Category: Madhya Pradesh

  • वर्ल्ड चैंपियन बनीं MP की ब्लाइंड बेटियां, लेकिन सम्मान से वंचित: न नौकरी, न इनाम-क्यों हो रहा दिव्यांग खिलाड़ियों से भेदभाव?

    वर्ल्ड चैंपियन बनीं MP की ब्लाइंड बेटियां, लेकिन सम्मान से वंचित: न नौकरी, न इनाम-क्यों हो रहा दिव्यांग खिलाड़ियों से भेदभाव?


    मध्य प्रदेश।  भारत ने जब पहला ब्लाइंड विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप जीता तो यह सिर्फ एक खेल जीत नहीं थी बल्कि जज़्बे संघर्ष औरआत्मनिर्भरता की ऐतिहासिक कहानी थी। इस जीत में मध्य प्रदेश की तीन बेटियों-सुनीता सराठे नर्मदापुरम सुषमापटेल दमोह और दुर्गा येवले बैतूल-ने अहम भूमिका निभाई। लेकिन विडंबना देखिए कि वर्ल्ड चैंपियन बनने के बावजूदइन बेटियों को अपने ही राज्य में अब तक न सम्मान मिला न पुरस्कार और न ही नौकरी की कोई घोषणा।इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट में भारतीय टीम पूरे सफर में अजेय रही। फाइनल मुकाबले में भारत ने नेपाल को 7 विकेट सेहराकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। खास बात यह रही कि जीत दिलाने वाले प्रदर्शन में MP की बेटियों का योगदान निर्णायक था। इसके बावजूद राज्य सरकार की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।

    दूसरे राज्यों ने बढ़ाया मान MP पीछे क्यों?
    जहां ओडिशा सरकार ने अपनी खिलाड़ियों को 11 लाख रुपए और सरकारी नौकरी कर्नाटक ने 10 लाख रुपए और नौकरीऔर आंध्र प्रदेश ने 15 लाख रुपए देने की घोषणा की वहीं मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ। हैरानी की बात यह है कि इन तीनों खिलाड़ियों का आंध्र प्रदेश में भव्य सम्मान हुआ। वहां के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने प्रत्येक खिलाड़ी को 5-5 लाख रुपए की पुरस्कार राशि दी। यानी दूसरे राज्य ने MP की बेटियों को वह सम्मान दिया जो उनका अपना राज्य नहीं दे सका।

    क्रांति को फोन आया इन बेटियों को अपॉइंटमेंट भी नहीं
    क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड मध्य प्रदेश के जनरल सेक्रेटरी और कोच सोनू गोलकर ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब महिला क्रिकेटर क्रांति गौड़ वर्ल्ड कप जीतकर लौटीं तो नेताओं के फोन आए घोषणाएं हुईं। लेकिन इन दिव्यांग बेटियों के लिए एक अपॉइंटमेंट तक नहीं मिल रहा।गोलकर ने सवाल उठाया- क्या ये बेटियां सिर्फ इसलिए नजरअंदाज की जा रही हैं क्योंकि ये दिव्यांग हैं? अगर सम्मान नहीं मिला तो यह सीधा भेदभाव है। खिलाड़ियों का दर्द: फोन पर बधाई मिली मिलने कोई नहीं आया वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली ऑलराउंडर सुनीता सराठे कहती हैं मैंने दो विकेट लिए छह रन आउट किए लेकिन सरकार ने न बुलाया न सम्मानित किया। विधायक-सांसदों ने फोन पर बधाई दी पर मिलने कोई नहीं आया। दुर्गा येवले बताती हैं कि उन्होंने तीन रन आउट और दो स्टंपिंग की फिर भी सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। हम गांव से हैं परिवार हम पर निर्भर है। अगर नौकरी मिल जाए तो ज़िंदगी बदल सकती है।

    सुषमा पटेल का कहना है-
    यह हमारा पहला वर्ल्ड कप था और हम ट्रॉफी लेकर लौटे। सामान्य खिलाड़ियों को तुरंत सम्मान मिलता है लेकिन हमारे साथ भेदभाव क्यों? दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अलग स्पोर्ट्स पॉलिसी की मांग कोच सोनू गोलकर का कहना है कि जब तक दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अलग और ठोस स्पोर्ट्स पॉलिसी नहीं बनेगी तब तक ऐसी अनदेखी होती रहेगी। अगर क्रांति गौड़ के लिए खजाना खुल सकता है तो इन बेटियों के लिए क्यों नहीं? अब सवाल साफ है-क्या वर्ल्ड चैंपियन बनना भी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए काफी नहीं? क्या सम्मान सिर्फ कुछ चुनिंदा चेहरों तक सीमित है?

  • भोपाल में SIR प्रक्रिया के तहत 4.43 लाख मतदाताओं के नाम कटेआंकड़ा चौंकाने वाला

    भोपाल में SIR प्रक्रिया के तहत 4.43 लाख मतदाताओं के नाम कटेआंकड़ा चौंकाने वाला


    भोपाल ।भोपाल में चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण चल रहा है। इस प्रक्रिया में अब तक 39 दिनों में 4 लाख 43 हजार 633 मतदाताओं के नाम कटने की संभावना जताई गई है। ये नाम मुख्य रूप से मृतशिफ्टेडअनुपस्थितडबल एंट्री और अन्य कारणों से कटे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित वह मतदाता हैं जिनके नाम ‘नो-मैपिंग’ सूची में थेजिनकी संख्या घटकर 1 लाख 35 हजार 765 रह गई है। इस पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर राजनीति में हलचल तेज हो गई हैऔर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने निर्वाचन आयोग से प्रक्रिया की पारदर्शिता की मांग की है।

    SIR प्रक्रिया और नाम कटने की वजह

    SIR प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को साफ और सही बनाना है ताकि चुनावों में कोई धोखाधड़ी न हो। इस दौरान मृतशिफ्टेड या अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैंऔर जिनका नाम डबल एंट्री के रूप में दर्ज हैउनका नाम भी हटाया जाता है। इन कदमों से सूची में वास्तविक और सक्रिय मतदाताओं की संख्या सुनिश्चित होती है।

    भोपाल में जिन 4.43 लाख मतदाताओं के नाम कटने की संभावना जताई गई हैउनमें से अधिकांश मृत और शिफ्टेड मतदाता हैंजिनकी जानकारी नियमित रूप से अपडेट नहीं की गई थी। इसके अलावाकई मतदाताओं के नाम डबल एंट्री के कारण भी कटने जा रहे हैं। इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग ने बूथ लेवल अधिकारी से सभी नामों की वेरिफिकेशन कराने का निर्देश दिया है।

    राजनीतिक दलों का रुख और आयोग की प्रतिक्रिया

    चुनाव आयोग के आब्जर्वर ब्रजमोहन मिश्रा ने शुक्रवार को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस बैठक में उन्होंने इन नामों को वेरिफाई कराने का सुझाव दिया ताकि कोई भी मतदाता बिना वजह सूची से बाहर न हो जाए। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि 18 दिसंबर तक गणना पत्रक जमा किए जाएं।

    हालांकिविधानसभा क्षेत्रों में जहां ज्यादा मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा हैआयोग ने कुछ क्षेत्रों में बीएलओ की कामकाजी स्थिति की भी समीक्षा की। नरेलामध्यगोविंदपुरा और हुजूर जैसी विधानसभाओं में बीएलओ के काम को और कड़ी निगरानी में रखने का निर्णय लिया गया थालेकिन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हो गए।

    भविष्य की दिशा और चुनौती

    इस पुनरीक्षण प्रक्रिया से निश्चित रूप से मतदाता सूची में सुधार होगालेकिन इसके परिणामस्वरूप कुछ राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को असंतोष भी हो सकता हैविशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां नाम काटे गए हैं। चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष रहेताकि भविष्य में कोई विवाद न उठे।

    इतना ही नहींराजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को भी मतदाता सूची में सुधार की इस प्रक्रिया को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिएक्योंकि यह चुनावी प्रणाली को मजबूत और निष्पक्ष बनाता है। अगर प्रक्रिया ठीक से लागू होती है तो यह चुनावों की विश्वसनीयता को बढ़ाएगा और लोगों का विश्वास बनाए रखेगा।

  • MP: इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड में सोनम की दो सहेलियों की हुई पेशी, चेहरा छुपाकर पहुंची कोर्ट

    MP: इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड में सोनम की दो सहेलियों की हुई पेशी, चेहरा छुपाकर पहुंची कोर्ट


    इंदौर।
    राजा रघुवंशी (Raja Raghuvanshi) हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी (Sonam Raghuvanshi) की दो करीबी सहेलियां गुरुवार को शिलॉन्ग कोर्ट (Shillong Court) में पेश हुईं। इंदौर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video conferencing) के जरिए हुई इस सुनवाई में अदालत ने दोनों युवतियों पर सवालों की झड़ी लगा दी। अदालत की सख्त निगरानी में हुए इस बयान दर्जीकरण से केस एक बार फिर उबाल पर आ गया है।

    दीपांशी और प्रियांशी दोनों सोनम के भाई गोविंद की फैक्ट्री में कंप्यूटर का काम करती हैं। ई-सेवा पोर्टल के जरिए सुनवाई में जुड़ीं इन युवतियों को कोर्ट ने सीधे-सीधे सोनम के व्यवहार, स्वभाव और उसके पिछले चाल-चलन पर जवाब देने को कहा। सूत्रों के मुताबिक, अदालत ने पहले सोनम की पहचान कराई, फिर तीखे शब्दों में पूछा—’हत्या से पहले सोनम का रवैया कैसा था? क्या तुम राजा को जानती थीं?’ दीपांशी का बयान कोर्ट ने दर्ज कर लिया, जबकि प्रियांशी से अगली सुनवाई में पूछताछ होगी। दोनों युवतियाँ बिना मीडिया से आंख मिलाए कोर्ट परिसर से निकल गईं।

    सरकारी वकील ने दोनों की पेशी की मांग की थी, जिसके लिए 27 नवंबर को नोटिस जारी हुआ। यह दूसरा नोटिस था, पहले नोटिस पर दोनों कोर्ट पहुंचने तक की हिम्मत नहीं जुटा सकी थीं।


    खाई में मिला था राजा का शव

    11 मई को सोनम से शादी करने वाले इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी 20 मई को हनीमून पर मेघालय रवाना हुए थे। 22 मई को वे सोहरा घूमने निकले और 24 मई से परिवार का संपर्क उनसे टूट गया। 27 मई को सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ, बारिश के कारण एक दिन रुका और 2 जून को खाई से राजा का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासा हुआ कि राजा की हत्या पेड़ काटने वाले तेज हथियार से की गई थी। इसके बाद पुलिस सोनम की तलाश में पागलों की तरह दौड़ी और 9 जून को वह यूपी के गाजीपुर के एक ढाबे पर मिली। वहीं से केस की परतें खुलती गईं और पुलिस ने कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें से तीन जमानत पर बाहर हैं।


    790 पन्नों की चार्जशीट

    6 सितंबर को मेघालय पुलिस की एसआईटी ने शिलॉन्ग कोर्ट में 790 पन्नों की चार्जशीट पेश की। इसमें साफ-साफ लिखा है कि राजा की हत्या में सोनम, उसके बॉयफ्रेंड राज कुशवाह और तीन अन्य सीधे शामिल हैं। पांचों आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं।


    विपिन रघुवंशी का दर्दनाक आरोप

    शिलॉन्ग रवाना होने से पहले राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मैंने ही राजा और सोनम के लापता होने की शिकायत की थी। अभी तक हमें चार्जशीट नहीं मिली, इसलिए हत्या का असली मोटिव छुपा हुआ है। लेकिन जितना समझ पा रहा हूं राज और सोनम ने प्यार नहीं, हवस के लिए मेरे भाई की हत्या की। लोग प्यार में कुर्बानी देते हैं, लेकिन इन दोनों ने अपनी वासना पूरी करने के लिए उसे मार डाला।

    बता दें, राजा की लाश 2 जून को शिलॉन्ग में मिली थी और केस के पाँच आरोपी अभी जेल में बंद हैं। एसआईटी 790 पेज में पूरी साजिश कोर्ट को सौंप चुकी है।

  • सीएम डॉ. मोहन यादव ने दो साल की उपब्धियां साझा कीलॉ एंड ऑर्डर सुधार पर जोर

    सीएम डॉ. मोहन यादव ने दो साल की उपब्धियां साझा कीलॉ एंड ऑर्डर सुधार पर जोर


    भोपाल । मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार को दो साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर बुधवार को भोपाल में एक पत्रकारवार्ता का आयोजन किया गयाजिसमें मुख्यमंत्रीडिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सरकार की विभिन्न उपलब्धियों का उल्लेख किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार द्वारा किए गए कार्यों का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करते हुए भविष्य के लिए सरकार के लक्ष्य को भी साझा किया।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने दो वर्षों में महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम कियाजिनमें जल प्रबंधन और लॉ एंड ऑर्डर सुधार सबसे प्रमुख रहे। विशेष रूप से पार्वतीकालीसिंधचंबलकेन-बेतवा और ताप्ती नदी जोड़ो परियोजनाओं को लेकर उन्होंने कहा कि यह योजनाएं नए युग की शुरुआत हैंजो प्रदेश के जल संकट को दूर करने में मददगार साबित होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजनाएं न सिर्फ जल प्रबंधन में सुधार करेंगीबल्कि प्रदेश की कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी।

    मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएं

    क्षिप्रा जल योजना

    मुख्यमंत्री ने 800 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही क्षिप्रा योजना का उल्लेख कियाजिसके तहत अब क्षिप्रा नदी का जल प्रयोग कर स्नान की सुविधा उपलब्ध होगी। यह योजना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    नदी जोड़ो परियोजना

    गंभीर और खान नदी को जोड़कर एक नई परियोजना बनाई गई हैजिसमें नदी के नीचे टनल बनाकर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। यह परियोजना प्रदेश में कृषि क्षेत्र को समृद्ध करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

    लॉ एंड ऑर्डर सुधार

    सीएम ने कहा कि उनके सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति थी। विशेष रूप से माओवादियों का आतंक मध्यप्रदेश के कुछ क्षेत्रों में व्याप्त था। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने माओवादियों के खात्मे के लिए एक ठोस लक्ष्य तय कियाऔर इसके बाद मंडलाबालाघाटडिंडोरी जैसे जिलों में माओवादियों का आतंक खत्म हुआ। इन जिलों को अब लाल आतंक से मुक्त किया गया है।

    सरकार की आगामी योजनाएं

    मुख्यमंत्री ने दो साल की समीक्षा के बाद आगामी तीन वर्षों के लिए एक व्यापक कार्य योजना बनाई है। इस कार्य योजना में मंत्री विभागवार प्रेजेंटेशन देंगेजिससे हर विभाग के कार्यों और योजनाओं का लक्ष्य तय किया जाएगा।

    सीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने विकास के हर क्षेत्र में सुधार किया हैऔर वे आगामी वर्षों में और अधिक विकास कार्यों को मूर्त रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने किसानोंयुवाओंमहिलाओं और अन्य वर्गों के लिए भी योजनाओं की घोषणा कीजिनसे प्रदेश में समग्र विकास सुनिश्चित होगा।

    सीएम डॉ. मोहन यादव के अनुसारउनकी सरकार ने दो वर्षों में कई ऐतिहासिक कार्य किए हैंजिनका लाभ प्रदेशवासियों को मिलने वाला है। जल प्रबंधन और लॉ एंड ऑर्डर में सुधारदोनों ही मामलों में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। साथ हीआने वाले वर्षों में सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर क्षेत्र में समृद्धि लाना और माओवाद जैसी समस्याओं का पूरी तरह से समाधान करना है।

  • रतलाम मंडी में प्याज की छटनी को लेकर किसान-व्यापारी के बीच विवादनीलामी हुई रद्द

    रतलाम मंडी में प्याज की छटनी को लेकर किसान-व्यापारी के बीच विवादनीलामी हुई रद्द


    रतलाम । रतलाम के महू रोड स्थित कृषि उपज मंडी में गुरुवार सुबह एक बड़ा विवाद हुआ। प्याज की नीलामी के बाद छटनी के दौरान किसान और व्यापारी के बीच तीखी बहस और गाली-गलौज हुईजिससे स्थिति बिगड़ गई। इस विवाद ने मंडी में कामकाज ठप कर दिया और सभी व्यापारियों ने नीलामी रोकने का फैसला किया। नीलामी रुकने से मंडी में हलचल मच गई और व्यापारियों ने अपना विरोध मंडी सचिव के पास पहुंचकर दर्ज कराया।

    यह घटना करीब 11 बजे हुई जब प्याज की नीलामी के बाद छटनी की प्रक्रिया शुरू हुई। सांवरिया ट्रेडर्स डीएम में व्यापारी और किसान के बीच प्याज की गुणवत्ता और मूल्य को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए। गाली-गलौज तक पहुंचने के बाद व्यापारियों ने नीलामी रोक दी और विरोध जताया।

    सूत्रों के अनुसारकिसान ने बाद में अपने व्यवहार के लिए माफी भी मांगीलेकिन व्यापारी इस मामले में संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने मंडी सचिव के कार्यालय पहुंचकर इस विवाद को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। इस दौरान मंडी सचिव लक्ष्मी भंवर और अन्य अधिकारी इस विवाद को शांत करने के लिए दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश करते रहे।

    इस मामले मेंव्यापारी और किसान के बीच पारदर्शी और उचित व्यापारिक प्रथाओं की आवश्यकता को लेकर सवाल उठे हैं। छटनी के दौरान उचित व्यवहार और सम्मान का अभाव होने के कारण विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकिमंडी प्रशासन ने स्थिति को सामान्य बनाने के लिए प्रयास जारी रखा।

    मंडी अधिकारियों का प्रयास

    मंडी सचिव लक्ष्मी भंवर ने किसान और व्यापारियों को शांत करने और आपसी तालमेल स्थापित करने के लिए कई बार संवाद का प्रयास किया। अधिकारियों ने भी इस मुद्दे पर विचार करते हुए किसानों और व्यापारियों के बीच समझौता करने की कोशिश की। हालांकिस्थिति कुछ समय तक तनावपूर्ण रहीलेकिन मंडी अधिकारियों की कोशिशों से अंततः कुछ हद तक स्थिति पर काबू पाया गया।

    मंडी के कामकाज पर असर

    इस विवाद का असर मंडी के सामान्य कामकाज पर पड़ा। नीलामी रुकने से कई व्यापारियों और किसानों को आर्थिक नुकसान हुआसाथ ही समय भी नष्ट हुआ। इस तरह के विवादों से न केवल मंडी की छवि पर बुरा असर पड़ता हैबल्कि किसानों और व्यापारियों के बीच आपसी विश्वास भी कमजोर होता है।

    भविष्य में समाधान की आवश्यकता

    इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मंडी में पारदर्शिता और उचित व्यापारिक प्रक्रिया की जरूरत है। किसान और व्यापारी दोनों के लिए एक ऐसे माहौल की आवश्यकता हैजिसमें उनके अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट हों और वे एक दूसरे के साथ सम्मानजनक तरीके से पेश आएं।

    इसके अलावामंडी प्रशासन को इस तरह के विवादों से बचने के लिए ठोस कदम उठाने होंगेताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों का सामना न करना पड़े। समय रहते यदि उचित कदम नहीं उठाए गएतो ऐसी घटनाएं किसानों और व्यापारियों के बीच और मंडी के कामकाज में और समस्याएं पैदा कर सकती हैं।

    रतलाम मंडी में प्याज की नीलामी को लेकर हुए विवाद ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि किसानों और व्यापारियों के बीच आपसी तालमेल कितना महत्वपूर्ण है। मंडी प्रशासन को इस मुद्दे को लेकर जल्द से जल्द समाधान ढूंढना होगाताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके और मंडी में कामकाज को सुचारु रूप से चलाया जा सके।

  • नए साल में MP के बिजली उपभोक्ताओं को लग सकता है बड़ा झटकाबिजली दरों में 10% तक बढ़ोतरी की योजना

    नए साल में MP के बिजली उपभोक्ताओं को लग सकता है बड़ा झटकाबिजली दरों में 10% तक बढ़ोतरी की योजना

    जबलपुर। मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए नया वित्तीय वर्ष 2026-27 महंगा साबित हो सकता है। बिजली कंपनियों ने राज्य विद्युत नियामक आयोग को बिजली दरों में 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया हैजिसे मंजूरी मिलने पर उपभोक्ताओं को बिजली के बिलों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। पावर मैनेजमेंट कंपनी ने विद्युत नियामक आयोग के पास टैरिफ पिटिशन दाखिल की हैजो अब सुनवाई के बाद तय करेगा कि दरों में कितनी वृद्धि की जाएगी।

    पावर कंपनी ने प्रस्ताव में करीब 42,000 करोड़ रुपये का घाटा बताया है और इस घाटे को कम करने के लिए दरों में वृद्धि की योजना बनाई है। विद्युत आयोग को यह पिटिशन 15 दिसंबर तक सार्वजनिक करने की संभावना हैऔर इसके बाद आम जनता से आपत्ति भी ली जाएगी। यदि इस पर कोई आपत्ति नहीं आतीतो आयोग इसकी मंजूरी दे सकता है।

    घाटे का आंकड़ा

    पावर मैनेजमेंट कंपनी के सीजीएम रेवेन्यु शैलेंद्र सक्सेना ने पुष्टि की कि आयोग को पिटिशन दी गई हैलेकिन उन्होंने फिलहाल यह खुलासा नहीं किया कि बढ़ोतरी का प्रस्ताव कितना प्रतिशत हो सकता है। हालांकिएक अधिकारी ने बताया कि प्रस्ताव में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी करीब 18,712 करोड़ रुपये के घाटे में हैपूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी 16,378 करोड़ रुपये और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी 7,285 करोड़ रुपये के घाटे में चल रही हैं। इन घाटों को पूरा करने के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी की योजना बनाई जा रही है।

    सम्भावित प्रभाव

    अगर यह प्रस्ताव लागू होता हैतो यह मध्यप्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए भारी पड़ सकता है। खासतौर पर वे उपभोक्ता जो घरेलू उपयोग के लिए बिजली का खर्च उठाते हैंउन्हें इसके असर से जूझना पड़ेगा। इस प्रस्ताव से पहले ही बिजली दरों में मामूली वृद्धि हो चुकी हैऔर अब अगर दरें और बढ़ती हैं तो उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ और बढ़ जाएगा।

    इसके बावजूदबिजली कंपनियों का कहना है कि बढ़ोतरी का मुख्य उद्देश्य कंपनियों के घाटे को कम करना और वित्तीय स्थिति को स्थिर बनाना है। हालांकिइससे जुड़ी असंतोष की स्थिति भी बन सकती हैऔर उपभोक्ताओं को इस बारे में अपनी आपत्तियां उठाने का मौका मिलेगा।

    मध्यप्रदेश में बिजली दरों में बढ़ोतरी की यह योजना कई उपभोक्ताओं के लिए नई चुनौतियां ला सकती है। खासकर सर्दियों के मौसम में जहां पहले से ही अन्य खर्चे बढ़ जाते हैंऐसे में बिजली दरों में वृद्धि के फैसले से आम लोगों के बजट पर और असर पड़ सकता है। फिलहालसभी की निगाहें इस पिटिशन पर हैंऔर यह देखना होगा कि आयोग इसके बाद क्या निर्णय लेता है।

  • जबलपुर के गांवों में मगरमच्छों की धूप सेंकने की घटना से मची दहशतवन विभाग की टीम की ढिलाई पर सवाल

    जबलपुर के गांवों में मगरमच्छों की धूप सेंकने की घटना से मची दहशतवन विभाग की टीम की ढिलाई पर सवाल


    जबलपुर । इन दिनों जबलपुर में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने न केवल मानव जीवन को प्रभावित किया हैबल्कि वन्य प्राणियों के लिए भी समस्याएं पैदा कर दी हैं। जलचर प्राणीविशेष रूप से मगरमच्छठंड से राहत पाने के लिए धूप सेंकने की आदत बना रहे हैं। यह अद्भुत दृश्य जबलपुर जिले के परियट जलाशय से लगे गांवों में देखा जा रहा मटामरघानारिठौरीपिपरिया और आसपास की कालोनियों में मगरमच्छों का आना बढ़ गया हैजिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया है।

    परियट जलाशय मगरमच्छों के लिए एक प्राकृतिक निवास स्थान बन चुका है। इस क्षेत्र में लगभग 1000 मगरमच्छ रहते हैंऔर इनकी संख्या समय के साथ बढ़ी है। ये जलचरजो आमतौर पर जल में रहते हैंअब ठंड से बचने के लिए धूप में आराम करने निकल आते हैं। परियट नदी में मगरमच्छों की अधिकता के कारण वे शिकार की तलाश में और अपने निवास स्थान से बाहर भी भटकने लगे हैं। अब ये मगरमच्छ गांवों के नजदीक आकर मानव बस्तियों तक पहुंच रहे हैंजो लोगों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

    इन मगरमच्छों ने पहले कुछ पालतू जानवरों पर हमले किए हैंजिनमें श्वान और मवेशी शामिल हैं। हालांकिअभी तक किसी मनुष्य पर हमला नहीं हुआ हैलेकिन स्थानीय लोग इस खतरे को लेकर बेहद चिंतित हैं। कई बार गांवों के सरपंचों ने वन विभाग से इस समस्या का समाधान निकालने के लिए अपील की हैलेकिन वन विभाग की टीम की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। वे केवल रेस्क्यू का आश्वासन देकर अपना काम निपटा लेते हैंजबकि समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

    वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द ही इस स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाएंगेलेकिन अब तक इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। इस खतरनाक स्थिति में वन विभाग की ढिलाई पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का हल नहीं निकाला गयातो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

    मगरमच्छों के बढ़ते खतरे को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इंसानी दखल की वजह से इनका प्राकृतिक निवास क्षेत्र घटता जा रहा हैजिसके कारण वे रहवासी इलाकों में घुसने लगे हैं। इस समस्या का समाधान वन विभाग के समुचित और तत्काल प्रयासों में हैलेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग जल्द इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाएगा

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्व. गोपीनाथ मुंडे की जयंती पर किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्व. गोपीनाथ मुंडे की जयंती पर किया नमन


    मध्य प्रदेश / मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. गोपीनाथ मुंडे की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. मुंडे का जीवन देशभक्ति और समाजसेवा की मिसाल है, जिसने गरीब और वंचित वर्ग के कल्याण के लिए अपने संपूर्ण जीवन को समर्पित किया। डॉ. यादव ने कहा कि स्व. गोपीनाथ मुंडे ने हमेशा नए भारत के निर्माण के लिए काम किया और युवाओं को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा दी। उनका सरल जीवन, ईमानदार व्यक्तित्व और समाज के कमजोर वर्ग के लिए किए गए प्रयास सदैव याद किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके आदर्श और नीति-निर्देश आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।

    स्व. मुंडे महाराष्ट्र के समाज और राजनीति में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व थे। उन्होंने गरीब और किसानों के हितों की आवाज़ उठाई और उनकी बेहतरी के लिए कई सामाजिक और आर्थिक योजनाओं की शुरुआत की। उनके कार्य और जीवनशैली ने यह साबित किया कि सच्ची सेवा और समर्पण से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि स्व. मुंडे की जयंती पर उनके योगदान को याद करना केवल श्रद्धांजलि नहीं,बल्कि उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में सुधार और विकास लाने का अवसर भी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्व. मुंडे के जीवन से प्रेरणा लेकर देश और समाज के लिए निरंतर प्रयास करें।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा, स्व. गोपीनाथ मुंडे का संकल्प और उनकी निष्ठा हम सभी के लिए मार्गदर्शन का स्रोत हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि सच्ची सेवा और समर्पण से समाज के कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सकता है। डॉ. यादव ने अंत में कहा कि स्व. मुंडे के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा और उनकी सोच को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और समाज मिलकर प्रयास करेंगे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जूनियर्स हॉकी विश्व कप-2025 में कांस्य पदक जीतने पर टीम को दी बधाई

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जूनियर्स हॉकी विश्व कप-2025 में कांस्य पदक जीतने पर टीम को दी बधाई

     
    मध्य प्रदेश /मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एफ.आई.एच. हॉकी पुरुष जूनियर्स विश्व कप-2025 में भारतीय जूनियर हॉकी टीम द्वारा कांस्य पदक जीतने पर टीम को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। यह उपलब्धि न केवल भारतीय हॉकी के लिए गौरवपूर्ण है बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस उपलब्धि ने दिखा दिया है कि समर्पण अनुशासन और निरंतर प्रयास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा -यह अभूतपूर्व उपलब्धि हमारे युवा खिलाड़ियों की मेहनत संघर्ष और टीम भावना का परिणाम है। जूनियर्स टीम ने हर मुकाबले में अपने कौशल और धैर्य का लोहा मनवाया और विश्व कप में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।-

    उन्होंने कहा कि यह पदक केवल एक जीत नहीं है बल्कि यह भविष्य के लिए नई प्रेरणा और उम्मीद लेकर आता है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से आग्रह किया कि वे इसी उत्साह और मेहनत के साथ आगे बढ़ें और भारतीय हॉकी को विश्व स्तर पर और ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ। उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह की उपलब्धियों को बढ़ावा देने के लिए खिलाड़ियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएँ और अंतरराष्ट्रीय अनुभव सुनिश्चित करने में लगातार प्रयास कर रही है।एफ.आई.एच. जूनियर्स विश्व कप-2025 में भारतीय टीम ने कठिन मुकाबलों के बाद कांस्य पदक अपने नाम किया। टीम ने सेमीफाइनल में चुनौतीपूर्ण मैचों का सामना किया और हार के बावजूद अपने आत्मविश्वास और सामूहिक रणनीति से कांस्य पदक जीतने में सफलता हासिल की। इस उपलब्धि ने खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीम के प्रत्येक सदस्य का नाम लेते हुए उनके योगदान की सराहना की और कहा कि उनके खेल में अनुशासन और समर्पण ने ही टीम को इस सफलता तक पहुँचाया। उन्होंने कहा कि यह जीत भारतीय हॉकी के उज्जवल भविष्य की ओर संकेत करती है और आने वाले वर्षों में देश की हॉकी को और मजबूत बनाने में मदद करेगी। डॉ. यादव ने कहा कि सरकार खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण केंद्र और अकादमिक कार्यक्रम संचालित कर रही है। इसके तहत खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता वाले कोचिंग आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर दिए जाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में और अधिक युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस सफलता ने न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया है बल्कि पूरे देश में खेलों के प्रति उत्साह और विश्वास को भी बढ़ाया है। उन्होंने टीम के कोच और सपोर्ट स्टाफ को उनके समर्पण के लिए धन्यवाद दिया जिन्होंने खिलाड़ियों को हर स्थिति में मार्गदर्शन और प्रेरणा दी। डॉ. यादव ने खिलाड़ियों से कहाआपकी यह जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। यह दिखाती है कि मेहनत धैर्य और टीम भावना के साथ किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। हमें आप पर गर्व है और हम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।-इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी और अन्य खेलों के विकास के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों की सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे देश की उपलब्धि है और इसे राष्ट्रीय गौरव के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • राज्यपाल श्री पटेल ने की जनमन अभियान की समीक्षा, दवा वितरण और बिजली आपूर्ति पर दिए निर्देश

    राज्यपाल श्री पटेल ने की जनमन अभियान की समीक्षा, दवा वितरण और बिजली आपूर्ति पर दिए निर्देश

    मध्य प्रदेश /राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा वितरित किए जाने वाली दवा की मात्रा मोबाइल यूनिट रूट चार्ट के अनुसार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि रोगी को दवा की आवश्यकता और मेडिकल यूनिट के पुन: आगमन की अवधि की गणना के अनुसार दवा का वितरण होना चाहिए, जिससे यूनिट के दोबारा आने तक रोगी के पास दवा की उपलब्धता बनी रहे। राज्यपाल श्री पटेल शुक्रवार को लोक भवन में जनजातीय प्रकोष्ठ की पीएम जनमन योजना की समीक्षा बैठक में जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री दीपक खांडेकर एवं अन्य सदस्य भी मौजूद थे।

    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि जनमन योजना के तहत हितग्राहियों को मिले आवास में विद्युत कनेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। आवास वार विद्युत कनेक्शनों की उपलब्धता की जानकारी संकलित कर, जिन घरों में विद्युत कनेक्शन नहीं है, उनको चिह्नित किया जाए। विद्युत कनेक्शन कराने की व्यवस्था की जाए। राज्यपाल श्री पटेल को बताया गया कि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जनमन योजना अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा 9 लाख 52 हजार से अधिक रोगियों का पंजीकरण किया गया है। इनमें 4 लाख 75 हजार 375 पी.व्ही.टी.जी. हितग्राही और 4 लाख 76 हजार 647 अन्य हितग्राही शामिल हैं। यूनिट द्वारा 95 हजार 360 सिकल सेल और 15 हजार 811 की टी.बी. स्क्रीनिंग की गई। 7 लाख से अधिक रोगियों की डायग्नोस्टिक जाँच भी की है।

    बैठक में बताया गया है कि पीएम जनमन योजना, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक प्रदेश के 24 जिलों में संचालित है। योजना के तहत पी.व्ही.टी.जी. की 6 हजार से अधिक बसाहटों के 13 लाख 43 हजार से अधिक पी.व्ही.टी.जी. आबादी को लाभान्वित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गतहितग्राही मूलक सात योजनाओं आधार कार्ड, जनधन बैंक खाता, आयुष्मान भारत, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिटकार्ड,पीएम किसान सम्मान निधि और राशन कार्ड में सैचुरेशन की स्थिति है। कुल 1 लाख 30 हजार 521 प्रधानमंत्री आवास पूर्ण हो गए है। मध्यप्रदेश जल निगम द्वारा वर्तमान में 147 समूह जल प्रदाय योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।पीएम जनमन कार्यक्रम के अंतर्गत 48 समूह जल प्रदाय योजनाओं में से अनूपपुर एवं बालाघाट जिले की योजनाओं का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

    संचालन एवं संधारण के शेष कार्यों को समय सीमा में पूर्ण कर लिया जायेगा। दतिया, कटनी, सिवनी एवं उमरिया जिले की 6 योजनाओं के कार्य लगभग पूर्ण हो चुके है। शेष कार्य समय सीमा में पूर्ण किये जाने के कार्य प्रगतिरत है। बैठक में हर घर नल से जल, बहुउद्देशीय केन्द्र, आंगनवाड़ी निर्माण, छात्रावास, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, हर घर बिजली, हर घर बिजली-ऑफ ग्रिड, वनधन विकास केन्द्र और मोबाइल नेटवर्क कार्यों की प्रगति की जानकारी दी है। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य विभाग श्री गुलशन बामरा, आयुक्त एवं संचालक, जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना श्री सतेन्द्र सिंह राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।