Author: bharati

  • एक्ट्रेस Zareen Khan की मां का हुआ निधन, लंबे समय से बीमार थीं Parveen Khan

    एक्ट्रेस Zareen Khan की मां का हुआ निधन, लंबे समय से बीमार थीं Parveen Khan


    नई दिल्ली। एक्ट्रेस जरीन खान (Zareen Khan) की मां Parveen Khan का निधन हो गया है। वह काफी लंबे समय से बीमार थीं और आज बुधवार, 8 अप्रैल को ही उन्होंने आखिरी सांस ली। जरीन खान की टीम ने उनकी मां के निधन की खबर की पुष्टि की। जरीन खान की मां पिछले कुछ साल में कई बार गंभीर रूप में बीमार हुईं और अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा था। वहीं इस बार उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा दिया और एक्ट्रेस को अकेला छोड़ गईं।

    टीम ने जारी किया ऐसा स्टेटमेंट
    इस खबर की पुष्टि तब हुई जब एक्ट्रेस की टीम ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके इसके बारे में सबको जानकारी दी। जरीन खान के मैनेजर पीयूष जैन ने स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें कहा, ‘सूचित किया जाता है कि हमारी प्रिय श्रीमती परवीन खान, जरीन खान और सना खान की मां का 8 अप्रैल को निधन हो गया। वह शांतिपूर्वक स्वर्ग सिधार गईं।’ जैसे ही ये खबर सामने आई फैंस और बॉलीवुड के गलियारों में मातम छा गया है।

    मुंबई के वर्सोवा में हो गया अंतिम संस्कार
    बता दें सुबह 10 बजे मुंबई के वर्सोवा में जरीन खान की मां का अंतिम संस्कार कर दिया गया। एक्ट्रेस जरीन कई बार सोशल मीडिया पर अपनी मां के बारे में बात करती नजर आईं। वह फैंस से उनके लिए दुआएं करने को कहती थीं और हाल बताती थीं। जरीन ने मां की देखभाल के लिए कई बार सोशल मीडिया से ब्रेक लिया था।

    पहले ही छोड़ कर चले गए थे पिता
    जरीन खान ने एक एक इंटरव्यू में बताया था कि, उन्होंने और उनके परिवार ने काफी कुछ देखा हैं। उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया था कि, मां और छोटी बहन का ख्याल रखने के लिए उन्हें स्कूल के बाद सीधे नौकरी करनी पड़ी थी। एक्ट्रेस ने पिंकविला’ से बात करते हुए कहा था कि, वो एक शाम थी, जिसने हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। पापा हमें छोड़कर चले गए। हमारे पास कोई पैसे नहीं थे। एक रात हम सब परिवार के साथ थे, और अचानक मेरी मां फूट-फूट कर रोने लगीं। मैंने उन्हें शांत करने की कोशिश की और समझाया कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है, मैं सब संभाल लूंगी।

  • दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन, CSAS पोर्टल पर आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया जानें

    दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन, CSAS पोर्टल पर आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया जानें


    नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में एडमिशन 2026 की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। इस साल भी अंडरग्रेजुएट एडमिशन CUET UG स्कोर के आधार पर होगा। छात्र अपनी कॉलेज और कोर्स प्रेफरेंस CSAS (Common Seat Allocation System) पोर्टल के जरिए भरेंगे और इसी के आधार पर सीट अलॉटमेंट होगा।

    DU Admission 2026 की प्रक्रिया कब शुरू होगी?

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, DU में UG एडमिशन प्रक्रिया मई के तीसरे हफ्ते से शुरू हो सकती है। इसके साथ ही CSAS पोर्टल भी एक्टिव कर दिया जाएगा। छात्र CUET रिजल्ट आने के बाद इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे।

    CSAS पोर्टल क्या है?

    CSAS पोर्टल DU का ऑनलाइन एडमिशन सिस्टम है। इसमें छात्र CUET देने के बाद रजिस्ट्रेशन करेंगे। यही प्लेटफॉर्म कॉलेज और कोर्स अलॉटमेंट के लिए इस्तेमाल होता है।

    रजिस्ट्रेशन स्टेप्स:

    DU की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करें।
    पर्सनल डिटेल्स और शैक्षणिक जानकारी भरें।
    जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें।
    नया इंटरफेस खुलेगा, जिसमें कॉलेज और कोर्स प्रेफरेंस भरनी होगी।
    अंतिम चरण में फीस ऑनलाइन जमा करनी होगी।
    DU Admission प्रक्रिया के मुख्य चरण

    DU में एडमिशन तीन मुख्य चरणों में होता है:

    रजिस्ट्रेशन: छात्र CSAS पोर्टल पर लॉगिन कर रजिस्ट्रेशन करेंगे।
    प्रेफरेंस फिलिंग: छात्र अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स का चयन करेंगे।
    सीट अलॉटमेंट: CUET स्कोर, मेरिट और भरी गई प्रेफरेंस के आधार पर सीट अलॉट की जाएगी। सीट मिलने के बाद छात्रों को सीट स्वीकार कर फीस जमा करनी होगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी है।

    महत्वपूर्ण बातें
    CUET स्कोर इस साल भी एडमिशन का आधार रहेगा।
    CSAS पोर्टल पर सही समय पर रजिस्ट्रेशन और प्रेफरेंस भरना जरूरी है।
    फीस जमा करना भी पूरी तरह ऑनलाइन होगा।
    सीट अलॉटमेंट पूरी तरह मेरिट और प्रेफरेंस आधारित होगी।

  • आर्टेमिस II मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने सुरक्षित तरीके से देखा सूर्य ग्रहण, सोलर ग्लासेज का उपयोग अनिवार्य बताया

    आर्टेमिस II मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने सुरक्षित तरीके से देखा सूर्य ग्रहण, सोलर ग्लासेज का उपयोग अनिवार्य बताया


    नई दिल्ली। अंतरिक्ष से सूर्य ग्रहण देखना जितना रोमांचक अनुभव है, उतना ही संवेदनशील भी है, क्योंकि इस दौरान आंखों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। हाल ही में आर्टेमिस II मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने सूर्य ग्रहण का अद्भुत दृश्य देखा, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने सोलर व्यूइंग ग्लासेज के उपयोग की आवश्यकता को भी स्पष्ट रूप से सामने रखा। यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि चाहे पृथ्वी हो या अंतरिक्ष, सूर्य को सीधे देखना हमेशा सावधानी की मांग करता है।

    इस मिशन में शामिल अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच, जेरेमी हैनसन, रीड वाइजमैन और विक्टर ग्लोवर ने ओरियन स्पेसक्राफ्ट से सूर्य ग्रहण का अवलोकन किया। उन्होंने विशेष सोलर एक्लिप्स ग्लासेज पहनकर ग्रहण के आंशिक चरणों को देखा, ताकि आंखों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। वैज्ञानिकों के अनुसार, केवल पूर्ण सूर्य ग्रहण के कुछ क्षणों को छोड़कर बाकी समय सूर्य को सीधे देखना आंखों के लिए अत्यंत खतरनाक होता है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि सूर्य की तेज रोशनी और हानिकारक विकिरण आंखों की रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही कारण है कि सामान्य धूप के चश्मे सूर्य ग्रहण देखने के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते। सोलर व्यूइंग ग्लासेज विशेष रूप से इस उद्देश्य के लिए बनाए जाते हैं और ये अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होते हैं, जो आंखों को सुरक्षित रखते हैं।

    आंशिक और वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान सावधानी और भी आवश्यक हो जाती है, क्योंकि इन स्थितियों में सूर्य पूरी तरह ढका नहीं होता। ऐसे में पूरे समय सोलर ग्लासेज पहनना जरूरी होता है। यदि चश्मे में किसी प्रकार की खरोंच या क्षति हो, तो उनका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। बच्चों को ग्रहण दिखाते समय विशेष निगरानी की आवश्यकता होती है, ताकि वे बिना सुरक्षा के सूर्य की ओर न देखें।

    इसके अलावा, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि सोलर ग्लासेज पहनकर भी कैमरा, दूरबीन या टेलीस्कोप के माध्यम से सूर्य को नहीं देखना चाहिए। इन उपकरणों के जरिए सूर्य की किरणें और अधिक तीव्र होकर आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे उपकरणों के लिए अलग से विशेष सोलर फिल्टर का उपयोग करना अनिवार्य होता है।

    यदि सोलर व्यूइंग ग्लासेज उपलब्ध न हों, तो अप्रत्यक्ष तरीके से ग्रहण देखना एक सुरक्षित विकल्प है। पिनहोल प्रोजेक्टर जैसी सरल विधि के माध्यम से सूर्य की छवि को कागज या दीवार पर प्रोजेक्ट करके बिना किसी जोखिम के ग्रहण का आनंद लिया जा सकता है। इस तकनीक में सीधे सूर्य को देखने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे आंखों की सुरक्षा बनी रहती है।

  • आईपीएल 2026: डीसी के खिलाफ GT का पलड़ा भारी, दिल्ली करेगी मुकाबले में हिसाब बराबर

    आईपीएल 2026: डीसी के खिलाफ GT का पलड़ा भारी, दिल्ली करेगी मुकाबले में हिसाब बराबर


    नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 (आईपीएल 2026) के 14वें मुकाबले में बुधवार को दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) और गुजरात टाइटंस (जीटी) आमने-सामने होंगी। अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाने वाला यह मैच दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि टीम अपने घरेलू मैदान पर गुजरात के खिलाफ जीत दर्ज कर जीत-हार का समीकरण बराबर करना चाहती है।

    दोनों टीमों का रिकॉर्ड

    गुजरात टाइटंस ने 2022 में लीग में कदम रखा था। पिछले चार सीजन में दोनों टीमों के बीच अब तक 7 मैच खेले गए हैं।

    गुजरात ने 4 मैच जीते हैं, जबकि
    दिल्ली ने 3 मुकाबले अपने नाम किए हैं।

    सीजनवार मुकाबले:

    2022: गुजरात ने डीसी को 14 रन से हराया।
    2023: दोनों टीमों ने एक-एक मैच जीता; गुजरात 6 विकेट से, दिल्ली 5 विकेट से विजयी।
    2024: डीसी ने दोनों मैचों में जीत हासिल की; 6 और 4 विकेट से।
    2025: गुजरात ने दोनों मैच जीते; 7 और 10 विकेट से।

    इस हिसाब से गुजरात का अब तक का रिकॉर्ड दिल्ली के मुकाबले थोड़ा बेहतर रहा है। बुधवार का मैच दिल्ली को बराबरी करने का मौका देगा।

    आईपीएल 2026 में फॉर्म

    दिल्ली कैपिटल्स शानदार फॉर्म में नजर आ रही है।

    सीजन के दोनों मैचों में डीसी ने जीत दर्ज की।
    पहला मैच: लखनऊ सुपर जायंट्स को 6 विकेट से हराया।
    दूसरा मैच: होम ग्राउंड पर मुंबई इंडियंस को 6 विकेट से हराया।

    इस प्रदर्शन के साथ डीसी अंकतालिका में चौथे स्थान पर है।

    वहीं, गुजरात टाइटंस के लिए यह सीजन मुश्किल से शुरू हुआ।

    जीटी अपने शुरुआती दो मैचों में हार का सामना कर चुकी है।
    अंकतालिका में गुजरात नौवें स्थान पर है।
    डीसी के खिलाफ बुधवार का मुकाबला गुजरात के लिए सीजन की पहली जीत दर्ज करने का अवसर होगा।
    मैच की अहमियत

    दिल्ली कैपिटल्स को अपने घरेलू मैदान का फायदा है। टीम अपनी दो जीत के साथ आत्मविश्वास में है और बुधवार को गुजरात के खिलाफ जीत दर्ज कर पुराने मुकाबलों का समीकरण बराबर करना चाहेगी। गुजरात टाइटंस भी कम नहीं हैं। वे सीजन की अपनी पहली जीत हासिल करने के लिए आक्रामक खेल दिखाने की तैयारी में हैं।

    दोनों टीमों के बीच इतिहास और वर्तमान फॉर्म को देखते हुए यह मुकाबला रोमांचक होने वाला है। फैंस की नजरें इस मुकाबले पर होंगी, क्योंकि जीत किसी भी टीम के सीजन के टोन को बदल सकती है।

  • आग बुझाने गया किसान खुद बन गया शिकार, सतना में 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत

    आग बुझाने गया किसान खुद बन गया शिकार, सतना में 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत


    सतना । सतना जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया जहां अरहर के खेत में लगी आग बुझाने के प्रयास में एक वृद्ध किसान की झुलसकर मौत हो गई। यह घटना बरौंधा थाना क्षेत्र के बकोटा गांव की है जहां मंगलवार दोपहर अचानक खेत में आग भड़क उठी और देखते ही देखते उसने विकराल रूप ले लिया।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार बकोटा गांव निवासी 80 वर्षीय मुरलिया यादव अपने खेत में लगी आग को बुझाने के लिए मौके पर पहुंचे थे। आग तेजी से फैल रही थी और आसपास की फसलों को भी अपनी चपेट में ले रही थी। ऐसे में मुरलिया यादव ने बिना अपनी सुरक्षा की परवाह किए आग बुझाने का प्रयास शुरू किया लेकिन इसी दौरान वे लपटों में घिर गए और गंभीर रूप से झुलस गए।

    ग्रामीणों ने घटना को देख तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास किया और मुरलिया यादव को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उन्हें गंभीर रूप से जलने से बचाया नहीं जा सका। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल छा गया और हर कोई इस हादसे से स्तब्ध नजर आया।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि खेत में आग अचानक लगी हालांकि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में खेतों में सूखी फसल और तेज हवाओं के कारण आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में थोड़ी सी चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में जागरूकता अभियान चलाया जाए और किसानों को सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी दी जाए।

    यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि खेतों में आग लगने की स्थिति में बिना सुरक्षा के उसे बुझाने का प्रयास कितना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आग लगने पर तुरंत फायर ब्रिगेड या संबंधित अधिकारियों को सूचना देना चाहिए और खुद जोखिम उठाने से बचना चाहिए।

    मुरलिया यादव का यह बलिदान गांव के लोगों के लिए एक बड़ी क्षति है। वे अपने परिवार और समुदाय के लिए समर्पित किसान थे। इस दुखद घटना ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।

    प्रशासन और पुलिस अब इस घटना की जांच कर रहे हैं और आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

  • विशेषज्ञों का कहना, RBI के फैसले से गृह ऋण लेने वालों को मिलेगा फायदा

    विशेषज्ञों का कहना, RBI के फैसले से गृह ऋण लेने वालों को मिलेगा फायदा


    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से होम लोन (मॉर्गेज) की ब्याज दरों में स्थिरता बनी रहेगी और रियल एस्टेट सेक्टर को राहत मिलेगी। रियल एस्टेट मार्केट में अब खरीदार और डेवलपर्स दोनों ही अपने वित्तीय निर्णयों को बेहतर तरीके से योजना बना सकेंगे।

    विशेषज्ञों ने दी प्रतिक्रिया

    श्रीनिवास राव, वेस्टियन के सीईओ (FRICS) ने कहा कि रेपो रेट स्थिर रहने से निर्माण लागत बढ़ने के बावजूद होम लोन दरें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी, जो घर खरीदने वालों के लिए राहत है। उन्होंने बताया कि यह कदम बढ़ती लागत के असर को कम करने में मदद करेगा और बाजार की बदलती स्थिति के अनुसार रणनीति बनाने का समय देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह आखिरी बार हो सकता है जब रेपो रेट स्थिर रहे; भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना बनी हुई है।

    शिशिर बैजल, नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा कि आरबीआई का ‘न्यूट्रल’ रुख अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाएगा। उन्होंने बताया कि स्थिर ब्याज दरों से घर खरीदने वालों के लिए सामर्थ्य बनी रहती है और डेवलपर्स को बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है। ऐसे माहौल में जहां आर्थिक संकेतों से बाजार प्रभावित होता है, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का न होना सकारात्मक संकेत है।

    विमल नादर, कोलियर्स इंडिया के नेशनल डायरेक्टर और रिसर्च हेड ने कहा कि मौजूदा संकट की तीव्रता और अवधि का असर खपत पर पड़ सकता है, खासकर रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और हाउसिंग सेक्टर में। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से सस्ते और मिड-इनकम सेगमेंट के खरीदार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी पहलू रियल एस्टेट सेक्टर को मध्यम अवधि में मजबूती देंगे।

    आर्थिक संकेतक: महंगाई और जीडीपी

    आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर 4.6 प्रतिशत और जीडीपी ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को देखते हुए बैंक ने ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपनाई है। इससे अर्थव्यवस्था पर अप्रत्याशित झटकों का असर कम होगा और मौद्रिक स्थिरता बनी रहेगी।

    रियल एस्टेट और होम लोन पर असर

    स्थिर रेपो रेट से होम लोन दरें स्थिर रहेंगी, जिससे घर खरीदने वालों के लिए वित्तीय योजना आसान होगी। डेवलपर्स को भी परियोजनाओं की योजना और लागत प्रबंधन में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से निजी निवेश और मांग को बनाए रखने में सहारा मिलेगा, जबकि सप्लाई चेन बाधाओं और बढ़ती निर्माण लागत जैसी चुनौतियों का असर सीमित रहेगा।

    आरबीआई का यह निर्णय रियल एस्टेट सेक्टर और होम लोन बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। स्थिर ब्याज दरों से खरीदार और डेवलपर्स दोनों ही लाभान्वित होंगे, जबकि अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी पहलू भविष्य में स्थिर विकास सुनिश्चित करेंगे। हालांकि, वैश्विक और स्थानीय जोखिमों पर नजर रखना आवश्यक रहेगा।

  • पद अनुसार शैक्षणिक योग्यता और अनुभव आवश्यक, चयन शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर

    पद अनुसार शैक्षणिक योग्यता और अनुभव आवश्यक, चयन शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली ट्रस्ट (एनपीएस) में नौकरी करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए यह अवसर महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। नेशनल पेंशन सिस्टम ट्रस्ट ने सीनियर एग्जीक्यूटिव और अन्य विभिन्न 15 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 8 अप्रैल से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 29 अप्रैल निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि से पहले अपना आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।

    इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 15 पद शामिल हैं। इन पदों में सीनियर एग्जीक्यूटिव (मार्केटिंग एवं संचार, आईटी एवं संचालन, नेटवर्क एवं संचालन, मानव संसाधन एवं प्रशासन, लीगल), सीनियर एनालिस्ट (पेंशन निधि अनुपालन और प्रदर्शन निगरानी, ट्रस्टी बैंक अनुपालन और योजना लेखापरीक्षा), एनालिस्ट (पेंशन निधि प्रदर्शन और अनुपालन), एग्जीक्यूटिव (निकास एवं निकासी, सोशल मीडिया एवं समन्वय, शिकायतें) आदि शामिल हैं। इन पदों के लिए उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता पद अनुसार ग्रेजुएशन या पोस्ट-ग्रेजुएशन, सीए (इंटर), एमबीए, पीजीडीएम, एमकॉम, लॉ, बीटेक, एमसीए, सीएफए या एफआरएम में होनी चाहिए। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्र में अनुभव होना अनिवार्य है।

    उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु पद अनुसार 23 से 25 वर्ष और अधिकतम आयु 35 से 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। चयन प्रक्रिया में शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शामिल है। चयनित उम्मीदवारों को पद अनुसार मासिक वेतन 70,000 से 1,50,000 रुपए तक प्रदान किया जाएगा।

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले एनपीएस ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और संबंधित पद के लिए जारी नोटिफिकेशन लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट निकालें। फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियों को सही ढंग से भरें और संबंधित सभी दस्तावेजों के साथ इसे आधिकारिक ईमेल आईडी पर भेज दें। इस प्रक्रिया के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

  • भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज, RBI ने अगले दो साल का GDP अनुमान पेश किया

    भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज, RBI ने अगले दो साल का GDP अनुमान पेश किया


    नई दिल्ली।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026 और 2027 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) का नया अनुमान बुधवार को जारी किया।

    वित्त वर्ष 2026
    वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.6%, जो पहले 7.4% थी।
    बढ़ती वृद्धि के कारण: मजबूत सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार, और घरेलू मांग में मजबूती। दिसंबर तिमाही 2026 में जीडीपी ग्रोथ 7.8%, जबकि पिछली तिमाही में 8.4% थी।

    वित्त वर्ष 2027
    जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9%, जो बाहरी जोखिम और लागत दबाव के कारण थोड़ी नरमी दर्शाता है।
    पहली तिमाही: 6.8% (पहले 6.9%)
    दूसरी तिमाही: 6.7% (पहले 7%)
    मुख्य कारण: ईरान युद्ध और वैश्विक स्तर पर बढ़ते दबाव।
    महंगाई का अनुमान
    वित्त वर्ष 2027 के लिए CPI मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान।
    पहली तिमाही: 4%
    दूसरी तिमाही: 4.4%
    तीसरी तिमाही: 5.2%
    चौथी तिमाही: 4.7%
    आरबीआई के अन्य संकेत
    बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी सुनिश्चित की जाएगी।
    निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ने की उम्मीद, क्योंकि उद्योगों में क्षमता उपयोग उच्च स्तर पर।
    विदेशी निवेश आकर्षक बना हुआ है; 3 अप्रैल तक विदेशी मुद्रा भंडार 697.1 अरब डॉलर। नेट FDI में सुधार और ग्रीनफील्ड निवेश के लिए भारत को एक आकर्षक गंतव्य माना जा रहा है।

    आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने चेताया कि ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी महंगाई का खतरा बढ़ा सकती है और वैश्विक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

    वित्त वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, जबकि 2027 में वैश्विक और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण वृद्धि में थोड़ा नरमी आने का अनुमान है। मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहने की संभावना है और निजी निवेश आर्थिक विकास का समर्थन करेगा।

  • कृषि को उत्पादन से प्रॉस्पेरिटी तक ले जाने की दिशा में उत्तर प्रदेश अग्रणी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर

    कृषि को उत्पादन से प्रॉस्पेरिटी तक ले जाने की दिशा में उत्तर प्रदेश अग्रणी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर


    नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश की राजधानी में आयोजित छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र के समग्र और दूरदर्शी विकास के लिए स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कृषि को केवल उत्पादन से आगे बढ़ाकर प्रोडक्टिविटी, प्रॉफिटेबिलिटी और अंततः प्रॉस्पेरिटी तक ले जाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे लाभप्रद, टिकाऊ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संचालित करना आवश्यक है। इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश राज्य किसानों के हित और समग्र कृषि विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन दिवसीय इस आयोजन में कृषि के विभिन्न आयामों पर गंभीर विचार-विमर्श होगा, जिसमें जमीनी स्तर के अनुभव, सफल प्रयोग और नवाचार साझा किए जाएंगे। यह मंच केवल चर्चा के लिए नहीं, बल्कि ठोस क्रियान्वयन योजना तैयार करने का माध्यम होना चाहिए, जिससे किसान सीधे लाभान्वित हों। उन्होंने राज्य के कृषि आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश की लगभग 16-17 प्रतिशत आबादी का घर है, जबकि यहां केवल 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि उपलब्ध है, फिर भी राज्य कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 प्रतिशत का योगदान देता है। योजनाबद्ध प्रयासों और प्रभावी नीतियों के माध्यम से कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंचाना उल्लेखनीय उपलब्धि है।

    मुख्यमंत्री ने भारत की ऐतिहासिक आर्थिक शक्ति का आधार कृषि बताया और कहा कि एक समय में भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत तक थी, जिसमें सशक्त कृषि तंत्र का योगदान महत्वपूर्ण था। उन्होंने बताया कि पहले किसान सिर्फ उत्पादक नहीं था, बल्कि कारीगर और उद्यमी भी था। समय के साथ यह व्यवस्था कमजोर हुई और किसान केवल कच्चा माल उत्पादक बन गया, जिससे आर्थिक असंतुलन उत्पन्न हुआ।

    उन्होंने आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक कृषि को नई दिशा दे सकते हैं। सेंसर आधारित तकनीक से मिट्टी की नमी और पोषण का डेटा प्राप्त कर किसान सटीक निर्णय ले सकते हैं। एआई के माध्यम से फसलों का वास्तविक समय विश्लेषण, रोग पहचान और उत्पादन का पूर्वानुमान संभव है। ड्रोन द्वारा उर्वरक और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव तथा सैटेलाइट के माध्यम से मौसम और भूमि की निगरानी कृषि को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बना रही है। बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग बदलते मौसम के अनुकूल बीज विकसित करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है।

    मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती को दीर्घकालिक समाधान बताते हुए कहा कि यह लागत कम करने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संतुलन भी बनाए रखती है। डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म, वन नेशन-वन मंडी प्रणाली, मंडी शुल्क में कमी और डिजिटल सॉयल हेल्थ कार्ड किसानों को सीधे बाजार, मौसम और मूल्य की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

    उन्होंने पारंपरिक ‘लैब टू लैंड’ मॉडल की जगह ‘लैंड इज लैब’ पर जोर देते हुए कहा कि अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाना होगा, जहां किसान और वैज्ञानिक मिलकर नवाचार स्थापित करें। कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

    मुख्यमंत्री ने गन्ना क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब अधिकांश मिलें 6-7 दिनों में भुगतान करती हैं। प्रदेश गन्ना उत्पादन में 55 प्रतिशत का योगदान देता है और एथेनॉल उत्पादन में देश में नंबर वन है। सिंचाई के लिए नलकूप और सोलर पैनल आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना और अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसे उपाय सुनिश्चित किए गए हैं। 89 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहे हैं।

  • भिण्ड में बदलते मौसम ने गेहूँ की फसल को किया प्रभावित, किसानों में बढ़ी चिंता

    भिण्ड में बदलते मौसम ने गेहूँ की फसल को किया प्रभावित, किसानों में बढ़ी चिंता

    भिण्ड । भिण्ड जिले में मौसम का अचानक बदलता मिजाज किसानों की चिंता का कारण बन गया है। पिछले एक सप्ताह से सुबह तेज धूप और शाम को बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। इस बदलते मौसम से खेतों में खड़ी और कटाई के लिए तैयार गेहूँ की फसल पर नकारात्मक असर पड़ा है। किसानों का कहना है कि यह अचानक बदलते मौसम ने फसल की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों को प्रभावित किया है।

    कल देर शाम तेज हवाओं के साथ बादल घिर आए और रात में बूंदाबांदी शुरू हो गई। जिले के कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई। हालांकि देर रात मौसम साफ होने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन खेतों में फसल पर इसका असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कई जगह गेहूँ के बाल कमजोर हुए और जमीन पर गिर गए हैं, जिससे उनका नुकसान होने की संभावना है।

    किसानों का कहना है कि गेहूँ की कटाई का समय करीब है और ऐसी बारिश फसल के बर्बाद होने का जोखिम बढ़ा रही है। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे मौसम के अनुसार आवश्यक कदम उठाएं और किसानों को समय पर जानकारी प्रदान करें ताकि वे अपनी फसल की रक्षा कर सकें। इसके अलावा किसानों ने सुझाव दिया है कि मौसम के अनुकूल तकनीकी सहायता और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, जिससे कटाई के दौरान नुकसान को कम किया जा सके।

    मौसम विभाग ने भी भिण्ड जिले में अगले कुछ दिनों के लिए बारिश की संभावना जताई है। किसानों को सतर्क रहने और खेतों में सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। किसानों का कहना है कि तेज हवाओं और बारिश के चलते फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा।

    भिण्ड जिले में गेहूँ किसानों की मुख्य फसल है और यह क्षेत्रिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में मौसम की अनिश्चितता से किसान परेशान हैं और वे अपने फसल के सही मूल्य और उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं। किसान संगठन और स्थानीय प्रशासन भी इस स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और किसानों को सलाह और मदद प्रदान करने में जुटे हैं।

    कुल मिलाकर भिण्ड जिले में बदलते मौसम और लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गेहूँ की फसल पर पड़ने वाले असर को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से मदद और समय पर जानकारी की मांग की है। विशेषज्ञ भी सुझाव दे रहे हैं कि किसानों को अपने खेतों में आवश्यक सुरक्षा उपाय करना चाहिए ताकि फसल की बर्बादी कम से कम हो। ऐसे में आगामी दिनों में मौसम की स्थिति और प्रशासन की मदद दोनों ही किसानों की चिंता को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे।