Category: National

  • पैसा मंदिर का और 50 में 42 मुस्लिम छात्र! मंजूरी रद्द होने के बाद MBBS कर रहे छात्रों का क्या होगा? समझिए विवाद

    पैसा मंदिर का और 50 में 42 मुस्लिम छात्र! मंजूरी रद्द होने के बाद MBBS कर रहे छात्रों का क्या होगा? समझिए विवाद

    नई दिल्ली। नेशनल मेडिकल कमीशन ने जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को MBBS कोर्स चलाने की अनुमति को रद्द कर देन का फैसला लिया है.

    यह फैसला 2 जनवरी 2026 को हुए अचानक निरीक्षण के बाद लिया गया है. जांच में कॉलेज के शिक्षा देने की व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सुविधाओं में कई गंभीर कमियां पाई गई हैं. मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने इसे न्यूनतम मानकों पर खरा नहीं पाया है. जिसके कारण से NMC अध्यक्ष की मंजूरी लेकर उस कॉलेज की अनुमति रद्द कर दी गई है.

    50 छात्रों में से 42 छात्र मुस्लिम
    ये विवाद तब उभरा जब कॉलेज में 50 छात्रों में से 42 कश्मीरी मुस्लिम छात्रों का प्रवेश हुआ था. भाजपा और कुछ हिंदू संगठन इसे लेकर नाराज हुए और सवाल उठाया कि मंदिर ट्रस्ट के फंड से चलने वाले इस कॉलेज में मुस्लिम छात्रों को प्राथमिकता क्यों मिली है. मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि दाखिले पूरी तरह NEET और मेरिट के आधार पर हुए और धर्म के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है. उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि कोई संस्था अल्पसंख्यक दर्जा लेना चाहती थी तो उसी समय आवेदन करना चाहिए था.

    MARB ने शिकायतों को जांचने के लिए 2 जनवरी 2026 को अचानक निरीक्षण किया. निरीक्षण में पता चला कि शिक्षण फैकल्टी में 39 फीसदी की कमी थी, ट्यूटर, डेमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या 65 फीसदी कम थी. मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सेवाएं भी तय मानकों से बहुत कम थीं. OPD में 400 मरीजों की जगह केवल 182 मरीज आए, बेड ऑक्यूपेंसी 80 फीसदी की जगह 45 फीसदी रही और ICU में केवल आधे बेड भरे थे. प्रसव की संख्या हर महीने 25 थी, जबकि यह MARB के अनुसार गंभीर रूप से अपर्याप्त थी.

    हिंदू मुस्लिम नहीं, कॉलेज में थी कमी
    मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहना चाहिए और उन्हें अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा. उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया में सांप्रदायिक राजनीति की कोशिशें हुई हैं, लेकिन NMC और MARB ने साफ किया कि फैसले का आधार केवल कॉलेज की कमियां और नियमों का उल्लंघन था. छात्रों के अच्छाई के लिए उन्हें दूसरे कॉलेजों में बचे हुए सीटों पर भेजा जाएगा.

    इस पूरे विवाद से साफ संदेश गया कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और संचालन में नियमों का पालन अनिवार्य है. छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव, या धर्म के आधार पर प्रभावित नहीं होना चाहिए. NMC और MARB का यह कदम स्वास्थ्य शिक्षा में गुणवत्ता, समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी माना जा रहा है.

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले-जहां-जहां भी गजनी का नाम आता है, उसे हटा देना चाहिए

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले-जहां-जहां भी गजनी का नाम आता है, उसे हटा देना चाहिए


    नरसिंहपुर। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने सोमनाथ मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी है। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में जहां-जहां भी गजनी का नाम आता है, उसे हटा देना चाहिए।
    अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी ने जो ट्वीट पोस्ट किया है, वह हजार वर्ष पहले की घटना के बारे में है, जिसमें सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण होने का दर्द व्यक्त किया गया है। एक व्यक्ति था महमूद गजनवी, जो अपनी सेना के छोटे-से दल के साथ आया और मंदिर को क्षति पहुंचाई। वहां पूजा करने वाले पुजारियों को उसने नुकसान पहुंचाया, भक्तों को चोट पहुंचाई। उसने यह सोचकर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की कि अगर मंदिर और मूर्तियां नष्ट कर दी जाएं तो सोमनाथ नष्ट हो जाएगा।’
    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि यह प्रयास हजार वर्ष पहले किया गया था। उन्होंने कहा, ‘पीएम मोदी की ओर से पोस्ट किया गया ट्वीट यह संदेश देना चाहता है कि तुम मंदिर तोड़ सकते हो, मूर्तियां तोड़ सकते हो, लेकिन सोमनाथ को नष्ट नहीं कर सकते। हजार वर्ष बीत गए, सोमनाथ आज भी खड़ा है। इसलिए भविष्य में जो लोग ऐसे प्रयास करेंगे, उन्हें फिर कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर यही कहना चाहते हैं तो यह स्वागतयोग्य कदम है।’ उन्होंने कहा कि जहां तक गजनी का सवाल है, उसने निश्चित रूप से अच्छा काम नहीं किया। इसलिए भारत में जहां-जहां भी गजनी का नाम आता है, उसे हटा देना चाहिए।
    11 जनवरी को सोमनाथ जाएंगे पीएम मोदी

    पीएम मोदी विदेशी आक्रमणकारियों के बार-बार हमलों के बाद पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर का 11 जनवरी को दौरा करेंगे।

    उन्होंने सोमनाथ मंदिर की सराहना करते हुए सोमवार को कहा कि गुजरात स्थित यह मंदिर भारतीय सभ्यता की अदम्य भावना का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के 1,000 साल पूरा होने पर ब्लॉग पोस्ट में कहा, ‘हमारी सभ्यता की अदम्य भावना का सोमनाथ से बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता। यह मंदिर बाधाओं एवं संघर्षों पर विजय प्राप्त करते हुए गौरव के साथ खड़ा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोमनाथ की गाथा भारत माता की उन अनगिनत संतानों के अटूट साहस की कहानी है जिन्होंने हमारी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा की। यही भावना आज राष्ट्र में भी दिखाई दे रही है जो सदियों के आक्रमणों और औपनिवेशिक लूट से उबरकर वैश्विक विकास के सबसे चमकते केंद्रों में से एक बनकर उभरा है।’
  • युवक के साथ बेरहमी से मारपीट कर प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाला

    युवक के साथ बेरहमी से मारपीट कर प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाला


    समस्तीपुर । बिहार के एक थाने में युवक के साथ हैवानियत की हदें पार करने का आरोप लगा है। समस्तीपुर जिले के ताजपुर थाना कस्टडी में एक युवक के साथ बेरहमी से मारपीट और अमानवीय व्यवहार किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। जख्मी युवक मनीष कुमार की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे ताजपुर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से बेहतर इलाज के लिए समस्तीपुर सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
    मनीष भेरोखड़ा गांव निवासी संजय पोद्दार का पुत्र है। पीड़ित मनीष ने बताया कि वह ताजपुर बाजार स्थित सोनी ज्वेलर्स में काम करता था। कुछ दिन पूर्व दुकान में हुई चोरी के बाद संदेह के आधार पर दुकानदार ने उसे बुलाकर बंधक बनाया, पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया।

    मनीष का आरोप है कि पुलिस ने उसे चार दिनों तक हिरासत में रखकर शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने दावा किया कि कस्टडी में उसकी बेरहमी से पिटाई की गई, यहां तक कि एक पुलिसकर्मी ने उसके शरीर के संवेदनशील हिस्से में सुई चुभोई और प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाल दिया।

    पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी पत्नी के साथ मारपीट कर पूरे परिवार को धमकाया।

    चार जनवरी को निजी मुचलके पर रिहा होने के बाद उसकी तबीयत और बिगड़ गई। पिता संजय पोद्दार ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इधर, थानाध्यक्ष शंकर शरण दास ने आरोपों से इनकार किया है। वहीं, एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर जांच के लिए एसडीपीओ-1 के नेतृत्व में टीम गठित की गई है।

  • अडानी टॉप-20 अरबपतियों की सूची से बाहर… एलन मस्क और मुकेश अंबानी को भी बड़ा झटका

    अडानी टॉप-20 अरबपतियों की सूची से बाहर… एलन मस्क और मुकेश अंबानी को भी बड़ा झटका


    वाशिंगटन।
    दुनिया के सबसे अमीर एलन मस्क (World’s Richest man Elon Musk) और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी (Asia’s Richest man, Mukesh Ambani), दोनों को मंगलवार को बड़ा झटका लगा। दोनों ब्लूमबर्ग बिलेनियर लिस्ट में मंगलवार के टॉप लूजर रहे। एलन मस्क की संपत्ति 13.48 अरब डॉलर कम हो गई तो मुकेश अंबानी के नेटवर्थ में 4.37 अरब डॉलर की कमी आई। अडानी 313 मिलियन डॉलर गंवाने के बाद 85.4 अरब डॉलर के साथ टॉप-20 से बाहर हो गए हैं। अंबानी के पास अभी 103 अरब डॉलर की संपत्ति है।


    क्यों आई गिरावट

    दरअसल एलन मस्क की कंपनी टेस्ला के शेयरों में मंगलवार को 4 पर्सेंट से अधिक की गिरावट आई। मस्क की संपत्ति का अधिकांश हिस्सा टेस्ला के शेयरों से आता है। इस वजह से उनकी संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों भी 4 पर्सेंट से अधिक की गिरावट हुई। इसलिए इनकी दौलत भी घट गई। हालांकि, दोनों की रैंकिंग में कोई फर्क नहीं पड़ा। मुकेश अंबानी ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स में 18वें स्थान पर काबिज हैं और मस्क टॉप पोजीशन पर।

    दुनिया दूसरे सबसे रईस शख्स लैरी पेज को 1.80 अरब डॉलर का झटका लगा है। अब इनके पास 270 अरब डॉलर की संपत्ति है।


    जेफ बेजोस को 7.18 अरब डॉलर का फायदा

    तीसरे नंबर पर काबिज जेफ बेजोस को 7.18 अरब डॉलर का फायदा हुआ। अब इनकी संपत्ति 262 अरब डॉलर हो गई है। सर्गेई ब्रिन को 1.64 अरब डॉलर का नुकसान हुआ और अब वह 251 अरब डॉलर के साथ चौथे नंबर पर हैं। पांचवे नंबर पर काबिज लैरी एलिसन को 576 मिलियन डॉलर का फायदा हुआ है। उनकी संपत्ति अब 246 अरब डॉलर रह गई है।

    जुकरबर्ग दुनिया के अमीरों की लिस्ट में अब छठे स्थान पर हैं। उनकी संपत्ति में 677 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ। अब इनकी कुल संपत्ति 233 अरब डॉलर हो गई है। फ्रांस के बर्नार्ड अर्नाल्ट सातवें नंबर पर हैं और उनकी संपत्ति अब 22 मिलियन डॉलर घटकर 207 अरब डॉलर रह गई है। स्टीव बाल्मर को 1.83 अरब डॉलर का फायदा हुआ है। अब इनकी संपत्ति 167 अरब डॉलर है।

    जेनसेन हुआंग 155 अरब डॉलर के साथ ब्लूमबर्ग इंडेक्स में 9वें स्थान पर हैं। इन्हें 686 मिलियन डॉलर की चोट पहुंची है। 10वें स्थान पर वॉरेन बफेट हैं। इनकी कुल संपत्ति 82.2 मिलियन डॉलर बढ़कर 150 अरब डॉलर हो गई है।

  • आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला… एक बार कोटे का लाभ लेने वाले का सामान्य सीट पर कोई हक नहीं

    आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला… एक बार कोटे का लाभ लेने वाले का सामान्य सीट पर कोई हक नहीं


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा (Union Public Service Commission (UPSC) examination) में आवेदक ने यदि एक बार आरक्षण (Reservation) का लाभ ले लिया है तो वह सामान्य श्रेणी की सीटों पर नियुक्ति पाने का हकदार नहीं है। भले ही उसका कुल अंक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से अधिक हो। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया है।

    जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की पीठ ने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अनारक्षित कैडर में एक अनुसूचित जाति के उम्मीदवार की नियुक्ति की मांग पर विचार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उक्त आवेदक ने आरंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ उठाया था। पीठ ने फैसले में कहा कि एक बार जब किसी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार ने आरक्षण का लाभ ले लिया है तो उसे सामान्य श्रेणी के रिक्तियों/सीटों पर नियुक्त नहीं किया जा सकता। इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया।

    हाईकोर्ट ने आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को सिर्फ इसलिए सामान्य श्रेणी में नियुक्त करने का आदेश दिया था क्योंकि उसने सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से ऊंची फाइनल रैंक हासिल की थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार ने आरंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ उठाया है, इसलिए, उन्हें सामान्य श्रेणी की सीटों पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए आरक्षित श्रेणी का लाभ उठाने के बाद, उम्मीदवार प्रतिवादी नंबर-1 (जी किरण) बाद में सिर्फ इसलिए सामान्य सीट पर चुने जाने का दावा नहीं कर सकता कि उसने बाद के चरणों में 34 सामान्य श्रेणी के आवेदक से बेहतर प्रदर्शन किया।

    पीठ ने कहा कि अगर कोई उम्मीदवार परीक्षा के किसी भी स्टेज पर छूट का सहारा लेता है, तो वह परीक्षा नियम, 2013 के नियम 14(ii) के प्रोविजो के दायरे में नहीं आएगा और उस स्थिति में, कैडर आवंटन के लिए लागू पॉलिसी के मकसद से, वह जनरल स्टैंडर्ड पर चुने गए उम्मीदवारों की लिस्ट में नहीं आएगा, जो अपने होम स्टेट कैडर की जनरल इनसाइडर वैकेंसी पर इनसाइडर उम्मीदवार के तौर पर दावा कर रहा हो।

    यह है मामला दरअसल, यूपीएससी द्वारा 2013 में भारतीय वन सेवा परीक्षा से मामले में विवाद शुरू हुआ। यह परीक्षाा दो चरणों में हुई थी, प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य और साक्षात्कार। प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य श्रेणी का कट-ऑफ 267 अंक था, जबकि अनुसूचित जाति (एससी) उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ 233 था। इस परीक्षा में आरक्षित श्रेणी के आवेदक जी. किरण ने रियायती कट-ऑफ का फायदा उठाकर 247.18 अंक के साथ क्वालिफाई किया, जबकि सामान्य श्रेणी के आवेदक एंटनी एस. मारियप्पा ने जनरल कट-ऑफ पर 270.68 अंक के के साथ क्वालिफाई किया।

    हालांकि, अंतिम मेरिट लिस्ट में आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार जी. किरण की रैंक 19 थी और एंटनी की रैंक 37 थी। लेकिन, कैडर आवंटन के दौरान, कर्नाटक में केवल एक जनरल इनसाइडर वैकेंसी थी और कोई एससी इनसाइडर वैकेंसी नहीं थी। केंद्र सरकार ने जनरल इनसाइडर पोस्ट एंटनी को दी और किरण को तमिलनाडु कैडर में भेजा।

  • US में लोकप्रियता की तुलना… एक्सपर्ट बोले- मोदी 10 साल से सत्ता में… ट्रंप 3 साल में हो जाएंगे बाहर

    US में लोकप्रियता की तुलना… एक्सपर्ट बोले- मोदी 10 साल से सत्ता में… ट्रंप 3 साल में हो जाएंगे बाहर


    वाशिंगटन।
    वेनेजुएला (Venezuela) के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की निगाहें दूसरे देशों पर भी हैं। वहीं, इसी बीच वह भारत (India) को टैरिफ को लेकर फिर से धमकाते नजर आ रहे हैं। अब जानकारों का मानना है कि वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद थोड़े समय के लिए मिल रहे ये फायदे ट्रंप के पद छोड़ने के बाद खत्म हो सकते हैं। साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की लोकप्रियता की तुलना की जा रही है।

    जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट इयान ब्रेमर को अमेरिका को होने वाले लॉन्ग टर्म फायदों पर संदेह है। उन्होंने कहा कि जब ट्रंप 2029 में दफ्तर छोड़ेंगे, तो ये थोड़े समय के फायदों पर विराम लग सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की तरह नहीं है, जहां प्रधानमंत्री मोदी लोकप्रियता के कारण 10 सालों से ज्यादा सत्ता में है। वहीं, ओवल ऑफिस में ट्रंप का कार्यकाल सीमित है।

    उन्होंने कहा कि चीन, रूस और भारत के विपरीत अमेरिका में हर चार साल में नेतृत्व बदलता है। उन्होंने कहा कि इसके चलते अमेरिका में सरकारी उपायों में निरंतरता नहीं रह जाती है और नतीजों में समय लगता है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगला राष्ट्रपति ट्रंप के किए कई कामों को पलट सकता है, ठीक वैसे ही जैसे ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति के कामों के साथ किया।

    ब्रेमर ने कहा, ‘ट्रंप ने जो किया उसे अगला राष्ट्रपति बदल भी सकता है। यह शी जिनपिंग नहीं है, यह मोदी भी नहीं है जो 10 साल से ज्यादा समय से देश चला रहे हैं और लोकतंत्र में लोकप्रिय बने हुए हैं। यह ट्रंप हैं, जो 80 साल के हैं और अलोकप्रिय हैं और 3 साल में पद छोड़ देंगे।’

    तेल पर बोले
    ब्रेमर ने कहा कि तेल की वैश्विक दरें, वेनेजुएला में राजनीतिक स्थिरता और ट्रंप के बाद क्या होगा, ये सब तय करेंगे कि काराकास के तेल भंडार का अमेरिका को फायदा हो रहा है या नहीं। उन्होंने कहा, ‘और तेल। आप जानते हैं कि वेनेजुएला अभी सिर्फ 8 लाख बैरल रोज बना रहा है। यह आंकड़ा 30 लाख बैरल हुआ करता था। इसे बढ़ाने के लिए आपको राजनीतिक स्थिरता चाहिए।’

    उन्होंने कहा, ‘आपको एक ऐसे आर्थिक पर्यावरण की जरूरत है, जिसमें तेल कंपनियां भरोसा कर सकें। आपको उस भरोसे की जरूरत है कि वो बैरल फायदेमंद होंगी और अभी एनर्जी की कीमतें काफी कम हैं।’

    उन्होंने वेनेजुएला से तेल निकाले जाने को लेकर कहा कि तेल कंपनियों का निवेश चक्र, दफ्तर में अमेरिकी राष्ट्रपतियों के रहने से ज्यादा होता है। उन्होंने कहा, ‘आपको इस भरोसे की भी जरूरत होगी कि जिस राजनीतिक व्यवस्था का समर्थन ट्रंप कर रहे हैं, वो 2029 में उनके जाने के बाद भी बनी रहेगी।’

  • देशभर में ठंड का कहर: दिल्ली में साल का पहला कोल्ड डे, 13 राज्यों में शीतलहर का अलर्ट

    देशभर में ठंड का कहर: दिल्ली में साल का पहला कोल्ड डे, 13 राज्यों में शीतलहर का अलर्ट

    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली और एनसीआर में सर्दी ने अब पूरी तरह अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। मंगलवार को दिल्ली में इस सीजन का पहला कोल्ड डे रिकॉर्ड किया गया, जब अधिकतम तापमान में अचानक गिरावट आई और दिनभर ठंडी हवाओं ने लोगों को कंपकंपाने पर मजबूर कर दिया। धूप के बावजूद सर्द हवाओं के चलते ठिठुरन बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को भी मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही रह सकता है।

    13 राज्यों में शीतलहर का अलर्ट

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों के दौरान देश के 13 राज्यों में शीतलहर को लेकर चेतावनी जारी की है। उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और सिक्किम में ठंड का प्रकोप बढ़ने की संभावना जताई गई है।

    झारखंड के गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला और चतरा जिलों में शीतलहर को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में खासकर सुबह और रात के समय ठंड का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है।

    कोलकाता में टूटा सर्दी का रिकॉर्ड

    उधर, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। शहर में न्यूनतम तापमान 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो जनवरी महीने का अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा। मौसम विभाग का अनुमान है कि दक्षिणी पश्चिम बंगाल में आने वाले दिनों में ठंड और तेज हो सकती है।

    कोहरे की चादर से ढकेंगे कई राज्य

    मौसम विभाग ने उत्तर भारत के कई हिस्सों में घने कोहरे को लेकर भी चेतावनी दी है। 7 से 9 जनवरी के बीच उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा-चंडीगढ़ के कई इलाकों में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। इसके अलावा पश्चिमी राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में भी 7 जनवरी को सुबह घना कोहरा देखने को मिल सकता है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है।

    देशभर में गिरता पारा

    जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे पहुंच गया है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में पारा 0 से 5 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और ओडिशा के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान 5 से 10 डिग्री तक गिर चुका है। मैदानी इलाकों में सबसे कम तापमान पश्चिमी मध्य प्रदेश के राजगढ़ में 2.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    पहाड़ों में बारिश-बर्फबारी का अलर्ट

    7 जनवरी 2026 को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद के साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड और बढ़ेगी, जबकि मैदानी इलाकों में ठंडी हवाओं का असर और तेज हो सकता है।

  • JNU नारेबाजी विवाद: ‘शरजील इमाम की औलादों के इरादों को कुचलेंगे’ CM फडणवीस का तीखा हमला

    JNU नारेबाजी विवाद: ‘शरजील इमाम की औलादों के इरादों को कुचलेंगे’ CM फडणवीस का तीखा हमला

    नई दिल्ली। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर लगाए गए विवादित नारों ने एक बार फिर देश की राजनीति को गरमा दिया है। इस घटना के बाद जहां JNU प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए FIR दर्ज कराई, वहीं अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान ने इस विवाद को और तीखा बना दिया है।

    JNU प्रशासन ने इस नारेबाजी को लोकतंत्र और राष्ट्रीय मूल्यों पर हमला करार देते हुए साफ कहा है कि विश्वविद्यालय किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का मंच नहीं बन सकता। प्रशासन की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और पूरे मामले की जांच जारी है।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा है पूरा मामला

    दरअसल, यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद शुरू हुआ। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में जेल में बंद आरोपियों शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद JNU कैंपस में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।

    प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए, जिससे देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली। इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

    CM देवेंद्र फडणवीस का तीखा बयान

    JNU में हुई नारेबाजी पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ा और विवादित बयान दिया है। नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि JNU में लगाए गए नारे देशविरोधी मानसिकता को दर्शाते हैं।

    फडणवीस ने कहा, “ये शरजील इमाम की औलादें हैं, जो JNU में पैदा हुई हैं। देशद्रोहियों और देश को तोड़ने की भाषा बोलने वालों के इरादों को कुचलने का काम किया जाएगा।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है।

    उन्होंने यह भी साफ किया कि देश की एकता और अखंडता के खिलाफ किसी भी सोच को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    शिवाजी महाराज पर भी दिया बयान

    इसी दौरान देवेंद्र फडणवीस ने छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर भी अहम टिप्पणी की। केंद्रीय मंत्री सीआर पाटील के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि महापुरुष किसी एक समाज या जाति के नहीं होते।

    फडणवीस ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज पूरे देश के थे। उन्हें किसी एक समाज से जोड़ना गलत है। महापुरुषों को बांटना देश के हित में नहीं है।”

    JNU विवाद और नेताओं के बयानों के बाद यह मुद्दा अब केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा विषय बन गया है।

  • मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्री-परिषद सदस्यों को मिले टैबलेट

    मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्री-परिषद सदस्यों को मिले टैबलेट


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में एक नए नवाचार करते हुए आज मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्रि-परिषद के सभी सदस्यों को टैबलेट वितरण किया। उन्होंने बताया कि मंत्रि-परिषद से संबंधित संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी। मंत्रालय में मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में कैबिनेट के सदस्यों और मंत्रि-परिषद के भारसाधक सचिवों को टैबलेट प्रदाय करने की शुरूआत हुई। कैबिनेट के सदस्यों ने टैबलेट प्राप्त किए और प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत ई-कैबिनेट की पहल हुई है। ई-कैबिनेट एप्लीकेशन के संबंध में संबंधितों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह एप्लीकेशन आधुनिक तकनीक, पेपरलैस, सुरक्षित और ऐसी गोपनीय प्रणाली है, जिसे मंत्रि-परिषद सदस्य कभी भी और कहीं भी अपनी सुविधा के अनुसार अवलोकन कर सकते हैं। मुख्य रूप से मंत्रि-परिषद की कार्य सूची देखने, ई-कैबिनेट एप्लीकेशन द्वारा पूर्व की बैठकों में लिए गए निर्णयों का पालन-प्रतिवेदन देखने में सुविधा होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पारदर्शिता और समय की बचत के लिए मंत्रि-परिषद सदस्य नई व्यवस्था का पूरा लाभ लेंगे। प्रारंभ में मंत्रि-परिषद बैठक का एजेण्डा भौतिक एवं डिजिटल रूप दोनों फार्मेट में भेजा जाएगा, बाद में यह पूर्णता डिजिटल रूप में भेजा जाएगा। इस पेपरलैस व्यवस्था अर्थात ई-कैबिनेट एप्लीकेशन प्रारंभ होने से भौतिक रूप से होने वाले फोल्डर वितरण, कागज एवं समय की बचत हो सकेगी।

    मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने बताया कि वर्ष 1960 से लेकर अब तक लिए गए मंत्रि-परिषद के निर्णयों को डिजिटलाइज किया गया है। गत 2 वर्ष के मंत्रि-परिषद के निर्णय एक क्लिक पर देखे जा सकते हैं। मंत्रि-परिषद की बैठक के अंत में एक प्रेजेंटेशन द्वारा मंत्रियों को टैबलेट के उपयोग को प्रारंभ करने के उद्देश्य, व्यापक उपयोगिता और टैबलेट के कार्य संचालन की बुनियादी जानकारी दी गई।

  • IPL में खेलने से इनकार करना पड़ सकता है भारी, नीलामी की रकम भी जा सकती है, दो साल का बैन भी संभव

    IPL में खेलने से इनकार करना पड़ सकता है भारी, नीलामी की रकम भी जा सकती है, दो साल का बैन भी संभव


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) नीलामी किसी भी क्रिकेटर के करियर का बड़ा मोड़ होती है। करोड़ों की बोली लगना और रातों-रात स्टार बनना जितना आकर्षक है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आता है। अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर कोई खिलाड़ी नीलामी में बिकने के बाद अपनी मर्जी से IPL खेलने से इनकार कर दे, तो क्या उसे पूरी रकम मिलती है? IPL के नियम इस मामले में बेहद स्पष्ट हैं और काफी सख्त भी।

    IPL पूरी तरह BCCI द्वारा संचालित टूर्नामेंट है। नीलामी में भाग लेने वाला हर खिलाड़ी पहले से तय नियम और शर्तों को स्वीकार करता है।

    नीलामी में बिकने के बाद खिलाड़ी और फ्रेंचाइजी के बीच एक पेशेवर अनुबंध बन जाता है, जिसमें खिलाड़ी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह टूर्नामेंट में उपलब्ध रहे और टीम के लिए खेले।

    अगर कोई खिलाड़ी बिना वैध और ठोस कारण के खेलने से इनकार करता है, तो उसे नीलामी में मिली पूरी रकम नहीं दी जाती। IPL में लागू नियम ‘नो प्ले, नो पे’ के तहत स्पष्ट करते हैं कि यदि खिलाड़ी मैदान पर नहीं उतरता, तो उसे भुगतान का पूरा हक नहीं मिलता। इसका मकसद यह भी है कि फ्रेंचाइजी पर किए गए खर्च का नुकसान न हो।

    नीलामी में बिकने के बाद अचानक नाम वापस लेना BCCI के नियमों के तहत गंभीर उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में खिलाड़ी पर अगले दो IPL सीजन और नीलामी से प्रतिबंध लगाया जा सकता है। यह प्रतिबंध केवल सजा नहीं है, बल्कि संदेश भी देता है कि खिलाड़ी नीलामी में शामिल होने से पहले पूरी गंभीरता से निर्णय लें।

    हालांकि, हर स्थिति में सजा तय नहीं होती। अगर खिलाड़ी किसी गंभीर चोट से जूझ रहा हो या राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना जरूरी हो, तो उसे छूट दी जा सकती है। इसके लिए मेडिकल रिपोर्ट या संबंधित बोर्ड की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होती है। बिना पुख्ता कारण या सबूत के इनकार मान्य नहीं होगा।

    फ्रेंचाइजी के लिए भी यह नियम बेहद महत्वपूर्ण हैं। नीलामी के दौरान टीम अपनी रणनीति खिलाड़ियों पर तैयार करती है। किसी खिलाड़ी पर बड़ी रकम खर्च करने के बाद यदि वह आखिरी वक्त पर खेलने से मना कर दे, तो टीम का संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए BCCI ने सख्त नियम बनाए हैं ताकि लीग की विश्वसनीयता और फ्रेंचाइजी के हित सुरक्षित रह सकें।

    विदेशी खिलाड़ियों के मामले में यह नियम और भी जरूरी हो जाता है। कई विदेशी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल या निजी कारणों से IPL से हटना चाहते हैं। BCCI यह सुनिश्चित करता है कि कोई खिलाड़ी बिना ठोस वजह के लीग को हल्के में न ले।
    यदि कोई खिलाड़ी पूरे टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लेता, तो आम तौर पर उसे पूरी रकम नहीं मिलती। हालांकि कुछ विशेष मामलों में फ्रेंचाइजी और खिलाड़ी के बीच आपसी सहमति से आंशिक भुगतान या अलग व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन यह पूरी तरह अनुबंध और नियमों पर निर्भर करता है।

    कुल मिलाकर, IPL नीलामी में बिकना केवल फायदे की बात नहीं है, बल्कि इसके साथ अनुशासन और जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। बिना ठोस कारण IPL खेलने से इनकार करना खिलाड़ी के करियर और छविदोनों के लिए भारी पड़ सकता है। नियमों का पालन करना और टीम के प्रति प्रतिबद्ध रहना हर खिलाड़ी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।