Author: bharati

  • मोती सागर ने कहा, फिल्म और धारावाहिक की तुलना उचित नहीं, दोनों के प्रारूप अलग..

    मोती सागर ने कहा, फिल्म और धारावाहिक की तुलना उचित नहीं, दोनों के प्रारूप अलग..


    नई दिल्ली:90 के दशक के लोकप्रिय टीवी धारावाहिक “रामायण” और 4000 करोड़ की नितेश तिवारी निर्देशित फिल्म “रामायणम्” के बीच तुलना की चर्चाओं ने हाल ही में सुर्खियां बटोरी हैं। फिल्म का पहला टीज़र हनुमान जयंती पर जारी किया गया, जिसमें रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आए। इस झलक ने दर्शकों के बीच उत्साह और सवालों का मिश्रण पैदा किया, खासकर जब 1987 में रामानंद सागर द्वारा बनाए गए टीवी धारावाहिक से तुलना की जाने लगी।

    रामानंद सागर के बेटे मोती सागर ने इस तुलना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों प्रारूप अलग हैं और तुलना करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि टीवी धारावाहिक में 78 एपिसोड थे, जिनकी लंबाई 30-40 मिनट प्रति एपिसोड थी, जबकि फिल्म सिर्फ तीन से चार घंटे की होगी। इसलिए कथानक और बारीकियों में अंतर स्वाभाविक है। मोती सागर ने कहा कि उनके पिता ने “रामायण” को पूरी भक्ति और ईमानदारी के साथ प्रस्तुत किया था, और फिल्म का उद्देश्य भी उसी भावना को आधुनिक रूप में पेश करना है।

    मोती सागर ने फिल्म के टीज़र के आधार पर ही नतीजा निकालने से इंकार किया और रणबीर कपूर की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि रणबीर आज के समय के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं और उनके अभिनय में गहराई और परिपक्वता है। मोती सागर के मुताबिक, फिल्म और धारावाहिक के दृष्टिकोण अलग होने के कारण इसे किसी भी तरह की तुलना में सीमित नहीं किया जा सकता।

    “रामायणम्” में साई पल्लवी सीता के रूप में, यश रावण के रूप में, सनी देओल हनुमान के रूप में और रवि दुबे लक्ष्मण के रूप में नजर आएंगे। इसके अलावा, अरुण गोविल, कुणाल कपूर, आदिनाथ कोठारे और शीबा चड्ढा भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का पहला भाग दिवाली 2026 में और दूसरा भाग दिवाली 2027 में रिलीज होगा।

    इस फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा ने किया है और इसका उद्देश्य दर्शकों को आधुनिक तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स के माध्यम से महाकाव्य की कहानी को प्रस्तुत करना है। टीज़र को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाओं के बीच कुछ लोग दृश्यों और अभिनय की प्रशंसा कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग विशेष प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं।

    Keywords
    Ramayan, Ramayanam, Nitesh Tiwari, Motii Sagar, Ranbir Kapoor

    संक्षिप्त विवरण
    रामानंद सागर की रामायण और नितेश तिवारी की रामायणम् को तुलना से अलग रखते हुए मोती सागर ने फिल्म की सराहना की। दोनों के प्रारूप और प्रस्तुतिकरण में भिन्नता है, और फिल्म आधुनिक तकनीक और बड़े बजट के साथ महाकाव्य को नई पीढ़ी के दर्शकों तक पहुंचाएगी।

  • TET अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, बोले- 26 साल के अनुभवी से भी दोबारा परीक्षा लें

    TET अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, बोले- 26 साल के अनुभवी से भी दोबारा परीक्षा लें


    भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में टीईटी (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। 20 से 25 साल तक सेवा दे चुके शिक्षक इस फैसले को अपने अनुभव और सम्मान के खिलाफ बता रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।

    ‘अनुभव की अनदेखी, नियमों का अन्यायपूर्ण लागू होना’
    प्रदर्शन कर रहीं शिक्षिका शीबा खान ने कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह अव्यवहारिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 26 साल के अनुभवी कलेक्टर से भी दोबारा परीक्षा देने को कहा जाएगा? वहीं शिक्षिका प्रियंका शर्मा ने इसे “तानाशाही निर्णय” बताते हुए कहा कि नियुक्ति के समय जो नियम लागू थे, उनका पालन किया गया था। अब पुराने शिक्षकों पर नए नियम लागू करना पूरी तरह गलत है।

    रिटायरमेंट के करीब शिक्षकों पर बढ़ा दबाव
    शिक्षकों का कहना है कि जिनकी सेवा में केवल कुछ ही साल बचे हैं, उनसे दोबारा परीक्षा की मांग करना न केवल अनुचित है बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ा रहा है। उनका तर्क है कि इतने वर्षों का अनुभव किसी भी परीक्षा से अधिक महत्वपूर्ण होता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    सरकार को रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांग
    प्रदर्शन में शामिल शिक्षिका संगीता कुशवाहा ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह फैसला हजारों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है और इसे जल्द से जल्द संशोधित किया जाना चाहिए।

    18 अप्रैल को परिवार सहित बड़ा प्रदर्शन
    अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी उपेंद्र कौशल ने बताया कि 8 अप्रैल को जिला स्तर पर प्रदर्शन के बाद DPI भोपाल को ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 11 अप्रैल तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो 18 अप्रैल को प्रदेशभर के शिक्षक परिवार सहित भोपाल में बड़ा प्रदर्शन करेंगे और मांगें पूरी होने तक डटे रहेंगे।

    DPI का आदेश और उसके प्रभाव
    लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) भोपाल के आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा सेवा समाप्ति का खतरा रहेगा। विभाग का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया गया है।

    1.5 लाख शिक्षक प्रभावित, 70 हजार सीधे दायरे में
    शिक्षक संगठनों के अनुसार इस आदेश से करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित होंगे, जिनमें से लगभग 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। उनका कहना है कि आरटीई एक्ट 2009 और टीईटी 2011 के बाद लागू हुआ था, इसलिए पुराने शिक्षकों पर यह नियम लागू करना “रेट्रोस्पेक्टिव” यानी पिछली तारीख से नियम लागू करने जैसा है।

    संयुक्त लड़ाई की तैयारी, आंदोलन होगा तेज
    शिक्षक संगठनों ने साफ कर दिया है कि अब वे एकजुट होकर इस फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर आंदोलन कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो राजधानी में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

  • शुरुआती करियर में अमिताभ और जया के बीच असली प्यार और सम्मान का रिश्ता

    शुरुआती करियर में अमिताभ और जया के बीच असली प्यार और सम्मान का रिश्ता


    नई दिल्ली/ महाराष्ट्र : कुछ रिश्ते फिल्मी कहानी की तरह होते हैं, जो संघर्ष और कठिनाइयों से शुरू होकर समय के साथ मजबूत और परिपक्व अंजाम तक पहुँचते हैं। ऐसा ही रिश्ता जया बच्चन और अमिताभ बच्चन के बीच देखने को मिला। जब अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा में अभी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे, तब जया बंगाली और हिंदी फिल्मों की उभरती हुई अभिनेत्री थीं। उनकी शांत और सुलझी छवि ने उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग मुकाम दिलाया। 9 अप्रैल को जया बच्चन 78 वर्ष की हो गई हैं, और इसी मौके पर उनके जीवन और करियर की कुछ अनसुनी बातें याद की जा रही हैं।

    कहते हैं कि उगते सूरज को हर कोई सलाम करता है, लेकिन जया और अमिताभ का रिश्ता इसका अपवाद था। जया ने अमिताभ को उस समय अपना दिल दे दिया जब वे किसी बड़े नाम तक नहीं पहुंचे थे, जबकि जया बचपन से ही फिल्मों में काम कर रही थीं। बाल कलाकार के रूप में बंगाली और हिंदी फिल्मों में सक्रिय रहने के बावजूद जया का दिल उस सादगी और पर्सनैलिटी वाले अभिनेता पर आ गया था।

    जया ने अपनी सहेलियों से भी अमिताभ के बारे में अपने विचार साझा किए, लेकिन उनकी सहेलियों को वह अभिनेता बिल्कुल पसंद नहीं आया। उन्होंने अमिताभ को ‘लकड़ी’ कहा और केवल बड़ी-बड़ी आंखों वाला बताया। यह सुनकर जया भड़क गईं और उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि अमिताभ हिंदी सिनेमा में कुछ बड़ा करेंगे।

    दूसरी ओर, अमिताभ बच्चन ने जया की खूबसूरती का अनुभव एक फोटोशूट के जरिए किया और उनकी संस्कारी yet आधुनिक छवि ने उन्हें आकर्षित किया। फिल्म ‘गुड्डी’ के सेट पर दोनों की नजदीकियां बढ़ीं, हालांकि उस समय जया का ज्यादा समय धर्मेंद्र के साथ शूटिंग में जाता था। उन्होंने अमिताभ के बारे में धर्मेंद्र से भी चर्चा की, जिससे दोनों के बीच संबंध और मजबूत हुए।

    अमिताभ के शुरुआती करियर में कई फ्लॉप फिल्में थीं और कई अभिनेत्रियों ने उनके साथ काम करने से मना कर दिया था। ऐसे समय में जया ने ‘जंजीर’ फिल्म में काम करने का निर्णय लिया। यह फिल्म सुपरहिट रही और अमिताभ को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। इसी फिल्म ने दोनों के रिश्ते और उनकी फिल्मी पहचान को स्थायीत्व दिया और हिंदी सिनेमा में अमिताभ का मुकाम तय किया।

  • सोमी अली और जेबा बख्तियार के बीच असली दोस्ती और सम्मान का रिश्ता रहा..

    सोमी अली और जेबा बख्तियार के बीच असली दोस्ती और सम्मान का रिश्ता रहा..


    नई दिल्ली:90 के दशक का बॉलीवुड मीडिया और फैंस के लिए एक ऐसा दौर था, जब फिल्मी सितारों की जिंदगी के बारे में केवल मैगजीन और अखबार ही जानकारी देते थे। सोशल मीडिया के आज के दौर से बिल्कुल अलग उस समय, जो छपता वही सच माना जाता था और सितारों के रिश्तों को अक्सर अलग रंग देकर पेश किया जाता था। इसी समय की यादें साझा करते हुए अभिनेत्री सोमी अली ने हाल ही में एक थ्रोबैक पोस्ट के जरिए बताया कि कैसे उन्हें और जेबा बख्तियार को लेकर मीडिया ने झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश की थी।

    सोमी अली ने बताया कि 1993 में उनकी पहली मुलाकात जेबा बख्तियार से हुई थी। दोनों ही पाकिस्तान में जन्मीं थीं, लेकिन सोमी का पालन-पोषण अमेरिका में हुआ। मीडिया ने इसी समानता को आधार बनाकर उनके बीच प्रतिस्पर्धा और टकराव की खबरें छापीं, लेकिन हकीकत इससे पूरी तरह अलग थी। असल जिंदगी में उनके बीच कभी कोई राइवलरी नहीं थी। बल्कि दोनों के बीच सम्मान और समझ का रिश्ता था। सोमी ने बताया कि वह उस पहली मुलाकात को आज भी सकारात्मक अनुभव के रूप में याद करती हैं और जेबा के लिए उनके मन में गहरी इज्जत है।

    सोमी अली ने जेबा बख्तियार की खूब तारीफ करते हुए कहा कि वह बेहद खूबसूरत और अच्छी इंसान हैं और हमेशा खुश रहें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया की बनाई कहानी कभी सफल नहीं हुई, क्योंकि असल जिंदगी में उनके बीच मित्रता और सहयोग का रिश्ता था। इस खुलासे ने 90 के दशक की फिल्मी दुनिया की मीडिया कल्चर और फैन्स तक पहुंचने वाली कहानियों की सच्चाई को उजागर किया।

    जेबा बख्तियार की फिल्मी पहचान की बात करें तो उन्होंने 1991 में रिलीज हुई फिल्म ‘हिना’ से लोकप्रियता हासिल की थी। इस फिल्म में उनके साथ ऋषि कपूर और अश्विनी भावे नजर आए थे और निर्देशन रणदीर कपूर ने किया था। भारत-पाकिस्तान की पृष्ठभूमि पर बनी इस प्रेम कहानी को दर्शकों ने काफी सराहा।

    इस किस्से ने यह साबित किया कि सोशल मीडिया से पहले मीडिया की बनाई अफवाहें और टैब्लॉइड कहानियां कितनी प्रभावशाली और कभी-कभी भ्रामक हो सकती थीं। आज के दौर में फैंस सीधे अपने पसंदीदा सितारों से जुड़ सकते हैं, लेकिन उस समय सच्चाई जानने का कोई दूसरा साधन उपलब्ध नहीं था।

  • शिक्षकों की पात्रता परीक्षा पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में रखेगी पक्ष, शिक्षा मंत्री ने दिया भरोसा

    शिक्षकों की पात्रता परीक्षा पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में रखेगी पक्ष, शिक्षा मंत्री ने दिया भरोसा


    भोपाल । भोपाल में मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ और शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से मुलाकात की और शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर अपनी चिंताओं और सुझावों से अवगत कराया। प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश के शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखे।

    इस पर शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने आश्वस्त किया कि सरकार शिक्षकों के हितों के प्रति पूरी तरह सजग है। उन्होंने कहा कि तकनीकी एवं विधि सम्मत कार्यवाही पूरी होने के उपरांत राज्य सरकार शीघ्र ही उच्चतम न्यायालय में शिक्षकों का पक्ष रखेगी और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में शिक्षकों के विपरीत निर्णय नहीं लिया जाएगा।

    प्रदेश कर्मचारी संघ के प्रवक्ता डॉ. अनिल भार्गव वायु ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से लिया गया है और सरकार का रुख शिक्षकों के हित में ही रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का अधिकार और उनके भविष्य की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।

    प्रतिनिधिमंडल में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़ राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव और प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि यह बैठक शिक्षकों और सरकार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुई।

    मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश के समस्त शिक्षक एकजुट हैं और अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा करते हुए न्याय दिलाने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।

    शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़ ने कहा कि शिक्षकों का पक्ष पूरी मजबूती से रखा जाएगा और हमें पूर्ण विश्वास है कि सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इस आश्वासन को दोहराया और कहा कि सरकार के सकारात्मक रुख ने प्रदेश के शिक्षकों में विश्वास को मजबूत किया है।

    शिक्षकों ने यह स्पष्ट किया कि वे एकजुट हैं और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षा मंत्री से यह भी कहा कि पात्रता परीक्षा और उससे जुड़े अन्य मुद्दों में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न की जाए।

    शिक्षकों और सरकार के बीच यह संवाद प्रक्रिया यह संदेश देती है कि राज्य प्रशासन शिक्षकों के हितों के प्रति संवेदनशील है और उनकी समस्याओं का समाधान विधि सम्मत तरीके से सुनिश्चित किया जाएगा। इससे प्रदेश के शिक्षक अपने अधिकारों की रक्षा के प्रति आश्वस्त हैं और सुप्रीम कोर्ट में अपने पक्ष के न्यायपूर्ण निर्णय की पूरी उम्मीद रखते हैं।

  • पीथमपुर में नाबालिग अपहरण-रेप का आरोपी गिरफ्तार, बस स्टैंड से दबोचा गया!

    पीथमपुर में नाबालिग अपहरण-रेप का आरोपी गिरफ्तार, बस स्टैंड से दबोचा गया!


    पीथमपुर। पीथमपुर के सेक्टर-1 थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में फरार चल रहे आरोपी को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को Eicher Bus Stand के पास से घेराबंदी कर पकड़ा गया। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपी बस स्टैंड क्षेत्र में मौजूद है। सूचना मिलते ही टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके पर दबिश दी और आरोपी को हिरासत में ले लिया।

    फरवरी से चल रहा था फरार

    यह मामला फरवरी महीने का है, जब एक नाबालिग के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई गई थी। घटना के बाद से ही आरोपी फरार हो गया था और पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी थी। लंबे समय से फरार आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि आरोपी मानपुर के पास सेजगढ़ का रहने वाला है।

    पीड़िता के बयान के आधार पर गंभीर धाराएं

    जांच अधिकारी चाँदनी सिंगार के अनुसार, नाबालिग पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ अपहरण और दुष्कर्म सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी को अभिरक्षा में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा सके और अन्य पहलुओं की भी जांच हो सके।

    कोर्ट में पेशी की तैयारी

    पुलिस ने बताया कि आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को आज न्यायालय में पेश किया जाएगा। इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

     कानून के शिकंजे में अपराधी

    इस कार्रवाई से साफ है कि पुलिस अपराधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए सक्रिय है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ती है।

  • भोपाल में हाई प्रोफाइल केस, EOW में शिकायत दर्ज, 237 प्रोजेक्ट की मंजूरी पर सियासत गरम

    भोपाल में हाई प्रोफाइल केस, EOW में शिकायत दर्ज, 237 प्रोजेक्ट की मंजूरी पर सियासत गरम


    भोपाल । भोपाल में भ्रष्टाचार के मामले में हलचल मची हुई है। पूर्व आईएफएस आजाद सिंह डबास ने 4 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 23 मई 2025 को बिना सिया बैठक के 237 प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई थी। इस प्रक्रिया में करोड़ों के भ्रष्टाचार के संकेत मिलते हैं।

    शिकायत के अनुसार आरोपित अधिकारियों में आईएएस अशोक बर्णवाल नवनीत मोहन कोठारी उमा महेश्वरी आर और श्रीमन शुक्ला शामिल हैं। आजाद सिंह डबास का कहना है कि इन अधिकारियों ने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए परियोजनाओं को अनुमति दी। जबकि पर्यावरण मंजूरी से पहले सिया की बैठक बुलाना अनिवार्य होता है।

    पूर्व आईएफएस ने आरोप लगाया कि बिना बैठक के परियोजनाओं को अनुमति देना न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि यह करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार को जन्म देता है। उन्होंने EOW से इन सभी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और जांच करने की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार आरोपित अधिकारियों में तत्कालीन एसीएस पर्यावरण अशोक बर्णवाल प्रमुख सचिव पर्यावरण नवनीत मोहन कोठारी सदस्य सचिव सिया उमा महेश्वरी आर और प्रभारी सदस्य सचिव सिया श्रीमन शुक्ला शामिल थे। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस गैरकानूनी मंजूरी से पर्यावरण और सरकारी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला राज्य के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ईओडब्ल्यू की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोप कितने प्रमाणिक हैं। इस मामले ने न केवल सरकारी अधिकारियों बल्कि बड़ी परियोजनाओं की प्रक्रिया पर भी ध्यान खींचा है।

    पूर्व IFS आजाद सिंह डबास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूरी महसूस हुई। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी स्तर के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए। उनका यह कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    राज्य के प्रशासनिक माहौल में इस मामले ने हलचल मचा दी है और ईओडब्ल्यू द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को लेकर जनता और मीडिया में उत्सुकता बढ़ गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि FIR दर्ज होती है तो यह मामले की गंभीरता को दर्शाएगा और भविष्य में परियोजना मंजूरी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

  • लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं से नोएडा अथॉरिटी और निर्माण कंपनियों पर उठ रहे सवाल..

    लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं से नोएडा अथॉरिटी और निर्माण कंपनियों पर उठ रहे सवाल..


    नई दिल्ली:नोएडा में एक और दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसमें 23 वर्षीय हर्षित भट्ट नामक युवक की मौत हो गई। हर्षित अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने के लिए सेक्टर 94 के एक खाली प्लॉट में गया था। वहां भरे पानी में तैरने के दौरान वह गहरे पानी में डूब गया और बाहर नहीं आ सका। हादसे के समय हर्षित अच्छा तैराक था, लेकिन उसे इस गहरे पानी का अंदाजा नहीं था। दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी सारी कोशिशें नाकाम रहीं। सूचना मिलने पर पुलिस और बचाव दल की टीमें मौके पर पहुंचीं, साथ ही NDRF और SDRF की टीमें भी सहायता के लिए तैनात की गईं, लेकिन तब तक हर्षित की जान नहीं बचाई जा सकी। तीन अन्य छात्र सुरक्षित बाहर निकाले गए, जबकि हर्षित का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

    यह हादसा नोएडा में लगातार बढ़ते सुरक्षा जोखिमों की ओर इशारा करता है। सेक्टर 94 में जिस खाली प्लॉट में यह दुर्घटना हुई, वहां कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था। पहले भी नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही के कारण कई मौतें हुई हैं। कुछ समय पहले आईटी इंजीनियर युवराज मेहता और अन्य लोग इसी तरह के खुले गड्ढों में दुर्घटनाग्रस्त हुए थे। सेक्टर 115 में एक निर्माणाधीन नाले के गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय युवक की मौत भी इसी श्रेणी में आती है।

    स्थानीय लोगों और परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है। हर्षित का परिवार गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहता है और सदमे में है। उन्होंने घर के बाहर स्पष्ट संदेश देकर किसी को अंदर आने से रोका हुआ है। हर्षित एमिटी यूनिवर्सिटी में बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन का छात्र था और युवा जीवन में ही इस तरह के हादसे में खो गया। हादसे ने न केवल परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि नोएडा अथॉरिटी और निर्माण कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खुले गड्ढों और निर्माण स्थलों की निगरानी, चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग की कमी जानलेवा साबित हो सकती है। अधिकारियों ने पहले भी जोखिम वाले स्थानों पर सुरक्षा उपाय करने की बात कही थी, लेकिन कार्रवाई में देरी और नियमानुसार उपायों का अभाव लगातार बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।

  • माता-पिता के विवाद से परेशान युवक ने उठाया खौफनाक कदम, जहर खाया

    माता-पिता के विवाद से परेशान युवक ने उठाया खौफनाक कदम, जहर खाया


    इंदौर। इंदौर के आजाद नगर इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां पारिवारिक कलह से परेशान एक 19 वर्षीय युवक ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। यह घटना बुधवार की बताई जा रही है, जिसने पूरे इलाके में शोक का माहौल बना दिया है।

    मृतक की पहचान अनुराग (19) के रूप में हुई है, जो पवनपुरी पालदा क्षेत्र में किराए के मकान में रहता था। बताया जा रहा है कि वह अपने माता-पिता के बीच चल रहे विवाद से मानसिक रूप से बेहद परेशान था।

    छोटे भाई से बातचीत के बाद उठाया कदम

    पुलिस जांच में सामने आया है कि घटना से पहले अनुराग की अपने छोटे भाई से फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान उसे पता चला कि उसके पिता ने उसकी मां के साथ मारपीट की है।

    यह बात सुनकर वह काफी आहत हो गया। इसके बाद उसकी अपने पिता से भी बातचीत हुई, जो विवाद में बदल गई। इसी मानसिक तनाव में आकर अनुराग ने जहर खा लिया।

    अस्पताल में तोड़ा द

    घटना के बाद अनुराग की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद उसके रिश्तेदार नीरज उसे गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार और आसपास के लोगों में गहरा दुख और सदमा है।

    कामकाजी युवक था, तीन साल से रह रहा था इंदौर में

    पुलिस के मुताबिक, अनुराग मूल रूप से नर्मदापुरम जिले के बिशोनी गांव का रहने वाला था। वह पिछले तीन साल से इंदौर में रहकर एक दाल मिल में काम कर रहा था और अपने परिवार की मदद कर रहा था। परिवार में उसके माता-पिता और एक छोटा भाई हैं। उसके पिता पेशे से ड्राइवर बताए जा रहे हैं।

    पुलिस ने शुरू की जांच

    आजाद नगर पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि आत्महत्या के पीछे के कारणों को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके।

    पारिवारिक तनाव के गंभीर परिणाम

    यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि पारिवारिक विवाद का असर सिर्फ पति-पत्नी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है। ऐसे मामलों में संवाद और समझदारी बेहद जरूरी होती है।

  • कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश वेतन से वंचित नहीं करने का किया निर्देश

    कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश वेतन से वंचित नहीं करने का किया निर्देश

    जबलपुर । जबलपुर मध्यप्रदेश में गेस्ट फैकल्टी के मातृत्व अवकाश को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले से कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत मिली है। मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गेस्ट फैकल्टी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता है।

    मामला कटनी जिले के शासकीय तिलक पीजी कॉलेज से जुड़ा है जहां गेस्ट फैकल्टी प्रीति साकेत ने मातृत्व अवकाश का लाभ लेने के प्रयास में याचिका दायर की थी। याचिका के अनुसार कॉलेज के प्रिंसिपल ने उन्हें मातृत्व अवकाश से वंचित कर दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी राज्य सरकार के अधीन कार्यरत संस्थान में 12 महीनों में 80 दिन कार्य करने की शर्त लागू नहीं होगी।

    हाईकोर्ट ने मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 की धारा 5(1) का हवाला देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को 26 हफ्ते की सवेतन छुट्टी का पूरा हक मिलेगा। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि संवैधानिक न्यायालय द्वारा भारत के संविधान की मूल भावना और नीति-निर्देशक सिद्धांतों की उपेक्षा नहीं की जा सकती।

    अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश सिर्फ निजी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है बल्कि राज्य के अधीन काम करने वाली गेस्ट फैकल्टी पर भी लागू होता है। कोर्ट के आदेश में कहा गया कि अवकाश के दौरान वेतन रोकना अवैध होगा और यह महिलाओं के अधिकारों का हनन है।

    कोर्ट ने कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता प्रीति साकेत को 26 हफ्ते की सवेतन मातृत्व छुट्टी प्रदान की जाए और उनके वेतन में किसी प्रकार की कटौती न की जाए। अदालत ने इस फैसले को बड़े सामाजिक महत्व का बताया और कहा कि कामकाजी महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण मिलना चाहिए।

    इस फैसले से न केवल याचिकाकर्ता को राहत मिली है बल्कि पूरे राज्य की गेस्ट फैकल्टी और अन्य संस्थानों में कामकाजी महिलाओं को भी यह संदेश गया कि मातृत्व अवकाश के अधिकार से किसी को वंचित नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला कामकाजी महिलाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा और अन्य मामलों में भी समान प्रवृत्ति को बढ़ावा देगा।

    कोर्ट के इस निर्णय ने यह स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश सिर्फ समय की अवधि तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें सवेतन अवकाश का भी अधिकार शामिल है। इससे महिलाओं को नौकरी में बने रहने अपनी स्वास्थ्य और बच्चे की देखभाल करने और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।