Category: Madhya Pradesh
-

किसानों के हित सर्वोपरि, ट्रेड डील से भारतीय कृषि उत्पादों को कोई नुकसान नहीं : शिवराज सिंह
भोपाल। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत और अमेरिका के बीच हुई अंतरिम ट्रेड डील को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह डील पूरी दुनिया को यह संदेश देती है कि भारत की नीति समझौते की है, समझौते में झुकने की नहीं। इस समझौते में ऐसा कोई भी उत्पाद शामिल नहीं है, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचे। किसानों के हित सर्वोपरि हैं, उन पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी।केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान रविवार को अपने भोपाल स्थित आवास पर भारत और अमेरिका के बीच हुई अंतरिम ट्रेड डील को लेकर पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संतुलित रणनीति अपनाकर सकारात्मक संवाद करते हुए यह ट्रेड डील की गई है। डिप्लोमेसी मतलब राष्ट्र प्रथम, डेवलपमेंट यानी विकसित भारत की दिशा में भारतीय कदम बढ़ाने लिए ट्रेड डील बड़ा आधार है। भारतीय कृषि और किसान की सारी चिंताओं का समाधान इस ट्रेड डील में किया गया है। यह डील हमारे कृषि उत्पादों को नए अवसर प्रदान करती है।उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि और किसान को सर्वोपरि रखा गया है। यूपीए की सरकार में भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था 11वें स्थान पर थी और अब हम तीसरे स्थान पर पहुंचने की ओर तेजी से अग्रसर हैं। हमारे वो सारे कृषि उत्पाद, जो हमारे किसानों की मूल ताकत है, उन सबको इस समझौते से बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील अपने आप में ऐतिहासिक और अभूतपूर्व है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयाँ और गति देने वाली है। यह समझौता केवल व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेड डील डिप्लोमेसी, डेवलपमेंट और डिग्निटी का एक उत्तम उदाहरण है। यह ट्रेड डील हमारे किसानों को न केवल पूरी तरह से सुरक्षित रखती है, बल्कि हमारे कृषि उत्पादों को नए अवसर प्रदान करती है।चौहान ने कहा कि अगर कृषि और कृषि उत्पादों को देखें, तो भारतीय किसानों को नुकसान हो, ऐसा कोई भी उत्पाद सम्मिलित नहीं किया गया है। सभी ऐसी वस्तुओं को समझौते के बाहर रखा गया है। सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूँ, चीनी, मोटे अनाज, पोल्ट्री, डेयरी, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, इथेनॉल, तंबाकू जैसे उत्पादों पर कोई टैरिफ में छूट नहीं दी गई है। सबसे ज्यादा चिंता इसी बात की थी कि हमारे प्रमुख अनाज सुरक्षित रहने चाहिए, वो सब के सब सुरक्षित रखे गए हैं। प्रमुख अनाज, प्रमुख फल, हमारे डेयरी उत्पाद उनके लिए कोई द्वार अमेरिका के लिए नहीं खोला गया है।केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय किसानों के कई कृषि उत्पादों को अमेरिका में शून्य शुल्क पर निर्यात किया जाएगा, लेकिन अमेरिकी किसानों के कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में यह छूट नहीं दी गई है। भारत के कृषि और डेयरी के हित पूरी तरह से सुरक्षित हैं। कृषि क्षेत्र में कई उत्पादों पर जो टैरिफ था, उसे अमेरिका ने 50 परसेंट से घटाकर शून्य किया है। इनमें मसाले प्रमुख हैं, हमारे मसालों का बड़ी मात्रा में निर्यात होता है। इसके अलावा चाय, कॉफी, नारियल, नारियल का तेल, सुपारी, काजू, वनस्पति मोम, एवोकाडो, केला, अमरूद, आम, कीवी, पपीता, अनानास, मशरूम तथा जौ जैसे कुछ अनाज भी इसमें सम्मिलित हैं।उन्होंने कहा कि डब्बा बंद सब्जियां भी भारत नहीं आएंगे। वर्ष 2024-25 में 4.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने के साथ भारत ने वैश्विक निर्यातक के रूप में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है और हमारे मसाला निर्यात में 88 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब हमारे मसालों को भी नया बाजार मिलेगा। भारत अमेरिका से काली मिर्च, लौंग, सूखी हरी मिर्च, दालचीनी और अन्य पाउडर मसाले नहीं मंगवाएगा। भारतीय किसानों के कई कृषि उत्पादों को अमेरिका में शून्य शुल्क पर निर्यात किया जाएगा, लेकिन अमेरिकी किसानों के कृषि उत्पादन को भारतीय बाजार में यह छूट नहीं मिली है।उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि बाजार में अगर ऐसा कोई उत्पाद आता है तो उनको टैरिफ में जाना पड़ेगा। समझौते से भारतीय किसान, महिलाएं और विशेष कर युवाओं के सपनों को ऊंची उड़ान भरने के लिए नए पंख मिले हैं। 18% टेक्सटाइल के निर्यात को एक नई गति और दिशा मिलेगी और टेक्सटाइल के निर्यात का मतलब है किसानों को भी फायदा। विशेष कर कपास उत्पादक किसान टेक्सटाइल, गेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो कंपोनेंटस इंजीनियरिंग गुड्स और एमएसएमई को ढेर सारे बिजनेस के नए अवसर मिलेंगे।केन्द्रीय कृषि मंत्री इस दौरान ट्रेड डील पर सवाल खड़े करने वाले लोगों पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच हुई डील के बाद विपक्ष वेंटिलेटर पर चला गया है। विपक्ष को आशंका थी कि डील के बाद शोर शराबा करने का मौका मिलेगा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता के चलते वे वेंटिलेटर पर हैं। -

कुबेरेश्वरधाम पर आधुनिक प्राथमिक चिकित्सालय का आज होगा श्रीगणेश
सीहोर। देश में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा निशुल्क एंबुलेंस सेवा और मंदिर परिसर में प्राथमिक उपचार केन्द्र के बाद अब सर्व सुविधायुक्त प्राथमिक चिकित्सालय की सुविधा आज रविवार से आरंभ होने जा रही है।कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा अपने पिताश्री पंडित स्वर्गीय रामेश्वर दयाल मिश्रा की स्मृति में धाम पर आने वाले श्रद्धालुओं और आस-पास के ग्रामीणों को तत्काल स्वास्थ्य लाभ मिले, इस उद्देश्य से परिसर में प्राथमिक स्वास्थ्य चिकित्सालय का शुरुआत करने जा रहे हैं। आधुनिक प्राथमिक चिकित्सालय में आईसीयू सुविधा के शुरू होने से आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की सुविधा धाम पर आने वालों के अलावा आस-पास के ग्रामीणों को मिलेगी। इसका शुभारंभ रविवार को दोपहर साढ़े बारह बजे मंत्री विश्वास सारंग के अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधि और श्रद्धालुओं के द्वारा किया जाएगा।सहूलियत के साथ नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा मिलेगीपंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि हर रोज हजारों की संख्या में कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा रहता है। इसको आने वाले समय में बड़े रूप में चिकित्सालय को विकसित किया जाएगा। जिससे जहां क्षेत्रवासियों को धाम में ही और बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलने लगेगी, इससे उन्हें छोटी-छोटी बीमारियों के लिए इधर-उधर नहीं जाना पड़ेगा। यहां सहूलियत के साथ नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा मिलेगी। इसके केन्द्र में बीपी, शुगर सहित अन्य की जांच भी मौके पर हो जाएगी। इसके अलावा प्राथमिक चिकित्सालय में आईसीयू, जनरल ओपीडी के अलावा अन्य सुविधा दी जाएगी। वहीं समय-समय पर निशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा।कुबेरेश्वर धाम पर चिकित्सा सुविधाओं में रहेंगी ये सुविधाएंनिशुल्क जांच व दवा: प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में रक्तचाप, मधुमेह और अन्य आवश्यक जांच नि:शुल्क होगी।सुविधाएं: केंद्र में बेड की व्यवस्था के साथ ही अनुभवी नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर उपलब्ध रहेंगे।एम्बुलेंस सेवा: आपातकालीन स्थिति के लिए धाम पर 24/7 एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध रहेगी। -

मध्य प्रदेश में सर्दी ने फिर पकड़ा जोर, कटनी-शहडोल-उमरिया में पारा 4 डिग्री से नीचे
भोपाल। मध्य प्रदेश में ठंड ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। लगभग 15 दिनों के अंतराल के बाद रात का न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। प्रदेश में कटनी, शहडोल और उमरिया सबसे ठंडे जिले रहे। कटनी के करौंदी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि राज्य के 13 शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे चला गया।
पिछले तीन दिनों से ठंड का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। कई जिलों में रात के तापमान में गिरावट देखी गई है। शनिवार रात भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 11 डिग्री रहा। वहीं, जबलपुर में 10.8 डिग्री और उज्जैन में 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अन्य शहरों की बात करें तो करौंदी में 3.5 डिग्री, शहडोल के कल्याणपुर में 4.9 डिग्री और उमरिया में 7 डिग्री तापमान रहा। रीवा और खजुराहो में 7.4 डिग्री, मंडला में 7.9 डिग्री, नौगांव में 8.8 डिग्री, सतना में 8.9 डिग्री तथा राजगढ़ और शिवपुरी में 9 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। पचमढ़ी में 9.4 डिग्री और दमोह व मलाजखंड में 9.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया।
अभी दो दिन और सताएगी ठंड, फिर बढ़ेगा पारा
मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक प्रदेश में तेज सर्दी का असर बना रहेगा। इसके बाद अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने की संभावना है। फिलहाल ग्वालियर, चंबल, सागर, जबलपुर और शहडोल संभाग में ठंड का असर सबसे अधिक है। प्रदेश के पांच बड़े शहर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर—में भी तापमान 13 डिग्री से नीचे बना हुआ है। इन जिलों में 8 और 9 फरवरी को भी सर्दी का असर जारी रहेगा।
इधर, रविवार सुबह ग्वालियर-चंबल संभाग में हल्का कोहरा देखने को मिला। मौसम विभाग ने फिलहाल कोहरा और बारिश की संभावना से इनकार किया है। दिन में तेज धूप खिलने के आसार हैं, हालांकि भोपाल, सीहोर, गुना, ग्वालियर, भिंड, मुरैना सहित कई जिलों में सर्द हवाएं चलेंगी। देर रात और सुबह के समय ठंड का असर अधिक महसूस होगा। -

MP में सर्दी का असर बढ़ा, कटनी, शहडोल और उमरिया सबसे ठंडे, 13 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे
भोपाल। मध्य प्रदेश में ठंड ने फिर दस्तक दी है। लगभग 15 दिन बाद रात का तापमान 4 डिग्री से नीचे चला गया है। राज्य के कटनी, शहडोल और उमरिया जिले इस समय सबसे ठंडे क्षेत्र बने हुए हैं। खासकर कटनी के करौंदी में न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री दर्ज किया गया। इसके अलावा राज्य के 13 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे गिर गया है।पिछली तीन रातों से ठंड बढ़ रही है। शुक्रवार और शनिवार की रात को भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में तापमान 11 डिग्री, जबलपुर में 10.8 डिग्री और उज्जैन में 13 डिग्री रहा।
न्यूनतम तापमान के आंकड़े इस प्रकार हैं:
करौंदी (कटनी): 3.5 डिग्री, कल्याणपुर (शहडोल): 4.9 डिग्री, उमरिया: 7 डिग्री, रीवा-खजुराहो: 7.4 डिग्री, मंडला: 7.9 डिग्री, नौगांव: 8.8 डिग्री, सतना: 8.9 डिग्री, राजगढ़-शिवपुरी: 9 डिग्री, पचमढ़ी: 9.4 डिग्री, दमोह और मलाजखंड: 9.8 डिग्रीमौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दो दिन राज्य में तेज सर्दी का असर रहेगा। इसके बाद तापमान में 2-3 डिग्री की वृद्धि होने की संभावना है। फिलहाल ग्वालियर, चंबल, सागर, जबलपुर और शहडोल संभाग में ठंड सबसे अधिक महसूस की जा रही है। पांच बड़े शहर – भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर – में पारा 13 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया है। ठंड का यह असर 8 और 9 फरवरी को भी जारी रहने की संभावना है।
रविवार सुबह ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में हल्का कोहरा देखा गया। मौसम विभाग ने बताया कि फिलहाल बारिश या कोहरे की संभावना नहीं है। दिन में तेज धूप रहेगी, लेकिन भोपाल, सीहोर, गुना, ग्वालियर, भिंड और मुरैना में सर्द हवाओं का असर महसूस होगा। देर रात और सुबह के समय ठंड अधिक रहेगी।
-

MP: स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज का परलोक गमन, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यक्त किया दु:ख
भोपाल। उत्तर प्रदेश- मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की सीमा पर सतना जिले (Satna district) में स्थित देश में प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम (Dharkundi Ashram) के संस्थापक महंत स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज (Mahant Swami Paramhans Sachchidanand Maharaj) शनिवार को ब्रह्मलीन हो गए। उन्होंने 102 वर्ष की आयु में मुंबई में अंतिम सांस ली। स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के ब्रह्मलीन होने की खबर मिलते ही देशभर में फैले लाखों श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई।मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परम पूज्य स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के परलोक गमन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज का सम्पूर्ण जीवन सेवा, साधना और मानवता के कल्याण को समर्पित रहा। मुख्यमंत्री ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल अनुयायियों को यह अपार दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना की है।
धारकुंडी आश्रम के प्रमुख संत एवं शिष्य स्वामी संजय बाबा ने बताया कि स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज पिछले कुछ महीनों से मुंबई स्थित आश्रम में प्रवास कर रहे थे। एक जनवरी को उन्होंने चित्रकूट के धारकुंडी आश्रम में भक्तों के बीच अपना 102वां जन्मदिवस मनाया था। इसके बाद स्वास्थ्य खराब होने पर वे इलाज के लिए मुंबई गए थे। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद वे बदलापुर स्थित आश्रम में ठहरे हुए थे, जहां शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
उन्होंने बताया कि मुंबई से उनका पार्थिव शरीर शनिवार देर रात चित्रकूट स्थित धारकुंडी आश्रम लाया गया, जहां श्रद्धालुओं ने नम आंखों से अपने आराध्य को श्रद्धांजलि अर्पित की। रविवार को आश्रम परिसर में अंतिम दर्शन कराए जाएंगे, जबकि सोमवार को आश्रम की परंपरा के अनुसार समाधि दी जाएगी।
स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के अंतिम दर्शन और समाधि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्वामी अड़गड़ानंद महाराज विशेष विमान से धारकुंडी पहुंच चुके हैं। चित्रकूट सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साधु, संत और महंत भी आश्रम पहुंच रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यूपी–एमपी सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। चित्रकूट प्रभारी एसपी सत्यपाल सिंह और सतना एसपी हंसराज सिंह स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं।
1956 में हुई थी आश्रम की स्थापना
स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी परमानंद के आशीर्वाद से 22 नवंबर 1956 को धारकुंडी आश्रम की स्थापना की थी। उस समय यह क्षेत्र बेहद पिछड़ा माना जाता था और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। कहा जाता है कि स्वामी जी ने आश्रम परिसर में बहने वाली स्वच्छ और निरंतर जलधाराओं से बिजली उत्पादन की व्यवस्था शुरू कराई थी। आश्रम में स्थित दो झरनों का पानी वर्ष भर लगातार बहता रहता है, जो आगे चलकर नदी का रूप ले लेता है। मान्यता है कि स्थापना काल से लेकर वर्ष 1970 तक कई बार शेर भी आश्रम परिसर में आते-जाते थे और स्वामी जी के सान्निध्य में रहते थे। इससे जुड़ी अनेक कथाएं आज भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं। -

ग्वालियर व्यापार मेले में वायुसेना के बैण्ड पर बालीवुड की धुन पर झूमे श्रोता
ग्वालियर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में चल रहे श्रीमंत माधवराव सिंधिया व्यापार मेले (Shrimant Madhavrao Scindia Trade Fair) में वायुसेना की बैण्ड (Air Force Band.) ने लगातार दूसरे दिन शनिवार को भी अपनी प्रस्तुति दी। वायुसेना के बैण्ड द्वारा दी गई रोमाटिंक गानों की शानदार धुन को सुनकर दर्शक हतप्रद रह गए और झूमते नजर आए।ग्वालियर व्यापार मेले में पहली बार वायुसेना के बैण्ड ने दो दिवसीय अपनी प्रस्तुति दी है। इस प्रस्तुति में वायुसेना के जवानों के कई रंग देखने को मिले। शनिवार की शाम हिंदुस्तान मेरी जान गीत के साथ वायुसेना के बैण्ड ने मेले में प्रस्तुति की शुरुआत की। देर तक चली इस प्रस्तुति में वायुसेना के बैण्ड पर रोमांटिक वालीवुड के गानों को सुनकर जो दर्शक जहां खडा था, वहीं पूरी तन्मयता के साथ खड़ा रहा और प्रस्तुति को सुनने में मग्न नजर आया।
इस अवसर पर एयर कमोडोर मनीष शर्मा (वायु सेवा मेडल एयर ऑफिसर कमांडिंग एयर फोर्स स्टेशन ग्वालियर), ग्रुप कैप्टन सुभाष सी सिंह (चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर), ग्रुप कैप्टन अमित बाजपेई (स्टेशन सिक्योरिटी ऑफिसर), कलेक्टर रूचिका चौहान व नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय आदि मौजूद रहे। इस अवसर पर कलेक्टर रुचिका चौहान ने एयरफोर्स के बैंड द्वारा दी गई शानदार प्रस्तुति के लिए एयरफोर्स के अधिकारियों और बैंड के सदस्यों को धन्यवाद दिया। साथ ही सभी को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।
रोमाटिंक गीतों की प्रस्तुति में दिखा वायुसेना का अलग रूप
ग्वालियर व्यापार मेले में वायुसेना के बैण्ड ने शुरुआत फन फेयर की मधुर धुन से की। इसके बाद वंदे मातरम एवं हिंदुस्तान गीत की मधुर धुन प्रस्तुत की। इसके बाद वायुसेना के बैण्ड ने बालीवुड के रोमांटिक गानों की सुंदर प्रस्तुतियां दीं। बालीवुड के गानों में 80-90 के दशक के रोमांटिक गानों ने समा बांध दिया। सबसे पहले बदन पर सितारे लपेटे हुए.. हो जाने तमन्ना… कहां जा रही हो… गाने की प्रस्तुति दी गई। इसके बाद जब हम चले…, छू कर मेरे मन को किया तुने क्या इशारा… आदि गानों की प्रस्तुति दी।
स्टॉल पर दिखी सामान खरीदने उमडी भीड
व्यापार मेले में वायुसेना की ओर से स्टॉल भी लगाया गया था, इस स्टॉल पर वायुसेना की टोपी, टीशर्ट सहित विभिन्न प्रकार की वस्तुएं रखी थीं। इन वस्तुओं को मेले में आए सैलानियों ने काफी पंसद किया और जमकर वस्तुओं की खरीदारी की। -

राष्ट्रीय दलहन उत्पादक सम्मेलन : केंद्रीय कृषि मंत्री सहित नौ राज्यों के कृषि मंत्रियों ने देखी उन्नत फसलें
सीहोर। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि गांवों में सुगमता से बीजों की वैरायटी पहुंच सके, इसके लिए ‘बीज ग्राम’ बनाए जाएंगे।केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत आयोजित ‘राष्ट्र-स्तरीय परामर्श और रणनीति सम्मेलन’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री चौहान ने उन्नत प्रौद्योगिकियों एवं किस्मों के प्रदर्शन के लिए खेतों का भ्रमण और किसानों से संवाद किया। इस मौके पर उन्होंने ‘बीज ग्राम’ बनाने की घोषणा की।सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रकाशित ‘बायोलॉजिकल सॉल्यूशंस एडवांसिंग री-जेनेरेटिंग एग्रीकल्चर फॉर हेल्थ एंड एनवायरनमेंट’ और वैश्विक स्तर पर अनुसंधान के लिए चर्चित आईसीएआरडीए की पुस्तक का विमोचन किया गया। साथ ही पल्स मिशन पोर्टल की लॉन्चिंग की गई। कार्यक्रम में जैविक खेती के विस्तार सहित कृषि के क्षेत्र में नवाचार व विशेष योगदान देने वाले किसानों को पुरस्कार भी वितरित किए गए।इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने अतिथियों को अमलाहा स्थित क्षेत्र में तैयार चने और मसूर की उन्नत किस्मों की फसल का अवलोकन कराया। वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादन पद्धतियों की जानकारी भी साझा की। सम्मेलन में दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श चल रहा है। सम्मेलन में मप्र समेत प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और उद्योग प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर से आए कृषि वैज्ञानिकों और नौ राज्यों के कृषि मंत्रियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना विकसित और आत्मनिर्भर भारत का है। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता देश के लिए आवश्यक है और विदेशों से दाल आयात करना गर्व नहीं, बल्कि चिंता का विषय है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 27 देशों के साथ समझौते किए, लेकिन किसानों के हितों से समझौता नहीं होने दिया। अब लक्ष्य है कि देश में दालों का उत्पादन बढ़ाया जाए। उन्होंने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि एक ही फसल बोने से जमीन भी थकती है और कीटों का प्रकोप बढ़ता है, इसलिए चना, मसूर, उड़द और तुअर जैसी फसलों को बढ़ावा देना जरूरी है।उन्होंने मध्य प्रदेश को दलहन उत्पादन में देश में नंबर वन बताते हुए कहा कि क्षेत्रफल में कमी चिंता का विषय है, जिसे बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। आईसीएआरडीए सहित अन्य अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से उन्नत बीज विकसित किए जा रहे हैं, जो मौसम और बीमारियों के अनुकूल होंगे। बीज वितरण के लिए क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और आदर्श खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपये की सहायता भी दी जाएगी।मध्य प्रदेश में लगेंगी 55 दाल मिलकेंद्रीय मंत्री चौहान ने घोषणा की कि देशभर में 1000 नई दाल मिलें स्थापित की जाएंगी, जिनमें से 55 मध्य प्रदेश में लगेंगी। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि तुअर 8000 रुपये प्रति क्विंटल, उड़द 7800 रुपये, चना 5875 रुपये और मसूर 7000 रुपये प्रति क्विंटल खरीदी जाएगी। “बीज से लेकर बाजार तक” किसानों की चिंता सरकार करेगी।उन्होंने बताया कि सम्मेलन के बाद सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ मंथन कर दलहन उत्पादन बढ़ाने का राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस मिशन के तहत मध्य प्रदेश को 354 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि असली आनंद खेत, किसान और मिट्टी से जुड़कर काम करने में है, और सरकार किसानों की आय बढ़ाने तथा देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।कृषि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा भारत : मुख्यमंत्रीसम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय परंपरा में अन्न और दाल का विशेष महत्व है। हमारी थाली में परोसा गया अन्न ही हमारे लिए देवतुल्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान का अभिनंदन करते हुए कहा कि किसान, युवा, गरीब और नारी सशक्तीकरण के लिए निरंतर योजनाएं चलाई जा रही हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की कृषि परंपरा प्राचीन और समृद्ध रही है। प्रदेश में स्थापित अनुसंधान केंद्र किसानों के हित में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनें, क्योंकि देश में मांग के अनुपात में उत्पादन अभी भी चुनौती बना हुआ है। डॉ. यादव ने कहा कि दलहन-तिलहन मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश सरकार दो कदम आगे रहकर कार्य करेगी। उन्होंने बताया कि भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को डेढ़ हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि सीधे खातों में पहुंचाई गई। सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों से आए कृषि मंत्रियों से भी आग्रह किया कि भारत की कृषि उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर दलहन उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम है। -

CJI सूर्यकांत का मध्यप्रदेश का पहला आधिकारिक दौरा उद्घाटन सत्र में देंगे मार्गदर्शनCJI सूर्यकांत का मध्यप्रदेश का पहला आधिकारिक दौरा उद्घाटन सत्र में देंगे मार्गदर्शन
भोपाल /देश की न्यायिक प्रणाली को अधिक एकीकृत प्रभावी और जन केंद्रित बनाने की दिशा में आज भोपाल स्थित नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में दो दिवसीय राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन की शुरुआत हो रही है। इस अहम सम्मेलन में भारत के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति सूर्यकांत सहित देश के 25 से अधिक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और वरिष्ठ न्यायाधीश भाग ले रहे हैं। लंबे अंतराल के बाद यह पहला मौका है जब उच्च न्यायपालिका के इतने बड़े स्तर के पदाधिकारी एक साथ भोपाल में एक मंच पर जुट रहे हैं।सम्मेलन की थीम एकीकृत कुशल और जन केंद्रित न्यायपालिका रखी गई है। इस विषय के अंतर्गत न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों न्यायिक प्रक्रिया में सुधार तकनीक के उपयोग और आम नागरिकों तक न्याय की पहुंच को सरल बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न उच्च न्यायालयों के अनुभव साझा कर न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए साझा और समन्वित रणनीति विकसित करना है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बनने के बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत का यह मध्यप्रदेश का पहला आधिकारिक दौरा है। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में CJI न्यायपालिका की भूमिका संस्थागत समन्वय और समयबद्ध न्याय वितरण प्रणाली पर अपना संबोधन देंगे। उनके विचारों को वर्तमान न्यायिक परिदृश्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सम्मेलन में भाग ले रहे विभिन्न हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अपने अपने राज्यों में न्यायिक प्रशासन से जुड़े अनुभव सुधारात्मक प्रयास और व्यावहारिक चुनौतियों को साझा करेंगे। विशेष रूप से लंबित मामलों को कम करने वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र ई कोर्ट्स न्यायिक प्रशिक्षण और डिजिटल इनोवेशन जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे। आयोजकों का मानना है कि यह संवाद न्यायपालिका के भीतर सहयोग और समन्वय को नई दिशा देगा।
CJI के भोपाल आगमन को देखते हुए सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी एयरपोर्ट से लेकर नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी तक व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। सम्मेलन के दौरान CJI की वरिष्ठ अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों से औपचारिक मुलाकात की भी संभावना है।
नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में आयोजित यह सम्मेलन केवल न्यायपालिका के आंतरिक सुधारों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका व्यापक प्रभाव आम नागरिकों तक न्याय को सरल पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने पर भी पड़ेगा। सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों के निष्कर्षों और सुझावों के आधार पर भविष्य की कार्ययोजना तय किए जाने की संभावना है।
-

झाबुआ: रामा में जैविक उपज विक्रय हाट बाजार बना आकर्षण का केंद्र
झाबुआ। मध्य प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य झाबुआ जिले में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास अब सार्थक रुप ग्रहण करते हुए नजर आ रहे हैं।
जिले के जनपद मुख्यालय रामा में शुक्रवार को साप्ताहिक जैविक हाट बाजार के आयोजन में आम लोगों की दिलचस्पी इस बात को रेखांकित करती है। आयोजित जैविक उपज हाट बाजार का संचालन अंचल के जैविक, पारंपरिक, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों द्वारा किया गया था, जिसमें बिना रासायनिक खाद, कीटनाशक रहित उगाए गए दाले, मसाले, फल, सब्जी एवं अनाज को बिक्री हेतु प्रस्तुत किया गया था।
उल्लेखनीय है कि जिला कलेक्टर नेहा मीना द्वारा जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु कृषकों को जैविक खेती करने हेतु प्रेरित किया जाता रहा है। परिणामस्वरूप जिले में जैविक खेती की शुरुआत हुई, ओर जब जैविक फसल तैयार हुई तो किसानों को जैविक फसल का अच्छा प्रतिसाद मिले, इस उद्देश्य से जिला कलेक्टर द्वारा जिले के कृषि एवं उद्या निकी जैसे कृषिगत विभागों को जैविक उपज का साप्ताहिक बाजार लगाने के निर्देश दिए गए थे, ओर उन्हीं निर्देशों के पालन में शुक्रवार को रामा में जैविक उपज हाट बाजार लगाया गया।
रामा के दशहरा मैदान में पृथक से लगाए गए जैविक उपज हाट बाजार में अंचल के जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों ने अपनी गुणवत्ता और पोषण से युक्त खाद्यान सामग्री आमजन को विक्रय के लिए उपलब्ध कराई। साप्ताहिक रूप से पृथक से लगाए गए जैविक उपज बाजार में किसानों द्वारा अपने खेत में उगाई देशी मक्का, अरहर दाल, उड़द दाल, मूंग की जैविक दाले, देशी चावल, कोदो, देशी किस्म की सेम, बैगन, अमरूद, देशी टमाटर, गाजर, मक्का के भुट्टे जैसे उत्पाद सुलभ कराए गए थे। इन जैविक उत्पादों की गुणवत्ता अंचल के आमजनों के लिए आकर्षण का केंद्र रही।
उक्त हाट बाजार में उप संचालक कृषि एन एस रावत ने स्वयं जैविक उपज बाजार में उपस्थित होकर अंचल के किसानों का उत्साहवर्धन करते हुए किसानों से जैविक उपज खरीदी। रावत ने कहा कि हर आम जागरूक व्यक्ति बिना रासायनिक खाद के उगाए गए खाद्यान्न, फल और सब्जी का उपयोग करना चाहता है। जिले में कई किसान, स्वयं सहायता समूह जैविक और प्राकृतिक खेती के माध्यम से सब्जियों, फलों तथा कोदो, कॅगनी, रागी जैसे अनाजों की खेती कर रहे हैं। जैविक बाजार के माध्यम से जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को अपने जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए उचित स्थान प्राप्त होता है। जिससे जैविक खेती करने वाले किसानों को अपनी उपज का समुचित दाम प्राप्त होने से उनके जैविक खेती करने के मनोयोग को संबल मिलेगा, अन्य कृषक भी जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। किसानों के मध्य जैविक और प्राकृतिक उत्पाद बेचने के लिए भरपूर उत्साह था और उनके द्वारा आमजनता से इस सुविधा का लाभ उठाने का आव्हान भी किया। जैविक बाजार में अपनी उपज विक्रय करने के लिए ग्राम पलासड़ी, साड ओर नवापाड़ा से आए अग्रणी किसानों ने हाट में अपनी उपज विक्रय के लिए प्रस्तुत की, ओर उन्हें अच्छा प्रतिसाद मिला।
साप्ताहिक रूप से आयोजित होने वाले जैविक उपज हाट बाजार में कृषि विभाग के सहायक संचालक एस.एस.रावत, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ज्वाला सिंगाड़ सहित अन्य विभागीय अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे, साथ ही बड़ी संख्या में हाट करने आए लोोगों ने जैविक फसलों के हाट बाजार की सराहना की।
-

मनोज बाजपेयी सहित निर्माता निर्देशक पर कार्रवाई की मांग फिल्म पर तत्काल रोक लगाने का दबाव
उज्जैन : ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म घूसखोर पंडत का टीजर सामने आते ही विवाद गहराता जा रहा है। फिल्म के नाम और कुछ संवादों को लेकर ब्राह्मण समाज में गहरी नाराजगी है। शनिवार को अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उज्जैन के माधव नगर थाने पहुंचे और फिल्म के निर्माता निर्देशक एवं अभिनेता मनोज बाजपेयी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।ब्राह्मण समाज का आरोप है कि फिल्म के टाइटल घूसखोर पंडत और इसमें प्रयुक्त संवाद ब्राह्मण लंगोट का ढीला होता है समाज की छवि को अपमानित करने वाले हैं। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि पंडितों को घूसखोर बताना पूरे समाज का अपमान है जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि फिल्म के संवाद जानबूझकर ब्राह्मण समाज को बदनाम करने के उद्देश्य से डाले गए हैं। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि एक पूरे वर्ग को नीचा दिखाने की कोशिश है। चतुर्वेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इस फिल्म को लेकर एफआईआर दर्ज हो चुकी है तो उज्जैन में कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।
प्रदर्शन के दौरान अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। युवा ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष महेश शर्मा ने कहा कि भले ही फिल्म निर्माताओं ने कहीं माफी मांगी हो लेकिन समाज उन्हें माफ करने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज की मान प्रतिष्ठा से खिलवाड़ करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। ऐसी फिल्मों के जरिए समाज को बदनाम करने की साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि फिल्म के टाइटल में तुरंत बदलाव किया जाए। फिल्म से विवादित संवाद हटाए जाएं और यदि अन्य आपत्तिजनक दृश्य या बयान हैं तो उन्हें भी हटाया जाए। साथ ही फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की गई।जानकारी के अनुसार फिल्म में मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं और वह एक पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में उन्हें पंडित नाम से संबोधित किया गया है जिस पर समाज को विशेष आपत्ति है।
माधव नगर थाना प्रभारी राकेश भारती ने बताया कि अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र चतुर्वेदी द्वारा शिकायत दी गई है। मामले की जांच की जा रही है और विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।फिल्म को लेकर देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में यह विवाद अब कानूनी और सामाजिक दोनों मोर्चों पर तूल पकड़ता नजर आ रहा है।