Category: Economy

  • Google पर कैसे बनते हैं ट्रेंडिंग टॉपिक्स? समझिए इसके पीछे काम करने वाली टेक्नोलॉजी

    Google पर कैसे बनते हैं ट्रेंडिंग टॉपिक्स? समझिए इसके पीछे काम करने वाली टेक्नोलॉजी


    नई दिल्ली । डिजिटल दौर में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि कोई खबर, फिल्म, खिलाड़ी या घटना अचानक Google पर ट्रेंड करने लगती है। कभी यह ब्रेकिंग न्यूज होती है, तो कभी किसी सेलिब्रिटी से जुड़ी चर्चा। ऐसे में सवाल उठता है कि Google आखिर कैसे तय करता है कि कौन-सा विषय ट्रेंड कर रहा है? इसके पीछे एडवांस टेक्नोलॉजी और मजबूत डेटा एनालिसिस सिस्टम काम करता है, जो अलग-अलग स्रोतों से आने वाली जानकारी का तुरंत विश्लेषण करता है।

    क्या होता है ट्रेंडिंग टॉपिक?

    सरल शब्दों में कहें तो जब किसी विषय को लेकर बहुत कम समय में अचानक बड़ी संख्या में सर्च होने लगती हैं, तो Google उसे ट्रेंडिंग टॉपिक के रूप में पहचानता है। यह सामान्य सर्च पैटर्न से अलग होता है। यानी कोई विषय, जिसे पहले कम लोग खोज रहे थे, अचानक हजारों या लाखों लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बन जाता है।

    Google कैसे पकड़ता है ट्रेंड?

    Google के पास हर सेकंड दुनियाभर से करोड़ों सर्च क्वेरी आती हैं। इसके एल्गोरिदम इन रियल-टाइम सर्चेस की तुलना पुराने डेटा से करते हैं। अगर किसी कीवर्ड या टॉपिक में अचानक असामान्य तेजी दिखाई देती है, तो सिस्टम उसे संभावित ट्रेंड मान लेता है और ट्रेंडिंग लिस्ट में शामिल कर देता है।

    ट्रेंड के पीछे AI और डेटा एनालिसिस

    Google सिर्फ सर्च की संख्या नहीं देखता, बल्कि यह भी समझने की कोशिश करता है कि लोग किसी विषय को क्यों खोज रहे हैं। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया जाता है। ये तकनीकें न्यूज वेबसाइट्स, सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म और ब्लॉग्स से डेटा जुटाकर उसका विश्लेषण करती हैं, ताकि यह तय किया जा सके कि कोई विषय वास्तव में महत्वपूर्ण है या सिर्फ थोड़े समय की हलचल है।

    जगह और समय की अहम भूमिका

    हर ट्रेंड हर जगह एक जैसा नहीं होता। कई बार कोई विषय सिर्फ किसी खास देश, राज्य या शहर तक सीमित रहता है। Google यूजर की लोकेशन और समय के आधार पर ट्रेंडिंग टॉपिक्स दिखाता है। जैसे चुनाव, मौसम या स्थानीय घटनाएं अक्सर क्षेत्रीय स्तर पर ही ट्रेंड करती हैं।

    क्या है Google Trends?

    Google Trends दरअसल Google की ट्रेंडिंग तकनीक का सार्वजनिक रूप है। इस टूल के जरिए यह देखा जा सकता है कि कोई टॉपिक कब, कहां और कितनी तेजी से खोजा गया। ग्राफ और तुलना के जरिए यह टूल सर्च ट्रेंड्स को समझना आसान बना देता है।

  • ट्रंप के ऐलान से अडानी और अंबानी की दौलत में उछाल, अरबपतियों के रुतबे में बदलाव

    ट्रंप के ऐलान से अडानी और अंबानी की दौलत में उछाल, अरबपतियों के रुतबे में बदलाव

    नई दिल्ली! हाल ही में अरबपतियों की सूची में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिले। मंगलवार को अडानी और अंबानी ने कमाई के मामले में कई प्रमुख नामों को पीछे छोड़ा। इस दौरान, जहां जेफ बेजोस की संपत्ति में थोड़ी गिरावट आई, वहीं वॉरेन बफेट और स्टीव बाल्मर टॉप-10 से बाहर हो गए।

    दरअसल, ट्रंप द्वारा भारत-अमेरिका ट्रेड डील के ऐलान के बाद भारतीय शेयर बाजार में अचानक तेजी आई, जिससे मुकेश अंबानी (रिलायंस) और गौतम अडानी (अडानी ग्रुप) की संपत्ति में शानदार इजाफा हुआ। इसके चलते इन दोनों अरबपतियों का रुतबा और बढ़ गया।

    अंबानी एक बार फिर 18वें स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि अडानी 24वें से बढ़कर 22वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

    ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स की ताजा सूची में एलन मस्क सबसे बड़े लाभार्थी रहे। उनकी संपत्ति में 9.64 अरब डॉलर का इजाफा हुआ, और वह 680 अरब डॉलर के साथ दुनिया के सबसे अमीर इंसान बने हुए हैं।

    मंगलवार को अडानी और अंबानी की संपत्ति में क्रमशः 8.50 अरब डॉलर और 4.85 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। अडानी का नेटवर्थ अब 83.2 अरब डॉलर है, जबकि अंबानी की संपत्ति 97.9 अरब डॉलर तक पहुंच गई।

    शेयर मार्केट में उछाल
    यूएस-इंडिया डील की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी आई। सेंसेक्स ने 5.14% की छलांग लगाई, जबकि निफ्टी ने 4.99% की बढ़त दर्ज की।

    इस तेजी से रिलायंस और अडानी ग्रुप के शेयरों में भी उछाल आया, जिससे इन दोनों के नेटवर्थ में वृद्धि हुई।

    ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स के अनुसार, एलन मस्क की संपत्ति 680 अरब डॉलर के आसपास है, जबकि दूसरे स्थान पर लैरी पेज हैं, जिनकी संपत्ति 290 अरब डॉलर है। जेफ बेजोस, मार्क जुकरबर्ग और लैरी एलिसन की संपत्ति में भी कुछ गिरावट आई।

    नए अरबपति टॉप-10 में शामिल
    जिम वॉल्टन और रॉब वॉल्टन अब दुनिया के टॉप-10 अरबपतियों में शामिल हो गए हैं। दोनों ने वॉरेन बफेट और स्टीव बाल्मर को सूची से बाहर कर दिया। जिम वॉल्टन 152 अरब डॉलर के साथ आठवें स्थान पर हैं, जबकि रॉब वॉल्टन 149 अरब डॉलर के साथ दसवें स्थान पर हैं।

  • Trump Tariff Effect: बिटकॉइन में 4 माह से गिरावट जारी… एक ही दिन में 7% टूटकर $73,000 के नीचे पहुंची कीमत

    Trump Tariff Effect: बिटकॉइन में 4 माह से गिरावट जारी… एक ही दिन में 7% टूटकर $73,000 के नीचे पहुंची कीमत


    वाशिंगटन।
    बिटकॉइन (Bitcoin) की कीमत में चार महीने से जारी गिरावट मंगलवार को और तेज हो गई, जब यह न्यूयॉर्क (New York.) में 7% गिरकर $72,877 तक पहुंच गई। यह कीमत नवंबर 2024 के बाद सबसे कम है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने चुनावी जीत (Election victory) हासिल की थी। ब्लूमबर्ग के अनुसार, इस गिरावट ने ट्रंप के चुनावी जीत के बाद बिटकॉइन में हुई सारी बढ़त को नष्ट कर दिया है, और अब यह $74,424.95 के 2025 के निचले स्तर से भी नीचे चला गया है।


    बिटकॉइन के गिरते मूल्य के पीछे कारण

    फाल्कनएक्स के ट्रेडिंग विशेषज्ञ बोहान जियांग के मुताबिक, कई व्यापारी इस उम्मीद में गिरावट के दौरान बिटकॉइन खरीदने की कोशिश कर रहे थे कि इसकी कीमत $80,000 के पार जाएगी। लेकिन जैसे-जैसे बिटकॉइन की कीमत नीचे जाती गई, इन निवेशकों के दांव उलटे पड़े, और उनकी मजबूरी में की गई बिकवाली ने और दबाव बना दिया। इसके अलावा, अक्टूबर में ट्रंप के टैरिफ को लेकर दिए गए बयानों ने बाजार में भारी बिकवाली को जन्म दिया, जिससे 19 अरब डॉलर के लीवरेज्ड दांव टूट गए।

    क्रिप्टो बाजार में गिरावट का माहौल
    बिटकॉइन के गिरते मूल्य ने पूरे क्रिप्टो बाजार को प्रभावित किया है। इस दौरान, क्रिप्टो फ्यूचर्स के खुले अनुबंधों की संख्या में भारी कमी आई और परपेचुअल फ्यूचर्स की फंडिंग रेट नकारात्मक हो गई, जो दर्शाता है कि निवेशक गिरावट पर दांव लगाने में दिलचस्पी ले रहे हैं। सिग्नलप्लस के साझेदार ऑगस्टीन फैन का कहना है कि क्रिप्टो बाजार अब मंदी की ओर बढ़ रहा है, और वर्तमान स्थिति में निवेशक बहुत अधिक सतर्क हो गए हैं।


    संस्थागत और खुदरा निवेशकों का मनोबल

    कुछ संस्थागत निवेशक अभी भी क्रिप्टो में डटे हुए हैं, लेकिन प्रमुख लॉन्ग टर्म बिटकॉइन धारकों के अरबों डॉलर की बिकवाली के बाद छोटे निवेशकों की गतिविधि कम हो गई है। बिटकॉइन और एथेरियम के अमेरिकी एटीएफ के अनुमोदन के बावजूद, छोटे क्रिप्टो करेंसी (ऑल्टकॉइन) की कीमतों में भारी गिरावट आई है।


    भविष्य की दिशा

    एयरड्रॉपअलर्ट डॉट कॉम के मोर्टन क्रिस्टेंसन के अनुसार, बिटकॉइन अभी भी एक उच्च जोखिम वाली संपत्ति के रूप में कारोबार कर रहा है, और इसका ‘डिजिटल गोल्ड’ बनने का सपना फिलहाल पूरा नहीं हुआ है। वह मानते हैं कि वर्तमान बाजार की अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियों के कारण बिटकॉइन के भविष्य को लेकर निवेशक अभी भी आशंकित हैं।

  • चार दिन की लगातार गिरावट के बाद सोने और चांदी में फिर उछाल

    चार दिन की लगातार गिरावट के बाद सोने और चांदी में फिर उछाल

    नई दिल्‍ली। लगातार चार कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर मजबूती देखने को मिली है। मंगलवार, 3 फरवरी को दोनों कीमती धातुओं ने तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की, जिससे निवेशकों को राहत मिली है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4 प्रतिशत की तेजी के साथ बढ़कर 4,830 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया। वहीं स्पॉट सिल्वर ने भी जोरदार छलांग लगाते हुए लगभग 8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की और इसका भाव 82.74 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।

    30 जनवरी को 10% लुढ़का था भाव
    गोल्ड की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से मुनाफावसूली देखने को मिल रही है।

    30 जनवरी 2026 को गोल्ड का रेट 10 प्रतिशत लुढ़क गया था। इस गिरावट के बाद स्पॉट गोल्ड का रेट 5000 डॉलर प्रति आउंस के नीचे आ गया था। चांदी की स्थिति तो गोल्ड की तुलना में और खराब हो गई। इसी दिन चांदी का रेट 27 प्रतिशत कम हो गया था।

    आज से पहले बीते दो कारोबारी दिन में गोल्ड की कीमतों में 13 प्रतिशत और चांदी की कीमतों में 34 प्रतिशत की गिरावट इंटरनेशनल मार्केट में दर्ज की गई है।

    चांदी की कीमतें लगातार तीसरे दिन तेजी से गिरीं। सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में यह 52,000 रुपये टूटकर 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गई, जबकि कमजोर वैश्विक रुझानों और मजबूत डॉलर के बीच सोना टूटकर 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया।

    अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी 52,000 रुपये, या लगभग 17 प्रतिशत टूटकर 2,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) रह गई। शनिवार को, चांदी 19 प्रतिशत, या 72,500 रुपये गिरकर 3.12 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गई थी।

    पिछले तीन सत्रों में, चांदी की कीमतें 1,44,500 रुपये, या लगभग 36 प्रतिशत गिरकर 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे आ गई हैं। 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर 29 जनवरी को दर्ज किया गया जो अब तक की सबसे ऊंची कीमत थी।

  • इस हफ्ते SME सेगमेंट के 3 नए पब्लिक इश्यू खुलेंगे, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

    इस हफ्ते SME सेगमेंट के 3 नए पब्लिक इश्यू खुलेंगे, निवेशकों के लिए बड़ा मौका


    नई दिल्‍ली । यूनियन बजट 2026 के बाद शेयर बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बजट के ऐलान के साथ ही निवेशकों की नजर अब नए निवेश अवसरों पर टिक गई है और इसी कड़ी में इस सप्ताह आईपीओ बाजार काफी सक्रिय रहने वाला है। खास बात यह है कि इस हफ्ते खुलने वाले सभी नए पब्लिक इश्यू एसएमई  SME सेगमेंट से जुड़े हुए हैं, जो छोटे और मझोले निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

    इस सप्ताह कुल तीन नए आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए ओपन होने जा रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह हफ्ता बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि सही कंपनी में निवेश कर अच्छे रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं इन तीनों आईपीओ के बारे में-

    Grover Jewells IPO

    ज्वेलरी सेक्टर की कंपनी Grover Jewells अपना आईपीओ 4 फरवरी को निवेशकों के लिए खोलने जा रही है। इस पब्लिक इश्यू में निवेशक 6 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। कंपनी इस आईपीओ के जरिए कुल 33.83 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है।

    Grover Jewells ने अपने शेयरों का प्राइस बैंड 83 से 88 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इस आईपीओ में एक लॉट 1600 शेयरों का होगा, यानी निवेशकों को न्यूनतम निवेश इसी लॉट साइज के अनुसार करना होगा। सब्सक्रिप्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 11 फरवरी को NSE SME प्लेटफॉर्म पर हो सकती है। ज्वेलरी सेक्टर में रुचि रखने वाले निवेशकों के लिए यह आईपीओ आकर्षक विकल्प माना जा रहा है।

    Biopol Chemicals IPO

    केमिकल सेक्टर से जुड़ी कंपनी Biopol Chemicals अपना पब्लिक इश्यू 6 फरवरी से सब्सक्रिप्शन के लिए खोलने जा रही है। निवेशक इस आईपीओ में 10 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। कंपनी इस इश्यू के जरिए 31.26 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। Biopol Chemicals ने आईपीओ के लिए 102 से 108 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इसमें एक लॉट 1200 शेयरों का रखा गया है। सब्सक्रिप्शन बंद होने के बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 13 फरवरी को NSE SME प्लेटफॉर्म पर होने की संभावना है। केमिकल इंडस्ट्री में बढ़ती मांग को देखते हुए इस आईपीओ पर निवेशकों की खास नजर बनी हुई है।

    NFP Sampoorna Foods IPO

    फूड प्रोसेसिंग सेक्टर की कंपनी NFP Sampoorna Foods का आईपीओ 4 फरवरी से निवेशकों के लिए ओपन हो रहा है। इस इश्यू में निवेशक 6 फरवरी तक अपनी बोली लगा सकते हैं। कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए कुल 24.53 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है।

    कंपनी ने अपने शेयरों का प्राइस बैंड 52 से 55 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इस आईपीओ में निवेश के लिए एक लॉट में 2000 शेयर शामिल किए गए हैं। सब्सक्रिप्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 11 फरवरी को NSE SME प्लेटफॉर्म पर हो सकती है। कम प्राइस बैंड होने के कारण यह आईपीओ छोटे निवेशकों के लिए खासा आकर्षक माना जा रहा है।

    निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह सप्ताह

    बजट 2026 के बाद बाजार में बने सकारात्मक माहौल के बीच इन तीनों एसएमई आईपीओ को निवेश के नए अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, एसएमई आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, बिजनेस मॉडल और भविष्य की योजनाओं का आकलन करना जरूरी होता है।गौरतलब है कि यह सप्ताह उन निवेशकों के लिए खास हो सकता है जो बजट के बाद उभरते अवसरों का फायदा उठाना चाहते हैं और एसएमई सेगमेंट में निवेश करने में रुचि रखते हैं।

  • मारुति सुजुकी ने कमोडिटी की कीमतें बढ़ने से कारों के दाम में बढ़ोतरी के दिए संकेत

    मारुति सुजुकी ने कमोडिटी की कीमतें बढ़ने से कारों के दाम में बढ़ोतरी के दिए संकेत


    नई दिल्‍ली।
    देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी (Country’s Largest Car Manufacturer) मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) (Maruti Suzuki India Limited – MSIL) के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (विपणन एवं बिक्री) पार्थो बनर्जी ने सोमवार को बढ़ती जिंस (कमोडिटी) की लागत को देखते हुए अपने वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

    पार्थो बनर्जी ने ऑनलाइन प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती के बाद बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है। इसके बावजूद उत्पादन संबंधी बाधाओं के कारण कंपनी के पास फिलहाल 1.75 लाख वाहनों के लंबित ऑर्डर हैं। उन्‍होंने बताया कि केवल जनवरी में ही 2.78 लाख बुकिंग मिली है। कच्चे माल की लागत बढ़ने से निकट भविष्य में कीमतें बढ़ाने की संभावना से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि जिंस के मोर्चे पर कीमतें बढ़ रही हैं। कीमती धातुओं में वृद्धि काफी ज्यादा है। भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए हम इस पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में कीमतों की समीक्षा जरूर करेंगे।

    बनर्जी ने कहा कि हमारा प्रयास हमेशा ग्राहकों पर लागत बढ़ोतरी का बोझ कम से कम रखने का रहा है। हमारी आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन दल इस बात पर गौर कर रहे हैं कि जिंस की वजह से बढ़ी लागत को हम कितनी हद तक खुद वहन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक सीमा के बाद अगर हम लागत बढ़ोतरी को समायोजित नहीं कर पाए, तो हमें इसका बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ेगा। संभावित कीमत बढ़ोतरी के लिए कोई समय-सीमा बताए बिना बनर्जी ने कहा कि कंपनी ने जनवरी में उन ग्राहकों के लिए ‘प्राइस प्रोटेक्शन स्कीम’ (कीमत सुरक्षाा योजना) शुरू की है, जिनकी बुकिंग के बावजूद आपूर्ति नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 सुधारों से मोटर वाहन उद्योग को जो बढ़ावा मिला है। वह केंद्रीय बजट 2026-27 में बुनियादी ढांचे में पूंजीगत व्यय बढ़ाने की घोषणा “मोटर वाहन उद्योग के लिए काफी सहायक साबित होगी।

    जनवरी की बिक्री पर बनर्जी ने कहा कि कंपनी ने अब तक की सबसे अधिक मासिक कुल बिक्री 2,36,963 इकाई दर्ज की है। उन्होंने कहा कि हमें 2.78 लाख से अधिक बुकिंग मिली, जो सालाना आधार पर 25 फीसदी की वृद्धि है। हमें रोजाना करीब 9 से 10 हजार बुकिंग मिल रही है। उन्होंने बताया कि जनवरी में कंपनी का निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते हुए 51,020 इकाई रहा। बनर्जी ने कहा कि कंपनी की नई एसयूवी ‘विक्टोरिस’ ने पांच महीने में 50,000 इकाई की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है।

    उत्पादन संबंधी बाधाओं पर उन्होंने कहा कि नई क्षमताएं उपलब्ध होने तक कंपनी को कुछ और महीनों तक इससे निपटना होगा। हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी इंडिया का दूसरा संयंत्र अप्रैल 2026 तक परिचालन में आने वाला है। इसके बाद गुजरात स्थित मौजूदा संयंत्र में चौथी उत्पादन ‘लाइन’ शुरू की जाएगी, जिससे सालाना कुल 5 लाख इकाई की अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। घरेलू बाजार में ‘ई-विटारा’ के पेश होने को लेकर उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक एसयूवी इस महीने बाजार में उतरेगी।

    यात्री वाहन उद्योग के परिदृश्य पर पूछे गए सवाल पर बनर्जी ने कहा कि मोटर वाहन उद्योग फिर से छह से सात प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) पर लौट सकता है। हालांकि, मौजूदा समय में जिंस कीमतें काफी तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए इंतजार करना होगा, तभी बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा।

    कंपनी ने पिछले साल सितंबर में जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद एस-प्रेसो की कीमत में 1,29,600 रुपये तक, ऑल्टो के-10 में 1,07,600 रुपये तक, सेलेरियो में 94,100 रुपये और वैगन-आर में 79,600 रुपये तक की कटौती की थी।

  • ITC शेयर का भविष्य: 300 रुपये के स्तर पर आया भाव, तेजी या मंदी?

    ITC शेयर का भविष्य: 300 रुपये के स्तर पर आया भाव, तेजी या मंदी?


    नई दिल्ली। देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनी आईटीसी के शेयरों में जनवरी महीने में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली और यह 20 फीसदी तक टूट गया। 1 फरवरी से सिगरेट और तंबाकू पर लागू हुए नए टैक्स के चलते शेयरों में कमजोरी आई और 2 फरवरी को यह ₹302 के स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय बन गया कि अब ITC के शेयरों में और गिरावट आएगी या तेजी का दौर शुरू होगा।

    ब्रोकरेज और एक्सपर्ट का नजरिया
    घरेलू ब्रोकरेज फर्म ICICI Direct ने ITC के शेयरों पर एक साल के नजरिये से ₹350 का टारगेट प्राइस दिया है और ₹285 के स्टॉप लॉस के साथ खरीदारी की राय दी है। फर्म का कहना है कि बजट में ऐसा कोई एलान नहीं हुआ जो आईटीसी के बिजनेस को प्रभावित करे। सिगरेट और तंबाकू पर 55% टैक्स की घोषणा बजट से पहले की जा चुकी थी और अब इसका असर बाजार में पहले ही समाहित हो चुका है।

    इंडिपेंडेंट मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बलिगा ने माना कि ITC के शेयरों ने निचला स्तर बना लिया है और अब तेजी की संभावना है। उनका कहना है कि लंबे समय में शेयर ₹400+ तक जा सकता है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निकट अवधि में शेयर ₹325 तक जा सकता है और ₹306 रुपये पर मजबूत सपोर्ट नजर आता है।

    ITC शेयरों के लिए अहम स्तर
    टेक्निकल विश्लेषक जिगर एस पटेल के अनुसार ITC के शेयरों में निकट भविष्य में ₹325 तक तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं निचला स्तर यानी सपोर्ट ₹306 रुपये है। इस स्तर से नीचे गिरावट जोखिम भरा हो सकता है और निवेशकों को स्टॉप लॉस का ध्यान रखना चाहिए। ICICI Direct का मानना है कि 1 साल के नजरिये से ₹350 टारगेट तक पहुंचना संभव है और अंबरीश बलिगा का दीर्घकालिक टारगेट ₹400+ है।

    निवेशकों के लिए संकेत
    विशेषज्ञों के अनुसार ITC ने हाल ही में बॉटम बना लिया है। कम अवधि के निवेशक सपोर्ट और रेसिस्टेंस के स्तर पर निगरानी रखकर कदम उठा सकते हैं। लंबे समय के निवेशक बजट और टेक्स प्रावधानों के स्थिर होने की वजह से शेयर में मजबूती देख सकते हैं। बाजार में मंदी का डर कम हुआ है और तकनीकी संकेत तेजी की संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं। ITC का बिजनेस मॉडल एफएमसीजी सेक्टर में स्थिर है और टैक्स पहले ही शेयर मूल्य में समाहित हो चुका है। निवेशकों को चाहिए कि स्टॉप लॉस और टारगेट प्राइस के हिसाब से पोर्टफोलियो मैनेजमेंट करें और भावुक होकर फैसले न लें।

  • शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, सेंसेक्स 943 अंकों की तेजी के साथ बंद

    शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, सेंसेक्स 943 अंकों की तेजी के साथ बंद


    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार के कारोबारी सत्र में जबरदस्त तेजी दिखाई और दिन के अंत में मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 943.52 अंक या 1.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,666.46 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 262.95 अंक या 1.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,088.40 पर पहुंच गया।

    बाजार में इस तेजी का नेतृत्व इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऑटो सेक्टर के शेयरों ने किया। सेक्टोरल फ्रंट पर निफ्टी इन्फ्रा 2.26 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 2.13 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 2.04 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 2.04 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 1.88 प्रतिशत और निफ्टी कमोडिटीज 1.87 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुए।हालांकि आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर में हल्की कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी आईटी 0.47 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

    लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 546.80 अंक या 0.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 57,667.60 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 105.20 अंक या 0.64 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,523.35 के स्तर पर पहुंच गया।सेंसेक्स के 30 शेयरों में पावर ग्रिड, अदाणी पोर्ट्स, बीईएल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एलएंडटी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति सुजुकी प्रमुख गेनर्स रहे। वहीं एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, टीसीएस, ट्रेंट, टाइटन और कोटक महिंद्रा बैंक नुकसान में बंद हुए।

    एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे के अनुसार, हालिया गिरावट के बाद निफ्टी में मजबूत उछाल देखने को मिला है, हालांकि व्यापक ट्रेंड अभी भी कमजोर बना हुआ है। उनका कहना है कि इंडेक्स अभी भी 200 डीएमए से नीचे है और किसी भी तेजी का इस्तेमाल लीवरेज पोजीशन घटाने और शॉर्ट पोजीशन बनाने में करना चाहिए। निफ्टी के लिए 25,200 का स्तर रुकावट और 24,900 का स्तर सपोर्ट माना जा रहा है।

    गौरतलब है कि मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच बाजार की शुरुआत कमजोर रही थी। सेंसेक्स 167 अंक की गिरावट के साथ खुला था और निफ्टी भी लाल निशान में था, लेकिन कुछ ही मिनटों में बाजार ने वापसी करते हुए हरे निशान में कारोबार शुरू कर दिया।

  • Gold-Silver Crash: चांदी फिर क्रैश… झटके में ₹16000 सस्ती, सोना भी 4000 रुपये फिसला

    Gold-Silver Crash: चांदी फिर क्रैश… झटके में ₹16000 सस्ती, सोना भी 4000 रुपये फिसला

    नई दिल्ली :सोना-चांदी की कीमतें क्रैश होने का सिलसिला जारी है. बजट के दिन भर-भराकर टूटने के बाद सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में वायदा कारोबार की शुरुआत के साथ ही दोनों कीमती धातुएं और सस्ती हो गईं. एक ओर जहां 1 Kg Silver Price झटके में करीब 16,000 रुपये गिर गया, तो वहीं दूसरी ओर 10 Gram 24 Karat Gold का वायदा भाव एमसीएक्स पर 4000 रुपये से ज्यादा कम हो गया.
    इतना रह गया 1 किलो चांदी का भाव
    चांदी की कीमतें बीते सप्ताह के गुरुवार को इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये के पार निकलने के बाद से ही लगातार क्रैश हो रही हैं. रविवार को Budget 2026 वाले दिन करीब 9 फीसदी से ज्यादा टूटने के बाद सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को जब MCX पर कमोडिटी ट्रेडिंग की शुरुआत हुई, तो चांदी खुलते ही और भी सस्ती हो गई. बीते कारोबारी दिन सिल्वर प्राइस तगड़ी गिरावट और फिर रिकवरी के बाद अंत में 2,65,652 रुपये पर क्लोज हुआ था और सोमवार को जैसे ही कारोबार ओपन हुआ, तो ये गिरकर 2,55,652 रुपये प्रति किलो पर आ गया और फिर इसके कुछ ही मिनटों बाद ये 2,49,713 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया. इसका मतलब है कि चांदी वायदा 15,943 रुपये और सस्ती हो गई.

    अपने हाई से अब इतनी सस्ती Silver
    चांदी में जिस रफ्तार से बीते कुछ दिनों में तेजी देखने को मिली थी, उससे तेज रफ्तार इसके फिसलने की है. बता दें कि पिछले गुरुवार को एमसीएक्स पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी के वायदा भाव ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते 4,20,048 रुपये के नया लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था, लेकिन इस स्तर से अब तक Silver Price 1,70,335 रुपये कम हो चुका है.

    सोने का भी चांदी जैसा हाल

    Silver Price Crash होने से साथ ही सोना भी धड़ाम नजर आ रहा है. बजट वाले दिन ये भी 13,000 रुपये तक टूट गया था, हालांकि फिर थोड़ी रिकवरी भी देखने को मिली थी. रविवार को ये 1,47,753 रुपये के लेवल पर क्लोज हुआ था और सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कारोबार की शुरुआत होते ही ये फिसलकर 1,43,321 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. यानी 10 Gram 24 Karat Gold Rate 4432 रुपये तक सस्ता हो गया.

    हाई से अब कितना सस्ता Gold
    सोने की कीमत ने भी चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए बीते गुरुवार को अपना नया हाई लेवल छुआ था और तूफानी तेजी के साथ 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर पहुंच गई थी. इस स्तर पर पहुंचने के बाद Gold Rate बिखरता हुआ चला गया और अब तक ये 49,775 रुपये सस्ता मिल रहा है.

  • साल 2026-27 के बजट में बांग्लादेश को आधी मदद, भूटान को बड़ी राशि, चाबहार परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं

    साल 2026-27 के बजट में बांग्लादेश को आधी मदद, भूटान को बड़ी राशि, चाबहार परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं


    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत की विदेश सहायता नीति में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। बांग्लादेश के लिए आवंटित राशि इस बार आधी कर दी गई है। जबकि भूटान को पिछले वर्ष से अधिक मदद दी जाएगी। वहीं, ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए इस बार कोई फंड नहीं रखा गया।

    बांग्लादेश और पड़ोसी देशों को मदद

    इस वित्तीय वर्ष में बांग्लादेश को 60 करोड़ रुपये सहायता के रूप में आवंटित किए गए हैं, जबकि 2025-26 में यह राशि 120 करोड़ रुपये थी। संशोधित अनुमान के अनुसार पिछली बार यह राशि 34.48 करोड़ रुपये रह गई थी। भूटान को सबसे अधिक मदद के रूप में 2,288 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। नेपाल को 800 करोड़ रुपये, जबकि मालदीव और मॉरीशस को 550-550 करोड़ रुपये की सहायता मिल रही है।

    चाबहार परियोजना के लिए कोई फंड नहीं

    चाबहार बंदरगाह परियोजना, जिसमें भारत पिछले वर्षों से 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष निवेश करता आया है, इस बार बजट में शामिल नहीं है। यह बंदरगाह अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ व्यापारिक संपर्क के लिए अहम माना जाता है और ओमान की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण इस बार चाबहार को कोई आवंटन नहीं दिया गया।अमेरिका द्वारा पिछले वर्ष सितंबर में ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के तहत भारत को चाबहार परियोजना पर छह महीने की छूट दी गई थी, जो 26 अप्रैल को समाप्त होने वाली है।

    विदेश मंत्रालय का बजट
    विदेश मंत्रालय के लिए 2026-27 के बजट में कुल 22,118 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जो चालू वित्त वर्ष के 21,742 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान और 20,516 करोड़ रुपये के मूल अनुमान से अधिक है। विदेश साझेदारी विकास मद में कुल 6,997 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जिसमें करीब 4,548 करोड़ रुपये निकटवर्ती पड़ोसी देशों के लिए निर्धारित हैं। इस राशि का उपयोग पनबिजली संयंत्र, बिजली पारेषण लाइनों, आवास, सड़क और पुल जैसी बड़ी परियोजनाओं से लेकर छोटे पैमाने पर सामुदायिक विकास कार्यों तक किया जाएगा। लातिन अमेरिकी देशों के लिए कुल सहायता 120 करोड़ रुपये तय की गई है।