Category: Entertainment

  • Cannes 2026 में तारा सुतारिया का विंटेज ग्लैमर लुक बना चर्चा का केंद्र.

    Cannes 2026 में तारा सुतारिया का विंटेज ग्लैमर लुक बना चर्चा का केंद्र.

    नई दिल्ली । कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 इस बार भी अपने ग्लैमर और फैशन मोमेंट्स को लेकर चर्चा में है, और इस पूरे इवेंट के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री Tara Sutaria का नया लुक लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बन गया है। फ्रेंच रिवेरा में आयोजित इस प्रतिष्ठित आयोजन में तारा सुतारिया ने अपने विंटेज ग्लैमर अंदाज से एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वह फैशन के मामले में हमेशा सुर्खियां बटोरने में कामयाब रहती हैं।

    इस खास मौके पर तारा सुतारिया ने आइवरी कलर का कॉर्सेट गाउन पहना, जो साटन फैब्रिक से तैयार किया गया था। इस गाउन की डिजाइनिंग बेहद क्लासिक और रॉयल स्टाइल में की गई थी, जिसमें ऑफ-शोल्डर नेकलाइन और सॉफ्ट ड्रेपिंग ने उनके पूरे लुक को एक एलिगेंट टच दिया। गाउन का फिटेड कॉर्सेट डिजाइन उनके स्टाइल को और अधिक ग्रेसफुल बना रहा था, जबकि इसका फ्लोइंग स्ट्रक्चर विंटेज फैशन की झलक दिखा रहा था।

    उनके इस पूरे लुक में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली चीज उनकी जूलरी रही। तारा ने पन्ना और हीरे से सजी भारी जूलरी का चयन किया, जिसमें एक स्टेटमेंट नेकलेस और मैचिंग ईयररिंग्स शामिल थे। यह जूलरी उनके आइवरी गाउन के साथ एक खूबसूरत कंट्रास्ट बना रही थी और उनके पूरे लुक को एक शाही अंदाज दे रही थी।

    तारा का यह पूरा लुक एक मशहूर स्टाइलिस्ट की देखरेख में तैयार किया गया था, जिसमें हर डिटेल को बेहद बारीकी से डिजाइन किया गया। मेकअप को भी बेहद सिंपल और क्लासी रखा गया, जिसमें सॉफ्ट स्मोकी आईज, न्यूड लिप्स और स्लीक बन हेयरस्टाइल शामिल थी। इस मिनिमल मेकअप ने उनके ओवरऑल लुक को और ज्यादा एलिगेंट और बैलेंस्ड बना दिया।

    इस खास इवेंट में तारा सुतारिया को सिनेमा में उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया, जिससे यह शाम उनके लिए और भी खास बन गई। इस सम्मान ने न सिर्फ उनके करियर को एक नई पहचान दी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय कलाकारों की उपस्थिति को भी मजबूत किया।

    इवेंट के दौरान उनकी मौजूदगी और उनका यह लुक लगातार कैमरों और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचता रहा। जैसे ही उनकी तस्वीरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर वह तेजी से वायरल हो गईं और लोगों ने उनके इस रॉयल और विंटेज स्टाइल की जमकर तारीफ की। कई लोगों ने इसे कान्स के सबसे बेहतरीन फैशन मोमेंट्स में से एक बताया।

  • पैपराजी की बदसलूकी और सितारों की चुप्पी: आयुष्मान खुराना, सारा और रकुल पर क्यों भड़क गए फैंस?

    पैपराजी की बदसलूकी और सितारों की चुप्पी: आयुष्मान खुराना, सारा और रकुल पर क्यों भड़क गए फैंस?

    नई दिल्ली ।  बॉलीवुड के गलियारों में अक्सर सितारों और पैपराजी के बीच नोकझोंक की खबरें आती रहती हैं, लेकिन कभी-कभी ये घटनाएं सोशल मीडिया पर बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं। हाल ही में फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ की स्टार कास्ट-आयुष्मान खुराना, सारा अली खान, वामिका गब्बी और रकुल प्रीत सिंह-एक वीडियो की वजह से लोगों के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, फिल्म के प्रमोशन के दौरान सितारों के साथ मैशबल इंडिया के मशहूर होस्ट सिद्धार्थ आलमबायन भी मौजूद थे। सभी मिलकर वड़ा पाव का लुत्फ उठा रहे थे, तभी वहां मौजूद कुछ फोटोग्राफर्स सिद्धार्थ पर भद्दे कमेंट्स करने लगे क्योंकि वे स्टार्स की फोटो के बीच में आ रहे थे।

    वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि पैपराजी सितारों को कैप्चर करने के चक्कर में सिद्धार्थ को वहां से हटने के लिए चिल्ला रहे थे। हद तो तब हो गई जब एक फोटोग्राफर ने उन्हें ‘वड़ा पाव’ कहकर संबोधित किया और वहां से हटने को कहा। शुरुआत में सिद्धार्थ ने इन कमेंट्स को नजरअंदाज किया, लेकिन जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो उन्होंने कड़े लहजे में जवाब देते हुए कहा कि ‘प्यार से बोलो भाई, ऐ-ऐ मत करो।’ हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वहां मौजूद बड़े सितारे चुप्पी साधे रहे, जिसे देख सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा।

    इंटरनेट पर लोग इस बात को लेकर सबसे ज्यादा नाराज हैं कि आयुष्मान खुराना, रकुल प्रीत सिंह और सारा अली खान जैसे स्थापित कलाकारों ने उस वक्त सिद्धार्थ का बचाव क्यों नहीं किया। कमेंट सेक्शन में लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब आपके सामने किसी सह-कर्मी या होस्ट का अपमान हो रहा हो, तो एक स्टार के तौर पर आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप उसे रोकें। कई यूजर्स ने लिखा कि ये सितारे स्क्रीन पर तो बड़ी-बड़ी नैतिकता की बातें करते हैं, लेकिन असल जिंदगी में अपने साथ खड़े शख्स के लिए आवाज तक नहीं उठा पाए। इस ‘साइलेंट रिएक्शन’ की वजह से कलाकारों को ‘क्लास’ लगाई जा रही है और उनकी संवेदनशीलता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

    यह विवाद ऐसे समय में आया है जब आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ 15 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। मुदस्सर अजीज के निर्देशन में बनी यह फिल्म साल 2019 की सुपरहिट फिल्म ‘पति पत्नी और वो’ का सीक्वल है। फिल्म को लेकर पहले से ही यह चर्चा थी कि क्या यह बेवफाई जैसे विषयों को बढ़ावा दे रही है, जिस पर आयुष्मान ने स्पष्ट किया था कि उनका किरदार ‘प्रजापति पांडे’ एक पूरी तरह से समर्पित और पत्नी से प्यार करने वाला व्यक्ति है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया था कि वे कभी किसी गलत संदेश वाली फिल्म का हिस्सा नहीं बनेंगे।

    बहरहाल, फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन और क्रिटिक्स की प्रतिक्रिया के बीच इस प्रमोशनल विवाद ने फिल्म की टीम के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। जहाँ फिल्म की रिलीज का इंतजार काफी समय से हो रहा था, वहीं इस घटना ने सितारों की छवि पर थोड़ा दाग जरूर लगाया है। अब देखना यह होगा कि क्या आयुष्मान या फिल्म की बाकी टीम इस बढ़ते गुस्से पर कोई सफाई देती है या नहीं। फिलहाल, सोशल मीडिया पर सिद्धार्थ आलमबायन के समर्थन में लोग खड़े नजर आ रहे हैं और पैपराजी के व्यवहार की कड़ी निंदा कर रहे हैं।

  • सिर्फ एक फिल्म नहीं, आतंकवाद के खिलाफ एक आंदोलन थी 'सरफरोश': बजट से चार गुना कमाई और उस दौर का सबसे बड़ा विवाद

    सिर्फ एक फिल्म नहीं, आतंकवाद के खिलाफ एक आंदोलन थी 'सरफरोश': बजट से चार गुना कमाई और उस दौर का सबसे बड़ा विवाद


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1999 एक ऐसा मोड़ था, जब पर्दे पर देशभक्ति को एक नई और यथार्थवादी परिभाषा मिली। उस दौर में जहाँ बॉलीवुड मुख्य रूप से रोमांटिक कहानियों में व्यस्त था, निर्देशक जॉन मैथ्यू माथन एक ऐसी कहानी लेकर आए जिसने न केवल दर्शकों को झकझोर दिया, बल्कि सेंसर बोर्ड के पसीने छुड़ा दिए। फिल्म ‘सरफरोश’ को आज एक क्लासिक का दर्जा प्राप्त है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी रिलीज का रास्ता कांटों भरा था। यह पहली बार था जब किसी मुख्यधारा की भारतीय फिल्म ने सीधे तौर पर पड़ोसी देश पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई का नाम लेकर उन्हें भारत में हो रही आतंकवादी घटनाओं का जिम्मेदार ठहराया था। फिल्म की यही निर्भीकता इसके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गई थी।

    उस समय भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक रिश्ते एक नाजुक मोड़ पर थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शांति की पहल करते हुए दिल्ली से लाहौर के बीच बस सेवा शुरू कर रहे थे। एक तरफ जहाँ सरकार दोस्ती का हाथ बढ़ा रही थी, वहीं दूसरी तरफ ‘सरफरोश’ जैसी फिल्म सेंसर बोर्ड के पास पहुंची जिसमें आतंकवाद को सीधे तौर पर पाकिस्तान से जोड़कर दिखाया गया था। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएसई) के सदस्यों को डर था कि फिल्म के संवाद और चित्रण दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत की प्रक्रिया को बिगाड़ सकते हैं। बोर्ड ने फिल्म को सर्टिफिकेट देने से साफ इनकार कर दिया और शर्त रखी कि फिल्म से ‘पाकिस्तान’ और ‘आईएसआई’ जैसे शब्दों को पूरी तरह से हटा दिया जाए।

    निर्देशक जॉन मैथ्यू माथन अपनी फिल्म की सच्चाई और रिसर्च को लेकर इतने आश्वस्त थे कि उन्होंने बोर्ड की शर्तों के आगे झुकने से मना कर दिया। जॉन का तर्क था कि फिल्म में जो दिखाया गया है, वह वास्तविकता पर आधारित है और इसे बदलने का मतलब फिल्म की आत्मा को मारना होगा। जब विवाद काफी बढ़ गया और सेंसर बोर्ड अपनी जिद पर अड़ा रहा, तो जॉन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए बोर्ड को चेतावनी दी कि वे इस मामले को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। निर्देशक के इस सख्त तेवर और कानूनी लड़ाई की धमकी के आगे आखिरकार सेंसर बोर्ड को झुकना पड़ा। फिल्म को बिना किसी बड़े बदलाव के पास किया गया और 30 अप्रैल 1999 को यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई।

    आमिर खान के करियर के लिए ‘सरफरोश’ एक गेम-चेंजर साबित हुई। एसीपी अजय सिंह राठौड़ के किरदार में उन्होंने एक ऐसे पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई, जो अपने निजी दुख को देश की सेवा के जज्बे में बदल देता है। फिल्म की पटकथा इतनी मजबूत थी कि दर्शक शुरू से अंत तक बंधे रहे। लगभग 8 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया और भारत में करीब 30.37 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया। फिल्म की सफलता केवल व्यावसायिक नहीं थी, बल्कि इसे साल 2000 में ‘बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग व्होलसम एंटरटेनमेंट’ की श्रेणी में प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया।

    फिल्म की सफलता में इसके संगीत और अन्य कलाकारों का भी बड़ा योगदान था। सोनाली बेंद्रे के साथ आमिर की केमिस्ट्री और जगजीत सिंह की आवाज में सजी गजल ‘होश वालों को खबर क्या’ आज भी लोगों की जुबान पर है। वहीं, नसीरुद्दीन शाह ने पाकिस्तानी गजल गायक और जासूस ‘गुलफाम हसन’ के किरदार में जो जान फूंकी, उसने फिल्म को एक अलग ऊंचाई पर पहुंचा दिया। आज के दौर में जब ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों में आतंकवाद की जड़ें दिखाई जा रही हैं, तब ‘सरफरोश’ की याद आना स्वाभाविक है, क्योंकि यह वह पहली फिल्म थी जिसने कूटनीति की परवाह किए बिना सच बोलने का साहस दिखाया था। 8.1 की आईएमडीबी रेटिंग वाली यह फिल्म आज भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली देशभक्ति फिल्मों में से एक है।

  • 4000 करोड़ की 'रामायण' और अयोध्या में प्रीमियम प्रॉपर्टी,भगवान राम का किरदार निभाने से पहले रणबीर ने शहर में किया बड़ा निवेश

    4000 करोड़ की 'रामायण' और अयोध्या में प्रीमियम प्रॉपर्टी,भगवान राम का किरदार निभाने से पहले रणबीर ने शहर में किया बड़ा निवेश


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के गलियारों में इन दिनों सुपरस्टार रणबीर कपूर का नाम न केवल उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ के लिए, बल्कि अयोध्या में किए गए एक बड़े रियल एस्टेट निवेश के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही भव्य फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाने जा रहे रणबीर कपूर ने असल जिंदगी में भी अयोध्या से अपना नाता जोड़ लिया है। हालिया जानकारी के मुताबिक, अभिनेता ने अयोध्या के सरयू नदी के तट पर स्थित एक बेहद प्रीमियम प्रोजेक्ट ‘द सरयू’ में जमीन खरीदी है। ‘द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ के इस प्रोजेक्ट में रणबीर ने लगभग 2,134 वर्ग फीट का प्लॉट अपने नाम किया है, जिसकी कीमत तकरीबन ₹3.31 करोड़ बताई जा रही है।

    अयोध्या में इस निवेश को लेकर रणबीर कपूर ने बेहद भावुक और आध्यात्मिक संदेश साझा किया है। उनका मानना है कि अयोध्या ने उन्हें खुद चुना है और यह निवेश उनके लिए केवल एक वित्तीय सौदा नहीं, बल्कि उनके परिवार की विरासत का एक हिस्सा है। सरयू नदी के किनारे स्थित यह 75 एकड़ का विशाल प्रोजेक्ट आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक मूल्यों का एक अनूठा संगम है। यहाँ न केवल एक भव्य क्लबहाउस और 35 से ज्यादा लाइफस्टाइल सुविधाएं होंगी, बल्कि पांच एकड़ में फैला एक शुद्ध शाकाहारी लग्जरी होटल भी बनाया जाएगा, जिसका संचालन प्रसिद्ध होटल श्रृंखला ‘द लीला’ द्वारा किया जाएगा। रणबीर के अनुसार, डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से इस डील को पूरा करना उनके लिए बेहद पारदर्शी और सुखद अनुभव रहा।

    रणबीर कपूर की इस डील के साथ ही उनकी आगामी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी दर्शकों का उत्साह चरम पर है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की अब तक की सबसे महंगी फिल्म मानी जा रही है, जिसका कुल बजट लगभग 4000 करोड़ रुपये बताया गया है। इस महाकाव्य को दो हिस्सों में रिलीज किया जाएगा, जिसका पहला भाग इसी साल दिवाली के शुभ अवसर पर सिनेमाघरों में दस्तक देगा। फिल्म में रणबीर कपूर के साथ दक्षिण भारतीय अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी, जबकि सुपरस्टार यश रावण की भूमिका को जीवंत करेंगे। फिल्म की स्टार कास्ट काफी प्रभावशाली है, जिसमें हनुमान के रूप में सनी देओल और लक्ष्मण के रूप में रवि दुबे जैसे कलाकार शामिल हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि रणबीर कपूर ने शुरुआत में इस चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाने से मना कर दिया था। अभिनेता ने एक सार्वजनिक मंच पर स्वीकार किया कि वे इस महान चरित्र के साथ न्याय करने को लेकर संशय में थे। हालांकि, उनके जीवन में बेटी राहा के आगमन और उसी समय इस किरदार का प्रस्ताव दोबारा आने को उन्होंने एक सुखद संयोग माना और अंततः इसे स्वीकार किया। रणबीर का मानना है कि ‘राम’ का किरदार निभाना उनकी अभिनय यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। अयोध्या में जमीन खरीदने के उनके फैसले को फिल्म की रिलीज से पहले एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है, जो उनकी इस भूमिका के प्रति गहरी निष्ठा को दर्शाता है।

    अयोध्या इस समय वैश्विक स्तर पर निवेश और पर्यटन के केंद्र के रूप में उभर रहा है। रणबीर कपूर जैसे बड़े सितारों का यहाँ जमीन खरीदना शहर की बढ़ती ब्रांड वैल्यू और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे ‘रामायण’ की रिलीज की तारीख नजदीक आ रही है, प्रशंसकों की नजरें रणबीर के अभिनय और उनकी इस नई प्रॉपर्टी पर टिकी हुई हैं। कुल मिलाकर, रणबीर कपूर के लिए यह साल न केवल पेशेवर रूप से मील का पत्थर साबित होने वाला है, बल्कि अयोध्या में अपनी जड़ें जमाने के कारण यह उनके व्यक्तिगत जीवन के लिए भी अत्यंत विशेष बन गया है। अब दुनिया को इंतजार है तो बस पर्दे पर उस भव्यता को देखने का, जिसे नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी की टीम ने करोड़ों के बजट के साथ तैयार किया है।

  • किसी की मुस्कुराहटों पे निसार होने वाले 'शंकरदास' के 'शैलेंद्र' बनने और बेमन से मैकेनिक की नौकरी करने का पूरा सच

    किसी की मुस्कुराहटों पे निसार होने वाले 'शंकरदास' के 'शैलेंद्र' बनने और बेमन से मैकेनिक की नौकरी करने का पूरा सच


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सादगी और गहराई से भरे गीतों का जिक्र होगा, गीतकार शैलेंद्र का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिया जाएगा। ‘किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार’ जैसे कालजयी गीत लिखने वाले इस कलाकार का जीवन किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। पाकिस्तान के रावलपिंडी में जन्मे शंकरदास केसरीलाल, जिन्हें दुनिया ने बाद में शैलेंद्र के नाम से पूजा, के पूर्वज मूलतः बिहार के आरा जिले से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता ब्रिटिश मिलिट्री अस्पताल में ठेकेदार थे, लेकिन पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों के चलते उन्हें रावलपिंडी छोड़कर मथुरा बसना पड़ा। शैलेंद्र बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मथुरा के ही एक सरकारी स्कूल से पूरी की। उनकी मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंटरमीडिएट की परीक्षा में उन्होंने पूरे उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया था।

    पढ़ाई में अव्वल होने के बावजूद घर की आर्थिक तंगी ने उन्हें अपनी पसंद का रास्ता चुनने की इजाजत नहीं दी। परिवार की जिम्मेदारी कंधे पर आई तो उन्होंने रेलवे की परीक्षा पास की और मुंबई में बतौर मैकेनिक यानी अप्रेंटिस की नौकरी शुरू कर दी। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जिस शख्स ने शब्दों से संवेदनाओं की दुनिया बुनी, उसके पास मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा था और वेल्डिंग जैसे कठोर काम में उनकी विशेषज्ञता थी। मुंबई के रेलवे यार्ड में पसीने और लोहे की गूँज के बीच शैलेंद्र बेमन से अपना काम करते थे, क्योंकि उनका मन तो कविता और साहित्य की दुनिया में बसता था। इस नौकरी के दौरान ही उनके भीतर का कवि जाग उठा और वे खाली समय में कागज के टुकड़ों पर अपनी भावनाओं को उकेरने लगे।

    रेलवे की इस नौकरी के दौरान शैलेंद्र का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। आर्थिक तंगी का आलम यह था कि शादी होने के बावजूद वे अपनी पत्नी को मुंबई नहीं ला पा रहे थे। विरह का यही दर्द और अपनों से दूर रहने की तड़प उनके बाद के गीतों में साफ झलकती है। कहा जाता है कि जब वे अपनी कविताओं के जरिए भारतीय जन नाट्य संघ यानी इप्टा से जुड़े, तब उनकी मुलाकात राज कपूर से हुई। राज कपूर उनकी प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने शैलेंद्र को फिल्मों के लिए लिखने का प्रस्ताव दिया, लेकिन शुरुआत में स्वाभिमानी शैलेंद्र ने इसे ठुकरा दिया था। हालांकि, बाद में अपनी घरेलू जरूरतों और आर्थिक तंगहाली के कारण उन्होंने फिल्मी दुनिया का रुख किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

    शैलेंद्र और राज कपूर की जोड़ी ने भारतीय सिनेमा को ‘आवारा हूं’, ‘मेरा जूता है जापानी’ और ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’ जैसे न भूलने वाले गाने दिए। शैलेंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे जटिल से जटिल दार्शनिक बातों को बहुत ही सरल शब्दों में पिरो देते थे। उन्होंने जो कुछ भी अपनी निजी जिंदगी में झेला, चाहे वह मैकेनिक की नौकरी की मजबूरी हो या गरीबी का दंश, उसे उन्होंने अपनी रचनाओं में ईमानदारी से उतारा। उनके गीतों में आम आदमी का दर्द और उसकी छोटी-छोटी खुशियां साफ दिखाई देती थीं। यही वजह है कि उनके लिखे गीत आज भी उतने ही प्रासंगिक और ताजे महसूस होते हैं जितने दशकों पहले थे।

    मात्र 43 साल की छोटी सी उम्र में शैलेंद्र इस दुनिया को अलविदा कह गए। यह एक अजीब संयोग था कि जिस 14 दिसंबर को उनके सबसे अजीज दोस्त राज कपूर का जन्मदिन होता था, उसी दिन हिंदी सिनेमा के इस चमकते सितारे का निधन हुआ। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ, उसे आज तक कोई भर नहीं पाया है। एक मैकेनिक के रूप में करियर शुरू करने वाले इस इंसान ने साबित कर दिया कि अगर दिल में जज्बा हो और कलम में सच्चाई, तो लोहे के कारखानों में काम करते हुए भी दुनिया को प्रेम और भाईचारे का संगीत सुनाया जा सकता है। आज भी जब कोई ‘सजन रे झूठ मत बोलो’ या ‘सब कुछ सीखा हमने’ सुनता है, तो उसे उस महान आत्मा की याद आती है जिसने अपनी पूरी जिंदगी शब्दों की साधना में लगा दी।

  • ना बड़े स्टार, ना भारी बजट, सिर्फ दमदार कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास

    ना बड़े स्टार, ना भारी बजट, सिर्फ दमदार कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास



    नई दिल्ली। बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में अक्सर माना जाता है कि बड़ी फिल्में सिर्फ बड़े स्टार्स और भारी बजट से चलती हैं, लेकिन कई ऐसी फिल्में भी रही हैं जिन्होंने इस धारणा को पूरी तरह तोड़ दिया है। इन फिल्मों ने साबित किया कि अगर कहानी मजबूत हो तो कम बजट में भी रिकॉर्ड तोड़े जा सकते हैं।

    कंतारा
    ऋषभ शेट्टी द्वारा निर्देशित और अभिनीत फिल्म कंतारा (2022) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। लगभग 16 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में करीब 411 करोड़ रुपये की कमाई की। फिल्म की कहानी, लोक संस्कृति और दमदार प्रस्तुति ने इसे ब्लॉकबस्टर बना दिया।

    777 चार्ली
    यह फिल्म एक इंसान और एक कुत्ते की भावनात्मक कहानी पर आधारित थी। धीरे-धीरे यह फिल्म दर्शकों के दिलों में उतर गई और इसे बेहद सराहा गया। कम बजट में बनी इस फिल्म ने भी शानदार प्रदर्शन किया।

    द केरल स्टोरी
    अदा शर्मा स्टारर द केरल स्टोरी ने 15 करोड़ के बजट में करीब 303 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। विवादों के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई।

    12वीं फेल
    विक्रांत मैसी की यह फिल्म सच्ची कहानी पर आधारित थी। लगभग 20 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 70 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों का दिल जीत लिया।

    सीता रामम
    दुलकर सलमान और मृणाल ठाकुर स्टारर यह रोमांटिक ड्रामा फिल्म भी कम बजट में बनी लेकिन अपनी कहानी और इमोशन की वजह से दर्शकों को खूब पसंद आई।

    हनुमान
    तेजा सज्जा स्टारर हनुमान (2024) ने भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। लगभग 30 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 220 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और सुपरहीरो जॉनर में बड़ी पहचान बनाई।

    महावतार नरसिम्हा
    यह एनिमेटेड फिल्म भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली एनिमेटेड फिल्मों में शामिल हो गई। लगभग 15 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 300 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया।

    इन सभी फिल्मों ने यह साबित कर दिया है कि आज के समय में दर्शक सिर्फ स्टार पावर नहीं, बल्कि मजबूत कहानी और कंटेंट को ज्यादा महत्व देते हैं। यही वजह है कि कम बजट की ये फिल्में भी बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स को टक्कर देने में सफल रहीं।

  • सैफ अली खान का खुलासा: ‘मैं हूं ना’ के लिए शाहरुख ने चुना था, पर फराह खान ने बदला फैसला

    सैफ अली खान का खुलासा: ‘मैं हूं ना’ के लिए शाहरुख ने चुना था, पर फराह खान ने बदला फैसला


    नई दिल्ली सैफ अली खान ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि शाहरुख खान ने उन्हें फिल्म ‘मैं हूं ना’ में रोल ऑफर किया था, लेकिन बाद में फराह खान के दखल के चलते मामला बदल गया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है।

    बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा एक पुराना लेकिन दिलचस्प किस्सा साझा किया, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। सैफ ने बताया कि सुपरस्टार शाहरुख खान ने उन्हें अपनी सुपरहिट फिल्म ‘मैं हूं ना’ में एक रोल ऑफर किया था, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं और वह मौका हाथ से निकल गया।

    सैफ के अनुसार, शाहरुख खान ने खुद उन्हें फोन कर फिल्म ‘मैं हूं ना’ के एक महत्वपूर्ण किरदार के लिए चुना था। उन्होंने कहा कि उन्हें यह रोल काफी पसंद आया था और वह इसे करने के लिए तैयार भी थे। लेकिन इसी दौरान फिल्म की डायरेक्टर फराह खान ने उनसे संपर्क किया और स्पष्ट रूप से कहा कि यह भूमिका उनके लिए नहीं है।

    सैफ ने बताया कि फराह खान के इस कॉल के बाद स्थिति बदल गई और वह प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बन पाए। हालांकि उन्होंने इसे लेकर किसी तरह की नाराजगी नहीं जताई और पूरे किस्से को हल्के अंदाज में साझा किया। बातचीत के दौरान जब उन्हें एहसास हुआ कि यह बयान सुर्खियां बना सकता है, तो वह मुस्कुराते हुए बोले कि “अब यह बात वायरल हो जाएगी।”

    इंटरव्यू में सैफ ने शाहरुख खान और उनकी प्रोडक्शन कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि शाहरुख एक प्रोड्यूसर के तौर पर अपने डायरेक्टर्स को पूरी आज़ादी देते हैं और सेट पर अनावश्यक दखल नहीं करते।

    इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग यह अंदाजा लगा रहे हैं कि सैफ को फिल्म में कौन-सा रोल ऑफर हुआ था, जबकि कुछ इसे सिर्फ एक पुराना कास्टिंग निर्णय मान रहे हैं।

    गौरतलब है कि सैफ अली खान और शाहरुख खान पहले भी फिल्म ‘कल हो ना हो’ में साथ काम कर चुके हैं और दोनों के बीच अच्छे संबंध माने जाते हैं।

    वहीं, सैफ की नई फिल्म ‘कर्तव्य’ भी चर्चा में है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है और इसे शाहरुख खान की रेड चिलीज एंटरटेनमेंट ने प्रोड्यूस किया है।

  • इंस्टाग्राम पर स्टार पावर: जानिए किन भारतीय एक्टर्स के हैं सबसे ज्यादा फॉलोअर्स

    इंस्टाग्राम पर स्टार पावर: जानिए किन भारतीय एक्टर्स के हैं सबसे ज्यादा फॉलोअर्स


    नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में सेलेब्स और फैंस के बीच दूरी लगभग खत्म हो चुकी है। फिल्मों के अलावा इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने स्टार्स को सीधे अपने दर्शकों से जोड़ दिया है। पहले जहां फैंस अपने पसंदीदा सितारों से पत्रों और मैगजीन इंटरव्यू के जरिए जुड़ते थे, वहीं अब एक क्लिक पर उनकी जिंदगी की हर अपडेट सामने आ जाती है।

    इंस्टाग्राम पर भारत के सेलेब्स की लोकप्रियता का अंदाजा उनकी फॉलोइंग से लगाया जाता है। हाल ही में सामने आई लिस्ट के अनुसार बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर इस रेस में सबसे आगे निकल गई हैं। 93 मिलियन फॉलोअर्स के साथ श्रद्धा कपूर नंबर 1 पोजिशन पर बनी हुई हैं, जबकि वे इंस्टाग्राम पर केवल 790 अकाउंट्स को फॉलो करती हैं।

    दूसरे स्थान पर ग्लोबल आइकन बन चुकीं प्रियंका चोपड़ा हैं, जिनके करीब 92.9 मिलियन फॉलोअर्स हैं। प्रियंका न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि हॉलीवुड में भी अपनी मजबूत पहचान बना चुकी हैं। वे इंस्टाग्राम पर 639 लोगों को फॉलो करती हैं।

    तीसरे स्थान पर आलिया भट्ट हैं, जिनकी फैन फॉलोइंग 85.5 मिलियन तक पहुंच चुकी है। आलिया इन दिनों अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स और नए प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में हैं।

    चौथे नंबर पर दीपिका पादुकोण हैं जिनके 78.8 मिलियन फॉलोअर्स हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी का ऐलान किया है और वे शाहरुख खान के साथ फिल्म ‘किंग’ में नजर आने वाली हैं।

    पांचवें स्थान पर कैटरीना कैफ हैं जिनके 78.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। इसके बाद छठे नंबर पर सलमान खान हैं जिनकी फैन फॉलोइंग 71.7 मिलियन है।

    सातवें स्थान पर उर्वशी रौतेला हैं जिनके 68.3 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जबकि आठवें नंबर पर जैकलीन फर्नांडीस हैं जिनके 68.7 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

    नौवें स्थान पर अनुष्का शर्मा हैं, जो लंबे समय से फिल्मों से दूर होने के बावजूद 67.5 मिलियन फॉलोअर्स के साथ मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।

    दसवें स्थान पर खिलाड़ी कुमार अक्षय कुमार हैं जिनके 65.3 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

    यह लिस्ट साफ दिखाती है कि सोशल मीडिया पर स्टार पावर अब भी उतनी ही मजबूत है और फैंस अपने पसंदीदा सितारों से डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लगातार जुड़े रहना पसंद करते हैं। 

  • Jennifer Winget की स्टाइलिश तस्वीरें हुईं वायरल, फैन्स बोले- ‘गॉर्जियस’

    Jennifer Winget की स्टाइलिश तस्वीरें हुईं वायरल, फैन्स बोले- ‘गॉर्जियस’


    नई दिल्ली। टीवी और OTT की लोकप्रिय एक्ट्रेस Jennifer Winget एक बार फिर अपने शानदार फैशन सेंस और ग्लैमरस अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। अपनी दमदार एक्टिंग और स्टाइलिश पर्सनैलिटी के लिए मशहूर जेनिफर की हालिया तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। वायरल हो रहे इस फोटोशूट में उनका ट्रेडिशनल लुक फैंस को इतना पसंद आ रहा है कि लोग लगातार उनकी तारीफ करते नजर आ रहे हैं।

    जेनिफर विंगेट ने इस नए फोटोशूट में मल्टीकलर लहंगा पहनकर अपने एलीगेंट और रॉयल अंदाज से हर किसी का ध्यान खींच लिया है। आउटफिट में रंगों का खूबसूरत कॉम्बिनेशन उनके पूरे लुक को बेहद आकर्षक बना रहा है। तस्वीरों में उनकी अदाएं, कॉन्फिडेंस और स्टाइल ऐसा नजर आ रहा है कि फैंस उनकी तुलना किसी रॉयल क्वीन से कर रहे हैं।

    अपने इस ट्रेडिशनल लुक को और खास बनाने के लिए जेनिफर ने सिल्वर ज्वेलरी कैरी की है, जिसने उनके आउटफिट को एक क्लासी और रिच टच दिया है। खुले बाल, हल्का ग्लोइंग मेकअप और सॉफ्ट एक्सप्रेशन उनके पूरे लुक में चार चांद लगा रहे हैं। हर तस्वीर में उनकी ग्रेस और एलिगेंस साफ दिखाई दे रही है। यही वजह है कि उनका यह फोटोशूट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    फैंस सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों पर लगातार कमेंट कर रहे हैं। कोई उन्हें “स्टाइल क्वीन” बता रहा है तो कोई उनके लुक को “परफेक्ट ट्रेडिशनल ग्लैम” कह रहा है। कई यूजर्स ने उनकी खूबसूरती और फैशन सेंस की जमकर सराहना की है। जेनिफर का यह अंदाज खासकर उन लोगों को काफी पसंद आ रहा है, जो ट्रेडिशनल फैशन में मॉडर्न टच पसंद करते हैं।

    Jennifer Winget लंबे समय से टीवी इंडस्ट्री की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर की थी और बाद में कई सुपरहिट शोज़ में काम कर अपनी अलग पहचान बनाई। खासतौर पर टीवी शो Beyhadh और Bepannaah में उनकी एक्टिंग को दर्शकों ने खूब पसंद किया।

    जेनिफर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपने फैशन, ट्रैवल और लाइफस्टाइल से जुड़ी तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। यही कारण है कि उनकी हर पोस्ट कुछ ही मिनटों में वायरल हो जाती है। इस बार भी उनका ग्लैमरस फोटोशूट इंटरनेट पर छाया हुआ है और फैंस उनकी नई तस्वीरों को बार-बार देखना पसंद कर रहे हैं।

  • 50 गुना फीस की डिमांड और फिर पलटी बाजी: जब ‘मुगल-ए-आज़म’ के गाने में आया ट्विस्ट

    50 गुना फीस की डिमांड और फिर पलटी बाजी: जब ‘मुगल-ए-आज़म’ के गाने में आया ट्विस्ट


    नई दिल्ली।  भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य और ऐतिहासिक फिल्मों में गिनी जाने वाली Mughal-e-Azam सिर्फ अपनी कहानी और भव्य सेट्स के लिए ही नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी दिलचस्प कहानियों के लिए भी मशहूर है। इस फिल्म के एक खास गाने को लेकर जो घटनाक्रम हुआ, वह आज भी फिल्म इतिहास में एक प्रेरणादायक किस्सा माना जाता है।

    कहा जाता है कि जब फिल्म में तानसेन की तरह एक शास्त्रीय संगीत आधारित गीत को सलीम और अनारकली पर फिल्माया जाना था, तब सवाल उठा कि इस गाने को आखिर गाएगा कौन। संगीत निर्देशक नौशाद और निर्देशक के. आसिफ ने तय किया कि अगर अतीत में तानसेन ने यह परंपरा निभाई थी, तो आज के दौर में उनकी आत्मा को जीवंत करने के लिए सबसे उपयुक्त आवाज उस्ताद Ustad Bade Ghulam Ali Khan की होगी।

    लेकिन जब टीम उस्ताद साहब के पास पहुंची, तो उन्होंने गाने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उन्होंने पहले कभी फिल्मी गाना नहीं गाया और न ही आगे गाने का इरादा है। उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

    इसके बाद भी के. आसिफ हार नहीं माने। उन्होंने लगातार उस्ताद साहब को मनाने की कोशिश की। इस बीच उस्ताद बड़े गुलाम अली खान ने एक तरह से मजाक या परीक्षा लेते हुए ऐसी फीस मांगी, जो उस समय के हिसाब से सामान्य गायक की फीस से लगभग 50 गुना ज्यादा थी—यानी करीब 25 हजार रुपये, जबकि उस दौर में गायक 400-500 रुपये लेते थे।

    उम्मीद के विपरीत, के. आसिफ ने इस मांग को तुरंत स्वीकार कर लिया और कहा कि “आप अनमोल हैं, कीमत की बात ही नहीं है।” यह सुनकर उस्ताद साहब भी हैरान रह गए और धीरे-धीरे सहमत हो गए।

    हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जब रिकॉर्डिंग की बात आई, तो उस्ताद साहब ने शर्त रख दी कि वह गाना तभी गाएंगे जब उन्हें पूरा सीन दिखाया जाएगा, जिस पर यह गीत फिल्माया जाना है। उस समय सीन पूरी तरह तैयार भी नहीं था।

    के. आसिफ ने तुरंत व्यवस्था की और Mughal-e-Azam के सलीम और अनारकली वाले रोमांटिक दृश्य को विशेष रूप से शूट करवाया। दिलीप कुमार और मधुबाला के बीच फिल्माए गए इस दृश्य को एडिट कर तुरंत उस्ताद साहब को दिखाया गया।

    सीन देखने के बाद उस्ताद साहब प्रभावित हुए और उन्होंने गाना रिकॉर्ड करने के लिए हामी भर दी। इतना ही नहीं, उन्होंने इस गाने को तीन बार रिकॉर्ड किया ताकि सबसे बेहतरीन वर्जन चुना जा सके।

    इस पूरी प्रक्रिया ने साबित किया कि Mughal-e-Azam सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उस दौर की कलात्मक पराकाष्ठा थी, जिसमें संगीत, अभिनय और निर्देशन तीनों का अद्भुत संगम देखने को मिला।

    फिल्म के निर्माण में भी भव्यता का कोई मुकाबला नहीं था। देशभर से कारीगर, ज्वेलरी डिजाइनर, टेलर और कलाकार बुलाए गए थे। विशाल युद्ध दृश्यों के लिए हजारों घोड़े, ऊंट और सैनिकों का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी और भव्य परियोजनाओं में से एक बन गई।

    आज भी जब यह किस्सा दोहराया जाता है, तो यह साफ हो जाता है कि जुनून, सम्मान और कला के प्रति समर्पण ही किसी रचना को अमर बनाता है।