Category: Madhya Pradesh

  • कोहरे की गिरफ्त में मध्यप्रदेश, दिन में भी ठिठुरन, ट्रेनों और सड़कों की रफ्तार थमी..

    कोहरे की गिरफ्त में मध्यप्रदेश, दिन में भी ठिठुरन, ट्रेनों और सड़कों की रफ्तार थमी..


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश में एक बार फिर मौसम ने करवट ले ली है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से वातावरण में नमी बढ़ गई है, जिसके चलते प्रदेशभर में घने कोहरे की चादर छाई हुई है। हालात ऐसे हैं कि ठंड का असर सिर्फ सुबह-शाम ही नहीं, बल्कि दिन के समय भी साफ महसूस किया जा रहा है। कई जिलों में दिन का तापमान सामान्य से नीचे चला गया है और शीतल दिन जैसी स्थिति बन गई है।

    शनिवार को प्रदेश के 11 से 12 शहरों में अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। दतिया और रीवा में पूरे दिन ठंड का असर बना रहा। ग्वालियर में सुबह के समय अति घना कोहरा छाया रहा, जबकि इंदौर और जबलपुर में घने कोहरे के कारण दृश्यता विजिबिलिटी काफी कम हो गई। राजधानी भोपाल और नर्मदापुरम में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया।मौसम विभाग के अनुसार, इस सर्दी के सीजन में यह कोहरे का अब तक का सबसे लंबा दौर माना जा रहा है। भोपाल में शनिवार को दिनभर कोहरा बना रहा, जिससे धूप के दर्शन भी मुश्किल हो गए। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है। कोहरे के साथ-साथ शीतलहर का असर भी तेज हो सकता है, जिससे रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है।

    इंदौर में विजिबिलिटी शून्य के करीब

    शनिवार रात इंदौर में हालात सबसे ज्यादा खराब नजर आए। घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी लगभग शून्य हो गई, जिससे सड़कों पर चल रहे वाहन एक-दूसरे को मुश्किल से देख पा रहे थे। इसका सीधा असर यातायात पर पड़ा और वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी हो गई। कई जगहों पर जाम जैसे हालात भी बने।

    रेल यातायात पर पड़ा असर


    कोहरे का असर रेल यातायात पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। दिल्ली की ओर से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली मालवा एक्सप्रेस, सचखंड एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस सहित एक दर्जन से अधिक ट्रेनें 30 मिनट से लेकर 6 घंटे तक की देरी से चल रही हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को भी ट्रेनों के लेट होने की आशंका बनी हुई है, जिससे यात्रियों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।

    इन जिलों में ज्यादा असर


    रविवार को भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर के अलावा श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, सागर, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, कटनी और मैहर समेत कई जिलों में कोहरे का असर बना हुआ है।

    अगले दो दिन का अलर्ट


    मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों के लिए भी घने कोहरे की चेतावनी जारी की है।5 जनवरी को ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में घना कोहरा रहने की संभावना है।6 जनवरी को भी शिवपुरी, श्योपुर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में कोहरे का असर बना रह सकता है।

    क्यों बन रहा है ऐसा मौसम 


    मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, उत्तर भारत के बड़े हिस्से में इस समय कोहरे की स्थिति बनी हुई है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और बिहार में भी इसी तरह का मौसम है। पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद वातावरण में बची नमी के कारण कोहरा लगातार बन रहा है। हालांकि एक-दो दिन बाद इसकी तीव्रता में कुछ कमी आने की संभावना जताई गई है।

  • नर्मदा जल में सीवर की मिलावट का खुलासा, खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से बढ़ा हैजा-डायरिया का खतरा

    नर्मदा जल में सीवर की मिलावट का खुलासा, खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से बढ़ा हैजा-डायरिया का खतरा


    नई दिल्ली। इंदौर शहर से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से सप्लाई हो रहे नर्मदा जल को लेकर की गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। सरकारी और निजी प्रयोगशालाओं में लिए गए पानी के सैंपल्स में कई खतरनाक और जानलेवा बैक्टीरिया पाए गए हैं जिससे इलाके में हैजा डायरिया और अन्य पेट संबंधी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है।लैब रिपोर्ट के अनुसार पानी में फीकल कॉलिफॉर्म ई-कोलाई विब्रियो कोलेरी स्यूडोमोनास क्लेबसेला सिट्रोबैक्टर और प्रोटोजोआ जैसे सूक्ष्म जीव मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन बैक्टीरिया की मौजूदगी इस बात का सीधा संकेत है कि पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवर का गंदा पानी मिल रहा है। इसी कारण पानी को जांच रिपोर्ट में अनसैटिस्फैक्ट्री यानी पूरी तरह असंतोषजनक श्रेणी में रखा गया है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से इलाके में लगातार लोग बीमार पड़ रहे हैं। कई घरों में उल्टी-दस्त पेट दर्द और बुखार की शिकायतें सामने आई हैं। इसी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पानी की सैंपलिंग शुरू की। रविवार से लगातार पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। यह सैंपल्स शहर के 100 से अधिक कॉलेजों और निजी अस्पतालों की लैब में भी भेजे गए जहां रिपोर्ट ने स्थिति को गंभीर बताया है।हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक इन रिपोर्ट्स को सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक विभाग के पास मौजूद रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित। इसके बावजूद आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है जिससे लोगों में नाराजगी और डर दोनों बढ़ रहे हैं।

    इसी बीच कलेक्टर शिवम वर्मा ने क्षेत्र का दौरा किया और लोगों को भरोसा दिलाने के लिए मौके पर पानी पीकर दिखाया। लेकिन संक्रमण के समय लिए गए पानी की लैब कल्चर रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीपेज के जरिए सीवर का पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है जिससे यह स्थिति पैदा हुई है।रिपोर्ट में विब्रियो कोलेरी बैक्टीरिया की मौजूदगी विशेष रूप से चिंता का विषय है क्योंकि यही बैक्टीरिया हैजा फैलाने के लिए जिम्मेदार होता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसके अलावा ई-कोलाई और फीकल कॉलिफॉर्म की मौजूदगी यह दर्शाती है कि पानी में मलजनित प्रदूषण है जो किसी भी हालत में सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर इम्युनिटी वाले लोग बुजुर्ग और बच्चे इस दूषित पानी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। स्यूडोमोनास और क्लेबसेला जैसे बैक्टीरिया फेफड़ों मूत्र मार्ग और खून में संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं।फिलहाल जरूरत इस बात की है कि जल सप्लाई सिस्टम की तत्काल जांच कर ली जाए पाइपलाइनों की मरम्मत की जाए और लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप और जागरूकता अभियान चलाने की भी सख्त जरूरत है ताकि किसी बड़े स्वास्थ्य संकट को समय रहते रोका जा सके।

  • नववर्ष के पहले रविवार को महाकाल मंदिर में भक्तों का उमड़ा सैलाबअद्भुत शृंगार में दर्शन

    नववर्ष के पहले रविवार को महाकाल मंदिर में भक्तों का उमड़ा सैलाबअद्भुत शृंगार में दर्शन


    उज्जैन । उज्जैन नववर्ष के पहले रविवार को उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के मंदिर में श्रद्धालुओं का जमावड़ा हुआ। साल के पहले रविवार पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचे। इस दिन को विशेष रूप से भस्म आरती और बाबा के अद्भुत शृंगार के लिए जाना जाता है।भक्तों का उत्साह सर्द मौसम में भी बरकरार रहा और देर रात से ही वे भस्म आरती में शामिल होने के लिए मंदिर परिसर में लाइनों में खड़े नजर आए। श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन से अभिभूत हो गएऔर हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा मंदिर गूंज उठा।

    महाकाल का अद्भुत शृंगार

    माघ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के रविवार को बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गयाजिसे देखकर भक्त भावविभोर हो उठे। इस शृंगार में बाबा के माथे पर बेलपत्र और चांदी का चांद चढ़ाया गयाजिससे उनके दिव्य स्वरूप की अनुभूति हुई। शृंगार के दौरान बाबा पर घीदूधदही और रस से जलाभिषेक किया गया। इसके बादभांग से बाबा का शृंगार किया गया। बाबा महाकाल का यह रूप भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षक था और उन्हें आंतरिक शांति का अनुभव हुआ।

    भस्म आरती का महत्व

    शृंगार के बाद भस्म आरती का आयोजन हुआजिसमें बाबा महाकाल को भस्म से नहलाया गया। भस्म आरती के दौरान माना जाता है कि बाबा निराकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैंलेकिन शृंगार के बाद वे साकार रूप में अपने भक्तों के कष्ट हरने आते हैं। इस दौरान बाबा महाकाल ने कमल और मखाने की माला पहने हुएअपने भक्तों को आलोकिक रूप में दर्शन दिए। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत अभूतपूर्व थाऔर मंदिर में जय श्री महाकाल की गूंज सुनाई दी।

    महाकाल के अलग-अलग रूप

    बाबा महाकाल का शृंगार हर दिन अलग तरीके से किया जाता है। प्रत्येक तिथि और शुभ दिन पर बाबा अपने भक्तों को नए रूप में दर्शन देते हैंयही कारण है कि भस्म आरती में हमेशा भक्तों की अधिकतम संख्या होती है। बाबा महाकाल की सेवा में सुबह से शाम तक छह अलग-अलग आरतियां होती हैंजो प्रत्येक में अपने आप में विशिष्ट होती हैं बाबा महाकाल के दर्शन और शृंगार से श्रद्धालुओं का मन श्रद्धा और भक्ति से अभिभूत हो जाता है। इस नववर्ष के पहले रविवार ने भक्तों को बाबा महाकाल के नए रूप से साक्षात्कार करने का अवसर दियाऔर उनके हर कष्ट को हरने की शक्ति को महसूस किया।

  • एम्स भोपाल को मिलेंगी गामा नाइफ और पेट स्कैन जैसी हाईटेक सुविधाएं ट्रांसप्लांट के लिए नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू

    एम्स भोपाल को मिलेंगी गामा नाइफ और पेट स्कैन जैसी हाईटेक सुविधाएं ट्रांसप्लांट के लिए नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू

    भोपाल । नए साल 2026 में मध्य प्रदेश के मरीजों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई उम्मीद सामने आई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स भोपाल इस साल अपने स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक विस्तार करने जा रहा है। इस विस्तार के तहत एम्स भोपाल में गामा नाइफ और पेट स्कैन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को स्थापित किया जाएगा जिससे गंभीर बीमारियों खासकर कैंसर और ट्यूमर के इलाज में बड़े सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

    एम्स भोपाल इस वर्ष ‘ट्रांसप्लांट’ के लिए समर्पित एक नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इस ऑपरेशन थिएटर के शुरू होने से हृदय लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट अब एक ही छत के नीचे संक्रमण रहित वातावरण में किए जा सकेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वेटिंग लिस्ट कम हो सकेगी और अधिक मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा जिससे उनका जीवन बचाया जा सकेगा।

    इसके अलावा गामा नाइफ तकनीक का इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर और मस्तिष्क के अन्य जटिल रोगों के इलाज में किया जाएगा। गामा नाइफ के माध्यम से बिना चीरा लगाए सटीक रेडिएशन के जरिए ट्यूमर का इलाज संभव हो सकेगा। यह तकनीक विशेषकर उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगी जिन्हें ब्रेन ट्यूमर के इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    एम्स भोपाल के इस नए कदम से अब मरीजों को दिल्ली मुंबई या अन्य बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी क्योंकि यहां उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। संस्थान का पूरा फोकस इस वर्ष डायग्नोस्टिक सेवाओं को और बेहतर बनाने और क्रिटिकल केयर की क्षमता को बढ़ाने पररहेगा।यह पहल न केवल मध्य प्रदेश बल्कि आस-पास के क्षेत्रों के मरीजों केलिए भी राहत लेकर आएगी क्योंकि अब उन्हें उच्च गुणवत्ता वालेउपचार के लिए दूर-दराज के शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

  • भोपाल मेट्रो में पैसेंजर की कमी 14 दिन में ही ट्रिप घटाई नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू

    भोपाल मेट्रो में पैसेंजर की कमी 14 दिन में ही ट्रिप घटाई नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू


    भोपाल । भोपाल मेट्रो में कम पैसेंजर की संख्या को लेकर एक बड़ी समस्या सामने आई है। मेट्रो की शुरुआत के सिर्फ 14 दिन बाद ही मेट्रो कॉर्पोरेशन को यात्री कम होने की वजह से टाइमिंग और ट्रिप्स में बदलाव करना पड़ा है। अब मेट्रो का नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू होगा जिसमें ट्रिप्स की संख्या कम कर दी गई है और टाइमिंग में भी बदलाव किया गया है।

    पहले मेट्रो का संचालन सुबह 9 बजे से शुरू होता था लेकिन अब एम्स स्टेशन से मेट्रो दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। वहीं शाम का आखिरी ट्रिप अब साढ़े सात बजे होगा जबकि पहले यह समय देर रात तक था। इस बदलाव का मुख्य कारण यह है कि मेट्रो को अपेक्षित संख्या में यात्री नहीं मिल रहे हैं। शुरुआत के दिनों में भी मेट्रो की सवारी में गिरावट देखी गई है और अब यह स्थिति इस हद तक पहुँच चुकी है कि मेट्रो को दिन में कम ट्रिप्स करने पड़ रहे हैं।

    भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर को हुआ था जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल ने इसका उद्घाटन किया। इसके बाद 21 दिसंबर से मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हुआ था। उद्घाटन के पहले दिन लोगों में मेट्रो को लेकर काफी उत्साह था और 6568 पैसेंजर ने मेट्रो में सफर किया था। हालांकि इसके बाद यात्रियों की संख्या में गिरावट आई और मेट्रो के संचालन के लिए आवश्यक पैसेंजर संख्या नहीं जुटाई जा सकी।

    भोपाल मेट्रो के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि मेट्रो का संचालन काफी महंगा होता है और इसकी लागत को कवर करने के लिए पैसेंजर की संख्या जरूरी है। अब मेट्रो को यात्रा की स्थिति में सुधार लाने के लिए विभिन्न उपायों पर विचार करना होगा।

  • ग्वालियर में एआई की मदद से महिला की लाश की पहचान पुलिस ने स्कैच से संदेही तक पहुंचा

    ग्वालियर में एआई की मदद से महिला की लाश की पहचान पुलिस ने स्कैच से संदेही तक पहुंचा


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जहां पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई की मदद से एक महिला की लाश की पहचान की। यह महिला गोला का मंदिर स्थित कटारे फार्म में झाड़ियों के बीच अर्द्धनग्न अवस्था में मृत पाई गई थी महिला का सिर पत्थर से कुचला गया था जिससे उसकी हत्या की आशंका जताई जा रही थी।

    पुलिस ने एआई तकनीक का उपयोग कर महिला का स्कैच तैयार कराया। इस स्कैच के आधार पर जब पुलिस ने स्थानीय लोगों से संपर्क किया तो उन्होंने महिला की पहचान “कल्लो उर्फ कालीबाई” के रूप में की। वह अक्सर उस क्षेत्र में घूमती रहती थी और वहां के स्थानीय लोग उसे पहचानते थे।

    स्कैच के आधार पर पुलिस ने फिर से सीसीटीवी फुटेज की जांच की और देखा कि महिला एक युवक के साथ घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर सड़क पर चलती हुई दिखाई दी थी। पुलिस ने इस युवक को प्रमुख संदेही मानते हुए उसकी तलाश शुरू की। संदेही की जैकेट भी घटनास्थल से मिले महिला के कपड़ों के पास पाई गई जिससे पुलिस को और सबूत मिले हैं।

    इस खोज ने पुलिस को मामले की दिशा में महत्वपूर्ण मदद दी है और इस जघन्य हत्या के आरोपी तक पहुंचने के प्रयासों को तेज किया है। पुलिस का कहना है कि वे जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पूरी कोशिश करेंगे।यह घटना ग्वालियर के कटारे फार्म में सोमवार को हुई थी जब महिला की लाश झाड़ियों में पाई गई। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी थी और अब एआई तकनीक के सहारे इस हत्याकांड के पीछे के रहस्यों को सुलझाने में मदद मिल रही है।

  • भोपाल के जेपी अस्पताल में मरीज को दी फफूंद लगी दवा सीनियर डॉक्टर नदारद ओपीडी में इंटर्न डॉक्टरों के भरोसे इलाज

    भोपाल के जेपी अस्पताल में मरीज को दी फफूंद लगी दवा सीनियर डॉक्टर नदारद ओपीडी में इंटर्न डॉक्टरों के भरोसे इलाज


    भोपाल । भोपाल के जेपी अस्पताल जिला चिकित्सालय में एक गंभीर घटना सामने आई है जहां शुक्रवार शाम एक मरीज को फफूंद लगी दवा दी गई। यह मामला दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है। मरीज ने दवा लेने से पहले उसे देखा जिससे किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सका। यदि मरीज ने दवा की स्थिति का ध्यान नहीं किया होता तो यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकती थी।

    मरीज सतीष सेन ने बताया कि वे शुक्रवार शाम करीब पांच बजे पैर में फ्रैक्चर की आशंका के चलते जेपी अस्पताल की आर्थोपेडिक ओपीडी में पहुंचे थे। ओपीडी में उस वक्त कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं थे और इंटर्न डॉक्टरों ने उनका परीक्षण किया। इसके बाद मरीज को एक्स-रे की सिफारिश की गई और दर्द की दवा लिखी गई जो बाद में फफूंद लगी हुई मिली।

    इस घटना ने अस्पताल में चिकित्सा गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीज को अगर दवा की स्थिति का पता न चलता तो इसे स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा माना जा सकता था। इसके अलावा सीनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति ने भी ओपीडी में इलाज के स्तर को प्रभावित किया।

    इस मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और स्वास्थ्य संगठनों नेप्रशासन से कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचा जासके और मरीजों को बेहतर इलाज और दवाइयां मिल सकें। अस्पताल प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत कदम उठाने चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीजों को गुणवत्ता वाली दवाइयां और इलाज मिले।

  • भोपाल के यूनियन कार्बाइड इलाके में 42 बस्तियों की बड़ी आबादी मल-मूत्र और रसायन मिला पानी पीने को मजबूर हालत बदतर

    भोपाल के यूनियन कार्बाइड इलाके में 42 बस्तियों की बड़ी आबादी मल-मूत्र और रसायन मिला पानी पीने को मजबूर हालत बदतर


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास बसी 42 बस्तियों की एक बड़ी आबादी अब भी गंदा और दूषित पानी पीने को मजबूर है। यह पानी मल-मूत्र और घातक रसायनों से भरा हुआ है जो न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है। नगर निगम ने 2017 में इन बस्तियों में पाइपलाइन के जरिए जलापूर्ति शुरू की थी लेकिन यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजरती है जिससे पानी की गुणवत्ता पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।

    गैस त्रासदी से पीड़ित इन इलाकों के लोग अब तक बेहतर पानी की सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गैस पीड़ित संगठनों की शिकायतों पर सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2012 में एक निगरानी समिति का गठन किया था। इस समिति ने इन बस्तियों में स्थित हैंडपंप और कुओं के पानी की जांच की और उसमें भारी मात्रा में हैवी मेटल डाइक्लोरोइथीन जैसे रसायन पाए गए।

    इसके बाद समिति ने नगर निगम को पेयजल के लिए पाइपलाइन डालने का निर्देश दिया। हालांकि यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजर रही थी जिसके कारण इसमें भारी मात्रा में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। ई. कोलाई बैक्टीरिया सामान्यतः मलजल में पाया जाता है और यह इंसान के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है।

    2018 में किए गए पानी की जांच में यह खुलासा हुआ कि पाइपलाइन के पानी में ई. कोलाई बैक्टीरिया की मात्रा बहुत अधिक थी जो लोगों के लिए गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। इसके बावजूद नगर निगम और प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए और आज भी लोग इस गंदे पानी को पीने को मजबूर हैं।

    गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए यह स्थिति और भी दर्दनाक है क्योंकि पहले ही वे जानलेवा गैसों से प्रभावित हुए थे और अब उन्हें दूषित पानी पीने के कारण नए स्वास्थ्य संकटों का सामना करना पड़ रहा है। इन बस्तियों के निवासी बार-बार प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन अब तक कोई सार्थक समाधान नहीं निकल सका है।

    इस संकट की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए गैस पीड़ित संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने कई बार प्रदर्शन भी किया है लेकिन शासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। 2017 में नगर निगम ने सर्वोच्च न्यायालय में एक शपथपत्र देकर जलापूर्ति में सुधार करने का वादा किया था लेकिन सात साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

    यह संकट सिर्फ पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है बल्कि यह स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी खतरा बन चुका है। नागरिक समाज और विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं ताकि इन 42 बस्तियों के लोगों को साफ पानी मिल सके और उनका स्वास्थ्य सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।

  • इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप

    इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है और 35 से अधिक लोग गंभीर हालत में अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। सभी मरीजों में उल्टी दस्त और संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं जिससे पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह सभी मौतें गंदे और दूषित पानी पीने के कारण हुईं।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सक्रिय हो गए हैं लेकिन मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।इस बीच सरकार ने हाई कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों में मृतकों की संख्या कम बताई जबकि हकीकत यह है कि अब तक 16 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि जैसे कोरोना महामारी के दौरान मौतों के आंकड़े छिपाए गए थे उसी तरह अब भी सरकार मृतकों के असली आंकड़े छिपा रही है ताकि जिम्मेदारी से बचा जा सके।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मामले में सरकार की नाकामी पूरी तरह से उजागर हो चुकी है और अब समय आ गया है कि सच्चाई सामने लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि और लोगों की जान बचाई जा सके और दूषित पानी के कारण फैलने वाले संक्रमण को रोका जा सके।

    स्थानीय निवासियों की चिंता और बढ़ गई है क्योंकि दूषित पानी पीने से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक है। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में पानी की जांच शुरू कर दी है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन जनता की परेशानी लगातार बनी हुई है।यह मामला प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है क्योंकि दूषित पानी पीने से होने वाली मौतें आम बात नहीं हैं और यह स्थिति तत्काल ध्यान देने योग्य है।

  • इंदौर में सर्द हवाओं से ठिठुरन अगले हफ्ते तक कोहरे और कड़ाके की ठंड का सामना करेंगे शहरवासी

    इंदौर में सर्द हवाओं से ठिठुरन अगले हफ्ते तक कोहरे और कड़ाके की ठंड का सामना करेंगे शहरवासी


    इंदौर । इंदौर में इन दिनों सर्द हवाओं और घने कोहरे ने शहरवासियों को ठिठुरन का अहसास करा दिया है। रविवार की सुबह भी कोहरे ने इंदौर को अपनी चपेट में लिया और शनिवार को भी कोहरा छाया हुआ था जिसके कारण दृश्यता 100 मीटर तक सिमट गई थी। इस घने कोहरे के कारण इंदौर एयरपोर्ट से दो दर्जन उड़ानें प्रभावित हुईं।

    उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाओं के कारण शहरवासियों को दिन और रात दोनों समय ठंडक का अहसास हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में अगले एक हफ्ते तक कोहरे और शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी। 4 से 6 जनवरी के बीच न्यूनतम तापमान में और गिरावट की संभावना जताई गई है।

    वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से इंदौर में नमी आ रही है और उत्तरी हवाओं की वजह से ठंडक का असर दिन में भी महसूस हो रहा है। हालांकि तीन दिन बाद हवाओं का रुख पश्चिमी होने से तापमान में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। 10 जनवरी के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में बनेगा जिसके प्रभाव से इंदौर का तापमान बढ़ सकता है।

    शुक्रवार रात तीन बजे से शनिवार सुबह 4.30 बजे तक घना कोहरा छाया रहा और इस दौरान दृश्यता 100 मीटर तक सिमट गई। दिन में धूप भी बहुत कम समय के लिए निकली और अधिकांश समय बादल छाए रहे। शनिवार को इंदौर का अधिकतम तापमान 21.9 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री कम था जबकि न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक था।भोपाल स्थित मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार अगले तीन दिनों तक इंदौर में शीतलता बरकरार रहेगी। रविवार तक कोहरे का असर जारी रहेगा और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है।