Author: bharati

  • गर्मी ने तोड़े रिकॉर्ड: ग्वालियर में रात और दिन दोनों में तापमान ने बढ़ाई मुश्किलें

    गर्मी ने तोड़े रिकॉर्ड: ग्वालियर में रात और दिन दोनों में तापमान ने बढ़ाई मुश्किलें


    ग्वालियर । ग्वालियर में भीषण गर्मी का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है और बुधवार की रात इस सीजन की अब तक की सबसे गर्म रात के रूप में दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे रात के समय भी लोगों को गर्मी से कोई राहत नहीं मिल सकी। आमतौर पर रात के समय तापमान में गिरावट होती है, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल उलट नजर आए।

    गुरुवार की सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। सुबह 8:30 बजे ही तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जिससे दिन की शुरुआत ही झुलसाने वाली गर्मी के साथ हुई। मौसम विभाग ने जिले में लू का ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    इससे पहले बुधवार का दिन भी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के नाम रहा। शहर का अधिकतम तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। सुबह 9 बजे तक ही पारा 40 डिग्री तक पहुंच गया था, जिससे दिनभर हालात बेहद गर्म बने रहे।

    गर्मी का असर शहर की दिनचर्या पर साफ दिखाई दिया। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा छा गया और लोग घरों से निकलने से बचते नजर आए। केवल जरूरी कामों के लिए ही लोग बाहर निकले, जबकि बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भी भीड़ काफी कम रही।

    मौसम विभाग के अनुसार रात के समय भी तापमान सामान्य से काफी अधिक बना रहा। रात 8 बजे तक तापमान लगभग 40 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया, जिससे यह साफ हो गया कि गर्मी का असर दिन और रात दोनों समय जारी है। लगातार बढ़ते तापमान ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस स्थिति को देखते हुए दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। साथ ही लोगों से अधिक पानी पीने, हल्के और सूती कपड़े पहनने तथा धूप से बचाव करने की अपील की गई है, ताकि लू से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सके।

    प्रशासन ने भी लोगों को सतर्क रहने और लू के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी है। लगातार बढ़ते तापमान और हीटवेव की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड पर है।

    इस बीच प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी गर्मी का प्रकोप जारी है, जहां कई शहरों में तापमान 44 डिग्री के पार पहुंच चुका है। कुछ स्थानों पर तो हालात और भी गंभीर हैं, जहां पारा 47 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया है। ऐसे में मध्यप्रदेश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में पूरी तरह से तप रहा है।

    कुल मिलाकर ग्वालियर समेत पूरा क्षेत्र इन दिनों भीषण लू और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से जूझ रहा है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।

  • इंदौर यूनिवर्सिटी में बवाल: अर्धनग्न डांस और तोड़फोड़ के बाद नोटिस की तैयारी

    इंदौर यूनिवर्सिटी में बवाल: अर्धनग्न डांस और तोड़फोड़ के बाद नोटिस की तैयारी


    इंदौर। इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के IET विभाग के हॉस्टल में हुए हंगामे का मामला अब सख्त कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है। हाल ही में हॉस्टल में कुछ छात्रों द्वारा अर्धनग्न होकर डांस करने और जमकर तोड़फोड़ करने की घटना के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में अब तक 18 छात्रों की पहचान कर ली गई है, जबकि बाकी शामिल छात्रों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

    घटना के दौरान छात्रों ने हॉस्टल परिसर में न केवल अनुशासन तोड़ा बल्कि कुर्सियां, टेबल, खिड़कियों के कांच और पानी की टंकी तक को नुकसान पहुंचाया। यह पूरा घटनाक्रम ‘दारू बदनाम कर दी’ गाने पर डांस के दौरान हुआ, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला सुर्खियों में आ गया। वीडियो सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन तुरंत एक्शन मोड में आ गया और अनुशासन समिति की आपात बैठक बुलाई गई।

    प्रबंधन ने प्रारंभिक जांच के आधार पर तय किया है कि दोषी छात्रों पर 25 हजार रुपये प्रति छात्र जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा उन्हें अंतिम परीक्षा से भी वंचित किया जा सकता है और उनके परिणाम रोके जाने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि केवल उन्हीं छात्रों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने वास्तव में तोड़फोड़ की है, जबकि बाकी शामिल छात्रों की भूमिका की जांच की जा रही है।

    IET के निदेशक डॉ. प्रतोष बंसल के अनुसार वीडियो फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर छात्रों की पहचान की जा रही है और अगले दो से तीन दिनों में सभी दोषियों को नोटिस जारी कर दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अभी तक किसी भी छात्र के अभिभावक विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क में नहीं आए हैं, जिससे मामला और गंभीर माना जा रहा है।

    हॉस्टल में करीब 150 छात्र रहते हैं, लेकिन इस घटना में कुछ ही छात्रों की भूमिका स्पष्ट हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परिसर में अनुशासन बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

    इस बीच अनुशासन समिति पहले ही आपात बैठक कर चुकी है और कड़ी सजा की अनुशंसा कुलगुरु तक भेजी जा चुकी है। अब अंतिम मंजूरी कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई से ली जानी बाकी है, जिसके बाद कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    कुल मिलाकर यह मामला केवल हॉस्टल अनुशासन का नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की साख और छात्रों के व्यवहार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है। प्रशासन का सख्त रुख यह संकेत देता है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे।

  • अधिक मास 2026: 15 जून तक थमेंगे शुभ कार्य, जानें क्यों इसे कहा जाता है ‘पुरुषोत्तम मास’

    अधिक मास 2026: 15 जून तक थमेंगे शुभ कार्य, जानें क्यों इसे कहा जाता है ‘पुरुषोत्तम मास’



    नई दिल्ली(New Delhi)। सनातन परंपरा में समय को केवल तारीखों का क्रम नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। इसी परंपरा में एक विशेष अवधि होती है जिसे अधिक मास कहा जाता है, जो इस वर्ष 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा। इसे अधिक ज्येष्ठ मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लगभग 30 दिनों तक चलने वाले इस अतिरिक्त महीने में शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण जैसे संस्कार इस अवधि में नहीं किए जाते। माना जाता है कि इस समय किए गए सांसारिक कार्य अपेक्षित शुभ फल नहीं देते।

    अधिक मास का आधार हिंदू पंचांग की खगोल गणना में छिपा है। सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का होता है, जबकि चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता है। दोनों के बीच हर वर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर बनता है, जो तीन वर्षों में लगभग 33 दिनों तक पहुंच जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब यह अतिरिक्त महीना अस्तित्व में आया तो किसी भी देवता ने इसे स्वीकार नहीं किया। सभी महीनों के अपने-अपने अधिपति थे, लेकिन इस अतिरिक्त मास का कोई स्वामी नहीं था। दुखी होकर यह मास भगवान विष्णु के पास पहुंचा, जहां उन्होंने इसे “पुरुषोत्तम मास” का नाम दिया और इसे अपना संरक्षण प्रदान किया। तभी से यह महीना विशेष और अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यह समय सांसारिक कार्यों की बजाय आत्मिक उन्नति और साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस अवधि में पूजा-पाठ, जप, तप, दान और व्रत को अत्यधिक फलदायी बताया गया है। वहीं व्यापार, निवेश या नए कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।

    शास्त्रों में वर्णन है कि इस मास में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। इसलिए इसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है, जहां भक्ति और आत्मचिंतन को सर्वोच्च महत्व दिया गया है।

    टैग्स (comma separated):
    अधिक मास 2026, पुरुषोत्तम मास, शुभ कार्य बंद, ज्योतिष, हिंदू पंचांग, भगवान विष्णु, धार्मिक मान्यता, व्रत और पूजा, ज्येष्ठ मास

  • इंदौर हनी ट्रैप केस में बड़ा खुलासा: बीजेपी नेता हिरासत में, जांच तेज

    इंदौर हनी ट्रैप केस में बड़ा खुलासा: बीजेपी नेता हिरासत में, जांच तेज


    नई दिल्ली। इंदौर का चर्चित हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग मामला लगातार नए खुलासों के साथ और गहराता जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल केस में अब पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए एक महिला आरोपी को हिरासत में लिया है, जिसकी पहचान रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी के रूप में सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह आरोपी इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी मानी जा रही है और वह बीजेपी के एक प्रकोष्ठ में पदाधिकारी रह चुकी है, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

    इससे पहले पुलिस ने इस केस में मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन, महिला शराब तस्कर अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा समेत कई लोगों को हिरासत में लिया था। अब जांच का फोकस इस पूरे नेटवर्क के डिजिटल सबूतों पर है, जहां पुलिस मोबाइल फोन से वीडियो, ऑडियो और अन्य फाइलें रिकवर करने में जुटी हुई है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रेशू, अलका और श्वेता मिलकर एक संगठित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क चला रही थीं, जिसका मकसद प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाकर उनसे मोटी रकम वसूलना था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क ने निमाड़ क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता को भी टारगेट किया था और उनके खिलाफ भी कथित रूप से ब्लैकमेलिंग की कोशिश की गई थी।

    इस पूरे मामले की शुरुआत जेल से जुड़ी दोस्ती से होने की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, श्वेता विजय जैन और अलका दीक्षित की मुलाकात जेल में हुई थी, जहां से इस कथित हनी ट्रैप नेटवर्क की नींव रखी गई। बाद में कोर्ट पेशी के दौरान भी संपर्क बढ़ता गया और रेशू को इस नेटवर्क में शामिल किया गया।

    जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी पक्ष ने कई नेताओं, प्रॉपर्टी कारोबारियों, फाइनेंसरों और अधिकारियों को फंसाने की रणनीति बनाई थी। कथित तौर पर इन लोगों के निजी वीडियो और ऑडियो रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था। पुलिस अब इसी डिजिटल सामग्री को रिकवर करने में जुटी है, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद है।

    इसी बीच मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन ने पुलिस पूछताछ में सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है। बताया जा रहा है कि उसने यह भी स्वीकार किया है कि नेटवर्क के भीतर कई स्तर पर योजनाएं बनाई जाती थीं और कुछ मामलों में बड़े प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाने की तैयारी थी।

    पुलिस क्राइम ब्रांच डीसीपी राजेश त्रिपाठी के अनुसार, यह मामला केवल ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं है बल्कि एक संगठित अपराध नेटवर्क की तरह काम कर रहा था, जिसमें कई लोग अलग-अलग भूमिकाओं में शामिल थे। फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और डिजिटल साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी है।

    इस पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मचा दी है, क्योंकि इसमें जुड़े कुछ नाम और संबंध इसे और अधिक संवेदनशील बना रहे हैं। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर सच्चाई सामने लाना और सभी डिजिटल सबूतों को सुरक्षित करना है।

  • करण जौहर का धर्मा प्रोडक्शंस करेगा गुजराती सिनेमा में डेब्यू, इस फिल्म से करेगें शुरुवात

    करण जौहर का धर्मा प्रोडक्शंस करेगा गुजराती सिनेमा में डेब्यू, इस फिल्म से करेगें शुरुवात



    नई दिल्ली(New Delhi)
    ।
    बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर करण जौहर का प्रोडक्शन हाउस धर्मा प्रोडक्शंस अब हिंदी सिनेमा के साथ-साथ क्षेत्रीय फिल्मों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने जा रहा है। इस बार कंपनी गुजराती फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू करने की तैयारी में है।

    धर्मा प्रोडक्शंस ने वार्ताकार फिल्म्स के साथ साझेदारी की है और दोनों मिलकर अपकमिंग फिल्म ‘ज़िंदगी वन्स मोर’ पर काम कर रहे हैं। इस फिल्म को धर्मा प्रोडक्शंस द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि इसका निर्माण वार्ताकार फिल्म्स ने किया है। फिल्म का निर्देशन जयमिन ने किया है और इसे वासु ढोलकिया ने प्रोड्यूस किया है।

    फिल्म ‘ज़िंदगी वन्स मोर’ में सिद्धार्थ रंदेरिया मुख्य भूमिका निभा रहे हैं, जबकि आरती पटेल भी अहम किरदार में नजर आएंगी। यह फिल्म 19 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी।

    कहानी की बात करें तो यह एक भावनात्मक ड्रामा है, जो पिता और पुत्र के रिश्ते पर आधारित है। फिल्म इस सच्चाई को उजागर करती है कि बच्चे अक्सर अपने पिता के अतीत और उनके जीवन के संघर्षों को पूरी तरह समझ नहीं पाते। इसे फादर्स डे वीकेंड से पहले रिलीज किया जाएगा, जिससे इसकी भावनात्मक अपील और बढ़ जाती है।

    यह फिल्म जयमिन के निर्देशन में पहली फिल्म होगी। वहीं स्क्रीनप्ले दीप ढोलकिया ने लिखा है, जो इस फिल्म के साथ-साथ अभिनय के क्षेत्र में भी डेब्यू कर रहे हैं। उनके साथ जाह्नवी ढकन भी स्क्रीन पर नजर आएंगी।

    धर्मा प्रोडक्शंस के सीईओ अपूर्व मेहता ने कहा कि अच्छी कहानियों की कोई भाषा सीमा नहीं होती और गुजराती फिल्म इंडस्ट्री में इस समय रचनात्मकता और दर्शकों का मजबूत समर्थन देखने को मिल रहा है। इसी वजह से कंपनी इस क्षेत्रीय सिनेमा का हिस्सा बनने को लेकर उत्साहित है।

  • इंदौर में शादी विवाद से हड़कंप: जांच में जुटी पुलिस, कई लोग नामजद

    इंदौर में शादी विवाद से हड़कंप: जांच में जुटी पुलिस, कई लोग नामजद

    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर से रिश्तों को तार-तार करने और सामाजिक खोखलेपन को उजागर करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां के रंगवासा क्षेत्र में एक 13 साल की नाबालिग बच्ची का विवाह जबरन 42 साल के अधेड़ व्यक्ति से करा दिया गया। इस अमानवीय कृत्य के पीछे पारिवारिक रिश्तों की एक घिनौनी शर्त और सौदेबाजी थी। दरअसल, बच्ची के भाई की शादी जिस लड़की से होनी थी, उसने शर्त रखी थी कि वह इस घर में बहू बनकर तभी आएगी जब उसकी नाबालिग ननद की शादी उसके 42 वर्षीय सगे चाचा से कराई जाएगी। पोते के सिर पर सेहरा सजाने की चाहत में बुजुर्ग दादा-दादी ने इस घिनौनी शर्त को स्वीकार कर लिया और अपनी ही मासूम पोती की जिंदगी को नरक में झोंक दिया। जब बच्ची ने इस बेमेल विवाह का विरोध किया, तो अपनों ने ही उस पर अत्याचार किए और उसकी बेरहमी से पिटाई की गई।

    महिला व बाल विकास विभाग को इस बाल विवाह की भनक 25 अप्रैल को ही लग गई थी, जिसके बाद टीम ने दोनों पक्षों को समझाकर शादी रुकवा दी थी और परिजनों ने लिखित आश्वासन भी दिया था। लेकिन लालची और रूढ़िवादी परिवार ने हार नहीं मानी। प्रशासन की नजरों से छिपकर 26 अप्रैल की रात को आरोपी पक्ष नाबालिग लड़की और उसके 19 साल के भाई को इंदौर से उज्जैन ले गए। वहां चिंतामन गणेश मंदिर के बाहर दोनों को जबरन दूल्हा-दुल्हन के कपड़े पहनाए गए और रात के अंधेरे में मांग भरकर रस्में पूरी कर दी गईं। शादी के बाद दोनों दूल्हे बिना दुल्हन के अपने गांव लौट गए और बच्चों को वापस रंगवासा छोड़ दिया गया।

    इस घिनौने अपराध का पर्दाफाश तब हुआ जब ससुराल जाने से इनकार करने पर निर्दयी दादी ने मासूम बच्ची की बेरहमी से पिटाई कर दी। लोक-लाज और डर के साए में जी रही बच्ची की मां ने हिम्मत जुटाई और महिला व बाल विकास विभाग और बाल कल्याण समिति को मामले की लिखित शिकायत सौंप दी। इसके बाद फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी महेंद्र पाठक ने तत्परता दिखाते हुए सारे सबूत जुटाए और राऊ थाना पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मंगलवार को दूल्हे, उसके परिजनों और बच्ची के दादा-दादी सहित कुल 13 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि बच्चों के पिता की मौत के बाद वे अपने दादा-दादी के पास ही रह रहे थे, जिन्होंने इस गैर-कानूनी शादी को अंजाम देने के लिए बच्चों की फर्जी अंकसूची (मार्कशीट) तक तैयार करवा ली थी। फिलहाल शिक्षा विभाग इस कूट रचित दस्तावेजों की जांच कर रहा है, जिसके बाद आरोपियों पर धोखाधड़ी और जालसाजी का अतिरिक्त मुकदमा दर्ज होना तय है। प्रशासन ने साफ किया है कि मासूमों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

  • घर और दफ्तर में बांस का पौधा लगाने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, सही डंठल दिला सकते हैं सुख, समृद्धि और तरक्की

    घर और दफ्तर में बांस का पौधा लगाने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, सही डंठल दिला सकते हैं सुख, समृद्धि और तरक्की

    नई दिल्ली ।  वास्तु शास्त्र के अनुसार फेंगशुई में भी पेड़-पौधों को विशेष महत्व दिया गया है. फेंगशुई के मुताबिक, कुछ पौधे नकारात्मक ऊर्जा को सोखकर पॉजिटिव एनर्जी का संचार करते हैं. फेंगशुई में बांस के पौधे को बेहद प्रभावशाली माना गया है. कहा जाता है कि अगर इस पौधे को घर या दफ्तर में सही दिशा और स्थान पर लगाया जाए, तो वहां मौजूद तमाम नकारात्मक ऊर्जा अपने आप नष्ट हो जाती है. इसके परिणामस्वरूप जीवन में तरक्की अपने आप होने लगती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर या दफ्तर में कितने डंठल वाला बांस का पौधा लगाना शुभ होता है? आइए, इसे फेंगशुई के अनुसार जानते हैं.

    एक डंठल वाला बांस का पौधा

    फेंगशुई के मुताबिक, घर में एक डंठल वाला बांस का पौधा भी लगाना शुभ है. एक डंठल वाला बांस का पौधा घर-परिवार की एकता और विकास के लिए खास होता है. ऐसा बांस का पौधा कार्यों में एकाग्रता और आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायक होता है. ऐसे बांस के पौधे को दफ्तर में लगाने से करियर में तरक्की के रास्ते खुलते हैं.
    दो डंठल वाला बांस का पौधा
    फेंगशुई के अनुसार, दो डंठल वाला बांस का पौधा प्रेम, दांपत्य सुख और साझेदारी का प्रतीक है. इसे बेडरूम में लगाने से शादीशुदा जिंदगी में खुशहाल रहती है. साथ ही पार्टनर के प्रति प्यार और लगाव बढ़ता है.

    तीन डंठल वाला बांस का पौधा

    तीन डंठल वाला बांस का पौधा लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाली का प्रतीक है. इसे घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा अपने आप दूर हो जाती है और घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.
    5 डंठल वाला बांस का पौधा
    फेंगशुई की मानें तो 5 डंठल वाला बांस का पौधा धन, शक्ति और सफलता का प्रतीक होता है. मान्यतानुसार, इसे घर की उत्तर दिशा में रखने से धन की स्थिति अच्छी होती है. इसके अलावा इसे दफ्तर में लगाने से तरक्की के रास्ते खुलते हैं.

    8 और 10 डंठल वाला बांस का पौधा

    आठ डंठल वाले बांस के पौधे को धन और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. वहीं 10 डंठल वाला बैम्बू प्लांट सफलता का प्रतीक होता है. इसलिए इसे घर का दफ्तर में लगाने से तरक्की और खुशहाली में चार चांद लग जाते हैं.
    किस दिशा में लगाएं बांस का पौधा?
    फेंगशुई के मुताबिक, डंठल वाले बांस के पौधे को ड्राइंग या बेडरूम में लगाया जा सकता है. इसे पूरब दिशा की ओर लगाना अत्यंत शुभ माना गया है. घर की इस दिशा में बांस का पौधा लगाने से परिवार में आपसी सामंजस्य और प्यार बना रहता है. दांपत्य जीवन में खुशहाली के लिए इस पौधे को कांच के जार में लगा उस पर लाल रंग का रिबन जरूर बांधना चाहिए. ऐसा करने से शादीशुदा जिंदगी खुशहाल रहती है. जबकि, इसे दफ्तर के पूर्व या दक्षिण दिशा में लगाना चाहिए. ऐसा करने से आर्थिक उन्नति होती है.
  • जब काम न मिलने पर फूट-फूटकर रो पड़े थे कुमार सानू, तब इस सिंगर ने की मदद…

    जब काम न मिलने पर फूट-फूटकर रो पड़े थे कुमार सानू, तब इस सिंगर ने की मदद…




    नई दिल्ली। 90 के दशक के मशहूर प्लेबैक सिंगर कुमार सानू ने अपनी सुरीली आवाज से हिंदी सिनेमा पर लंबे समय तक राज किया। लेकिन सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद उनके करियर में एक ऐसा भी दौर आया, जब उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में काम मिलना लगभग बंद हो गया था।

    रिपोर्ट्स और रियलिटी शो में साझा किए गए किस्सों के मुताबिक, इस मुश्किल समय में जब उन्हें लगातार काम नहीं मिल रहा था, तब वह बेहद भावुक हो गए थे। बताया जाता है कि संगीतकार अनु मलिक के सामने एक मुलाकात के दौरान कुमार सानू फूट-फूटकर रो पड़े थे और उन्होंने अपना दर्द साझा किया था।

    अनु मलिक ने एक टीवी शो में बताया था कि उस दौर में वह भी लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री से दूर थे और काम की कमी झेल रहे थे। इसी बीच फिल्म निर्माता आदित्य चोपड़ा का संदेश उन्हें मिला, जिसके बाद एक नए प्रोजेक्ट की तैयारी शुरू हुई।

    इसी दौरान अनु मलिक ने सुझाव दिया कि इस फिल्म के एक गाने के लिए कुमार सानू की आवाज ली जाए, क्योंकि कहानी का एक किरदार उनका बड़ा फैन दिखाया गया था। इसके बाद अनु मलिक ने कुमार सानू को अपने घर बुलाया और उन्हें एक नया गाना ऑफर किया।

    यह सुनते ही कुमार सानू भावुक हो गए और बताया जाता है कि उन्होंने अनु मलिक के कंधे पर सिर रखकर रोते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। इसके बाद उन्होंने फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ (2015) के लिए गाना ‘तुम से मिले दिल में उठा दर्द करारा’ गाया, जिसे काफी सराहा गया और इसे उनके कमबैक के रूप में देखा गया।

    कुमार सानू 90 के दशक में हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े गायकों में से एक रहे हैं। ‘आशिकी’, ‘साजन’, ‘दीवाना’ और ‘बाज़ीगर’ जैसी फिल्मों के गानों ने उन्हें अपार लोकप्रियता दिलाई थी। उन्होंने अपने करियर के पीक दौर में लगातार पांच साल तक फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीते और एक दिन में 28 गाने रिकॉर्ड करने का रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज है।

    हालांकि बदलते समय और नए सिंगर्स के आने के बाद उनकी फिल्मों में सक्रियता कम हो गई, लेकिन आज भी उनकी आवाज़ को हिंदी संगीत का सुनहरा दौर माना जाता है।

  • भोपाल में आवारा कुत्तों का आतंक: स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

    भोपाल में आवारा कुत्तों का आतंक: स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल


    भोपाल । भोपाल शहर में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक शहर में हर दिन औसतन 81 लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं, जिससे आम लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम द्वारा पिछले पांच वर्षों में डॉग्स की नसबंदी और वैक्सीनेशन पर लगभग 8.56 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद हालात में कोई सुधार नहीं दिख रहा, बल्कि घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

    शहर में करीब 1.20 लाख आवारा कुत्तों की मौजूदगी बताई जा रही है, लेकिन इसके मुकाबले नगर निगम के पास एक भी स्थायी डॉग शेल्टर नहीं है। मौजूदा समय में केवल तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता मात्र 600 कुत्तों की है। इन केंद्रों में रोजाना केवल 20 से 25 कुत्तों की ही नसबंदी और टीकाकरण किया जा रहा है, जो समस्या के मुकाबले बेहद कम है।

    नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार शहर से हर दिन लगभग 15 शिकायतें डॉग बाइट से जुड़ी आ रही हैं। कई गंभीर मामलों में घायल बच्चे और बुजुर्ग जेपी और हमीदिया अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

    शहर के कई इलाके ऐसे हैं जहां आवारा कुत्तों के झुंड सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं। अशोका गार्डन, पिपलानी, कोहेफिजा, शाहजहांनाबाद, करोंद, मीनाल रेसीडेंसी, छोला, बैरागढ़, लालघाटी, रेलवे स्टेशन और न्यू मार्केट जैसे क्षेत्रों में रात के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है। फुटपाथों पर कुत्तों के झुंडों के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन भोपाल में इन आदेशों का पालन अभी भी चुनौती बना हुआ है। स्थायी शेल्टर और प्रभावी प्रबंधन की कमी के कारण समस्या और गंभीर होती जा रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में कुत्तों का व्यवहार अधिक आक्रामक हो जाता है, जिससे डॉग बाइट की घटनाएं बढ़ जाती हैं। शरीर में पसीना निकालने की प्राकृतिक व्यवस्था न होने के कारण कुत्तों में चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ जाता है, जिससे वे आक्रामक हो जाते हैं। यही कारण है कि अप्रैल से जून के बीच हमलों में तेजी देखी जाती है।

    राज्य और देश के आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्यप्रदेश डॉग बाइट मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है। केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे शहरों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में लाखों की संख्या में आवारा कुत्ते मौजूद हैं और हर साल डॉग बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

    इंदौर में भी हालात चिंताजनक हैं, जहां एक महीने में हजारों डॉग बाइट के मामले सामने आ चुके हैं। वहीं पूरे राज्य में रेबीज संक्रमण से मौतों के मामले भी दर्ज किए गए हैं, जिससे यह समस्या और अधिक खतरनाक बन जाती है।

    कुल मिलाकर भोपाल में डॉग बाइट की बढ़ती घटनाएं प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कमी और शहरी पशु प्रबंधन की कमजोर प्रणाली को उजागर करती हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार न होना अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • गर्मी में डायबिटीज मरीज रहें सतर्क: आम, चीकू और शरीफा जैसे मीठे फल बढ़ा सकते हैं ब्लड शुगर का खतरा

    गर्मी में डायबिटीज मरीज रहें सतर्क: आम, चीकू और शरीफा जैसे मीठे फल बढ़ा सकते हैं ब्लड शुगर का खतरा


    नई दिल्ली ।
    ऐसे फल जिनका GI 55 से कम है, वो डायबिटिक पेशेंट्स खा सकते हैं, लेकिन जो 70 से ऊपर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स रखते हैं, उन्हें खाना रिस्की साबित हो सकता है। आमतौर पर माना जाता है कि डायबिटीज के मरीजों को फलों से बिल्कुल दूर रहना चाहिए, लेकिन सच तो ये है कि सेब, संतरा, बेरीज जैसे फल समर सीजन में खाना काफी सुरक्षित विकल्प है। हालांकि, मीठे रस से भरा और सबका फेवरेट फलों का राजा आम, पावर फ्रूट माने जाने वाला केला, और मीठा चीकू, डायबिटिक लोगों को अपनी लिस्ट से बाहर ही रखना चाहिए।
    फल और उनके ग्लाइसेमिक इंडेक्स का गणित
    फलों में सेहत का राज छिपा होता है और संतुलित आहार के लिए इनका रोजाना सेवन जरूरी माना जाता है। लेकिन फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट, माइक्रोन्यूट्रिएंट होने के साथ ही इनमें ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, और सुक्रोस भी होता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए सुरक्षित नहीं है। इससे उनका ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। लेकिन सेब, अमरूद जैसे पांच फल हैं जिनका सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों को शुगर बढ़ने का खतरा नहीं होता है। बस उन्हें इस बात का ख्याल रखना होगा कि वे यह सेवन अपने संतुलित मात्रा में करें।

    फलों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स चेक करना है जरूरी
    ग्लाइसेमिक इंडेक्स की श्रेणियां
    दरअसल फलों को ग्लाइसेमिक इंडेक्स की 3 श्रेणियों में बांटा गया है। 55 से कम वाले लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स और 59-69 वाले मॉर्डरेट ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल डायबिटीज के मरीज अपनी तबियत के आधार पर खा सकते हैं। वहीं 70 या उससे ज्यादा वाले हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फलों से इस तरह के मरीजों को बचने की जरूरत है। आसानी से समझें तो जिन फलों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है उनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। फाइबर पाचन प्रक्रिया को धीमा करता है, जिससे ग्लूकोज धीमें एब्जॉर्ब होता है और ब्लड शुगर स्पाइक नहीं होती।

    • हाई ग्लाईसेमिक इंडेक्स वाले फल, जिन्हें न खाएं डायबिटीज के मरीज – आम, केला, चीकू, अंगूर, शरीफा
    • लो और मॉर्डरेट ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल जो सीमित मात्रा व सही तरीके से खाने पर डायबिटीज के मरीजों के लिए हैं सेफ – सेब, नाशपाती, संतरा, अमरूद और बेरीज।

    डायबिटीज मरीज यूं खाएं फल
    फल खाने का सही तरीका
    कौन से फल खाने हैं यह जानने के साथ ही यह भी पता होना जरूरी है कि फल किस तरह खाए जाएं। आम तौर पर लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल डायबिटीज मरीज खा सकते हैं लेकिन यह मायने रखता है कि वे इनका सेवन कितनी बार और किस रूप में कर रहे हैं।

    जूस, स्मूदी, मिल्कशेक में फलों की शुगर कंसंट्रेट तरीके से शरीर में पहुंचती है और डायबिटीज बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इससे बेहतर है कि इन्हें सीधे तौर पर खाया जाए ताकि इनका फाइबर भी भरपूर मात्रा में मिल सके। इसके अलावा ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली हेवी मील के साथ इन्हें खाने से भी नुकसान संभव है। बेहतर है कि इन्हें स्नैक्स की तरह मील से हटकर खाया जाए। इसके साथ ही डायबिटीज के मरीज इन बातों का भी ध्यान रख सकते हैं :

    • फलों को खाने के साथ नहीं स्नैक्स के रूप में, मिड मील के तौर पर या वर्कआउट करने से पहले खाना बेहतर है।
    • आम तौर पर दिन में 1-2 सर्विंग ही लेनी चाहिए जिसमें 1 सर्विंग 100 ग्राम के बराबर हो।
    • इन्हें प्रोटीन से भरपूर खाद्यों के साथ लेने से ज्यादा फायदा मिलता है। इसके लिए भुने चने, नट्स, हाई प्रोटीन ग्रीक योगर्ट लिए जा सकते हैं।

    तो ड्रायफ्रूट्स का क्या?

    डायबिटीज के मरीजों के लिए ड्रायडफ्रूट्स कितने सही?सच तो ये है कि सुपर हेल्दी माने जाने वाले ड्रायफ्रूट्स से ज्यादा फ्रेश फ्रूट्स डायबिटीज वालों के लिए सेफ हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ताजे फल जब सूख जाते हैं तब वे ड्रायफ्रूट बन जाते हैं, जिससे उनमें मौजूद शुगर और भी कंसंट्रेट हो जाती है। खजूर और अंजीर इसका क्लासिक उदाहरण हैं, जिन्हें सुपरफ्रूड की तरह माना जाता है।

    ड्रायफ्रूट कम मात्रा में खाने पर भी ज्यादा कैलोरी मिलती है, लेकिन साथ ही ब्लड शुगर भी तेजी से बढ़ती है, जो डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति के लिए बिल्कुल सही नहीं। इनके मुकाबले ताजा फलों का सेवन डायबिटीज के मरीजों के लिए ज्यादा बेहतर होता है क्योंकि इस तरह उन्हें एक बार की सर्विंग में बेहतर हायड्रेशन मिलता है, पेट भरता है और ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम रहता है।

    ध्यान देने वाली बात ये भी है कि ड्रायफ्रूट के सेवन से वो विटामिन नहीं मिल पाते जो फल के सूखने की प्रक्रिया में नष्ट हो चुके हों। यही वजह है कि इनसे भरपूर पोषण की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसलिए भी फ्रेश फ्रूट्स बेहतर विकल्प बनकर सामने आते हैं।

    अगर खाने हैं ये फल

    मौसमी फल ताजगी, स्वाद और पोषण से भरपूर होते हैं। अगर आपको गर्मियों के वे फल पसंद हैं जो हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले होते हैं, तो आपको मन मारने की जरूरत नहीं है। बस कुछ बातों का ध्यान रखते हुए डायबिटीज के मरीज आम, तरबूज जैसे फल का सकते हैं:

    • कम मात्रा में स्नैक्स के रूप में इनका सेवन करें, भोजन के आगे पीछे इन्हें खाने से बचें।
    • बेहतर शुगर कंट्रोल के लिए इन्हें हाई प्रोटीन वाले खाद्यों के साथ लें।
    • एक साथ कई हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल न खाएं।

    हालांकि, सबसे सेफ यही होगा कि डाइट में इन्हें शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें और उनके निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें। साथ ही अगर इन फलों को खाने पर असहजता या किसी अन्य तरह की परेशानी हो, या शुगर एकदम से बहुत स्पाइक हो जाए, तो तुरंत एक्सपर्ट से कनेक्ट करें।