानों पर अल्ट्रासाउंड सेंटर का संचालन करने की अनुमति नहीं होती खासकर जब दोनों स्थान अलग अलग राज्यों में हों ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निगरानी बनाए रखने के लिए सख्त दिशा निर्देश लागू किए गए हैं ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही या फर्जीवाड़ा न हो सके

    जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया और पूरे सेंटर को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद की गई और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है

    इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अन्य केंद्रों में भी हड़कंप मच गया है क्योंकि विभाग अब अन्य अल्ट्रासाउंड सेंटरों की भी जांच कर सकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा

    स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार मामले की जांच केवल पंजीयन तक सीमित नहीं है बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस सेंटर में किसी प्रकार की अवैध गतिविधियां या मानकों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा था इसके साथ ही दोनों राज्यों में पंजीयन की प्रक्रिया और दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई अनियमितता साबित होती है तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और आवश्यक कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे इस मामले को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है

    फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और आने वाले दिनों में इसके कई और पहलू सामने आने की संभावना है इस कार्रवाई ने यह संदेश भी दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

  • वित्तीय निगरानी को मजबूत करने के लिए प्रमुख नियामक संस्थानों के बीच ऐतिहासिक और व्यापक समझौता

    वित्तीय निगरानी को मजबूत करने के लिए प्रमुख नियामक संस्थानों के बीच ऐतिहासिक और व्यापक समझौता

    नई दिल्ली :वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी अवैध गतिविधियों पर सख्ती से अंकुश लगाने के उद्देश्य से देश के प्रमुख वित्तीय नियामक संस्थानों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस पहल के तहत फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट इंडिया ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया तथा पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के साथ अलग अलग समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कदम को भारत की वित्तीय निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत और समन्वित बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।

    इस समझौते का मुख्य उद्देश्य वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की समय पर पहचान सुनिश्चित करना है। इसके माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण और अन्य वित्तीय अपराधों पर रोक लगाने के लिए एक मजबूत ढांचा विकसित करने की योजना है। विभिन्न नियामक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय से जांच और निगरानी की प्रक्रिया अधिक तेज और सटीक होने की उम्मीद है।

    नई व्यवस्था के तहत संबंधित संस्थाएं अपने अपने डेटाबेस से आवश्यक जानकारी और खुफिया इनपुट साझा करेंगी जिससे संदिग्ध लेनदेन की पहचान करना आसान होगा। इसके साथ ही रिपोर्टिंग की एकीकृत और मानकीकृत प्रक्रिया विकसित की जाएगी ताकि वित्तीय संस्थानों द्वारा दी जाने वाली जानकारी अधिक व्यवस्थित और उपयोगी हो सके। यह प्रक्रिया मौजूदा नियमों के अनुरूप होगी और वित्तीय अनुशासन को और सख्त बनाएगी।

    इस सहयोग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचना साझा करने की व्यवस्था को भी शामिल किया गया है जिससे विदेशी वित्तीय खुफिया इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित किया जा सकेगा। इससे वैश्विक स्तर पर फैले वित्तीय अपराध नेटवर्क की पहचान और नियंत्रण में मदद मिलेगी। यह कदम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप वित्तीय निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    समझौते के तहत प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। वित्तीय संस्थानों और नियामक एजेंसियों के अधिकारियों को मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी नियमों और आतंकवाद के वित्तपोषण की रोकथाम से संबंधित प्रक्रियाओं पर नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे संस्थागत स्तर पर जागरूकता और दक्षता दोनों में वृद्धि होगी।

    इसके अलावा जोखिम आकलन प्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाने पर काम किया जाएगा ताकि वित्तीय क्षेत्र में संभावित खतरों की पहचान पहले से की जा सके। संदिग्ध लेनदेन से जुड़े संकेतकों को साझा करने और विश्लेषण करने की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा जिससे निगरानी प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और डेटा आधारित हो सके।

    इस पूरे ढांचे में नियमित समन्वय बैठकें भी शामिल होंगी जिनमें विभिन्न एजेंसियां समय समय पर अपने अनुभव और जानकारी साझा करेंगी। इससे नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में अधिक स्पष्टता और गति आने की उम्मीद है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता भारत की वित्तीय निगरानी प्रणाली को एकीकृत दिशा देने की ओर महत्वपूर्ण कदम है जिससे न केवल घरेलू वित्तीय अपराधों पर नियंत्रण मिलेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की भूमिका और अधिक मजबूत होगी।

  • पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट…

    पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट…

    नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव में नरमी की उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में शुक्रवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। भू राजनीतिक मोर्चे पर संघर्ष कम होने और संभावित शांति वार्ताओं की उम्मीदों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली। लंबे समय से जारी अस्थिरता के बीच यह गिरावट वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है।

    बाजार में कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में दबाव बना रहा और यह शुरुआती सत्र में गिरकर दिन के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। दिनभर के उतार चढ़ाव के बीच इसमें एक प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई और यह 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करता नजर आया। इसी तरह अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड में भी कमजोरी देखने को मिली और यह लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। इस गिरावट ने ऊर्जा बाजार में सतर्कता का माहौल और गहरा कर दिया है।

    हालांकि इससे पहले के कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में मजबूत तेजी देखने को मिली थी, जब ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई थी। उस समय भू राजनीतिक तनाव और आपूर्ति को लेकर चिंताओं ने कीमतों को ऊपर धकेला था, लेकिन ताजा घटनाक्रमों ने इस रुझान को उलट दिया है।

    घरेलू बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखा गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में क्रूड ऑयल के भाव में तेज गिरावट आई और यह 2 प्रतिशत से अधिक टूटकर निचले स्तर पर आ गया। वैश्विक संकेतों के असर से घरेलू ट्रेडर्स में भी सतर्कता बढ़ी और खरीदारी का रुझान कमजोर रहा।

    इस बीच पश्चिम एशिया में कूटनीतिक हलचल और संघर्ष विराम की चर्चाओं ने बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई है। प्रमुख वैश्विक संकेतों और शांति की संभावनाओं ने निवेशकों के बीच जोखिम कम होने की उम्मीद को मजबूत किया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है और किसी भी नए घटनाक्रम से बाजार में तेजी से बदलाव संभव है।

    वैश्विक शेयर बाजारों पर भी इस घटनाक्रम का मिश्रित असर देखने को मिला। एशियाई बाजारों में कमजोरी दर्ज की गई और प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे। दूसरी ओर अमेरिकी बाजारों में हल्की बढ़त के साथ कारोबार बंद हुआ, जिससे वैश्विक निवेश भावना में संतुलन का संकेत मिला।

    घरेलू शेयर बाजार में भी शुरुआती कारोबार में स्थिरता रही और बाद में हल्की तेजी देखने को मिली। निवेशकों ने वैश्विक संकेतों को ध्यान में रखते हुए सतर्क रुख अपनाया और बड़े दांव लगाने से परहेज किया।

    विश्लेषकों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट मुख्य रूप से भू राजनीतिक तनाव में संभावित कमी और आपूर्ति को लेकर चिंता घटने के कारण आई है। हालांकि वे यह भी मानते हैं कि ऊर्जा बाजार अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है और आने वाले समय में वैश्विक घटनाक्रम इसकी दिशा को फिर से प्रभावित कर सकते हैं।

  • अदाणी समूह के शेयरों में तेजी से संपत्ति में भारी बढ़ोतरी और बाजार में सकारात्मक असर

    अदाणी समूह के शेयरों में तेजी से संपत्ति में भारी बढ़ोतरी और बाजार में सकारात्मक असर

    नई दिल्ली: वैश्विक अरबपति रैंकिंग में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है जिसमें भारतीय उद्योग जगत के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किया गया है बाजार में जारी उतार चढ़ाव और शेयरों में तेज गतिविधियों के बीच गौतम अदाणी ने एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान हासिल कर लिया है और इस उपलब्धि के साथ उन्होंने लंबे समय से शीर्ष पर बने मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ दिया है यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और निवेश प्रवाह में लगातार बदलाव देखा जा रहा है

    ताजा आंकड़ों के अनुसार गौतम अदाणी की कुल संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है जिससे वह वैश्विक रैंकिंग में भी ऊपर पहुंच गए हैं उनकी संपत्ति में यह उछाल मुख्य रूप से उनके समूह की कंपनियों के शेयरों में आई तेजी के कारण देखा गया है विशेषकर ऊर्जा बंदरगाह और गैस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की बढ़ती रुचि ने उनकी संपत्ति को नई ऊंचाई दी है दूसरी ओर मुकेश अंबानी की संपत्ति में मामूली गिरावट देखने को मिली है जिसके चलते वह रैंकिंग में दूसरे स्थान पर खिसक गए हैं

    शेयर बाजार में अदाणी समूह की कंपनियों ने हाल के सत्रों में मजबूत प्रदर्शन किया है जिससे न केवल समूह की बाजार स्थिति मजबूत हुई है बल्कि निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है एक ही दिन में संपत्ति में अरबों डॉलर का इजाफा इस बात को दर्शाता है कि बाजार में सकारात्मक धारणा तेजी से बदल सकती है और बड़े उद्योगपतियों की रैंकिंग पर इसका सीधा असर पड़ता है

    वैश्विक स्तर पर अरबपतियों की सूची में टेक्नोलॉजी सेक्टर का दबदबा लगातार बना हुआ है और शीर्ष स्थानों पर अधिकांश नाम इसी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं टेस्ला और अन्य बड़ी टेक कंपनियों से जुड़े उद्योगपति अब भी सूची में मजबूत स्थिति में हैं जबकि विभिन्न क्षेत्रों जैसे ऊर्जा खुदरा और औद्योगिक सेक्टर के अरबपतियों की संपत्ति में अधिक उतार चढ़ाव देखा जा रहा है

    विश्लेषकों के अनुसार यह रैंकिंग केवल व्यक्तिगत संपत्ति का संकेत नहीं है बल्कि यह वैश्विक बाजारों में पूंजी प्रवाह तकनीकी विकास और भू राजनीतिक परिस्थितियों का भी प्रतिबिंब है पिछले कुछ समय से वैश्विक निवेश माहौल में अस्थिरता बनी हुई है जिसके कारण बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है

    भारतीय उद्योग जगत की बात करें तो अन्य प्रमुख नाम भी वैश्विक सूची में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए हुए हैं जिनमें विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज शामिल हैं हालांकि उनकी रैंकिंग में मामूली उतार चढ़ाव देखा गया है लेकिन समग्र रूप से भारतीय अरबपतियों की वैश्विक प्रभावशीलता बनी हुई है

    अदाणी समूह की कंपनियों में हालिया तेजी ने निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया है और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के आधार पर यह स्थिति और भी बदल सकती है फिलहाल यह बदलाव भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है

  • भारत की रिपोर्ट से लीक हो गई US-इंडोनेशिया की सीक्रेट एयरस्पेस डील, बवाल के बाद हटना पड़ा पीछे

    भारत की रिपोर्ट से लीक हो गई US-इंडोनेशिया की सीक्रेट एयरस्पेस डील, बवाल के बाद हटना पड़ा पीछे

    वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जंग रहे युद्ध के बीच अमेरिका साउथ ईस्ट एशिया में स्थित एक मुस्लिम देश संग मिलकर बड़ा खेल करने की तैयारी में था। हालांकि एक भारतीय रिपोर्ट ने इस प्लान पर पानी फेर दिया है। बीते दिनों अमेरिका और दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया के बीच एक सीक्रेट समझौते की तैयारी चल रही थी, लेकिन अब इंडियन मीडिया की एक रिपोर्ट से हुए खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है।

    दरअसल अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच 13 अप्रैल को एक डिफेंस डील साइन होनी थी। हालांकि डील साइन होने से ठीक पहले 12 अप्रैल को एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि अमेरिका इंडोनेशिया के एयरस्पेस में अपने सैन्य विमानों को पूरी इजाजत देने की योजना बना रहा है। इस लीक के बाद इंडोनेशिया में भारी हंगामा हुआ और आखिरकार इस प्रावधन को फाइनल डील से बाहर कर दिया गया है।
    रिपोर्ट में हुआ खुलासा

    इस डील की पूरी जानकारी रिपोर्ट ‘संडे गार्जियन’ में प्रकाशित हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच कई महीने से इस गुप्त योजना पर काम कर रही थी। फरवरी में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच वाइट हाउस में हुई बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी। इसे 13 अप्रैल को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री शाफ्री जमसोएद्दीन की बैठक में औपचारिक रूप से शामिल किया जाना था, लेकिन विवाद के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका।

    डील में क्या था?

    इस प्रस्तावित डील के तहत अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशिया के एयरस्पेस में बिना किसी रोक-टोक के उड़ान भरने की इजाजत मिल जाती। आधिकारिक तौर पर इसे इमरजेंसी और संकट के समय इस्तेमाल के लिए बताया गया, लेकिन इसका असली मकसद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में निगरानी बढ़ाना था, खासकर उस समय जब ईरान ने होर्मुज पर दबाव बढ़ा दिया है और ग्लोबल ऑयल सप्लाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में अमेरिका मलक्का स्ट्रेट पर पकड़ मजबूत करना चाहता था, जो दुनिया का सबसे व्यस्त तेल व्यापार मार्ग है और जहां से करीब 30 प्रतिशत समुद्री तेल और 40 प्रतिशत वैश्विक व्यापार गुजरता है।
    इंडोनेशिया ही क्यों?

    इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति इस रणनीति के केंद्र में है, क्योंकि वह मलक्का के पास स्थित है।

    अमेरिका के लिए यह डील इंडो-पैसिफिक में चीन पर नजर रखने के लिए अहम साबित हो सकती थी, क्योंकि फिलहाल उसे उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के सैन्य ठिकानों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो दूरी के लिहाज से कम प्रभावी हैं।
    क्यों हटना पड़ा पीछे?

    हालांकि जैसे ही यह रिपोर्ट सामने आई, इंडोनेशिया में इसका तीखा विरोध शुरू हो गया। जकार्ता में सांसदों ने इस तरह के किसी भी समझौते की वैधता पर सवाल उठाए। संसद के डिप्टी चेयर सुकामता ने साफ कहा कि किसी भी विदेशी सैन्य सहयोग के लिए संसद से सलाह लेना जरूरी है और बिना कानूनी आधार के एयरस्पेस देना संभव नहीं है।

    इस विरोध के बाद प्रबोवो सरकार दबाव में आ गई। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने तुरंत सफाई देते हुए कहा कि अमेरिकी विमानों को ओवरफ्लाइट एक्सेस देने का प्रस्ताव फाइनल डील का हिस्सा नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि यह सिर्फ “लेटर ऑफ इंटेंट” के स्तर पर चर्चा में था और अभी न तो अंतिम है और न ही बाध्यकारी। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी भी समझौते में इंडोनेशिया की संप्रभुता और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहेंगे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब यह डील फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है।
  • जब बोले चूड़ियां के सेट पर मचा था हंगामा ,करण जौहर हुए बेहोश और बजट ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

    जब बोले चूड़ियां के सेट पर मचा था हंगामा ,करण जौहर हुए बेहोश और बजट ने तोड़े सारे रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । बॉलीवुड में कई गाने ऐसे बने हैं जो सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं बल्कि इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं और ऐसा ही एक गाना है बोले चूड़ियां जो फिल्म कभी खुशी कभी गम का हिस्सा है यह गाना आज भी शादियों और सेलिब्रेशन की जान माना जाता है लेकिन इसकी शूटिंग की कहानी उतनी ही दिलचस्प और हैरान करने वाली है

    इस गाने को बनाने के पीछे जितनी मेहनत और पैसा लगाया गया वह उस समय के हिसाब से चौंकाने वाला था फिल्म के निर्देशक करण जौहर इस गाने को बेहद भव्य बनाना चाहते थे और यही वजह थी कि सेट डिजाइन से लेकर कॉस्ट्यूम और डांस तक हर चीज को बड़े स्तर पर प्लान किया गया शूटिंग के दौरान लगभग दो सौ डांसर और तीन सौ जूनियर आर्टिस्ट शामिल थे इसके अलावा सेट को और शानदार बनाने के लिए खास झूमर भी तैयार किए गए थे

    लेकिन इतने बड़े सेट और भारी भरकम तैयारियों के बीच स्थिति तब बिगड़ गई जब करण जौहर खुद शूटिंग के दौरान बेहोश हो गए इस बात का खुलासा फिल्ममेकर निखिल आडवाणी ने किया था उन्होंने बताया कि सेट पर अफरातफरी का माहौल था और सभी परफेक्ट शॉट के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे इसी दौरान काजोल को अपने भारी लहंगे में डांस करने में परेशानी हो रही थी जिससे शूट और भी चुनौतीपूर्ण बन गया

    इस गाने का बजट इतना बढ़ गया कि उसने पूरी फिल्म के तय बजट को भी पीछे छोड़ दिया शुरुआत में फिल्म का बजट करीब तीन करोड़ तय किया गया था लेकिन जैसे ही बोले चूड़ियां का सेट तैयार हुआ यह आंकड़ा पार हो गया बताया जाता है कि यश जौहर ने जब यह देखा तो उन्होंने सभी को बुलाया और बजट की शीट को सबके सामने फाड़ दिया यह घटना आज भी बॉलीवुड के दिलचस्प किस्सों में गिनी जाती है

    साल 2001 में रिलीज हुई यह फिल्म उस समय की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक बनी इसमें अमिताभ बच्चन जया बच्चन शाहरुख खान काजोल ऋतिक रोशन और करीना कपूर खान जैसे बड़े सितारे नजर आए फिल्म ने दुनियाभर में शानदार कमाई की और करीब एक सौ उन्नीस करोड़ का आंकड़ा पार किया

    हालांकि फिल्म की सफलता के पीछे कुछ भावनात्मक पहलू भी जुड़े थे काजोल के लिए यह समय निजी जीवन में काफी कठिन था क्योंकि इसी दौरान उन्हें मिसकैरेज का सामना करना पड़ा था उन्होंने बाद में बताया कि फिल्म की सफलता के बावजूद वह अंदर से काफी टूट चुकी थीं

    फिल्म से जुड़ा एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि इसमें शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान ने राहुल के बचपन का किरदार निभाया था वहीं कॉमेडियन जॉनी लीवर और उनके बेटे जेसी लीवर भी पहली बार साथ नजर आए

    बोले चूड़ियां सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि एक ऐसी कहानी है जिसमें जुनून मेहनत और जोखिम सब कुछ शामिल है शायद यही वजह है कि यह गाना आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है और एक बिलियन से ज्यादा व्यूज के साथ इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है

  • सोमी अली ने धर्मेंद्र के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते और जीवनभर के जुड़ाव को किया याद..

    सोमी अली ने धर्मेंद्र के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते और जीवनभर के जुड़ाव को किया याद..


    नई दिल्ली: 
     हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को लेकर अभिनेत्री सोमी अली द्वारा साझा की गई यादों ने फिल्म जगत में एक बार फिर भावनात्मक माहौल पैदा कर दिया है। लंबे समय तक भारतीय सिनेमा में सक्रिय रहे धर्मेंद्र अपनी सादगी, अपनापन और मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके निधन के बाद भी उनके प्रशंसक और फिल्मी दुनिया से जुड़े लोग लगातार उन्हें याद कर रहे हैं। इसी क्रम में सोमी अली ने उनके साथ अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव सामने रखा है।

    सोमी अली ने बताया कि उनके जीवन के शुरुआती दौर में धर्मेंद्र से उनकी मुलाकात एक निजी अवसर पर हुई थी, जहां बातचीत बेहद सहज और आत्मीय माहौल में हुई। इस मुलाकात के दौरान साधारण बातचीत और अपनत्व ने दोनों के बीच ऐसा रिश्ता बना दिया जिसे उन्होंने पिता और बेटी जैसे भावनात्मक जुड़ाव के रूप में महसूस किया। उनके अनुसार धर्मेंद्र का व्यवहार हमेशा बेहद सरल और स्नेहपूर्ण रहा, जिससे उनके आसपास मौजूद हर व्यक्ति को अपनापन महसूस होता था।

    अभिनेत्री ने यह भी साझा किया कि समय के साथ यह रिश्ता और गहरा होता गया और उनके जीवन के कठिन समय में धर्मेंद्र ने उन्हें मानसिक रूप से सहारा दिया। उन्होंने कहा कि जब भी जीवन में चुनौतियां आईं, धर्मेंद्र ने एक मार्गदर्शक की तरह उन्हें हिम्मत दी और सकारात्मक रहने के लिए प्रेरित किया। यह जुड़ाव केवल औपचारिक पहचान तक सीमित नहीं रहा बल्कि भावनात्मक रूप से जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

    सोमी अली ने फिल्मी करियर के दौरान धर्मेंद्र के साथ काम करने के अनुभव को भी याद किया, जिसमें दोनों ने एक फिल्म में साथ काम किया था। इस दौरान उनके बीच पेशेवर सहयोग के साथ एक मजबूत समझ विकसित हुई, जिसने उनके रिश्ते को और गहराई दी। फिल्म के सेट पर भी धर्मेंद्र का व्यवहार बेहद सहज और सहयोगी बताया गया, जिससे काम का माहौल सकारात्मक बना रहा।

    धर्मेंद्र को हिंदी सिनेमा में ऐसे अभिनेता के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने अपने अभिनय के साथ-साथ अपने मानवीय स्वभाव से भी लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी लोकप्रियता केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके व्यक्तित्व की सरलता और गरिमा ने उन्हें हर पीढ़ी के दर्शकों के लिए खास बना दिया। सोमी अली की यह यादें इस बात को फिर से उजागर करती हैं कि फिल्मी दुनिया में कई रिश्ते समय के साथ भावनात्मक गहराई प्राप्त कर लेते हैं।

    उनकी साझा की गई भावनात्मक बातें इस ओर संकेत करती हैं कि सिनेमा केवल अभिनय और मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह इंसानी रिश्तों और अनुभवों का एक ऐसा संसार है जो कलाकारों के बीच जीवनभर के जुड़ाव पैदा कर सकता है।

  • अर्शदीप सिंह की शुरुआती गेंदबाजी से पलटा पूरा मैच, पंजाब किंग्स की बड़ी जीत

    अर्शदीप सिंह की शुरुआती गेंदबाजी से पलटा पूरा मैच, पंजाब किंग्स की बड़ी जीत

    नई दिल्ली:   इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में पंजाब किंग्स ने एक बार फिर अपने संतुलित खेल और मजबूत रणनीति से प्रभावित किया। मुंबई इंडियंस के खिलाफ मिली सात विकेट की यह जीत टीम के आत्मविश्वास को और ऊंचाई देने वाली साबित हुई। मुकाबले का सबसे बड़ा मोड़ तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह का शुरुआती स्पेल रहा जिसने पूरी मैच की दिशा बदल दी और मुंबई की मजबूत शुरुआत को दबाव में बदल दिया। इस जीत ने पंजाब किंग्स को अंकतालिका में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर दिया।

    मुंबई इंडियंस ने टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित ओवरों में छह विकेट के नुकसान पर 195 रन बनाए। टीम की शुरुआत अच्छी रही और मध्यक्रम ने भी योगदान दिया लेकिन असली चमक क्विंटन डिकॉक की पारी में देखने को मिली जिन्होंने 60 गेंदों पर नाबाद 112 रन बनाए। उनकी इस पारी में आक्रामकता और तकनीक का शानदार मिश्रण था जिसने टीम को एक मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। हालांकि शुरुआती ओवरों में गिरे विकेटों ने मुंबई की लय को प्रभावित किया और अंतिम ओवरों में रन गति को और तेज करने में कठिनाई हुई।

    पंजाब किंग्स की ओर से अर्शदीप सिंह ने नई गेंद से शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने शुरुआती ओवरों में लगातार दबाव बनाते हुए मुंबई के शीर्ष क्रम को झटका दिया। अपने स्पेल में उन्होंने चार ओवर में 22 रन देकर तीन महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। उनकी गेंदबाजी की सबसे बड़ी खासियत उनकी लाइन और लेंथ में निरंतरता और यॉर्कर की सटीकता रही। शुरुआती ओवरों में मिले विकेटों ने मुंबई की बल्लेबाजी को पूरी तरह अस्थिर कर दिया और टीम को बड़े स्कोर की ओर बढ़ने से रोक दिया।

    अर्शदीप की इस प्रभावशाली गेंदबाजी ने पंजाब किंग्स को मैच में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। शुरुआती सफलताओं के बाद गेंदबाजों में आत्मविश्वास बढ़ा और पूरी गेंदबाजी इकाई ने मिलकर विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखा। टी20 क्रिकेट में अक्सर शुरुआती ओवरों का प्रभाव निर्णायक साबित होता है और इस मैच में भी यही देखने को मिला जहां शुरुआती विकेटों ने पूरे मुकाबले की दिशा बदल दी।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब किंग्स की शुरुआत बेहद आक्रामक रही। बल्लेबाजों ने बिना किसी दबाव के रन गति को तेज रखा और शुरुआत से ही मैच पर पकड़ बना ली। प्रभसिमरन सिंह ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 39 गेंदों पर 80 रन बनाए और पारी को मजबूत आधार दिया। वहीं कप्तान श्रेयस अय्यर ने जिम्मेदारी भरी पारी खेलते हुए 35 गेंदों पर 66 रन बनाए। दोनों खिलाड़ियों की साझेदारी ने मैच को पूरी तरह पंजाब किंग्स के पक्ष में कर दिया और विपक्षी गेंदबाजों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।

    पंजाब किंग्स ने केवल 16 ओवर और तीन गेंदों में तीन विकेट खोकर 198 रन बनाकर लक्ष्य हासिल कर लिया। यह जीत टीम की बल्लेबाजी की गहराई और आक्रामक मानसिकता को दर्शाती है। टीम ने एक बार फिर साबित किया कि सही रणनीति और आत्मविश्वास के साथ बड़े लक्ष्य भी आसानी से हासिल किए जा सकते हैं।

  • साउथ की फीमेल लीड फिल्मों का बॉक्स ऑफिस जलवा किसने मारी बाजी बनी नंबर वन क्वीन

    साउथ की फीमेल लीड फिल्मों का बॉक्स ऑफिस जलवा किसने मारी बाजी बनी नंबर वन क्वीन


    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा में लंबे समय तक हीरो केंद्रित फिल्मों का दबदबा रहा लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तस्वीर तेजी से बदली है अब कई ऐसी फिल्में सामने आई हैं जिनमें हीरोइन ने पूरी कहानी को अपने कंधों पर उठाया और बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार सफलता हासिल की इन फिल्मों ने यह साबित किया कि मजबूत कहानी और दमदार अभिनय के दम पर फीमेल लीड फिल्में भी बड़ी कमाई कर सकती हैं

    इस सूची में सबसे ऊपर नाम आता है कल्याणी प्रियदर्शन की फिल्म लोका चैप्टर 1 का जिसमें उन्होंने चंद्रा नाम के एक बेहद खास और रहस्यमयी किरदार को निभाया यह किरदार साधारण नहीं बल्कि एक अनोखी शक्ति से भरपूर है फिल्म ने दर्शकों को अपने कॉन्सेप्ट और प्रस्तुति से बांध कर रखा और वर्ल्डवाइड लगभग 303 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर डाली यह आंकड़ा इसे फीमेल लीड फिल्मों की रेस में सबसे आगे ले जाता है

    दूसरे स्थान पर कीर्ति सुरेश की चर्चित फिल्म महानती है जो साउथ इंडस्ट्री की महान अभिनेत्री के जीवन पर आधारित है इस फिल्म में कीर्ति ने भावनाओं से भरा ऐसा अभिनय किया कि उन्हें नेशनल अवॉर्ड तक मिला फिल्म एक कलाकार की सफलता संघर्ष और व्यक्तिगत टूटन की कहानी दिखाती है और करीब 85 करोड़ की कमाई के साथ यह भी बड़ी हिट साबित हुई

    तीसरे नंबर पर अनुष्का शेट्टी की भव्य ऐतिहासिक फिल्म रुद्रमादेवी आती है जिसमें उन्होंने एक शक्तिशाली रानी का किरदार निभाया फिल्म की भव्यता और अनुष्का की स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया और इसने लगभग 84 करोड़ का कलेक्शन किया

    अनुष्का शेट्टी की ही फिल्म अरुंधति चौथे स्थान पर है यह एक ऐसी फिल्म है जिसने अपने समय में महिला केंद्रित सिनेमा को नई पहचान दी हॉरर और ड्रामा के मेल से बनी इस फिल्म ने करीब 70 करोड़ की कमाई की और आज भी इसे एक कल्ट फिल्म माना जाता है

    पांचवें स्थान पर भी अनुष्का शेट्टी की फिल्म भागमती है जिसमें उन्होंने एक मजबूत और रहस्यमयी किरदार निभाया फिल्म ने सस्पेंस और थ्रिल के दम पर दर्शकों को बांधे रखा और लगभग 67 करोड़ का कलेक्शन किया छठे नंबर पर नजरिया नाजिम की फिल्म सुकशमदर्शिनि आती है जिसने लगभग 54 करोड़ से ज्यादा की कमाई की यह फिल्म कंटेंट के दम पर आगे बढ़ी और दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला

    सातवें स्थान पर सामंथा रुथ प्रभु की फिल्म ओह बेबी है जो एक अलग तरह की कहानी लेकर आई इस फिल्म में उम्र और जीवन के अनुभव को हल्के फुल्के अंदाज में दिखाया गया और इसने करीब 40 करोड़ की कमाई की

    इन सभी फिल्मों की सफलता यह साफ दिखाती है कि साउथ सिनेमा में अब कहानियां बदल रही हैं और दर्शक भी मजबूत महिला किरदारों को उतना ही पसंद कर रहे हैं जितना बड़े हीरो को यह ट्रेंड आने वाले समय में और भी मजबूत हो सकता है जहां हीरोइनों का दबदबा और बढ़ेगा और वे बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बनाती नजर आएंगी

  • महिला आरक्षण पर सियासी घमासान: कंगना रनौत का विपक्ष पर हमला, ‘बेटियों के प्रति सोच’ पर उठाए सवाल

    महिला आरक्षण पर सियासी घमासान: कंगना रनौत का विपक्ष पर हमला, ‘बेटियों के प्रति सोच’ पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर संसद में बहस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने विपक्ष पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि उनके रुख से “बेटियों के प्रति उनकी सोच” उजागर हो रही है।

    कंगना रनौत ने कहा कि विपक्ष परिसीमन को लेकर अनावश्यक बहाने बना रहा है, जबकि इस मुद्दे पर स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश देख रहा है कि विपक्ष की मंशा क्या है और वह महिला आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है।

    परिसीमन पर ‘भ्रम फैलाने’ का आरोप

    भाजपा के एक अन्य सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण कानून को लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों को अधिक सीटों का लाभ मिल सकता है।
    सूर्या ने याद दिलाया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में सर्वसम्मति से पारित हुआ था और तब सभी दल इस बात पर सहमत थे कि इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा। उनके मुताबिक अब विपक्ष इस मुद्दे पर यू-टर्न ले रहा है।

    सत्ता और विपक्ष आमने-सामने

    महिला आरक्षण में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन से जुड़े प्रस्तावों पर एनडीए और विपक्ष के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है।
    जहां सत्तापक्ष का कहना है कि महिलाओं को आरक्षण के लिए लंबे समय से इंतजार करना पड़ा है, वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार की कार्यप्रणाली देश के संघीय ढांचे को प्रभावित कर सकती है।

    संसद में पेश हुए अहम विधेयक

    लोकसभा में चर्चा के लिए

    ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026’
    ‘परिसीमन विधेयक, 2026’
    ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’

    पेश किए गए हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की योजना है। इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है।

    संख्याबल की चुनौती

    वर्तमान में लोकसभा में एनडीए के पास 292 सांसद हैं, जबकि विपक्षी दलों के पास 233 सदस्य हैं। संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।

    ऐसे में यह मुद्दा न केवल नीतिगत बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम बन गया है, जिस पर आने वाले दिनों में और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।