Category: Madhya Pradesh

  • मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में दो साल: अतीत, वर्तमान और भविष्य-तीनों में संतुलित विकास

    मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में दो साल: अतीत, वर्तमान और भविष्य-तीनों में संतुलित विकास


    मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल में अतीत, वर्तमान और भविष्य-तीनों क्षेत्रों में संतुलित विकास की दिशा में कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यकाल के शुरुआती दौर से ही प्रदेश की पहचान को सांस्कृतिक प्रशासनिक और विकासात्मक दृष्टिकोण से मजबूत करने की रणनीति अपनाई।

    अतीत: सांस्कृतिक धरोहर का पुनर्निर्माण
    सरकार ने धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया है। उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर का विस्तार कार्य न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शहर की पहचान भी मजबूत कर रहा है। प्राचीन धरोहर स्थलों पर संरक्षण गतिविधियाँ तेज की गई हैं। ओंकारेश्वर क्षेत्र में अद्वैत दर्शन से जुड़े प्रकल्पों को गति दी जा रही है। इसके अलावा, भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थल श्रीकृष्ण पाथेय के तहत तीर्थस्थल के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और राज्य में पर्यटन को प्रोत्साहित करना है।

    वर्तमान: प्रशासनिक सुधार और बुनियादी ढांचा

    दो वर्षों में सरकार ने सड़क नेटवर्क, औद्योगिक कॉरिडोर और शहरी सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी है। ग्रामीण सड़कें भी सुधार के अभियान में हैं। शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम पर काम हुआ है। कृषि क्षेत्र में उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, सिंचाई क्षमता बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही महिलाओं और युवाओं के लिए योजनाएँ जैसे लाड़ली बहना और स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम भी प्रभावी रूप से लागू किए गए हैं।

    भविष्य: निवेश, ऊर्जा और स्वास्थ्य

    आगामी दशक को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नई औद्योगिक नीति और औद्योगिक क्लस्टरों के विकास की योजना बनाई है। पीथमपुर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।सौर ऊर्जा उत्पादन, जल संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ढांचे को बढ़ावा देकर हरित ऊर्जा क्षेत्र में भी कदम बढ़ाए गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के सुधार के लिए जिला एवं ग्रामीण स्तर पर अस्पताल उन्नयन और टेली-मेडिसिन सेवाओं का विस्तार प्रस्तावित है।

    संतुलित नेतृत्व का संकेत

    डॉ. मोहन यादव के दो वर्षों का कार्यकाल यह दर्शाता है कि सरकार सांस्कृतिक गौरव, वर्तमान प्रशासनिक प्राथमिकताओं और भविष्य की विकास योजनाओं-तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। आने वाले समय में इन पहलों का वास्तविक असर प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों में देखने को मिलेगा।मध्यप्रदेश सरकार ने डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में दो साल में अतीत की सांस्कृतिक धरोहर, वर्तमान प्रशासनिक सुधार और भविष्य की विकास योजनाओं को संतुलित रूप से आगे बढ़ाया है। यह संतुलित दृष्टिकोण राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत देता है।
  • सिवनी तीन करोड़ की हवाला डकैती मामले में प्रमोद सोनी की जमानत खारिजन्यायालय ने साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका जताई

    सिवनी तीन करोड़ की हवाला डकैती मामले में प्रमोद सोनी की जमानत खारिजन्यायालय ने साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका जताई


    सिवनी ।सिवनी जिले में तीन करोड़ रुपये की हवाला डकैती के सनसनीखेज मामले में जबलपुर क्राइम ब्रांच के आरक्षक प्रमोद सोनी की जमानत याचिका को जिला न्यायालय ने खारिज कर दिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले की जांच अभी जारी हैऔर उपलब्ध तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। विशेष न्यायाधीश एट्रोसिटीज पर सत्र न्यायाधीश सिवनीगालिब रसूल ने 11 दिसंबर को यह आदेश पारित कियाजिसमें आरोपित की रिहाई से साक्ष्य प्रभावित होने और जांच पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना जताई गई।

    यह मामला सिर्फ एक डकैती का नहीं बल्कि एक संगठित अपराध नेटवर्क का हिस्सा भी प्रतीत हो रहा हैजिसमें पुलिस महकमे के कुछ लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस द्वारा की गई जांच में सामने आए कॉल डिटेल्सआपसी संपर्कडिजिटल साक्ष्य और घटनाक्रम ने पूरे मामले को और भी जटिल बना दिया है।

    प्रमोद सोनी की संलिप्तता का खुलासा

    प्रमोद सोनी पर आरोप है कि वह हवाला डकैती के इस पूरे षड्यंत्र का हिस्सा थे। पुलिस की जांच के मुताबिकप्रमोद सोनी के कॉल डिटेल्स और डिजिटल साक्ष्य में उनकी भूमिका का खुलासा हुआ है। यह हवाला डकैती पुलिस महकमे के भीतर एक संगठित अपराध के नेटवर्क की ओर इशारा करता हैजो अपराधियों को सुरक्षा प्रदान करने और अवैध धन की तस्करी में मदद कर रहा था।

    यहां तक कि जांच में यह भी पाया गया है कि प्रमोद सोनी ने अपने पद का दुरुपयोग किया और पुलिस की जानकारी का फायदा उठाकर हवाला नेटवर्क में शामिल हुए। उनके खिलाफ पुलिस ने ठोस साक्ष्य जुटाए हैंजिनमें आपसी संपर्क और फाइनेंशियल लेन-देन की जानकारियां शामिल हैं।

    न्यायालय का फैसला और जमानत खारिज होने के कारण

    विशेष न्यायाधीश गालिब रसूल ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि चूंकि मामले की जांच चल रही है और साक्ष्य के आधार पर यह प्रतीत होता है कि प्रमोद सोनी की रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती हैइसलिए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुएआरोपित के खिलाफ जांच की प्रक्रिया को किसी भी तरह से प्रभावित होने का खतरा नहीं उठाया जा सकता।

    न्यायालय ने यह स्वीकार किया कि हवाला डकैती का मामला केवल एक वित्तीय अपराध नहीं बल्कि एक बड़े आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा हैजिसमें पुलिस महकमे की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में प्रमोद सोनी को जमानत देना मामले की गहराई को देखते हुए उचित नहीं होगा।

    पहले भी जमानत याचिकाएं खारिज

    यह पहला मामला नहीं है जब इस हवाला डकैती मामले में जमानत याचिका खारिज की गई है। इससे पहले भी कई आरोपितों की जमानत याचिकाएं न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी हैं। जांच एजेंसियां मामले में हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं कि इस संगठित अपराध के नेटवर्क को पूरी तरह से नष्ट किया जाए।

    सिवनी का यह हवाला डकैती मामला पुलिस महकमे की भ्रष्टाचार और अपराध से संबंधित गंभीर समस्याओं को उजागर करता है। अब जबकि प्रमोद सोनी और अन्य आरोपितों के खिलाफ ठोस साक्ष्य जुटाए जा चुके हैंयह उम्मीद जताई जा रही है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

    न्यायालय का यह फैसला इस बात को भी स्पष्ट करता है कि कानून के दायरे में रहते हुए किसी भी व्यक्ति को आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने का लाभ नहीं मिल सकताचाहे वह पुलिस अधिकारी हो या आम नागरिक। अब मामले की जांच और विस्तार से की जाएगीजिससे इस बड़े आपराधिक नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

  • पन्ना की शेरनी! 3 माह की मासूम के लिए सियार से भिड़ी मां, डंडे से पीटकर खदेड़ा

    पन्ना की शेरनी! 3 माह की मासूम के लिए सियार से भिड़ी मां, डंडे से पीटकर खदेड़ा

    पन्‍ना। मध्य प्रदेश के पन्ना ज़िले में एक मां ने हिम्मत दिखाते हुए अपनी तीन महीने की बच्ची की जान बचा ली. देर रात एक सियार उनके घर में घुस आया और सो रही बच्ची पर हमला कर दिया. बच्ची की रोने की आवाज़ सुनकर मां तुरंत वहां पहुंची और पहले सियार पर बर्तन फेंके, फिर डंडे से उसे भगाया. काफी मशक्कत के बाद सियार भाग गया और बच्ची की जान बच गई. बच्ची के सिर और आंख के पास चोटें आई हैं. प्राथमिक उपचार के बाद उसे गुनौर से ज़िला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है. इस घटना से पूरे इलाके में डर का माहौल है और मां की बहादुरी की तारीफ़ हो रही है.

    3 माह की मासूम के लिए सियार से भिड़ी मां
    दरअसल, पन्ना जिले के ग्रामीण अंचलों में जंगली जानवरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. हाल ही में सिमरिया गांव में सोती हुई एक 3 माह की मासूम बच्ची पर एक सियार (क्षेत्रीय भाषा में लड़इया कहते है)ने घर पर जानलेवा हमला कर दिया. ​बच्ची के रोने की आवाज सुनकर, उसकी मां शब्बो बानो ने साहस दिखाते हुए पहले बर्तन फेंक कर और फिर डंडा लेकर वह सियार से भिड़ गईं. संघर्ष के बाद मां अपनी बच्ची को बचाने में कामयाब रहीं.

    देर तक सियार से लड़ती रही मां
    अपनी बेटी की चीख सुनकर मां ने हाथ में पकड़ी सारी चीज़ें गिरा दीं. बिना कुछ सोचे-समझे वह बाहर भागी. सामने का नज़ारा देखकर किसी का भी दिल दहल जाता, लेकिन मां ने अपने डर को किनारे कर दिया. उसने पास पड़े कुछ बर्तन उठाए और पूरी ताकत से सियार पर फेंक दिए. वह चीखती रही और सियार से लड़ती रही. कुछ देर तक सियार और मां के बीच लड़ाई चलती रही. मां ने हिम्मत नहीं हारी और सियार से तब तक लड़ती रही जब तक वह भाग नहीं गया.

    बच्ची के सिर और आंख के पास चोटें
    घायल बच्ची के सिर और आंख के पास चोटें आई हैं. उसे गुनौर से ज़िला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है. इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है.

  • NH-44 पर बदइंतजामी का कहर: छौंदा टोल पर 5 किमी लंबा जाम, कैंसर पीड़ित मां के साथ फंसा बेटा-प्रशासन बेखबर

    NH-44 पर बदइंतजामी का कहर: छौंदा टोल पर 5 किमी लंबा जाम, कैंसर पीड़ित मां के साथ फंसा बेटा-प्रशासन बेखबर


    मध्य प्रदेश / मुरैना  के मुरैना जिले में नेशनल हाईवे-44 पर स्थित छौंदा टोल प्लाजा इन दिनों अव्यवस्था और लापरवाही की पहचान बन चुका है। यहां लगने वाला रोज़ाना जाम अब केवल ट्रैफिक समस्या नहीं रहा बल्कि यह मानव संवेदना और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर रहा है। शुक्रवार शाम हालात इतने बिगड़े कि हाईवे पर 4 से 5 किलोमीटर लंबा महाजाम लग गया जो करुआ गांव तक फैल गया। हाईवे होने के कारण चंद मिनटों में ही वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम में आम वाहन ही नहीं बल्कि एंबुलेंस मरीजों की गाड़ियां और बुजुर्ग यात्री भी फंसे रहे। कई घंटे बीतने के बावजूद जाम खुलवाने की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आई।

    कैंसर पीड़ित मां की हालत बिगड़ी
    इस जाम की सबसे दर्दनाक तस्वीर तब सामने आई जब मुरैना निवासी अरविंद सिंह अपनी कैंसर पीड़ित मां उर्मिला के साथ फंस गए। अरविंद ने बताया कि उनकी मां की हाल ही में 14 घंटे लंबी सर्जरी कीमोथेरेपी और रेडिएशन हुआ है। वे ग्वालियर से नियमित चेकअप कराकर लौट रहे थे तभी शाम के समय छौंदा टोल पर जाम में फंस गए। अरविंद के मुताबिक “जाम करुआ गांव के विक्टर स्कूल तक था। घंटों खड़े रहने से मां की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं लेकिन न टोल प्रबंधन ने मदद की और न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचा।
    परिजनों ने कई बार मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

    1 दिसंबर से नई कंपनी बढ़ी अव्यवस्था

    गौरतलब है कि 1 दिसंबर से छौंदा टोल प्लाजा का संचालन शिवा कॉर्पोरेशन कंपनी के पास है। इससे पहले यह टोल पथ इंडिया द्वारा संचालित किया जा रहा था। नई कंपनी के टेकओवर के बाद से ही यहां अव्यवस्था बढ़ गई है।स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि शाम होते ही यहां जाम लगना आम हो गया है। टोल बूथ पर स्टाफ की कमीतकनीकी खामियां और सुस्त प्रबंधन इसकी बड़ी वजह मानी जा रही हैं।

    टोल मैनेजर का गैर-जिम्मेदाराना बयान

    जब इस अव्यवस्था पर टोल मैनेजर अनुराग तोमर से सवाल किया गया तो उन्होंने हैरान करने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहाजाम लगता है तो हम ही खुलवाते हैं। अभी नया चार्ज संभाला है सिस्टम में थोड़ी समस्या है ठीक करवा रहे हैं। इस बयान से साफ है कि यात्रियों की परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

    पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

    सिविल लाइन थाना प्रभारी से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ASP सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि छौंदा टोल पर जाम की लगातार शिकायतें मिल रही हैं।उन्होंने चेतावनी दी-टोल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि जाम की स्थिति नहीं बननी चाहिए। अगर सुधार नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।छौंदा टोल पर लग रहा जाम सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का आईना है। जब मरीज और एंबुलेंस तक फंसे रहें तो यह सिस्टम की विफलता मानी जाएगी।
  • नीमच से लौट रहे दंपती की सड़क दुर्घटना में मौत तीन लोग मारे गए

    नीमच से लौट रहे दंपती की सड़क दुर्घटना में मौत तीन लोग मारे गए


    नीमच । राजस्थान के निंबाहेड़ा बायपास पर शुक्रवार रात को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में नीमच जिले के एक दंपती सहित तीन लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना नेशनल हाईवे 56 पर बडौली माधोसिंह मार्ग के चौराहे पर हुई जब एक मांगलिक कार्यक्रम से लौट रहे दंपती की कार पिकअप से टकराई और उसके बाद पीछे से आ रही थार ने उनकी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में दोनों दंपती के सदस्यों और पिकअप चालक की मौके पर ही मौत हो गई।
    सभी मृतक नीमच जिले के सरवानिया महाराज क्षेत्र के निवासी थे। दुर्घटना का शिकार हुआ दंपती लखन मालू 40 वर्ष और उनकी पत्नी सविता डॉली मालू 36 वर्ष चित्तौड़गढ़ जिले में एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होकर वापस लौट रहे थे। उनकी मारुति वेन नेशनल हाईवे पर बायपास पर एक खड़ी पिकअप से टकराई जो पंचर होने के कारण वहां रुकी हुई थी।
    इस दौरान एक थार जीप पीछे से तेजी से आई और वेन को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वेन बुरी तरह पिचक गई और उसमें सवार दोनों दंपती की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा पिकअप चालक बसंतीलाल प्रजापत 30 वर्ष भी इस हादसे में अपनी जान गंवा बैठा। वह ग्राम भूनियाखेड़ी का निवासी था। पिकअप में सवार एक अन्य व्यक्ति हस्तीमल पामेचा को गंभीर चोटें आईं जिसे उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
    निंबाहेड़ा पुलिस ने घटना के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस दुर्घटना में शामिल सभी वाहनों का सही तरीके से निरीक्षण किया जा रहा है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
    सदर थाना प्रभारी संजय शर्मा ने बताया कि दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल घायलों को अस्पताल भेजा। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटवाकर यातायात को सुचारू किया गया। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इसके कारणों का पता लगाया जाएगा।
    यह हादसा क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि यह हादसा उस समय हुआ जब लोग मांगलिक कार्यक्रम से लौट रहे थे और यह घटना उस समय हुई जब सड़क पर गाड़ी की स्थिति बिगड़ गई थी।
    स्थानीय लोग इस हादसे को लेकर गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं। इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले दंपती और पिकअप चालक के परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
    सड़क हादसों के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने नेशनल हाईवे पर सड़क सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता जताई है। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के महत्व को उजागर किया है और लोगों से आग्रह किया गया है कि वे यात्रा के दौरान अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।

  • सेवा, शिक्षा और संवेदना की मिसाल: डॉ. रश्म-जो इलाज को सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी मानती हैं

    सेवा, शिक्षा और संवेदना की मिसाल: डॉ. रश्म-जो इलाज को सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी मानती हैं


    भोपाल आज के समय में जब चिकित्सा को अक्सर सिर्फ एक पेशे के तौर पर देखा जाता है, वहीं डॉ. रश्मि जैसी चिकित्सक उम्मीद की एक अलग तस्वीर पेश करती हैं। उन्होंने अपने ज्ञान, अनुभव और संवेदना से न सिर्फ मरीजों का इलाज किया, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को भी समान महत्व दिया। डॉ. रश्मि ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर से जनरल मेडिसिन में एमडी की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा उन्होंने डायबिटीज में सर्टिफिकेट कोर्स भी किया, जिससे मेटाबॉलिक और लाइफस्टाइल डिजीज़ के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और मजबूत हुई।

    अपने करियर की शुरुआत से ही डॉ. रश्मि ने प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दी हैं। उन्होंने एम्स भोपाल में तीन वर्षों तक सीनियर रेजिडेंट के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे एलएन मेडिकल कॉलेज और पीएमएस भोपाल जैसे संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहीं। मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में उन्हें पांच साल का टीचिंग अनुभव प्राप्त है, जहां उन्होंने सैकड़ों मेडिकल छात्रों को प्रशिक्षण दिया। वर्तमान में डॉ. रश्मि मेडिकल एजुकेशन और आईसीएमआर ICMR रिसर्च से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। वे सिर्फ क्लीनिकल प्रैक्टिस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रिसर्च और अकादमिक गतिविधियों के जरिए चिकित्सा क्षेत्र में नए आयाम जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

    प्रशासनिक जिम्मेदारियों में भी उनकी भूमिका अहम रही है। वे बेसिक लाइफ सपोर्ट BLS प्रोग्राम, नर्सिंग ट्रेनिंग सेशन TEM में फैकल्टी इंचार्ज के रूप में कार्य कर चुकी हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने इमरजेंसी स्थितियों में त्वरित और सही उपचार के लिए मेडिकल व नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षित किया। डॉ. रश्मि के प्रोफेशनल इंटरेस्ट में डायबिटीज, हाइपरटेंशन, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, पेलिएटिव केयर, इमरजेंसी मेडिसिन और इमरजेंसी केयर इंटरवेंशन शामिल हैं। विशेष रूप से गंभीर और जरूरतमंद मरीजों के लिए उनका दृष्टिकोण बेहद मानवीय रहा है।

    साथी डॉक्टरों के अनुसार, डॉ. रश्मि ने अब तक कई गरीब और असहाय मरीजों के इलाज का खर्च स्वयं उठाया है। इसके साथ ही वे मरीजों को अन्य संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक मदद दिलाने में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। उनके लिए मरीज सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि एक इंसान होता है।उनकी यही सोच उन्हें एक संवेदनशील चिकित्सक के रूप में अलग पहचान दिलाती है-जहां इलाज के साथ भरोसा, सहानुभूति और सहयोग भी उतना ही जरूरी माना जाता है। डॉ. रश्मि की यात्रा यह साबित करती है कि एक अच्छा डॉक्टर वही है जो ज्ञान के साथ करुणा भी रखे। शिक्षा रिसर्च और समाजसेवा का संतुलन उन्हें चिकित्सा क्षेत्र की प्रेरणादायक शख्सियत बनाता है।

  • लॉ एंड ऑर्डर से लेकर रोजगार तक CM मोहन यादव का बड़ा बयान: कहा-मंत्री का भाई भी नहीं बचा मार्गदर्शन मिला तो मंत्रिमंडल बदलेगा

    लॉ एंड ऑर्डर से लेकर रोजगार तक CM मोहन यादव का बड़ा बयान: कहा-मंत्री का भाई भी नहीं बचा मार्गदर्शन मिला तो मंत्रिमंडल बदलेगा


    भोपाल /मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल को 13 दिसंबर को दो साल पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने एक चर्चित अखबार के साथ से विशेष बातचीत में अपने दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियों चुनौतियों और आने वाले तीन सालों के रोडमैप को विस्तार से रखा। बातचीत में लॉ एंड ऑर्डर नक्सलवाद रोजगार निवेश कृषि संकट मेट्रो प्रोजेक्ट और मंत्रिमंडल फेरबदल जैसे अहम मुद्दे केंद्र में रहे।

    कानून से ऊपर कोई नहीं मंत्री का भाई भी गिरफ्तार हुआa
    लॉ एंड ऑर्डर पर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार में कानून सबके लिए समान है।उन्होंने कहा अगर कोई गलत करेगा तो वह बचेगा नहीं। मंत्री का भाई भी कानून से ऊपर नहीं है उसे भी गिरफ्तार किया गया है। यही सुशासन है। CM के इस बयान को सख्त प्रशासनिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    नक्सलवाद पर बड़ी उपलब्धि
    मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिनाया।उन्होंने कहा कि मंडला बालाघाट और डिंडौरी जैसे जिलों से नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है।बीते एक साल में 10 नक्सलियों को ढेर किया गया और कई बार नक्सलियों ने सरेंडर किया। CM ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले नक्सली खुलेआम हिंसा करते थे लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

    दिल्ली से सरकार चलने के आरोपों पर पलटवार

    विपक्ष के इस आरोप पर कि मध्य प्रदेश सरकार दिल्ली से चलाई जा रही है मुख्यमंत्री ने कहा-हमें गर्व है कि प्रधानमंत्री गृह मंत्री और पार्टी नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलता है। केंद्र और राज्य के अच्छे संबंधों से ही विकास तेज होता है।रोजगार पर फोकस: 60 हजार से ज्यादा नौकरियां रोजगार को बड़ी चुनौती मानते हुए CM ने बताया कि बीते दो सालों में 60 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं।उन्होंने कहा- बिजली विभाग में 50 हजार पद, स्वास्थ्य विभाग में 42 हजार पद,पुलिस विभाग में 22500 से अधिक पद,मंजूर किए गए हैं। भविष्य में एक परीक्षा-एक भर्ती सिस्टम लागू करने की भी योजना है।

    पेपर लीक पर सख्ती
    भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के सवाल पर CM ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कोई बड़ा पेपर लीक नहीं हुआ। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पारदर्शी और समयबद्ध परीक्षाएं सरकार की प्राथमिकता हैं।

    निवेश और इंडस्ट्रियल ग्रोथ
    CM ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निवेश सिर्फ कागजों में नहीं जमीन पर उतर रहा है।उन्होंने बताया कि 6 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिला है।सागर में खाद कारखाने और 30 हजार करोड़ के नए इंडस्ट्रियल पार्क का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विकास अब हर क्षेत्र में दिख रहा है।

    कृषि और खाद संकट पर जवाब
    कृषि आधारित वर्ष की घोषणा को लेकर CM ने कहा कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है।उन्होंने माना कि कहीं-कहीं वितरण में दिक्कत आती है लेकिन अब SMS और होम डिलीवरी सिस्टम पर काम किया जा रहा है।

    भोपाल मेट्रो और मास्टर प्लान
    भोपाल मेट्रो को लेकर CM ने कहा कि प्रधानमंत्री वीडियो संदेश के जरिए जुड़ेंगे और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में लोकार्पण होगा।भोपाल मास्टर प्लान पर उन्होंने कहा-25 साल का बैकलॉग है दो साल में सब नहीं होगा लेकिन समाधान जरूर निकलेगा।

    मंत्रिमंडल विस्तार पर क्या बोले?
    मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के सवाल पर CM ने साफ कहा-जैसा पार्टी के पार्लियामेंट्री बोर्ड प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलेगा वैसा ही करेंगे।

    सादगी का संदेश: सामूहिक विवाह में बेटे की शादी
    CM ने अपने छोटे बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करने के फैसले को सामाजिक संदेश बताया।उन्होंने कहा-दिखावे की शादी समाज पर बोझ डालती है। बड़े लोग फिजूलखर्ची करेंगे तो गरीब कर्ज लेगा।उन्होंने अंतिम संस्कार और विवाह में अनावश्यक खर्च से बचने की अपील भी की। डॉ. मोहन यादव के इंटरव्यू से साफ है कि सरकार सख्त प्रशासन तेज विकास और सामाजिक सादगी को अपनी पहचान बनाना चाहती है। अब देखना यह होगा कि अगले तीन सालों में ये दावे जमीन पर कितने असरदार साबित होते हैं।

  • रतलाम में आवारा मवेशी पकड़ने वाली टीम पर बढ़ रहे हमलेसुरक्षा की मांग

    रतलाम में आवारा मवेशी पकड़ने वाली टीम पर बढ़ रहे हमलेसुरक्षा की मांग


    रतलाम ।
    रतलाम में आवारा मवेशी पकड़ने के लिए नगर निगम की टीम पर पशुपालकों के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में निगम की टीम के साथ मारपीटधमकियां और जबरन मवेशियों को छुड़ाने की घटनाएं सामने आई हैं। इस बढ़ते खतरे के कारण नगर निगम कर्मियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
    आवारा मवेशी पकड़ने में बढ़ रही हिंसा

    नगर निगम की टीम हाल ही में शहर के विभिन्न इलाकों से आवारा मवेशी पकड़ने में जुटी हुई थीजब टीम पर हमला होने की घटनाएं सामने आईं। 15 सितंबर को निगम टीम ने अवैध तबेलों के खिलाफ कार्रवाई की थीजिसके बाद बसंत कालोनी निवासी सुरेश राठौड़ और उसके भांजे ध्रुव राठौड़ ने अपनी गाय छुड़वाने के लिए टीम के साथ गाली-गलौच और हाथापाई की। इन दोनों ने वाहन से गायें जबरन उतार दीं और कार्रवाई से मना करने पर धमकी दी। उनका कहना था कि उन्हें निगमपुलिस और प्रशासन का कोई डर नहीं है।

    इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआजिसमें दोनों आरोपी टीम के साथ विवाद करते हुए नजर आ रहे हैं। पुलिस को दिए गए आवेदन में बताया गया कि दोनों आरोपियों ने गायों को छुड़वाने के दौरान न केवल शारीरिक हिंसा कीबल्कि धमकी भी दी कि वे आगे भी ऐसी घटनाओं को अंजाम देंगे।

    कर्मियों की सुरक्षा पर सवाल

    नगर निगम की टीम द्वारा की जा रही कार्रवाई के बावजूद सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जा रही है। टीम के प्रभारी विराट मेहरा ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई और घटना की जांच करने का अनुरोध किया। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि टीम को सुरक्षा देने में प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

    स्वास्थ्य प्रभारी राजेंद्र सिंह पंवार ने इस मामले में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। वहींनिगम ने 15 सितंबर को सुरेश राठौड़ के अवैध तबेले पर भी कार्रवाई की थीलेकिन वहां पक्के निर्माण को हटाने में प्रशासन विफल रहा थाजिसके कारण फिर से मवेशी भाग गए।

    पशुपालकों के खिलाफ पहले भी की गई हैं शिकायतें

    सुरेश राठौड़ और ध्रुव राठौड़ के अलावाकई अन्य पशुपालकों के खिलाफ भी निगम टीम पर हमले और मवेशियों को छुड़वाने की शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें अर्जुन गुर्जरराहुल गुर्जरसचिन गुर्जरचेतन टांकसुरेश राठौड़ और अन्य के नाम शामिल हैं। इन सभी ने पहले भी निगम कर्मियों के साथ मारपीट और धमकी दी थीजिसके कारण मवेशी पकड़ने वाली टीम पर लगातार हमलों का खतरा बढ़ गया है।

    पुलिस की प्रतिक्रिया

    सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया ने कहा कि यदि निगम द्वारा सुरक्षा की मांग की जाती है तो पुलिस जवान उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावापुलिस घटनास्थल पर पहुंचेगी और कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने मामले की जांच का आश्वासन भी दिया है।

    भविष्य में समाधान की आवश्यकता

    आवारा मवेशियों को पकड़ने के लिए नगर निगम की टीम का काम बेहद महत्वपूर्ण हैलेकिन लगातार हो रहे हमले और धमकियों के कारण उनके कार्य में रुकावट आ रही है। ऐसे मेंप्रशासन और पुलिस को आवश्यक सुरक्षा उपायों की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके और टीम अपना कार्य बिना डर के कर सके। इसके अलावापशुपालकों और निगम कर्मियों के बीच बेहतर संवाद और समझ बनाने की आवश्यकता हैताकि ऐसे विवादों से बचा जा सके।

  • राज्य प्रशासनिक सेवा के 25 अधिकारियों को नहीं मिली पदोन्नति79 को मिलेगा लाभ

    राज्य प्रशासनिक सेवा के 25 अधिकारियों को नहीं मिली पदोन्नति79 को मिलेगा लाभ


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए विभागीय पदोन्नति समिति डीपीसी की बैठक शुक्रवार को मंत्रालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कीजिसमें 79 अधिकारियों को पदोन्नति देने का निर्णय लिया गयाजबकि 25 अधिकारियों को विभागीय जांच और प्रतिकूल गोपनीय चरित्रावली के कारण पदोन्नति से रोक दिया गया। यह पदोन्नति 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी।

    पदोन्नति प्रक्रिया

    बैठक में अधिकारियों के विभिन्न पदों पर पदोन्नति के लिए चर्चा की गई। डिप्टी कलेक्टर से संयुक्त कलेक्टर के पद के लिए 9 अधिकारियों पर विचार किया गयाजिनमें से 7 अधिकारियों को पदोन्नति दी गईजबकि दो के नाम रोके गए। इसी तरहसंयुक्त कलेक्टर से अतिरिक्त कलेक्टर के पद के लिए 72 अधिकारियों को पदोन्नति देने का निर्णय लिया गया। हालांकिइस श्रेणी में 13 अधिकारियों को विभिन्न कारणों से पदोन्नति के योग्य नहीं माना गया।इसके अतिरिक्तकुछ अधिकारियों को उच्च वेतनमान देने का भी निर्णय लिया गयाजबकि कुछ अधिकारियों की पदोन्नति रोकी गई।

    विभागीय जांच और प्रतिकूल गोपनीय चरित्रावली

    25 अधिकारियों के नाम पदोन्नति सूची से बाहर किए गएक्योंकि उनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही थी या उनके गोपनीय चरित्रावली में प्रतिकूल प्रविष्टियां थीं। इन अधिकारियों के पदोन्नति का निर्णय फिलहाल रोक दिया गया है। यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया हैताकि पदोन्नति केवल उन्हीं अधिकारियों को मिलेजिनकी कार्यक्षमता और चरित्र साफ-सुथरा हो।

    आइपीएस अधिकारियों के लिए पदोन्नति

    आइपीएस अधिकारियों के लिए पदोन्नति समिति की बैठक 19 दिसंबर को प्रस्तावित की गई है। इसमें तीन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को विशेष महानिदेशकदो पुलिस महानिरीक्षक को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक16 पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों को उप पुलिस महानिरीक्षक और आठ अधिकारियों को सलेक्शन ग्रेड में पदोन्नति देने का प्रस्ताव है।

    भविष्य की दिशा

    पदोन्नति प्रक्रिया से यह साफ हो जाता है कि प्रशासनिक सेवा में पारदर्शिता और ईमानदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों के चयन में उनकी कार्यक्षमता के साथ-साथ उनके चरित्र का भी मूल्यांकन किया जा रहा है। हालांकिपदोन्नति से जुड़े विवाद और अड़चनों से बचने के लिए यह जरूरी होगा कि अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच पूरी पारदर्शिता से पूरी की जाए। यह निर्णय निश्चित रूप से राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हैजो उनके कार्यक्षेत्र में दक्षता और ईमानदारी को बढ़ावा देगा।

  • मध्य प्रदेश में पदोन्नति और ओबीसी आरक्षण विवाद कर्मचारियों और भर्तियों पर गहरा असर

    मध्य प्रदेश में पदोन्नति और ओबीसी आरक्षण विवाद कर्मचारियों और भर्तियों पर गहरा असर



    भोपाल ।
    मध्य प्रदेश में पदोन्नति और ओबीसी आरक्षण जैसे मुद्दे लंबे समय से विवादों में घिरे हुए हैं। इन मुद्दों को लेकर न केवल सरकारी कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय हो गया हैबल्कि राज्य में सरकारी नौकरी और भर्ती प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो रही हैं। विशेष रूप सेराज्य सरकार की ओर से समय-समय पर किए गए प्रयासों के बावजूद इन मुद्दों का समाधान नहीं हो सका है। यह स्थिति राज्य के कर्मचारियों के लिए बेहद कठिन और निराशाजनक बन गई है।

    पदोन्नति का मुद्दा

    मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए पदोन्नति एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों मेंपदोन्नति से संबंधित मामलों ने अदालतों का रुख किया है और इन विवादों के कारण राज्य सरकार को कई बार अपने फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ा है। नए पदोन्नति नियमों को लागू किया गया थालेकिन ओबीसी आरक्षण के मामले में कानूनी अड़चनें सामने आ गईंजिससे यह मामला फिर से अदालतों में चला गया। इसके परिणामस्वरूपराज्य के 80 हजार से अधिक सरकारी कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो गए। इस स्थिति ने कर्मचारियों के बीच असंतोष और निराशा को बढ़ावा दिया है।

    ओबीसी आरक्षण का मुद्दा

    ओबीसी आरक्षण भी एक बड़ा विवादित मुद्दा बन चुका है। मध्य प्रदेश में ओबीसी समुदाय के लिए 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। यह कदम 2019 के लोकसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया था। हालांकिइस फैसले के बाद भी ओबीसी को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सका हैक्योंकि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट में लंबित होने के कारण राज्य में कई पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे न केवल ओबीसी समुदायबल्कि सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के लिए भी असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

    भर्तियों पर प्रभाव

    पदोन्नति और आरक्षण के विवादों के चलते सरकारी भर्तियों पर भी गहरा असर पड़ा है। कई पदों पर भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है और उम्मीदवारों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में सरकारी सेवा में रिक्तियों की संख्या में वृद्धि हो गई हैलेकिन भर्ती प्रक्रिया की अड़चनों के कारण इन रिक्तियों को भरा नहीं जा सका है।

    राजनीतिक और प्रशासनिक पहल

    मध्य प्रदेश की कमल नाथ सरकार ने 2019 में ओबीसी के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाने का कदम उठाया थालेकिन कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण इसका कोई ठोस प्रभाव नहीं पड़ा। राज्य सरकार ने यह दावा किया था कि यह कदम ओबीसी समुदाय के लिए विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैलेकिन कोर्ट के फैसले से पहले यह योजना लागू नहीं हो पाई। इसके अलावापदोन्नति के नए नियमों को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर निरंतर प्रयास किए गएलेकिन कानूनी अड़चनों के कारण यह मामला अब भी उलझा हुआ है।

    भविष्य की दिशा

    पदोन्नति और आरक्षण जैसे मुद्दों का समाधान करना राज्य सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। राज्य सरकार को इन मुद्दों पर उच्च न्यायालय में लंबित मामलों को जल्द सुलझाने के लिए रणनीति बनानी होगी। साथ हीकर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं को यह विश्वास दिलाना होगा कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुलझाने के लिए कदम उठा रही है।राज्य सरकार को इन मुद्दों का हल निकालने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्तिकानूनी विशेषज्ञता और प्रशासनिक दक्षता का संयोजन करना होगा।

    अगर ये विवाद जल्द नहीं सुलझेतो कर्मचारियों में असंतोष और बेरोजगार युवाओं में निराशा का माहौल बन सकता हैजो राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है आखिरकारयह स्थिति मध्य प्रदेश के विकास की गति को प्रभावित कर रही है और राज्य सरकार को इन जटिल मुद्दों का समाधान शीघ्रता से करना होगाताकि राज्य में एक स्थिर और समृद्ध प्रशासनिक माहौल बन सके।