Author: bharati

  • इबोला पर भारत अलर्ट: एयरपोर्ट्स पर बढ़ी निगरानी,सरकार ने कहा-लक्षण दिखें तो तुरंत रिपोर्ट करें

    इबोला पर भारत अलर्ट: एयरपोर्ट्स पर बढ़ी निगरानी,सरकार ने कहा-लक्षण दिखें तो तुरंत रिपोर्ट करें




    नई दिल्ली। स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। खासकर उन यात्रियों पर निगरानी बढ़ाई गई है जो हाई-रिस्क देशों जैसे DR कांगो, युगांडा और साउथ सूडान से यात्रा करके भारत पहुंच रहे हैं।एयरपोर्ट्स पर स्वास्थ्य जांच टीमों को अलर्ट मोड में रखा गया है ताकि किसी भी संदिग्ध मामले की तुरंत पहचान की जा सके।

    किन लक्षणों पर तुरंत अलर्ट जरूरी?
    सरकारी एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि यदि किसी यात्री में निम्न लक्षण दिखते हैं तो तुरंत एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर को जानकारी देना अनिवार्य होगा:

    तेज बुखार

    सिरदर्द और कमजोरी

    उल्टी या दस्त

    गले में खराश

    शरीर से खून निकलने के संकेत

    इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति संक्रमित मरीज के खून या शरीर के तरल पदार्थ (body fluids) के संपर्क में आया है, तो उसकी भी विशेष निगरानी की जाएगी।

    21 दिन तक निगरानी का निर्देश
    स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत आने के बाद यदि किसी यात्री में 21 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना होगा और अपनी ट्रैवल हिस्ट्री साझा करनी होगी। यह समय सीमा इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इबोला वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड इसी अवधि के आसपास होता है।

    सरकार की तैयारी और निगरानी व्यवस्था
    राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम और अन्य एजेंसियों ने स्थिति की समीक्षा की है। सभी विभागों को अलर्ट मोड में रखते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारत में इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है और देश के लिए जोखिम बहुत कम है, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ाई गई है।

    एयरपोर्ट्स पर सख्त स्क्रीनिंग
    एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन यात्रियों की स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया पर लगातार नजर रख रहा है। संदिग्ध मामलों को तुरंत आइसोलेट करने और आगे की जांच के लिए मेडिकल टीमों को तैयार रखा गया है।सरकार ने यात्रियों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य जांच में पूरा सहयोग करें और किसी भी लक्षण को छिपाने से बचें।

    इबोला जैसी गंभीर बीमारी को देखते हुए भारत ने समय रहते एहतियाती कदम उठाए हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा को ध्यान में रखते हुए सतर्कता को प्राथमिकता दी जा रही है।

  • धर्मेंद्र की याद में टूटे बॉबी देओल, कहा-उनके जाने के बाद जिंदगी में खालीपन रह गया, हर बात आज भी याद आती है

    धर्मेंद्र की याद में टूटे बॉबी देओल, कहा-उनके जाने के बाद जिंदगी में खालीपन रह गया, हर बात आज भी याद आती है

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल एक बातचीत के दौरान उस समय भावुक हो गए जब उन्होंने अपने दिवंगत पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को याद किया। एक चर्चित कार्यक्रम में शामिल हुए बॉबी देओल ने अपने पिता के साथ जुड़ी यादों और उनके व्यक्तित्व को साझा करते हुए कहा कि धर्मेंद्र केवल एक बड़े कलाकार ही नहीं बल्कि उनके लिए जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा थे। बातचीत के दौरान कई बार उनका भावुक होना साफ दिखाई दिया, जिससे माहौल भी गंभीर और संवेदनशील हो गया।

    बॉबी देओल ने कहा कि उनके पिता धर्मेंद्र का व्यक्तित्व इतना सरल, स्नेहपूर्ण और प्रभावशाली था कि उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति उन्हें दिल से पसंद करता था। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र के जाने के बाद परिवार ही नहीं बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के जीवन में भी एक गहरा खालीपन आ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है। बॉबी ने कहा कि उनके लिए उनके पिता का हर पहलू खास था, चाहे वह उनका प्यार हो, उनका व्यवहार हो या फिर उनका गुस्सा, जो भी उन्हें मिला वह हमेशा अपनापन ही महसूस कराता था।

    कार्यक्रम के दौरान जब उनसे उनकी पहचान के बारे में सवाल किया गया तो बॉबी देओल ने बेहद सादगी से जवाब दिया कि उनके लिए सबसे बड़ी पहचान उनका नाम या स्टारडम नहीं बल्कि यह है कि वे धर्मेंद्र के बेटे हैं। इस जवाब ने वहां मौजूद माहौल को और भी भावनात्मक बना दिया। उन्होंने कहा कि यह पहचान उनके लिए गर्व की बात है और जीवनभर रहेगी, क्योंकि उनके पिता ने उन्हें केवल अभिनय ही नहीं बल्कि इंसानियत और विनम्रता भी सिखाई है।

    बॉबी देओल ने यह भी साझा किया कि पिता के जाने के बाद भी उनकी यादें उनके हर दिन का हिस्सा बनी रहती हैं और जीवन के हर महत्वपूर्ण क्षण में उन्हें उनकी कमी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि समय भले ही आगे बढ़ रहा हो लेकिन पिता की मौजूदगी का एहसास आज भी उतना ही मजबूत है। इस दौरान उनकी आंखों में भावुकता साफ झलक रही थी और उनके शब्दों में एक बेटे का दर्द और प्रेम दोनों दिखाई दे रहे थे।

    फिल्मी करियर की बात करें तो बॉबी देओल इन दिनों अपनी आगामी परियोजनाओं को लेकर भी चर्चा में हैं, लेकिन इस बातचीत में उनका पूरा ध्यान अपने निजी जीवन और पिता की यादों पर ही केंद्रित रहा। यह बातचीत दर्शाती है कि एक सफल कलाकार होने के बावजूद उनके भीतर एक बेटे का भावनात्मक पक्ष आज भी उतना ही गहरा और संवेदनशील है।

    Too short description:
    बॉबी देओल अपने पिता धर्मेंद्र को याद करते हुए भावुक हो गए और कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी पहचान “धर्मेंद्र का बेटा होना” है।

    English Keywords:
    Bobby Deol, Dharmendra, emotional interview, Bollywood news, Shekhar Suman show

  • लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: लागू हुई सख्त निषेधाज्ञा,प्रशासन ने कहा-शांति और सुरक्षा सर्वोपरि

    लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: लागू हुई सख्त निषेधाज्ञा,प्रशासन ने कहा-शांति और सुरक्षा सर्वोपरि



    लखनऊ । लखनऊ में प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और आगामी धार्मिक व प्रशासनिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। शहर में 60 दिनों के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, जो 19 जुलाई तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान कई तरह की गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध रहेंगे और बिना अनुमति किसी भी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय बकरीद, बड़ा मंगल, मोहर्रम जैसे धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ आने वाली प्रवेश परीक्षाओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से लिया गया है।

    लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: प्रशासन का बड़ा फैसला
    लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत यह निषेधाज्ञा लागू की गई है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि किसी भी तरह की भीड़, जुलूस या धरना-प्रदर्शन अब बिना अनुमति संभव नहीं होगा। शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

    5 से अधिक लोगों की सभा पर रोक, अनुमति जरूरी
    आदेश के अनुसार, बिना अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों का एकत्र होना, समूह बनाना, जुलूस निकालना या किसी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना प्रतिबंधित रहेगा। धार्मिक कार्यक्रमों जैसे भंडारा, मजलिस, जुलूस, चल समारोह या सांस्कृतिक आयोजन के लिए पहले से प्रशासनिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के उपयोग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

    संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष प्रतिबंध
    निषेधाज्ञा के तहत विधानसभा भवन और उसके आसपास के क्षेत्रों में ट्रैक्टर-ट्रॉली, घोड़ा गाड़ी, ज्वलनशील पदार्थ और हथियार लेकर प्रवेश पर रोक रहेगी। इसके अलावा लालबत्ती चौराहा, पार्क रोड, सिविल अस्पताल, अटल चौक, बंदरिया बाग, गोल्फ क्लब और कैसरबाग जैसे इलाकों में धरना या विरोध प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने साफ किया है कि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    ड्रोन, शूटिंग और सोशल मीडिया पर भी नजर
    लखनऊ में सरकारी भवनों जैसे लोकभवन, मुख्यमंत्री आवास और विधान भवन के आसपास ड्रोन उड़ाने या शूटिंग करने पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट, अफवाह या सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले कंटेंट पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। साइबर सेल को ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    डिलीवरी स्टाफ और किरायेदारों की जांच अनिवार्य
    ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं जैसे जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। साइबर कैफे संचालकों को ग्राहकों का पूरा रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मकान मालिकों को भी बिना किरायेदार सत्यापन के मकान न देने की सख्त हिदायत दी गई है।

    सख्त संदेश: नियम तोड़ा तो होगी कार्रवाई
    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि यह कदम शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी है।

  • हार्दिक पांड्या पर कार्रवाई: धीमी ओवर-रेट के चलते जुर्माना ठोका गया

    हार्दिक पांड्या पर कार्रवाई: धीमी ओवर-रेट के चलते जुर्माना ठोका गया


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में Hardik Pandya पर लीग के आचार संहिता (कोड ऑफ कंडक्ट) के उल्लंघन के लिए बड़ी कार्रवाई की गई है। मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेले गए मुकाबले में उनके व्यवहार को अनुशासनहीन माना गया, जिसके चलते उन पर मैच फीस का 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ ही उनके खाते में एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ दिया गया है।

    मैच के दौरान दूसरी पारी के 10वें ओवर की चौथी गेंद के बाद हार्दिक पांड्या अपने रन-अप की ओर लौट रहे थे, तभी उन्होंने जानबूझकर स्टंप्स की बेल्स को गिरा दिया। इस हरकत को आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.2 का उल्लंघन माना गया, जो क्रिकेट उपकरण या मैदान की संरचना के दुरुपयोग से जुड़ा है। मैच रेफरी ने उन्हें लेवल-1 अपराध का दोषी पाया, जिसके बाद पांड्या ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और जुर्माने को बिना आपत्ति के मान लिया।

     मैदान पर भी नहीं चला पांड्या का प्रदर्शन
    मैच में Mumbai Indians के कप्तान हार्दिक पांड्या का प्रदर्शन भी खास नहीं रहा। उन्होंने गेंदबाजी में सिर्फ 2 ओवर फेंके, जबकि बल्लेबाजी में 27 गेंदों पर 26 रन बनाए। उनकी पारी में 2 चौके और 1 छक्का शामिल रहा, लेकिन टीम को उससे बड़ा फायदा नहीं मिल सका।

     केकेआर के खिलाफ MI की हार
    इस मुकाबले में मुंबई इंडियंस को Kolkata Knight Riders के खिलाफ 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। पहले बल्लेबाजी करते हुए मुंबई की शुरुआत बेहद खराब रही।

    रोहित शर्मा 15 रन बनाकर आउट
    रयान रिकेल्टन 6 रन पर पवेलियन
    नमन धीर खाता नहीं खोल सके
    सूर्यकुमार यादव 15 रन पर क्लीन बोल्ड
    तिलक वर्मा 20 रन (32 गेंद)
    हालांकि, अंत में कॉर्बिन बॉश की 18 गेंदों में नाबाद 32 रनों की पारी से टीम 147 रन तक पहुंचने में सफल रही।

     केकेआर की आसान जीत और प्लेऑफ तस्वीर
    लक्ष्य का पीछा करते हुए केकेआर ने 18.5 ओवर में 6 विकेट खोकर जीत दर्ज की। मनीष पांडे ने 33 गेंदों पर 45 रन और रोवमैन पॉवेल ने 30 गेंदों पर 40 रन बनाकर जीत की नींव रखी। गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में संतुलित प्रदर्शन के दम पर केकेआर ने मुकाबला अपने नाम किया। दूसरी ओर मुंबई इंडियंस पहले ही प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी है, जिससे टीम का यह सीजन निराशाजनक बन गया है।

    हार्दिक पांड्या पर लगी यह कार्रवाई मुंबई इंडियंस के लिए एक और झटका है, जो पहले ही खराब प्रदर्शन से जूझ रही थी। अब टीम के सामने अगले सीजन में वापसी की बड़ी चुनौती होगी, जबकि केकेआर ने इस जीत के साथ अपनी प्लेऑफ उम्मीदें मजबूत कर ली हैं।

  • यूपी का ‘धुरंधर’ लउआ गांव: 32 साल तक जिस गांव के पास रही विधायकी

    यूपी का ‘धुरंधर’ लउआ गांव: 32 साल तक जिस गांव के पास रही विधायकी

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का लउआ गांव अपनी अनोखी राजनीतिक विरासत के लिए जाना जाता है। इस गांव से निकले दो नेताओं हृदय नारायण दीक्षित और उदय राज यादव ने पुरवा विधानसभा सीट पर दशकों तक दबदबा बनाए रखा और मिलकर आठ बार जीत दर्ज की।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में उन्नाव जिले का एक छोटा-सा गांव लउआ किसी राजनीतिक ‘हॉटस्पॉट’ से कम नहीं रहा है। पुरवा विधानसभा क्षेत्र के इस गांव ने पिछले कई दशकों में ऐसी राजनीतिक कहानी लिखी है, जिसे राज्य की चुनावी इतिहास में एक अलग पहचान मिली है। वर्ष 1985 से लेकर 2012 तक इस गांव के दो नेताओं ने बारी-बारी से विधानसभा सीट पर कब्जा जमाए रखा और कुल मिलाकर 32 वर्षों तक इस क्षेत्र की राजनीति पर प्रभाव बनाए रखा।

    इस गांव से निकलकर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले दो प्रमुख नाम हैं—भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पद्मश्री से सम्मानित हृदय नारायण दीक्षित और समाजवादी पार्टी के नेता उदय राज यादव। दोनों नेताओं ने अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनाव लड़कर पुरवा विधानसभा में लगातार सफलता हासिल की और अपने क्षेत्र को राजनीतिक नक्शे पर खास स्थान दिलाया।

    हृदय नारायण दीक्षित ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में की और पहली ही बार में जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने 1989 में जनता दल, 1991 में जनता पार्टी और 1993 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लगातार जीत दर्ज की। इस तरह उन्होंने पुरवा विधानसभा से चार बार विधायक बनकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की। बाद में 2017 में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर भगवंतनगर सीट से भी जीत दर्ज की और विधानसभा अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचे।

    दूसरी ओर, लउआ गांव के ही उदय राज यादव ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर पुरवा विधानसभा में लगातार चार बार—1996, 2002, 2007 और 2012—जीत हासिल की। उनकी लोकप्रियता का आधार उनका मजबूत जनसंपर्क और गांव-गांव तक सीधा जुड़ाव रहा। हालांकि 2017 और 2022 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन लंबे समय तक उनका प्रभाव क्षेत्र की राजनीति में बना रहा।

    पुरवा विधानसभा का चुनावी इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1952 से 2022 तक इस सीट पर कुल 18 विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें से 8 बार जीत लउआ गांव के इन दोनों नेताओं के खाते में गई। यह आंकड़ा अपने आप में इस गांव के राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।

    इस क्षेत्र की राजनीति की खास बात यह रही है कि यहां पार्टी से ज्यादा व्यक्तिगत छवि और जनता से जुड़ाव का असर देखने को मिलता रहा है। लोधी और यादव जाति के मतदाताओं की बड़ी संख्या, साथ ही सवर्ण और मुस्लिम वोटरों की निर्णायक भूमिका ने चुनावी समीकरणों को हमेशा रोचक बनाए रखा।

    दोनों नेताओं की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका निरंतर जनता से संपर्क और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रही। जहां हृदय नारायण दीक्षित अपनी वैचारिक और संगठनात्मक राजनीति के लिए जाने जाते हैं, वहीं उदय राज यादव जनसंपर्क आधारित समाजवादी राजनीति के प्रतीक रहे हैं।

    लउआ गांव की यह राजनीतिक कहानी आज भी यूपी की चुनावी राजनीति में एक मिसाल के रूप में देखी जाती है, जहां एक छोटे से गांव ने दो नेताओं के दम पर दशकों तक सत्ता समीकरणों को प्रभावित किया।

  • प्रीतम ने ‘मशूका’ पर लगे आरोपों को बताया गलत, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस..

    प्रीतम ने ‘मशूका’ पर लगे आरोपों को बताया गलत, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस..


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘कॉकटेल 2’ का नया गाना ‘मशूका’ रिलीज होते ही जहां दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया, वहीं इसके साथ ही विवादों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस गाने की धुन पर सवाल उठाते हुए इसे कॉपी बताया, जिसके बाद यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। विवाद बढ़ने के साथ ही संगीतकार प्रीतम ने सामने आकर इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी और ट्रोलर्स को स्पष्ट संदेश दिया कि लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।

    सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का दावा है कि ‘मशूका’ की धुन 1993 में रिलीज हुए एक इटालियन गीत से मिलती-जुलती है। इस तुलना के बाद इंटरनेट पर बहस तेज हो गई और कई यूजर्स ने संगीतकार को ट्रोल करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह मुद्दा संगीत प्रेमियों और फिल्म इंडस्ट्री के बीच चर्चा का केंद्र बन गया। हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच गाने की लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ा और यह लगातार ट्रेंड करता रहा।

    विवाद बढ़ने के बाद प्रीतम ने इंस्टाग्राम स्टोरी के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि हर नए गाने के साथ कुछ लोग स्वयंभू संगीत विशेषज्ञ बनकर सामने आ जाते हैं और बेवजह समानताएं खोजने लगते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल गलत हैं बल्कि बिना आधार के किसी कलाकार की मेहनत पर सवाल खड़ा करती हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जहां कुछ लोग उनके समर्थन में आए तो कुछ ने बहस को और आगे बढ़ा दिया।

    फिल्म ‘कॉकटेल 2’ को लेकर पहले से ही दर्शकों में काफी उत्साह है और अब इस नए गाने ने फिल्म के प्रति जिज्ञासा और बढ़ा दी है। निर्माताओं ने पहले ही संकेत दिया है कि फिल्म का ट्रेलर जल्द ही जारी किया जाएगा, जिससे दर्शकों को कहानी की पहली झलक देखने को मिलेगी। इसके बाद फिल्म की रिलीज को लेकर भी उत्सुकता और तेज हो गई है।

    यह फिल्म एक लोकप्रिय पूर्व फिल्म की आध्यात्मिक अगली कड़ी मानी जा रही है, जिसमें नई कहानी और नए किरदारों के साथ दर्शकों को एक ताजा अनुभव देने की तैयारी है। फिल्म में प्रमुख कलाकारों की मौजूदगी भी इसे और अधिक चर्चा में ला रही है।

    कुल मिलाकर ‘मशूका’ गाने को लेकर उठा यह विवाद एक बार फिर यह दिखाता है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी रचना को लेकर तुरंत प्रतिक्रियाएं सामने आ जाती हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने फिल्म और इसके संगीत को और अधिक चर्चा में ला दिया है, जिससे रिलीज से पहले ही इसकी लोकप्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है।

  • 21 मई को धातु बाजार में हलचल, सोना सस्ता और चांदी भी लुढ़की, निवेशकों को मिला नया संकेत

    21 मई को धातु बाजार में हलचल, सोना सस्ता और चांदी भी लुढ़की, निवेशकों को मिला नया संकेत


    नई दिल्ली । 21 मई 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे ग्राहकों और निवेशकों के बीच हल्की राहत का माहौल देखने को मिला है। बाजार खुलते ही कीमती धातुओं के दाम नीचे आए और शुरुआती कारोबार में ही गिरावट का रुख स्पष्ट हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और मांग में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया है।

    सुबह के कारोबार में सोने की कीमतों में 500 रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव में भी तेज गिरावट देखने को मिली। इससे पहले पिछले सत्र में सोना और चांदी अपेक्षाकृत स्थिर या ऊंचे स्तर पर बने हुए थे, लेकिन आज के सत्र में बाजार में नरमी का रुख रहा।

    शहरवार कीमतों के अनुसार देश के प्रमुख महानगरों में 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के रेट अलग-अलग स्तर पर दर्ज किए गए। नई दिल्ली और मुंबई में 22 कैरेट सोने का भाव लगभग समान स्तर पर रहा, जबकि 24 कैरेट सोना भी एक तय दायरे में कारोबार करता दिखा। कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और अहमदाबाद जैसे शहरों में भी कीमतों में हल्का अंतर देखा गया, जो स्थानीय टैक्स और मांग के अनुसार बदलता रहा। चांदी की कीमतों में भी प्रति किलो स्तर पर उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया, जिससे बाजार में अस्थिरता का संकेत मिला।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और डॉलर में बदलाव का सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे कीमतों में तेजी आती है, जबकि स्थिरता आने पर कीमतों में गिरावट देखी जाती है।

    इस समय बाजार में देखी जा रही गिरावट को अल्पकालिक सुधार के रूप में भी देखा जा रहा है। निवेशकों के लिए यह स्थिति खरीदारी का अवसर भी मानी जा रही है, हालांकि विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

    कुल मिलाकर 21 मई का दिन कीमती धातुओं के बाजार के लिए नरमी भरा रहा, जहां सोना और चांदी दोनों के दाम नीचे आए और उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर इन कीमतों में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • इकबाल अंसारी की मांग: गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए, कुर्बानी को बताया अनुचित

    इकबाल अंसारी की मांग: गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए, कुर्बानी को बताया अनुचित

    नई दिल्ली। बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और उसकी कुर्बानी पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और गाय का आदर करना सामाजिक एकता के लिए जरूरी है।

    उत्तर प्रदेश में बकरीद के मौके पर गाय की कुर्बानी और सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर चल रही बहस के बीच बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि केस के पूर्व वादी इकबाल अंसारी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि गाय को “गौमाता” माना जाता है और इसका सम्मान हर नागरिक की जिम्मेदारी है, चाहे वह किसी भी धर्म का क्यों न हो।

    इकबाल अंसारी ने मांग की है कि सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे, ताकि इसके संरक्षण और सम्मान को और मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था से जुड़ी हुई है। ऐसे में उसकी कुर्बानी किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती।

    उन्होंने यह भी कहा कि हम भारतीय मुसलमान हैं और देश की साझा परंपराओं का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है। उनके अनुसार समाज में शांति और भाईचारे को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सभी धर्म एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और उसका सम्मान करें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पड़ोसी धर्म की आस्था का ध्यान रखना भी सामाजिक सद्भाव का हिस्सा है।

    इकबाल अंसारी ने कहा कि गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है और इसे प्रकृति का एक उपयोगी उपहार माना जाता है। इसलिए गाय का संरक्षण और सम्मान और भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस्लाम भी निर्दोष और उपयोगी जीवों के प्रति क्रूरता को बढ़ावा नहीं देता, और समाज के कुछ लोग गलत कार्यों से पूरे समुदाय को बदनाम करते हैं।

    उन्होंने समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा कि गायों के साथ किसी भी प्रकार का गलत व्यवहार नहीं होना चाहिए और जो भी ऐसा करता है, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि इस मुद्दे को राजनीति से दूर रखना चाहिए और केवल सामाजिक सौहार्द के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

    पूर्व वादी ने यह भी कहा कि यदि समाज में भाईचारा बनाए रखना है तो सभी धर्मों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना होगा। उन्होंने अयोध्या के संतों की राय का भी समर्थन करते हुए कहा कि धर्मों के बीच संवाद और सम्मान ही देश को मजबूत बनाता है।

    इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द की दिशा में सकारात्मक कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक और राजनीतिक बहस से जोड़कर देख रहे हैं।

  • संजय कपूर केस में बढ़ी कानूनी हलचल, बच्चों के भविष्य से जुड़े खर्च पर अदालत में नई याचिका

    संजय कपूर केस में बढ़ी कानूनी हलचल, बच्चों के भविष्य से जुड़े खर्च पर अदालत में नई याचिका


    नई दिल्ली । दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर से जुड़े संपत्ति विवाद में एक बार फिर नया कानूनी मोड़ सामने आया है, जिसने इस हाई-प्रोफाइल मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। इस बार मामला सीधे तौर पर बच्चों की शिक्षा और उनके रोजमर्रा के खर्चों से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर संजय कपूर की पत्नी प्रिया सचदेव कपूर ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक नई याचिका दाखिल की है। इस याचिका के बाद संपत्ति विवाद की जटिलताएं और बढ़ती दिखाई दे रही हैं, हालांकि अदालत पहले से ही इस मामले में अंतरिम आदेशों के तहत स्थिति को नियंत्रित कर रही है।

    प्रिया कपूर की ओर से अदालत में यह आग्रह किया गया है कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्च बिना किसी रुकावट के नियमित रूप से जारी रहने चाहिए। इसके लिए उन्होंने कुछ बैंक खातों के संचालन की अनुमति मांगी है, ताकि स्कूल फीस और अन्य आवश्यक शैक्षणिक खर्च समय पर पूरे किए जा सकें। यह मामला मुख्य रूप से संजय कपूर की बेटी समायरा और बेटे कियान की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर केंद्रित बताया जा रहा है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि कुछ विदेशी संयुक्त खातों के उपयोग की अनुमति दी जाए, ताकि बच्चों की विदेश में शिक्षा, रहने और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा किया जा सके। इस पहल को परिवार की ओर से बच्चों के हितों की सुरक्षा और उनकी शिक्षा को बाधित न होने देने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब संपत्ति से जुड़े कई पहलुओं पर पहले से ही कानूनी जांच और विवाद चल रहा है।

    इससे पहले अदालत ने इस मामले में संपत्ति के बड़े और स्थायी निर्णयों पर रोक लगाते हुए स्थिति को यथावत बनाए रखने के आदेश दिए थे। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि अंतिम निर्णय आने तक किसी भी पक्ष के अधिकारों को नुकसान न पहुंचे। हालांकि, बच्चों से जुड़े आवश्यक खर्चों को लेकर अदालत ने पहले भी संवेदनशील रुख अपनाया है और जरूरतों के आधार पर सीमित अनुमति देने पर विचार किया गया है।

    संजय कपूर के निधन के बाद यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब उनकी कथित वसीयत और संपत्ति के बंटवारे को लेकर परिवार के भीतर मतभेद सामने आए। अलग-अलग पक्षों की ओर से संपत्ति के अधिकारों और प्रबंधन को लेकर दावे किए जाने लगे, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया। समय के साथ यह विवाद और जटिल होता गया और इसमें कई कानूनी पहलू जुड़ते चले गए।

    अब प्रिया कपूर की नई याचिका ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस नए अनुरोध पर क्या रुख अपनाती है और बच्चों के हितों तथा संपत्ति विवाद के बीच संतुलन कैसे स्थापित करती है। फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और सभी पक्ष अदालत के अगले निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, जिससे इस लंबे चल रहे विवाद की दिशा तय हो सकती है।

  • तापमान में लगातार उछाल: रीवा में अगले 3 दिन और बढ़ेगी गर्मी

    तापमान में लगातार उछाल: रीवा में अगले 3 दिन और बढ़ेगी गर्मी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Rewa में भीषण गर्मी और लू का असर लगातार तेज होता जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार गुरुवार को अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 27 डिग्री दर्ज किया गया है।

    तेज धूप और गर्म हवाओं ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा देखने को मिल रहा है और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं।

     लगातार बढ़ रहा तापमान, रातें भी गर्म
    पिछले तीन दिनों के आंकड़ों के अनुसार रीवा में तापमान लगातार सामान्य से अधिक बना हुआ है।
    18 मई: 44.5°C
    19 मई: करीब 44°C
    20 मई: 44.5°C
    न्यूनतम तापमान भी 26 से 27 डिग्री के बीच बना हुआ है, जिससे रात के समय भी लोगों को राहत नहीं मिल रही है।

     अगले तीन दिन और बढ़ेगी गर्मी
    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं:
    22 मई: 45°C तक तापमान
    23 मई: 45 से 46°C
    24 मई: लगभग 45°C
    इसी वजह से क्षेत्र में हीटवेव अलर्ट जारी किया गया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

     दोपहर  में बाहर निकलने से बचने की सलाह
    आईएमडी ने साफ निर्देश दिए हैं कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें। लगातार बढ़ती गर्मी से डिहाइड्रेशन, चक्कर और लू लगने का खतरा बढ़ गया है।

     स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ी
    स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह 10 बजे के बाद ही गर्म हवाएं तेज हो जाती हैं, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।

    रीवा में लगातार बढ़ती गर्मी ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। आने वाले दिनों में राहत की संभावना कम है, ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।