Category: Economy

  • अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन ने बनाया नया रिकॉर्ड, 23 प्रतिशत की छलांग के साथ सरकारी खजाने में आए 2.31 लाख करोड़

    अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन ने बनाया नया रिकॉर्ड, 23 प्रतिशत की छलांग के साथ सरकारी खजाने में आए 2.31 लाख करोड़

    नई दिल्ली ।देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह के मोर्चे पर अक्टूबर 2026 में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान सकल जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 22.9 प्रतिशत उछलकर 2.31 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। पिछले साल अक्टूबर 2025 में यह आंकड़ा 1.88 लाख करोड़ रुपये था। ताजा आंकड़े देश में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और आयात से मिलने वाले कर राजस्व में बढ़ोतरी को दर्शाते हैं।

    रिफंड की राशि घटाने के बाद अक्टूबर में शुद्ध जीएसटी राजस्व 25.6 प्रतिशत बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी महीने में यह 1.61 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। सकल और शुद्ध दोनों तरह के राजस्व में हुई वृद्धि से कर संग्रह में मजबूती का संकेत मिला है।

    अक्टूबर के दौरान घरेलू जीएसटी संग्रह में 15.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 1.59 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके मुकाबले आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व में कहीं अधिक तेजी देखने को मिली। आयात पर मिलने वाला कर 42.2 प्रतिशत बढ़कर 72,246 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल अक्टूबर में इस मद से 50,796 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।

    घरेलू जीएसटी संग्रह में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) का योगदान 42,935 करोड़ रुपये रहा। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) के रूप में 51,340 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) का घरेलू संग्रह 64,769 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। आयात से प्राप्त आईजीएसटी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जिसने कुल कर संग्रह को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले सात महीनों यानी अप्रैल से अक्टूबर के दौरान भी जीएसटी संग्रह में सकारात्मक रुझान बना रहा। इस अवधि में सकल जीएसटी कलेक्शन 13.2 प्रतिशत बढ़कर 14.77 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 13.05 लाख करोड़ रुपये था। वहीं, शुद्ध जीएसटी राजस्व 12.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12.69 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 11.27 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।

    अक्टूबर में जीएसटी रिफंड की राशि में भी बढ़ोतरी हुई। कुल रिफंड 6.5 प्रतिशत बढ़कर 27,934 करोड़ रुपये रहा, जबकि अक्टूबर 2025 में यह 26,225 करोड़ रुपये था। घरेलू कारोबार से संबंधित रिफंड 9.8 प्रतिशत बढ़कर 14,007 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, आईसीईजीएटीई के माध्यम से संसाधित निर्यात रिफंड 3.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 13,927 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    रिफंड को समायोजित करने के बाद घरेलू शुद्ध जीएसटी संग्रह 16.4 प्रतिशत बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। दूसरी ओर, कस्टम्स से जुड़े शुद्ध जीएसटी राजस्व में 56.2 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई और यह 58,319 करोड़ रुपये रहा। इससे आयात पर मिलने वाले कर राजस्व की मजबूत स्थिति सामने आई।

    अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच कुल जीएसटी रिफंड 16.9 प्रतिशत बढ़कर 2.08 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें घरेलू रिफंड 19.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.18 लाख करोड़ रुपये और आयात से जुड़े रिफंड 13.4 प्रतिशत बढ़कर 89,733 करोड़ रुपये रहे। इस तरह चालू वित्त वर्ष के शुरुआती सात महीनों में जीएसटी संग्रह और रिफंड दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट, निवेशकों में हलचल, अब बाजार की अगली चाल पर टिकी नजरें

    सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट, निवेशकों में हलचल, अब बाजार की अगली चाल पर टिकी नजरें

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है। लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर बढ़ रही दोनों कीमती धातुओं के भाव में अचानक बड़ी टूट दर्ज की गई है। इस गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 10,577 रुपये प्रति किलोग्राम गिरकर 1,78,900 रुपये पर बंद हुई। वहीं, सोने की कीमत में 4,347 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी आई और यह 1,38,419 रुपये पर पहुंच गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 4 प्रतिशत गिरकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस रह गई, जबकि स्पॉट सिल्वर में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई और इसका भाव 49.12 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वैश्विक बाजारों में आई इस कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।

    इस गिरावट की प्रमुख वजह कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा स्रोतों की कीमतों में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। महंगी ऊर्जा के कारण दुनिया भर में महंगाई दोबारा बढ़ने की आशंका पैदा हुई है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों को लेकर बाजार की चिंताएं बढ़ गई हैं।

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए हैं कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखा जा सकता है। दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना भी बाजार की चिंता का हिस्सा बनी हुई है। इससे निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है।

    ब्याज दरें ऊंची रहने पर सोने और चांदी जैसी संपत्तियों का आकर्षण प्रभावित होता है। इन धातुओं से नियमित ब्याज या निश्चित आय नहीं मिलती। इसके विपरीत, फिक्स्ड इनकम और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प बेहतर रिटर्न की संभावना पेश करते हैं। ऐसे माहौल में निवेशक कीमती धातुओं से पैसा निकालकर दूसरे साधनों में निवेश करना पसंद कर सकते हैं। इसी बदलाव ने सोने-चांदी पर बिकवाली का दबाव बढ़ाया है।

    वैश्विक शेयर बाजारों में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट ने भी स्थिति को प्रभावित किया है। बाजार में नुकसान झेल रहे बड़े निवेशकों और संस्थागत कारोबारियों ने नकदी जुटाने तथा घाटे की भरपाई के लिए सोने-चांदी जैसी आसानी से बेची जा सकने वाली संपत्तियों में बिकवाली की। बाजार में इस प्रक्रिया को लिक्विडेशन कहा जाता है।

    चीन से जुड़ी गतिविधियों ने भी दबाव बढ़ाया है। दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल चीन में निवेशकों द्वारा नकदी जुटाने के लिए सोने की बिक्री किए जाने की खबरों ने बाजार की धारणा प्रभावित की। चांदी में गिरावट सोने से अधिक रही, क्योंकि इसका इस्तेमाल निवेश के साथ सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों में भी होता है। औद्योगिक मांग में सुस्ती और शेयर बाजार की अस्थिरता ने इसकी कीमतों को ज्यादा प्रभावित किया।

    कीमतों में आई गिरावट का अंदाजा पुराने रिकॉर्ड से लगाया जा सकता है। जनवरी 2026 में चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी। मौजूदा भाव के आधार पर यह अपने शिखर से 50 प्रतिशत से अधिक नीचे आ चुकी है। वर्ष 2025 में चांदी ने करीब 170 प्रतिशत का रिटर्न दिया था। इसी तरह जनवरी 2026 में सोने का भाव 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। अब यह अपने उच्चतम स्तर से 42,321 रुपये नीचे आ चुका है। इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत घटकर 1,40,054 रुपये रह गई है।

    हालांकि, घरेलू बाजार में आने वाले दिनों में मांग बढ़ने से कीमतों को सहारा मिलने की उम्मीद है। नवंबर में धनतेरस, दिवाली और शादी-विवाह के सीजन के कारण आभूषणों तथा भौतिक सोने की खरीदारी बढ़ सकती है। 6 नवंबर को धनतेरस होने के कारण बाजार को त्योहारी खरीदारी से विशेष उम्मीद है।

    इसके अलावा, दुनिया के केंद्रीय बैंक लगातार अपने भंडार में सोना शामिल कर रहे हैं। उनकी खरीदारी से सोने की दीर्घकालिक मांग को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, निकट भविष्य में कीमतों की दिशा अमेरिकी ब्याज दरों, महंगाई, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक शेयर बाजारों की स्थिति पर निर्भर करेगी। त्योहारी मांग और औद्योगिक खपत से सुधार की संभावना जरूर है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं।

  • 1 नवंबर से लागू हुए 18 बड़े बदलाव, LPG से लेकर पेंशन और दूध-दही तक जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

    1 नवंबर से लागू हुए 18 बड़े बदलाव, LPG से लेकर पेंशन और दूध-दही तक जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

    नई दिल्ली ।नवंबर महीने की शुरुआत आम लोगों के लिए कई नए बदलाव लेकर आई है। 1 नवंबर 2026 से देश के अलग-अलग राज्यों में रोजमर्रा की जरूरतों, परिवहन, बैंकिंग, बिजली, टैक्स और सरकारी सेवाओं से जुड़े 18 महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गए हैं। इनका असर घरेलू बजट से लेकर कारोबारियों के खर्च और सरकारी पेंशन प्राप्त करने वालों की प्रक्रियाओं तक दिखाई दे सकता है। कहीं दूध-दही और CNG महंगी हुई है, तो कहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़े हैं। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड, बिजली कनेक्शन और यातायात से जुड़े नियम भी बदले हैं।

    दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए 1 नवंबर से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP लागू किया गया है। इसके तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-VI से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। कुछ श्रेणियों के ट्रकों और बसों पर भी पाबंदियां लागू हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना और वाहन जब्त होने की कार्रवाई हो सकती है। कुछ क्षेत्रों में पार्किंग शुल्क बढ़ाने के साथ डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

    उत्तर प्रदेश के कई शहरों में CNG की कीमत बढ़ाई गई है। लखनऊ, आगरा, सुल्तानपुर और अयोध्या में एक रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है, जबकि उन्नाव में CNG 2.25 रुपये प्रति किलो महंगी हुई है। इससे गैस से चलने वाले वाहनों का परिचालन खर्च बढ़ेगा। वहीं, कर्नाटक में दूध की कीमत आठ रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई है। इसमें सात रुपये किसानों और एक रुपया दूध यूनियनों को मिलेगा। राज्य में दही भी 14 रुपये प्रति किलो महंगा हो गया है।

    तमिलनाडु में शराब की बोतलों के दाम में 10 रुपये की वृद्धि की गई है। हालांकि, खाली बोतल सही स्थिति में वापस करने पर ग्राहकों को 10 रुपये लौटाने का प्रावधान है। दूसरी ओर, कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में 19 किलो वाला सिलेंडर अब 2,820 रुपये का हो गया है, जो पहले 2,810 रुपये था। घरेलू इस्तेमाल वाले 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पर स्थिर रखी गई है।

    बैंकिंग सेवाओं में भी नए शुल्क लागू हुए हैं। पंजाब नेशनल बैंक के Visa और RuPay क्रेडिट कार्ड पर रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम करने की पात्र रिक्वेस्ट के लिए 99 रुपये शुल्क लगेगा। एक बिलिंग साइकल में 50 हजार रुपये से अधिक के यूटिलिटी बिल भुगतान पर एक प्रतिशत तक शुल्क लग सकता है। SBI ने भी क्रेडिट कार्ड से संबंधित कुछ शुल्कों में बदलाव किया है।

    बिजली उपभोक्ताओं के लिए उत्तराखंड और बिहार में नए प्रावधान लागू किए गए हैं। उत्तराखंड में BPL कार्डधारकों के नए बिजली कनेक्शन का सर्विस लाइन शुल्क 100 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया गया है। हालांकि, प्रीपेड मीटर इस्तेमाल करने वालों को कुछ राहत दी गई है। बिहार में 150 किलोवाट तक के सभी नए बिजली कनेक्शन के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाना अनिवार्य होगा। कनेक्शन का शुल्क फेज के अनुसार तय किया जाएगा।

    सरकारी पेंशन पाने वाले 80 वर्ष से कम उम्र के पेंशनर्स 1 नवंबर से अपना वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। इसकी अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। निर्धारित समय में प्रमाण पत्र नहीं देने पर पेंशन भुगतान प्रभावित हो सकता है। 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पेंशनर्स के लिए यह प्रक्रिया एक अक्टूबर से शुरू हो चुकी है।

    आयकर से जुड़े बदलाव के तहत असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए उन करदाताओं को ITR दाखिल करने की तारीख में राहत मिली है, जिनके खातों का ऑडिट जरूरी है। उनके लिए अंतिम तारीख बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है। यह विस्तार उन सभी करदाताओं पर लागू नहीं होगा, जिनके खातों का ऑडिट अनिवार्य नहीं है। GST के नियमों में भी बिक्री के बाद मिलने वाली छूट, क्रेडिट नोट और टैक्स रिफंड से संबंधित बदलाव किए गए हैं। इनसे कारोबारियों को कुछ परिस्थितियों में राहत मिल सकती है।

    टेलीकॉम क्षेत्र में CNAP सुविधा शुरू की जा रही है। इसके माध्यम से आने वाली कॉल के दौरान फोन की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम दिखाई दे सकता है। हालांकि, इसकी उपलब्धता नेटवर्क और टेलीकॉम ऑपरेटर पर निर्भर करेगी। FASTag के तहत टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए सालाना पास की व्यवस्था की गई है। नगर सीमा से बाहर स्थित टोल प्लाजा के लिए इसकी फीस 1,500 रुपये और नगर सीमा के अंदर स्थित टोल प्लाजा के लिए 3,000 रुपये होगी।

    उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे पर भी गति सीमा घटाई गई है। कार और जीप जैसे हल्के वाहनों की अधिकतम रफ्तार 100 से घटाकर 80 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। भारी वाहनों के लिए यह सीमा 80 से घटाकर 60 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। सर्दियों में कोहरे के कारण दुर्घटनाओं को कम करना इसका उद्देश्य है।

    हवाई और रेल यात्रियों के लिए भी कुछ बदलाव किए गए हैं। आठ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के यात्रियों के लिए Digi Yatra सुविधा का ट्रायल शुरू किया जा रहा है। शुरुआत में एयर इंडिया और इंडिगो की चुनिंदा उड़ानों में इसका लाभ मिलेगा। ताज एक्सप्रेस अब नई दिल्ली स्टेशन के बजाय हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से संचालित होगी।

    अयोध्या के राम मंदिर में भी दर्शन और पूजा का समय बदल गया है। एक नवंबर से मंदिर के पट सुबह चार बजे खुलेंगे और रात 10 बजे बंद होंगे। मंगला आरती सुबह 4:30 से 4:40 बजे तक होगी, जबकि श्रद्धालुओं के लिए दर्शन सुबह सात बजे से शुरू होंगे।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर भी मासिक समीक्षा की प्रक्रिया जारी है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की स्थिति के आधार पर तेल कंपनियां दरों की समीक्षा करती हैं। हालांकि, एक नवंबर को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में किसी बदलाव की पुष्टि के लिए आधिकारिक घोषणा जरूरी होगी। इन सभी बदलावों के बीच लोगों को अपने भुगतान, यात्रा, पेंशन और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े नए प्रावधानों की जानकारी रखना जरूरी है।

  • नवंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल LPG सिलेंडर, दिल्ली से चेन्नई तक बढ़े नए दाम..

    नवंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल LPG सिलेंडर, दिल्ली से चेन्नई तक बढ़े नए दाम..


    नई दिल्ली ।
    नवंबर महीने के पहले दिन आम लोगों और कारोबारियों से जुड़ी ईंधन की कीमतों में बदलाव किया गया है। तेल कंपनियों ने 1 नवंबर 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए रेट लागू कर दिए हैं। इस बार विभिन्न शहरों में इसकी कीमतों में अलग-अलग बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 10 रुपये महंगा होकर 2,820 रुपये का हो गया है। इससे पहले इसकी कीमत 2,810 रुपये थी। हालांकि, घरेलू रसोई गैस इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है और 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    कमर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है। ऐसे में इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर इन कारोबारों के संचालन खर्च पर पड़ सकता है। नवंबर की शुरुआत में हुई यह वृद्धि अलग-अलग शहरों में अलग स्तर पर दर्ज की गई है। प्रमुख महानगरों में चेन्नई में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।

    चेन्नई में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 2,983 रुपये से बढ़कर 2,994.50 रुपये हो गई है। यहां प्रति सिलेंडर 11.50 रुपये की वृद्धि की गई है। मुंबई में इसकी नई कीमत 2,764 रुपये निर्धारित की गई है। वहीं, अहमदाबाद में कमर्शियल सिलेंडर का दाम 2,831.50 रुपये से बढ़कर 2,842 रुपये पहुंच गया है। इन बदलावों के बाद संबंधित शहरों के व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सिलेंडर खरीदने के लिए पहले से अधिक भुगतान करना होगा।

    दूसरी ओर घरेलू रसोई गैस की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू LPG सिलेंडर पहले की तरह 942 रुपये में उपलब्ध है। मुंबई में इसकी कीमत 941.50 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये बनी हुई है। अहमदाबाद में घरेलू गैस सिलेंडर का भाव 949 रुपये पर स्थिर रखा गया है। इस तरह कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक रसोई खर्च पर फिलहाल कीमतों में बदलाव का अतिरिक्त असर नहीं पड़ेगा।

    कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पहले 1 अक्टूबर 2026 को भी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर के दाम में 62.50 रुपये का इजाफा किया गया था। उस समय भी घरेलू रसोई गैस की कीमतों को स्थिर रखा गया था। अब नवंबर में दोबारा कीमत बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट और खानपान से जुड़े दूसरे व्यवसायों के सामने ईंधन पर अधिक खर्च करने की स्थिति बन सकती है।

    LPG के साथ ही 1 नवंबर से हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। दिल्ली में ATF का भाव 137.12 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 138.50 रुपये प्रति लीटर हो गया है। यह करीब एक प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इससे पहले अक्टूबर में हवाई ईंधन की कीमतों में 13.22 प्रतिशत यानी लगभग 16 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा हुआ था। नवंबर में हुई वृद्धि के साथ ATF लगातार चौथे महीने महंगा हुआ है।

    हवाई ईंधन एयरलाइंस कंपनियों के संचालन खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। कुल ऑपरेटिंग लागत में इसकी हिस्सेदारी लगभग 35 से 40 प्रतिशत बताई जाती है। ऐसे में ATF की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से विमानन कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है। इसका असर भविष्य में हवाई टिकटों की कीमतों पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल नवंबर की शुरुआत में कमर्शियल गैस और हवाई ईंधन महंगे हुए हैं, जबकि घरेलू रसोई गैस के उपभोक्ताओं को कीमतों में बदलाव से राहत मिली हुई है।

  • पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य, डीजल और ATF पर बढ़ाया टैक्स, घरेलू कीमतों पर असर नहीं

    पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य, डीजल और ATF पर बढ़ाया टैक्स, घरेलू कीमतों पर असर नहीं


    नई दिल्ली। दिवाली से पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले टैक्स की दरों में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय ने पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 2.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दी है। वहीं, डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया गया है। नए आदेश 31 अक्टूबर से लागू होकर अगले दो सप्ताह तक प्रभावी रहेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन बदलावों का घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों या उन पर लगने वाली मौजूदा ड्यूटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी खत्म

    वित्त मंत्रालय ने शनिवार, 31 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। इसके मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली 2.50 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब पेट्रोल के निर्यात पर यह टैक्स शून्य रहेगा।

    दूसरी ओर, सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। डीजल के निर्यात पर लगने वाली SAED और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस की संयुक्त दर भी 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। यानी डीजल के निर्यात पर प्रति लीटर 3 रुपये टैक्स बढ़ा है।

    पश्चिम एशिया में तनाव के बीच फैसला

    सरकार ने ये बदलाव ऐसे समय किए हैं, जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल तथा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ रहा है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, डीजल और ATF पर बढ़ाई गई दरें अगले दो सप्ताह के लिए लागू रहेंगी। इसके बाद बाजार की परिस्थितियों के अनुसार समीक्षा की जाएगी।

    घरेलू बाजार में नहीं होगा बदलाव

    पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विंडफॉल टैक्स में किए गए ये बदलाव केवल पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लागू होंगे। घरेलू इस्तेमाल के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में इस फैसले से देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर सीधे असर की संभावना नहीं है।

    क्या होता है विंडफॉल टैक्स?

    विंडफॉल टैक्स वह अतिरिक्त कर है, जो कंपनियों को असाधारण बाजार परिस्थितियों में सामान्य से अधिक मुनाफा होने पर लगाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ने पर रिफाइनरी कंपनियों को विदेशों में पेट्रोल और डीजल बेचकर ज्यादा कमाई हो सकती है। ऐसे में सरकार निर्यात पर टैक्स लगाकर इस अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा हासिल करती है।

    निर्यात पर शुल्क बढ़ाने का एक उद्देश्य विदेशों में ईंधन बेचना कम आकर्षक बनाना और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरी कंपनियों को प्रोत्साहित करना भी है।

    2022 में पहली बार लगाया गया था टैक्स

    भारत ने जुलाई 2022 में पहली बार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया था। करीब दो साल बाद दिसंबर 2024 में इसे हटा दिया गया। इसके बाद मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने इसे दोबारा लागू किया। तब से बाजार की स्थितियों के अनुसार इसकी दरों में बदलाव किया जा रहा है।

    सरकार आमतौर पर हर दो सप्ताह में इन टैक्स दरों की समीक्षा करती है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों और घरेलू रिफाइनरी कंपनियों को निर्यात से होने वाले मुनाफे को ध्यान में रखा जाता है।

  • विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बॉन्ड यील्ड में नरमी से सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त

    विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बॉन्ड यील्ड में नरमी से सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए 26 से 30 अक्टूबर तक का कारोबारी सप्ताह बढ़त वाला रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी, बॉन्ड यील्ड में नरमी और कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से बाजार को समर्थन मिला। इस दौरान प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब दो प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन तक बाजार ने अपनी साप्ताहिक बढ़त बनाए रखी, हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता भी देखने को मिली।

    सप्ताह के पांच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 1,335.70 अंक यानी 1.83 प्रतिशत बढ़कर 74,459.53 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में 453.10 अंकों यानी 2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 23,053.10 पर पहुंच गया। बॉन्ड यील्ड में कमी आने से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ, जिसका असर शेयर बाजार की खरीदारी पर दिखाई दिया।

    इस दौरान अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि, तीनों केंद्रीय बैंकों ने महंगाई को लेकर सतर्क रुख बनाए रखा। इसके कारण जल्द मौद्रिक नरमी की उम्मीदों को सीमित समर्थन मिला। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, बॉन्ड यील्ड में नरमी और बेहतर आर्थिक परिस्थितियों ने शेयर बाजार में व्यापक खरीदारी को प्रोत्साहित किया।

    सप्ताह के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन प्रमुख सूचकांकों से बेहतर रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में 2.69 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 चार प्रतिशत चढ़ा। इससे पता चलता है कि बाजार में खरीदारी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

    विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने भी बाजार को मजबूती दी। इस सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कुल 6,304.67 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 3,109.79 करोड़ रुपये की खरीदारी की। विदेशी निवेशकों की वापसी को बाजार में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा गया।

    सेक्टर के लिहाज से फार्मा और हेल्थकेयर कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। इसकी प्रमुख वजह कंपनियों के सकारात्मक वित्तीय नतीजे रहे। बॉन्ड यील्ड में नरमी से रियल एस्टेट शेयरों को भी फायदा मिला। वहीं, इनपुट लागत कम होने की उम्मीदों के चलते मेटल, एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इसके विपरीत सीमेंट और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा।

    हालांकि, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिनों में बाजार का रुख कुछ सतर्क हो गया। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। इससे व्यापक बाजार में निवेशकों ने मुनाफावसूली की, लेकिन सेंसेक्स और निफ्टी अपनी साप्ताहिक बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।

    सप्ताह के अंत में ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा। अब निवेशकों की नजर ओपेक प्लस की आगामी समीक्षा पर है। इस बैठक में तेल उत्पादन और आपूर्ति को लेकर कोई महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और शेयर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।

  • सरकार ने पेट्रोल निर्यात शुल्क शून्य किया, डीजल और विमान ईंधन पर बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी..

    सरकार ने पेट्रोल निर्यात शुल्क शून्य किया, डीजल और विमान ईंधन पर बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी..

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लागू शुल्कों में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से शनिवार, 31 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। सरकार के इस फैसले के बाद पेट्रोल पर पहले लागू 2.50 रुपये प्रति लीटर का शुल्क समाप्त हो गया है।

    संशोधित दरों के तहत डीजल के निर्यात पर शुल्क 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसमें तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इसी तरह, एटीएफ के निर्यात पर शुल्क 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इस तरह विमान ईंधन पर निर्यात शुल्क में 50 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल पर शुल्क शून्य होने के साथ तीनों पेट्रोलियम उत्पादों के लिए अलग-अलग दरें लागू हो गई हैं।

    सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बने हालात के बीच इन शुल्कों की समीक्षा की है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के बाद मार्च के अंत में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर शुल्क लागू किए गए थे। इन दरों की समीक्षा केंद्र सरकार हर 15 दिन में करती है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के अनुसार शुल्कों में बदलाव किया जा सके।

    निर्यात शुल्क लागू करने का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेल रिफाइनरियां घरेलू बाजार में आपूर्ति करने के बजाय अधिक मुनाफे के लिए विदेशी बाजारों को प्राथमिकता न दें। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें घरेलू बाजार की तुलना में अधिक आकर्षक होती हैं, तब निर्यात से बेहतर कमाई की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे हालात में निर्यात शुल्क के माध्यम से घरेलू खरीदारों के लिए पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की जाती है।

    इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 113.10 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। बीते एक सप्ताह में इसकी कीमत में 1.55 प्रतिशत और एक महीने के दौरान 15.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले तीन महीनों में ब्रेंट क्रूड करीब 26 प्रतिशत महंगा हुआ है।

    भारत के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व भी काफी अधिक है। मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने से पहले देश के कच्चे तेल के आयात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता था। यह मार्ग फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है और तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़े हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति से जुड़े इन घटनाक्रमों के बीच सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क की समीक्षा कर रही है। नई दरों के तहत पेट्रोल पर निर्यात शुल्क समाप्त हो गया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर शुल्क बढ़ाया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य घरेलू आपूर्ति और निर्यात से जुड़े आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है।

  • सोने की कीमतों में फिर गिरावट, 1.38 लाख रुपये के करीब पहुंचा वायदा भाव….

    सोने की कीमतों में फिर गिरावट, 1.38 लाख रुपये के करीब पहुंचा वायदा भाव….

    नई दिल्ली । देश में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। 31 अक्टूबर 2026 को सोने के वायदा भाव में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शनिवार सुबह तक 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 66 रुपये यानी 0.05 प्रतिशत घटकर 1,38,419 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी दिन यह 1,38,485 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहने के कारण अब कारोबार अगले कारोबारी सत्र में होगा।

    बुलियंस के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 1,38,830 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 3,884.90 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में सोने की कीमत गिरकर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। इस दर में सभी कर शामिल हैं। दूसरी ओर, शहरों के खुदरा भाव के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,410 रुपये, 22 कैरेट की 1,30,550 रुपये और 18 कैरेट की 1,06,840 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

    देश के अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, अयोध्या, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, जयपुर, चंडीगढ़ और अमृतसर में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,410 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इन शहरों में 22 कैरेट सोना 1,30,550 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,06,840 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पुणे, नागपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद, रायपुर, भुवनेश्वर और गुवाहाटी जैसे शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,260 रुपये प्रति 10 ग्राम है। यहां 22 कैरेट सोना 1,30,400 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,06,690 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै और तमिलनाडु के कई अन्य शहरों में 18 कैरेट सोने की कीमत 1,06,670 रुपये दर्ज की गई है।

    पटना, इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट में 24 कैरेट सोना 1,42,310 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। इन शहरों में 22 कैरेट का भाव 1,30,450 रुपये और 18 कैरेट का 1,06,740 रुपये है। नासिक, वसई-विरार, भिवंडी और लातूर में 24 कैरेट सोना 1,42,290 रुपये, 22 कैरेट 1,30,430 रुपये और 18 कैरेट 1,06,720 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    इससे पहले शुक्रवार को भी घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,300 रुपये टूटकर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया था। बृहस्पतिवार को इसकी कीमत 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 122.06 डॉलर यानी 3.04 प्रतिशत गिरकर 3,899.33 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था और 4,000 डॉलर के स्तर से नीचे बना रहा।

    वायदा बाजार में भी शुक्रवार को सोने पर दबाव दिखाई दिया। कमजोर हाजिर मांग के बीच कारोबारियों ने अपने सौदों का आकार घटाया। इसके चलते एमसीएक्स पर दिसंबर में आपूर्ति वाले सोने के अनुबंध का भाव 976 रुपये यानी 0.68 प्रतिशत गिरकर 1,41,620 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। न्यूयॉर्क के बाजार में सोना 0.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,983.99 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता रहा।

    एचडीएफसी सिक्योरिटीज के जिंस मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल कारकों के चलते बाजार की धारणा प्रभावित हुई। इसका असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर भी पड़ा और शुक्रवार को गिरावट जारी रही। कमजोर हाजिर मांग को भी वायदा कीमतों में कमी की प्रमुख वजह बताया गया। इस तरह 31 अक्टूबर को वायदा भाव में मामूली गिरावट के साथ सोना 1.38 लाख रुपये के स्तर के करीब बना रहा, जबकि सर्राफा और खुदरा बाजार में अलग-अलग दरें दर्ज की गईं।

  • अमेरिकी शेयर बाजार में AI निवेश पर उठे सवाल, नैसडैक 7.8 प्रतिशत टूटा, अक्टूबर में 2 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी साफ

    अमेरिकी शेयर बाजार में AI निवेश पर उठे सवाल, नैसडैक 7.8 प्रतिशत टूटा, अक्टूबर में 2 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी साफ

    नई दिल्ली । अमेरिकी शेयर बाजार में अक्टूबर 2026 के दौरान टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ी कंपनियों की ओर से किए जा रहे भारी निवेश पर अब निवेशकों के सवाल बढ़ने लगे हैं। बाजार में यह चिंता है कि कंपनियां जिस तेजी से AI तकनीक पर पूंजी खर्च कर रही हैं, क्या भविष्य में उससे पर्याप्त कमाई और रिटर्न हासिल हो पाएगा। इसी अनिश्चितता का असर अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया है। अक्टूबर में नैसडैक अपने उच्चतम स्तर से 7.8 प्रतिशत नीचे आ चुका है।

    इस गिरावट के दौरान नैसडैक का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 2 ट्रिलियन डॉलर घट गया। यह रकम एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के अनुमानित बाजार मूल्य के बराबर बताई जा रही है। अक्टूबर का प्रदर्शन मार्च 2025 के बाद नैसडैक के लिए सबसे खराब मासिक प्रदर्शन रहा है। टेक कंपनियों के शेयरों में लगातार दबाव के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

    शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में बिकवाली और तेज हो गई। नैसडैक कंपोजिट इंडेक्स 2.86 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 1.82 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। दोनों सूचकांकों के लिए यह जून के बाद सबसे खराब कारोबारी दिन रहा। वहीं डाउ जोंस इंडेक्स भी 572 अंक यानी 1.1 प्रतिशत टूट गया। बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण बड़ी टेक कंपनियों के AI निवेश को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता रही।

    मेटा, अल्फाबेट और अमेजन जैसी कंपनियां AI तकनीक के विकास, डेटा सेंटर और संबंधित बुनियादी ढांचे पर भारी रकम खर्च कर रही हैं। निवेशकों को आशंका है कि इस निवेश से होने वाली कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर AI से जुड़ा पूंजीगत खर्च 2030 तक 5.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। अकेले 2026 में इस क्षेत्र में करीब 900 अरब डॉलर खर्च होने की संभावना जताई गई है।

    चिप निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंटेल के शेयरों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को कंपनी का शेयर करीब 30 प्रतिशत टूट गया। यह 1974 के बाद एक कारोबारी दिन में इंटेल के शेयरों की सबसे बड़ी गिरावट बताई गई है। कंपनी ने चौथी तिमाही में कमजोर राजस्व का अनुमान जताया है। इसकी एक प्रमुख वजह मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ता मांग में कमी आना बताई गई है।

    अन्य बड़ी टेक कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। अमेजन के शेयर में 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि एनवीडिया का शेयर 4 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इस गिरावट के बाद एनवीडिया बाजार पूंजीकरण के मामले में ऐपल से पीछे हो गई। अल्फाबेट और मेटा के शेयर अपने शीर्ष स्तर से करीब 20 प्रतिशत नीचे आ चुके हैं। माइक्रोसॉफ्ट और स्पेसएक्स के नतीजों में AI पर किए गए निवेश से रिटर्न मिलने के संकेत जरूर सामने आए हैं, लेकिन शुक्रवार को इनके शेयरों में भी कमजोरी रही।

    शेयर बाजार में आई गिरावट का असर दुनिया के सबसे अमीर लोगों की संपत्ति पर भी पड़ा है। एलन मस्क की नेटवर्थ में 48.5 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई, जिसके बाद उनकी कुल संपत्ति घटकर 865 अरब डॉलर रह गई। इसके अलावा जेफ बेजोस, लैरी पेज, सर्गेई ब्रिन, माइकल डेल, मार्क जकरबर्ग, लैरी एलिसन और जेंसन हुआंग की संपत्ति में भी गिरावट आई।

    अमेरिकी शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति ने AI क्षेत्र में निवेश की रफ्तार और उससे मिलने वाले संभावित मुनाफे को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। कंपनियों के भारी खर्च और निवेशकों की रिटर्न संबंधी अपेक्षाओं के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। आने वाले समय में कंपनियों के वित्तीय नतीजे और AI कारोबार से होने वाली वास्तविक कमाई इस क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • बैंकों का कर्ज देने का तरीका बदला, होम लोन से आगे निकली NBFCs की हिस्सेदारी, गोल्ड लोन में 82.5% उछाल

    बैंकों का कर्ज देने का तरीका बदला, होम लोन से आगे निकली NBFCs की हिस्सेदारी, गोल्ड लोन में 82.5% उछाल


    नई दिल्ली । देश में बैंकों के कर्ज वितरण के तरीके में बदलाव देखने को मिल रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में बैंकों ने घर खरीदने वाले ग्राहकों की तुलना में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को अधिक कर्ज दिया। 31 मार्च से 30 सितंबर के बीच बैंकों ने NBFCs को करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया, जबकि आवास क्षेत्र को 1.4 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया। इस अवधि में गोल्ड लोन भी तेजी से बढ़ा और खुदरा कर्ज की वृद्धि में इसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही।

    आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च से 30 सितंबर के बीच बैंकों ने कुल 16.1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त गैर-खाद्य ऋण वितरित किया। इसमें बड़े उद्योगों को 2.04 लाख करोड़ रुपये का कर्ज मिला, जबकि NBFCs को 1.83 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया गया। आवास क्षेत्र में यह राशि 1.35 लाख करोड़ रुपये रही। गोल्ड लोन के रूप में 1.15 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज दिया गया। व्यापार क्षेत्र को 1.02 लाख करोड़ रुपये और सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को 91,366 करोड़ रुपये का ऋण मिला।

    गोल्ड लोन में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई है। पिछले एक साल में इस श्रेणी का बकाया कर्ज 82.5 प्रतिशत बढ़कर 5.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। वित्त वर्ष की पहली छमाही में ही इसमें 25.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मार्च से सितंबर के बीच बैंकों ने सोना गिरवी रखकर 1.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया। इस वृद्धि के साथ गोल्ड लोन बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से बढ़ने वाले ऋण खंडों में शामिल हो गया है।

    अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का कुल गैर-खाद्य ऋण सितंबर के अंत तक सालाना आधार पर 19.1 प्रतिशत बढ़कर 229 लाख करोड़ रुपये हो गया। मार्च के मुकाबले इसमें 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस कुल ऋण में सेवाओं का हिस्सा 4.9 लाख करोड़ रुपये, व्यक्तिगत कर्ज का 4.5 लाख करोड़ रुपये, उद्योगों का 3.7 लाख करोड़ रुपये और कृषि क्षेत्र का 1.8 लाख करोड़ रुपये रहा। आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग क्षेत्र में उद्योग, सेवा और व्यक्तिगत कर्ज की मांग बनी हुई है।

    सेवा क्षेत्र को मिलने वाला कर्ज भी तेजी से बढ़ा है। इस क्षेत्र का कुल ऋण सालाना आधार पर 28.3 प्रतिशत बढ़कर 64.9 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। अतिरिक्त गैर-खाद्य ऋण में सेवाओं की हिस्सेदारी 30.6 प्रतिशत रही। सेवा क्षेत्र में NBFCs को दिया गया कर्ज 41.8 प्रतिशत बढ़कर 22.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, कमर्शियल रियल एस्टेट क्षेत्र को दिए गए ऋण में 23.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 7.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    उद्योगों को मिलने वाले कर्ज में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। औद्योगिक ऋण सालाना आधार पर 19.5 प्रतिशत बढ़कर 49.8 लाख करोड़ रुपये हो गया। बड़ी कंपनियों को दिया गया कर्ज 16 प्रतिशत बढ़कर 33 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। मध्यम आकार की कंपनियों के लिए ऋण में 33.2 प्रतिशत और छोटी कंपनियों के कर्ज में 24.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उद्योगों को दिए गए अतिरिक्त 3.7 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 2 लाख करोड़ रुपये और छोटी कंपनियों की हिस्सेदारी 1.6 लाख करोड़ रुपये रही।

    कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए बैंक ऋण सालाना आधार पर 19.5 प्रतिशत बढ़कर 28.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 23.6 लाख करोड़ रुपये था। व्यापार क्षेत्र को मिलने वाले ऋण में भी 23.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दूसरी ओर, व्यक्तिगत कर्ज 17.3 प्रतिशत बढ़कर 74.27 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले दिए जाने वाले कर्ज में भी उल्लेखनीय तेजी आई। इस श्रेणी में बैंकों का बकाया ऋण 53.3 प्रतिशत बढ़कर 2.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले छह महीनों में इसमें 28.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मार्च से सितंबर के दौरान बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले 47,471 करोड़ रुपये का कर्ज दिया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बैंकिंग क्षेत्र में NBFCs, गोल्ड लोन और जमा राशि के बदले मिलने वाले कर्ज की मांग तेजी से बढ़ी है।