Category: Madhya Pradesh

  • MP में आयकर विभाग का बड़ा धमाका जबलपुर और कटनी में माइनिंग कारोबारियों और BJP नेता के ठिकानों पर रेड

    MP में आयकर विभाग का बड़ा धमाका जबलपुर और कटनी में माइनिंग कारोबारियों और BJP नेता के ठिकानों पर रेड


    जबलपुर ।  मध्य प्रदेश के जबलपुर/कटनी में भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के खिलाफ जांच एजेंसियों ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार तड़के आयकर विभाग की टीमों ने जबलपुर और कटनी में एक साथ दबिश देकर खनन कारोबारियों और रसूखदार नेताओं के होश उड़ा दिए। यह पूरी कार्रवाई आय से अधिक संपत्तिटैक्स चोरी और संदिग्ध लेन-देन की शिकायतों के आधार पर की गई है।

    स्वच्छता अभियान का स्टिकर लगा कर पहुँची टीम
    इस छापेमारी में सबसे चौंकाने वाली बात आयकर विभाग की रणनीति रही। विभाग के अधिकारी किसी सरकारी गाड़ी के बजाय ऐसी कारों में पहुँचे जिन पर स्वच्छता जागरूकता अभियान 2025 के पोस्टर लगे थे। जबलपुर के सिविल लाइन स्थित खनन कारोबारी राजीव चड्ढा के घर जब ये गाड़ियां रुकींतो सुरक्षाकर्मियों को लगा कि नगर निगम की टीम किसी सर्वे के लिए आई है। लेकिन जैसे ही अधिकारियों ने अपना परिचय दियाहड़कंप मच गया।

    BJP नेता और माइनिंग किंग रडार पर

    छापेमारी का मुख्य केंद्र कटनी और जबलपुर रहे। कटनी में जिला पंचायत उपाध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अशोक विश्वकर्मा के ठिकानों पर आयकर विभाग ने घेराबंदी की है। अशोक विश्वकर्मा की फर्म वीएमसी विश्वकर्मा माइंस  के नाम से संचालित होती है। अधिकारियों ने अशोक विश्वकर्मा के निवास के साथ-साथ उनके तीन भाइयों शंकर लाल विश्वकर्मा व अन्य के ठिकानों पर भी एक साथ छापा मारा। ग्राम टिकरिया और सिघनपुरी स्थित खदानों पर भी टीम की मौजूदगी रही। वहींजबलपुर के रसल चौक और सिविल लाइन इलाके में बड़े खनन कारोबारी राजीव चड्ढा और नितिन शर्मा के घर और दफ्तरों को खंगाला जा रहा है। चड्ढा माइन्स के ऑफिस से भारी मात्रा में दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

    25 सदस्यों की टीम और भारी पुलिस बल

    सूत्रों के अनुसारइस पूरी कार्रवाई में भोपालइंदौर और जबलपुर के लगभग 25 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम में महिला अधिकारियों को भी शामिल किया गया है ताकि घरों की सघन तलाशी ली जा सके। खबर लिखे जाने तकअधिकारियों ने डिजिटल सबूतबैंक लॉकर के कागजात और संदिग्ध निवेश से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया है।

    करोड़ों की टैक्स चोरी का अनुमान

    आयकर विभाग को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि खनन के कारोबार में बड़े पैमाने पर कैश का लेन-देन हो रहा है और वास्तविक आय को छुपाया जा रहा है। जांच टीम का मानना है कि इस छापेमारी के अंत तक करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी और बेनामी संपत्तियों का खुलासा हो सकता है। फिलहालकिसी भी अधिकारी ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया हैक्योंकि सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। मध्य प्रदेश में चुनाव के बाद आर्थिक अनियमितताओं पर यह अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाहियों में से एक मानी जा रही है।
    भाजपा नेता के घर हुई इस रेड ने सियासी गलियारों में भी चर्चा तेज कर दी है। अब देखना यह है कि जांच के बाद क्या बड़े खुलासे होते हैं। लोकेशन जबलपुर सिविल लाइनरसल चौक और कटनी जलपा वार्डटिकरिया। निशाने पर राजीव चड्ढानितिन शर्मा और भाजपा नेता अशोक विश्वकर्मा। वजह आय से अधिक संपत्तिटैक्स चोरी और अवैध माइनिंग लेन-देन। विभाग आयकर विभाग भोपाल और इंदौर की संयुक्त टीम।

  • ग्वालियर में अपात्र लोगों को पुलिस सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब..

    ग्वालियर में अपात्र लोगों को पुलिस सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब..


    ग्वालियर/मध्यप्रदेश के ग्वालियर में अपात्र और निजी व्यक्तियों को दी जा रही पुलिस सुरक्षा का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट के संज्ञान में आया है। इस मुद्दे को गंभीर जनहित से जुड़ा मानते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि पुलिस बल का इस तरह दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है।यह मामला याचिकाकर्ता नवल किशोर शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद निजी व्यक्तियों को दी जा रही पुलिस सुरक्षा की कोई प्रभावी समीक्षा नहीं की गई। इसके कारण आज भी कई ऐसे लोग पुलिस सुरक्षा का लाभ उठा रहे हैं, जो इसके पात्र नहीं हैं।

    याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डीपी सिंह ने अदालत को बताया कि ग्वालियर में पुलिस बल की पहले से ही भारी कमी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी निजी व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। इससे न केवल आम जनता की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।वकील ने अदालत के सामने उदाहरण पेश करते हुए बताया कि विनय सिंह नामक व्यक्ति को दी गई पुलिस सुरक्षा के दौरान ही उनके खिलाफ वसूली सहित पांच आपराधिक मामले दर्ज हुए। यह साफ तौर पर पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब सुरक्षा पाने वाले ही अपराधों में लिप्त हों, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।

    हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि पूर्व आदेश के बाद सूचना के अधिकार RTI के तहत जो जानकारी सामने आई, वह और भी चिंताजनक है। RTI से खुलासा हुआ कि 19 व्यक्तियों की सुरक्षा में 33 पुलिसकर्मी तैनात थे, जबकि इनमें से अधिकांश व्यक्ति सुरक्षा के पात्र ही नहीं थे। यह स्थिति तब है जब शहर में आम नागरिकों को पर्याप्त पुलिस सहायता नहीं मिल पा रही है।इससे पहले भी हाईकोर्ट इस तरह के मामलों में सख्त रुख अपना चुका है। दिलीप शर्मा और संजय शर्मा को दी गई पुलिस सुरक्षा के मामले में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए दोनों भाइयों से सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश दिए थे। उस समय कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी तुच्छ या अपात्र व्यक्ति को सरकारी खर्च पर पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा सकती।

    न्यायालय ने अपने पुराने आदेशों में यह भी कहा था कि पुलिस सुरक्षा देने के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और ठोस नियम बनाए जाने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि सुरक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था का इस्तेमाल केवल वास्तविक और प्रमाणित खतरे वाले मामलों में ही होना चाहिए, न कि प्रभाव या रसूख के आधार पर।हाईकोर्ट ने यह सुझाव भी दिया था कि जिन मामलों में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा या निजी कारणों से खतरे की आशंका हो, और संबंधित परिवार के पास लाइसेंसी हथियार उपलब्ध हों, वहां निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था एक बेहतर विकल्प हो सकती है। कोर्ट के अनुसार, निजी सुरक्षा गार्ड कई बार पुलिसकर्मियों की तुलना में ज्यादा सजग और प्रभावी साबित हो सकते हैं, जबकि पुलिस बल को कानून-व्यवस्था के मूल कामों में लगाया जाना चाहिए।

    ताजा सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक पूर्व आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया और अपात्र लोगों को दी जा रही सुरक्षा पर क्या कार्रवाई की गई है। नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।यह मामला न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे प्रदेश में पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और जवाबदेही से जुड़ा एक अहम उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले समय में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और कोर्ट का अगला रुख इस व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

  • MP: जबलपुर और कटनी में कई ठिकानों पर आयकर विभाग की रेड…

    MP: जबलपुर और कटनी में कई ठिकानों पर आयकर विभाग की रेड…


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh) के कटनी (Katni) में आय से अधिक संपत्ति के मामले में आयकर विभाग (Income Tax Department) की टीम ने बुधवार सुबह बड़ी छापामार कार्रवाई (Guerrilla Action) की। भोपाल,जबलपुर,कटनी के आयकर विभाग के अधिकारियों ने मारा छापा मारा है। लगभग 25 सदस्यों ने छापामार कार्रवाई की। इस कार्रवाई में महिलाएं भी शामिल थीं। जबलपुर में सिविल लाइन स्थित खनन कारोबारी राजीव चड्ढा (Mining businessman Rajiv Chadha) और नितिन शर्मा के घर आयकर विभाग की टीम अचानक से पहुंची और सर्चिग शुरू कर दी।

    इसके साथ ही कटनी में जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता अशोक विश्वकर्मा (BJP leader Ashok Vishwakarma) तथा उनके तीन भाईयों के ठिकानों पर भी एक साथ छापे मारे गए। तीनों ही स्थानों पर इंदौर और भोपाल से आई आयकर विभाग की टीमें कार्रवाई कर रही हैं। जानकारी के अनुसार आय से अधिक संपत्ति टैक्स चोरी और अवैध लेनदेन की शिकायतें मिलने के बाद यह कार्यवाही हुई है। फिलहाल अभी टीम को क्या मिला है इसकी जानकारी सामने नही आई है,कार्रवाई पूरी होते ही आयकर टीम बताएगी।

    जबलपुर जिले में सिविल लाइन रसल चौक स्थित खनन कारोबारियों पर राजीव चड्ढा ओर नितिन शर्मा के घर आयकर की टीम ने छापा मारा है। चड्डा माइन्स के ऑफिस राजीव चड्ढा के बाद नितिन शर्मा के घर से भी टीम को कई दस्तावेज मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि इस जांच में बड़ी टैक्स चोरी का खुलासा हो सकता है।

    आयकर विभाग की टीम ‘स्वच्छता जागरूकता अभियान 2025’ का पोस्टर लगी हुई कार से सिविल लाइन स्थित कारोबारी के घर पहुंची थी, कारोबारी के चौकीदार को पहले लगा कि नगर निगम की टीम किसी सर्वे के लिए आई है, लेकिन कुछ ही देर में स्पष्ट हो गया कि यह आयकर विभाग की छापामार कार्रवाई के लिए आई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति, टैक्स चोरी और अवैध लेन-देन से जुड़े मामलों को लेकर की जा रही है। सर्चिग के दौरान क्या-क्या सामने आता है, इसको लेकर फिलहाल आयकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    मिली जानकारी के अनुसार खनन कारोबारी राजीव चड्डा और उनके कुछ साथियों के खिलाफ आयकर विभाग को शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर जबलपुर, कटनी में एक साथ कार्रवाई की गई है। आयकर विभाग की टीमें फिलहाल कारोबारियों के घर और कार्यालयों में दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।

    कटनी जिले के जिला पंचायत उपाध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अशोक विश्वकर्मा के भाई शंकर लाल विश्वकर्मा के यहां तड़के 4 बजे से आयकर विभाग की टीम ने अशोक विश्वकर्मा के निवास, फर्म और बॉक्साइट माइनिंग से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापा मारा है। विश्वकर्मा माइनिंग कारोबारी हैं और उनकी फर्म वीएमसी विश्वकर्मा माइंस के नाम से संचालित है। विश्वकर्मा और उनके अन्य तीन भाइयों के जलपा वार्ड स्थित घर फर्म ग्राम टिकरिया और सिघनपुरी में खदान है। यह कार्यवाही भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में आयकर विभाग की ओर घर और ऑफिस में दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

  • MP: ग्वालियर में अपात्र लोगों को मिल रही पुलिस सुरक्षा… HC ने शासन को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

    MP: ग्वालियर में अपात्र लोगों को मिल रही पुलिस सुरक्षा… HC ने शासन को नोटिस जारी कर मांगा जवाब


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में अपात्र लोगों (Ineligible People) को दी जा रही पुलिस सुरक्षा (Police Protection) का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट (High Court) के संज्ञान में आया है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि निजी व्यक्तियों को दी जाने वाली पुलिस सुरक्षा की समीक्षा के लिए पूर्व में कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके चलते कई अपात्र लोग आज भी पुलिस सुरक्षा में घूम रहे हैं, जबकि उनके साथ तैनात पुलिसकर्मियों के अनैतिक गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप भी सामने आए हैं।

    मामले को जनहित से जुड़ा मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता नवल किशोर शर्मा की ओर से पैरवी कर रहे वकील डीपी सिंह ने बताया कि पुलिस बल की कमी के बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी निजी व्यक्तियों की सुरक्षा में लगाए गए हैं। इन पर लाखों रुपए का सरकारी खर्च हो रहा है, जबकि संबंधित व्यक्ति सुरक्षा के पात्र नहीं हैं।

    उन्होंने विनय सिंह को दी गई पुलिस सुरक्षा का उदाहरण देते हुए बताया कि सुरक्षा के दौरान ही उनके खिलाफ वसूली सहित पांच आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए, जो सुरक्षा के दुरुपयोग को दर्शाता है।

    हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बाद सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी में सामने आया कि 19 व्यक्तियों की सुरक्षा में 33 पुलिसकर्मी तैनात थे, जिनमें से अधिकांश अपात्र पाए गए। इससे पहले भी हाईकोर्ट दिलीप शर्मा और संजय शर्मा को दी गई सुरक्षा के मामले में कड़ी टिप्पणी कर चुका है। कोर्ट ने दोनों भाइयों से सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश दिए थे और स्पष्ट कहा था कि किसी तुच्छ या अपात्र व्यक्ति को पुलिस सुरक्षा नहीं दी जानी चाहिए।

    न्यायालय ने यह भी कहा था कि पुलिस सुरक्षा देने के लिए स्पष्ट और ठोस नियम बनाए जाने चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया था कि यदि किसी परिवार के पास लाइसेंसी हथियार हैं और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के कारण जान का खतरा है, तो ऐसे मामलों में निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था की जा सकती है, जो पुलिसकर्मियों की तुलना में अधिक सजग और प्रभावी हो सकते हैं।

  • मेसी इवेंट विवाद में नया मोड़; पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

    मेसी इवेंट विवाद में नया मोड़; पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा पत्र


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार में खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने हाल ही में कोलकाता में हुए लियोनेल मेसी के GOAT टूर कार्यक्रम से जुड़ी घटनाओं को लेकर इस्तीफा दे दिया। मेसी के कार्यक्रम में कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुई अराजकता और तोड़फोड़ के बाद बिस्वास पर भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस मुद्दे पर तनाव बढ़ने के बाद बिस्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने खुद को खेल मंत्रालय की जिम्मेदारियों से मुक्त करने का अनुरोध किया।

    बिस्वास ने पत्र में कहा कि वे मेसी इवेंट की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। उनका यह कदम इस विवाद की गंभीरता को दर्शाता है और टीएमसी तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण संदेश भेजता है खासकर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिस्वास के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है और अब खुद इस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने का निर्णय लिया है।

    इस विवाद के बाद राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल SIT का गठन किया है। SIT में चार वरिष्ठ आईपीएस अफसरों को शामिल किया गया है। मुख्य सचिव मनोज पंत ने बताया कि एसआईटी की जांच में कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में बिधाननगर के पुलिस उपायुक्त अनीश सरकार को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही बंगाल के खेल सचिव राजेश कुमार सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और सॉल्ट लेक स्टेडियम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डी के नंदन की सेवाएं वापस ले ली गई हैं।

    इस घटना के बाद टीएमसी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के विवाद या आलोचना से बचने के लिए पूरी तरह से पारदर्शी जांच करेगी। इस मामले में बिस्वास का इस्तीफा और जांच के आदेश इस बात का संकेत हैं कि ममता बनर्जी की सरकार आगामी चुनावों से पहले किसी भी तरह की अनावश्यक नकारात्मकता से बचना चाहती है। यह पूरा विवाद राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है जो आने वाले समय में चुनावी रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है।

  • मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा कदम अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने डूब प्रभावितों के लिए विशेष पैकेज की मंजूरी

    मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा कदम अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने डूब प्रभावितों के लिए विशेष पैकेज की मंजूरी


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस कदम से राज्य के कर्मचारियों को स्थिर रोजगार मिलने की संभावना है जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
    कैबिनेट ने अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में आवश्यक संशोधन करने को मंजूरी दी है। इस फैसले से न केवल कर्मचारियों की स्थिरता बढ़ेगी बल्कि विभागों में कामकाजी वातावरण भी सुधरेगा। यह निर्णय उन अस्थाई कर्मचारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो वर्षों से अस्थायी पदों पर कार्यरत थे और स्थायिता का इंतजार कर रहे थे।
    इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार ने डूब प्रभावितों के लिए एक बड़ा राहत पैकेज भी मंजूर किया है। अपर नर्मदा परियोजना राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना के तहत प्रभावित 13 873 परिवारों को 1 782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मिलेगा। इसके अलावा एससी और एसटी समुदाय के 50 000 परिवारों को अतिरिक्त राशि दी जाएगी। प्रत्येक प्रभावित परिवार को 12.50 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। इन परियोजनाओं से 71 000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी और 125 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।
    कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2025-26 के लिए 693 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत 3810 कार्यों को पूरा किया जाएगा। इसके अलावा भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के मेंटिनेंस के लिए 90 करोड़ 67 लाख रुपये के बजट को भी स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत राज्य सरकार ने 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 905 करोड़ 25 लाख रुपये को मंजूरी दी है। यह योजना राज्य में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
    आखिरकार वन विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 48 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया गया है जो पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की देखभाल के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए इन फैसलों से राज्य के विकास को नया मोड़ मिलेगा और साथ ही सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह कदम राज्य के नागरिकों की भलाई के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • किसानों के आगे झुकी सरकार उज्जैन सिंहस्थ लैंड पूलिंग योजना पूरी तरह निरस्त 2028 कुंभ से पहले बड़ा फैसला

    किसानों के आगे झुकी सरकार उज्जैन सिंहस्थ लैंड पूलिंग योजना पूरी तरह निरस्त 2028 कुंभ से पहले बड़ा फैसला


    उज्जैन/भोपाल । मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए उज्जैन में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए लाई गई विवादास्पद लैंड पूलिंग योजना’ को आधिकारिक रूप से निरस्त कर दिया है। मंगलवार को सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद उन हजारों किसानों ने राहत की सांस ली है जो पिछले कई महीनों से अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

    विरोध की ज्वाला और आंदोलन की चेतावनी

    इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय किसान संघ का कड़ा रुख रहा। किसान संघ ने स्पष्ट कर दिया था कि वे किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी जमीन सरकार को स्थायी निर्माण के लिए नहीं देंगे। 18 नवंबर को हुए ‘डेरा डालो घेरा डालो’ आंदोलन के बाद सरकार ने मौखिक रूप से योजना निरस्त करने की बात कही थी लेकिन बाद में केवल संशोधन का पत्र जारी किया गया। इस वादाखिलाफी से नाराज किसानों ने 26 दिसंबर से पुनः उग्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी थी जिसके दबाव में अंततः सरकार को पूर्ण निरस्तीकरण का आदेश जारी करना पड़ा।

    अपनों ने भी उठाए थे सवाल

    सरकार के लिए स्थिति तब और असहज हो गई जब सत्तापक्ष के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगे। उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर साफ कहा था कि यह योजना किसान हित में नहीं है। उन्होंने यहाँ तक चेतावनी दे दी थी कि यदि योजना रद्द नहीं हुई तो वे स्वयं किसानों के साथ आंदोलन में बैठने को मजबूर होंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के इस दबाव ने सरकार को पुनर्विचार के लिए विवश किया।

    क्या थी लैंड पूलिंग योजना और क्यों था विरोध

    अगला सिंहस्थ मेला वर्ष 2028 में आयोजित होना है। इसके लिए सरकार चाहती थी कि सिंहस्थ क्षेत्र में आने वाली किसानों की निजी भूमि पर स्थायी निर्माण और बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए। इसके लिए लैंड पूलिंग नीति लाई गई थी।

    किसानों के विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे

    स्थायी कब्जा बनाम अस्थायी उपयोग दशकों से परंपरा रही है कि सिंहस्थ के लिए किसान केवल 5-6 महीनों के लिए अपनी जमीन सरकार को उपयोग हेतु देते थे और मेला समाप्त होने पर जमीन वापस मिल जाती थी। लैंड पूलिंग के तहत जमीन का स्वरूप स्थायी रूप से बदल जाता। रोजी-रोटी का संकट किसानों को डर था कि स्थायी निर्माण के बाद वे खेती नहीं कर पाएंगे जिससे उनकी आजीविका छिन जाएगी।
    अधिकारों का हनन किसान अपनी जमीन पर मालिकाना हक खोने को तैयार नहीं थे।

    निष्कर्ष पुरानी परंपरा ही रहेगी बरकरार

    अब योजना निरस्त होने के बाद 2028 के सिंहस्थ मेले के लिए पुरानी व्यवस्था ही लागू रहने की संभावना है। सरकार अब किसानों से आपसी सहमति और किराए के आधार पर ही मेले के समय जमीन का उपयोग कर सकेगी। यह निर्णय न केवल किसानों की बड़ी जीत माना जा रहा है बल्कि इसे आगामी चुनावों और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के सरकारी प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।

  • उज्जैन में हैवानियत की हदें पार मासूम की हत्या के आरोपी रियाज का पुलिस ने निकाला जुलूस वकीलों का केस लड़ने से इनकार

    उज्जैन में हैवानियत की हदें पार मासूम की हत्या के आरोपी रियाज का पुलिस ने निकाला जुलूस वकीलों का केस लड़ने से इनकार


    उज्जैन/खाचरोद । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। खाचरोद तहसील के एक गाँव में 9 साल की मासूम बच्ची की हत्या के आरोपी रियाज खान का पुलिस ने मंगलवार को सार्वजनिक रूप से जुलूस निकाला। इस दौरान आरोपी के चेहरे पर खौफ साफ देखा जा सकता था वहीं पुलिस और आम जनता के बीच आरोपी के प्रति गहरा गुस्सा नजर आया।

    क्या है पूरी घटना

    9 साल की मासूम बच्ची अपनी नानी के घर छुट्टियां बिताने आई थी। वह घर के बाहर खेल रही थी तभी पड़ोस में रहने वाला रियाज खान उसे बहला-फुसलाकर उठा ले गया। आरोपी ने मासूम के साथ दुष्कर्म करने का असफल प्रयास किया। जब बच्ची ने खुद को बचाने के लिए शोर मचाया तो हैवान बने रियाज ने उसे चुप कराने के लिए एक बोरी में बंद कर दिया और मोगरी भारी डंडे से उस पर तब तक वार किए जब तक वह अधमरी नहीं हो गई।

    शातिर आरोपी की चाल और डॉक्टरों का खुलासा
    वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने बेहद शातिराना खेल खेला। वह खुद बच्ची को लहूलुहान हालत में उठाकर परिजनों के पास पहुँचा और दावा किया कि वह छत से गिर गई है। हालाँकि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बच्ची के चेहरे और शरीर पर चोट के निशान देखकर साफ कर दिया कि यह हादसा नहीं बल्कि हमला है। गंभीर हालत में बच्ची को रतलाम के जीएमसी अस्पताल रेफर किया गया जहाँ उसकी स्थिति देख नर्सिंग स्टाफ और पुलिसकर्मियों की आँखें भी नम हो गईं। अंततः संघर्ष करते हुए मासूम ने दम तोड़ दिया।

    भागने की कोशिश में हुआ घायल

    पुलिस जब आरोपी रियाज को घटनास्थल का मुआयना कराने ले गई थी तो उसने पुलिस को चकमा देकर भागने का प्रयास किया। इसी दौरान वह गिर गया और उसके पैर में चोट आई जिसके कारण वह जुलूस के दौरान लंगड़ाता हुआ दिखाई दिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक रियाज पूछताछ में ‘साइको किलर’ की तरह व्यवहार कर रहा था लेकिन पुख्ता सबूतों के सामने उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

    वकीलों ने किया बहिष्कार
    इस जघन्य अपराध ने कानूनी बिरादरी को भी एकजुट कर दिया है। स्थानीय वकीलों ने सामूहिक निर्णय लिया है कि कोई भी वकील इस दरिंदे का केस नहीं लड़ेगा। समाज के हर वर्ग से आरोपी को जल्द से जल्द फांसी देने की मांग उठ रही है।

    सोशल मीडिया और जनता का संदेश

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें पुलिस आरोपी को पैदल ले जा रही है। लोग पुलिस की इस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त सजा की मांग कर रहे हैं।

  • MP: भारी विरोध के बाद उज्जैन सिंहस्थ की लैंड पूलिंग योजना निरस्त, आदेश जारी

    MP: भारी विरोध के बाद उज्जैन सिंहस्थ की लैंड पूलिंग योजना निरस्त, आदेश जारी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने मंगलवार को उज्जैन में सिंहस्थ (कुंभ मेले) (Ujjain Simhastha (Kumbh Mela) के लिए लाई गई लैंड पूलिंग योजना (Land pooling scheme) को पूरी तरह से निरस्त कर दिया। सरकार की ओर से इस संबंध में एक आदेश जारी किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने यह फैसला भारतीय किसान संघ (बीकेएस) की लगातार मांग और 26 दिसंबर से फिर से आंदोलन की चेतावनी के बाद लिया।

    उज्जैन उत्तर से सत्तारूढ़ भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा (MLA Anil Jain Kaluheda) ने भी मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) को पत्र लिखकर योजना को किसान हित में निरस्त करने की मांग की थी और किसानों के आंदोलन में शामिल होने की मजबूरी जताई थी।

    अगला सिंहस्थ मेला 2028 में आयोजित किया जाएगा। इसे देखते हुए मोहन यादव सरकार ने स्थायी निर्माण के लिए किसानों की जमीन हासिल करने की यह नीति शुरू की थी जबकि पहले किसानों से सिंहस्थ के लिए केवल 5 से 6 महीनों के लिए ही जमीन ली जाती थी, इसलिए किसान संगठन इसका कड़ा विरोध कर रहे थे।

    भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने इस योजना को लेकर विरोध किया था। बीकेएस के आह्वान पर 18 नवंबर को ‘डेरा डालो, घेरा डालो’ आंदोलन की घोषणा के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने लैंड पूलिंग अधिनियम को निरस्त करने की घोषणा की‌ थी। हालांकि बाद में इसे केवल संशोधित करने का पत्र जारी किया गया था। इससे किसान नाराज हो गए थे।

    किसानों ने नए सिरे से अनिश्चितकालीन आंदोलन की घोषणा कर दी थी। मध्य प्रदेश के राज्यपाल के आदेशानुसार, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपसचिव की ओर से हस्ताक्षरित आदेश में उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित नगर विकास योजना क्रमांक 8, 9, 10, 11 को संशोधित करने वाले प्रस्ताव को लोकहित में अब पूर्ण रूप से निरस्त करने की बात कही गई है।

  • MP में अस्थायी पद होंगे स्थायी, मोहन कैबिनेट ने सेवा भर्ती नियमों में बदलाव को दी मंजूरी

    MP में अस्थायी पद होंगे स्थायी, मोहन कैबिनेट ने सेवा भर्ती नियमों में बदलाव को दी मंजूरी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने विभिन्न परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए राहतों का ऐलान करते हुए राज्य की कर्मचारी व्यवस्था में बड़ा सुधार करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक (Cabinet meeting) में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में स्वीकृत स्थाई और अस्थाई पदों में भेदभाव को समाप्त करने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में जरूरी प्रावधान करने पर भी मुहर लगाई है।

    कैबिनेट ने अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना के डूब प्रभावितों के लिए 1,782 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी। डूब प्रभावितों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में प्रावधान किए गए 1656 करोड़ रुपये के अतिरिक्त 1,782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज स्वीकृत किया गया। सिंचाई और जलविद्युत की परियोजनाएं अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में चल रही हैं।

    अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना 5,512 करोड़ रुपये की है। इससे 71 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी और 125 मेगावाट बिजली पैदा होगी। इन तीनों परियोजनाओं से कुल 13,873 परिवार प्रभावित होंगे, जिन्हें विशेष पैकेज के तहत प्रति परिवार 12.50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। एससी और एसटी के 50 हजार परिवारों को अतिरिक्त राशि दी जाएगी।

    कैबिनेट ने 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में विभाग स्तर पर 10 लाख या उससे अधिक के कार्यों पर मुहर लगाई है। इसके तहत 693 करोड़ 76 लाख रुपये के लगभग 3810 काम होंगे। भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के मेंटिनेंस के लिए भी 2025-26 के दौरान 90 करोड़ 67 लाख रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है।

    कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को साल 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के लिए 905 करोड़ 25 लाख रुपये को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में स्वीकृत स्थायी और अस्थायी पदों के विभेदीकरण को खत्म करने की मंजूरी दी। इस दिशा में स्वीकृत अस्थायी पदों को स्थायी पदों में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में जरूरी प्रावधान करने को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने वन विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 48 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।