Author: bharati

  • क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने महिला खिलाड़ियों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का किया ऐलान

    क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने महिला खिलाड़ियों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का किया ऐलान


    नई दिल्ली। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने 2026-27 सीज़न के लिए अपनी महिला टीम की सेंट्रल चैंपियनशिप की घोषणा कर दी है। इस बार 18 खिलाड़ियों की सूची में युवा और उभरते रायपुर के स्थान पर चयनकर्ता ने की भविष्य की टीम तैयार करने के संकेत दिए हैं।

    नए ज्वालामुखी का उद्भव, आइंसवर्थ को बिना आरंभ अवसर

    इस सांस्कृतिक सूची में दो नए नाम विशेष चर्चा में हैं—लूसी हैमिल्टन और क्लो आइंसवर्थ।
    हैमिल्टन ने हाल ही में शानदार प्रदर्शन करते हुए हॉस्टल में शुरूआत कर चयन से प्रभावित किया। लगभग तीन टी अलग-अलग में उन्होंने कहा, परीक्षण और 20 में अपना आकलन दर्ज किया गया।

    वहीं 20 साल की तेजतर्रार टीम आइंसवर्थ को अभी तक इंटरनेशनल रिज्यूमे का मौका नहीं मिला है, लेकिन घरेलू क्रिकेट और विमेंस बिग बैश लीग में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें सेंट्रल सेंट्रल चैंपियनशिप दी गई है। यह उनके कैथोलिक बोर्ड के कथन को अलग करता है।

    निकोला कैरी की वापसी, अनुभव का मिलान महत्वपूर्ण

    निकोला कैरी की भी क्लासिक लिस्ट में वापसी हुई है। उन्होंने 2023 में खुद को थिएटर से बाहर घरेलू क्रिकेट और विदेशी लीग में अपने स्टेडियमों को उजागर किया था। हाल ही में भारत की सीरीज के खिलाफ उनके प्रदर्शन ने सेलेक्शन पोर्टफोलियो को प्रभावित किया, जिसके बाद उन्हें फिर से टीम में जगह मिल गई।

    हीली आउट, कुछ बड़े नाम भी लिस्ट से गायब

    पूर्व कैप्टन एलिसा हीली को इस बार क्लैन्सल से बाहर कर दिया गया है, क्योंकि उन्होंने क्रिकेट टेस्ट से संन्यास ले लिया है। इसके अलावा इस सूची में टेस फ्लिंटॉफ और टायला व्लामिन्क के अलावा कोई भी शामिल नहीं है। व्लामिन्क चोट अभी भी लगातार जारी हैं, जबकि फ्लिंटॉफ को राष्ट्रीय टीम में ज्यादा अंक नहीं मिले।

    चयन रणनीतिक का फोकस भविष्य पर

    चयनकर्ता शॉन फ्लेगलर ने स्पष्ट किया कि अभी भी उत्कृष्ट खिलाड़ी का चयन दौड़ में है। इस बार टीम चयन में युवा खिलाड़ियों को भविष्य की मजबूत टीम तैयार करने पर जोर दिया गया है।

    18 खिलाड़ियों की संगीतमय सूची

    इस सूची में ऐलिस पेरी, बेथ मूनी, एशले गार्डनर, मेगन शट्ट, ताहलिया मैकग्राथ, एनाबेल सदरलैंड जैसे अनुभवी नाम भी शामिल हैं, जो टीम की जगहें बनाते हैं।

  • मुरैना हत्याकांड पर उमंग सिंघार का वार बोले प्रदेश में कानून का डर खत्म

    मुरैना हत्याकांड पर उमंग सिंघार का वार बोले प्रदेश में कानून का डर खत्म


    भोपाल । मध्य प्रदेश के भोपाल में सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई जब उमंग सिंघार ने मुरैना में हुई दर्दनाक घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने रेत माफिया द्वारा वन विभाग के आरक्षक की हत्या को कानून व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया

    दरअसल हाल ही में मुरैना में अवैध रेत खनन को रोकने गई टीम पर हमला हुआ था जिसमें वन विभाग के आरक्षक हरकेश गुर्जर की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी गई इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है

    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं उन्होंने कहा कि जिस तरह दिनदहाड़े रेत माफिया ने कानून के रक्षक पर हमला कर उसकी जान ले ली वह बेहद भयावह और चिंताजनक है

    सिंघार ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि यह घटना इस बात का संकेत है कि अपराधियों में अब कानून का कोई डर नहीं बचा है उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में अवैध खनन माफिया खुलेआम सक्रिय हैं और प्रशासन उन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं उन्होंने मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं

    मुरैना की यह घटना अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह गई है बल्कि इसने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर व्यापक बहस छेड़ दी है आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और भी तेज होने की संभावना है

  • आईपीएल 2026: यशस्वी जायसवाल का ‘स्पेशल शतक’, RR के दिग्गजों के क्लब में एंट्री

    आईपीएल 2026: यशस्वी जायसवाल का ‘स्पेशल शतक’, RR के दिग्गजों के क्लब में एंट्री


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में यशस्वी जायसवाल ने एक बार फिर अपनी क्लास दिखाते हुए ऐसा कारनामा कर दिया, जिसने उन्हें राजस्थान रॉयल्स के खास बल्लेबाजों की लिस्ट में शामिल कर दिया। मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेले गए मुकाबले में उनकी विस्फोटक पारी ने न सिर्फ टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई, बल्कि उन्हें एक बड़े रिकॉर्ड क्लब में भी जगह दिला दी।

    32 गेंदों में 77 रन, और पूरा किया ‘छक्कों का शतक’

    मुंबई इंडियंस के खिलाफ जायसवाल ने सिर्फ 32 गेंदों में 77 रनों की तूफानी पारी खेली, जिसमें 10 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। जैसे ही उन्होंने चौथा छक्का लगाया, वैसे ही आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए उनके 100 छक्के पूरे हो गए। यह उपलब्धि उन्हें टीम के चुनिंदा दिग्गज बल्लेबाजों के क्लब में ले आई।

    सैमसन-बटलर-वॉटसन के क्लब में शामिल

    जायसवाल से पहले यह उपलब्धि सिर्फ तीन बल्लेबाजों ने हासिल की थी—
    संजू सैमसन (192 छक्के), जोस बटलर (135 छक्के) और शेन वॉटसन (109 छक्के)। अब जायसवाल भी इस खास सूची का हिस्सा बन गए हैं, जो उनके लगातार शानदार प्रदर्शन का प्रमाण है।

    आंकड़े बताते हैं क्यों हैं खास

    आईपीएल 2020 से राजस्थान के लिए खेल रहे जायसवाल ने अब तक 70 मैचों में 2,336 रन बनाए हैं। उनके नाम 2 शतक और 17 अर्धशतक दर्ज हैं। इस दौरान उन्होंने 277 चौके और 100 छक्के जड़े हैं। उनका औसत 36.50 और स्ट्राइक रेट 153.58 रहा है, जो उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का साफ संकेत देता है।

    हर मौके पर साबित कर रहे खुद को

    जायसवाल को भारतीय टीम में टेस्ट फॉर्मेट का नियमित खिलाड़ी माना जाता है, लेकिन सीमित ओवरों में उनकी जगह अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है। इसके बावजूद वह हर मौके पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं और लगातार चयनकर्ताओं को मजबूत संदेश दे रहे हैं।

    बदलती टीमें, लेकिन कायम विरासत

    दिलचस्प बात यह है कि संजू सैमसन अब चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा हैं, जबकि जोस बटलर गुजरात टाइटंस के लिए खेल रहे हैं। वहीं शेन वॉटसन संन्यास लेकर अब कोचिंग भूमिका में हैं। ऐसे में जायसवाल नई पीढ़ी के उस खिलाड़ी के रूप में उभर रहे हैं, जो इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

  • पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस के विजय रथ पर बाहरी मैदानों पर लगा ब्रेक और जीत के गिरते आंकड़ों ने बढ़ाई टीम प्रबंधन की चिंता

    पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस के विजय रथ पर बाहरी मैदानों पर लगा ब्रेक और जीत के गिरते आंकड़ों ने बढ़ाई टीम प्रबंधन की चिंता


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग के पिछले कुछ वर्षों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो मुंबई इंडियंस का घर से बाहर खेलने का रिकॉर्ड सभी दस टीमों के मुकाबले सबसे कमजोर पाया गया है। साल 2023 के सीजन से लेकर अब तक मुंबई की टीम अपने विदेशी यानी अवे मैचों में केवल 36 प्रतिशत मुकाबले ही जीतने में सफल रही है। यह आंकड़ा लीग की अन्य सभी टीमों के बीच सबसे न्यूनतम जीत प्रतिशत है। जहां अन्य टीमें विपक्षी टीम के मैदान पर जाकर अंक बटोरने में सफल रही हैं वहीं मुंबई इंडियंस के दिग्गज खिलाड़ी विदेशी पिचों की परिस्थितियों और वातावरण के साथ तालमेल बिठाने में लगातार संघर्ष करते नजर आए हैं। यह गिरावट उस टीम के लिए बहुत बड़ा झटका है जिसने कभी पूरे भारत के हर मैदान पर अपनी धाक जमाई थी।

    घर से बाहर खेलते समय टीम की मुख्य समस्या निरंतरता की कमी और दबाव के क्षणों में बिखर जाना रही है। आंकड़ों के मुताबिक वानखेड़े की पिच पर मुंबई के बल्लेबाज जिस निडरता के साथ खेलते हैं वैसी बल्लेबाजी चेपॉक या ईडन गार्डन्स जैसे बड़े मैदानों पर दिखाई नहीं देती। इसके अलावा गेंदबाजी विभाग भी अवे मैचों में रनों की गति पर अंकुश लगाने और नियमित अंतराल पर विकेट निकालने में पिछड़ता रहा है। 36 प्रतिशत का यह जीत का आंकड़ा दर्शाता है कि टीम अपनी घरेलू परिस्थितियों पर अत्यधिक निर्भर हो चुकी है और बाहर के मैदानों की चुनौती स्वीकार करने में उसकी रणनीतिक तैयारी अपर्याप्त साबित हो रही है। किसी भी टीम के लिए प्लेऑफ की राह तभी आसान होती है जब वह अपने घर के साथ-साथ विपक्षी के मैदान पर भी अंक हासिल करे।

    इस निराशाजनक प्रदर्शन के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं जिनमें टीम के संतुलन में बदलाव और प्रमुख खिलाड़ियों की चोटें शामिल हैं। हालांकि मुंबई इंडियंस के पास विश्व स्तरीय प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है लेकिन मैदान पर उनका सामूहिक प्रदर्शन वह परिणाम नहीं दे पा रहा है जिसकी उम्मीद उनके करोड़ों प्रशंसक करते हैं।

    विपक्षी टीमें अब मुंबई की इस कमजोरी को भांप चुकी हैं और अपने घरेलू मैदान पर उन्हें घेरने की विशेष योजनाएं बना रही हैं। यदि मुंबई इंडियंस को अपनी पुरानी साख वापस पानी है और आगामी सीजन में खिताब की दौड़ में मजबूती से शामिल होना है तो उन्हें घर से बाहर खेलने की अपनी रणनीति में आमूलचूल परिवर्तन करना होगा और खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को फिर से जगाना होगा।
  • रेत माफिया का आतंक मुरैना में गश्ती दल पर हमला वन आरक्षक की मौके पर मौत

    रेत माफिया का आतंक मुरैना में गश्ती दल पर हमला वन आरक्षक की मौके पर मौत


    मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहां अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई करने निकली टीम पर माफिया ने जानलेवा हमला कर दिया इस हमले में एक वन आरक्षक की मौके पर ही मौत हो गई जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है

    जानकारी के मुताबिक यह घटना दिमनी थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 552 के पास की है जहां चंबल नदी के ऐसाह घाट से अवैध रेत खनन और परिवहन की शिकायतें लगातार मिल रही थीं इसी सूचना के आधार पर अंबाह रेंज की वन विभाग की टीम तड़के सुबह गश्त पर निकली थी

    गश्ती के दौरान रथोल का पुरा और रानपुर के बीच वन आरक्षक हरिकेश गुर्जर ने रेत से भरे एक ट्रैक्टर ट्रॉली को रोकने की कोशिश की लेकिन चालक ने रुकने के बजाय बेरहमी से वाहन उन पर चढ़ा दिया जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी वाहन लेकर फरार हो गया

    घटना के बाद वन विभाग की टीम ने तुरंत घायल वनकर्मी को अस्पताल पहुंचाया लेकिन तब तक उनकी जान जा चुकी थी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया परिजन भी जिला अस्पताल पहुंचे जिससे माहौल गमगीन हो गया

    बताया जा रहा है कि हरिकेश गुर्जर हाल ही में दूसरे जिले से स्थानांतरित होकर अंबाह रेंज में पदस्थ हुए थे उनकी इस तरह की मौत ने एक बार फिर अवैध खनन के बढ़ते खतरे और उसमें शामिल माफियाओं के हौसलों को उजागर कर दिया है

    मामले पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और उसकी पहचान भी कर ली गई है सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर ने बताया कि आरोपी की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा

    इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और कानून का डर खत्म होता जा रहा है

    यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि अवैध खनन का नेटवर्क कितना खतरनाक हो चुका है जब कानून की रक्षा करने वाले ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करे और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए

  • रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 की अपार सफलता के बीच दीपिका की चुप्पी ने छेड़ी नई बहस और ट्रोलर्स को मिला करारा जवाब

    नई दिल्ली। ग्लैमर की दुनिया में अक्सर यह माना जाता है कि यदि कोई बात सोशल मीडिया पर साझा नहीं की गई तो वह घटित ही नहीं हुई है लेकिन दीपिका पादुकोण ने इस धारणा को चुनौती देते हुए अपनी बात रखी है। उन्होंने संकेत दिया कि एक कलाकार और एक जीवनसाथी के तौर पर वे अपने रिश्तों को कैमरा और सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर रखना पसंद करती हैं।
    रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं और प्रशंसकों का एक वर्ग यह उम्मीद कर रहा था कि दीपिका कोई खास पोस्ट साझा करेंगी। हालांकि जब ऐसा नहीं हुआ तो ट्रोलर्स ने उनके व्यवहार पर सवाल उठाए जिसके जवाब में दीपिका ने अपनी निजता और व्यक्तिगत स्पेस को सर्वोपरि रखने की बात कही है।

    दीपिका का मानना है कि सफलता और खुशी साझा करने के लिए प्रत्यक्ष संवाद और व्यक्तिगत उपस्थिति कहीं अधिक प्रभावी होती है बजाय इसके कि इसे केवल डिजिटल लाइक्स और कमेंट्स तक सीमित रखा जाए। रणवीर और दीपिका की जोड़ी ने हमेशा एक-दूसरे के करियर का समर्थन किया है और कई मौकों पर वे सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे की सराहना करते नजर आए हैं। इस बार दीपिका ने अपनी चुप्पी के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनके बीच का समीकरण किसी भी बाहरी शोर या सोशल मीडिया के मानदंडों से बहुत ऊपर है। उन्होंने उन लोगों को भी आईना दिखाया है जो केवल ऑनलाइन सक्रियता के आधार पर किसी के रिश्ते की गहराई को मापने की कोशिश करते हैं।

    फिल्म जगत के जानकारों का कहना है कि कलाकारों की निजी जिंदगी पर लगातार निगरानी और छोटी-छोटी बातों पर ट्रोलिंग का बढ़ता चलन चिंताजनक है। दीपिका पादुकोण ने इस स्थिति को बहुत ही परिपक्वता के साथ संभाला और यह प्रदर्शित किया कि वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने में सक्षम हैं।

    रणवीर सिंह की सफलता पर उनकी खुशी उनके व्यक्तिगत दायरे का हिस्सा है जिसे वे दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए बाध्य नहीं महसूस करतीं। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर से सेलिब्रिटीज की निजता और प्रशंसकों की अपेक्षाओं के बीच के बारीक अंतर पर बहस छेड़ दी है जिसमें दीपिका का पक्ष काफी मजबूत और तर्कसंगत नजर आता है।
  • आस्था और तकनीक के बीच संतुलन बनाने की सबसे बड़ी चुनौती और नमित मल्होत्रा का फिल्म की गुणवत्ता को लेकर किया गया सबसे बड़ा वादा

    आस्था और तकनीक के बीच संतुलन बनाने की सबसे बड़ी चुनौती और नमित मल्होत्रा का फिल्म की गुणवत्ता को लेकर किया गया सबसे बड़ा वादा


    नई दिल्ली। सिनेमा जगत में जब भी किसी बड़े बजट की और धार्मिक आस्था से जुड़ी फिल्म का निर्माण होता है तो तकनीक और प्रस्तुतिकरण को लेकर दर्शकों की अपेक्षाएं बहुत अधिक होती हैं। नमित मल्होत्रा ने हालिया चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में वीएफएक्स और विजुअल इफेक्ट्स केवल एक साधन हैं जिसका उपयोग कहानी को जीवंत बनाने के लिए किया जा रहा है।
    उन्होंने बताया कि उनकी टीम दुनिया भर के बेहतरीन तकनीशियनों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि मर्यादा पुरुषोत्तम राम की इस पावन कथा को पूरी श्रद्धा और आधुनिक तकनीक के अद्भुत तालमेल के साथ पर्दे पर उतारा जा सके। उनके अनुसार आलोचनाएं केवल इस बात का प्रमाण हैं कि लोग इस प्रोजेक्ट से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं।

    फिल्म के विजुअल्स को लेकर उठ रहे सवालों पर बात करते हुए निर्माता ने यह भी साझा किया कि एक विशाल सिनेमाई अनुभव तैयार करने में समय और धैर्य की आवश्यकता होती है। रामायण केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक भावना है जो करोड़ों लोगों के हृदय में बसी है और इसे पर्दे पर उतारते समय हर छोटी से छोटी बारीकी का ध्यान रखा जा रहा है।

    नमित मल्होत्रा का मानना है कि जब अंतिम परिणाम दर्शकों के सामने आएगा तो वह तकनीकी और भावनात्मक दोनों ही मोर्चों पर सभी की कसौटी पर खरा उतरेगा। उन्होंने प्रशंसकों से अपील की है कि वे इस रचनात्मक यात्रा पर भरोसा रखें क्योंकि पूरी टीम इस महाकाव्य के साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    इस प्रोजेक्ट के माध्यम से भारतीय फिल्म उद्योग में तकनीक के उपयोग को एक नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। निर्माता ने जोर देकर कहा कि रामायण की कहानी को उसकी मौलिकता और पवित्रता के साथ पेश करना उनकी प्राथमिकता है और आधुनिक तकनीक का उपयोग केवल उस अनुभव को और अधिक भव्य बनाने के लिए किया जा रहा है।

    आलोचकों द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर उन्होंने विनम्रतापूर्वक कहा कि वे हर फीडबैक का सम्मान करते हैं और रचनात्मक आलोचना उन्हें और बेहतर करने की प्रेरणा देती है। उनका लक्ष्य एक ऐसी कृति तैयार करना है जिस पर हर भारतीय गर्व कर सके और जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो।
  • डेथ ओवर्स के दो महारथी, दबाव में प्रदर्शन से दोनों गेंदबाज बना रहे हैं नई मिसाल..

    डेथ ओवर्स के दो महारथी, दबाव में प्रदर्शन से दोनों गेंदबाज बना रहे हैं नई मिसाल..


    नई दिल्ली। क्रिकेट के सबसे बड़े मंच आईपीएल में रिकॉर्ड्स का बनना और टूटना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन कुछ खिलाड़ियों ने अपनी निरंतरता से एक ऐसा मानदंड स्थापित कर दिया है जिसे छू पाना किसी भी नवागंतुक के लिए एक बड़ी चुनौती है। भुवनेश्वर कुमार ने अपने करियर की शुरुआत से ही पावरप्ले के दौरान नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की अद्भुत कला का प्रदर्शन किया है। उनके पास न केवल विकेट चटकाने की क्षमता है बल्कि वे रनों की गति पर अंकुश लगाने में भी माहिर माने जाते हैं। आईपीएल के शुरुआती सीजन से लेकर अब तक भुवनेश्वर ने खुद को एक भरोसेमंद गेंदबाज के रूप में पेश किया है और कई मौकों पर अपनी टीम को महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाई हैं।

    दूसरी तरफ जसप्रीत बुमराह का उत्थान आधुनिक क्रिकेट की सबसे बड़ी कहानियों में से एक है। एक अनोखे गेंदबाजी एक्शन के साथ उभरे बुमराह ने बहुत कम समय में खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों की श्रेणी में खड़ा कर लिया है। बुमराह की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिक मजबूती और दबाव के क्षणों में शांत रहकर सटीक यॉर्कर फेंकने की क्षमता है। जब मैच अंतिम ओवरों में फंसा होता है तब कप्तान की पहली पसंद हमेशा बुमराह ही होते हैं। आंकड़ों के लिहाज से भी बुमराह ने कई बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं और उनकी विकेट लेने की दर उन्हें लीग के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक बनाती है।

    इन दोनों गेंदबाजों के बीच विकेटों की संख्या का अंतर बहुत कम रहता है जो इस बात का प्रमाण है कि दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा कितनी कड़ी है। भुवनेश्वर कुमार ने जहां लंबे समय तक खेलते हुए अनुभव और कौशल का बेहतरीन संगम दिखाया है वहीं बुमराह ने अपनी स्ट्राइक रेट और कम इकोनॉमी रेट से सभी को प्रभावित किया है। इन दोनों गेंदबाजों की गेंदबाजी शैली अलग होने के बावजूद उनका लक्ष्य हमेशा अपनी टीम को जीत दिलाना रहा है। भुवनेश्वर की ताकत शुरुआती झटके देना है तो बुमराह मध्यक्रम और निचले क्रम को ध्वस्त करने में महारत रखते हैं।

    आईपीएल के बदलते स्वरूप और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच इन दोनों भारतीय तेज गेंदबाजों ने अपनी फिटनेस और फॉर्म को बरकरार रखते हुए युवा गेंदबाजों के लिए एक मिसाल पेश की है। यह देखना दिलचस्प रहता है कि कैसे एक ही दौर के दो महान गेंदबाज अलग-अलग हथियारों के साथ एक ही लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जी जान लगा देते हैं। रिकॉर्ड की इस दौड़ में कभी भुवनेश्वर आगे निकलते हैं तो कभी बुमराह अपनी तेजी से उन्हें पीछे छोड़ देते हैं। अंततः यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के प्रशंसकों के लिए एक सुखद अनुभव लेकर आती है क्योंकि उन्हें विश्व स्तरीय गेंदबाजी देखने का अवसर मिलता है।

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  • गुफानुमा खदानों का अंत शहडोल में अवैध कोयला माफिया पर बड़ी कार्रवाई

    गुफानुमा खदानों का अंत शहडोल में अवैध कोयला माफिया पर बड़ी कार्रवाई

    शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में अवैध कोयला खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है लंबे समय से जानलेवा खतरा बनी गुफानुमा सुरंगों पर आखिरकार बुलडोजर चला दिया गया यह कार्रवाई न सिर्फ अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए की गई बल्कि स्थानीय लोगों और मवेशियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी बेहद जरूरी मानी जा रही थी

    जिले के अमलाई थाना क्षेत्र के बटुरा और टिकुरीटोला इलाकों में जमीन के नीचे बनाई गई ये खदानें किसी हादसे का इंतजार करती नजर आ रही थीं संकरी और गहरी सुरंगों के जरिए अवैध रूप से कोयला निकाला जा रहा था जो कभी भी धंस सकती थीं और बड़ी जनहानि का कारण बन सकती थीं

    लगातार मिल रही शिकायतों और बढ़ते खतरे को देखते हुए अमलाई पुलिस और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की टीम ने संयुक्त अभियान चलाया मौके पर पहुंची टीम ने जेसीबी मशीनों की मदद से करीब पांच गुफानुमा सुरंगों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और उन्हें मिट्टी से पाटकर बंद कर दिया गया

    कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र को पुलिस की निगरानी में सुरक्षित किया गया और खुले गड्ढों को भी भर दिया गया ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना की आशंका को खत्म किया जा सके प्रशासन का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है

    बताया जा रहा है कि इन अवैध खदानों को पहले भी कई बार बंद कराया जा चुका है लेकिन खनन माफिया हर बार नए तरीके से सुरंगें खोदकर फिर से कोयला निकालना शुरू कर देते हैं यही वजह है कि इस बार प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए व्यापक कार्रवाई की है

    यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि अवैध खनन सिर्फ कानून का उल्लंघन ही नहीं बल्कि लोगों की जान के लिए भी गंभीर खतरा है ऐसे में जरूरी है कि इस तरह की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके

  • RR vs MI: सूर्यवंशी-यशस्वी का तूफान, मुंबई इंडियंस की करारी हार

    RR vs MI: सूर्यवंशी-यशस्वी का तूफान, मुंबई इंडियंस की करारी हार


    नई दिल्ली। गुवाहाटी में खेले गए बारिश से प्रभावित मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने मुंबई इंडियंस को 27 रन से हराकर लगातार शानदार प्रदर्शन जारी रखा। मैच 11-11 ओवर का खेला गया, लेकिन छोटे फॉर्मेट में भी राजस्थान के बल्लेबाजों ने ऐसी आंधी मचाई कि मुंबई की टीम शुरुआत से ही दबाव में आ गई।

    जायसवाल–सूर्यवंशी की जोड़ी ने बदल दिया मैच

    राजस्थान की जीत की नींव ओपनिंग जोड़ी ने रखी। यशस्वी जायसवाल ने सिर्फ 32 गेंदों में नाबाद 77 रन ठोकते हुए मैच पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया। वहीं युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने महज 14 गेंदों में 39 रन बनाकर आक्रामक शुरुआत दी। दोनों ने पहले विकेट के लिए सिर्फ 5 ओवर में 80 रन जोड़कर मुंबई के गेंदबाजों की लय बिगाड़ दी।

    पंड्या बोले- गेंदबाजों ने बिगाड़ा खेल

    हार के बाद हार्दिक पंड्या ने साफ तौर पर अपनी टीम के गेंदबाजों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पावरप्ले में टीम अपनी रणनीति के मुताबिक गेंदबाजी नहीं कर सकी, जिससे मैच हाथ से निकल गया। पंड्या ने यह भी माना कि राजस्थान के ओपनर्स ने बेहतरीन बल्लेबाजी की, लेकिन गेंदबाज उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए।

    युवा वैभव की पंड्या ने भी की तारीफ

    हालांकि हार के बावजूद पंड्या ने युवा प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने वैभव सूर्यवंशी की निडर बल्लेबाजी को शानदार बताया और कहा कि इतनी कम उम्र में इस तरह का आत्मविश्वास काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की।

    रियान पराग का बड़ा बयान

    वहीं रियान पराग ने अपनी ओपनिंग जोड़ी को टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ जोड़ी बताया। उन्होंने कहा कि जायसवाल और वैभव के पास स्किल के साथ मैच्योरिटी भी है, जो उन्हें खास बनाती है। पराग ने टीम के गेंदबाजों की भी तारीफ करते हुए कहा कि उनके तेज गेंदबाज रफ्तार के साथ कंट्रोल भी बनाए रखते हैं।


    बदले नियमों में भी दिखा दम

    बारिश के चलते मैच के नियमों में बदलाव किया गया था। मुकाबला 11 ओवर का हुआ, जिसमें पावरप्ले 3.2 ओवर का रखा गया। चार गेंदबाजों को अधिकतम 2-2 ओवर और एक गेंदबाज को 3 ओवर डालने की अनुमति दी गई। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में भी राजस्थान ने बेहतरीन खेल दिखाया।

    आगे क्या?

    मुंबई इंडियंस के लिए यह हार जरूर चिंता का विषय है, लेकिन कप्तान पंड्या ने भरोसा जताया कि टीम अपनी गलतियों से सीखकर अगले मैच में बेहतर वापसी करेगी। वहीं राजस्थान की टीम जीत की हैट्रिक के साथ पूरे आत्मविश्वास में नजर आ रही है।