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  • सेवा जब विश्वास बन जाए : आरोग्य भारती ने मप्र में ऐसे बदली स्वास्थ्य की सोच और तस्वीर

    सेवा जब विश्वास बन जाए : आरोग्य भारती ने मप्र में ऐसे बदली स्वास्थ्य की सोच और तस्वीर


    भोपाल।
    बीमारी जब शरीर से पहले मन को तोड़ने लगे, जब इलाज का नाम सुनते ही जेब का हिसाब लगाया जाने लगे और जब अस्पताल किसी डरावनी जगह जैसे लगने लगें, तब समाज को केवल डॉक्टर नहीं, भरोसे की जरूरत होती है।

    आज देश के साथ मध्य प्रदेश में “आरोग्य भारती” ने पिछले वर्षों में यही भरोसा लौटाने का काम किया है।

    निःशुल्क सेवाएँ, संवेदनशील व्यवहार और समग्र स्वास्थ्य दृष्टि के माध्यम से यह संगठन उन लाखों लोगों के लिए आशा बन गया है, जिन्‍हें कल तक धनाभाव में उचित स्वास्थ्य देखभाल से वंचित रह जाना पड़ता था। कहने का मतलब कि गरीब से आमजन तक ये स्वास्थ्य सेवाएं बना किसी भेदभाव के निशुल्क दी जा रही हैं, यह ऐसे समाज के लिए बहुत दुखद और प्रेरणा देने वाला है।

    दरअसल, “आरोग्य भारती” कोई नया संगठन नहीं है, ये वर्ष 2002 से स्वास्थ्य संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय एक वैचारिक आंदोलन है। इसका मूल मंत्र है; “रोग से पहले स्वास्थ्य”। यही कारण है कि संगठन इलाज के साथ-साथ जीवनशैली, आहार, योग, पर्यावरण और मानसिक संतुलन को भी स्वास्थ्य का अभिन्न अंग मानता है।

    व्‍यवहारिक धरातल पर “आरोग्य भारती” का कार्यदर्शन

    “आरोग्य भारती” का विश्वास है कि स्वास्थ्य सेवा मानवता, संवेदना और परंपराओं को समर्प‍ित भारत में चिकित्‍सकों और दवाओं तक सीमित नहीं हो सकती। समाज को अपने स्वास्थ्य के प्रति कर्तव्य और उत्तरदायित्व का बोध कराना उतना ही आवश्यक है, जितना कि दैनन्‍दिन जीवन में जरूरी व्‍यवहार को सामान्‍यत: आवश्‍यक माना गया है। इसलिए इसी सोच को साथ ले संगठन आज सभी चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों, सेवाभावी नागरिकों और स्वयंसेवकों को जोड़ते हुए देशभर में कार्य का विस्तार करते हुए अपना कार्य सफलता के साथ कर रहा है।

    आज संगठन की सक्रिय इकाइयाँ देश के 43 प्रांतों और 900 से अधिक जिलों में कार्य कर रही हैं। मध्य प्रदेश में यह कार्य विशेष रूप से प्रभावी रूप में सामने आया है, जहाँ “आरोग्य भारती” के सेवा प्रकल्प समाज की वास्तविक जरूरतों से जुड़े हुए हैं।

    आरोग्य मित्र : समाज के भीतर से निकला समाधान

    स्वास्थ्य को समाज की जड़ों तक पहुँचाने के लिए “आरोग्य भारती” ने ‘आरोग्य मित्र’ की संकल्पना विकसित की। सामान्य शैक्षणिक योग्यता रखने वाले सेवाभावी युवक-युवतियों को प्राथमिक स्वास्थ्य, जीवनशैली, योग, आहार, घरेलू उपचार, प्राथमिक उपचार और सीपीआर जैसी विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। उल्‍लेखित है कि बीते 24 वर्षों में 375 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 9000 से अधिक स्वयंसेवक तैयार किए जा चुके हैं। यही आरोग्य मित्र आज गाँव-गाँव, बस्तियों और शहरी कॉलोनियों में स्वास्थ्य जागरूकता का कार्य कर रहे हैं।

    भोपाल : सेवा का जीवंत मॉडल

    देखने में आया है कि मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में “आरोग्य भारती” के सेवा कार्य मॉडल के रूप में सामने आए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर संगठन की गंभीरता का प्रमाण है निःशुल्क स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम। वर्ष 2021 से निरंतर चल रहे 9 केंद्रों के माध्यम से अब तक 20 हजार से अधिक बच्चों को स्वर्ण प्राशन दिया जा चुका है। यह उन परिवारों के लिए वरदान है जो महँगी दवाइयाँ और सप्लीमेंट नहीं खरीद सकते। इसी तरह भोपाल के आसपास पांच गाँवों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों का परिणाम केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वहाँ के स्वास्थ्य आँकड़ों में स्पष्ट सुधार देखा जा रहा है। समय रहते रोगों की पहचान और जीवनशैली सुधार से लोगों की दवा-निर्भरता कम हुई है।

    योग और जीवनशैली : दवा से पहले समाधान

    भोपाल में 22 स्थानों पर नियमित निःशुल्क योग कक्षाएँ संचालित हो रही हैं। इनमें शामिल होने वाले अधिकांश लोग ऐसे हैं जो या तो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या लंबे समय से दवाओं पर निर्भर रहे हैं। योग ने उन्हें शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य भी दिया है। साथ ही पांच विद्यालयों में नियमित स्वास्थ्य प्रबोधन का कार्य बच्चों में स्वास्थ्य संस्कार विकसित कर रहा है। स्वच्छता, आहार, दिनचर्या और तनाव प्रबंधन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण देकर आरोग्य भारती भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ बनाने में जुटा है।

    महिला टोली : दे रहीं घर-घर स्वास्थ्य की ताकत

    इतना ही नहीं संपूर्ण मध्य प्रदेश में महिला टोली के माध्यम से घरेलू उपचार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह पहल महिलाओं को केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं बनाती, बल्कि उन्हें परिवार और समाज के लिए स्वास्थ्य की धुरी बनाती है। साधारण घरेलू उपायों से छोटे-मोटे रोगों का समाधान गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है।

    पर्यावरण और स्वास्थ्य का साझा सरोकार

    “आरोग्य भारती” का मानना है कि प्रदूषित पर्यावरण में स्वस्थ समाज की कल्पना संभव नहीं। इसी सोच से प्रतिदिन कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लिया गया। अब तक 1697 पौधे लगाए जा चुके हैं और सभी जीवित हैं, जिनका पूरा रिकॉर्ड रखा गया है। यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य में निवेश जैसा है।

    शिवपुरी की अनुकरणीय पहल ला रही रंग

    “आरोग्य भारती” जिला इकाई शिवपुरी ने सेवा का एक अलग उदाहरण प्रस्तुत किया। शिवपुरी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में आर्थोपेडिक विभाग में एक इंडक्शन, मातृत्व एवं शिशु विभाग में दो इंडक्शन, लगवाकर रोगियों की सुविधा में स्थायी सुधार किया गया। यह दिखाता है कि आरोग्य भारती सेवा को केवल शिविरों तक सीमित नहीं रखता।

    उत्सव से जागरूकता तक

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, धन्वंतरि जयंती और आयुर्वेद दिवस जैसे आयोजनों को आरोग्य भारती ने जन-जागरूकता के उत्सव में बदला है। एक ही वर्ष में लाखों लोगों की सहभागिता इस बात का प्रखर प्रमाण है कि समाज इस स्‍वास्‍थ्‍य के आन्‍दोलन और विचार से जुड़ रहा है।

    आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय कहते हैं, “आरोग्य भारती स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाला एक सेवा संगठन है । जिसके माध्‍यम से देश में अनेक सेवा कार्य नित्‍यप्रति सम्‍पन्‍न हो रहे हैं। उनमें मध्य प्रदेश में भी स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में आज संगठन कई प्रकल्प चला रहा है। यह कार्य निरंतर ठीक ढंग से चलता रहे इसके लिए निरंतर प्रशिक्षण कार्य किया जा रहा है। आरोग्य भारती का प्रयास है कि मध्य प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक वनस्पति संपदाओं का उपयोग करते हुए रोगी तो स्वस्थ हो ही साथ में स्वस्थ व्यक्ति भी रोगी न बने।”

    उन्‍होंने आगे बताया, “हमारा प्रयास रहता है कि वनवासी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को प्रशिक्षित कर आरोग्य मित्र बना सकें । ताकि उनके माध्‍यम से लोगों की जीवन शैली में सुधार कर अधिकाधिक लोगों को स्वस्थ रख पाएं। साथ ही सर्व समावेशी चिकित्सा पद्धति का विकास हो, जिससे कि चिकित्सा पद्धति आधारित चिकित्सा न होकर रोगी आधारित चिकित्सा हो और रोगी जल्दी स्वस्थ हो सके, यह हमारी प्राथमिकता के साथ भविष्य का दृष्टिकोण है।”

    उधर, इस संबंध में आरोग्‍य भारती के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख मिहिर कुमार कहते हैं कि “माई हेल्थ माई रिपॉन्सबिलिटी” की भावना जब समाज में जड़ पकड़ लेगी, तब स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण संभव होगा। इसी सोच को लेकर आरोग्‍य भारती का गठन हुआ और अपने गठन से लेकर आज तक संगठन इसी उद्देश्‍य को लेकर प्रमुखता से चल रहा है, हमारे संगठन का कुल लक्ष्य यही है कि कोई भी चिकित्सा, पद्धति आधारित नहीं होनी चाहिए वह रोगी आधारित चिकित्सा विकसित होनी चाहिए, वास्‍तव में हम इसी लक्ष्‍य को लेकर आज आगे बढ़ रहे हैं।

  • एबी रोड स्थित सम्राट होटल में आग लगी, दमकल ने समय रहते काबू पाया, कोई जनहानि नहीं

    एबी रोड स्थित सम्राट होटल में आग लगी, दमकल ने समय रहते काबू पाया, कोई जनहानि नहीं


    देवास: एबी रोड स्थित सम्राट होटल के एक कमरे में शुक्रवार दोपहर अज्ञात कारणों से आग लग गई। हालांकि, इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, और आग को जल्द ही दमकल द्वारा बुझा लिया गया। नगर निगम के दमकल कर्मियों की त्वरित कार्रवाई के कारण बड़ा हादसा टल गया।जानकारी के अनुसार सम्राट होटल की दूसरी मंजिल के एक कमरे में आग लगने से कमरे में रखा सामान जलकर क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के समय होटल के कर्मचारी ग्राउंड फ्लोर पर थे। जब उन्हें दूसरी मंजिल से धुआं उठते हुए दिखाई दिया, तो उन्होंने तुरंत नगर निगम के फायर ब्रिगेड को सूचना दी। इसके बाद दमकल की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया।

    नगर निगम के अधिकारी और स्थानीय नेताओं ने मौके का दौरा किया। निगम सत्तापक्ष के नेता मनीष सेन ने बताया कि होटल के कर्मचारी जब धुआं उठता हुआ देखा, तो उन्होंने बिना समय गंवाए दमकल विभाग को सूचित किया। आग के फैलने से पहले ही उसे नियंत्रित कर लिया गया जिससे कोई बड़ा हादसा टल गया।इसी दौरान पुलिस अधिकारी सीएसपी सुमित अग्रवाल भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा सम्राट होटल की दूसरी मंजिल के कमरे में आग लगी थी जिसे समय रहते काबू कर लिया गया। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

    दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के बाद, जैसे ही सूचना प्राप्त हुई, फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं। इन गाड़ियों में आधुनिक उपकरण थे जिनकी मदद से आग को जल्दी बुझाया जा सका। हालांकि आग से कमरे में रखे कुछ सामान जल गए लेकिन बड़ा नुकसान टल गया।आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। पहले अनुमान के अनुसार यह शॉर्ट सर्किट के कारण हो सकती है, लेकिन इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पुलिस और दमकल विभाग दोनों ही आग के कारणों की जांच में जुटे हैं।

    सुरक्षा की महत्वता

    इस घटना ने होटल मालिकों और अधिकारियों को आग से संबंधित सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है। होटल में आग बुझाने के लिए पर्याप्त उपाय किए गए थे, लेकिन फिर भी आग की स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या सभी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा था।होटल में आग बुझाने की व्यवस्था के अलावा, अग्निशमन विभाग ने होटल मालिकों को आग से बचाव के लिए समय-समय पर निरीक्षण करने और सभी सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी है।
  • कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया

    कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके आरोप लगाया कि 2019 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने मध्य प्रदेश सरकार को इंदौर और भोपाल में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    कैग की 2019 की रिपोर्ट में साफ तौर पर दोनों शहरों की जल आपूर्ति में गंभीर कमियों का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां थीं जिनमें पानी के नमूनों का परीक्षण भी सही नहीं किया गया था और कई नमूनों में गंदगी और मल कोलिफॉर्म पाए गए थे जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरे का कारण हैं। इस रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जिससे अब इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है।

    उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक एडीबी से 906 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था ताकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर में पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। हालांकि इस कर्ज का इस्तेमाल किया गया था लेकिन कैग की रिपोर्ट में यह साफ सामने आया कि इन शहरों में पानी का प्रबंधन अपर्याप्त था और भ्रष्टाचार के कारण पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।कैग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया गया था:

    इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में पांच जोनों को ही नियमित पानी की आपूर्ति हो रही है। शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से केवल 5.30 लाख परिवारों को नल कनेक्शन मिल पाए हैं।2013 से 2018 तक 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे।दोनों शहरों में 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए थे।नगर निगमों ने रिसाव को ठीक करने में बेहद लंबा समय लिया था 22 से 182 दिन ।पानी के 30 से 70 प्रतिशत हिस्से का कोई हिसाब नहीं था जो पानी बिना कारण बर्बाद हो रहा था।

    उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कैग ने 2019 में ही इन मुद्दों को उठाया था लेकिन सरकार तब भी सोती रही और अब जब बड़ा हादसा हो चुका है तब सरकार जागी है। सिंघार का कहना था कि बिना किसी बड़ी त्रासदी के सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती और अब सरकार को इस गंभीर लापरवाही पर जवाब देना चाहिए।इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

  • दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी

    दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मच गया है लेकिन उनके राजनीतिक गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल में अब तक इस मामले पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिग्विजय सिंह ने हाल ही में संघ और भाजपा की प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट किया था जिस पर विवाद छिड़ गया है। इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने नाराजगी जताई है लेकिन ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खामोशी का माहौल बना हुआ है।

    कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि यह पोस्ट पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक खासकर उनके बेटे जयवर्धन सिंह और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह उनके समर्थन में खड़े हैं। जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के संगठन के प्रति समर्पण को व्यक्त करते हुए राहुल गांधी की यात्रा से जुड़े कुछ फोटो भी पोस्ट किए और कहा कि उनके पिता के लिए संगठन सर्वोपरि है।पूर्व मुख्यमंत्री के संगठन के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाने वालों को डॉ. गोविंद सिंह ने गलत बताया।

    उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के संगठन के प्रति समर्पण पर संदेह करना अनुचित है और उनके द्वारा की गई पोस्ट केवल एक व्यंग्य है न कि भाजपा या संघ की प्रशंसा।दिग्विजय सिंह की पोस्ट के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में उनके कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेताओं जैसे पूर्व मंत्री केपी सिंह और राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके साथ ही उनके विरोधी भी फिलहाल चुप हैं जिससे यह साफ है कि कांग्रेस के नेता शायद पार्टी नेतृत्व के रूख का इंतजार कर रहे हैं।

    वहीं भाजपा के नेताओं ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ हमलावर रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दिया जबकि नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सरदार पटेल के रूप में निरूपित किया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे दिग्विजय सिंह की राज्यसभा में दोबारा जाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश बताया। अब देखना होगा कि दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट का असर कांग्रेस पार्टी और उनके गढ़ ग्वालियर-चंबल में किस प्रकार होता है और क्या इस विवाद से पार्टी में कोई बड़े बदलाव होते हैं।

  • जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा

    जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा


    जबलपुर । हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 15 लोगों की मौत ने प्रदेशभर में चिंता की लहर दौड़ा दी है और अब जबलपुर के नागरिकों में भी जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। जबलपुर में जल वितरण पाइपलाइनों की हालत बेहद खराब है क्योंकि शहर की करीब 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइनें नाली-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही हैं।

    इन पाइपलाइनों का निर्माण आमतौर पर 20 साल पहले किया गया था लेकिन कई लाइनें 40 से 50 साल पुरानी हो चुकी हैं। समय के साथ इन पाइपलाइनों में क्षरण हो चुका है और इनसे लगातार नाली के पानी धूल और मिट्टी का संपर्क होता है। इस कारण पाइपलाइनों में लीकेज हो रहा है जिससे गंदगी और दूषित पानी वितरण के दौरान पेयजल में घुलने की संभावना बढ़ गई है।

    इंदौर में हुई घटना के बाद जबलपुर नगर निगम ने इस गंभीर समस्या को लेकर सक्रियता दिखाई और जल विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों का गठन किया। ये टीमें शहर के विभिन्न हिस्सों से पेयजल के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता जांचने में जुट गईं। हालांकि एक दिन सैंपल लेने के बाद विभागीय टीम की गतिविधियां सुस्त पड़ गईं जिससे इस मुद्दे को लेकर नागरिकों के बीच और भी चिंता बढ़ गई है।

    विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शहर में जल वितरण की पाइपलाइनों के रखरखाव और सही तरीके से मरम्मत की आवश्यकता है ताकि पानी की गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े। यह समस्या इंदौर जैसी बड़ी घटनाओं को टालने के लिए जल्द सुलझाई जानी चाहिए।नागरिकों ने इस विषय पर नगर निगम और प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है ताकि भविष्य में दूषित पानी से कोई स्वास्थ्य संकट उत्पन्न न हो।

  • कोहरे के कारण सड़क हादसा बाइक से पिकअप में टकरा कर युवक की मौत, पिता घायल

    कोहरे के कारण सड़क हादसा बाइक से पिकअप में टकरा कर युवक की मौत, पिता घायल


    मंडला । मंडला जिले के चौकी पिंडरई क्षेत्र में शुक्रवार सुबह घने कोहरे के कारण एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसमें 21 वर्षीय युवक करण यादव की मौत हो गई। हादसा सुबह करीब 6 बजे हुआ जब वह परीक्षा देने जबलपुर जाने के लिए बाइक से पिंडरई जा रहा था।

    घटना के अनुसार करण यादव बाइक पर अपने पिता बसंत यादव के साथ जा रहा था। जैसे ही वह तुमेगांव मंदिर के पास पहुंचे घने कोहरे के कारण उन्हें सड़क किनारे खड़ी पिकअप वाहन दिखाई नहीं दी। नतीजा यह हुआ कि बाइक सीधे पिकअप वाहन से टकरा गई। हादसे के समय पिकअप वाहन पूरी तरह से खड़ा था और कोहरे के कारण करण को उसे देखने का मौका नहीं मिला।

    इस गंभीर हादसे में करण को बहुत गंभीर चोटें आईं जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसके पिता बसंत यादव को मामूली चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए सिविल अस्पताल नैनपुर में भर्ती कराया गया।
    घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल बना हुआ है।

    प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है लेकिन घना कोहरा और सड़क पर खड़ी गाड़ी को हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
    अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के हादसों से बचने के लिए सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है खासकर कोहरे जैसे मौसम में।

  • मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने बढ़ाई मुश्किलें 9 जिलों में ऑरेंज अलर्ट

    मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने बढ़ाई मुश्किलें 9 जिलों में ऑरेंज अलर्ट


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में जनवरी की शुरुआत के साथ ही ठंड और घने कोहरे ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शीतलहर के कारण दिन-प्रतिदिन तापमान गिर रहा है और सड़कों पर सन्नाटा छा रहा है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है जिससे आने वाले दिनों में और ठंड और कोहरे का सामना करना पड़ सकता है।

    9 जिलों में अति घने कोहरे का अलर्ट

    मौसम विभाग ने ग्वालियर दतिया भिंड रीवा सतना पन्ना छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में अति घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में अगले 24 से 48 घंटे तक कोहरे का असर रहने की संभावना जताई गई है साथ ही कुछ इलाकों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और गिरावट हो सकती है।

    पचमढ़ी रहा प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान

    प्रदेश का प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी एक बार फिर सबसे ठंडा स्थान रहा जहां न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे ठिठुरन और बढ़ गई है और खासकर पहाड़ी इलाकों में लोगों को ठंड से राहत मिलना मुश्किल हो रहा है।

    प्रमुख शहरों का न्यूनतम तापमान

    शिवपुरी – 6 डिग्री ,टीकमगढ़ – 8 डिग्री,राजगढ़ – 9 डिग्री,रीवा – 9.2 डिग्री,भोपाल – 10.6 डिग्री,ग्वालियर – 10.2 डिग्री,इंदौर – 12.4 डिग्री,बैतूल – 10 मीटर से कम विजिबिलिटी

    बैतूल में सबसे घना कोहरा

    बैतूल जिले में इस मौसम का अब तक का सबसे घना कोहरा दर्ज किया गया है। कई इलाकों में दृश्यता 10 मीटर से भी कम रही जिससे सड़क यातायात में परेशानी आई। कोहरे के कारण उत्तर भारत से आने-जाने वाली कई ट्रेनें भी देरी से चल रही हैं। मौसम विभाग ने अगले एक-दो दिन में और घने कोहरे की संभावना जताई है खासकर सुबह के समय। इस मौसम में ठंड और कोहरे का असर शहरों और कस्बों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी देखा जा रहा है जहां लोग गर्म कपड़े और हीटर का इस्तेमाल बढ़ा चुके हैं।

  • भोपाल के संजय नगर में बिजली डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट में लगी भीषण आग राहत की बात – कोई जनहानि नहीं

    भोपाल के संजय नगर में बिजली डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट में लगी भीषण आग राहत की बात – कोई जनहानि नहीं


    भोपाल । भोपाल के शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र स्थित संजय नगर में शुक्रवार रात एक बिजली डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट डीपी में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग की लपटें आसमान तक उठती हुईं और इलाके में घना धुआं फैल गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

    घटना का समय और स्थान
    यह घटना शुक्रवार रात करीब 10:30 बजे के आसपास की है। संजय नगर क्षेत्र में एक बिजली पोल पर लगे डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट डीपी से अचानक चिंगारी निकली जिसके बाद आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग तेज़ी से फैलने लगी और आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए।

    आग फैलने का कारण

    स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में पोल के ऊपर से तेज आवाज के साथ चिंगारी निकली उसके बाद आग की लपटें उठने लगीं। प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की आशंका जताई जा रही है हालांकि बिजली विभाग की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। डीपी में लगी आग से तारों में जलन हुई जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

    दमकल वाहन का न पहुंच पाना

    घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड को बुलाया गया लेकिन संजय नगर की संकरी गलियों के कारण दमकल वाहन मौके तक नहीं पहुंच सका। इस बीच बिजली विभाग ने आग के फैलने की संभावना को देखते हुए क्षेत्र की बिजली आपूर्ति तुरंत बंद कर दी जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

    स्थानीय लोगों की सतर्कता

    आग की लपटें तेज हो गईं तो स्थानीय लोगों ने बाल्टियों और अन्य संसाधनों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने आग बुझा दी। अगर यह प्रयास समय पर न किया जाता तो आग पास के घरों तक फैल सकती थी।

    प्रशासन और बिजली विभाग की प्रतिक्रिया
    घटना की जानकारी मिलने के बाद बिजली विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और जली हुई डीपी का निरीक्षण किया। अधिकारियों का कहना है कि डीपी को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इलाके में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बिजली आपूर्ति बहाल करने की कोशिश की जा रही है। बिजली विभाग ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए इलाके में लगे पुराने उपकरणों की जांच की जाएगी। स्थानीय निवासियों ने भी यह मांग की है कि जर्जर बिजली ढांचे की समय रहते मरम्मत की जाए ताकि ऐसी घटनाएं फिर से न हों।

  • इंदौर में जहरीले पानी से मौतों का मामला नगर निगम कमिश्नर हटाए गए 15 मौतों के बीच सरकार ने हाईकोर्ट में केवल 4 मौतें मानी

    इंदौर में जहरीले पानी से मौतों का मामला नगर निगम कमिश्नर हटाए गए 15 मौतों के बीच सरकार ने हाईकोर्ट में केवल 4 मौतें मानी


    इंदौर । इंदौर में दूषित और जहरीले पानी के कारण हुई मौतों का मामला प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है। सरकारी तंत्र की लापरवाही और बढ़ते जनआक्रोश के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर नगर निगम के कमिश्नर दिलीप यादव को पद से हटा दिया। साथ ही एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई तब की गई जब इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में नर्मदा जल आपूर्ति से जुड़े पानी को पीने के बाद सैकड़ों लोग बीमार पड़े और कई की जान चली गई।

    स्थानीय लोगों ने पहले ही पानी में गंदगी और बदबू की शिकायत की थी लेकिन प्रशासन ने समय पर पानी की आपूर्ति को रोकने के बजाय इसे नजरअंदाज किया। इसके परिणामस्वरूप कई मौतें हुईं जिनकी संख्या को लेकर विवाद बना हुआ है। मृतकों के परिजनों और अस्पतालों के अनुसार अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है जबकि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट में केवल 4 मौतों की पुष्टि की है।

    हाईकोर्ट में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने बताया कि सभी मृतकों की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी। मृतकों की सूची में उर्मिला 28 दिसंबर तारा 60 नंदा 70 और हीरालाल 65 शामिल हैं। सरकार ने इसे एक “प्रारंभिक रिपोर्ट” बताया जबकि अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को तय की है।

    इंदौर के अस्पतालों और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी द्वारा की गई जांच में पानी को पीने योग्य नहीं पाया गया। लैब रिपोर्ट में फीकल कॉलिफॉर्म ई-कोलाई विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। विशेष रूप से हैजा फैलाने वाला बैक्टीरिया विब्रियो कोलेरी भी पानी में मौजूद था हालांकि सरकार इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहती। नगर निगम की लैब में भेजे गए सैंपल भी असंतोषजनक पाए गए।इस घटनाक्रम के बाद इंदौर नगर निगम में तीन नए अपर आयुक्त नियुक्त किए गए हैं। इनमें खरगोन के सीईओ आकाश सिंह आलीराजपुर के सीईओ प्रखर सिंह और इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक शामिल हैं।

    राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बयानबाजी हो रही है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने इंदौर में लोगों को “पानी नहीं जहर” बांटने का आरोप लगाया। वहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान भी विवादों में रहे जिससे विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इंदौर के प्रभावित इलाकों में अब लोग टैंकरों बोतलबंद पानी और बोरिंग पर निर्भर हैं। प्रशासन ने पानी की आपूर्ति की निगरानी और जांच तेज करने का दावा किया है लेकिन मौतों के वास्तविक आंकड़े और जिम्मेदारी तय होने पर सवाल अभी भी खड़े हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण


    उज्जैन । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन जिले के खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने क्षेत्र में शिक्षा, कृषि, और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए कई योजनाओं का उद्घाटन किया।
    मुख्यमंत्री ने खाचरौद में 39 विकास कार्यों की शुरुआत की, जिनमें 16 पूर्ण और 23 नए कार्य शामिल हैं। इनमें 35.40 करोड़ रुपये की लागत से सांदीपनि विद्यालय भवन और 11.30 करोड़ रुपये की लागत से नई कृषि उपज मंडी प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय में आधुनिक शिक्षा सुविधाओं का प्रबंध किया जाएगा, जिससे छात्रों का भविष्य उज्जवल होगा।
    इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में स्मार्ट क्लासेस, संयुक्त तहसील कार्यालय, जनपद पंचायत भवन और स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ी परियोजनाओं का भी भूमिपूजन किया। कृषि उपज मंडी में विश्राम भवन, भोजनालय और पेयजल की सुविधा भी प्रदान की जाएगी, ताकि किसानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर खाचरौद में फूड प्रोसेसिंग पार्क की घोषणा की, जो क्षेत्र के कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार प्रदान करेगा। इसके अलावा, उन्होंने नागदा से खाचरौद होते हुए उज्जैन और जावरा तक फोरलेन हाईवे बनाने की योजना की भी जानकारी दी, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से सीधा लाभ मिलेगा।
    किसानों के हित में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित किया और बताया कि सरकार गेहूं खरीदी पर 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दे रही है। इसके साथ ही, अगले तीन वर्षों में 32 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।
    मुख्यमंत्री ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना और केन-बेतवा परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाई जाएगी, जिससे किसानों को  फायदेमंद होगा।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों ने इन विकास कार्यों को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताया। इस मौके पर उज्जैन सांसद अनि फिरोजिया, राज्यसभा सदस्य उमेशनाथ महाराज, खाचरौद विधायक डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे।