स्वच्छता अभियान का स्टिकर लगा कर पहुँची टीम
BJP नेता और माइनिंग किंग रडार पर
25 सदस्यों की टीम और भारी पुलिस बल
करोड़ों की टैक्स चोरी का अनुमान

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डीपी सिंह ने अदालत को बताया कि ग्वालियर में पुलिस बल की पहले से ही भारी कमी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी निजी व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। इससे न केवल आम जनता की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।वकील ने अदालत के सामने उदाहरण पेश करते हुए बताया कि विनय सिंह नामक व्यक्ति को दी गई पुलिस सुरक्षा के दौरान ही उनके खिलाफ वसूली सहित पांच आपराधिक मामले दर्ज हुए। यह साफ तौर पर पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब सुरक्षा पाने वाले ही अपराधों में लिप्त हों, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।
हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि पूर्व आदेश के बाद सूचना के अधिकार RTI के तहत जो जानकारी सामने आई, वह और भी चिंताजनक है। RTI से खुलासा हुआ कि 19 व्यक्तियों की सुरक्षा में 33 पुलिसकर्मी तैनात थे, जबकि इनमें से अधिकांश व्यक्ति सुरक्षा के पात्र ही नहीं थे। यह स्थिति तब है जब शहर में आम नागरिकों को पर्याप्त पुलिस सहायता नहीं मिल पा रही है।इससे पहले भी हाईकोर्ट इस तरह के मामलों में सख्त रुख अपना चुका है। दिलीप शर्मा और संजय शर्मा को दी गई पुलिस सुरक्षा के मामले में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए दोनों भाइयों से सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश दिए थे। उस समय कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी तुच्छ या अपात्र व्यक्ति को सरकारी खर्च पर पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा सकती।
न्यायालय ने अपने पुराने आदेशों में यह भी कहा था कि पुलिस सुरक्षा देने के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और ठोस नियम बनाए जाने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि सुरक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था का इस्तेमाल केवल वास्तविक और प्रमाणित खतरे वाले मामलों में ही होना चाहिए, न कि प्रभाव या रसूख के आधार पर।हाईकोर्ट ने यह सुझाव भी दिया था कि जिन मामलों में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा या निजी कारणों से खतरे की आशंका हो, और संबंधित परिवार के पास लाइसेंसी हथियार उपलब्ध हों, वहां निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था एक बेहतर विकल्प हो सकती है। कोर्ट के अनुसार, निजी सुरक्षा गार्ड कई बार पुलिसकर्मियों की तुलना में ज्यादा सजग और प्रभावी साबित हो सकते हैं, जबकि पुलिस बल को कानून-व्यवस्था के मूल कामों में लगाया जाना चाहिए।
ताजा सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक पूर्व आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया और अपात्र लोगों को दी जा रही सुरक्षा पर क्या कार्रवाई की गई है। नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।यह मामला न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे प्रदेश में पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और जवाबदेही से जुड़ा एक अहम उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले समय में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और कोर्ट का अगला रुख इस व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

इसके साथ ही कटनी में जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता अशोक विश्वकर्मा (BJP leader Ashok Vishwakarma) तथा उनके तीन भाईयों के ठिकानों पर भी एक साथ छापे मारे गए। तीनों ही स्थानों पर इंदौर और भोपाल से आई आयकर विभाग की टीमें कार्रवाई कर रही हैं। जानकारी के अनुसार आय से अधिक संपत्ति टैक्स चोरी और अवैध लेनदेन की शिकायतें मिलने के बाद यह कार्यवाही हुई है। फिलहाल अभी टीम को क्या मिला है इसकी जानकारी सामने नही आई है,कार्रवाई पूरी होते ही आयकर टीम बताएगी।
जबलपुर जिले में सिविल लाइन रसल चौक स्थित खनन कारोबारियों पर राजीव चड्ढा ओर नितिन शर्मा के घर आयकर की टीम ने छापा मारा है। चड्डा माइन्स के ऑफिस राजीव चड्ढा के बाद नितिन शर्मा के घर से भी टीम को कई दस्तावेज मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि इस जांच में बड़ी टैक्स चोरी का खुलासा हो सकता है।
आयकर विभाग की टीम ‘स्वच्छता जागरूकता अभियान 2025’ का पोस्टर लगी हुई कार से सिविल लाइन स्थित कारोबारी के घर पहुंची थी, कारोबारी के चौकीदार को पहले लगा कि नगर निगम की टीम किसी सर्वे के लिए आई है, लेकिन कुछ ही देर में स्पष्ट हो गया कि यह आयकर विभाग की छापामार कार्रवाई के लिए आई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति, टैक्स चोरी और अवैध लेन-देन से जुड़े मामलों को लेकर की जा रही है। सर्चिग के दौरान क्या-क्या सामने आता है, इसको लेकर फिलहाल आयकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार खनन कारोबारी राजीव चड्डा और उनके कुछ साथियों के खिलाफ आयकर विभाग को शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर जबलपुर, कटनी में एक साथ कार्रवाई की गई है। आयकर विभाग की टीमें फिलहाल कारोबारियों के घर और कार्यालयों में दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
कटनी जिले के जिला पंचायत उपाध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अशोक विश्वकर्मा के भाई शंकर लाल विश्वकर्मा के यहां तड़के 4 बजे से आयकर विभाग की टीम ने अशोक विश्वकर्मा के निवास, फर्म और बॉक्साइट माइनिंग से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापा मारा है। विश्वकर्मा माइनिंग कारोबारी हैं और उनकी फर्म वीएमसी विश्वकर्मा माइंस के नाम से संचालित है। विश्वकर्मा और उनके अन्य तीन भाइयों के जलपा वार्ड स्थित घर फर्म ग्राम टिकरिया और सिघनपुरी में खदान है। यह कार्यवाही भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में आयकर विभाग की ओर घर और ऑफिस में दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

मामले को जनहित से जुड़ा मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता नवल किशोर शर्मा की ओर से पैरवी कर रहे वकील डीपी सिंह ने बताया कि पुलिस बल की कमी के बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी निजी व्यक्तियों की सुरक्षा में लगाए गए हैं। इन पर लाखों रुपए का सरकारी खर्च हो रहा है, जबकि संबंधित व्यक्ति सुरक्षा के पात्र नहीं हैं।
उन्होंने विनय सिंह को दी गई पुलिस सुरक्षा का उदाहरण देते हुए बताया कि सुरक्षा के दौरान ही उनके खिलाफ वसूली सहित पांच आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए, जो सुरक्षा के दुरुपयोग को दर्शाता है।
हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बाद सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी में सामने आया कि 19 व्यक्तियों की सुरक्षा में 33 पुलिसकर्मी तैनात थे, जिनमें से अधिकांश अपात्र पाए गए। इससे पहले भी हाईकोर्ट दिलीप शर्मा और संजय शर्मा को दी गई सुरक्षा के मामले में कड़ी टिप्पणी कर चुका है। कोर्ट ने दोनों भाइयों से सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश दिए थे और स्पष्ट कहा था कि किसी तुच्छ या अपात्र व्यक्ति को पुलिस सुरक्षा नहीं दी जानी चाहिए।
न्यायालय ने यह भी कहा था कि पुलिस सुरक्षा देने के लिए स्पष्ट और ठोस नियम बनाए जाने चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया था कि यदि किसी परिवार के पास लाइसेंसी हथियार हैं और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के कारण जान का खतरा है, तो ऐसे मामलों में निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था की जा सकती है, जो पुलिसकर्मियों की तुलना में अधिक सजग और प्रभावी हो सकते हैं।

बिस्वास ने पत्र में कहा कि वे मेसी इवेंट की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। उनका यह कदम इस विवाद की गंभीरता को दर्शाता है और टीएमसी तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण संदेश भेजता है खासकर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिस्वास के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है और अब खुद इस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने का निर्णय लिया है।
इस विवाद के बाद राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल SIT का गठन किया है। SIT में चार वरिष्ठ आईपीएस अफसरों को शामिल किया गया है। मुख्य सचिव मनोज पंत ने बताया कि एसआईटी की जांच में कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में बिधाननगर के पुलिस उपायुक्त अनीश सरकार को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही बंगाल के खेल सचिव राजेश कुमार सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और सॉल्ट लेक स्टेडियम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डी के नंदन की सेवाएं वापस ले ली गई हैं।
इस घटना के बाद टीएमसी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के विवाद या आलोचना से बचने के लिए पूरी तरह से पारदर्शी जांच करेगी। इस मामले में बिस्वास का इस्तीफा और जांच के आदेश इस बात का संकेत हैं कि ममता बनर्जी की सरकार आगामी चुनावों से पहले किसी भी तरह की अनावश्यक नकारात्मकता से बचना चाहती है। यह पूरा विवाद राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है जो आने वाले समय में चुनावी रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है।


विरोध की ज्वाला और आंदोलन की चेतावनी
अपनों ने भी उठाए थे सवाल
क्या थी लैंड पूलिंग योजना और क्यों था विरोध
किसानों के विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे
स्थायी कब्जा बनाम अस्थायी उपयोग दशकों से परंपरा रही है कि सिंहस्थ के लिए किसान केवल 5-6 महीनों के लिए अपनी जमीन सरकार को उपयोग हेतु देते थे और मेला समाप्त होने पर जमीन वापस मिल जाती थी। लैंड पूलिंग के तहत जमीन का स्वरूप स्थायी रूप से बदल जाता। रोजी-रोटी का संकट किसानों को डर था कि स्थायी निर्माण के बाद वे खेती नहीं कर पाएंगे जिससे उनकी आजीविका छिन जाएगी।
अधिकारों का हनन किसान अपनी जमीन पर मालिकाना हक खोने को तैयार नहीं थे।
निष्कर्ष पुरानी परंपरा ही रहेगी बरकरार

क्या है पूरी घटना
भागने की कोशिश में हुआ घायल
सोशल मीडिया और जनता का संदेश

उज्जैन उत्तर से सत्तारूढ़ भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा (MLA Anil Jain Kaluheda) ने भी मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) को पत्र लिखकर योजना को किसान हित में निरस्त करने की मांग की थी और किसानों के आंदोलन में शामिल होने की मजबूरी जताई थी।
अगला सिंहस्थ मेला 2028 में आयोजित किया जाएगा। इसे देखते हुए मोहन यादव सरकार ने स्थायी निर्माण के लिए किसानों की जमीन हासिल करने की यह नीति शुरू की थी जबकि पहले किसानों से सिंहस्थ के लिए केवल 5 से 6 महीनों के लिए ही जमीन ली जाती थी, इसलिए किसान संगठन इसका कड़ा विरोध कर रहे थे।
भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने इस योजना को लेकर विरोध किया था। बीकेएस के आह्वान पर 18 नवंबर को ‘डेरा डालो, घेरा डालो’ आंदोलन की घोषणा के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने लैंड पूलिंग अधिनियम को निरस्त करने की घोषणा की थी। हालांकि बाद में इसे केवल संशोधित करने का पत्र जारी किया गया था। इससे किसान नाराज हो गए थे।
किसानों ने नए सिरे से अनिश्चितकालीन आंदोलन की घोषणा कर दी थी। मध्य प्रदेश के राज्यपाल के आदेशानुसार, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपसचिव की ओर से हस्ताक्षरित आदेश में उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित नगर विकास योजना क्रमांक 8, 9, 10, 11 को संशोधित करने वाले प्रस्ताव को लोकहित में अब पूर्ण रूप से निरस्त करने की बात कही गई है।
