Category: Madhya Pradesh

  • गोपाल भार्गव के सरकारी बंगले में मरीजों का आशियाना: भोपाल में बना प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम

    गोपाल भार्गव के सरकारी बंगले में मरीजों का आशियाना: भोपाल में बना प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम


    भोपाल। भोपाल के 74 बंगला क्षेत्र का बंगला नंबर बी-1, जो सागर जिले के रहली से विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का सरकारी आवास है, अब मरीजों का ठिकाना बन गया है। यह बंगला पहले मंत्री के रूप में भार्गव को आवंटित हुआ था, लेकिन अब यह बीमार बच्चों और मरीजों के लिए विशेष सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
    बच्चों के लिए प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम
    गोपाल भार्गव की पुत्रवधु शिल्पी भार्गव ने इस बंगले में बीमार बच्चों, विशेषकर दिल से जुड़ी बीमारियों वाले बच्चों के लिए एक खास गेस्ट रूम तैयार कराया है। यह कमरे प्ले स्कूल की तरह सजाया गया है, जिसमें झूले, खिलौने और बच्चों के लिए विशेष बिस्तरों की व्यवस्था है। बच्चों का मनोबल बनाए रखने के लिए दीवारों पर रंग-बिरंगे कार्टून और आकर्षक पेंटिंग्स बनाई गई हैं।

    50 बिस्तरों के तीन हॉल
    बंगले में मरीजों के रहने के लिए तीन रेनोवेटेड हॉल बनाए गए हैं, जिनमें कुल 50 बिस्तरों की सुविधा है।

    मरीजों के आने-जाने, रुकने और इलाज के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है। साथ ही एम्बुलेंस सेवा, भोजन और अस्पताल में इलाज कराने की पूरी सुविधा भी दी गई है।

    फ्री भोजन और खास मेन्यू
    बंगले में रहने वाले मरीजों के लिए सुबह नाश्ता, चाय और दो टाइम फ्री भोजन की सुविधा है। इस किचन को “गोपाल जी की रसोई” नाम दिया गया है। भोजन में मलाई कोफ्ता, मटर पनीर, पालक पनीर, बैगन भर्ता, आलू टमाटर, दाल मखनी, मूंग दाल, जीरा राइस, हलवा, खिचड़ी, गरम रोटियाँ, अचार, पापड़, चटनी और सलाद जैसी विविध और पौष्टिक डिशेज़ शामिल हैं।

    एम्बुलेंस सेवा और पंजीकरण
    हर रविवार को गढ़ाकोटा स्थित निज निवास गणनायक से तीन एम्बुलेंस भोपाल के लिए मरीजों को लेकर रवाना होती हैं।

    मरीजों का पंजीकरण गढ़ाकोटा में किया जाता है और भोपाल पहुंचते ही कर्मचारी आधार कार्ड, बीमारी की जानकारी और अस्पताल का नाम लेकर मरीजों को भर्ती कराते हैं।

    पूरी सुविधा निशुल्क
    गोपाल भार्गव के क्षेत्र के मरीजों को आने-जाने, रुकने, खाने और इलाज की पूरी सुविधा नि:शुल्क दी जाती है। इलाज आयुष्मान कार्ड या मुख्यमंत्री सहायता योजना के माध्यम से कराया जाता है। यदि इनसे मदद न मिले तो गोपाल भार्गव अपने निजी फंड से इलाज की व्यवस्था करते हैं।

    बच्चों के लिए अनुकूल वातावरण
    शिल्पी भार्गव ने यह व्यवस्था बच्चों के मनोबल को ध्यान में रखकर बनाई है। उनका उद्देश्य था कि जब बच्चे इलाज के लिए आएं तो उन्हें डर या असहजता महसूस न हो। इसलिए गेस्ट रूम को प्ले स्कूल जैसा सजाया गया और वातावरण को अनुकूल बनाया गया।

    लंबे समय से चल रही व्यवस्था
    अभिषेक भार्गव ने बताया कि यह व्यवस्था 2004 से शुरू है, जब गोपाल भार्गव मंत्री थे। उस समय भी मरीजों के आने-जाने, रहने, खाने और इलाज की सुविधा दी जाती थी। अब यह प्रकल्प निजी स्तर पर जारी है।

    जीवन और मृत्यु के लिए भी सुविधा
    गोपाल भार्गव का परिवार न केवल इलाज, बल्कि मृत्यु और अंतिम संस्कार की सुविधा भी प्रदान करता है। मरीज की मृत्यु होने पर शव घर तक पहुंचाने की व्यवस्था, बरमान घाट पर अस्थि विसर्जन और पंडित व नाई की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

    निजी खर्च और धर्म
    इस पूरे प्रकल्प में सरकारी मदद सीमित है। बंगले में साज-सज्जा और मरीजों की सुविधाएं निजी खर्च से ही संचालित होती हैं। गोपाल भार्गव का धर्म और ध्येय वाक्य है, “निरंतर कर्म” और यह दर्शन उनके कार्यों में स्पष्ट दिखाई देता है।

    गोपाल भार्गव और उनके परिवार द्वारा स्थापित यह व्यवस्था न केवल बीमार बच्चों और मरीजों के लिए मददगार साबित हो रही है, बल्कि यह मानवता और सेवा का अद्वितीय उदाहरण भी पेश करती है।

  • एमपी में ठंड का कहर जारी, कोहरे ने रोकी रफ्तार, 16 जनवरी से बारिश के आसार

    एमपी में ठंड का कहर जारी, कोहरे ने रोकी रफ्तार, 16 जनवरी से बारिश के आसार

    मध्य प्रदेश में जनवरी की ठंड इस बार लगातार नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ती नजर आ रही है। प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान बीते कई दिनों से 7 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे नीचे बना हुआ है। भले ही मौसम विभाग ने अब तक औपचारिक रूप से शीतलहर की घोषणा नहीं की हो लेकिन आम लोगों के लिए सर्दी किसी शीतलहर से कम नहीं है। सुबह-शाम की ठिठुरन और दिनभर ठंडी हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है।

    उत्तर-पश्चिमी अंचल खासतौर पर ग्वालियर-चंबल संभाग इन दिनों घने कोहरे की चपेट में है। ग्वालियर भिंड मुरैना और दतिया जिलों में सुबह के समय कोहरा इतना घना हो रहा है कि सड़कें हाईवे और आसपास की इमारतें तक साफ दिखाई नहीं दे रही हैं। कई स्थानों पर दृश्यता बेहद कम दर्ज की गई जिससे वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह के वक्त लोग हेडलाइट जलाकर बेहद धीमी रफ्तार से सफर करने को मजबूर हैं।मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में कल्याणपुर शहडोल करौंदी खजुराहो और ग्वालियर शामिल रहे। इन क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है। हालांकि दिन में धूप निकलने से कुछ घंटों के लिए राहत जरूर मिलती है लेकिन सूर्यास्त के बाद ठंड फिर से तीखी हो जाती है और रातें बेहद सर्द बनी हुई हैं।

    घने कोहरे का सीधा असर रेल यातायात पर भी पड़ रहा है। दिल्ली–भोपाल–इंदौर रूट पर चलने वाली कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से पहुंच रही हैं। यात्रियों के मुताबिक मालवा एक्सप्रेस झेलम एक्सप्रेस और सचखंड एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ठंड और अनिश्चितता के बीच इंतजार करना पड़ रहा है जिससे खासकर बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल ठंड का असर बना रहेगा लेकिन 15–16 जनवरी के बाद मौसम का मिजाज बदल सकता है। पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में सक्रिय हो रहा एक नया पश्चिमी विक्षोभ मध्य प्रदेश के मौसम को प्रभावित करेगा। इसके असर से 16 जनवरी के बाद अगले 3 से 4 दिनों तक प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश या मावठा होने की संभावना है।

    बारिश के बाद तापमान में हल्की बढ़ोतरी जरूर देखने को मिल सकती है लेकिन ठंड से तुरंत राहत मिलने की उम्मीद कम है। मौसम विभाग का कहना है कि बादलों और नमी के कारण रात के तापमान में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में लोगों को अभी कुछ दिन और सर्दी से सतर्क रहने की जरूरत है।कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में ठंड और कोहरे ने आम जनजीवन की रफ्तार धीमी कर दी है। आने वाले दिनों में बारिश जहां किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती है वहीं फिलहाल ठंड का असर बरकरार रहने के संकेत हैं।

  • भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम

    भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम


    इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई 23 मौतों ने प्रशासन और सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। जिस इलाके में कुछ दिन पहले तक मातम पसरा हुआ था वहां अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। ज़मीन के नीचे से लेकर अदालत के गलियारों तक इस त्रासदी का असर साफ दिख रहा है। प्रशासनिक स्तर पर जहां सुधार कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं वहीं न्यायिक मोर्चे पर भी मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर अहम सुनवाई प्रस्तावित है।

    भागीरथपुरा की सड़कों पर इन दिनों भारी हलचल है। पुलिस चौकी के सामने की मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी गलियों तक जेसीबी मशीनें लगातार खुदाई में जुटी हैं। कई जगह पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को हटाकर नई पाइप डाली जा रही हैं तो कहीं ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने का काम चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि नर्मदा जल आपूर्ति लाइन और सीवरेज व्यवस्था को पूरी तरह अलग किया जा रहा है ताकि दूषित पानी की समस्या भविष्य में दोबारा न हो।हालांकि इन सुधार कार्यों के चलते स्थानीय लोगों को फिलहाल भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह खुदी सड़कों कीचड़ और अधूरे भराव के कारण आवाजाही मुश्किल हो गई है। दोपहिया वाहन चालकों बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को वैकल्पिक रास्तों से निकलना पड़ रहा है। बावजूद इसके क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह असुविधा उन्हें मंजूर है अगर इससे भविष्य में किसी और परिवार को अपनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।

    स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके की पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था वर्षों से बदहाल थी। इसको लेकर कई बार शिकायतें भी की गईं लेकिन समय रहते प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। लोगों का कहना है कि यदि पहले ही सुधार कार्य किए गए होते तो शायद 23 निर्दोष लोगों की जान नहीं जाती।स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस त्रासदी की भयावहता को और स्पष्ट करते हैं। अब तक कुल 440 लोग दूषित पानी से बीमार होकर अस्पताल पहुंचे थे। इनमें से 413 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है जबकि 27 मरीज अब भी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 8 मरीज आईसीयू में हैं और 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इलाके में लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि किसी भी नए मामले को समय रहते पकड़ा जा सके।

    न्यायिक स्तर पर भी मामला तूल पकड़ चुका है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दूषित पेयजल से जुड़ी पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई में अदालत ने प्रशासन के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए थे कि यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।भागीरथपुरा की यह त्रासदी अब केवल एक स्थानीय हादसा नहीं रही बल्कि यह सिस्टम की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुकी है।

  • डॉक्टर भी हैरान, MP के रीवा में 50 साल से एक पल भी नहीं सोया ये शख्स

    डॉक्टर भी हैरान, MP के रीवा में 50 साल से एक पल भी नहीं सोया ये शख्स


    रीवा। मध्‍य प्रदेश के रीवा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर अच्छे-अच्छे डॉक्टर भी हैरान रह जाते हैं. रीवा शहर की चाणक्यपुरी कॉलोनी में रहने वाले 75 वर्षीय मोहनलाल द्विवेदी का दावा है कि उन्होंने पिछले करीब 50 सालों से एक पल के लिए भी नींद नहीं ली. हैरानी की बात ये है कि इतने लंबे समय तक न सोने के बावजूद उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं है और उनकी दिनचर्या बिल्कुल सामान्य लोगों जैसी है.

    जब मेडिकल साइंस भी रह गई जवाब ढूंढती
    मेडिकल साइंस के मुताबिक एक स्वस्थ इंसान को रोजाना 6 से 8 घंटे की नींद जरूरी होती है. नींद की कमी से शरीर और दिमाग पर गंभीर असर पड़ता है. लेकिन मोहनलाल द्विवेदी इस सिद्धांत को पूरी तरह चुनौती देते नजर आते हैं.

    नका कहना है कि न सिर्फ उन्हें नींद नहीं आती, बल्कि चोट लगने पर भी उन्हें दर्द का एहसास नहीं होता.
    पहले झाड़-फूंक, फिर बड़े शहरों के डॉक्टर
    शुरुआत में मोहनलाल ने अपनी इस समस्या को किसी से साझा नहीं किया. पूरी रात जागते रहते थे, लेकिन न आंखों में जलन होती थी और न ही कामकाज पर असर. जब परिवार को बताया गया तो पहले झाड़-फूंक करवाई गई. इसके बाद दिल्ली और मुंबई के बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों को दिखाया गया. कई तरह की जांचें हुईं, लेकिन बीमारी का कारण आज तक सामने नहीं आ सका.

    शानदार करियर, फिर भी नींद गायब
    मोहनलाल द्विवेदी का करियर भी किसी आम व्यक्ति से कम नहीं रहा. 1973 में लेक्चरर बने, 1974 में एमपीपीएससी पास कर नायब तहसीलदार बने, 2001 में ज्वाइंट कलेक्टर पद से रिटायर हुए. नींद की समस्या की शुरुआत 1973 के आसपास हुई और तब से आज तक उन्होंने सोने का अनुभव नहीं किया.
    किताबें, टहलना और शांत दिनचर्या
    मोहनलाल अपना ज्यादातर समय किताबें पढ़ने में बिताते हैं.

    रात के समय अक्सर छत पर टहलते नजर आते हैं. दिलचस्प बात ये भी है कि उनकी पत्नी भी दिन में सिर्फ 3 से 4 घंटे ही सोती हैं.
    डॉक्टर भी बोले-मामला अविश्वसनीय
    रीवा संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर राहुल मिश्रा का कहना है कि यह मामला मेडिकल साइंस के लिए बेहद चौंकाने वाला है. उनके मुताबिक, बिना सोए रहना लगभग असंभव है. हालांकि स्लीप थैरेपी और साइकोलॉजी में लगातार नए शोध हो रहे हैं. उन्होंने सलाह दी कि मोहनलाल को एक बार फिर साइकोलॉजी विभाग से संपर्क करना चाहिएइस्लामिक नाटो को लेकर पाक, सऊदी और तुर्की के बीच पक रही खिचड़ी, भारत के लिए चिंता?
  • पतंग, तिल-गुड़ और खिचड़ी की खुशबू से महका भोपाल, भोजपाल पतंग महोत्सव ने रचा इतिहास

    पतंग, तिल-गुड़ और खिचड़ी की खुशबू से महका भोपाल, भोजपाल पतंग महोत्सव ने रचा इतिहास


    भोपाल। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर इस वर्ष भोपाल में एक नया और यादगार अध्याय जुड़ गया जब शहर में पहली बार भोजपाल पतंग महोत्सव का आयोजन किया गया। भेल स्थित जम्बूरी मैदान में आयोजित इस भव्य आयोजन ने पूरे शहर को पारंपरिक उल्लास और सामूहिक आनंद से भर दिया। बुधवार को हुए इस महोत्सव में 10 हजार से अधिक लोग अपने परिवार बच्चों और मित्रों के साथ शामिल हुए और खुले आसमान के नीचे रंग-बिरंगी पतंगों के साथ पर्व की खुशियां मनाईं।सुबह 10 बजे से शुरू हुआ यह पतंग महोत्सव शाम 5 बजे तक पूरे उत्साह और उमंग के साथ चला। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया आसमान में उड़ती सैकड़ों पतंगों ने जम्बूरी मैदान को एक जीवंत कैनवास में बदल दिया। बच्चों की किलकारियां युवाओं का जोश महिलाओं की मुस्कान और बुजुर्गों की उत्सुक भागीदारी ने इस आयोजन को एक पारिवारिक उत्सव का रूप दे दिया।

    इस आयोजन का श्रेय भोजपाल महोत्सव मेला समिति को जाता है जिसने शहर की सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने और सामूहिक उत्सव की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से इस पहल की। समिति की ओर से लगभग 2000 पतंगें और माझा नि:शुल्क वितरित किया गया ताकि हर वर्ग के लोग बिना किसी आर्थिक या अन्य बाधा के इस पर्व का आनंद ले सकें। पतंगबाजी के साथ-साथ महाप्रसादी के रूप में दो क्विंटल तिल-गुड़ के लड्डू और करीब 10 हजार लोगों के लिए खिचड़ी की व्यवस्था की गई जिसने मकर संक्रांति की मिठास और भी बढ़ा दी।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद आलोक शर्मा और विशिष्ट अतिथि भोपाल भाजपा जिला अध्यक्ष रविंद्र यति की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील यादव संयोजक विकास वीरानी महामंत्री हरीश कुमार राम सहित समिति के अन्य पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन कर महोत्सव की औपचारिक शुरुआत की। इसके बाद अतिथियों ने स्वयं लोगों को पतंग और माझा वितरित कर आयोजन का उत्साह दोगुना कर दिया।सुरक्षा को लेकर आयोजन में विशेष सावधानी बरती गई। चाइनीज मांझे के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया था। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील यादव ने स्पष्ट किया कि केवल सूती और सुरक्षित धागे की ही अनुमति दी गई ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए आयोजन स्थल पर समिति के सदस्य और पुलिस टीम लगातार तैनात रही।

    आयोजन समिति के सदस्यों के अनुसार भोजपाल पतंग महोत्सव केवल पतंग उड़ाने का कार्यक्रम नहीं था बल्कि यह पारिवारिक मेल-जोल सामाजिक सौहार्द और पारंपरिक पर्वों की सामूहिक खुशी को साझा करने का एक मंच बना। बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि शहरवासियों ने इस पहल को पूरे दिल से अपनाया है।समिति ने भविष्य में भी इस तरह के सांस्कृतिक और पारंपरिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प जताया है ताकि भोपाल की पहचान एक ऐसे शहर के रूप में और मजबूत हो सके जहां परंपरा उत्सव और सामाजिक सहभागिता एक साथ जीवंत रहती है।

  • MP में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी की घटनाओं में दो बच्चों की मौत, चीनी मांझे से 7 घायल

    MP में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी की घटनाओं में दो बच्चों की मौत, चीनी मांझे से 7 घायल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में पतंगबाजी (Kite flying) के कारण हुए हादसों में 2 बच्चों (2 Children) की मौत हो गई जबकि 7 लोग गंभीर रूप से घायल (7 People seriously injured) हो गए। रीवा में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने और पन्ना में चट्टान से गिरने के कारण 2 किशोरों की जान चली गई। इंदौर, उज्जैन और इटारसी में चाइनीज मांझे की चपेट में आने से कई लोगों के गले और पैर कट गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ड्रोन कैमरों से निगरानी कर रही है और मांझा बेचने वालों पर सख्ती बरत रही है, फिर भी लोग इसका उपयोग कर रहे हैं।

    उज्जैन में चार मामले
    उज्जैन में 4 दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में दो लोगों को हल्की चोटें आईं जबकि एक युवक का गला कट गया और एक महिला के पैरों में गंभीर घाव हो गए। दोनों घायलों को इलाज के लिए सरकारी चरक भवन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ईंट भट्टे पर काम करने वाले एक शख्स के गले में बाइक चलाते समय मांझा फंस गया जिससे आठ टांके लगाने पड़े। वहीं सब्जी खरीदने निकलीं सीमा के पैरों में मांझा उलझने से गहरा कट लगा और उन्हें सात टांके लगाने पड़े।


    उज्जैन में दो की हालत गंभीर

    उज्जैन के शासकीय चरक भवन के ईएनटी सर्जन डॉ. विश्राम रत्नाकर ने बताया कि बुधवार को दोपहर तक चाइनीज मांझे से घायल होने के कुल चार मामले सामने आए। इनमें से दो को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई जबकि दो गंभीर घायल थे जिनका इलाज चल रहा है।


    रीवा में पतंगबाजी ने ली एक की जान

    रीवा जिले में बिछिया थाना क्षेत्र की चौरसिया कॉलोनी में 15 साल का कुश चौरसिया छत पर पतंग उड़ाते वक्त 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। उसकी पतंग कटकर बिजली की लाइन में फंस गई थी जिसे निकालने के लिए उसने लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया। जैसे ही रॉड बिजली के तारों से टच हुई उसे जोरदार करंट लगा। इससे वह बुरी तरह झुलस गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हादसे के वक्त परिवार मेला देखने गया था।


    पन्ना में भी एक ने गंवाई जान

    वहीं पन्ना जिले के धरमपुर थाना क्षेत्र के इचोलिया में मकर संक्रांति मेले के दौरान एक हादसा हो गया। पतंग उड़ाते समय चट्टान से गिरने से 15 साल के विभव सिंह की मौत हो गई। मृतक खोरा गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। पतंग उड़ाते समय चट्टान के किनारे संतुलन बिगड़ने से वह नीचे गिर गया जिससे सिर में चोट आने से उसकी मौके पर मौत हो गई।


    इंदौर में 4 जख्मी

    इंदौर में चाइनीज मांझे से चार लोग घायल हुए। पहला हादसा भंवरकुआं क्षेत्र में हुआ जहां बाइक से जा रहे हेमराज चौरसिया का गला कट गया। नंदानगर निवासी महेश सोनी भी चीनी मांझे की चपेट में आकर घायल हुए। जूनी इंदौर में दूध बांटने जा रहे प्रेम भंडारी के गले में मांझा फंसने से 8 टांके आए हैं। चौथी घटना रामानंद नगर में हुई जहां पतंग लेने जा रहे घनश्याम वसुनिया की दाढ़ी पूरी तरह कट गई जिसके कारण उन्हें 10 टांके लगाने पड़े।


    नर्मदापुरम में एक घायल

    नर्मदापुरम जिले के इटारसी में शाम साढ़े चार बजे के करीब चीनी मांझे से बाइक सवार का गला कट गया। गंभीर रूप से घायल हालत में युवक को इटारसी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शुभम मोटरसाइकिल से बुधवार को शाम साढ़े चार बजे घर से लाइब्रेरी जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में उसके गले में चाइनीज मांझा फंस गया। मांझे से युवक का गला 3 इंच तक कट गया।

  • MP: छतरपुर में दो युवतियों ने कर ली आपस में शादी, थानें पहुंचे परिजन… जमकर हुआ बवाल

    MP: छतरपुर में दो युवतियों ने कर ली आपस में शादी, थानें पहुंचे परिजन… जमकर हुआ बवाल


    छतरपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छतरपुर जिले (Chhatarpur district) के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में दो बालिग युवतियों (Two Adult Women) के आपस में विवाह करने का एक मामला सामने आया है जिसके कारण थाने में काफी हंगामा हुआ। सोनी और मोनी (परिवर्तित नाम) पिछले 5 साल से प्रेम संबंध में थीं। उन्होंने 12 तारीख को एक-दूसरे से शादी कर ली। जब जानकारी परिजनों को मिली तो उन्होंने विरोध किया। एक परिवार ने अपनी लड़की मोनी को जबरन साथ ले जाने की कोशिश की जिससे थाने में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए हैं और आगे की कार्रवाई के लिए अधिकारियों से सलाह ले रही है।


    5 साल से प्रेम संबंध

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोनी रैकवार और मोनी कुशवाहा के बीच पिछले करीब 5 साल से प्रेम संबंध था। ये दोनों लंबे समय से एक-दूसरे के साथ रहने और शादी करने का मन बना रही थीं। सोनी ने पुलिस को दिए अपने बयान में स्पष्ट किया कि वे दोनों बालिग हैं और पूरी समझ-बूझ के साथ अपना जीवन एक-दूसरे के साथ बिताना चाहती हैं।


    परिजनों का विरोध

    सोनी के अनुसार, 12 तारीख को दोनों युवतियां एक धाम पहुंचीं जहां उन्होंने अपनी आपसी सहमति से विवाह कर लिया। शादी करने के बाद वे दोनों साथ रहने लगीं लेकिन जैसे ही इस विवाह की जानकारी मोनी के परिवार वालों को मिली तो उन्होंने रिश्ते का कड़ा विरोध किया।


    मोनी को घर ले जाने पर अड़े थे परिजन

    सोनी का आरोप है कि मोनी के परिवार वाले उसे जबरन घर ले जाने के इरादे से सिविल लाइन थाने पहुंचे थे। इसी बात को लेकर थाने के अंदर ही दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। इसने देखते ही देखते हंगामे का रूप ले लिया।


    युवतियां साथ रहने पर अड़ीं

    सूत्रों के अनुसार, परिजन रिश्ते को सामाजिक रूप से स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं जबकि दोनों युवतियां अपनी मर्जी से साथ रहने की बात पर अड़ी हुई हैं। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए दोनों युवतियों को थाने में बैठाया और उनके परिवार वालों को समझाने की कोशिश की।


    मोनी को ले गए परिजन, मार्गदर्शन ले रही पुलिस

    पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए। पुलिस का कहना है कि दोनों युवतियां बालिग हैं और अपनी मर्जी से एक-दूसरे के साथ रहने की बात कह रही हैं। फिलहाल किसी भी पक्ष ने कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। पुलिस ने लड़की मोनी को उसके परिजनों के साथ भेजा है। वहीं समलैंगिक विवाह से जुड़े कानूनी पहलुओं पर पूरी स्पष्टता नहीं होने के कारण पुलिस उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन ले रही है ताकि कानून सम्मत निर्णय लिया जा सके।

  • धीरेंद्र शास्त्री ने वेदों की शिक्षा को लेकर दिया बड़ा बयान, कहा- इन्‍हें न मानने वालों के बच्चे बनेंगे जावेद-नावेद

    धीरेंद्र शास्त्री ने वेदों की शिक्षा को लेकर दिया बड़ा बयान, कहा- इन्‍हें न मानने वालों के बच्चे बनेंगे जावेद-नावेद


    नई दिल्‍ली। मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुत्व और वेदों की परंपरा को आगे बढ़ाने की अपनी योजना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि धाम में जल्द ही एक गुरुकुल की स्थापना की जाएगी, जहां बच्चों को वेदों और शास्त्रीय विद्या की शिक्षा दी जाएगी।

    धीरेंद्र शास्त्री ने इस दौरान कहा “भोजन एक दिन तक, पानी एक घंटे तक टिकता है, लेकिन विद्या जीवन भर हमारे साथ रहती है। इसी कारण हम गुरुकुल के माध्यम से बच्चों में सनातनी शिक्षा का प्रचार करेंगे। हमारा लक्ष्य है कि देशभर में ऐसे गुरुकुल खुलें और अधिक से अधिक बच्चे वेदों की सीख प्राप्त करें।” इस बीच, उन्होंने विवादित टिप्पणी भी की कि वेद न मानने वाले लोगों के बच्चे भविष्य में जावेद और नावेद जैसे नामों से पहचाने जाएंगे। धीरेंद्र शास्त्री ने यह बातें राजस्थान के जयपुर में साझा कीं और अपने गुरुकुल प्रोजेक्ट के उद्देश्यों को स्पष्ट किया।

    छतरपुर में सुंदरकाण्ड मंडल की स्थापना का किया ऐलान
    छतरपुर के बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देशभर में हिंदुत्व और सनातनी विचारधारा को फैलाने के लिए सुंदरकाण्ड मंडल की स्थापना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुंदरकाण्ड कार्यालय का उद्घाटन पहले ही किया जा चुका है और मंडल के सभी सदस्य लगातार इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। शास्त्री ने कहा कि ये मंडल पूरे देश में सनातनी विचारों को व्यापक रूप से पहुंचाने और लोगों के हृदय में बदलाव लाने का माध्यम हैं। उनका कहना है कि भारत में हिंदुत्व और सनातनी संस्कारों को मजबूत करने का एक ही रास्ता है साधु-संतों का कमंडल और बागेश्वर धाम के सुंदरकाण्ड मंडल।

    इस साल कन्या विवाह में होंगे तीन दिवसीय उत्सव और संतों का संगम
    बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस साल होने वाले कन्या विवाह कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बार बेटियों के विवाह उत्सव में खास बात यह है कि इसमें संतों का समागम भी होगा। यह उत्सव तीन दिन तक चलेगा और गरीब बेटियों को भी भव्य और दिव्य विवाह का पूरा अवसर मिलेगा।

    शास्त्री ने बताया कि 13 फरवरी को हल्दी और मंडप की व्यवस्था की जाएगी, 14 फरवरी को संगीत और मेहंदी का आयोजन होगा, जबकि 15 फरवरी को करीब 300 बेटियों का कन्यादान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम उन माता-पिताओं को ढूंढ रहे हैं जिनके घर बेटियां नहीं हैं, और वहीं, जिन बेटियों के माता-पिता नहीं हैं, उनका विवाह बागेश्वर धाम करवा रहा है ताकि उन्हें धर्मज माता-पिता मिलें। बेटियां किसी की भी हों, बेटी तो बेटी होती है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026 में होंगे शामिल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026 में होंगे शामिल


    भोपाल!
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार 15 जनवरी को भोपाल में ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ में एआई-सक्षम शासन और आर्थिक परिवर्तन के लिए मध्यप्रदेश के रणनीतिक रोडमैप को प्रस्तुत करेंगे। यह कांफ्रेंस एआई इनेबल्ड गवर्नेंस फॉर एन एम्पावर्ड भारत की थीम पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इंडिया एआई मिशन के सहयोग से आयोजित की जा रही है।इससे एआई आधारित शासन,तकनीक एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अकादमिक और उद्योग समन्वय को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ प्रदेश सरकार एआई को नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।

    कांफ्रेंस में मध्यप्रदेश ‘इनोवेशन एक्सपो’ का शुभारंभ भी किया जाएगा, जिसमें इंडिया एआई पेवेलियन, मध्यप्रदेश पेवेलियन, स्टार्ट-अप शो-केस, हैकाथॉन एरिना और स्टार्ट-अप प्रतियोगिता शामिल होंगी। कांफ्रेंस में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव एवं सीईओ इंडिया एआई श्री अभिषेक सिंह और आईआईटी इंदौर के निदेशक श्री सुहास एस. जोशी संबोधित करेंगे।

    अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे द्वारा “एआई फॉर पीपल,प्लेनेट एंड प्रोग्रेस – मध्यप्रदेश रोडमैप टू इंपैक्ट ” पर राज्य का प्रमुख एआई विजन प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन कांफ्रेंस को संबोधित करेंगे। कांफ्रेंस में स्पेसटेक नीति लांच होगी, विभिन्न समझौता ज्ञापनों और नवाचार एवं युवा एआई पहलों से संबंधित महत्वपूर्ण घोषणाएं की जाएंगी।

    कांफ्रेंस में तीन उच्चस्तरीय थीमैटिक सत्र—टेक्नोलॉजी लेड गवर्नेंस फॉर ऑल, एआई फॉर इकोनॉमिक ग्रोथ एंड सोशल गुड और रेज़िलिएंस, इनोवेशन एंड डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर आयोजित किए जाएंगे। इनमें डिजिटल इंडिया- भाषिणी, यूआईडीएआई, एनईपीडी विभिन्न राज्य सरकारों और गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, डिलोट्टी और ईवाई जैसे अग्रणी संगठनों के विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। साथ ही एमपी इनोटेक स्टार्ट-अप पिच कंटेस्ट और उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन के विजेताओं की घोषणा भी की जाएगी।

    यह कांफ्रेंस इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा फ्रांस एआई एक्शन समिट में की गई थी। सम्मेलन का आयोजन 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में किया जाएगा।

  • श्रीमहाकालेश्वर मंदिर में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक मकर संक्रांति पर्व पर की पूजा

    उज्‍जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सपत्नीक मकर संक्रांति पर्व पर उज्जैन स्थित प्रसिद्ध श्रीमहाकालेश्वर मंदिर में सपत्नीक पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान श्रीमहाकाल के दरबार में भक्ति भाव से पूजा कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की प्रार्थना कर प्रदेश के विकास, शांति एवं समृद्धि की कामना की। इस दौरान मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान के साथ पूजा सम्पन्न कराई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर में भक्तों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ दीं।

    इस अवसर पर प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, राज्यसभा सांसद श्री बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, जन-प्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे।