Category: Madhya Pradesh

  • मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना 943 किसानों की जमीन अधिग्रहण लेकिन धार जिले में काम बाकी

    मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना 943 किसानों की जमीन अधिग्रहण लेकिन धार जिले में काम बाकी



    इंदौर ।
    मध्य प्रदेश में मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है। इस परियोजना के तहत इंदौर जिले के महू तहसील में 18 गांवों के कुल 943 किसानों की जमीन अधिग्रहीत की जा चुकी है। यह रेल मार्ग महाराष्ट्र से सीधे आंबेडकर नगर स्टेशन को जोड़ेगा जो क्षेत्रीय परिवहन और विकास को एक नई दिशा देने की उम्मीदें जगाता है। परियोजना के तहत खेड़ी इस्तमुरार गांव से भूमि अधिग्रहण की औपचारिक शुरुआत भी हो चुकी है जो इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम है।

    मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना को लेकर अब तक इंदौर जिले में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में कोई बड़ी अड़चन नहीं आई है लेकिन धार जिले में यह कार्य अभी अधूरा है जिससे परियोजना की प्रगति प्रभावित हो रही है। धार जिले में भूमि अधिग्रहण की गति धीमी होने के कारण इस परियोजना की समय-सीमा पर असर पड़ सकता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार बड़वानी जिले के सेंधवा क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। सेंधवा की भूमि अधिग्रहण संबंधी फाइल कसरावद प्रशासन को ड्राफ्ट तैयार करने के लिए भेज दी गई है और ड्राफ्ट के अनुमोदन के बाद सेंधवा की अंतिम अधिग्रहण सूची जारी कर दी जाएगी।

    मनोज मराठे जो रेलवे संघर्ष समिति के प्रमुख हैं ने धार जिले में चल रही देरी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने इंदौर में रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य नागेश नामजोशी के साथ बैठक की और विभागीय स्तर पर ठोस कदम उठाने की मांग की। मराठे ने कहा कि यदि धार जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कोई और देरी हुई तो इससे परियोजना की शुरुआत में अनावश्यक विलंब हो सकता है जो जनहित में नुकसानदायक हो सकता है।

    मराठे का कहना है कि समिति का प्रयास है कि सभी प्रभावित जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के शीघ्र पूरी हो ताकि मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना समय पर धरातल पर उतर सके और व्यापक जनहित को लाभ पहुंचा सके।

    मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना का महत्व

    यह रेल परियोजना न केवल महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करेगी बल्कि यह क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आंबेडकर नगर स्टेशन से रेल मार्ग जुड़ने से न केवल परिवहन की गति बढ़ेगी बल्कि आसपास के क्षेत्रों के आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना की सफलता इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी उम्मीद बन सकती है और यह भारतीय रेल नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

    हालांकि इस परियोजना की प्रगति में कुछ चुनौतियां भी आ रही हैं विशेषकर धार जिले में भूमि अधिग्रहण को लेकर लेकिन उम्मीद की जाती है कि जल्द ही प्रशासन और रेलवे विभाग के प्रयासों से ये समस्याएं हल हो जाएंगी और परियोजना समय पर पूरी होगी। इस तरह मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना ना केवल क्षेत्रीय परिवहन को एक नया आयाम देगी बल्कि प्रदेश के विकास में भी अहम योगदान करेगी।

  • जगदीशपुर किला गोंड काल से मुगल दौर तक की ऐतिहासिक यात्रा और जीर्णोद्धार की नई शुरुआत

    जगदीशपुर किला गोंड काल से मुगल दौर तक की ऐतिहासिक यात्रा और जीर्णोद्धार की नई शुरुआत


    भोपाल ।
    मध्य प्रदेश का जगदीशपुर किला एक ऐतिहासिक धरोहर है जिसकी कहानी कई सदियों पुरानी है। 15वीं शताब्दी में गोंड साम्राज्य के 52 किलों में से एक महत्वपूर्ण किला आज भी अपने ऐतिहासिक महत्व को संजोए हुए है। गोंड साम्राज्य के दौरान यह किला विशेष स्थान रखता था और उसकी स्थापत्य कला की अनूठी शैली को यहां देखा जा सकता है। समय के साथ किले का रूप और नाम बदलते रहे लेकिन इसके ऐतिहासिक महत्व में कोई कमी नहीं आई।

    किले की कहानी गोंड साम्राज्य से शुरू होती है जब यहां के वन क्षेत्रों में गोंड शासकों ने स्थानीय सत्ता संभाली थी। संग्रामशाह ने कई किलों का निर्माण कराया था जिनमें से यह किला भी शामिल था। रानी दुर्गावती की पराजय के बाद किला अकबर के अधीन आ गया था। मुगल काल में यह किला देवड़ा राजपूतों का ठिकाना बना और इसे ‘जगदीशपुर’ नाम मिला। बाद में 18वीं शताब्दी में दोस्त मोहम्मद खान ने इसका नाम बदलकर ‘इस्लामनगर’ कर दिया लेकिन आज यह किला जगदीशपुर के नाम से ही प्रसिद्ध है।

    किले की संरचना और स्थापत्य की खासियत

    जगदीशपुर किले की संरचना और सुरक्षा प्राचीर आज भी अपनी भव्यता बनाए हुए हैं। किले के चारों ओर मजबूत बुर्ज बनाए गए हैं जिनका अलंकरण गोंड स्थापत्य कला को दर्शाता है। बुर्जों से दुश्मनों पर सटीक निशाना साधने की व्यवस्था थी। किले के परिसर में तीन मुख्य प्रवेश द्वार हैं जबकि चौथा द्वार शाही परिसर का हिस्सा बन चुका है। किले में गोंड महल और शाही परिसर दो महत्वपूर्ण निर्माण हैं जिन्हें आंतरिक प्राचीर से सुरक्षित किया गया था।

    गोंड महल – 15वीं शताब्दी का प्रतीक

    गोंड महल किले का सबसे पुराना महल है जो 15वीं से 16वीं शताब्दी के बीच बना था। यह महल उस समय की शाही भव्यता का प्रतीक था। महल में तीन मंजिलें हैं जिनमें विशाल आंगन मेहराबदार दालान आवासीय कक्ष दीवाने-आम फव्वारा स्नानगृह अश्वशाला और बाग हैं। लताबल्लरी युक्त मेहराबें और नक्काशीदार झरोखे महल की भव्यता को आज भी जीवंत रखते हैं।

    रानी महल – गोंड और मुगल स्थापत्य का संगम

    रानी महल किले की एक और प्रमुख संरचना है। इसकी मूल संरचना 16वीं शताब्दी की गोंड शैली में बनी है जबकि 17वीं शताब्दी में इसमें मुगल शैली की बहुकोणीय मेहराबें जोड़ी गईं। यह महल कभी देवड़ा राजपूत जमींदारों और बाद में दोस्त मोहम्मद खान का निवास भी रहा। रानी महल की मरम्मत तो हुई है लेकिन इसकी मूल संरचना को पूरी तरह से बरकरार रखा गया है।

    चमन महल – शाही परिसर का एक अनमोल रत्न

    रानी महल के उत्तर में स्थित चमन महल शाही परिसर की शोभा है। यह महल राजपूत-मुगल शैली का बेहतरीन उदाहरण है जिसमें सुंदर उद्यान गुंबद नुकीली आमेर शैली की अर्ध-मेहराबें और मुगल शैली का हमाम विशेष आकर्षण हैं। यहां स्थित चारबाग शैली का उद्यान और फव्वारे कश्मीर के मुगल बागों की याद दिलाते हैं।

    जीर्णोद्धार की प्रक्रिया

    1977 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किले को अधिगृहीत किया गया था और तब से इसे संरक्षित करने के प्रयास जारी हैं। हाल ही में पुरातत्व विभाग ने रानी महल और चमन महल का जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण पूरा किया है। डॉ. मनीषा शर्मा के अनुसार इस वर्ष जून में रानी महल और चमन महल का पुनरुद्धार पूरा हुआ है। अगले चरण में किले के मुख्य प्रवेश द्वार परकोटा दीवार और बुर्जों को उनके मूल स्वरूप में लाने का कार्य शुरू होगा।

    हृदय दृश्यम संगीत समारोह

    किले के जीर्णोद्धार के बाद 6 दिसंबर को किले में पहली बार भव्य हृदय दृश्यम संगीत समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह समारोह किले की ऐतिहासिक धरोहर को और भी खास बनाएगा। इसके साथ ही हस्तशिल्प और व्यंजन मेले का आयोजन भी किया जाएगा जो पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण होगा। जगदीशपुर किला न केवल गोंड साम्राज्य की शान है बल्कि मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक सांस्कृतिक और स्थापत्य धरोहर का अहम हिस्सा भी है। इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार के प्रयास किले की भव्यता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद करेंगे।

  • सीएम मोहन यादव के दो साल नेतृत्व में बदलाव विकास की नई दिशा और रोजगार के नए अवसर

    सीएम मोहन यादव के दो साल नेतृत्व में बदलाव विकास की नई दिशा और रोजगार के नए अवसर


    भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल के दो साल जल्द ही पूरे होने वाले हैं। दिसंबर 2023 में विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में शायद ही किसी ने यह सोचा था कि वह मुख्यमंत्री बनेंगे। उस समय बड़े नाम खासकर शिवराज सिंह चौहान जो 17 साल तक मुख्यमंत्री रहे चर्चा में थे। इस वजह से जब डॉ. यादव ने पद संभाला तो उनके नेतृत्व को लेकर कुछ हिचक और आशंकाएं थीं। लेकिन अब उनके दो साल के कार्यकाल ने उन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है और उन्होंने मध्य प्रदेश में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।

    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में कई नए बदलाव हुए हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश में विकास की नई दिशा दिखाने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की। केन-बेतवा लिंक परियोजना की शुरुआत भी प्रदेश से हुई है जो बुंदेलखंड के पिछड़े इलाकों में विकास की नई राह खोलेगी। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों पर भी जोर दिया है जैसे प्रमोटी अधिकारियों को हटाकर युवा अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपना जिससे प्रदेश में बेहतर प्रशासन का माहौल बना है।

    डॉ. यादव ने रोजगार सृजन के मामले में भी कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने सिर्फ एक साल में 75 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। निजी क्षेत्र में भी रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। इसके अलावा सात लाख करोड़ के निवेश से नए उद्योग शुरू किए गए हैं और निजी क्षेत्र में दो लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। वहीं प्रदेश में सिंचाई क्षमता को बढ़ाने की दिशा में भी लगातार काम हो रहा है। जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने बताया कि 2028 तक एक करोड़ हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा मुहैया कराई जाएगी जिससे किसानों की आमदनी में भी वृद्धि होगी।

    बिजली क्षेत्र में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश अच्छा प्रदर्शन कर रहा है जो राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार हुआ है। प्रदेश में अब मेडिकल कॉलेजों की संख्या 25 से अधिक हो गई है और सरकारी अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। इसके अलावा सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी डॉ. मोहन यादव ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
    श्री महाकाल महालोक के उद्घाटन के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या में 20 गुना वृद्धि हुई है। 2023 में जहां 5 लाख पर्यटक उज्जैन आए थे वहीं 2024 में यह संख्या सात करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। प्रदेश में 12 लोक बन रहे हैं जिससे मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मजबूत हो रही है। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में समग्र विकास की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत करना है जिसे वह अपनी सरकार के अगले दो सालों में पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में राज्य का विकास निश्चित रूप से एक नए मुकाम पर पहुंचने की ओर अग्रसर है।

  • बंद हुई कंपनियों के वाहनों के लिए एचएसआरपी बनवाना हुआ मुश्किल भोपाल में दो हजार से अधिक वाहन मालिक परेशान

    बंद हुई कंपनियों के वाहनों के लिए एचएसआरपी बनवाना हुआ मुश्किल भोपाल में दो हजार से अधिक वाहन मालिक परेशान



    भोपाल ।
    भोपाल में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने की अनिवार्यता अब पुराने वाहन मालिकों के लिए समस्या बन गई है। यह समस्या खासतौर पर उन गाड़ियों के मालिकों के लिए है जो कंपनियां अब बंद हो चुकी हैं या जिन्होंने भारत में अपना कारोबार समेट लिया है। इन गाड़ियों पर एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाने का काम अब नहीं हो पा रहा है क्योंकि एचएसआरपी बनाने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों OEM और नंबर प्लेट निर्माता कंपनियों के बीच एक करार एग्रीमेंट होना जरूरी होता है ।
    ऐसी कंपनियों की गाड़ियों के मालिकों को अब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इन कंपनियों का कोई प्रतिनिधि या सिस्टम अब उपलब्ध नहीं है। इसका सीधा असर भोपाल में दो हजार से अधिक वाहन मालिकों पर पड़ रहा है जो अपने वाहन पर एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाने के लिए आरटीओ और डीलरों के चक्कर काट रहे हैं ।
    लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं निकल पा रहा है। यहां तक कि भोपाल में काम करने वाली प्रमुख नंबर प्लेट निर्माता कंपनियों जैसे रोजमाटा सेफ्टी प्राइवेट लिमिटेड एफटीए और सुजुकी इन कंपनियों की गाड़ियों के लिए एचएसआरपी बनाती हैं लेकिन जिन कंपनियों का अब अस्तित्व नहीं है उनके वाहन मालिकों के लिए यह प्रक्रिया ठप हो चुकी है।
    दरअसल एचएसआरपी व्यवस्था के तहत एक नंबर प्लेट बनाने वाली कंपनी को वाहन निर्माता कंपनी से एक एग्रीमेंट की आवश्यकता होती है जिससे पोर्टल पर डाटा प्रोसेस हो सके। अगर वाहन निर्माता कंपनी बंद हो गई है तो पोर्टल पर उनका डाटा प्रोसेस नहीं हो सकता और इस कारण उन गाड़ियों की नंबर प्लेट बनवाना संभव नहीं होता।
    इस प्रकार उन पुराने वाहनों के मालिकों के लिए जो बंद हो चुकी कंपनियों से संबंधित हैं एचएसआरपी नंबर प्लेट का मिलना एक बड़ा संकट बन गया है। कई वाहन मालिक महीनों से इस समस्या का समाधान ढूंढ़ रहे हैं लेकिन किसी भी तरह का ठोस समाधान सामने नहीं आ पा रहा है। ऐसे में वाहन मालिकों को विभिन्न अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
    इसके अलावा यह भी देखा गया है कि नए नियमों के तहत एचएसआरपी की अनिवार्यता बढ़ने से वाहन मालिकों की परेशानियां और भी बढ़ गई हैं खासकर उन गाड़ियों के मालिकों के लिए जिनकी कंपनियां अब बंद हो चुकी हैं। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक एचएसआरपी सिस्टम को लागू करने का उद्देश्य वाहनों की पहचान को सुनिश्चित करना और सुरक्षा बढ़ाना है लेकिन इस प्रक्रिया में पुराने वाहन मालिकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

  • खजुराहो केबिनेट में बुंदेलखंड को हजारों करोड़ की मिली विकास कार्यों की बड़ी सौगातें

    खजुराहो केबिनेट में बुंदेलखंड को हजारों करोड़ की मिली विकास कार्यों की बड़ी सौगातें


    भोपाल! खजुराहो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। बुंदेलखंड के लिए केबिनेट बैठक का दिन स्वर्णिम रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर को महत्वपूर्ण विकास कार्यों की सौगातें देकर सागर के विकास की नई इबारत लिखी। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि केबिनेट में बुंदेलखंड एवं सागर के लिए हजारों करोड़ की सौगातें दी हैं, जिससे सागर विकास के नये आयामों को छुएगा। यहां के युवाओं को रोजगार से जोड़कर विकास की नई कहानी लिखी जायेगी, वहीं पर्यटन के क्षेत्र में नया इतिहास रचने की घोषणा भी हुई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में सागर में 608.93 हेक्टेयर भूमि पर 25 हजार करोड़ की लागत से नया उद्योग क्षेत्र स्थापित किया जायेगा। इससे 30 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं दूसरी ओर नौरादेही अभयारण्य में जुलाई माह में 4 चीतों को बसाया जायेगा। इससे क्षेत्र में स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

    मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि सागर से दमोह फोरलेन सड़क, छतरपुर तथा दमोह में नये मे‍डिकल कॉलेज के लिये नये पदों का सृजन किया जायेगा। साथ ही बीना में 100 बिस्तरीय अस्पताल बनेगा। इससे सागर विकास की ऊँचाइयों तक पहुँचेगा। मंत्री श्री राजपूत ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का धन्यवाद और आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सागर तथा बुंदेलखण्ड के लिये दी गई सौगातें विकास के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होंगी।

    25 हजार करोड़ से विकसित होगा नया औद्यौगिक क्षेत्र

    मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि उद्योगों के लिए भी सागर को विशेष पैकेज प्रदान किया गया है। इसके तहत रिछोड़ा के पास 25 हजार करोड़ की लागत से नया औद्यौगिक क्षेत्र विकसित किया जायेगा, जिसमें लगभग 30 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। मसवासी ग्रंट औद्योगिक क्षेत्र के लिये स्वीकृत विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज में भूमि टोकन शुल्क मात्र एक रुपये प्रति वर्गमीटर, किराया और रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूर्ण छूट एवं बिजली दरों में रियायत शामिल है।

    जुलाई माह में आयेंगे नौरादेही में 4 चीते

    मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि जब प्रधानमंत्री कूनो में चीता लेकर आये थे तो पूरे देश को बड़ी खुशी हुई थी और अब बुंदेलखंड में पहली बार मुख्यमंत्री डॉ. यादव जुलाई माह में नौरादेही अभयारण्य में 4 चीते छोड़ेंगे, यह हमारे लिए गर्व की बात है। इससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी सागर जिले को बड़ी उपलब्धि है। नौरादेही अभयारण्य को प्रदेश का तीसरा चीता आवास के रूप में विकसित करने की सैद्धांतिक सहमति दी गई है। यह क्षेत्र में पर्यावरणीय संरक्षण और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की सकारात्मक पहल है।

    सागर-दमोह फोरलेन निर्माण को 2059 करोड़ मंजूर

    मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि केबिनेट बैठक में सागर-दमोह मार्ग को 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ विकसित करने के लिए 2059.85 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। 76.680 किमी लंबे इस मार्ग का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के अंतर्गत किया जाएगा। परियोजना में 13 अंडरपास, 3 फ्लाईओवर, 9 मिडियन, 1 आरओबी तथा 13 पुल-पुलिया निर्माण का प्रावधान है। भूमि अर्जन और अन्य कार्यों पर 323.41 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। इससे सागर दमोह भोपाल जबलपुर जाने वालों के लिए आवागमन सुलभ होगा।

    100 बेड का होगा बीना अस्पताल, पद सृजन को मंजूरी

    स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए बीना सिविल अस्पताल की क्षमता 50 से 100 बिस्तर तक बढ़ाने और नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है। इससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलेंगी।

  • जल जीवन मिशन का कार्य निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2028 के पहले मार्च-2027 में होगा पूर्ण

    जल जीवन मिशन का कार्य निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2028 के पहले मार्च-2027 में होगा पूर्ण


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल किसी भी स्थिति में नहीं मिले और इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन मध्यप्रदेश इस कार्य को मार्च 2027 तक पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल पेश करेगा। उन्होंने कहा कि मिशन के संचालन-संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में जल आपूर्ति प्रभावित न हो।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित किया जाए। विगत 10 वर्षों में जिन ग्रामों को जल संकट का सामना करना पड़ा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उन क्षेत्रों में जल प्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल की उपलब्धता के अनुसार जल वितरण का समय तय किया जाए, जिससे नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। मिशन के प्रभाव का विश्लेषण अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से कराए जाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गाँव के ऐसे ट्यूबवेल की सूची बनवाएं, जिनमें हमेशा पानी रहता हो और ट्यूबवेल मालिक सेवाभावी हों। जरूरत पड़ने पर इनके ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति कराने का प्रयास करें।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने जल जीवन मिशन के कार्यों के समुचित संचालन-संधारण के लिये प्रभावी योजना बनाने की बात कही।

    बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्री नीरज मण्डलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी और प्रबंध संचालक जल निगम श्री के.वी.एस. चौधरी भी उपस्थित थे।

    प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने बताया कि अब तक प्रदेश में 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं और मिशन की कुल प्रगति 72.54 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा किया गया है और वर्ष 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं।

    बोरवेल दुर्घटना रोकने कानून बनाने वाला पहला राज्य

    बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश बोरवेल दुर्घटना रोकने के लिए कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य है। साथ ही “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में प्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान मिला है।

    वर्ष 2024-25 में 12,990 करोड़ रु. का व्यय कर 92.89 प्रतिशत वित्तीय लक्ष्य हासिल किया गया है। वर्ष 2025-26 में 6,016 करोड़ रु. का व्यय किया गया है, जो 30 सितंबर 2025 तक 35.11 प्रतिशत की प्रगति दर्शाता है। प्रदेश में 21,552 ग्राम “हर घर जल” घोषित किए जा चुके हैं तथा 15,026 ग्रामों को प्रमाणित किया जा चुका है। समूह नल जल योजनाओं के माध्यम से 3,890 ग्रामों में नियमित जल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है और एकल नल जल योजनाएँ 93 प्रतिशत प्रगति के साथ तेजी से पूर्णता की ओर अग्रसर हैं।

    विभाग द्वारा तकनीकी और डिजिटल मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। जल रेखा मोबाइल ऐप के माध्यम से योजनाओं की सतत निगरानी की जा रही है। राज्य की सभी 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हो चुकी है। ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से डिजिटल जल कर संग्रह व्यवस्था लागू की गई है। इंदौर में IoT (इंटरनेट ऑफ थिंक्स) आधारित जल आपूर्ति मॉडल सफलतापूर्वक लागू किया गया है और इसे अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जा रहा है।

    ऊर्जा प्रबंधन को देखते हुए 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना PPP मॉडल पर स्वीकृत की गई है, जिससे आने वाले 25 वर्षों तक सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अतिरिक्त 60 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना पर भी कार्ययोजना तैयार की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए जलदर्पण पोर्टल संचालित है तथा शिकायत निवारण हेतु कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं। अभी 64 ग्रामों में 24×7 जल आपूर्ति पायलट रूप में सफल रही है, जिसे आगे और विस्तृत किया जाएगा।

    बैठक में भविष्य के विजन पर जानकारी देते हुए बताया गया कि आगामी तीन वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित नल-जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल स्रोतों के संरक्षण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, डिजिटल प्रबंधन, तकनीकी क्षमता संवर्धन और ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नए ग्राम, बसाहट, विद्यालय, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य संस्थान और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों में पेयजल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश जल प्रदाय व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बन सके।

  • झाबुआ में धर्म परिवर्तन विवाद: ईसाई बने शख्स को ‘जय श्रीराम’ न बोलने पर पीटा, वीडियो वायरल

    झाबुआ में धर्म परिवर्तन विवाद: ईसाई बने शख्स को ‘जय श्रीराम’ न बोलने पर पीटा, वीडियो वायरल


    मध्य प्रदेश। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें झाबुआ जिले के पाटडी गांव का नजारा दिखाई दे रहा है। वीडियो में रावजी डामर नाम का व्यक्ति स्पष्ट रूप से कहता है, मैं अब ईसाई हूं, जय श्री राम नहीं बोलूंगा।” इसके बाद कुछ गांववालों ने उसे रोकने की कोशिश की और उसे मारपीट शुरू कर दी।

    मामला तब और बढ़ गया जब रावजी अपने धर्म के चुनाव पर अडिग रहे। मारपीट के दौरान उन्हें गालियां भी दी गईं। इस घटना के बाद गांव में तनाव बढ़ गया और मामले को लेकर दोनों पक्षों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    थांदला थाना के SDOP नीरज नामदेव ने बताया कि मामले की जांच जारी है। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस आरोपियों को जल्द पकड़ने की बात कह रही है।

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी विवाद छिड़ गया। लोग अलग-अलग राय दे रहे हैं—कुछ रावजी के समर्थन में हैं, तो कुछ पीटने वाले पक्ष की वजहों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटना ने सिर्फ गांव में ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बहस छेड़ दी है कि किसी को अपने धर्म के चुनाव के लिए दबाव देना कितना सही है।

    इस मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि जय श्री राम कहना या न कहना केवल शब्दों का मामला नहीं, बल्कि अधिकार और धर्म के चुनाव से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है।

  • आईएएस संतोष वर्मा का विवादित बयान: 'हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा'गिरफ्तारी की मांग तेज

    आईएएस संतोष वर्मा का विवादित बयान: 'हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा'गिरफ्तारी की मांग तेज


    भोपाल। आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनका एक नया वीडियो वायरल हुआ हैजिसमें वह भीम आर्मी के प्रमुख सांसद चंद्रशेखर रावण की तारीफ करते हुए विवादित बयान देते नजर आ रहे हैं। संतोष वर्मा ने चंद्रशेखर के बयान को मंच से दोहराते हुए कहाकितने संतोष वर्मा मारोगेहर घर से संतोष वर्मा निकलेगा।यह बयान तब आया है जब उनके खिलाफ पहले से ही सरकारी कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। संतोष वर्मा का यह बयान मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ अजाक्स के एक कार्यक्रम में दिया गयाजहां उन्होंने चंद्रशेखर रावण को समाजसेवी बताते हुए उनका समर्थन किया।
    संतोष वर्मा ने मंच से कहाभीम आर्मी के जो हमारे चंद्रशेखर रावण जी हैंबहुत अच्छे समाजसेवी हैंसमाज के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कितने संतोष वर्मा को तुम मारोगेकितने संतोष वर्मा को तुम जलाओगेकितने संतोष वर्मा को तुम निगल जाओगेअब हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा।उनका यह बयान एक गंभीर संदेश देता है कि वह समाज में उठ रही आवाजों को दबाने के खिलाफ खड़े हैं और उनका मानना है कि इन आवाजों को दबाने की कोशिशें बेकार जाएंगी।

    हालांकिउनका यह बयान विवादों में घिर गया है। पहले से ही एक विवाद में घिरे संतोष वर्मा पर इस नए बयान के बाद कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने पहले ही उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया थाजब उन्होंने 23 नवंबर को अजाक्स के कार्यक्रम में आरक्षण पर विवादित बयान दिया था। वर्मा ने कहा थाएक परिवार में एक ही व्यक्ति को आरक्षण की शर्त को तब तक मंजूर नहीं किया जा सकता है जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी उनके बेटे को दान ना कर दे या उससे संबंध ना बनाए।इस बयान के बाद ब्राह्मण और सवर्ण समाज में आक्रोश फैल गया था।

    संतोष वर्मा के इस नए बयान ने उनके खिलाफ उठ रही आवाजों को और भी तेज कर दिया है। सपाक्ससामाजिक और जनकल्याण संगठन के राष्ट्रीय संयोजक हीरालाल त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री से संतोष वर्मा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। त्रिवेदी ने कहा हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा तो क्या हर घर की बेटी खतरे में जाएगी इसके खिलाफ महिला उत्पीड़न का केस चल रहा हैऔर फिर भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही हैत्रिवेदी ने मुख्यमंत्री से वर्मा को गिरफ्तार करने और निलंबित करने की मांग कीताकि समाज में वर्ग संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो और महिलाओं के लिए कोई खतरा न बने।

    संतोष वर्मा पर उठ रहे सवाल उनके विवादित बयानों के कारण और बढ़ गए हैं। उनकी गिरफ्तारी की मांग और कार्रवाई की दबाव में सरकार के लिए यह एक मुश्किल स्थिति बनती जा रही है। वर्मा के बयान ने समाज में गहरे मतभेदों को और बढ़ा दिया हैऔर अब सरकार को यह निर्णय लेना होगा कि क्या उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी या यह विवाद शांत हो जाएगा।इन विवादों के बावजूदसंतोष वर्मा ने हमेशा अपने बयानों से समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित किया है। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और संतोष वर्मा के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है। यह विवाद निश्चित ही आगे बढ़ने की संभावना को छोड़ता है और भारतीय प्रशासनिक सेवा में एक नई बहस को जन्म देता है।

  • उत्तरी सर्द हवाओं से ठिठुरन8 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी

    उत्तरी सर्द हवाओं से ठिठुरन8 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में शीतलहर का दौर लगातार जारी है और उत्तरी बर्फीली हवाओं के प्रभाव से तापमान में गिरावट आ रही हैजिससे ठंड में और बढ़ोतरी हो रही है। प्रदेश के कई हिस्सों में सर्दी का असर बढ़ने के साथ-साथ मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। मंगलवार को प्रदेश के 24 से अधिक शहरों में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गयावहीं बुधवार को भी कई जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है।

    शीतलहर का प्रभावतापमान में गिरावट

    मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसारमंगलवार को शहडोल जिले में प्रदेश का सबसे कम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावाभोपालराजगढ़इंदौर और शाजापुर जैसे प्रमुख शहरों में भी शीतलहर का असर देखने को मिला। मौसम के शुष्क होने और उत्तरी बर्फीली हवाओं के चलते प्रदेश में ठिठुरन बनी हुई है। मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में शीतलहर के कारण लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हो गए हैंखासकर सुबह और रात के समय में ठंड बहुत ज्यादा महसूस हो रही है।

    कई शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम

    मंगलवार को प्रदेश के 24 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से भी कम रहाजो ठंड की स्थिति को और गंभीर बना रहा है। मौसम विज्ञानियों के अनुसारशीतलहर के कारण तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। इस दौरान दिन में अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस नर्मदापुरम में रिकॉर्ड किया गयालेकिन रात के समय ठंडक बढ़ने से लोग परेशान हैं।

    आगे का मौसम तीन दिन तक शीतलहर का असर

    मौसम विभाग के मुताबिकअगले तीन दिनों तक शीतलहर की स्थिति बनी रह सकती है। बुधवार को भी प्रदेश के आठ प्रमुख जिलों में शीतलहर का प्रभाव रहेगा। इनमें भोपालविदिशासीहोरराजगढ़इंदौरशाजापुरजबलपुर और सिवनी शामिल हैं। इन जिलों में तापमान में और गिरावट आने की संभावना है और सर्द हवाओं के कारण लोगों को ठंड का सामना करना पड़ेगा।

    किसानों पर असर

    मध्य प्रदेश में किसानों के लिए यह मौसम फसलें बचाने के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। शीतलहर का असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता हैखासकर वे फसलें जो ठंडी के प्रति संवेदनशील होती हैं। किसान अपनी फसलों की रक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठा सकते हैंजैसे कि फसल के ऊपर कंबल डालना या फिर शेड का इस्तेमाल करना।

    नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह

    मौसम विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी हैखासकर उन क्षेत्रों में जहां शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है। लोगों से यह भी अपील की गई है कि वे ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनें और खासकर सुबह और रात के समय बाहर जाने से बचें। सर्दी के मौसम में श्वसन संबंधित बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ जाता हैइसलिए स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतना जरूरी है। कुल मिलाकरमध्य प्रदेश में सर्दी का असर अगले कुछ दिनों तक बना रहने की संभावना है। प्रदेशवासियों को शीतलहर से बचने के लिए अतिरिक्त उपायों की आवश्यकता है और साथ ही मौसम के मिजाज के अनुसार अपनी दिनचर्या को अनुकूलित करना होगा।

  • मध्य प्रदेश में खाद संकटकिसानों का प्रदर्शन तेज़यूरिया की कमी बनी बड़ी चुनौती

    मध्य प्रदेश में खाद संकटकिसानों का प्रदर्शन तेज़यूरिया की कमी बनी बड़ी चुनौती


    भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर खाद संकट ने गंभीर रूप ले लिया हैजिससे राज्य के किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रबी सीजन में यूरिया की बढ़ती मांग और आपूर्ति में कमी ने किसानों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में खाद की किल्लत को लेकर किसानों ने विरोध प्रदर्शनशुरू कर दिया। प्रमुख जिलों जैसे छतरपुरटीकमगढ़अशो नगरशिवपुरीरतलामऔर अन्य क्षेत्रों में खाद की भारी कमी महसूस की जा रही हैऔर इस स्थिति को लेकर किसान रातभर लंबी कतारों में खड़े होकर यूरिया पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

    मध्य प्रदेश में कुल 145 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुआई की जा चुकी है। गेहूं और चना जैसी फसलों में सिंचाई का काम चल रहा हैजिसके कारण यूरिया की मांग अत्यधिक बढ़ गई है। राज्य में कुल 23 लाख टन यूरिया की आवश्यकता हैलेकिन अब तक केवल 16 लाख टन यूरिया ही उपलब्ध कराया जा सका है। यह कमी अब किसानों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी हैक्योंकि यूरिया की किल्लत से उनकी फसल की वृद्धि और उपज पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    टीकमगढ़ जिले में खाद की कमी के खिलाफ किसानों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। खरगापुर में किसानों ने सड़क पर लेटकर चक्काजाम कियाजिससे खरगापुर-पलेरा मार्ग पर यातायात बाधित हो गया। किसानों का आरोप है कि खाद के लिए सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है। सरकार यह दावा कर रही है कि खाद की कमी नहीं है और आवश्यकतानुसार आपूर्ति की जा रही हैलेकिन किसानों की परेशानियों को देखकर यह दावा गलत साबित हो रहा है।

    रतलाम जिले में स्थिति और भी गंभीर हैजहां किसानों ने नकद वितरण केंद्र के बाहर रात नौ बजे से डेरा जमा लिया। यूरिया के लिए इन किसानों का संघर्ष सिर्फ खाद तक ही सीमित नहीं हैबल्कि यह उनके जीवन-यापन और फसलों की भविष्यवाणी से भी जुड़ा हुआ है। शादी-ब्याह के मौसम में जब पूरे परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए किसान खाद के लिए लाइनों में खड़े हैंतो यह स्थिति कितनी गंभीर हो सकती हैइसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

    खाद संकट से जूझ रहे किसानों का कहना है कि यदि समय पर खाद नहीं मिलातो रबी फसलों की उपज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यूरिया की कमी के कारण किसान अपनी फसलों को सही तरीके से उर्वरित नहीं कर पा रहे हैंजिससे उनकी फसलें कमजोर हो सकती हैं। इससे उनकी आय पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगाजो पहले से ही मुश्किलों में घिरे हुए हैं।

    सरकार के अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि खाद की आपूर्ति की कोई कमी नहीं है और इसे जल्द ही पूरा किया जाएगालेकिन वास्तविकता यह है कि खाद की आपूर्ति और मांग के बीच अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या सरकार जल्द इस संकट को हल कर पाएगीया फिर किसानों को और अधिक संघर्ष करना पड़ेगा?

    कुल मिलाकरमध्य प्रदेश के किसानों का खाद के लिए संघर्ष इस बात का प्रतीक है कि कृषि क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार की सख्त आवश्यकता है। राज्य सरकार को खाद संकट को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगेताकि किसानों की समस्याओं का समाधान किया जा सके और वे अपनी फसलों को सुरक्षित तरीके से उगा सकें। यदि इस संकट का समाधान नहीं किया गयातो यह न केवल किसानों के लिएबल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है।