Author: bharati

  • जबलपुर के श्रमोदय विद्यालय में सांप्रदायिक विवाद ने पकड़ा तूल प्राचार्य पर गंभीर आरोपों के बाद जांच के आदेश

    जबलपुर के श्रमोदय विद्यालय में सांप्रदायिक विवाद ने पकड़ा तूल प्राचार्य पर गंभीर आरोपों के बाद जांच के आदेश


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रमोदय विद्यालय जो शिक्षा का मंदिर माना जाता है वहां पर सांप्रदायिक भेदभाव और उत्पीड़न के आरोपों ने माहौल को पूरी तरह से तनावपूर्ण बना दिया है। स्कूल के प्रभारी प्राचार्य अब्दुल शाहिर शेख के खिलाफ हिंदू शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ भेदभाव करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामला उजागर होने के बाद लोक शिक्षा विभाग के अपर संचालक ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं जिससे पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है।

    बताया जा रहा है कि यह विवाद उस समय और गहरा गया जब रामनवमी के अवसर पर छात्रावास में कुछ विद्यार्थियों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। आरोप है कि इस पर प्राचार्य और उनके सहयोगियों ने नाराजगी जताई और छात्रों के साथ मारपीट की गई। इस घटना ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच आक्रोश को जन्म दिया। वहीं अतिथि शिक्षकों ने भी प्राचार्य पर लगातार प्रताड़ना और अपमान करने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्कूल का माहौल डर और दबाव से भरा हुआ है जहां खुलकर अपनी बात रखना भी मुश्किल हो गया है।

    मामले को और गंभीर बनाता है स्टाफ रूम में लगाए गए कैमरों को लेकर उठे सवाल। शिक्षकों का आरोप है कि उनकी गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की जाती है और उसका दुरुपयोग किया जाता है। इससे शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है और कार्यस्थल का वातावरण प्रभावित हुआ है। इसके अलावा स्कूल में प्रशासनिक अनियमितताओं की भी शिकायतें सामने आई हैं जो जांच का विषय बन चुकी हैं।

    इन सभी घटनाओं का असर छात्रों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। लगभग 120 से अधिक विद्यार्थियों ने स्कूल से अपना नाम कटवा लिया है और ट्रांसफर सर्टिफिकेट ले लिया है। यह संख्या अपने आप में इस बात का संकेत है कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी शिकायत की थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई जिससे उनका भरोसा टूट गया।

    मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान खींचा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम विभाग से जुड़े विशेष सहायक मंत्री द्वारा भी इस संबंध में पत्र भेजा गया है। इसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और जांच के आदेश दिए गए। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

    यह मामला केवल एक स्कूल का नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक चेतावनी है कि शिक्षा के स्थान पर किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं हो सकता। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह जरूरी हो जाता है कि सख्त कार्रवाई के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। फिलहाल छात्र अभिभावक और शिक्षक सभी निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।

  • डल स्किन से छुटकारा पाकर पाएं नेचुरल ग्लो, सेब, चुकंदर और गाजर का जूस बना सकता है त्वचा को अंदर से हेल्दी और चमकदार

    डल स्किन से छुटकारा पाकर पाएं नेचुरल ग्लो, सेब, चुकंदर और गाजर का जूस बना सकता है त्वचा को अंदर से हेल्दी और चमकदार


    नई दिल्ली:
    गर्मी के मौसम में धूल, प्रदूषण और तेज धूप का असर सबसे पहले हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। धीरे-धीरे चेहरा अपनी प्राकृतिक चमक खोने लगता है और स्किन डल व थकी हुई नजर आने लगती है। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल बाहरी स्किन केयर ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर को अंदर से पोषण देना भी जरूरी होता है। इसी कारण सेब, चुकंदर और गाजर से बना प्राकृतिक जूस त्वचा के लिए एक सरल और प्रभावी उपाय माना जा रहा है, जो शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स देकर स्किन को स्वस्थ बनाने में मदद कर सकता है।

    सेब इस जूस का अहम हिस्सा माना जाता है, जिसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में कोलेजन के निर्माण को सपोर्ट करते हैं, जिससे त्वचा की कसावट बनी रहती है और उम्र बढ़ने के लक्षण धीरे-धीरे कम दिखाई देते हैं। सेब शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक नमी और चमक बनी रहती है।

    चुकंदर को खून को शुद्ध करने वाला एक प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। इसमें मौजूद तत्व शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा तक ऑक्सीजन और पोषण अधिक मात्रा में पहुंचता है। जब त्वचा को पर्याप्त पोषण मिलता है, तो वह अधिक साफ, चमकदार और स्वस्थ नजर आती है। चुकंदर शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक माना जाता है, जिसका सीधा असर त्वचा की गुणवत्ता पर दिखाई देता है।

    गाजर इस जूस का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसमें बीटा कैरोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह शरीर में विटामिन ए में बदलकर त्वचा की कोशिकाओं की मरम्मत और नए सेल्स के निर्माण में मदद करता है। यह त्वचा को सूखने से बचाकर उसे मुलायम और हेल्दी बनाए रखने में सहायक होता है, जिससे चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है।

    इन तीनों सामग्रियों का मिश्रण शरीर को अंदर से पोषण देने के साथ-साथ डिटॉक्स करने में भी मदद कर सकता है। नियमित रूप से इस प्राकृतिक जूस का सेवन त्वचा की डलनेस को कम करने, उसे साफ रखने और धीरे-धीरे प्राकृतिक ग्लो बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

  • एमपी में तेज गर्मी का दौर शुरू, तापमान बढ़ने की संभावना, 16-17 अप्रैल से कई जिलों में लू का अलर्ट

    एमपी में तेज गर्मी का दौर शुरू, तापमान बढ़ने की संभावना, 16-17 अप्रैल से कई जिलों में लू का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में अब मौसम पूरी तरह बदल चुका है। बादल और बारिश का दौर खत्म होते ही तेज धूप ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे गर्मी तेजी से बढ़ रही है। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 16 और 17 अप्रैल से राज्य के कई जिलों में भीषण लू चलने की संभावना है।

    सोमवार को रतलाम सबसे गर्म जिला दर्ज किया गया, जहां तापमान 41.2°C तक पहुंच गया। इसके अलावा धार, नर्मदापुरम और खरगोन में भी पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर दर्ज हुआ। मौसम विभाग के अनुसार 16 और 17 अप्रैल को रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, खरगोन, खंडवा, सीधी, सिंगरौली, मंडला और बालाघाट जिलों में लू का असर देखने को मिलेगा। वहीं भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी गर्म हवाएं लोगों को परेशान करेंगी।

    15 अप्रैल से एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, लेकिन यह काफी कमजोर रहेगा। ऐसे में इससे गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। विभाग का कहना है कि अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा आमतौर पर सबसे ज्यादा गर्म होता है। ग्वालियर में तापमान 45°C और भोपाल में 44°C तक पहुंचने का रिकॉर्ड भी रहा है।

    इससे पहले अप्रैल के शुरुआती दिनों में मौसम अलग ही रंग में नजर आया। 1 से 9 अप्रैल के बीच प्रदेश में लगातार आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर चला। 15 से ज्यादा जिलों में ओले गिरे, जबकि करीब 45 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इस दौरान ग्वालियर में सबसे ज्यादा वर्षा हुई।

  • देश में इस साल सामान्य से कम होगी मॉनसूनी बारिश….IMD ने जताई कई क्षेत्रों में सूखे की आशंका

    देश में इस साल सामान्य से कम होगी मॉनसूनी बारिश….IMD ने जताई कई क्षेत्रों में सूखे की आशंका


    नई दिल्ली।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department- IMD) ने कहा है कि इस साल सामान्य से भी कम मॉनसूनी बारिश (Monsoon Rain) होगी। वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Southwest Monsoon) को लेकर लंबी अवधि का पूर्वानुमान जारी करते हुए मौसम विभाग ने कहा कि इस साल देश में मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है, जिससे खेतीबाड़ी, पशुपालन और जल संसाधनों पर बुरा असर पड़ सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम यानी 92% (±5%) रह सकती है। यह लंबी अवधि यानी 1971 से 2020 तक के औसत 87 सेंटीमीटर के अनुमान पर आधारित है। इसका मतलब है कि बारिश सामान्य से थोड़ी कम हो सकती है।

    मौसम विभाग ने पूर्वानुमानों में कहा है कि इस साल अल नीनो का प्रभाव रह सकता है, जिसकी वजह से न केवल प्रचंड गर्मी पड़ेगी बल्कि बारिश भी कम होगी। विभाग ने कहा है कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की तटस्थ स्थितियाँ रहने की सबसे अधिक संभावना है। इसके बाद, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम के दौरान अल नीनो की मजबूत स्थिति बनने की बहुत अधिक संभावना है। इस वजह से मॉनसून कमजोर रह सकता है और सामान्य से कम बारिश हो सकती है। IMD के मुताबिक, अप्रैल से जून तक स्थिति सामान्य रहेगी लेकिन इसके बाद मॉनसून के दौरान अल-नीनो बनने की संभावना अधिक है।


    किन इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD ने देश भर के लिए जारी लंबी अवधि के पूर्वामुमानों में कहा है कि भौगोलिक रूप से, देश के कई हिस्सों में मौसमी वर्षा सामान्य से कम रहने की अधिक संभावना है। हालांकि, IMD ने पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने ये भी बताया कि फिलहाल हिंद महासागर में तटस्थ हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) की स्थितियाँ बनी हुई हैं। यानी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं और समयपर मॉनसून के दस्तक देने की संभावना है।


    कहां-कहां सूखे के आसार?

    IMD ने कहा कि जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उत्तरी गोलार्ध का हिम आवरण (Snow Cover) और साथ ही यूरेशिया का हिम आवरण भी सामान्य से थोड़ा ही कम रहा है, जो दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के विकसित होने और मॉनसूनी मौसमी वर्षा के लिए अनुकूल है। IMD के दीर्घ अवधि वाले इस पूर्वानुमान के दस्तावेज में फिलहाल सूखा घोषित होने वाली जगहों की सूची नहीं दी गई है, लेकिन जिन क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश/सूखे जैसे हालात बनने की आशंका ज्यादा बताई गई है, उनमें उत्तर भारत के कई हिस्से, खासकर गंगा के मैदानी और आसपास के पठारी क्षेत्र शामिल हैं।


    कुछ इलाकों में बेहतर बारिश की उम्मीद

    इसके अलावा मध्य भारत के बड़े हिस्से के सूखा से प्रभावित रहने की आशंका जताई गई है। ये वैसे इलाके हैं, जहां सामान्य से कम बारिश के अनुमान जताए गए हैं। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से और आंतरिक क्षेत्रों में भी कम बारिश के संकेत दिए गए हैं। IMD के मैप में दिखाया गया है कि देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, जबकि पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम के कुछ हिस्से और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्से जैसे कुछ इलाकों में बारिश इनके मुकाबले बेहतर स्थिति में रह सकता हैं।


    सामान्य से कम बारिश का क्या असर

    मौसम विभाग का कहना है कि मॉनसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम बारिश होने की दशा में खेती पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि कम बारिश से बुवाई, फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है खेती की बढ़ सकती है। मॉनसूनी बारिश का खेतीबाड़ी पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा करते हुए IMD के वैज्ञानिकों ने बताया कि कम बारिश की मार आम आदमी तक को परेशान कर सकता है। इसकी वजह से सब्जी-दाल महंगी हो सकती है और कमजोर मॉनसून का असर फूड सप्लाई पर पड़ सकता है, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।


    खेतीबाड़ी से लेकर ऑटो सेक्टर तक असर

    मौसम विज्ञानियों ने बताया कि खेतीबाड़ी बाधित होने की दशा में ग्रामीण आमदनी पर भी असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, खेती कमजोर होने से गांवों में नकदी कम आएगी, जिसका असर ग्रामीण खर्च और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कम बारिश से ट्रैक्टर और टू-व्हीलर की बिक्री भी प्रभावित हो सकती है और ग्रामीण मांग कमजोर होने से ऑटो कंपनियों की बिक्री पर असर पड़ सकता है।

  • MP: मंडला में एक घर में 795 कुत्तों के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स बरामद… नसबंदी के नाम पर घोटाले की आशंका

    MP: मंडला में एक घर में 795 कुत्तों के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स बरामद… नसबंदी के नाम पर घोटाले की आशंका


    मंडला।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मंडला (Mandla) में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक घर से सैकड़ों की संख्या में कुत्तों के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स (Dogs Reproductive Organs) बरामद हुए हैं. इस पूरे मामले ने नसबंदी (Sterilization) के नाम पर बड़े घोटाले की आशंका को जन्म दे दिया है. पुलिस अब पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

    दरअसल, नगर पालिका मंडला (Municipality Mandla) ने कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर जारी किया गया था, जिसमें प्रति नसबंदी 679 रुपये तय किए गए थे. जबलपुर की एक प्राइवेट एनजीओ ‘मां अंबे एंटरप्राइजेज’ को यह ठेका दिया गया था, लेकिन आरोप है कि एजेंसी ने शहर में एक भी कुत्ते की नसबंदी नहीं की।

    तय समय में काम शुरू न करने पर 2 अप्रैल को टेंडर निरस्त कर दिया गया था. इसी बीच एक एनिमल एक्टिविस्ट निशा सिंह ने शिकायत दर्ज कराई कि जिस कमरे में एनजीओ के लोग ठहरे थे, वहां संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं।

    शिकायत के बाद नगर पालिका, पुलिस, तहसीलदार और पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने छापेमारी की. छापे के दौरान दो कंटेनरों में फॉर्मलीन में डूबे 795 कुत्तों के अंग बरामद किए गए, जिनमें 518 नर और 277 मादा कुत्तों के अंग शामिल हैं।

    शिकायतकर्ता निशा सिंह का आरोप है कि इन अंगों को बाहर से लाकर स्टॉक में रखा गया था, ताकि इन्हें दिखाकर नसबंदी के नाम पर फर्जी बिल पास कराए जा सकें।


    पशु चिकित्सकों ने भी जताई हैरानी

    पशु चिकित्सक सुमित पटेल ने बताया कि नसबंदी प्रक्रिया में नर कुत्तों के टेस्टिकल्स और मादा कुत्तों के ओवरी व यूट्रस निकाले जाते हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर अंगों का मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है।


    नगर पालिका ने FIR के लिए दिया आवेदन

    इस मामले में मंडला के मुख्य नगर पालिका अधिकारी गजेंद्र नाफड़े ने बताया कि कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर निकला था. जबलपुर की एजेंसी ने इसका टेंडर भरा था. उनका टेंडर सैंक्शन भी हुआ था, लेकिन एजेंसी लने कोई काम नहीं किया. उनको दो-तीन नोटिस भी दिए गए थे, तो काम नहीं करने से 2 अप्रैल को उनका टेंडर निरस्त कर दिया गया था. इसकी सूचना भी उन्हें दे दी गई थी।

    7 अप्रैल को पशु प्रेमी ने शिकायत दर्ज कराई कि प्राइवेट कंपनी ने जहां रूम लिया था, वहां पर कुत्तों के कुछ संदेहास्पद अंग है. इस संबंध में कलेक्टर की ओर से जांच के निर्देश दिए गए थे, जिस पर तहसीलदार के मार्गदर्शन में नगर पालिका, कोतवाली थाने और वेटरनरी की टीम ने उस कमरे का निरीक्षण किया तो वहां कुछ अंग पाए गए।

    गजेंद्र नाफड़े ने बताया कि यह अंग कहां से ले गए, इसका क्या उद्देश्य था, यह तो जांच का विषय है. इस संबंध में हमने थाना प्रभारी को एफआईआर के लिए आवेदन दिया है. वो उसकी जांच कर रहे हैं और वह अंग कहां से आए थे. यह जांच के बाद ही पता चलेगा।

    सरकार अधिकारी के अनुसार, टेंडर के तहत एक नसबंदी के एवज में 679 रुपये की दर निर्धारित की गई थी. लेकिन एजेंसी ने कोई नसबंदी नहीं की. काम शुरू होने के पहले ही यह मामला सामने आ गया और इस मामले के सामने आने के पहले ही उनका ठेका निरस्त किया जा चुका था। नगर पालिका ने इस मामले में पुलिस को शिकायत सौंप दी है. मंडला एसपी का कहना है कि सभी पक्षों से पूछताछ और जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये अंग कहां से आए और इसके पीछे किसका खेल है?

  • MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में चौकाने वाला मामला… युवाओं को लगी खून लेने की लत

    MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में चौकाने वाला मामला… युवाओं को लगी खून लेने की लत


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया (Government Hospital Hamidia) के मनोरोग विभाग में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने डॉक्टरों को भी सोच में डाल दिया है. यहां हमीदिया अस्पताल में पिछले एक साल में अब तक ऐसे 5 युवा इलाज के लिए पहुंचे हैं, जिन्हें ब्लड कंपोनेंट्स (Blood Components) लेने की आदत पड़ गई है. अब तक आपने शराब, सिगरेट और ड्रग्स जैसे नशों के बारे में सुना होगा. लेकिन यह मामला एक नए और खतरनाक ट्रेंड की ओर इशारा करता है. जहां कुछ युवा खून के तत्वों को ही ताकत बढ़ाने का जरिया मान रहे हैं।

    डॉक्टरों के अनुसार, इन सभी युवाओं की उम्र 18 से 25 साल के बीच है और इन मामलों में एक समान पैटर्न देखने को मिला है. जैसे ही परिवार को इसकी जानकारी मिली। उन्होंने युवाओं की गतिविधियों पर रोक लगा दी. कई दिनों तक समझाने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बाद युवक चिड़चिड़े और आक्रामक हो गए. हालत बिगड़ने पर परिवार उन्हें मनोरोग विशेषज्ञों के पास काउंसलिंग के लिए लेकर पहुंचे।

    डॉक्टरों की प्रारंभिक जांच में तीन मुख्य वजहें सामने आई हैं जिज्ञासा, गलत जानकारी और अवैध माध्यमों की उपलब्धता. बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ वीडियो इस प्रवृत्ति को बढ़ा रहे हैं, जहां यह दावा किया जाता है कि प्लाज्मा या अन्य ब्लड कंपोनेंट्स लेने से ताकत बढ़ती है. तनाव कम होता है और शरीर में ऊर्जा आती है।

    हालांकि, विशेषज्ञ इन दावों को पूरी तरह गलत बताते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि बिना किसी चिकित्सकीय जरूरत के ब्लड कंपोनेंट्स लेना बेहद जोखिम भरा हो सकता है. इससे इंफेक्शन, एलर्जी, सूजन और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है यानी जिस फायदे की उम्मीद में यह कदम उठाया जा रहा है. वह सिर्फ एक भ्रम है, जबकि नुकसान बेहद गंभीर हो सकते हैं।


    विशेषज्ञों की चेतावनी

    हमीदिया अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. जय प्रकाश अग्रवाल के अनुसार, युवा जिसे ताकत समझ रहे हैं, वह सिर्फ एक ‘हाइपोथेटिकल’ यानी काल्पनिक सुख है। इसके वास्तविक परिणाम बेहद खतरनाक हैं. इससे से गैंग्रीन का खतरा यानी गलत तरीके से इन्फ्यूजन लेने से अंग सड़ सकते हैं।

    इसके अलावा, डॉक्टर ने चेताया कि HIV और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा होता है. वहीं, बिना डॉक्टरी सलाह के ब्लड कंपोनेंट लेना तत्काल ‘एनाफिलेक्टिक शॉक’ दे सकता है. यही नहीं, शरीर के अंदरूनी हिस्सों में गंभीर सूजन और अंग भी फेल हो सकते हैं।

  • मौसंबी के छिलके हैं कचरा नहीं खजाना, जानिए 4 आसान और असरदार उपयोग..

    मौसंबी के छिलके हैं कचरा नहीं खजाना, जानिए 4 आसान और असरदार उपयोग..

    नई दिल्ली ।मौसंबी का जूस पीकर अक्सर लोग इसके छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन वास्तव में ये छिलके कई तरह से बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। मौसंबी एक पौष्टिक फल है, और इसके छिलकों में भी प्राकृतिक तेल, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा, घर की सफाई और ताजगी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। सही तरीके से इनका उपयोग करने पर ये छिलके रोजमर्रा की कई समस्याओं का आसान और सस्ता समाधान बन सकते हैं।

    मौसंबी के छिलकों का सबसे लोकप्रिय उपयोग त्वचा की देखभाल में किया जाता है। इनमें मौजूद प्राकृतिक गुण त्वचा को साफ करने और उसे निखार देने में सहायक हो सकते हैं। छिलकों को धूप में सुखाकर उनका पाउडर तैयार किया जा सकता है, जिसे गुलाब जल या दही के साथ मिलाकर फेस पैक की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। यह त्वचा को ताजगी देने के साथ-साथ दाग-धब्बों को हल्का करने में भी मदद कर सकता है। नियमित उपयोग से त्वचा में प्राकृतिक चमक बनी रहती है।

    इसके अलावा मौसंबी के छिलके घर की सफाई में भी काफी उपयोगी हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक ऑयल किचन की सतह, सिंक और अन्य जगहों पर जमी चिकनाई को हटाने में मदद करते हैं। छिलकों को रगड़कर इस्तेमाल करने से सतह साफ होने के साथ-साथ हल्की खुशबू भी फैलती है, जिससे घर अधिक स्वच्छ और ताजगी भरा महसूस होता है। यह एक प्राकृतिक क्लीनर के रूप में काम कर सकता है।

    मौसंबी के छिलकों का उपयोग घर में प्राकृतिक फ्रेशनर के रूप में भी किया जा सकता है। इन्हें सुखाकर अलमारी या कमरे के कोनों में रखने से नमी और बदबू को कम करने में मदद मिलती है। इससे वातावरण में ताजगी बनी रहती है और रासायनिक फ्रेशनर की जरूरत कम हो जाती है।

    इसके अलावा इन छिलकों का एक और उपयोग कीट नियंत्रण में भी देखा जाता है। इनकी तेज प्राकृतिक सुगंध कुछ हद तक मच्छरों और छोटे कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है, जिससे यह एक सरल और घरेलू उपाय बन जाता है।

    इस तरह मौसंबी के छिलके केवल कचरा नहीं बल्कि एक उपयोगी प्राकृतिक संसाधन हैं, जिन्हें अपनाकर हम न सिर्फ पैसे बचा सकते हैं बल्कि अपने घर को भी अधिक स्वच्छ, सुगंधित और स्वस्थ बना सकते हैं।

  • मानसिक शांति और शरीर की आंतरिक ठंडक बनाए रखने में चंदन सहायक माना जाता है

    मानसिक शांति और शरीर की आंतरिक ठंडक बनाए रखने में चंदन सहायक माना जाता है


    नई दिल्ली। भीषण गर्मी के मौसम में जब तापमान लगातार बढ़ रहा है, ऐसे समय में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में कई प्राकृतिक उपायों को शरीर के लिए बेहद लाभकारी माना गया है। इन्हीं में से एक प्रमुख और प्राचीन औषधि है चंदन, जिसे अपनी शीतल प्रकृति और औषधीय गुणों के कारण विशेष स्थान प्राप्त है।

    चंदन एक सुगंधित लकड़ी है, जिसका वानस्पतिक नाम सैंटलम एल्बम लिन बताया जाता है। इसका सबसे उपयोगी भाग इसका हार्टवुड होता है, जिसे औषधीय प्रयोगों में अधिक प्रभावी माना जाता है। पारंपरिक आयुर्वेद में चंदन को शरीर को ठंडक प्रदान करने, मानसिक शांति देने और कई शारीरिक विकारों को संतुलित करने वाली प्राकृतिक औषधि के रूप में जाना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार चंदन शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करने में सहायक होता है, जिससे गर्मी के मौसम में होने वाली जलन, थकान और कमजोरी जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। इसकी शीतल प्रकृति शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे व्यक्ति को ठंडक और सुकून का अनुभव होता है।

    आयुर्वेदिक दृष्टि से चंदन को रक्त से जुड़ी समस्याओं में भी उपयोगी माना गया है। माना जाता है कि यह शरीर में रक्त को शुद्ध करने और संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा यह ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है, जिससे डायबिटीज से पीड़ित लोगों को राहत मिल सकती है।

    चंदन का उपयोग मूत्र संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी बताया गया है। विशेष रूप से पेशाब में जलन और बार-बार पेशाब आने जैसी स्थितियों में यह राहत प्रदान कर सकता है। इसकी शीतलता शरीर के अंदरूनी ताप को नियंत्रित करती है, जिससे मूत्र मार्ग से जुड़ी समस्याओं में सुधार देखने को मिलता है।

    त्वचा संबंधी परेशानियों में भी चंदन का प्रयोग पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। इसके लेप से त्वचा पर होने वाले मुंहासे, जलन और सूजन जैसी समस्याओं में आराम मिलने की बात कही जाती है। यह त्वचा को ठंडक प्रदान कर उसे शांत करने में सहायक होता है।

    इसके अतिरिक्त चंदन मानसिक तनाव को कम करने और हृदय को शांति प्रदान करने में भी उपयोगी माना जाता है। इसकी सुगंध और ठंडक देने वाले गुण शरीर को आंतरिक रूप से संतुलित रखते हैं, जिससे मानसिक स्थिरता बनी रहती है।

  • Aaj Ka Rashifal 14 April 2026: शुक्ल योग में चमकेगा भाग्य, इन 4 राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ

    Aaj Ka Rashifal 14 April 2026: शुक्ल योग में चमकेगा भाग्य, इन 4 राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ


    नई दिल्ली।14 अप्रैल 2026, मंगलवार का दिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि में रहेगा। शतभिषा नक्षत्र और शुक्ल योग का प्रभाव दिन को विशेष रूप से शुभ और ऊर्जा से भरपूर बना रहा है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार यह दिन कई राशियों के लिए अवसर और सफलता लेकर आएगा।

    मेष राशि (Aries)

    आज जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। परिवार के साथ मिलकर पुरानी समस्याएं सुलझेंगी, लेकिन क्रोध और जल्दबाजी से बचें।

    वृषभ राशि (Taurus)

    नौकरी में उतार-चढ़ाव रहेगा। बॉस से तालमेल जरूरी है। निवेश से लाभ मिल सकता है, संतान से खुशी मिलेगी।

    मिथुन राशि (Gemini)

    मिथुन राशि वालों के लिए दिन बेहद शुभ है।
    सरकारी टेंडर या सरकारी कामों में सफलता मिलने के योग हैं। बॉस प्रसन्न रहेंगे और आर्थिक मामलों में सुधार होगा।

    कर्क राशि (Cancer)

    काम में लापरवाही नुकसान दे सकती है। ससुराल पक्ष से आर्थिक लाभ संभव है। आत्मविश्वास बनाए रखें।

    सिंह राशि (Leo)

    सरकारी योजनाओं से लाभ मिलेगा। जीवनसाथी से हल्का विवाद हो सकता है, सावधानी रखें।

    कन्या राशि (Virgo)

    स्वास्थ्य का ध्यान रखें। बिजनेस में विस्तार के अवसर मिलेंगे, लेकिन गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें।

    तुला राशि (Libra)

    नए लोगों से लाभ मिलेगा। धन मामलों में सावधानी जरूरी है। वैवाहिक जीवन में तनाव हो सकता है।

    वृश्चिक राशि (Scorpio)

    वृश्चिक राशि के जातकों को करियर में बड़ी सफलता मिलने के योग हैं।
    रुके हुए काम पूरे होंगे और कर्ज से राहत मिल सकती है।

    धनु राशि (Sagittarius)

    घर में मांगलिक कार्य के योग हैं। खर्च बढ़ सकता है लेकिन खुशियां भी आएंगी।

    मकर राशि (Capricorn)

    निवेश के अच्छे अवसर मिलेंगे। जल्दबाजी से बचें और सोच-समझकर निर्णय लें।

    कुंभ राशि (Aquarius)

    कुंभ राशि के लिए दिन आर्थिक रूप से मजबूत रहेगा।
    आय बढ़ने के संकेत हैं और नए संपर्कों से लाभ मिलेगा।

    मीन राशि (Pisces)

    आत्मविश्वास बढ़ेगा। यात्रा और आर्थिक लाभ के योग हैं, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

  • केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 48 वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त सचिव स्तर पर नियुक्ति

    केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 48 वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त सचिव स्तर पर नियुक्ति

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) स्तर के अधिकारियों की नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा लिया गया है।

    जारी आदेश के अनुसार, कुल 48 अधिकारियों को अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इन नियुक्तियों में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) सहित अन्य केंद्रीय सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।

    प्रमुख नियुक्तियां
    कपिल मीणा (IAS) को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है।
    प्रियंका दास (IAS, मध्य प्रदेश कैडर) को नागरिक उड्डयन मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनाया गया है।
    प्रीति मीणा (IAS) और शैलेश कुमार चौरसिया (IAS) को रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है।
    विपुल अग्रवाल (IPS) को उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है।
    साक्षी मित्तल (IAS) और लया मद्दुरी (IAS) को आर्थिक मामलों के विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया है।

    गृह, स्वास्थ्य और अन्य मंत्रालयों में बदलाव
    गृह मंत्रालय में महात्मे संदीप नामदेव (IAS) और राकेश राठी (IPS) को संयुक्त सचिव बनाया गया है।
    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में एम. मुथुकुमार और प्रभाकर (IAS) को नई जिम्मेदारी दी गई है।
    श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में एस. तेजस्वी नाइक (IAS, एमपी कैडर) की नियुक्ति हुई है।

    अन्य अहम तैनातियां
    रोहन चंद ठाकुर (IAS) को नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉर्पोरेशन (NLMC) का CEO बनाया गया है।
    हार्दिक शाह (IAS) को प्रधानमंत्री कार्यालय में निजी सचिव (JS स्तर) नियुक्त किया गया है।
    राशी शर्मा को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया है।

    बता दें कि अधिकांश नियुक्तियां पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए की गई हैं या अगली आदेश तक लागू रहेंगी। कुछ पदों पर कार्यकाल संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति तिथि तक निर्धारित किया गया है।