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  • बैंकों में लंबा ब्रेक: दिसंबर में 18 दिन बंद रहेंगे कामकाज, RBI की छुट्टियों की लिस्ट देखें

    बैंकों में लंबा ब्रेक: दिसंबर में 18 दिन बंद रहेंगे कामकाज, RBI की छुट्टियों की लिस्ट देखें


    नई दिल्ली
    । साल का आखिरी महीना दिसंबर शुरू होने वाला है और अगर आपको बैंक से जुड़े कोई महत्वपूर्ण काम निपटाने हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने दिसंबर 2025 के लिए बैंकिंग छुट्टियों की लिस्ट जारी की है। इस महीने कुल 18 दिन बैंक बंद रहेंगे, जो राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अवकाशों, त्योहारों और वीकेंड्स के कारण होंगे।

    चूंकि ये छुट्टियां राज्यों और शहरों के हिसाब से अलग-अलग हैं, इसलिए किसी भी परेशानी से बचने के लिए ग्राहकों को अपने क्षेत्र की छुट्टियों की पूरी सूची पहले से चेक कर लेनी चाहिए। इससे ब्रांच विजिट, चेक क्लियरिंग, लोन प्रोसेसिंग या अन्य जरूरी बैंकिंग काम में रुकावट नहीं आएगी।

    दिसंबर की शुरुआत में क्षेत्रीय अवकाश

    दिसंबर के पहले हफ्ते में कुछ राज्य और शहरों में विशेष छुट्टियां पड़ रही हैं। इनमें शामिल हैं:1 दिसंबर: इंडिजिनस फेथ डे, अरुणाचल प्रदेश में बैंक बंद  3 दिसंबर: सेंट फ्रांसिस जेवियर डे, गोवा में अवकाश 12 दिसंबर: पा तोगन नेंगमिंजा संगमा दिवस मेघालय में बैंक बंद इस दौरान अगर आपको बैंक जाना है तो अपनी योजना अनुसार अवकाश की जानकारी लेना जरूरी है।मध्य दिसंबर के महत्वपूर्ण अवकाश महीने के मध्य में भी कुछ महत्वपूर्ण त्योहार और क्षेत्रीय अवकाश हैं:

    18 दिसंबर: गुरु घासीदास जयंती / यू सोसो थम पुण्यतिथि छत्तीसगढ़, मेघालय
    19 दिसंबर: मुक्ति दिवस Liberation Day गोवा इन दिनों बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी, इसलिए चेक क्लियरिंग या ब्रांच विजिट की योजना पहले से बनाना लाभदायक रहेगा। क्रिसमस और साल के अंत का लंबा ब्रेक 24-31 दिसंबर साल के अंत में कई राज्यों में बैंकिंग कामकाज पर बड़ा असर पड़ेगा।

    इस अवधि में प्रमुख छुट्टियां इस प्रकार हैं:
    24 दिसंबर: क्रिसमस ईव मेघालय, मिजोरम

    25 दिसंबर: क्रिसमस डे राष्ट्रीय अवकाश, अधिकांश राज्यों में

    26 दिसंबर: क्रिसमस शहीद उधम सिंह जयंती मेघालय, मिजोरम, तेलंगाना, हरियाणा

    27 दिसंबर: गुरु गोबिंद सिंह जयंती हरियाणा पंजाब, हिमाचल प्रदेश

    30 दिसंबर: यू कियांग नांगबाह दिवस / तामु लोसर मेघालय, सिक्किम

    31 दिसंबर: नए साल की पूर्व संध्या मिजोरम, मणिपुर इस लंबी छुट्टियों की श्रृंखला के दौरान बैंक शाखाओं में कोई भी सेवा उपलब्ध नहीं होगी।

    नेट बैंकिंग और डिजिटल सेवाएं जारी रहेंगी

    हालांकि, छुट्टियों के बावजूद नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई (UPI) सेवाएं नियमित रूप से चालू रहेंगी। इसलिए ग्राहक इन डिजिटल विकल्पों के जरिए अपने दैनिक लेन-देन कर सकते हैं।
     ग्राहकों को सुझाव दिया जाता है कि वे चेक क्लियरिंग, लोन प्रोसेसिंग और ब्रांच विजिट जैसे महत्वपूर्ण कामों की योजना दिसंबर की छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए बनाएं। छुट्टियों के अनुसार पहले से तैयारी करने से किसी भी तरह की असुविधा या देरी से बचा जा सकता है।

  • नारायण मूर्ति का 996 वर्क कल्चर पर जोर, बोले- हफ्ते में 72 घंटे काम की आदत डालें युवा

    नारायण मूर्ति का 996 वर्क कल्चर पर जोर, बोले- हफ्ते में 72 घंटे काम की आदत डालें युवा

    नई दिल्ली। इन्फोसिस के को-फाउंडर (Infosys co-founder) नारायण मूर्ति (Narayana Murthy) ने हाल ही में युवाओं से कहा कि अगर भारत (India) को तेजी से विकास करना है, तो युवाओं को हफ्ते में 72 घंटे काम करने (Working 72 Hours Week.) की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने चीन के मशहूर “996 वर्क कल्चर” का उदाहरण देते हुए कहा, “सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, हफ्ते में 6 दिन यानी 72 घंटे।”

    उनका तर्क था कि चीन जैसे देशों ने ऐसी मेहनती संस्कृति से तेज विकास हासिल किया। मूर्ति ने बताया कि उनकी कंपनी कैटामरन के कुछ अधिकारी चीन गए थे ताकि वे वहां की असली कामकाजी संस्कृति को समझ सकें। वहां एक कहावत है, “9, 9, 6” यानी “सुबह 9 से रात 9 तक, हफ्ते में 6 दिन।”

    ‘996’ वर्क कल्चर का मतलब है कि सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, हफ्ते में 6 दिन काम करना। यानी कुल 72 घंटे काम करना, जो सामान्य कामकाजी घंटों से कहीं ज्यादा है। यह प्रथा खासकर चीन की टेक कंपनियों में ज्यादा प्रचलित थी।


    चीन में कैसे शुरू हुआ 996 कल्चर

    2010 के दशक में चीन की टेक इंडस्ट्री बहुत तेजी से बढ़ रही थी। मार्केट में आगे बढ़ने की होड़, कंपनियों की स्पीड और ज्यादा मेहनत की मांग ने ‘996’ को आम बना दिया। उस समय के कुछ मशहूर उद्यमी जैसे जैक मा ने इस कल्चर को एक प्रकार की ‘आशीर्वाद’ के रूप में प्रचारित किया।


    996 कल्चर का बुरा असर

    समय के साथ इन लंबे घंटों का बुरा असर दिखने लगा। कर्मचारियों में थकान, मानसिक तनाव, और काम-जीवन संतुलन बिगड़ने जैसी दिक्कतें आम हो गईं। कई कंपनियों में ज्यादा मेहनत के कारण बीमारियां और यहां तक कि मौत तक के मामले सामने आए। कर्मचारियों ने डिजिटल प्लेटफार्म पर 996 का विरोध किया और 2021 में चीन की सरकार ने इसे अवैध घोषित कर दिया।


    996 की कानूनी रोक के बाद क्या बदला?

    चीन की अदालतों ने साफ किया कि 996 नियम कानून के हिसाब से गलत है। फिर भी ये कल्चर पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। कई कंपनियों ने नए नाम से ओवरटाइम जारी रखा या नियमों में बदलाव किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में औसतन 48.5 घंटे प्रति सप्ताह काम अब भी होता है, जो कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से ज्यादा है।


    दुनिया के दूसरे देशों में काम के घंटे

    यूरोप जैसे देशों में जहां औसतन बहुत कम घंटे काम होता है (जैसे नीदरलैंड्स में 32.1 घंटे/सप्ताह), वहीं भारत और चीन जैसे देशों में हफ्ते के 50 घंटे से ज्यादा आम बात है। शोध बताते हैं कि ज्यादा घंटे काम करने से उत्पादकता बढ़ती नहीं, बल्कि 50 घंटे के बाद और गिरने लगती है।

    भारत के लिए उत्पादकता या लंबे घंटे?
    भारत में भी लंबे कामकाजी घंटे आम हैं, पर उत्पादकता अभी भी कम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, असली जरूरत काम के घंटों को बढ़ाने की नहीं, बल्कि स्मार्ट तरीके, टेक्नोलॉजी, कौशल और बेहतर प्रबंधन से उत्पादकता बढ़ाने की है।


    स्मार्ट वर्क, न कि हार्ड वर्क

    चीन के अनुभव से यही सीख मिलती है कि विकास के लिए जरूरी है कि काम की गुणवत्ता और श्रमिकों की सेहत पर ध्यान दिया जाए, न कि केवल घंटों की संख्या बढ़ाई जाए। कंपनियों और नीतिगत स्तर पर संतुलित और व्यावहारिक बदलाव ही टिकाऊ विकास ला सकते हैं​।