Category: Madhya Pradesh
-

जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई
भोपाल। प्रदेश के जनजातीय छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों, खासकर छात्राओं की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। अब छात्रावासों में अधीक्षक का रातभर परिसर में रहना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन न करने वाले अधीक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पद से हटाया जा सकता है।सरकार ने यह निर्णय छात्रावासों में लगातार मिल रही शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों को ध्यान में रखते हुए लिया है। वर्तमान में कई अधीक्षक मूल रूप से शिक्षक हैं, जो न तो नियमित रूप से पढ़ा रहे हैं और न ही छात्रावासों में पर्याप्त समय दे रहे हैं। बच्चों के हित में उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नई अधीक्षक कैडर प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। योजना के तहत अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूर्णकालिक अधीक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जबकि मौजूदा शिक्षक अधीक्षक अपने मूल शिक्षण कार्य में लौटेंगे।छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार ने तय किया है कि प्रत्येक छात्रावास में अधीक्षक के लिए आवासीय व्यवस्था होगी। अधीक्षक को बच्चों के साथ ही परिसर में रुकना होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही संभाग स्तर पर विशेष निगरानी टीमें बनाई जाएंगी, जो छात्रावासों का औचक निरीक्षण करेंगी और व्यवस्थाओं की रिपोर्ट तैयार करेंगी।तकनीकी निगरानी को भी मजबूत किया जाएगा। प्रदेश के लगभग 2500 जनजातीय छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे और बायोमेट्रिक/थंब इम्प्रेशन सिस्टम लगवाए जाएंगे। इससे यह रिकॉर्ड रखा जा सकेगा कि कौन व्यक्ति कब छात्रावास में आया और कब गया। इसके अलावा, भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए रोजाना परोसी जाने वाली थाली की तस्वीर भेजना भी अनिवार्य किया जाएगा।इस बीच, भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की जमीन को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया कि इसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर ही लिया जाएगा। लंबे समय से लंबित कचरा निष्पादन की प्रक्रिया को पूरा करना सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि आगामी शिक्षा सत्र से पहले किसी भी छात्रावास में बिना पुलिस सत्यापन के कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं होगा। सुरक्षा गार्ड से लेकर अन्य स्टाफ की पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य होगी।इसके अलावा, जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रत्येक विकासखंड में आधुनिक सुविधाओं वाले स्कूल, छात्रावास और सांस्कृतिक केंद्र विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के अवसर प्रदान करना है।सुरक्षा, अनुशासन और शिक्षा के इस सुधार से यह उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और उनकी पढ़ाई पर भी ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से छात्राओं और छात्रों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम होगी। -

MP: सतना में 26 साल पुराना कर्ज उतारने के लिए सफाईकर्मी के घर पहुंचे DSP
सतना। पद और प्रतिष्ठा मिल जाए, लेकिन इंसान को अपना अतीत और किसी का उपकार कभी नहीं भूलना चाहिए। मध्य प्रदेश पुलिस (Madhya Pradesh Police) के चर्चित और संवेदनशील अधिकारी DSP संतोष पटेल ने इस बात को साबित कर दिखाया है। वे अपने ऊपर चढ़े हुए 26 साल पुराने एक कर्ज (A 26-year-old Debt) को उतारने के लिए सतना (Santa) की तंग गलियों में मौजूद एक झुग्गी बस्ती (Slum) में पहुंचे। यह कर्ज पैसों का नहीं था, बल्कि खून का था। जिस सफाईकर्मी संतु मास्टर ने बचपन में अपना खून देकर संतोष पटेल की जान बचाई थी, वे उसी से मिलने के लिए शहर में आए थे। हालांकि यहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि संतु अब दुनिया में नहीं रहे, जिसके बाद वे उनके परिवार का पता लगाकर उनसे मिलने के लिए यहां आ गए। यहां संतु मास्टर की बेटियों से मिलकर वह भावुक हो गए और इस दौरान उन्होंने उनकी बड़ी बेटी के चरण स्पर्श कर परिवार की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया।यहां पहुंचकर DSP संतोष पटेल ने एकबार फिर अपने बचपन का वो डरावना मंजर याद किया, जब उनकी जान पर बन आई थी। बात साल 1999 की है, जब वे महज 8-9 साल के थे। एक गंभीर बीमारी ने उन्हें जकड़ लिया था। शरीर का खून पानी बनकर मवाद में बदल गया था। इस दौरान उनके पिता और दादा ने 6 महीने झाड़-फूंक में गंवा दिए। हालत बिगड़ने पर उन्हें पन्ना जिला अस्पताल और फिर सतना के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि तत्काल ऑपरेशन करना होगा, और खून की सख्त जरूरत है।
खून देने से पहले पिता को लगाई थी फटकार
DSP ने बताया कि उस दौर में रक्तदान को लेकर कई भ्रांतियां थीं और कोई डोनर नहीं मिल रहा था। लेकिन इसी बीच अस्पताल में एक अजीब संयोग बना। संतोष के पिता ने गलती से पान-सुपारी खाकर अस्पताल परिसर में थूक दिया। वहां सफाई कर रहे संतु ने उन्हें देखा और दौड़कर आया। इसके बाद उसने पिता को डांटा-फटकारा और चला गया। हालांकि इसी दौरान जब बेटे की हालत की वजह से संतोष के पिता जब वहां पर निराश बैठे हुए थे, तो उसी सफाईकर्मी संतु ने उनके कंधे पर हाथ रखकर कहा था, ‘आप हताश मत हो, आपका बेटा जिंदा रहेगा।’इसी बीच जब संतु मास्टर को पता चला कि बच्चे को खून की जरूरत है, तो उसने बिना किसी स्वार्थ के अपना ब्लड डोनेट किया था। उसी खून से ऑपरेशन सफल रहा और आज संतोष पटेल जिंदा हैं और पुलिस अधिकारी है।
‘अधिकारी नहीं, बेटा बनकर आया हूं’
DSP बनने के बाद संतोष पटेल सतना के उसी अस्पताल पहुंचे। वे संतु मास्टर को गले लगाना चाहते थे, लेकिन वहां पता चला कि उनका निधन हो चुका है और पत्नी भी नहीं रहीं। अस्पताल की एक बुजुर्ग महिला कर्मचारी ने बताया कि संतु की दो बेटियां झुग्गी बस्ती में रहती हैं। इसके बाद DSP उनका पता लेकर तुरंत यहां पहुंचे। वर्दी पहने एक बड़े अफसर को अपनी झोपड़ी में देख बेटियां सहम गईं, लेकिन जब DSP ने झुककर उनके पैर छुए, तो सबकी आंखें नम हो गईं।
DSP बोले- मैं करूंगा कन्यादान
DSP ने संतु की बेटियों से कहा,मैं संतु मास्टर का मुंह नहीं देख पाया, इसका अफसोस जीवन भर रहेगा, लेकिन मेरी रगों में भी उनका खून दौड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि वे लोग अकेले नहीं हैं। DSP ने संकल्प लिया कि वे संतु मास्टर की छोटी बेटी की शादी धूमधाम से कराएंगे। उन्होंने कहा, ‘अगर समय और संयोग रहा, तो मैं खुद भाई और पिता का फर्ज निभाते हुए कन्यादान भी करूंगा’। -

MP: जबलपुर में चाय की गुमटी में घुसी बेकाबू SUV… BJP युवा मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष समेत दो की मौत
जबलपुर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर जिले (Jabalpur district) में तेज रफ्तार एसयूवी इनोवा कार (SUV Innova Car) ने चाय की गुमटी पर खड़े चार लोगों को रौंद दिया। इस हादसे में भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष समेत 2 युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में दो अन्य लोगों को मामूली चोट आई हैं।बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार एसयूवी जबलपुर से अमरकंटक की तरफ जा रही थी। इसी दौरान सदाफल से कुंडम तरफ आ रहे बाइक सवारों को बचाने के चक्कर में कार चालक ने सड़क किनारे स्थित चाय की टपरी में कार घुसा दी। जानकारी अनुसार कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि उसने पहले सड़क किनारे खड़े 3 से 4 वाहनों को टक्कर मारी फिर जाकर सीधे गुमटी में घुस गई। इस हादसे में कार भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
इस हादसे में आकाश विश्वकमां, दीपक महोबिया, दीपक चक्रवर्ती व शरद इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को 108 एम्बुलेंस से इलाज के लिए कुंडम अस्पताल पहुंचाया गया। जहां आकाश विश्वकर्मा व दीपक महोबिया की मौत हो गई।
ग्रामीणों ने जबलपुर-अमरकंटक रोड की जाम
एक्सीडेंट के बाद चारों तरफ अफरातफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने दोनों युवकों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने दोनों युवकों को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद नाराज ग्रामीणों ने जबलपुर अमरकंटक रोड पर चक्काजाम कर दिया। हंगामा होने की सूचना पर पहुंचे अधिकारियों की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ।
प्रदर्शन के बीच ग्रामीणों ने क्या मांग की?
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने कुंडम बायपास पर चकाजाम कर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि सदाफल क्रॉसिंग और कॉलेज व सिलोंड़ी रोड क्रॉसिंग के पास से वाहन तेज रफ्तार से भागते हैं, जिससे आए दिन हादसे होते है। ग्रामीणों का कहना था कि इस मार्ग पर ब्रेकर बनाने व स्टॉपर रखे जाने की मांग की गई, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिए जाने से लोग हादसे का शिकार हो रहे है।
क्या बोले अधिकारी?
जबलपुर एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि कार नंबर के आधार पर वाहन मालिक व चालक के संबंध में जानकारी जुटाई गई। कार सवार डिंडौरी के रहने वाले हैं जो किसी काम से जबलपुर आए थे और वापस लौट रहे थे। घायलों में दीपक और शरद निजी अस्पताल में इलाज जारी है। पुलिस ने मौके से चालक को हिरासत में लेते हुए जांच शुरू कर दी है। -

MP: अशोकनगर में कुख्यात सट्टा किंग के 3 मंजिला होटल पर चला प्रशासन का बुलडोजर
अशोकनगर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के अशोकनगर (Ashoknagar) में प्रशासन ने होटल आजाद पैलेस (Hotel Azad Palace) पर बुलडोजर (Bulldozer) चला दिया। बिना अनुमति निर्माण और नियमों के उल्लंघन के कारण तीन मंजिला होटल के अगले और पिछले हिस्से को जमींदोज कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौजूद रही। मौके पर ड्रोन भी तैनात किए गए थे। यह होटल आजाद खान नाम के शख्स का बताया जाता है। आजाद खान जेल में बंद है। इससे पहले उसके फार्म हाउस पर भी कार्रवाई की जा चुकी है।
क्या आरोप?
आजाद खान पर ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क चलाने का आरोप है। उसका नाम कई आपराधिक मामलों में भी सामने आया है। ये सारे प्रकरण जांच की केंद्र और न्यायिक दायरे में हैं। प्रशासन की मुख्य कार्रवाई उसके तीन मंजिला होटल आजाद पैलेस पर हुई। नगर पालिका की टीम ने पुलिस के साथ मिलकर होटल के अवैध हिस्सों को जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए होटल के आसपास की दुकानों को बंद करा दिया गया था।
क्या बोला प्रशासन?
एसडीएम सुब्रत त्रिपाठी ने कहा- होटल आजाद पैलेस, आजाद खान और शाहिद खान का है जिन पर 5 लाख रुपये बकाया भी है। यह होटल नगर निगम की मंजूरी के बिना अवैध रूप से चलाया जा रहा था। नगर निगम ने उन्हें तीन नोटिस जारी किए थे। अब होटल के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों का कोलुआ में एक और फार्महाउस भी था, जिसे बिना इजाजत के बनाया गया था।
100 पुलिसकर्मी रहे तैनात, ड्रोन से निगरानी
साथ ही आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई थी। मौके पर लगभग 100 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। ड्रोन और वीडियो कैमरों की निगरानी में जेसीबी ने होटल के अगले और पिछले हिस्सों को जमींदोज कर दिया।
वित्तीय गड़बड़ी का भी आरोप
बताया जाता है कि आजाद खान की भूमिका कथित सट्टा नेटवर्क तब उजागर हुई थी जब गुना और अशोकनगर पुलिस ने कुछ सटोरियों के बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की। जांच में सामने आया कि आरोपी सट्टा के साथ ही एक कोऑपरेटिव सोसाइटी की आड़ में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितताएं भी कर रहा था। आरोपी आजाद खान की मुश्किलें तब बढ़ गईं जब देहात थाना क्षेत्र में दो भाइयों की आत्महत्या के मामले में उस पर उकसाने का आरोप लगा।
आलीशान फार्म हाउस पर भी हो चुका है ऐक्शन
इसके बाद पुलिस ने आजाद खान को गिरफ्तार कर के उसे जेल भेज दिया। आजाद खान की गिरफ्तारी के समय वह घायल अवस्था में लंगड़ाते हुए देखा गया था। इससे पहले प्रशासन ने कोलुआ गांव के पास स्थित उसके दो मंजिला आलीशान फार्म हाउस पर भी कार्रवाई की थी। प्रशासन का कहना था कि वह बिना मंजूरी के सड़क के बहुत करीब बना था। अब सारे आरोप न्यायिक कार्यवाही और जांच के दायरे में बताए जाते हैं।
भाई पर भी आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप
इतना ही नहीं, आजाद खान के भाई राशिद खान उर्फ चिन्ना पर भी आरोप है कि उसने आत्महत्या करने वाले भाइयों के परिवार को धमकाया और राजीनामे का दबाव बनाया। मौजूदा वक्त में सरकार ने आजाद खान की केबीएन साख सहकारी संस्था के सभी लेनदेन पर रोक लगा दी है। मंत्री विश्वास सारंग ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई ने शहर में खलबली मचा दी है। -

MP: नर्मदा तट पर पेशाब… भड़के IAS अफसर ने युवक को जड़े थप्पड़, जमीन में गाड़ने की दी धमकी
नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नरसिंहपुर जिले (Narsinghpur district) में नर्मदा नदी (Narmada River) पर बने एक घाट से कुछ दूरी पर एक युवक को पेशाब करता देख एक IAS अधिकारी का पारा इतना चढ़ गया कि उन्होंने उसे दो थप्पड़ रसीद कर दिए। इतना ही नहीं उनकी देखादेखी उनके गार्ड ने भी युवक को एक चांटा जड़ दिया। हाथ उठाने वाले अधिकारी की पहचान गजेंद्र नागेश (Gajendra Nagesh) के रूप में हुई है, और इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हो गया है, जिसमें नागेश उस युवक को गालियां देते और थप्पड़ मारते नजर आ रहे हैं।घटना के वक्त वहां मौजूद लोगों ने बताया कि युवक घाट के पीछे पेशाब करने के लिए गया था, तभी वहां आरोपी अधिकारी आ पहुंचे और उसे समझाने की बजाय उस पर हाथ उठाया शुरू कर दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी ने जिस युवक को सरेआम थप्पड़ मारे उसकी पहचान बृजेश नौरिया के रूप में हुई है, जो कि घाट के पास एक जनरल स्टोर्स चलाता है।
अधिकारी ने कहा- इधर आ लौंडे
घटना का जो वीडियो सामने आया है, उसमें वह अधिकारी कहते दिखाई दे रहे हैं, ‘नर्मदाजी के घाट क्या पेशाब करने के लिए हैं। इधर आओ लौंडे।’ इसी बीच वहां खड़ा एक बुजुर्ग पुजारी अपनी परेशानी बताते हुए IAS अधिकारी से कहता है, ‘क्या करें सर, कहां जाएं, कोई व्यवस्था नहीं है।’ तब वह अधिकारी कहते हैं, ‘तो कहीं दूर जाकर करोगे या नर्मदा के घाट पर ही करोगे।’
‘हटवाओ इसकी दुकान, फिंकवाओ इसके यहां से’
इसके बाद अधिकारी उस युवक के पास जाते हैं और कहते हैं, ‘साले वहां पेशाब करने गया था’, इतना कहते ही वे उस पर हाथ उठा देते हैं, और इसके बाद उसका नाम पूछते हुए एकबार फिर उसे जोरदार थप्पड़ मार देते हैं और कहते हैं साले वहां पेशाब करने गया था, इसके बाद वह अपने साथ आए अमले से कहते हैं हटवाओ इसकी दुकान कहां है, फिंकवाओ इसको यहां से, क्या नाम है इसका, ये मुझे दिखना नहीं चाहिए एक महीने तक।’ इसके बाद जब वहां खड़े बुजुर्ग उस अधिकारी को समझाने की कोशिश करते हैं, तो अधिकारी गुस्से में उनसे कहता है, ‘मैं तुम्हें रेत में गड़वा दूंगा, जितना ऊपर दिख रहे हो ना, उतना ही अंदर करवा दूंगा।’प्राप्त जानकारी के अनुसार यह घटना शहर के बरमान रेत घाट पर शनिवार को हुई थी, और इसका वीडियो सोमवार को वायरल हो गया। जिसके बाद लोगों में गुस्सा भी फैल गया और वे उस अधिकारी पर युवक का अपमान, पद का दुरुपयोग और दुर्व्यवहार करने जैसे आरोप लगाने लगे।
उधर अधिकारी ने जिस बुजुर्ग पुजारी को जमीन में गाड़ने की धमकी दी, उनकी पहचान कैलाश चंद्र मिश्रा के रूप में हुई है, जिन्होंने वहां सार्वजनिक शौचालय नहीं होने को लेकर शिकायत की तो अधिकारी ने उन्हें भी डपट दिया था। इसके बाद मिश्रा ने यह भी दावा किया कि उसे वहां सजा भी दी गई और बतौर सजा उठक-बैठक लगाने के लिए मजबूर भी किया गया।
इस घटना को लेकर जिले के पुजारियों और ब्राह्मण समुदाय के लोगों में भारी नाराजगी है और इसे लेकर उन्होंने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को एक लिखित शिकायत भी कर दी है। वहीं इलाके के एक पुलिस अधिकारी ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि ब्राह्मण समुदाय के 25-30 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल आया था और उन्होंने IAS अधिकारी के संबंध एक ज्ञापन भी सौंपा है। उधर IAS अधिकारी ने अपने किए का बचाव करते हुए कहा कि उनका इरादा सिर्फ नदी की पवित्रता की रक्षा करना था।
-

उज्जैन में आस्था का महासैलाब: साल के आखिरी रविवार महाकाल दरबार पहुंचे डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु
उज्जैन।साल के अंतिम रविवार को धार्मिक नगरी उज्जैन में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ पड़ी। सर्दियों की छुट्टियां शुरू होते ही देशभर से भक्त उज्जैन पहुंचने लगे हैं। इसी क्रम में रविवार को करीब डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर साल के अंतिम दिनों को आध्यात्मिक रूप से सार्थक बनाया। सुबह तड़के भस्म आरती के बाद से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की लंबी कतारें लग गई थीं। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन को दर्शन व्यवस्था में कई बदलाव करने पड़े। सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ होते हुए त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया गया।शीघ्र दर्शन के लिए खोला गया सम्राट अशोक सेतु
शनिवार को सुरक्षा कारणों से बंद किया गया सम्राट अशोक सेतु रविवार को पुनः खोला गया, लेकिन इसे केवल 250 रुपये के शीघ्र दर्शन टिकट वाले श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित रखा गया। इसके चलते सामान्य और शीघ्र दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की अलग-अलग व्यवस्थाएं बनाई गईं, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।महाकाल मंदिर में श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद से सप्ताहांत और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। साल का आखिरी रविवार भी इसका साक्षी बना, जब सुबह से देर रात तक मंदिर परिसर में भक्तों का सैलाब उमड़ता रहा।प्रशासन को करना पड़ा इंतजामों में बदलाव
शनिवार से ही श्रद्धालुओं का उज्जैन पहुंचना शुरू हो गया था। जनदबाव बढ़ने के कारण जिला प्रशासन और मंदिर समिति को अपनी व्यवस्थाओं में बदलाव करना पड़ा। रविवार को उत्तर और पूर्व दिशा के सभी द्वार बंद रखे गए जबकि केवल पश्चिम दिशा से श्री महाकाल लोक और सम्राट अशोक सेतु के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया।भीड़ को देखते हुए 31 दिसंबर और 1 जनवरी के लिए भी प्रशासन ने अतिरिक्त तैयारियां शुरू कर दी हैं। चारधाम पार्किंग में जिगजैग बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जा रही है, ताकि कतारों को सुव्यवस्थित रखा जा सके। इसके अलावा, पेयजल, चिकित्सा और सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त इंतजाम भी किए जा रहे हैं।अन्य मंदिरों में भी उमड़ी श्रद्धा
महाकाल मंदिर के अलावा उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। काल भैरव मंदिर में रविवार को 75 हजार से अधिक भक्तों ने दर्शन किए। भीड़ के चलते काल भैरव मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था अस्थायी रूप से स्थगित रही और जिला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार ही दर्शन कराए गए।इसके अलावा मंगलनाथ मंदिर, अंगारेश्वर महादेव मंदिर और चिंतामन गणेश मंदिर में भी दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहा। सभी मंदिरों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया।अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल
भारी भीड़ के बावजूद महाकाल मंदिर के बाहर अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। आसपास की गलियों और शहनाई गेट के सामने अवैध पार्किंग से यातायात बाधित रहा। वहीं, मुख्य द्वार के पास फूल-माला और पूजन सामग्री की दुकानों के अतिक्रमण के कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। भीड़ के बीच इस अव्यवस्था पर नियंत्रण को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
आगे और बढ़ सकती है भीड़प्रशासन का अनुमान है कि नववर्ष के अवसर पर उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है। होटल, धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस लगभग पूरी तरह भर चुके हैं। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और धैर्य बनाए रखें, ताकि सभी को सुगम दर्शन का अवसर मिल सके। -

भोपाल से दिल्ली-दुबई तक ठगी का जाल, ईरानी गिरोह पर शिकंजा, कार्रवाई के दौरान पुलिस पर पथराव
भोपाल।मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का कुख्यात ईरानी डेरा एक बार फिर गंभीर आपराधिक गतिविधियों को लेकर चर्चा में है। निशातपुरा थाना क्षेत्र की अमन कॉलोनी में रविवार को उस समय तनावपूर्ण हालात बन गए जब भोपाल पुलिस ठगी और लूट के एक बड़े मामले में मुख्य आरोपी राजू ईरानी को गिरफ्तार करने पहुंची। पुलिस कार्रवाई की सूचना मिलते ही इलाके में भीड़ जमा हो गई और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए।पुलिस पर अचानक पथराव और हमला किया गया जिसमें कई जवानों को चोटें आईं। हालात संभालने के लिए अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बलवा शासकीय कार्य में बाधा और पुलिस पर हमले के आरोप में 34 लोगों को हिरासत में लिया है।CBI अफसर और पत्रकार बनकर करते थे ठगी
पुलिस के मुताबिक राजू ईरानी और उसका गिरोह खुद को कभी CBI अधिकारी तो कभी राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों का पत्रकार बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। यह गिरोह अलग-अलग राज्यों में सर्राफा व्यापारियों कारोबारियों और संपन्न लोगों को निशाना बनाता था।हाल ही में सागर जिले में सामने आए एक मामले में गिरोह के सदस्यों ने CBI अधिकारी बनकर एक सर्राफा व्यापारी से ठगी की थी। इसी केस में राजू ईरानी की तलाश की जा रही थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी अमन कॉलोनी में छिपा हुआ है जिसके बाद दबिश दी गई।कार्रवाई के दौरान भड़की हिंसा
रविवार को जब पुलिस टीम अमन कॉलोनी पहुंची तो कुछ ही देर में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इकट्ठा हो गए। पुलिस के अनुसार भीड़ ने गिरफ्तारी का विरोध करते हुए पथराव शुरू कर दिया। हालात बिगड़ते देख पुलिस को इलाके में सुरक्षा घेरा बनाना पड़ा। कई वाहनों को नुकसान पहुंचा और पुलिसकर्मियों को चोटें आईं।स्थिति नियंत्रण में आने के बाद पुलिस ने उपद्रव में शामिल 34 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। सभी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल काला ईरानी से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। उसने कबूल किया कि गिरोह भरोसा जीतने के लिए फर्जी पहचान का इस्तेमाल करता था। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर एक न्यूज चैनल की माइक आईडी भी बरामद की है जिसका उपयोग खुद को पत्रकार बताने के लिए किया जाता था।पुलिस को संदेह है कि गिरोह लंबे समय से इसी तरीके से ठगी की वारदातों को अंजाम देता आ रहा था और कई राज्यों में इसके पीड़ित मौजूद हैं।
दिल्ली और दुबई तक फैले तारजांच में यह भी सामने आया है कि ईरानी डेरे का नेटवर्क केवल भोपाल तक सीमित नहीं है। इसी वर्ष जुलाई में दिल्ली पुलिस ने मुठभेड़ के बाद ईरानी गिरोह के दो कुख्यात सदस्यों को गिरफ्तार किया था जिन पर कई राज्यों में लूट और ठगी के गंभीर मामले दर्ज थे।इसके अलावा दिसंबर में रानी कमलापति रेलवे स्टेशन क्षेत्र में मोबाइल झपटमारी के मामले में पकड़े गए आरोपी भी इसी इलाके से जुड़े पाए गए। पूछताछ में खुलासा हुआ कि लूटे गए महंगे मोबाइल पहले मुंबई भेजे जाते थे और फिर दुबई तक तस्करी की जाती थी।पहले भी हो चुके हैं हमले
ईरानी डेरे में पुलिस पर हमले का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2020 में सागर जिले की पुलिस टीम पर भी इसी इलाके में पथराव और मिर्च पाउडर फेंके जाने की घटना हुई थी। उस समय कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे और स्थिति संभालने के लिए सख्त कदम उठाने पड़े थे।जांच जारी
भोपाल पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ठगी और लूट से हासिल की गई रकम और सामान किन रास्तों से बाहर भेजा गया और इसमें और कौन-कौन शामिल है। -

पुलिस थानों की तय ‘रेट’ और अवैध वसूली का आरोप, जौरा विधायक ने प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार
मुरैना।मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। जौरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिले के पुलिस थाने ठेका प्रथा के आधार पर संचालित किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, इसी वजह से इलाके में अपराध, गुंडागर्दी और अराजकता लगातार बढ़ती जा रही है।मीडिया से चर्चा के दौरान विधायक पंकज उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश में वास्तविक पुलिसिंग कहीं नजर नहीं आ रही है। उन्होंने दावा किया कि थानों की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था संभालने की बजाय अवैध वसूली तक सीमित रह गई है, जिससे आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।अपराध के आधार पर तय होती है थानों कीरेट
जौरा विधायक ने आरोप लगाया कि हर पुलिस थाने की एक तय कीमत है, जो उस क्षेत्र में चल रहे अवैध कारोबार और अपराधों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि जिन थाना क्षेत्रों में जुआ, सट्टा या अन्य अवैध गतिविधियां अधिक होती हैं, वहां की रेट भी उसी अनुपात में ज्यादा होती है। इसी तरह अवैध रेत खनन में लगे ट्रैक्टरों और वाहनों की संख्या के आधार पर भी थानों की कीमत तय की जाती है।विधायक के अनुसार, जब कानून व्यवस्था संभालने वाले थाने इस तरह से तयशुदा रेट पर काम करेंगे, तो अपराध का बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है।बढ़ते अपराधों के लिए पुलिस जिम्मेदारपंकज उपाध्याय ने कहा कि जिले में गुंडागर्दी, लूट, डकैती और गोलीबारी जैसी घटनाओं में तेजी देखी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के लिए केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मी ही नहीं, बल्कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। विधायक ने कहा कि जब शीर्ष स्तर पर जवाबदेही नहीं होगी, तो व्यवस्था में सुधार की उम्मीद करना मुश्किल है।उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस थानों में जनता की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जिससे लोगों का भरोसा व्यवस्था से उठता जा रहा है।
नेताओं के हस्तक्षेप से बढ़ रही अवैध वसूलीविधायक ने पुलिस थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि नेताओं के दबाव और संरक्षण के चलते अवैध वसूली का यह सिलसिला चल रहा है। जब तक इस तरह का हस्तक्षेप बंद नहीं होगा, तब तकतय लूट की यह व्यवस्था यूं ही चलती रहेगी।उन्होंने कहा कि आम नागरिक जब थाने जाता है, तो उसकी बात सुनी नहीं जाती, जबकि अपराधियों को संरक्षण मिलता है। यह स्थिति लोकतंत्र और कानून व्यवस्था दोनों के लिए खतरनाक है।
कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनीपंकज उपाध्याय ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी इस व्यवस्था के खिलाफ पहले भी आवाज उठाती रही है और आगे भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेगी।उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को गूंगे-बहरों तक पहुंचाने के लिए संघर्ष जरूरी है। कांग्रेस पार्टी आम लोगों की सुरक्षा और न्याय के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी।प्रशासन पर बढ़ता दबाव
विधायक के इन आरोपों के बाद पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि अभी तक प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

