11 दिन में तय किया लंबा सफर
राजधानी में एंट्री पर पुलिस ने रोका रास्ता
व्यक्तिगत अनुभव से जुड़ा आंदोलन
मुख्य मांगें और आगे की रणनीति

भोज के बाद देर रात शुरू हुई परेशानी
अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या
50 से ज्यादा मरीज मोहगांव में भर्ती

पहला गेम हारकर की दमदार वापसी
करीब 1 घंटा 15 मिनट तक चले इस मुकाबले में आयुष शेट्टी ने जबरदस्त जज्बा दिखाया। उन्होंने पहला गेम 10-21 से गंवा दिया था, लेकिन इसके बाद शानदार वापसी करते हुए 21-19 और 21-17 से लगातार दो गेम जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। दूसरे और तीसरे गेम में आयुष का धैर्य, आक्रामक खेल और नेट पर नियंत्रण देखने लायक था, जिसने मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया।
करियर की सबसे बड़ी जीत
Kunlavut Vitidsarn पेरिस ओलंपिक 2024 के रजत पदक विजेता हैं। ऐसे में उनके खिलाफ जीत आयुष शेट्टी के करियर की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जा रही है। इस जीत के साथ आयुष 2018 में H. S. Prannoy के बाद इस टूर्नामेंट में पदक पक्का करने वाले पहले भारतीय पुरुष एकल खिलाड़ी बन गए हैं।
फाइनल तक का शानदार सफर
आयुष शेट्टी का इस टूर्नामेंट में सफर बेहद दमदार रहा है।
क्वार्टरफाइनल में उन्होंने वर्ल्ड नंबर-4 Jonatan Christie को 23-21, 21-17 से हराया
इससे पहले वर्ल्ड नंबर-7 ली शिफेंग को सीधे गेम में मात दी
साथ ही चाउ तिएन-चेन जैसे अनुभवी खिलाड़ी को भी हराया
भारत के लिए मिले-जुले नतीजे
जहां आयुष ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं बाकी भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह टूर्नामेंट ज्यादा सफल नहीं रहा। P. V. Sindhu दूसरे दौर में बाहर हो गईं, जबकि Lakshya Sen पहले ही राउंड में हार गए।
इतिहास रचने का मौका
यूएस ओपन सुपर 300 चैंपियन आयुष शेट्टी अब फाइनल में खिताब जीतकर इतिहास रचने के बेहद करीब हैं। अगर वह यह मुकाबला जीतते हैं, तो यह उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी और भारतीय बैडमिंटन के लिए भी गर्व का क्षण होगा।

फिल्म के पहले भाग की यादें साझा करते हुए अभिनेता ने बताया कि शूटिंग के दौरान का सफर बेहद शानदार और ऊर्जा से भरा रहा। उन्होंने फिल्म के निर्देशन की सराहना करते हुए कहा कि जिस विजन के साथ इस कहानी को पर्दे पर उतारा गया वह काबिले तारीफ था। फिल्म में उनके साथ रणदीप हुड्डा और विनीत कुमार सिंह जैसे दमदार कलाकार भी नजर आए थे जिनके साथ काम करने के अनुभव को अभिनेता ने बेहद सुखद बताया। पहले भाग की कहानी में दिखाया गया था कि किस तरह एक नायक खलनायक के गुंडाराज और आतंक को खत्म करने के लिए मैदान में उतरता है। अब जाट 2 के जरिए इस संघर्ष और रोमांच को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी है।
व्यावसायिक दृष्टि से देखा जाए तो इस फिल्म के पहले भाग ने बॉक्स ऑफिस पर संतुलित प्रदर्शन किया था। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस फिल्म ने अपनी लागत वसूलने के साथ ही मुनाफा भी कमाया था। सिनेमाघरों के बाद इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला जिससे निर्माताओं का उत्साह बढ़ा और उन्होंने इसके दूसरे भाग पर काम शुरू करने का फैसला लिया। वर्तमान में अभिनेता के पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं लेकिन जाट 2 के ऐलान ने यह साबित कर दिया है कि वे अपने एक्शन अवतार को लेकर कितने गंभीर हैं।
अभिनेता के इस नए ऐलान के बाद फिल्म की पहली झलक और शूटिंग से जुड़ी अन्य जानकारियों का इंतजार बेसब्री से किया जा रहा है। साझा किए गए वीडियो में जिस तरह का जोश और एक्शन नजर आ रहा है उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जाट 2 पहले भाग के मुकाबले कहीं अधिक भव्य और प्रभावशाली होगी। मनोरंजन जगत में चर्चा है कि इस बार कहानी में नए मोड़ और अधिक खतरनाक स्टंट देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सनी देओल अपनी अन्य फिल्मों के काम में व्यस्त हैं लेकिन जल्द ही वे इस नए मिशन के लिए कमर कसते नजर आएंगे।

यह भीषण दुर्घटना सिरसौद थाना क्षेत्र के टोंगरा रोड पर हुई जहां एक ऑटो में सवार होकर नवविवाहित दंपती और उनके परिजन यात्रा कर रहे थे बताया जा रहा है कि वे किसी पारिवारिक कार्य से जा रहे थे तभी सामने से आ रहा एक ट्रक अचानक अनियंत्रित हो गया और सीधे ऑटो के ऊपर पलट गया
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ऑटो पूरी तरह ट्रक के नीचे दब गया और उसमें सवार लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला आसपास मौजूद लोगों ने जैसे ही यह मंजर देखा तो वे सहम गए और तुरंत राहत कार्य के लिए दौड़े लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी
इस हादसे में जिन चार लोगों की मौत हुई उनमें 50 वर्षीय अजेश पुत्र पीतम शाक्य 20 वर्षीय राजेश्वर पुत्र वीरेंद्र शाक्य 35 वर्षीय राजो पत्नी हरविलास शाक्य और 22 वर्षीय वीरेंद्र पुत्र प्रीतम शाक्य शामिल हैं सभी मृतक ग्राम राजगढ़ तेंदुआ के निवासी बताए जा रहे हैं
हादसे की सबसे दर्दनाक बात यह रही कि मृतकों में दूल्हा और दुल्हन भी शामिल थे जिनकी शादी मात्र दो दिन पहले ही हुई थी नई जिंदगी की शुरुआत से पहले ही यह सफर हमेशा के लिए थम गया जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है
घटना के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है

1904 में जन्मे केएल सहगल का जीवन साधारण परिस्थितियों में शुरू हुआ था। बचपन में उन्हें किसी बड़े घराने की संगीत शिक्षा नहीं मिली, लेकिन परिवार के भजनों और आसपास के सांस्कृतिक माहौल ने उनके भीतर संगीत के प्रति गहरी रुचि जगा दी। शुरुआती जीवन में उन्होंने कई छोटे काम किए, जिनमें रेलवे में टाइमकीपर और एक कंपनी में सेल्समैन की नौकरी शामिल थी। इन नौकरियों ने उन्हें देश के अलग अलग हिस्सों को देखने और विविध संगीत परंपराओं को समझने का अवसर दिया।
धीरे धीरे उनका रुझान संगीत और अभिनय की ओर बढ़ता गया और वे कोलकाता पहुंचे, जहां उस समय फिल्म उद्योग अपने शुरुआती दौर में था। वहां उन्होंने अपनी आवाज और गायकी से लोगों का ध्यान खींचा और यहीं से उनके फिल्मी करियर की शुरुआत हुई। उनकी प्रतिभा को पहचान मिली और उन्हें फिल्मों में काम करने का अवसर मिला।
उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ फिल्म Devdas साबित हुई। इस फिल्म में उनके अभिनय और गायन ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा और वे रातों रात लोकप्रिय हो गए। इस फिल्म के गीतों ने उस दौर में संगीत को एक नई पहचान दी और सहगल को घर घर में मशहूर कर दिया।
केएल सहगल की आवाज की सबसे बड़ी विशेषता उसकी भावनात्मक गहराई और अनोखी शैली थी। उनकी गायकी में दर्द, सादगी और शास्त्रीय संगीत का सुंदर मिश्रण था, जिसने उन्हें अपने समय का सबसे अलग और प्रभावशाली गायक बना दिया। उनकी आवाज केवल मनोरंजन नहीं थी बल्कि एक भावनात्मक अनुभव बन गई थी।
उन्होंने मिर्जा गालिब की रचनाओं को भी अपनी आवाज में एक नया जीवन दिया। उनकी प्रस्तुतियों ने ग़ज़ल गायकी को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोग उनकी आवाज को ग्रामोफोन रिकॉर्ड के माध्यम से सुनना पसंद करते थे और उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई।
उनकी सफलता के साथ-साथ जीवन में संघर्ष और चुनौतियां भी जुड़ी रहीं। लगातार काम का दबाव और जीवनशैली की समस्याओं ने उनके स्वास्थ्य पर असर डाला। फिर भी उन्होंने अपने संगीत और अभिनय से कभी समझौता नहीं किया और लगातार दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ते रहे।
भारतीय संगीत जगत की महान गायिका Lata Mangeshkar ने उन्हें अपना प्रेरणास्रोत माना, जो उनकी महानता को दर्शाता है। कई कलाकारों ने उनकी शैली को आदर्श मानकर अपने करियर को आगे बढ़ाया। उनकी आवाज और शैली आज भी संगीत प्रेमियों के बीच सम्मान के साथ याद की जाती है।
मात्र 42 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके गीत, उनका अभिनय और उनकी संगीत विरासत आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में जीवित है। उन्हें हमेशा उस कलाकार के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने संघर्ष से शुरुआत कर भारतीय सिनेमा को एक नई पहचान और ऊंचाई दी।

जन्म और शुरुआती सफर
वीनू मांकड़ का जन्म 12 अप्रैल 1917 को Jamnagar में हुआ था। उनका पूरा नाम मुलवंतराय हिम्मतलाल मांकड़ था। दाएं हाथ के बल्लेबाज और बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने जून 1946 में England national cricket team के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया और धीरे-धीरे भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हो गए।
भारत की पहली टेस्ट जीत के नायक
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में India first Test win 1952 एक ऐतिहासिक पल रहा, जिसमें वीनू मांकड़ हीरो बनकर उभरे। चेन्नई में खेले गए इस मुकाबले में इंग्लैंड ने पहली पारी में 266 रन बनाए, लेकिन मांकड़ ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 8 विकेट झटके। भारत ने जवाब में 457/9 रन बनाकर बड़ी बढ़त हासिल की। दूसरी पारी में भी मांकड़ का जादू चला और उन्होंने 4 विकेट लेकर इंग्लैंड को 183 रन पर समेट दिया। भारत ने यह मैच पारी और 8 रन से जीता। मांकड़ ने मैच में कुल 12 विकेट लेकर इतिहास रच दिया।
शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन
1946 से 1959 के बीच मांकड़ ने भारत के लिए 44 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 2,109 रन बनाए, जिसमें 5 शतक और 6 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 231 रन रहा। गेंदबाजी में भी उन्होंने कमाल किया और 162 विकेट अपने नाम किए। एक पारी में 5 विकेट लेने का कारनामा उन्होंने 8 बार किया।
घरेलू क्रिकेट में भी दबदबा
वीनू मांकड़ ने Maharashtra, Gujarat, Bengal, Saurashtra, Mumbai और Rajasthan के लिए घरेलू क्रिकेट खेला। 233 प्रथम श्रेणी मैचों में उन्होंने 11,591 रन बनाए और 782 विकेट झटके, जो उनकी ऑलराउंड क्षमता का बेहतरीन उदाहरण है।
‘मांकड़िंग’ की कहानी
क्रिकेट में ‘मांकड़िंग’ शब्द की शुरुआत भी वीनू मांकड़ से ही हुई। 1947 में उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज Bill Brown को नॉन-स्ट्राइकर एंड पर क्रीज छोड़ने पर रनआउट किया था। हालांकि, उन्होंने पहले चेतावनी भी दी थी। लंबे समय तक इस तरह के रनआउट को ‘मांकड़िंग’ कहा जाता रहा। आज भी यह नियम चर्चा का विषय बना रहता है।
सम्मान और विरासत
भारत सरकार ने 1973 में उन्हें Padma Bhushan से सम्मानित किया। उनके सम्मान में Board of Control for Cricket in India अंडर-19 स्तर पर ‘वीनू मांकड़ ट्रॉफी’ का आयोजन करती है। 21 अगस्त 1978 को 61 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान हमेशा अमर रहेगा।
भारतीय क्रिकेट का अनमोल सितारा
वीनू मांकड़ सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की नींव रखने वाले महान हस्तियों में से एक थे। उनकी ऑलराउंड प्रतिभा, समर्पण और रिकॉर्ड उन्हें हमेशा खास बनाते हैं।
वीनू मांकड़ भारत के इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्होंने 1 से 11 तक हर क्रम पर बल्लेबाजी की और देश की पहली टेस्ट जीत में अहम भूमिका निभाई।

दक्षिण भारतीय सिनेमा में पिछले कुछ वर्षों में पाइरेसी एक गंभीर चुनौती के रूप में उभरकर सामने आई है। बड़े बजट की फिल्मों के रिलीज से पहले या रिलीज के तुरंत बाद लीक होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे पूरी फिल्म इंडस्ट्री में चिंता का माहौल बना हुआ है। हाल ही में एक बड़ी फिल्म को लेकर भी इसी तरह की स्थिति सामने आई, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और सख्त करने की मांग तेज हो गई।
इस तरह की समस्या केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रही है, बल्कि कई बड़ी और सफल फिल्मों को भी इसका सामना करना पड़ा है। Pushpa 2: The Rule जैसी चर्चित फिल्मों के रिलीज के बाद उनके कुछ हिस्से अवैध रूप से इंटरनेट पर फैल गए, जिससे निर्माताओं को बॉक्स ऑफिस पर असर झेलना पड़ा।
इसी तरह KGF Chapter 2 के मामले में भी रिलीज के बाद पाइरेसी का प्रभाव देखने को मिला। फिल्म के कई सीन और क्लिप्स विभिन्न अनधिकृत प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से साझा किए गए, जिससे दर्शकों के थिएटर अनुभव और फिल्म की कमाई दोनों पर असर पड़ा।
पाइरेसी की समस्या केवल रिलीज के बाद ही नहीं, बल्कि प्रमोशन चरण में भी सामने आती है। RRR जैसी बड़ी फिल्म के कुछ महत्वपूर्ण दृश्य और गाने रिलीज से पहले ही लीक हो गए थे, जिससे निर्माताओं की मार्केटिंग रणनीति प्रभावित हुई और उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने पड़े।
इसी तरह भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक Baahubali 2: The Conclusion के दौरान भी लीक की घटनाएं सामने आई थीं। फिल्म के कुछ अहम दृश्य और क्लाइमेक्स से जुड़े हिस्सों के बाहर आने के बाद प्रोडक्शन टीम को सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करनी पड़ी थी ताकि आगे किसी तरह की जानकारी लीक न हो सके।
फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि पाइरेसी केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि यह पूरी टीम की मेहनत और रचनात्मक ऊर्जा को भी प्रभावित करती है। एक फिल्म को बनाने में वर्षों की योजना और भावनात्मक जुड़ाव होता है, और उसका असमय लीक होना पूरी प्रक्रिया को कमजोर कर देता है।
डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ पाइरेसी की चुनौती और गंभीर होती जा रही है। अब कंटेंट को कुछ ही समय में कॉपी कर विभिन्न अनधिकृत प्लेटफॉर्म्स पर फैलाया जा सकता है, जिससे इसे रोकना और भी कठिन हो गया है। यही कारण है कि फिल्म निर्माता अब तकनीकी सुरक्षा, निगरानी और कानूनी उपायों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
साउथ सिनेमा सहित पूरे भारतीय फिल्म उद्योग के लिए पाइरेसी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है, जिसके समाधान के लिए तकनीक, कानून और दर्शकों की जागरूकता तीनों स्तर पर मजबूत प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।