Category: Entertainment

  • धर्मेंद्र के भाई वीरेंद्र सिंह की मौत का वो अनसुलझा रहस्य..

    धर्मेंद्र के भाई वीरेंद्र सिंह की मौत का वो अनसुलझा रहस्य..


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के ‘ही-मैन’ कहे जाने वाले धर्मेंद्र के परिवार का फिल्म जगत में गहरा प्रभाव रहा है, लेकिन उनके एक भाई की कहानी जितनी गौरवशाली थी, उसका अंत उतना ही दर्दनाक रहा। धर्मेंद्र के चचेरे भाई वीरेंद्र सिंह देओल, जिन्हें इंडस्ट्री में सुभाष ढडवाल के नाम से भी जाना जाता था, 80 के दशक में पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सुपरस्टार थे। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उस दौर में पंजाबी सिनेमा का मतलब ही वीरेंद्र सिंह हुआ करता था। वीरेंद्र और धर्मेंद्र साथ ही पले-बढ़े थे और जहां एक ओर धर्मेंद्र मुंबई में अपनी धाक जमा रहे थे, वहीं वीरेंद्र ने पंजाब में अपनी एक ऐसी पहचान बना ली थी जिसे आज भी लोग याद करते हैं।

    वीरेंद्र सिंह ने साल 1975 में अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने ‘तेरी मेरी एक जिन्दड़ी’ जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाई और देखते ही देखते ‘बंटवारा’, ‘लम्भरदारनी’ और ‘बलबीरो भाभी’ जैसी एक के बाद एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। वे केवल एक शानदार अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक कुशल निर्देशक और निर्माता भी थे। अपने 12 साल के छोटे से करियर में उन्होंने लगभग 25 फिल्में बनाईं और खास बात यह थी कि उनकी लगभग हर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। पंजाबी सिनेमा के साथ-साथ उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी हाथ आजमाया और वहां भी उन्हें सफलता मिली।

    उनकी सफलता और बढ़ते कदम तब थम गए जब दिसंबर 1988 में लुधियाना के पास एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उनकी सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस समय वे अपनी नई फिल्म ‘जट्ट ते जमीन’ के एक सीन की शूटिंग कर रहे थे। महज 40 साल की उम्र में वीरेंद्र सिंह की इस आकस्मिक मौत ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उनकी हत्या का कातिल आज तक नहीं पकड़ा गया। सालों बीत जाने के बाद भी यह मामला एक अनसुलझी गुत्थी बना हुआ है।

    उनकी मौत के पीछे की वजहों को लेकर आज भी कई तरह की चर्चाएं होती हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता ही उनकी दुश्मन बन गई और ईर्ष्या के चलते उन्हें रास्ते से हटा दिया गया। वहीं, कुछ लोग इसे उस दौर के उग्रवाद से जोड़कर देखते हैं। वजह जो भी रही हो, लेकिन उस एक दिन ने भारतीय सिनेमा से एक ऐसा सितारा छीन लिया, जो अगर आज जीवित होता तो शायद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े दिग्गजों को टक्कर दे रहा होता। वीरेंद्र सिंह की कमी को आज भी उनके प्रशंसकों और परिवार द्वारा महसूस किया जाता है, और उनकी फिल्में उनके महान कलाकार होने की गवाही देती हैं।

  • सिनेमा अब आपके घर: एक्शन, रोमांस और खौफनाक हॉरर का जबरदस्त कॉकटेल, आज रिलीज हुई इन बड़ी फिल्मों

    सिनेमा अब आपके घर: एक्शन, रोमांस और खौफनाक हॉरर का जबरदस्त कॉकटेल, आज रिलीज हुई इन बड़ी फिल्मों


    नई दिल्ली। सिनेप्रेमियों के लिए यह शुक्रवार किसी उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि आज विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सात नई और प्रभावशाली फिल्में व सीरीज रिलीज हो गई हैं। अगर आप इस वीकेंड घर पर रहकर बेहतरीन कहानियों का आनंद लेना चाहते हैं, तो आपके पास एक्शन, इमोशनल ड्रामा और सस्पेंस के कई शानदार विकल्प मौजूद हैं।

    इस सप्ताह की सबसे बड़ी चर्चा एक लोकप्रिय जासूसी थ्रिलर सीरीज के तीसरे सीजन को लेकर है, जिसमें मुख्य नायक एक बार फिर देश के होने वाले प्रधानमंत्री की सुरक्षा और अपनी अगवा बेटी को बचाने की दोहरी चुनौती का सामना करता नजर आ रहा है। तेज रफ्तार कहानी और जबरदस्त एक्शन इसे इस हफ्ते की सबसे अनिवार्य वॉच लिस्ट में शामिल करता है।

    हॉलीवुड फिल्मों के शौकीनों के लिए आज का दिन बेहद खास है। सर्वाइवल थ्रिलर ‘एपेक्स’ में एक महिला रॉक क्लाइंबर और एक शिकारी के बीच की खौफनाक जंग दिखाई गई है, जो दर्शकों की धड़कनें तेज करने के लिए काफी है। वहीं, 1950 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित एक अन्य फिल्म पिंग-पोंग के एक माहिर खिलाड़ी के जुनून और उसके वैश्विक चैंपियन बनने के सपने की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है।

    विज्ञान और विनाश की कहानियों में रुचि रखने वालों के लिए ‘ग्रीनलैंड 2: माइग्रेशन’ एक बेहतरीन विकल्प है, जो तबाही के पांच साल बाद एक सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकले परिवार के संघर्ष की दास्तां बयां करती है।

    सिनेमा के वैश्विक फलक से एक दक्षिण कोरियाई हॉरर सीरीज भी आज रिलीज हुई है, जिसमें एक रहस्यमयी मोबाइल ऐप और उसके जरिए पूरी होने वाली इच्छाओं के साथ जुड़ी मौत का खौफनाक खेल दिखाया गया है। क्षेत्रीय सिनेमा की बात करें तो ‘हैप्पी राज’ और ‘बैंड मेलम’ जैसी फिल्में रिश्तों की गहराई और पुराने प्यार की यादों को नए अंदाज में पेश कर रही हैं।

    जहाँ ‘हैप्पी राज’ पिता-पुत्र के जटिल रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, वहीं ‘बैंड मेलम’ बचपन के उन दो दोस्तों की कहानी है जो वक्त के साथ अलग हो गए लेकिन उनकी मंजिलें उन्हें फिर से आमने-सामने ले आईं। कुल मिलाकर, यह हफ्ता हर तरह के दर्शकों के लिए मनोरंजन का पिटारा लेकर आया है, जो आपके वीकेंड को यादगार बनाने के लिए तैयार है।

  • भारतीय सिनेमा के ये बड़े नाम नियम से करते हैं हनुमान चालीसा का पाठ, देखें पूरी लिस्ट..

    भारतीय सिनेमा के ये बड़े नाम नियम से करते हैं हनुमान चालीसा का पाठ, देखें पूरी लिस्ट..


    नई दिल्ली।भारतीय संस्कृति में हनुमान चालीसा की महिमा अपरंपार है और इसका प्रभाव केवल आम जनता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मनोरंजन और खेल जगत की बड़ी हस्तियां भी इसकी शक्ति की कायल हैं। हाल के दिनों में एक मशहूर क्रिकेटर का वीडियो खूब चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि वे अपनी सबसे महंगी कार में सफर करते समय भी हनुमान चालीसा सुनना पसंद करते हैं। इंटरनेट पर हनुमान चालीसा के विभिन्न संस्करणों को मिलने वाले अरबों व्यूज इस बात का प्रमाण हैं कि यह स्तुति लोगों के दिलों में कितनी गहराई तक बसी है। ताज्जुब की बात यह है कि केवल हिंदू कलाकार ही नहीं, बल्कि कई मुस्लिम सेलिब्रिटीज भी हनुमान चालीसा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा मानते हैं और इसे सुनने से मिलने वाली मानसिक शांति का जिक्र कर चुके हैं।

    अभिनय की दुनिया के दिग्गज अक्षय कुमार ने अपनी पसंद का खुलासा करते हुए बताया कि वे वर्कआउट के दौरान और सामान्य समय में भी हनुमान चालीसा और भजनों को सुनना पसंद करते हैं। उनके अनुसार, यह उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। वहीं, मशहूर गायक सोनू निगम का हनुमानजी के प्रति अटूट विश्वास किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने एक पुराने वाकये को याद करते हुए साझा किया था कि एक बड़े हादसे में वे बाल-बाल बचे थे, जिसका पूरा श्रेय वे संकटमोचन की कृपा को देते हैं। वे अपने हर बड़े मंच पर जाने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करते हैं। अपनी फिटनेस के लिए मशहूर शिल्पा शेट्टी भी साझा कर चुकी हैं कि ऊर्जा के स्तर को बढ़ाए रखने के लिए हनुमान चालीसा का श्रवण उनके लिए सबसे अच्छा विकल्प है।

    युवा पीढ़ी के लोकप्रिय अभिनेता विकी कौशल ने भी बताया है कि सुबह जल्दी शूटिंग पर जाते समय वे अपनी गाड़ी में हनुमान चालीसा चलाकर ही दिन की शुरुआत करते हैं। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन न केवल इसे सुनते हैं, बल्कि एक विशेष सामूहिक गायन में उन्होंने इस पावन स्तुति को अपनी आवाज भी दी है। खेल जगत के उभरते सितारे सूर्यकुमार यादव भी स्नान के पश्चात नियम से इसका श्रवण करते हैं। इस सूची में सबसे प्रभावशाली नाम उन मुस्लिम कलाकारों के हैं, जिन्होंने धर्म की दीवारों से ऊपर उठकर इस स्तुति को अपनाया है। इनमें दानिश अख्तर का नाम शामिल है, जिन्होंने एक पौराणिक भूमिका निभाने के दौरान हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू किया था और अब यह उनकी आदत में शुमार है। वहीं मशहूर अभिनेत्री नरगिस फाखरी ने भी स्पष्ट किया है कि जब उन्हें मानसिक तनाव या घबराहट महसूस होती है, तो वे शांति पाने के लिए अक्सर हनुमान चालीसा सुनती हैं।

    इन सितारों की आस्था यह सिद्ध करती है कि भक्ति और श्रद्धा की कोई जाति या सीमा नहीं होती। जब बात मन की शांति और संकट से उबरने की आती है, तो हनुमान चालीसा एक ऐसा सार्वभौमिक माध्यम बन जाता है जिससे हर कोई जुड़ाव महसूस करता है। चकाचौंध से भरी इस इंडस्ट्री में ये कलाकार अपनी जड़ों और आध्यात्मिकता को इस स्तुति के माध्यम से जीवित रखे हुए हैं। संकटमोचन की यह चालीसा आज के तनावपूर्ण दौर में इन सेलिब्रिटीज के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है, जो न केवल उन्हें आत्मिक शक्ति प्रदान करती है बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने का साहस भी देती है।

  • Yami Gautam ने किरदार के लिए पढ़ी कुरान, डायरेक्टर ने डेढ़ साल किया इस्लामिक लॉ का अध्ययन

    Yami Gautam ने किरदार के लिए पढ़ी कुरान, डायरेक्टर ने डेढ़ साल किया इस्लामिक लॉ का अध्ययन


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री Yami Gautam अपने दमदार और कंटेंट-ड्रिवन रोल्स के लिए जानी जाती हैं, और फिल्म Haq में उनके किरदार की तैयारी इसका बड़ा उदाहरण है। इस फिल्म में उन्होंने शाजिया बानो नाम की एक मुस्लिम महिला का किरदार निभाया, जो तीन तलाक जैसी सामाजिक समस्या से जूझती है। इस रोल को जीवंत बनाने के लिए यामी ने सिर्फ अभिनय नहीं किया, बल्कि किरदार की गहराई को समझने के लिए उन्होंने Quran तक पढ़ डाली।

    डायरेक्टर का खुलासा: इस्लामिक लॉ समझने में लगा डेढ़ साल

    फिल्म के डायरेक्टर Suparn Verma ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए पूरी टीम ने गंभीर रिसर्च की थी। उन्होंने कहा कि करीब डेढ़ साल तक इस्लामिक कानून और उससे जुड़े पहलुओं को समझने में समय लगाया गया, ताकि फिल्म में दिखाई गई कहानी तथ्यात्मक और संवेदनशील दोनों रहे। उनका मानना था कि अक्सर लोग अधूरी या गलत जानकारी के आधार पर राय बना लेते हैं, इसलिए इस फिल्म में सटीकता बेहद जरूरी थी।

    मेथड एक्टिंग से खुद को ढाला, किरदार में डूबीं यामी

    यामी ने खुद भी स्वीकार किया था कि इस फिल्म के लिए उन्होंने मेथड एक्टिंग का सहारा लिया। उन्होंने अपने किरदार को सिर्फ निभाया नहीं, बल्कि उसे जिया। शाजिया बानो के दर्द, संघर्ष और भावनाओं को समझने के लिए उन्होंने लंबा समय दिया। यही वजह रही कि फिल्म में उनका अभिनय दर्शकों के दिल को छू गया।

    फिल्म को रिलीज के बाद दर्शकों से पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला। यामी ने सोशल मीडिया पर भी लिखा था कि “वर्ड ऑफ माउथ की ताकत सबसे बड़ी होती है”, और दर्शकों का प्यार ही किसी भी कलाकार के लिए असली सफलता है।

    बॉक्स ऑफिस पर भी दिखा असर, OTT पर भी उपलब्ध

    Haq को Junglee Pictures ने प्रोड्यूस किया था और फिल्म ने करीब 30 करोड़ रुपए का कारोबार किया। आज भी यह फिल्म OTT प्लेटफॉर्म Netflix पर देखी जा सकती है, जहां इसे नई ऑडियंस भी सराह रही है।

    ग्लैमरस इमेज से हटकर मजबूत किरदारों की ओर बढ़ रहीं यामी

    पिछले कुछ समय से यामी गौतम ने अपने करियर में अलग तरह के रोल्स चुनने शुरू किए हैं। Article 370 में उनके अभिनय को भी काफी सराहना मिली थी। इस फिल्म को उनके पति Aditya Dhar ने प्रोड्यूस किया था।

    अपकमिंग प्रोजेक्ट और पर्सनल लाइफ भी चर्चा में

    अब यामी जल्द ही Aanand L Rai की फिल्म “नई नवेली” में नजर आने वाली हैं, जो एक हॉरर-कॉमेडी बताई जा रही है। यह उनके करियर की पहली हॉरर फिल्म होगी, जिसे लेकर फैंस काफी उत्साहित हैं। पर्सनल लाइफ की बात करें तो यामी और आदित्य साल 2024 में माता-पिता बने थे। दोनों अपने बच्चे को लाइमलाइट से दूर रखते हैं और फैमिली टाइम को प्राथमिकता देते हैं।

  • Rishi Kapoor का मजेदार किस्सा: लड़की के कपड़ों में पहुंचे जेंट्स वॉशरूम, फिर हुआ ये दिलचस्प वाकया

    Rishi Kapoor का मजेदार किस्सा: लड़की के कपड़ों में पहुंचे जेंट्स वॉशरूम, फिर हुआ ये दिलचस्प वाकया


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता Rishi Kapoor ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन फिल्म Rafoo Chakkar से जुड़ा एक किस्सा आज भी लोगों को हैरान कर देता है। इस फिल्म में उन्हें कहानी के अनुसार लड़की का गेटअप लेना पड़ा था, और इसी दौरान उनके साथ एक ऐसा मजेदार वाकया हुआ जिसे सुनकर कोई भी मुस्कुरा उठे।

    फीमेल आउटफिट में मजबूरी में जाना पड़ा जेंट्स वॉशरूम

    दरअसल, फिल्म Rafoo Chakkar की शूटिंग के दौरान ऋषि कपूर पूरी तरह लड़की के लुक में थे। इसी बीच उन्हें वॉशरूम जाने की जरूरत पड़ी। अब समस्या यह थी कि वे महिला शौचालय में जा नहीं सकते थे, इसलिए मजबूरी में उन्हें जेंट्स वॉशरूम जाना पड़ा। लेकिन जैसे ही वे अंदर पहुंचे, वहां मौजूद लोगों ने उन्हें असली लड़की समझ लिया। हालात ऐसे हो गए कि वॉशरूम में मौजूद लोग खुद शर्म से असहज हो गए और समझ नहीं पाए कि आखिर क्या हो रहा है।

    विदेशी लोग ढूंढते-ढूंढते पहुंच गए सेट तक

    इस मजेदार घटना का जिक्र खुद Rishi Kapoor ने अपनी किताब में किया था। उन्होंने बताया कि वॉशरूम में मौजूद कुछ विदेशी लोग तो उन्हें “लड़की” समझकर बाहर तक ढूंढने निकल पड़े। जब वे लोग सेट तक पहुंचे, तब जाकर उन्हें सच्चाई का पता चला कि जिसे वे ढूंढ रहे थे, वह कोई और नहीं बल्कि फिल्म के स्टार ऋषि कपूर ही हैं। यह सुनकर सभी हैरान रह गए।

    चाइल्ड आर्टिस्ट से सुपरस्टार बनने तक का सफर

    ऋषि कपूर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट Mera Naam Joker से की थी, जिसे उनके पिता Raj Kapoor ने निर्देशित किया था। इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिला। इसके बाद उन्होंने बतौर लीड एक्टर Bobby से डेब्यू किया, जिसमें उनके साथ Dimple Kapadia नजर आईं। यह फिल्म सुपरहिट रही और ऋषि कपूर रातों-रात स्टार बन गए।

    रोमांटिक हीरो से लेकर मजबूत किरदारों तक

    अपने करियर में उन्होंने Amar Akbar Anthony, Karz, Chandni, Damini और Kapoor & Sons जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया। फिल्मों के दौरान ही उन्हें अपनी को-स्टार Neetu Kapoor से प्यार हुआ और दोनों ने शादी कर ली।

    कैंसर से जंग और आखिरी सफर

    साल 2018 में ऋषि कपूर को कैंसर होने का पता चला, जिसके बाद उन्होंने New York में इलाज कराया। करीब दो साल तक बीमारी से लड़ने के बाद 2020 में उनका निधन हो गया। उनकी आखिरी फिल्म Sharmaji Namkeen थी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

  • अमिताभ बच्चन की सादगी का राज़: दिव्या दत्ता ने बताया क्यों उन्हें कहते हैं ‘असली महानायक’..

    अमिताभ बच्चन की सादगी का राज़: दिव्या दत्ता ने बताया क्यों उन्हें कहते हैं ‘असली महानायक’..


    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन अपने अभिनय के साथ-साथ अपने अनुशासित जीवन, विनम्र स्वभाव और रिश्तों को निभाने के अनोखे तरीके के लिए भी जाने जाते हैं। लंबे समय से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय अमिताभ बच्चन को लेकर सह-कलाकार अक्सर ऐसे अनुभव साझा करते रहते हैं, जो उनके व्यक्तित्व को और भी प्रेरणादायक बना देते हैं। इसी क्रम में एक्ट्रेस दिव्या दत्ता ने हाल ही में एक इंटरव्यू में उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें साझा की हैं, जिनसे उनके व्यवहार की एक खास झलक सामने आती है।

    दिव्या दत्ता ने बताया कि अमिताभ बच्चन की एक खास आदत उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि बिग बी अपने करीबी लोगों को उनके जन्मदिन पर ठीक रात 12 बजे फोन कर बधाई देना नहीं भूलते। यह केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव होता है, जो सामने वाले व्यक्ति को बेहद खास महसूस कराता है। दिव्या दत्ता ने यह भी साझा किया कि उन्हें भी कई बार उनके जन्मदिन पर आधी रात फोन कर शुभकामनाएं मिल चुकी हैं, जो उनके लिए एक यादगार अनुभव रहा है।

    उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में जब व्यस्तता और भागदौड़ के बीच लोग व्यक्तिगत रिश्तों को समय नहीं दे पाते, ऐसे में अमिताभ बच्चन का यह व्यवहार उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। उनके अनुसार, यह आदत उनकी सादगी और रिश्तों के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाती है, जो उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। यही वजह है कि उनके प्रति लोगों का जुड़ाव केवल एक कलाकार के रूप में नहीं बल्कि एक इंसान के रूप में भी गहरा है।

    दिव्या दत्ता ने एक और दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि अमिताभ बच्चन समय के कितने पाबंद हैं। उन्होंने बताया कि जब उनकी किताब के लॉन्च का आयोजन था, तो अमिताभ बच्चन को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम शाम 7:30 बजे तय था, लेकिन वे उससे पहले ही लगभग 7:20 बजे पहुंच गए थे। उन्होंने सहजता से कहा कि वह पहले आ गए हैं, इसलिए बाकी लोग आराम से अपना समय लें। यह घटना उनके अनुशासन और दूसरों के समय के प्रति सम्मान को स्पष्ट रूप से दिखाती है।

    इसके अलावा दिव्या दत्ता ने फिल्मी सेट से जुड़ा एक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके किरदार में आए बदलाव के कारण उनका व्यवहार भी थोड़ा गंभीर हो गया था, जिसे अमिताभ बच्चन ने तुरंत महसूस कर लिया था। इसके बाद उन्होंने उन्हें फोन कर समझाया कि अभिनय केवल एक भूमिका है और इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेना चाहिए। इस बातचीत के बाद उन्होंने दिव्या दत्ता को सहज महसूस कराने के लिए पूरा सहयोग दिया और उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया।

    इन अनुभवों से यह साफ झलकता है कि अमिताभ बच्चन केवल एक महान अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और समझदार इंसान भी हैं। उनका व्यवहार, अनुशासन और रिश्तों के प्रति सम्मान उन्हें एक अलग पहचान देता है। यही कारण है कि दशकों बाद भी वह न केवल फिल्मों में बल्कि लोगों के दिलों में भी एक खास स्थान बनाए हुए हैं।

  • भूतों की दुनिया की सबसे मशहूर ‘दादी अम्मा’, आज भी पर्दे पर कायम है खौफ..

    भूतों की दुनिया की सबसे मशहूर ‘दादी अम्मा’, आज भी पर्दे पर कायम है खौफ..

    नई दिल्ली । हॉरर सिनेमा की दुनिया में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो अपनी एक अलग पहचान बनाकर इतिहास में अमर हो जाते हैं। ऐसी ही एक दिग्गज अभिनेत्री हैं लिन शाय, जिन्हें हॉरर फिल्मों की ‘गॉडमदर’ और ‘डरावनी फिल्मों की दादी अम्मा’ कहा जाता है। 82 वर्ष की उम्र में भी उनकी मौजूदगी पर्दे पर दर्शकों के लिए रोमांच और डर दोनों का अनुभव कराती है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने अपने लंबे करियर में लगातार हॉरर शैली की फिल्मों में काम किया और इस जॉनर की सबसे भरोसेमंद और प्रतिष्ठित चेहरों में अपनी जगह बनाई।

    लिन शाय का जन्म 12 अक्टूबर 1943 को अमेरिका के डेट्रॉइट शहर में हुआ था। बचपन से ही उनकी रुचि कला और अभिनय में थी, जिसके चलते उन्होंने उच्च शिक्षा में आर्ट हिस्ट्री का अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने थिएटर की दुनिया में कदम रखा, जहां से उनके अभिनय करियर की शुरुआत हुई। थिएटर में अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने फिल्मों की ओर रुख किया और धीरे-धीरे हॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने लगीं।

    उनका शुरुआती फिल्मी करियर छोटे रोल्स से शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही उन्हें हॉरर फिल्मों में काम करने का मौका मिला। इसी शैली ने उन्हें असली पहचान दी। 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने कई हॉरर फिल्मों में काम किया और अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, भावनात्मक अभिव्यक्ति और डरावने दृश्यों में स्वाभाविक अभिनय ने उन्हें दर्शकों के बीच खास बना दिया। धीरे-धीरे उन्हें ‘स्क्रीम क्वीन’ कहा जाने लगा, जो हॉरर फिल्मों में महिला कलाकारों के लिए एक सम्मानजनक उपाधि मानी जाती है।

    उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ उस समय आया जब उन्होंने एक प्रसिद्ध हॉरर फिल्म सीरीज में एलिस रेनियर नाम की पात्र का किरदार निभाया। यह किरदार एक ऐसी महिला का था जो आत्माओं और परालौकिक शक्तियों से जुड़ी घटनाओं को समझती और उनसे लोगों को बचाने की कोशिश करती है। इस भूमिका ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई और यह किरदार उनकी पहचान बन गया। आगे चलकर इस सीरीज की कई फिल्मों में उनके किरदार को और विस्तार दिया गया और दर्शकों ने उन्हें बेहद पसंद किया।

    लिन शाय की खासियत यह रही कि उन्होंने उम्र को कभी अपनी कला के आड़े नहीं आने दिया। 80 से अधिक फिल्मों में काम कर चुकी यह अभिनेत्री आज भी सक्रिय हैं और हॉरर फिल्मों में उनकी मौजूदगी को दर्शक उत्साह के साथ देखते हैं। उनके अभिनय की गहराई और भावनात्मक पकड़ ने उन्हें इस शैली की सबसे मजबूत अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया है। उनकी फिल्मों ने दुनिया भर में करोड़ों दर्शकों को आकर्षित किया और बॉक्स ऑफिस पर भी बड़ी सफलता हासिल की।

    निजी जीवन में लिन शाय ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उन्होंने दो शादियां कीं और एक बेटे की मां हैं। जीवन में कई व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी अपने करियर से समझौता नहीं किया। उन्होंने हमेशा अपने काम को प्राथमिकता दी और अभिनय को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत माना। समय के साथ उन्होंने अपने निजी जीवन को काफी निजी रखा और सार्वजनिक रूप से कम ही चर्चा में रहीं।

    आज 82 साल की उम्र में भी लिन शाय हॉरर सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित और सक्रिय अभिनेत्रियों में से एक हैं। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि अगर जुनून और समर्पण हो तो उम्र केवल एक संख्या रह जाती है। उन्होंने हॉरर फिल्मों की दुनिया में जो पहचान बनाई है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

  • सुकेश चंद्रशेख का जैकलीन को भावुक पत्र,कहा-प्यार और जंग में सब जायज है.कानूनी प्रक्रिया के बीच बढ़ी हलचल

    सुकेश चंद्रशेख का जैकलीन को भावुक पत्र,कहा-प्यार और जंग में सब जायज है.कानूनी प्रक्रिया के बीच बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली । 200 करोड़ रुपये से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर नया घटनाक्रम सामने आया है, जहां जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर ने अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को एक और पत्र लिखा है। यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब मामला अदालत में विचाराधीन है और विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इस नए पत्र ने एक बार फिर इस हाई-प्रोफाइल केस को चर्चा में ला दिया है और कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ सार्वजनिक स्तर पर भी इस पर ध्यान बढ़ गया है।

    अपने पत्र में सुकेश चंद्रशेखर ने भावनात्मक और व्यक्तिगत अंदाज में जैकलीन फर्नांडिस को संबोधित किया है। उसने पत्र की शुरुआत एक खास संबोधन से की और जैकलीन को मेरीबताते हुए अपने भावनात्मक जुड़ाव का उल्लेख किया। पत्र में उसने लिखा कि वह उनसे बेहद प्यार करता है और हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा। उसने एक बार फिर अपने शब्दों में यह दोहराया कि उसके अनुसार प्यार और जंग में सब जायज हैऔर अपने रिश्ते को लेकर कई भावनात्मक दावे किए। पत्र में उसने यह भी कहा कि वह लगातार जैकलीन को याद कर रहा है और उनके बीच का संबंध उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

    सुकेश ने अपने पत्र में खुद को भावनात्मक रूप से व्यक्त करते हुए कई निजी दावे किए और यह दिखाने की कोशिश की कि वह अब भी इस रिश्ते को लेकर गंभीर भावनाएं रखता है। उसने पत्र के अंत में खुद को एक विशेष नाम से संबोधित किया और यह भी लिखा कि वह हमेशा उनके साथ रहेगा। यह पहली बार नहीं है जब उसने इस तरह का पत्र लिखा हो, इससे पहले भी वह कई बार इसी तरह के भावनात्मक पत्र भेज चुका है, जिनमें उसने अपने दावों और भावनाओं को दोहराया है।

    इस पूरे मामले के बीच अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस की ओर से अदालत में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई है, जिसमें उन्होंने सरकारी गवाह बनने की अनुमति मांगी है। इस याचिका के दाखिल होने के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है और अदालत में इस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों ने अपना पक्ष रखने के लिए समय की मांग की है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है।

    सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और प्रत्येक पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। इस याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख भी तय की गई है, जिसके बाद आगे की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।

    यह मामला लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है और समय-समय पर इससे जुड़े नए घटनाक्रम सामने आते रहे हैं। सुकेश चंद्रशेखर द्वारा लिखे गए पत्र पहले भी सुर्खियों में रहे हैं, जिनमें उसने बार-बार व्यक्तिगत भावनाओं और दावों को दोहराया है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का निर्णय केवल अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही तय किया जाएगा। इस नए पत्र ने एक बार फिर पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जहां एक ओर अदालत में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे पत्रों के कारण मामला लगातार सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है।

  • हिंदी सिनेमा की पहली प्लेबैक आवाज शमशाद बेगम: एक अनोखा और प्रेरणादायक सफर…

    हिंदी सिनेमा की पहली प्लेबैक आवाज शमशाद बेगम: एक अनोखा और प्रेरणादायक सफर…


    नई दिल्ली ।हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर में जब पार्श्व गायन यानी प्लेबैक सिंगिंग अपने विकास के चरण में थी, उस समय एक ऐसी आवाज उभरी जिसने भारतीय फिल्म संगीत को नई पहचान और दिशा दी। यह आवाज थी शमशाद बेगम की, जिन्हें भारत की पहली प्रमुख प्लेबैक सिंगर के रूप में जाना जाता है। उनका जीवन संघर्ष, परंपरा और प्रतिभा का ऐसा संगम था, जिसने उन्हें भारतीय संगीत इतिहास में एक अमिट स्थान दिलाया। उनकी गायकी ने न केवल उस दौर के श्रोताओं को प्रभावित किया बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी।

    14 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में जन्मी शमशाद बेगम एक पारंपरिक परिवार से थीं, जहां सार्वजनिक रूप से गायन को लेकर सख्त नियम थे। उनके पिता नहीं चाहते थे कि वह मंच पर या सार्वजनिक रूप से गाएं, लेकिन उनकी असाधारण प्रतिभा को देखते हुए परिवार के अन्य सदस्यों और परिचितों ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अंततः एक विशेष शर्त के साथ उन्हें गायन की अनुमति मिली, जिसमें यह तय किया गया कि वह कभी अपनी तस्वीर सार्वजनिक नहीं कराएंगी। शमशाद बेगम ने इस शर्त को स्वीकार किया और यहीं से उनके संगीत सफर की शुरुआत हुई।

    बचपन से ही उनकी आवाज में एक अलग तरह की मिठास और आकर्षण था, जिसने उन्हें बहुत कम उम्र में ही पहचान दिला दी। स्कूल के दिनों में उन्हें हेड सिंगर बनाया गया और यहीं से उनके गायन कौशल को और निखरने का अवसर मिला। धीरे-धीरे वह पारिवारिक आयोजनों और छोटे कार्यक्रमों में गाने लगीं, जहां उनकी आवाज की चर्चा दूर-दूर तक फैलने लगी। उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें रेडियो पर गाने का अवसर मिला, जिसने उनके करियर को एक नई दिशा दी।

    उनकी किस्मत तब बदली जब एक प्रसिद्ध संगीतकार ने उनकी आवाज को पहचाना और उन्हें फिल्मी दुनिया में पहला बड़ा अवसर दिया। वर्ष 1941 में फिल्म ‘खजांची’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत की और यहीं से उनका सफर इतिहास बन गया। उनकी आवाज ने तुरंत ही दर्शकों और श्रोताओं को प्रभावित किया और वह उस समय की सबसे लोकप्रिय गायिकाओं में शामिल हो गईं। उनकी गायकी में एक खास चंचलता, सादगी और ऊर्जा थी, जो हर उम्र के लोगों को आकर्षित करती थी।

    इसके बाद उन्होंने कई प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ काम किया और हिंदी फिल्म संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी आवाज को उस दौर के महान संगीतकारों ने बेहद खास माना और इसका उपयोग कई यादगार गीतों में किया गया। उनकी गायकी में एक ऐसा जादू था, जो हर गीत को जीवंत बना देता था। “कभी आर कभी पार”, “लेके पहला पहला प्यार” और “सैयां दिल में आना रे” जैसे गीत आज भी लोगों के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं जितने उस समय थे।

    उस दौर में जब लता मंगेशकर, आशा भोसले और गीता दत्त जैसी महान गायिकाएं भी सक्रिय थीं, तब शमशाद बेगम ने अपनी अलग शैली और अनोखी आवाज के दम पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी गायकी किसी भी प्रतिस्पर्धा से परे थी और उन्होंने अपने अंदाज से संगीत जगत में एक अलग स्थान स्थापित किया। उनके योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक से सम्मानित किया गया, जो उनके लंबे और सफल करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

  • बुलंदशहर से शुरू हुआ सफर और करोड़ों दिलों पर किया राज; महज 30 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गईं मशहूर अदाकारा।

    बुलंदशहर से शुरू हुआ सफर और करोड़ों दिलों पर किया राज; महज 30 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गईं मशहूर अदाकारा।


    नई दिल्ली ।क्षेत्रीय मनोरंजन जगत से एक बेहद दुखद और विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है। अपनी बेहतरीन अदाकारी और नृत्य कौशल से करोड़ों दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाली मशहूर अभिनेत्री दिव्यांका सिरोही अब हमारे बीच नहीं रहीं। महज 30 वर्ष की अल्पायु में हृदय गति रुकने के कारण उनका आकस्मिक निधन हो गया है। इस खबर ने न केवल उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि उन तमाम प्रशंसकों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है जो उन्हें भविष्य के एक बड़े सितारे के रूप में देख रहे थे। अभिनेत्री के निधन की जानकारी मिलते ही सोशल मीडिया पर शोक संवेदनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा है।

    दिव्यांका की मृत्यु के बाद उनका एक पुराना संदेश तेजी से चर्चा में आ गया है, जिसे पढ़कर हर किसी का दिल भर आ रहा है। कुछ समय पहले साझा किए गए इस संदेश में दिव्यांका ने ईश्वर के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की थी। मरून रंग की पगड़ी पहने हुए अपनी एक तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा था कि महादेव उन्हें अपने साथ ले चलें। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि उनकी यह आध्यात्मिक पुकार इतनी जल्दी और इस रूप में सच हो जाएगी। आज उनके चाहने वाले उसी संदेश को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। प्रशंसकों का कहना है कि एक प्रतिभावान कलाकार का इस तरह जाना पूरी इंडस्ट्री के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

    उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में जन्मी दिव्यांका का जीवन सपनों को हकीकत में बदलने की एक कहानी रहा है। उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा में एमबीए की डिग्री भी हासिल की थी। शिक्षित और जागरूक होने के बावजूद उनका रुझान हमेशा से अभिनय की ओर रहा। बचपन से ही कला के प्रति समर्पित दिव्यांका ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए की थी, जहाँ उनकी प्रतिभा को दर्शकों का भरपूर समर्थन मिला। इसी लोकप्रियता ने उनके लिए संगीत और अभिनय की दुनिया के दरवाजे खोल दिए, जिसके बाद उन्होंने दर्जनों प्रसिद्ध प्रोजेक्ट्स में अपनी छाप छोड़ी।

    दिव्यांका ने अपने करियर के दौरान 50 से अधिक संगीत वीडियो में काम किया और कई स्थापित कलाकारों के साथ अपनी कला का प्रदर्शन किया। उनकी कड़ी मेहनत का ही परिणाम था कि डिजिटल जगत में उनके चाहने वालों की संख्या करोड़ों में पहुँच गई थी। जानकारी के अनुसार, अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता के लिए ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इतनी कम उम्र में इस तरह के हादसे ने स्वास्थ्य के प्रति भी लोगों को चिंता में डाल दिया है। एक सक्रिय और ऊर्जावान कलाकार का इस तरह चले जाना सभी को खटक रहा है।

    दिव्यांका सिरोही की अंतिम विदाई की प्रक्रिया उनके निवास स्थान के पास संपन्न होगी, जहाँ कला जगत के कई लोग और उनके प्रशंसक उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुँचेंगे। एक हंसमुख और सकारात्मक व्यक्तित्व के रूप में पहचानी जाने वाली दिव्यांका की कमी हमेशा महसूस की जाएगी। उन्होंने हमेशा अपनी कला के माध्यम से लोगों का मनोरंजन करने का लक्ष्य रखा था। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी अदाकारी और उनकी यादें उनके करोड़ों चाहने वालों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी। क्षेत्रीय सिनेमा ने निश्चित रूप से एक बहुत ही होनहार और समर्पित कलाकार को खो दिया है।