Category: Entertainment

  • Akshay Kumar की भारी फीस ने चौंकाया, अजय देवगन से ज्यादा मिलने की खबर

    Akshay Kumar की भारी फीस ने चौंकाया, अजय देवगन से ज्यादा मिलने की खबर


    नई दिल्ली। कॉमेडी और एंटरटेनमेंट से भरपूर गोलमाल फ्रेंचाइजी अब अपने पांचवें पार्ट के साथ लौट रही है। इस बार फिल्म में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, क्योंकि अजय देवगन और पुरानी स्टारकास्ट के साथ अब अक्षय कुमार भी नजर आने वाले हैं। फिल्म की घोषणा के बाद से ही दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है, लेकिन अब सबसे ज्यादा चर्चा अक्षय कुमार की फीस को लेकर हो रही है।

    अक्षय कुमार को मिली इतनी फीस
    रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्षय कुमार ने गोलमाल 5 के लिए लगभग 18 से 22 दिनों की शूटिंग की है। इसके बदले उन्हें करीब 35 से 40 करोड़ रुपये फीस दी गई है। कहा जा रहा है कि यह रकम फिल्म के लीड स्टार Ajay Devgn की फीस से भी ज्यादा है। हालांकि खबरों के मुताबिक अजय देवगन फिल्म से प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल पर जुड़े हुए हैं, इसलिए उनकी कमाई बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर भी निर्भर करेगी।

     फिल्म में दिखेगा अक्षय का नया अवतार
    Akshay Kumar इस फिल्म में एक बिल्कुल अलग लुक में दिखाई देंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह गंजे अवतार में नजर आएंगे और उनका किरदार काफी दमदार और सीरियस होगा। इससे पहले फिल्म हाउसफुल 4 में भी उनका गंजा लुक देखने को मिला था, लेकिन वह कॉमिक अंदाज में था।

     20 साल पुरानी है गोलमाल फ्रेंचाइजी
    गोलमाल फ्रेंचाइजी की शुरुआत साल 2006 में हुई थी। इसके बाद गोलमाल रिटर्न्स, गोलमाल 3 और गोलमाल अगेन ने भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की। निर्देशक Rohit Shetty ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि यह फ्रेंचाइजी उनके करियर का सबसे अहम हिस्सा रही है।

    अक्षय बोले- अजय ही फिल्म के असली हीरो
    अक्षय कुमार ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि फिल्म के मुख्य हीरो अजय देवगन ही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी तरह की असुरक्षा नहीं है और उनके लिए कहानी ज्यादा मायने रखती है।

    अक्षय की आने वाली बड़ी फिल्में
    गोलमाल 5 के अलावा अक्षय कुमार जल्द ही कई बड़ी फिल्मों में नजर आने वाले हैं, जिनमें:
    Welcome to the Jungle
    Hera Pheri 3
    Haiwaan
    जैसी फिल्में शामिल हैं।

  • Cannes 2026 में छाया तारा सुतारिया का ग्लैमरस अंदाज, तस्वीरें हुईं वायरल

    Cannes 2026 में छाया तारा सुतारिया का ग्लैमरस अंदाज, तस्वीरें हुईं वायरल


    नई दिल्ली । Tara Sutaria ने Cannes Film Festival में अपने शानदार डेब्यू से फैंस का दिल जीत लिया है। कान्स 2026 से सामने आई उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जहां फैंस उनके एलिगेंट और बोल्ड लुक की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

    रेड सी फिल्म फाउंडेशन इवेंट में बिखेरा जलवा
    तारा सुतारिया ने कान्स में रेड सी फिल्म फाउंडेशन के ‘Women in Cinema Gala Dinner’ में हिस्सा लिया। इस खास मौके पर उन्हें सिनेमा में योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।

    आइवरी गाउन में दिखीं बेहद खूबसूरत
    अपने कान्स डेब्यू के लिए तारा ने आइवरी शेड का स्टाइलिश गाउन चुना, जिसमें उनका ग्लैमरस अंदाज देखते ही बन रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने विविएन वेस्टवुड स्टाइल कॉर्सेट के साथ यह आउटफिट कैरी किया। स्ट्रक्चर्ड बॉडी फिट डिजाइन ने उनके लुक को बेहद रॉयल टच दिया, जबकि सॉफ्ट ड्रेप्ड नेकलाइन ने ओल्ड हॉलीवुड ग्लैमर की झलक दिखाई। सैटिन स्कर्ट और मैचिंग स्टोल ने पूरे लुक को और भी क्लासी बना दिया।

    डायमंड नेकलेस और स्लीक बन ने बढ़ाई खूबसूरती
    तारा ने अपने इस लुक को डायमंड नेकलेस के साथ कंप्लीट किया। वहीं, स्लीक बन हेयरस्टाइल ने उनके रेड कार्पेट अपीयरेंस को और ज्यादा एलिगेंट बना दिया। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार उनकी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। कई यूजर्स ने उन्हें “Cannes Queen” और “Old Hollywood Beauty” तक कह दिया।

    सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहीं तस्वीरें
    कान्स से सामने आए तारा के फोटोशूट और रेड कार्पेट मोमेंट्स इंटरनेट पर ट्रेंड कर रहे हैं। फैंस उनके फैशन सेंस और कॉन्फिडेंस की खूब तारीफ कर रहे हैं।

  • साहसी सिनेमा की नई पहचान बनी ‘आखिरी सवाल’, तीखे सवालों से झकझोर देने वाली दमदार राजनीतिक ड्रामा फिल्म

    साहसी सिनेमा की नई पहचान बनी ‘आखिरी सवाल’, तीखे सवालों से झकझोर देने वाली दमदार राजनीतिक ड्रामा फिल्म

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा में कभी-कभी कुछ ऐसी फिल्में सामने आती हैं जो केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहतीं, बल्कि समाज, इतिहास और राजनीति पर गहरे सवाल खड़े कर देती हैं। ऐसी ही एक फिल्म है ‘आखिरी सवाल’, जिसे एक साहसी राजनीतिक ड्रामा के रूप में देखा जा रहा है। यह फिल्म अपने तीखे विषयों, बेबाक प्रस्तुति और भावनात्मक गहराई के कारण दर्शकों के बीच चर्चा का केंद्र बन गई है।

    निर्देशक अभिजीत मोहन वरंग और निर्माता निखिल नंदा की यह फिल्म उस श्रेणी में रखी जा रही है, जो सुरक्षित रास्तों से हटकर सिनेमा को एक नई दिशा देने की कोशिश करती है। फिल्म उन विषयों को छूती है, जिन्हें अक्सर संवेदनशील या विवादित मानकर बड़े पर्दे पर सीमित रूप में ही दिखाया जाता है। इसमें ऐतिहासिक घटनाओं, सामाजिक धारणाओं और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े कई गंभीर सवालों को सामने रखा गया है, जो दर्शकों को सहज नहीं रहने देते बल्कि सोचने पर मजबूर करते हैं।

    फिल्म की कहानी उन मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है जिन पर लंबे समय से समाज में बहस होती रही है। इसमें इतिहास की कुछ प्रमुख घटनाओं और उनसे जुड़े विभिन्न दृष्टिकोणों को भी जगह दी गई है। कहानी का उद्देश्य किसी एक निष्कर्ष को थोपना नहीं, बल्कि दर्शकों को उन सवालों से रूबरू कराना है जिनके जवाब अक्सर अधूरे या विवादित रहे हैं। यही वजह है कि फिल्म को एक साहसी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

    अभिनय की बात करें तो संजय दत्त ने इस फिल्म में अपने करियर का एक अलग और गंभीर रूप प्रस्तुत किया है। उनका किरदार संयमित, भावनात्मक और भीतर से टूटे हुए व्यक्ति का है, जो अपने अतीत और सच्चाई के बीच उलझा हुआ नजर आता है। उनकी आंखों और संवादों में एक गहरी गंभीरता दिखाई देती है, जो फिल्म को मजबूती प्रदान करती है।

    इसके साथ ही नमाशी चक्रवर्ती ने भी अपने अभिनय से सभी को प्रभावित किया है। उनकी स्क्रीन उपस्थिति और भावनात्मक अभिव्यक्ति कहानी में एक नई ऊर्जा जोड़ती है। कई दृश्यों में उनका प्रदर्शन दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ता है और यह संकेत देता है कि वह एक उभरते हुए मजबूत कलाकार के रूप में अपनी पहचान बना सकते हैं।

    फिल्म का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसके संवाद और डिबेट वाले दृश्य हैं, जो बेहद तीव्र और वास्तविक महसूस होते हैं। न्यूजरूम और सार्वजनिक बहसों को जिस तरह से फिल्म में प्रस्तुत किया गया है, वह दर्शकों को सीधे कहानी से जोड़ देता है। ये दृश्य केवल स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं लगते, बल्कि वास्तविक समाज में चल रही विचारधाराओं की टकराहट को भी दर्शाते हैं।

    दृश्यात्मक रूप से भी फिल्म मजबूत पकड़ बनाए रखती है। हर फ्रेम में तनाव और उद्देश्य स्पष्ट दिखाई देता है। कहानी भले ही जटिल और बहुस्तरीय विषयों पर आधारित हो, लेकिन इसका नैरेटिव दर्शकों को लगातार बांधे रखता है। फिल्म का सबसे बड़ा गुण यह है कि यह उपदेश देने के बजाय सवाल पूछती है और दर्शकों को अपने निष्कर्ष खुद निकालने के लिए प्रेरित करती है।

    सहायक कलाकारों का प्रदर्शन भी फिल्म को और प्रभावशाली बनाता है, जिससे कहानी की भावनात्मक गहराई और बढ़ जाती है। पूरी फिल्म एक ऐसे संवाद की तरह महसूस होती है, जो समाज को आईना दिखाने का प्रयास करती है।

  • कान्स को अलविदा कहती आलिया भट्ट का रॉयल फाइनल अवतार, तीन दिन के स्टाइल ने जीता दिल

    कान्स को अलविदा कहती आलिया भट्ट का रॉयल फाइनल अवतार, तीन दिन के स्टाइल ने जीता दिल

    नई दिल्ली । कान फिल्म फेस्टिवल 2026 इस बार बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट के ग्लैमरस और एलीगेंट फैशन मोमेंट्स के लिए खास चर्चा में रहा। तीन दिनों तक लगातार अलग-अलग स्टाइल में रेड कार्पेट पर नजर आने के बाद आलिया ने अपने आखिरी दिन एक ऐसा लुक पेश किया जिसने पूरे फेस्टिवल का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनका यह फाइनल अवतार न सिर्फ फैशन की दुनिया में चर्चा का विषय बना, बल्कि सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया।

    फेस्टिवल के अंतिम दिन आलिया भट्ट मैरून रंग के ऑफ-शोल्डर कॉर्सेट गाउन में नजर आईं। यह आउटफिट उनकी पर्सनालिटी को एक रॉयल और ग्रेसफुल टच दे रहा था। इस डिजाइन में भारतीय टेक्सटाइल की झलक के साथ वेस्टर्न विक्टोरियन स्टाइल का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला। इस खास ड्रेस को एक अनुभवी डिजाइन टीम की मदद से तैयार किया गया था, जिसमें हर डिटेल पर बारीकी से काम किया गया था ताकि यह लुक रेड कार्पेट पर अलग पहचान बना सके।

    इस आखिरी दिन आलिया ने अपने स्टाइल में सादगी को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी। उन्होंने भारी मेकअप या ज्यादा एक्सेसरीज की बजाय हल्का और नैचुरल मेकअप चुना। उनके बालों को हाई बन स्टाइल में बांधा गया था, जिससे उनका पूरा लुक और भी एलीगेंट और क्लासी नजर आया। फैशन एक्सपर्ट्स के अनुसार यह लुक उनकी पूरी कान्स जर्नी का सबसे परफेक्ट और बैलेंस्ड अवतार माना जा सकता है, जिसमें ग्लैमर और ग्रेस दोनों का सुंदर संतुलन देखने को मिला।

    कान्स के दौरान आलिया भट्ट ने तीन दिनों में अलग-अलग फैशन स्टेटमेंट पेश किए, जिसने उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। पहले दिन उनका स्टील ब्लू गाउन एक फेयरी टेल जैसी झलक दे रहा था, जिसमें वे किसी ड्रीम वर्ल्ड की कैरेक्टर जैसी नजर आईं। दूसरे दिन रेड ऑफ-शोल्डर ड्रेस में उनका अंदाज और भी बोल्ड और रॉयल दिखाई दिया, जिसने रेड कार्पेट पर अलग ही आकर्षण पैदा किया। तीसरे दिन कोरल शेड आउटफिट में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न स्टाइल का ऐसा मेल दिखाया, जिसने उनकी फैशन वर्सेटिलिटी को और मजबूत किया।

    इन तीन दिनों के दौरान आलिया की कई तस्वीरें सामने आईं, जिनमें उनका ग्लैमरस अवतार तो था ही, लेकिन साथ ही कुछ ऐसे पल भी कैद हुए जिनमें वे काफी रिलैक्स और सामान्य मूड में नजर आईं। ये अनफिल्टर्ड और बैकस्टेज मोमेंट्स फैंस के लिए उतने ही खास रहे जितने उनके रेड कार्पेट लुक्स। इन तस्वीरों ने उनकी पर्सनालिटी का एक और साइड दिखाया, जो आमतौर पर कैमरों के सामने कम ही देखने को मिलता है।

    अपने आखिरी पोस्ट में आलिया भट्ट ने इस पूरी जर्नी को एक यादगार अनुभव बताया। उन्होंने संकेत दिया कि यह इस साल का उनका अंतिम लुक है और उन्होंने इन तीन दिनों को बेहद खास और भावनात्मक बताया। उनकी पोस्ट में फेस्टिवल के लिए आभार और भविष्य में फिर से इस मंच पर लौटने की उम्मीद भी साफ झलक रही थी।

  • धुरंधर 2 OTT रिलीज: थिएटर से लंबा और अनकट वर्जन जल्द आएगा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर, फैंस में बढ़ा क्रेज

    धुरंधर 2 OTT रिलीज: थिएटर से लंबा और अनकट वर्जन जल्द आएगा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर, फैंस में बढ़ा क्रेज

    नई दिल्ली । ‘धुरंधर 2’ ने सिनेमाघरों में जबरदस्त सफलता हासिल करने के बाद अब डिजिटल दुनिया में कदम रखने की तैयारी कर ली है। इस फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्साह बना हुआ है और अब इसकी OTT रिलीज को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। खास बात यह है कि इस बार फिल्म का डिजिटल वर्जन थिएटर में दिखाए गए संस्करण से अलग और ज्यादा विस्तृत होने वाला है, जिसमें कई नए दृश्य और अतिरिक्त कंटेंट शामिल किए जाएंगे।

    थिएटर में रिलीज के दौरान जो फिल्म दर्शकों ने देखी थी, अब उसका एक ज्यादा लंबा और अनकट संस्करण OTT प्लेटफॉर्म पर पेश किया जाएगा। इस डिजिटल वर्जन में कहानी को और विस्तार दिया गया है और कुछ ऐसे दृश्य भी जोड़े गए हैं जिन्हें पहले संस्करण में शामिल नहीं किया गया था। इसके साथ ही फिल्म के कई हिस्सों को ज्यादा गहराई और तीव्रता के साथ दिखाया गया है, जिससे पूरी कहानी और प्रभावशाली महसूस होती है।

    फिल्म की कहानी वही रहेगी, लेकिन उसे दिखाने का तरीका और प्रस्तुति का विस्तार OTT वर्जन में ज्यादा मजबूत दिखाई देगा। इसमें कुछ ऐसे सीक्वेंस भी शामिल किए गए हैं जो किरदारों के इमोशंस और कहानी की पृष्ठभूमि को बेहतर तरीके से समझाने में मदद करते हैं। इस बदलाव से फिल्म का अनुभव दर्शकों के लिए और भी रोमांचक और प्रभावी बन गया है।

    डिजिटल रिलीज को लेकर यह भी बताया जा रहा है कि इसे अलग-अलग बाजारों के हिसाब से अलग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए एक प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर फिल्म स्ट्रीम होगी, जबकि भारतीय दर्शकों के लिए इसे देश में उपलब्ध एक अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जाएगा। इस रणनीति का उद्देश्य फिल्म को ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाना है।

    OTT वर्जन की लंबाई थिएटर रिलीज से थोड़ी अधिक रखी गई है, जिससे दर्शकों को अतिरिक्त कंटेंट देखने का मौका मिलेगा। इसमें कुछ एक्सटेंडेड एक्शन सीन्स और अनसेंसर्ड डायलॉग भी शामिल हैं, जो फिल्म के मूड को और अधिक तीव्र और प्रभावशाली बनाते हैं। इसी वजह से फैंस इस डिजिटल रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

    हालांकि भारत में इसकी रिलीज डेट को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही इसकी तारीख सामने आ जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि ‘धुरंधर 2’ का OTT वर्जन दर्शकों को वही कहानी एक नए और ज्यादा गहरे अनुभव के साथ देखने का मौका देगा।

  • Cannes 2026 में तारा सुतारिया का विंटेज ग्लैमर लुक बना चर्चा का केंद्र.

    Cannes 2026 में तारा सुतारिया का विंटेज ग्लैमर लुक बना चर्चा का केंद्र.

    नई दिल्ली । कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 इस बार भी अपने ग्लैमर और फैशन मोमेंट्स को लेकर चर्चा में है, और इस पूरे इवेंट के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री Tara Sutaria का नया लुक लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बन गया है। फ्रेंच रिवेरा में आयोजित इस प्रतिष्ठित आयोजन में तारा सुतारिया ने अपने विंटेज ग्लैमर अंदाज से एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वह फैशन के मामले में हमेशा सुर्खियां बटोरने में कामयाब रहती हैं।

    इस खास मौके पर तारा सुतारिया ने आइवरी कलर का कॉर्सेट गाउन पहना, जो साटन फैब्रिक से तैयार किया गया था। इस गाउन की डिजाइनिंग बेहद क्लासिक और रॉयल स्टाइल में की गई थी, जिसमें ऑफ-शोल्डर नेकलाइन और सॉफ्ट ड्रेपिंग ने उनके पूरे लुक को एक एलिगेंट टच दिया। गाउन का फिटेड कॉर्सेट डिजाइन उनके स्टाइल को और अधिक ग्रेसफुल बना रहा था, जबकि इसका फ्लोइंग स्ट्रक्चर विंटेज फैशन की झलक दिखा रहा था।

    उनके इस पूरे लुक में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली चीज उनकी जूलरी रही। तारा ने पन्ना और हीरे से सजी भारी जूलरी का चयन किया, जिसमें एक स्टेटमेंट नेकलेस और मैचिंग ईयररिंग्स शामिल थे। यह जूलरी उनके आइवरी गाउन के साथ एक खूबसूरत कंट्रास्ट बना रही थी और उनके पूरे लुक को एक शाही अंदाज दे रही थी।

    तारा का यह पूरा लुक एक मशहूर स्टाइलिस्ट की देखरेख में तैयार किया गया था, जिसमें हर डिटेल को बेहद बारीकी से डिजाइन किया गया। मेकअप को भी बेहद सिंपल और क्लासी रखा गया, जिसमें सॉफ्ट स्मोकी आईज, न्यूड लिप्स और स्लीक बन हेयरस्टाइल शामिल थी। इस मिनिमल मेकअप ने उनके ओवरऑल लुक को और ज्यादा एलिगेंट और बैलेंस्ड बना दिया।

    इस खास इवेंट में तारा सुतारिया को सिनेमा में उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया, जिससे यह शाम उनके लिए और भी खास बन गई। इस सम्मान ने न सिर्फ उनके करियर को एक नई पहचान दी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय कलाकारों की उपस्थिति को भी मजबूत किया।

    इवेंट के दौरान उनकी मौजूदगी और उनका यह लुक लगातार कैमरों और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचता रहा। जैसे ही उनकी तस्वीरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर वह तेजी से वायरल हो गईं और लोगों ने उनके इस रॉयल और विंटेज स्टाइल की जमकर तारीफ की। कई लोगों ने इसे कान्स के सबसे बेहतरीन फैशन मोमेंट्स में से एक बताया।

  • पैपराजी की बदसलूकी और सितारों की चुप्पी: आयुष्मान खुराना, सारा और रकुल पर क्यों भड़क गए फैंस?

    पैपराजी की बदसलूकी और सितारों की चुप्पी: आयुष्मान खुराना, सारा और रकुल पर क्यों भड़क गए फैंस?

    नई दिल्ली ।  बॉलीवुड के गलियारों में अक्सर सितारों और पैपराजी के बीच नोकझोंक की खबरें आती रहती हैं, लेकिन कभी-कभी ये घटनाएं सोशल मीडिया पर बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं। हाल ही में फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ की स्टार कास्ट-आयुष्मान खुराना, सारा अली खान, वामिका गब्बी और रकुल प्रीत सिंह-एक वीडियो की वजह से लोगों के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, फिल्म के प्रमोशन के दौरान सितारों के साथ मैशबल इंडिया के मशहूर होस्ट सिद्धार्थ आलमबायन भी मौजूद थे। सभी मिलकर वड़ा पाव का लुत्फ उठा रहे थे, तभी वहां मौजूद कुछ फोटोग्राफर्स सिद्धार्थ पर भद्दे कमेंट्स करने लगे क्योंकि वे स्टार्स की फोटो के बीच में आ रहे थे।

    वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि पैपराजी सितारों को कैप्चर करने के चक्कर में सिद्धार्थ को वहां से हटने के लिए चिल्ला रहे थे। हद तो तब हो गई जब एक फोटोग्राफर ने उन्हें ‘वड़ा पाव’ कहकर संबोधित किया और वहां से हटने को कहा। शुरुआत में सिद्धार्थ ने इन कमेंट्स को नजरअंदाज किया, लेकिन जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो उन्होंने कड़े लहजे में जवाब देते हुए कहा कि ‘प्यार से बोलो भाई, ऐ-ऐ मत करो।’ हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वहां मौजूद बड़े सितारे चुप्पी साधे रहे, जिसे देख सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा।

    इंटरनेट पर लोग इस बात को लेकर सबसे ज्यादा नाराज हैं कि आयुष्मान खुराना, रकुल प्रीत सिंह और सारा अली खान जैसे स्थापित कलाकारों ने उस वक्त सिद्धार्थ का बचाव क्यों नहीं किया। कमेंट सेक्शन में लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब आपके सामने किसी सह-कर्मी या होस्ट का अपमान हो रहा हो, तो एक स्टार के तौर पर आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप उसे रोकें। कई यूजर्स ने लिखा कि ये सितारे स्क्रीन पर तो बड़ी-बड़ी नैतिकता की बातें करते हैं, लेकिन असल जिंदगी में अपने साथ खड़े शख्स के लिए आवाज तक नहीं उठा पाए। इस ‘साइलेंट रिएक्शन’ की वजह से कलाकारों को ‘क्लास’ लगाई जा रही है और उनकी संवेदनशीलता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

    यह विवाद ऐसे समय में आया है जब आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ 15 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। मुदस्सर अजीज के निर्देशन में बनी यह फिल्म साल 2019 की सुपरहिट फिल्म ‘पति पत्नी और वो’ का सीक्वल है। फिल्म को लेकर पहले से ही यह चर्चा थी कि क्या यह बेवफाई जैसे विषयों को बढ़ावा दे रही है, जिस पर आयुष्मान ने स्पष्ट किया था कि उनका किरदार ‘प्रजापति पांडे’ एक पूरी तरह से समर्पित और पत्नी से प्यार करने वाला व्यक्ति है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया था कि वे कभी किसी गलत संदेश वाली फिल्म का हिस्सा नहीं बनेंगे।

    बहरहाल, फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन और क्रिटिक्स की प्रतिक्रिया के बीच इस प्रमोशनल विवाद ने फिल्म की टीम के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। जहाँ फिल्म की रिलीज का इंतजार काफी समय से हो रहा था, वहीं इस घटना ने सितारों की छवि पर थोड़ा दाग जरूर लगाया है। अब देखना यह होगा कि क्या आयुष्मान या फिल्म की बाकी टीम इस बढ़ते गुस्से पर कोई सफाई देती है या नहीं। फिलहाल, सोशल मीडिया पर सिद्धार्थ आलमबायन के समर्थन में लोग खड़े नजर आ रहे हैं और पैपराजी के व्यवहार की कड़ी निंदा कर रहे हैं।

  • सिर्फ एक फिल्म नहीं, आतंकवाद के खिलाफ एक आंदोलन थी 'सरफरोश': बजट से चार गुना कमाई और उस दौर का सबसे बड़ा विवाद

    सिर्फ एक फिल्म नहीं, आतंकवाद के खिलाफ एक आंदोलन थी 'सरफरोश': बजट से चार गुना कमाई और उस दौर का सबसे बड़ा विवाद


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1999 एक ऐसा मोड़ था, जब पर्दे पर देशभक्ति को एक नई और यथार्थवादी परिभाषा मिली। उस दौर में जहाँ बॉलीवुड मुख्य रूप से रोमांटिक कहानियों में व्यस्त था, निर्देशक जॉन मैथ्यू माथन एक ऐसी कहानी लेकर आए जिसने न केवल दर्शकों को झकझोर दिया, बल्कि सेंसर बोर्ड के पसीने छुड़ा दिए। फिल्म ‘सरफरोश’ को आज एक क्लासिक का दर्जा प्राप्त है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी रिलीज का रास्ता कांटों भरा था। यह पहली बार था जब किसी मुख्यधारा की भारतीय फिल्म ने सीधे तौर पर पड़ोसी देश पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई का नाम लेकर उन्हें भारत में हो रही आतंकवादी घटनाओं का जिम्मेदार ठहराया था। फिल्म की यही निर्भीकता इसके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गई थी।

    उस समय भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक रिश्ते एक नाजुक मोड़ पर थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शांति की पहल करते हुए दिल्ली से लाहौर के बीच बस सेवा शुरू कर रहे थे। एक तरफ जहाँ सरकार दोस्ती का हाथ बढ़ा रही थी, वहीं दूसरी तरफ ‘सरफरोश’ जैसी फिल्म सेंसर बोर्ड के पास पहुंची जिसमें आतंकवाद को सीधे तौर पर पाकिस्तान से जोड़कर दिखाया गया था। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएसई) के सदस्यों को डर था कि फिल्म के संवाद और चित्रण दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत की प्रक्रिया को बिगाड़ सकते हैं। बोर्ड ने फिल्म को सर्टिफिकेट देने से साफ इनकार कर दिया और शर्त रखी कि फिल्म से ‘पाकिस्तान’ और ‘आईएसआई’ जैसे शब्दों को पूरी तरह से हटा दिया जाए।

    निर्देशक जॉन मैथ्यू माथन अपनी फिल्म की सच्चाई और रिसर्च को लेकर इतने आश्वस्त थे कि उन्होंने बोर्ड की शर्तों के आगे झुकने से मना कर दिया। जॉन का तर्क था कि फिल्म में जो दिखाया गया है, वह वास्तविकता पर आधारित है और इसे बदलने का मतलब फिल्म की आत्मा को मारना होगा। जब विवाद काफी बढ़ गया और सेंसर बोर्ड अपनी जिद पर अड़ा रहा, तो जॉन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए बोर्ड को चेतावनी दी कि वे इस मामले को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। निर्देशक के इस सख्त तेवर और कानूनी लड़ाई की धमकी के आगे आखिरकार सेंसर बोर्ड को झुकना पड़ा। फिल्म को बिना किसी बड़े बदलाव के पास किया गया और 30 अप्रैल 1999 को यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई।

    आमिर खान के करियर के लिए ‘सरफरोश’ एक गेम-चेंजर साबित हुई। एसीपी अजय सिंह राठौड़ के किरदार में उन्होंने एक ऐसे पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई, जो अपने निजी दुख को देश की सेवा के जज्बे में बदल देता है। फिल्म की पटकथा इतनी मजबूत थी कि दर्शक शुरू से अंत तक बंधे रहे। लगभग 8 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया और भारत में करीब 30.37 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया। फिल्म की सफलता केवल व्यावसायिक नहीं थी, बल्कि इसे साल 2000 में ‘बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग व्होलसम एंटरटेनमेंट’ की श्रेणी में प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया।

    फिल्म की सफलता में इसके संगीत और अन्य कलाकारों का भी बड़ा योगदान था। सोनाली बेंद्रे के साथ आमिर की केमिस्ट्री और जगजीत सिंह की आवाज में सजी गजल ‘होश वालों को खबर क्या’ आज भी लोगों की जुबान पर है। वहीं, नसीरुद्दीन शाह ने पाकिस्तानी गजल गायक और जासूस ‘गुलफाम हसन’ के किरदार में जो जान फूंकी, उसने फिल्म को एक अलग ऊंचाई पर पहुंचा दिया। आज के दौर में जब ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों में आतंकवाद की जड़ें दिखाई जा रही हैं, तब ‘सरफरोश’ की याद आना स्वाभाविक है, क्योंकि यह वह पहली फिल्म थी जिसने कूटनीति की परवाह किए बिना सच बोलने का साहस दिखाया था। 8.1 की आईएमडीबी रेटिंग वाली यह फिल्म आज भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली देशभक्ति फिल्मों में से एक है।

  • 4000 करोड़ की 'रामायण' और अयोध्या में प्रीमियम प्रॉपर्टी,भगवान राम का किरदार निभाने से पहले रणबीर ने शहर में किया बड़ा निवेश

    4000 करोड़ की 'रामायण' और अयोध्या में प्रीमियम प्रॉपर्टी,भगवान राम का किरदार निभाने से पहले रणबीर ने शहर में किया बड़ा निवेश


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के गलियारों में इन दिनों सुपरस्टार रणबीर कपूर का नाम न केवल उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ के लिए, बल्कि अयोध्या में किए गए एक बड़े रियल एस्टेट निवेश के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही भव्य फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाने जा रहे रणबीर कपूर ने असल जिंदगी में भी अयोध्या से अपना नाता जोड़ लिया है। हालिया जानकारी के मुताबिक, अभिनेता ने अयोध्या के सरयू नदी के तट पर स्थित एक बेहद प्रीमियम प्रोजेक्ट ‘द सरयू’ में जमीन खरीदी है। ‘द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ के इस प्रोजेक्ट में रणबीर ने लगभग 2,134 वर्ग फीट का प्लॉट अपने नाम किया है, जिसकी कीमत तकरीबन ₹3.31 करोड़ बताई जा रही है।

    अयोध्या में इस निवेश को लेकर रणबीर कपूर ने बेहद भावुक और आध्यात्मिक संदेश साझा किया है। उनका मानना है कि अयोध्या ने उन्हें खुद चुना है और यह निवेश उनके लिए केवल एक वित्तीय सौदा नहीं, बल्कि उनके परिवार की विरासत का एक हिस्सा है। सरयू नदी के किनारे स्थित यह 75 एकड़ का विशाल प्रोजेक्ट आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक मूल्यों का एक अनूठा संगम है। यहाँ न केवल एक भव्य क्लबहाउस और 35 से ज्यादा लाइफस्टाइल सुविधाएं होंगी, बल्कि पांच एकड़ में फैला एक शुद्ध शाकाहारी लग्जरी होटल भी बनाया जाएगा, जिसका संचालन प्रसिद्ध होटल श्रृंखला ‘द लीला’ द्वारा किया जाएगा। रणबीर के अनुसार, डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से इस डील को पूरा करना उनके लिए बेहद पारदर्शी और सुखद अनुभव रहा।

    रणबीर कपूर की इस डील के साथ ही उनकी आगामी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी दर्शकों का उत्साह चरम पर है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की अब तक की सबसे महंगी फिल्म मानी जा रही है, जिसका कुल बजट लगभग 4000 करोड़ रुपये बताया गया है। इस महाकाव्य को दो हिस्सों में रिलीज किया जाएगा, जिसका पहला भाग इसी साल दिवाली के शुभ अवसर पर सिनेमाघरों में दस्तक देगा। फिल्म में रणबीर कपूर के साथ दक्षिण भारतीय अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी, जबकि सुपरस्टार यश रावण की भूमिका को जीवंत करेंगे। फिल्म की स्टार कास्ट काफी प्रभावशाली है, जिसमें हनुमान के रूप में सनी देओल और लक्ष्मण के रूप में रवि दुबे जैसे कलाकार शामिल हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि रणबीर कपूर ने शुरुआत में इस चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाने से मना कर दिया था। अभिनेता ने एक सार्वजनिक मंच पर स्वीकार किया कि वे इस महान चरित्र के साथ न्याय करने को लेकर संशय में थे। हालांकि, उनके जीवन में बेटी राहा के आगमन और उसी समय इस किरदार का प्रस्ताव दोबारा आने को उन्होंने एक सुखद संयोग माना और अंततः इसे स्वीकार किया। रणबीर का मानना है कि ‘राम’ का किरदार निभाना उनकी अभिनय यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। अयोध्या में जमीन खरीदने के उनके फैसले को फिल्म की रिलीज से पहले एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है, जो उनकी इस भूमिका के प्रति गहरी निष्ठा को दर्शाता है।

    अयोध्या इस समय वैश्विक स्तर पर निवेश और पर्यटन के केंद्र के रूप में उभर रहा है। रणबीर कपूर जैसे बड़े सितारों का यहाँ जमीन खरीदना शहर की बढ़ती ब्रांड वैल्यू और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे ‘रामायण’ की रिलीज की तारीख नजदीक आ रही है, प्रशंसकों की नजरें रणबीर के अभिनय और उनकी इस नई प्रॉपर्टी पर टिकी हुई हैं। कुल मिलाकर, रणबीर कपूर के लिए यह साल न केवल पेशेवर रूप से मील का पत्थर साबित होने वाला है, बल्कि अयोध्या में अपनी जड़ें जमाने के कारण यह उनके व्यक्तिगत जीवन के लिए भी अत्यंत विशेष बन गया है। अब दुनिया को इंतजार है तो बस पर्दे पर उस भव्यता को देखने का, जिसे नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी की टीम ने करोड़ों के बजट के साथ तैयार किया है।

  • किसी की मुस्कुराहटों पे निसार होने वाले 'शंकरदास' के 'शैलेंद्र' बनने और बेमन से मैकेनिक की नौकरी करने का पूरा सच

    किसी की मुस्कुराहटों पे निसार होने वाले 'शंकरदास' के 'शैलेंद्र' बनने और बेमन से मैकेनिक की नौकरी करने का पूरा सच


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सादगी और गहराई से भरे गीतों का जिक्र होगा, गीतकार शैलेंद्र का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिया जाएगा। ‘किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार’ जैसे कालजयी गीत लिखने वाले इस कलाकार का जीवन किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। पाकिस्तान के रावलपिंडी में जन्मे शंकरदास केसरीलाल, जिन्हें दुनिया ने बाद में शैलेंद्र के नाम से पूजा, के पूर्वज मूलतः बिहार के आरा जिले से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता ब्रिटिश मिलिट्री अस्पताल में ठेकेदार थे, लेकिन पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों के चलते उन्हें रावलपिंडी छोड़कर मथुरा बसना पड़ा। शैलेंद्र बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मथुरा के ही एक सरकारी स्कूल से पूरी की। उनकी मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंटरमीडिएट की परीक्षा में उन्होंने पूरे उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया था।

    पढ़ाई में अव्वल होने के बावजूद घर की आर्थिक तंगी ने उन्हें अपनी पसंद का रास्ता चुनने की इजाजत नहीं दी। परिवार की जिम्मेदारी कंधे पर आई तो उन्होंने रेलवे की परीक्षा पास की और मुंबई में बतौर मैकेनिक यानी अप्रेंटिस की नौकरी शुरू कर दी। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जिस शख्स ने शब्दों से संवेदनाओं की दुनिया बुनी, उसके पास मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा था और वेल्डिंग जैसे कठोर काम में उनकी विशेषज्ञता थी। मुंबई के रेलवे यार्ड में पसीने और लोहे की गूँज के बीच शैलेंद्र बेमन से अपना काम करते थे, क्योंकि उनका मन तो कविता और साहित्य की दुनिया में बसता था। इस नौकरी के दौरान ही उनके भीतर का कवि जाग उठा और वे खाली समय में कागज के टुकड़ों पर अपनी भावनाओं को उकेरने लगे।

    रेलवे की इस नौकरी के दौरान शैलेंद्र का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। आर्थिक तंगी का आलम यह था कि शादी होने के बावजूद वे अपनी पत्नी को मुंबई नहीं ला पा रहे थे। विरह का यही दर्द और अपनों से दूर रहने की तड़प उनके बाद के गीतों में साफ झलकती है। कहा जाता है कि जब वे अपनी कविताओं के जरिए भारतीय जन नाट्य संघ यानी इप्टा से जुड़े, तब उनकी मुलाकात राज कपूर से हुई। राज कपूर उनकी प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने शैलेंद्र को फिल्मों के लिए लिखने का प्रस्ताव दिया, लेकिन शुरुआत में स्वाभिमानी शैलेंद्र ने इसे ठुकरा दिया था। हालांकि, बाद में अपनी घरेलू जरूरतों और आर्थिक तंगहाली के कारण उन्होंने फिल्मी दुनिया का रुख किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

    शैलेंद्र और राज कपूर की जोड़ी ने भारतीय सिनेमा को ‘आवारा हूं’, ‘मेरा जूता है जापानी’ और ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’ जैसे न भूलने वाले गाने दिए। शैलेंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे जटिल से जटिल दार्शनिक बातों को बहुत ही सरल शब्दों में पिरो देते थे। उन्होंने जो कुछ भी अपनी निजी जिंदगी में झेला, चाहे वह मैकेनिक की नौकरी की मजबूरी हो या गरीबी का दंश, उसे उन्होंने अपनी रचनाओं में ईमानदारी से उतारा। उनके गीतों में आम आदमी का दर्द और उसकी छोटी-छोटी खुशियां साफ दिखाई देती थीं। यही वजह है कि उनके लिखे गीत आज भी उतने ही प्रासंगिक और ताजे महसूस होते हैं जितने दशकों पहले थे।

    मात्र 43 साल की छोटी सी उम्र में शैलेंद्र इस दुनिया को अलविदा कह गए। यह एक अजीब संयोग था कि जिस 14 दिसंबर को उनके सबसे अजीज दोस्त राज कपूर का जन्मदिन होता था, उसी दिन हिंदी सिनेमा के इस चमकते सितारे का निधन हुआ। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ, उसे आज तक कोई भर नहीं पाया है। एक मैकेनिक के रूप में करियर शुरू करने वाले इस इंसान ने साबित कर दिया कि अगर दिल में जज्बा हो और कलम में सच्चाई, तो लोहे के कारखानों में काम करते हुए भी दुनिया को प्रेम और भाईचारे का संगीत सुनाया जा सकता है। आज भी जब कोई ‘सजन रे झूठ मत बोलो’ या ‘सब कुछ सीखा हमने’ सुनता है, तो उसे उस महान आत्मा की याद आती है जिसने अपनी पूरी जिंदगी शब्दों की साधना में लगा दी।