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  • पंजाब चुनाव से पहले AAP में बगावत, 40 उम्मीदवारों की सूची आते ही दो विधायकों ने छोड़ी पार्टी..

    पंजाब चुनाव से पहले AAP में बगावत, 40 उम्मीदवारों की सूची आते ही दो विधायकों ने छोड़ी पार्टी..

    नई दिल्ली । पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को लगातार दो दिनों में बड़ा झटका लगा है। पार्टी की ओर से 31 अक्टूबर को 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी किए जाने के अगले ही दिन उसके दो मौजूदा विधायकों ने प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वाले नेताओं में पटियाला जिले की सनौर विधानसभा सीट से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना सीट से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा शामिल हैं। दोनों के फैसले से चुनाव से पहले पार्टी के भीतर असंतोष और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    दोनों विधायकों के इस्तीफे की जानकारी 1 नवंबर को सामने आई। हरमीत सिंह पठानमाजरा ने अपना इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा है। वहीं चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने की घोषणा की। दोनों विधायकों के नाम 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जारी की गई आम आदमी पार्टी की पहली सूची में शामिल नहीं थे। इस घटनाक्रम के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    दोनों नेताओं ने चंडीगढ़ में रविवार शाम 4:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने की जानकारी दी थी। इसमें उनके पार्टी छोड़ने के फैसले और इसके पीछे के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई गई। उनके भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की भी चर्चा सामने आई, हालांकि इस्तीफे के समय तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। इसलिए उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

    हरमीत सिंह पठानमाजरा और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ और उनके विधानसभा क्षेत्र में नदी-नालों की सफाई के मुद्दे पर उन्होंने सरकार तथा पार्टी नेतृत्व के कामकाज पर सवाल उठाए थे। इस घटनाक्रम के बाद उनके और भगवंत मान सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनने लगी थी। इसके बाद उनकी सरकारी सुरक्षा वापस लिए जाने का मामला भी चर्चा में आया था।

    चेतन सिंह जौड़ामाजरा समाना विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि, सितंबर 2024 में मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल के दौरान उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना क्षेत्र में पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर भी बदलाव हुए। पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को आम आदमी पार्टी में शामिल करने और उन्हें समाना विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाए जाने के बाद जौड़ामाजरा की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं।

    दूसरी ओर, हरमीत सिंह पठानमाजरा लंबे समय से पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों को लेकर चर्चा में रहे हैं। सितंबर 2025 में बाढ़ की स्थिति और अपने क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने सरकार के सामने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि क्षेत्र में नदी-नालों की सफाई और बाढ़ से बचाव के लिए पर्याप्त कदम उठाने की जरूरत है। इस मुद्दे पर उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद सामने आए थे। बाद के घटनाक्रम में उनकी सरकारी सुरक्षा वापस लिए जाने की बात भी सामने आई थी।

    पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए आम आदमी पार्टी ने पहले ही उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 31 अक्टूबर को घोषित पहली सूची में 40 विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए थे। पार्टी ने चुनाव से काफी पहले उम्मीदवारों की घोषणा करके अपनी तैयारियों को गति देने की कोशिश की है। हालांकि, सूची जारी होने के अगले ही दिन दो मौजूदा विधायकों के इस्तीफे ने पार्टी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

    पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं और 2027 में होने वाले चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी के दो विधायकों का पार्टी छोड़ना चुनावी तैयारियों के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों नेताओं की आगे की राजनीतिक गतिविधियों और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

  • वाराणसी में जुटेंगे दुनिया के दार्शनिक विचारक, अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी में डॉ. प्रीति अदाणी देंगी अहम संबोधन

    वाराणसी में जुटेंगे दुनिया के दार्शनिक विचारक, अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी में डॉ. प्रीति अदाणी देंगी अहम संबोधन

    नई दिल्ली । दुनिया की प्राचीन दार्शनिक और सभ्यतागत परंपराओं के बीच संवाद को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 2 से 4 नवंबर 2026 तक अंतरराष्ट्रीय ‘अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के विचारक, शिक्षाविद, विशेषज्ञ और ज्ञान परंपराओं से जुड़े प्रतिनिधि एक मंच पर जुटेंगे। कार्यक्रम में अदाणी फाउंडेशन की संस्थापक एवं चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी भी शामिल होंगी और अपने विचार रखेंगी। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग सभ्यताओं के दार्शनिक दृष्टिकोण को एक साथ लाकर वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना है।

    इस सम्मेलन में प्राचीन दर्शन और आधुनिक तकनीक के बीच संबंधों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि नई तकनीक विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और विचारधाराओं के बीच संवाद को किस तरह आसान बना सकती है। इसके साथ ही ज्ञान की अलग-अलग परंपराओं के बीच आपसी समझ और सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा होगी।

    इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए वाराणसी को चुना जाना भी विशेष महत्व रखता है। गंगा नदी के किनारे बसा यह शहर दुनिया के सबसे प्राचीन और लगातार आबाद रहने वाले नगरों में शामिल है। सदियों से वाराणसी शिक्षा, दर्शन, आध्यात्मिक चिंतन और धार्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां हिंदू, बौद्ध और जैन ज्ञान परंपराओं का ऐतिहासिक जुड़ाव भी देखने को मिलता है। ऐसे में विभिन्न सभ्यताओं के विचारों पर चर्चा के लिए इस शहर को उपयुक्त स्थान माना गया है।

    संगोष्ठी का आधार यह विचार है कि वर्तमान समय में दुनिया जिन जटिल समस्याओं से गुजर रही है, उनका समाधान केवल वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति से संभव नहीं है। भू-राजनीतिक तनाव, पर्यावरणीय संकट और तेजी से बदलती तकनीक जैसी चुनौतियों के बीच नैतिक मूल्यों, जिम्मेदार नेतृत्व और सांस्कृतिक समझ की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में इन विषयों को दार्शनिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जाएगा।

    कार्यक्रम के दौरान यूनानी दार्शनिक अरस्तू और चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस के विचारों के साथ हिंदू, बौद्ध, जैन, कैथोलिक और इस्लामी परंपराओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। विभिन्न विचारधाराओं में मौजूद समानताओं और उनके बीच के अंतर पर विशेषज्ञ अपनी बात रखेंगे। विशेष रूप से सद्गुण आधारित नैतिकता, सुशासन और सत्ता तथा शक्ति के उचित एवं नैतिक इस्तेमाल जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

    आयोजन के मुख्य सत्र 2 और 3 नवंबर को होंगे। इन सत्रों में विशेषज्ञों के व्याख्यान, विषय आधारित चर्चाएं और तुलनात्मक दर्शन से जुड़े संवाद आयोजित किए जाएंगे। वैश्विक शासन व्यवस्था और शांति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार रखे जाएंगे। इसके अलावा आधुनिक तकनीक, खासकर एआई आधारित भाषा और संवाद उपकरणों के इस्तेमाल पर चर्चा होगी। इन तकनीकों के माध्यम से अलग-अलग भाषाओं में उपलब्ध ज्ञान और विचारों तक पहुंच आसान बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

    सम्मेलन का अंतिम दिन यानी 4 नवंबर सांस्कृतिक भ्रमण और ऐतिहासिक विरासत को समझने के लिए निर्धारित किया गया है। इस दौरान प्रतिभागी गंगा घाटों का भ्रमण करेंगे और गंगा आरती में शामिल होंगे। इसके अलावा प्रमुख मंदिरों के दर्शन तथा बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल सारनाथ की यात्रा भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

    इस तरह तीन दिवसीय संगोष्ठी में एक ओर प्राचीन दार्शनिक विचारों और नैतिक मूल्यों पर चर्चा होगी, तो दूसरी ओर आधुनिक दुनिया की चुनौतियों के समाधान में उनकी प्रासंगिकता समझने का प्रयास किया जाएगा। सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों को वाराणसी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को करीब से देखने का अवसर भी मिलेगा।

  • भूमध्य सागर में भारतीय नौसेना की मौजूदगी बढ़ी, आईएनएस त्रिशूल ग्रीस के सूदा बे पहुंचा…

    भूमध्य सागर में भारतीय नौसेना की मौजूदगी बढ़ी, आईएनएस त्रिशूल ग्रीस के सूदा बे पहुंचा…


    नई दिल्ली ।
    भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल से लैस युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल भूमध्य सागर में अपनी तैनाती के तहत 31 अक्टूबर को ग्रीस के सूदा बे बंदरगाह पहुंचा। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत और ग्रीस की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और दोनों देशों के नौसैनिक कर्मियों के बीच पेशेवर संपर्क बढ़ाना है। इस पड़ाव के दौरान कई सैन्य और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

    ग्रीस में प्रवास के दौरान आईएनएस त्रिशूल के चालक दल के सदस्य वहां की नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और एथेंस स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक गतिविधियों से जुड़े पेशेवर विषयों पर चर्चा होगी। साथ ही भारतीय और ग्रीक नौसैनिकों को एक-दूसरे के युद्धपोतों का निरीक्षण करने का अवसर मिलेगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के कामकाज, संचालन प्रक्रियाओं और क्षमताओं को समझना है।

    इस यात्रा में सैन्य गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक संपर्क को भी महत्व दिया गया है। इसके तहत दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम और आपसी संवाद के अवसर उपलब्ध होंगे। इससे एक-दूसरे की परंपराओं और कार्यशैली को समझने में मदद मिलेगी। इस तरह बंदरगाह पर होने वाला यह पड़ाव केवल औपचारिक नौसैनिक यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी बनेगा।

    आईएनएस त्रिशूल के जवान सूदा बे स्थित नौसैनिक सहायता केंद्र (एनएसए) और नाटो के समुद्री अवरोधन अभियान प्रशिक्षण केंद्र (एनएमआईओटीसी) की सुविधाओं का भी परिचय प्राप्त करेंगे। इन केंद्रों के दौरे के दौरान भारतीय नौसैनिक वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं और प्रशिक्षण गतिविधियों को करीब से देख सकेंगे। इससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित समुद्री प्रशिक्षण और सहायता संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी मिलेगी।

    यात्रा के दौरान युद्धपोत का चालक दल सूदा बे स्थित युद्ध समाधि स्थल पर भी पहुंचेगा। यहां सैनिकों की स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इसके अलावा आईएनएस त्रिशूल को बंदरगाह पर आम लोगों के अवलोकन के लिए भी खोला जाएगा। इससे स्थानीय नागरिकों को भारतीय नौसेना के युद्धपोत को देखने और उसके बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

    ग्रीस पहुंचने से पहले आईएनएस त्रिशूल ब्रिटेन में भी नौसैनिक गतिविधियों का हिस्सा रहा है। भारतीय नौसेना के इस युद्धपोत ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास कोंकण-26 में भाग लिया था। इसके लिए आईएनएस त्रिशूल 8 अक्टूबर को ब्रिटेन के प्लायमाउथ बंदरगाह पहुंचा था। यहां 15 अक्टूबर तक दोनों देशों की नौसेनाओं ने संयुक्त अभ्यास किया।

    कोंकण-26 के दौरान समुद्र में जहाजों के बीच तालमेल, हवाई गतिविधियों और पानी के नीचे पनडुब्बियों से निपटने से संबंधित परिचालन क्षमताओं का अभ्यास किया गया। इसमें दोनों नौसेनाओं ने अलग-अलग परिस्थितियों में एक साथ काम करने की अपनी क्षमता को परखा। यह वार्षिक अभ्यास भारत और ब्रिटेन के बीच दो दशक से अधिक समय से जारी नौसैनिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    समय के साथ इस अभ्यास का दायरा और जटिलता बढ़ी है। इसमें अब ऐसी गतिविधियां भी शामिल हैं, जिनके तहत दोनों देशों की नौसेनाओं को विभिन्न समुद्री परिस्थितियों में समन्वय के साथ काम करना होता है। ब्रिटेन के बाद ग्रीस में आईएनएस त्रिशूल की मौजूदगी भारतीय नौसेना की अंतरराष्ट्रीय समुद्री गतिविधियों और विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है।

  • रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक का शक्ति प्रदर्शन, राहुल गांधी की अपील से गरमाई दिल्ली, SIR पर चुनाव आयोग से आर-पार

    रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक का शक्ति प्रदर्शन, राहुल गांधी की अपील से गरमाई दिल्ली, SIR पर चुनाव आयोग से आर-पार


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की महारैली आयोजित की जा रही है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित इस कार्यक्रम में 19 विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। विपक्ष ने इसे ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान का हिस्सा बताते हुए लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई करार दिया है।

    रैली से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी नेताओं की बैठक हुई। इसमें प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। इसके बाद सभी प्रमुख नेताओं के मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से रामलीला मैदान तक पैदल मार्च करने की योजना बनाई गई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोगों से इस मार्च और महारैली में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग कनॉट प्लेस पहुंचकर उनके साथ पैदल चलें या सीधे रामलीला मैदान आएं, लेकिन कार्यक्रम में जरूर शामिल हों।

    रैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने का दावा विपक्षी नेताओं की ओर से किया गया है। वहीं, दिल्ली पुलिस का अनुमान लगभग 50 हजार लोगों के आने का है। मंच, कुर्सियों और सुरक्षा व्यवस्था के कारण मैदान में 30 से 40 हजार लोगों के बैठने की क्षमता रहने की बात सामने आई है। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने पूरे क्षेत्र को अलग-अलग जोन में बांटकर निगरानी की व्यवस्था की है।

    कांग्रेस और सहयोगी दलों के नेताओं ने रैली को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा आंदोलन बताया। सांसद सुखदेव सिंह भगत ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं और उनके आने से होटल, दुकान तथा खानपान से जुड़े स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिल सकता है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने बताया कि निर्धारित समय से पहले ही सुबह 9 बजे से कार्यकर्ताओं का मैदान में पहुंचना शुरू हो गया था। प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल ने भी तैयारियों का जायजा लिया।

    टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति के हित के लिए नहीं, बल्कि युवाओं, महिलाओं, किसानों और मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष को जनता के मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलने पर नेताओं को सड़क पर उतरना पड़ रहा है। सीपीआई सांसद पी. संतोष ने भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का दावा किया।

    दूसरी ओर, भाजपा और एनडीए नेताओं ने रैली के आयोजन तथा विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए। भाजपा की दिल्ली इकाई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्टर जारी कर INDIA ब्लॉक की रैली को निशाना बनाया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना विपक्ष की आदत बन गई है। केशव प्रसाद मौर्य ने राहुल गांधी के नेतृत्व और रैली पर टिप्पणी करते हुए इसे लोकतंत्र तथा संविधान का मजाक बताया।

    बिहार में जेडीयू महासचिव श्याम रजक ने 10 लाख लोगों के जुटने के दावे को खोखला बताया। पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन ने विपक्ष पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी रैली के मुद्दों तथा समय पर सवाल उठाए। पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने विपक्ष पर व्यापारियों को परेशान करने और लोगों को रैली में लाने के लिए पैसे देने का आरोप लगाया।

    रैली के समय को लेकर व्यापारियों की चिंताओं पर भी राजनीतिक बयानबाजी हुई। शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता कृष्ण हेगड़े ने कहा कि त्योहारों के दौरान राजनीतिक आयोजनों से कारोबार प्रभावित हो सकता है। उत्तर प्रदेश के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने भी आरोप लगाया कि रैली से व्यापारियों की आजीविका पर असर पड़ सकता है। इस तरह SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर आयोजित महारैली में विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन के साथ भाजपा और एनडीए के विरोधी बयान भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहे।

  • दिल्ली में आज से पुराने वाहनों की एंट्री बंद, नियम तोड़ने पर लगेगा 20 हजार रुपये तक जुर्माना…

    दिल्ली में आज से पुराने वाहनों की एंट्री बंद, नियम तोड़ने पर लगेगा 20 हजार रुपये तक जुर्माना…


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली-NCR में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वाहनों की आवाजाही पर सख्ती बढ़ा दी गई है। 1 नवंबर 2026 से राजधानी में दूसरे राज्यों में पंजीकृत BS-6 से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू किया गया है। इस फैसले का सीधा असर नोएडा और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जाने वाले वाहन चालकों पर भी पड़ेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन चालकों को 20 हजार रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

    प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए गौतमबुद्धनगर ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। इसमें लोगों से दिल्ली जाने से पहले अपने वाहन का उत्सर्जन मानक जांचने और लागू प्रतिबंधों की जानकारी लेने की अपील की गई है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, दूसरे राज्यों में पंजीकृत BS-6 से कम मानक वाले वाहनों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। ऐसे में नोएडा और ग्रेटर नोएडा से राजधानी जाने वाले लोगों को अपनी गाड़ी के दस्तावेज और श्रेणी की जांच करना जरूरी होगा।

    नए प्रतिबंधों के तहत यात्री बसों और भारी माल ढोने वाले ट्रकों की आवाजाही पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। वहीं, BS-6 मानक वाले वाहनों के साथ CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को निर्धारित शर्तों के अनुसार दिल्ली में प्रवेश की अनुमति रहेगी। इससे पहले वाहन चालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी गाड़ी संबंधित नियमों के दायरे में आती है या नहीं।

    पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों को लेकर भी सख्ती बरती जा रही है। जारी एडवाइजरी के मुताबिक, 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध का पालन कराया जाएगा। यह व्यवस्था ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत लागू प्रतिबंधों से जुड़ी है। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को जब्त किया जा सकता है और उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।

    BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल श्रेणी के ऐसे पुराने वाहन, जो दूसरे राज्यों में पंजीकृत हैं, यदि प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली की सड़कों पर चलते पाए जाते हैं तो उन पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसलिए वाहन चालकों को केवल अपनी गाड़ी की उम्र ही नहीं, बल्कि उसका BS उत्सर्जन मानक भी जांचना होगा। दोनों के आधार पर लागू नियम अलग-अलग हो सकते हैं।

    दिल्ली से होकर दूसरे राज्यों की ओर जाने वाले वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक मार्ग भी सुझाए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे या यमुना एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करके वाहन चालक जीरो पॉइंट, परी चौक, कस्बा कासना और सिरसा होते हुए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) तक पहुंच सकते हैं। इसके बाद वहां से अपने गंतव्य की ओर रवाना हो सकते हैं। इस मार्ग से दिल्ली के प्रतिबंधित रास्तों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अनावश्यक रूप से निजी वाहनों का इस्तेमाल नहीं करने और संभव होने पर सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील की है। इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव और प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। यातायात संबंधी जानकारी या परेशानी के लिए लोग हेल्पलाइन नंबर 9971009001 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा व्हाट्सऐप नंबर 7065100100 और आधिकारिक एक्स हैंडल @noidatraffic के जरिए भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

    ऐसे में नोएडा और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जाने की योजना बना रहे लोगों के लिए जरूरी है कि वे घर से निकलने से पहले अपने वाहन का BS मानक, पंजीकरण और लागू प्रतिबंधों की जानकारी जरूर जांच लें। लापरवाही की स्थिति में जुर्माने के साथ वाहन जब्त होने की कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।

  • दीपावली के बाद तमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला, 9 नवंबर को छुट्टी और कोयंबेडु मंडी भी रहेगी बंद

    दीपावली के बाद तमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला, 9 नवंबर को छुट्टी और कोयंबेडु मंडी भी रहेगी बंद

    नई दिल्ली ।तमिलनाडु सरकार ने दीपावली के बाद राज्य के लोगों को राहत देते हुए 9 नवंबर को अतिरिक्त सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। यह छुट्टी सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में लागू होगी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य त्योहार मनाने के लिए अपने गृहनगर जाने वाले लोगों को वापस लौटने के लिए अतिरिक्त समय देना है। इसी दिन चेन्नई की प्रमुख कोयंबेडु सब्जी मंडी भी बंद रहेगी। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों, विद्यार्थियों और सब्जी कारोबार से जुड़े लोगों को अपनी योजनाएं पहले से तय करनी होंगी।

    इस वर्ष दीपावली 8 नवंबर को रविवार के दिन मनाई जाएगी। त्योहार के अगले दिन सोमवार, 9 नवंबर को सरकारी छुट्टी मिलने से लोगों को परिवार के साथ समय बिताने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। खासकर वे लोग जो नौकरी, पढ़ाई या अन्य कारणों से दूसरे शहरों में रहते हैं और दीपावली मनाने के लिए अपने पैतृक शहर या गांव जाते हैं, उन्हें वापसी की तैयारी के लिए एक दिन और मिल सकेगा।

    सरकार के आदेश के मुताबिक, 9 नवंबर का अवकाश पूरे तमिलनाडु में लागू रहेगा। इसके दायरे में सभी सरकारी कार्यालय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। इसका मतलब है कि इन संस्थानों में सोमवार को नियमित कामकाज और शैक्षणिक गतिविधियां संचालित नहीं होंगी। छुट्टी का लाभ सरकारी कर्मचारियों के साथ विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को भी मिलेगा।

    हालांकि, अतिरिक्त अवकाश के कारण सरकारी कामकाज के निर्धारित दिनों में बदलाव किया गया है। 9 नवंबर की छुट्टी की भरपाई के लिए 28 नवंबर को कार्यदिवस घोषित किया गया है। यह तारीख शनिवार को पड़ रही है। इसलिए संबंधित सरकारी कार्यालयों और संस्थानों को इस संशोधित कार्यक्रम के अनुसार काम करना होगा। निर्धारित व्यवस्था के तहत 9 नवंबर को बंद रहने वाले संस्थानों में 28 नवंबर को सामान्य कामकाज किया जाएगा।

    इस फैसले से त्योहार के बाद एक साथ यात्रा करने वाले परिवारों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है। रविवार को दीपावली मनाने के तुरंत बाद सोमवार को काम या पढ़ाई के लिए लौटने की बाध्यता नहीं रहेगी। लोग अपनी यात्रा को सुविधानुसार आगे बढ़ा सकेंगे। सरकार ने अवकाश के साथ उसकी भरपाई की तारीख भी तय कर दी है, जिससे संस्थानों के कामकाजी कार्यक्रम में संतुलन बनाए रखा जा सके।

    दूसरी ओर, चेन्नई स्थित कोयंबेडु सब्जी मंडी भी 9 नवंबर को एक दिन के लिए बंद रहेगी। यह फैसला बाजार से जुड़े व्यापारी संगठनों की बैठक में लिया गया है। एकीकृत बाजार संघ महासंघ के अध्यक्ष जीटी राजशेखरन की अध्यक्षता में हुई सलाहकार बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।

    बैठक में तय किया गया कि दीपावली तक बाजार की सभी सब्जी दुकानें सामान्य रूप से खुली रहेंगी। इससे त्योहार से पहले ग्राहकों को आवश्यक सब्जियां खरीदने और व्यापारियों को अपना कारोबार संचालित करने का अवसर मिलेगा। बाजार में खरीदारी करने वाले लोगों को 9 नवंबर की बंदी को ध्यान में रखते हुए अपनी जरूरत का सामान पहले ही खरीदना होगा।

    व्यापारी संघ के निर्णय के अनुसार, कोयंबेडु सब्जी मंडी मंगलवार, 10 नवंबर से दोबारा सामान्य रूप से खुल जाएगी। यह बंदी केवल दीपावली के अगले दिन के लिए निर्धारित की गई है। इस तरह 9 नवंबर को तमिलनाडु में सरकारी संस्थानों के साथ चेन्नई की प्रमुख सब्जी मंडी भी बंद रहेगी, जबकि अगले दिन से बाजार का कारोबार नियमित रूप से शुरू हो जाएगा।

  • तमिलनाडु दिवस पर सीएम विजय की अपील, तमिल भाषा और सांस्कृतिक विरासत बचाने के लिए दिया खास संदेश..

    तमिलनाडु दिवस पर सीएम विजय की अपील, तमिल भाषा और सांस्कृतिक विरासत बचाने के लिए दिया खास संदेश..

    नई दिल्ली ।चेन्नई। तमिलनाडु दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के नागरिकों से तमिल भाषा की रक्षा करने और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की अपील की। रविवार, 1 नवंबर को जारी अपने संदेश में उन्होंने तमिलनाडु की ऐतिहासिक पहचान, मातृभाषा के महत्व और राज्य के गठन के लिए हुए संघर्षों को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिल भाषा और संस्कृति का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक गौरव को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री विजय ने अपने संदेश में उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने तमिल भाषा की रक्षा और तमिल भाषी क्षेत्रों को एक राज्य के अंतर्गत लाने के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि इन लोगों के प्रयास और बलिदान तमिल समाज की एकता तथा साझा पहचान के लिए हमेशा प्रेरणा बने रहेंगे। उनके संघर्षों ने तमिलनाडु के गठन और उसकी विशिष्ट पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उन्होंने तमिलनाडु दिवस को केवल राज्य स्थापना की वर्षगांठ तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे राज्य के इतिहास, भाषा और सांस्कृतिक विरासत को याद करने का अवसर भी माना। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह दिन उन ऐतिहासिक प्रयासों को सम्मान देने का मौका है, जिनके माध्यम से तमिल भाषी लोगों की पहचान को एकजुट स्वरूप मिला।

    विजय ने नागरिकों से तमिल थाई यानी मातृ तमिल भाषा के प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी समाज के इतिहास, संस्कृति और सामूहिक पहचान से गहराई से जुड़ी होती है। इसलिए तमिल भाषा की रक्षा करना अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने के समान है। उन्होंने लोगों से भाषा से जुड़ी परंपराओं को निरंतर आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने उन शहीदों और संघर्षकर्ताओं के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने तमिल भाषी क्षेत्रों को एकजुट करने तथा मातृभाषा के सम्मान के लिए प्रयास किए। उन्होंने कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूक करता रहेगा। ऐसे ऐतिहासिक प्रयासों को याद रखना समाज में एकता और अपनत्व की भावना को मजबूत करने के लिए जरूरी है।

    तमिलनाडु दिवस का संबंध राज्यों के भाषाई आधार पर पुनर्गठन और राज्य के गठन की ऐतिहासिक प्रक्रिया से है। हर साल 1 नवंबर को यह दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर राज्य के गठन में योगदान देने वाले लोगों और उन संघर्षों को याद किया जाता है, जिन्होंने तमिल भाषी क्षेत्रों को एक अलग पहचान दिलाने में भूमिका निभाई।

    मुख्यमंत्री विजय ने अपने शुभकामना संदेश में इस ऐतिहासिक अवसर को तमिलनाडु की विशिष्ट पहचान और गौरव से जोड़ते हुए नागरिकों से अपनी विरासत के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। उन्होंने भाषा, संस्कृति और इतिहास के संरक्षण को राज्य की पहचान बनाए रखने का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनका संदेश तमिलनाडु दिवस के ऐतिहासिक महत्व के साथ मातृभाषा और सांस्कृतिक परंपराओं को सम्मान देने पर केंद्रित रहा।

  • जनगणना 2027 : दूसरे चरण में होगी जनसंख्या की गणना… जानिए कब से शुरू होगी प्रक्रिया?

    जनगणना 2027 : दूसरे चरण में होगी जनसंख्या की गणना… जानिए कब से शुरू होगी प्रक्रिया?


    नई दिल्ली।
    आपके घर भी कुछ महीने पहले जनगणना (Census 2027) के अधिकारी आए होंगे और मकान (House) से लेकर पानी, बिजली और इंटरनेट (Internet) तक के बारे में सवाल पूछे होंगे। अब सरकार ने जनगणना 2027 (Census 2027) के अगले चरण (Second Phase) की तारीखों का एलान कर दिया है।


    जनगणना 2027 का पूरा शेड्यूल क्या है?

    जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास जनगणना का काम अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच पूरा किया गया। अब दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना की प्रक्रिया होगी।

    गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, ज्यादातर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जनसंख्या गणना 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक होगी। इसके बाद 1 से 5 मार्च 2027 तक पुनरीक्षण का दौर चलेगा। इससे पहले 10 से 24 जनवरी 2027 तक लोगों को ऑनलाइन स्व-गणना का विकल्प मिलेगा। हालांकि, कुछ राज्यों और क्षेत्रों में जनगणना का कार्यक्रम अलग रखा गया है।


    अगर आप इन राज्यों में रहते हैं तो जनवरी-फरवरी में नहीं होगी जनगणना

    मणिपुर, गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड के साथ ही लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के बर्फीले क्षेत्रों में सामान्य कार्यक्रम के अनुसार जनगणना नहीं होगी। मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण हालात सामान्य नहीं होने की वजह से जनगणना अगली अधिसूचना तक टाल दी गई है। वहीं, गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने होने है, इसे देखते हुए इन राज्यों में अलग कार्यक्रम रखा गया है।

    इसके अलावा लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बर्फीले इलाकों में भी अलग समय पर जनगणना होगी। इनमें लाहौल-स्पीति और किन्नौर के ऊंचाई वाले इलाके शामिल हैं। यहां सर्दियों में बर्फबारी के कारण रास्ते बंद हो जाते हैं, जिससे कर्मचारियों को घर-घर पहुंचने में परेशानी होती है। इनमें से उत्तर प्रदेश के लिए जनगणना का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। बाकी राज्यों और क्षेत्रों की तारीखों के लिए अलग अधिसूचना का इंतजार है।


    उत्तर प्रदेश में कब आएंगे जनगणना अधिकारी?

    अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं तो आपके यहां जनगणना का दूसरा चरण दिसंबर 2026 में शुरू होगा। प्रदेश में 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक कर्मचारी घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों की जानकारी जुटाएंगे। इससे पहले 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक ऑनलाइन स्व-गणना का विकल्प मिलेगा। इसके बाद गणनाकर्मी घर पहुंचकर ऑनलाइन भरी गई जानकारी का सत्यापन करेंगे। प्रदेश में पुनरीक्षण दौर 5 से 9 जनवरी 2027 तक चलेगा।


    क्या घर बैठे खुद भर सकते हैं जनगणना का फॉर्म?

    हां, इस बार सरकार ने लोगों को स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा दी है। इसके जरिए आप घर बैठे अपने मकान और परिवार से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए आपको गणनाकर्मी के घर आने का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी।


    ऑनलाइन स्व-गणना फॉर्म कैसे भरें? समझिए पूरा तरीका
    स्टेप 1: पोर्टल खोलें

    सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउजर में Census India Self Enumeration Portal खोलें। इसके अलावा जणगणना पोर्टल पर जाकर सेल्फ एन्यूमरेशन के विकल्प पर क्लिक कर सकते हैं।


    स्टेप 2: लॉग इन करें

    पोर्टल पर अपना राज्य या केंद्रशासित प्रदेश चुनें। इसके बाद स्क्रीन पर दिया गया कैप्चा भरें। अब परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें। आपके मोबाइल पर एक ओटीपी (OTP) आएगा। इसे भरकर अपना सत्यापन पूरा करें।


    स्टेप 3: घर की लोकेशन दर्ज करें

    लॉग इन करने के बाद जिला, गांव या शहर और पिनकोड जैसी जानकारी भरें। इसके बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाले नक्शे यानी मैप पर अपने घर की सही लोकेशन मार्क करें।


    स्टेप 4: पूछे गए सवालों के जवाब भरें

    पहले चरण में भी आपके घर से संबंधित 33 सवाल इसमें दिए गए थे। अब फिर से नए 40 सवाल इसमें दिए जाएंगे।

    स्टेप 5: जानकारी चेक करके सबमिट करें
    फॉर्म भरने के बाद Preview विकल्प पर क्लिक करके सभी जानकारियां जांच लें। अगर कोई गलती है तो उसे ठीक करें। इसके बाद Final Submit पर क्लिक करें। फॉर्म जमा होने के बाद आपको 11 अंकों की एक विशेष पहचान संख्या मिलेगी। इसे SE ID कहा जाता है।


    SE ID मिलने के बाद क्या करना होगा?

    फॉर्म जमा करने के बाद मिली 11 अंकों की SE ID को सुरक्षित रखें। इसका स्क्रीनशॉट ले सकते हैं या प्रिंट निकालकर रख सकते हैं। जब जनगणना कर्मचारी आपके घर आएंगे तो उन्हें यह आईडी दिखानी होगी। इसके आधार पर वे ऑनलाइन भरी गई जानकारी का सत्यापन करेंगे।


    ऑनलाइन फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें ध्यान

    – एक मोबाइल नंबर से केवल एक घर का स्व-गणना फॉर्म भरा जा सकता है।
    – सभी जानकारियां सही और सच्ची भरें।
    – फॉर्म सबमिट करने से पहले सभी जवाब दोबारा जांच लें।
    – स्व-गणना करना वैकल्पिक है। आप चाहें तो गणनाकर्मी के घर आने पर भी जानकारी दे सकते हैं।


    दूसरे चरण में क्या-क्या सवाल पूछे जाएंगे?

    पहले चरण में मकान और सुविधाओं से जुड़ी जानकारी ली गई थी, जबकि दूसरे चरण में परिवार के प्रत्येक सदस्य की व्यक्तिगत जानकारी जुटाई जाएगी। इस बार कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे, जबकि 2011 की जनगणना में 29 सवाल पूछे गए थे। यानी इस बार 11 नए सवाल जोड़े गए हैं। इन सवालों में जाति, धर्म, माता-पिता और पति या पत्नी का नाम, घोषित राष्ट्रीयता और स्थायी पता जैसी जानकारियां शामिल हैं। इसके अलावा डिजिटल साक्षरता, शिक्षा का स्तर और परिवार के कुल बैंक खातों की संख्या के बारे में भी पूछा जाएगा। मोबाइल नंबर, आधार और वोटर आईडी नंबर, कोविड-19 टीकाकरण की जगह, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता से जुड़े सवाल भी इस चरण का हिस्सा होंगे।

  • जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने किया गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी

    जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने किया गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी


    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शनिवार शाम रामपुर जेल से रिहा होते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ईडी की टीम उन्हें अपने साथ ले गई। अब एजेंसी रविवार सुबह करीब 10 बजे आजम खान को कोर्ट में पेश कर कस्टडी की मांग करेगी।

    दरअसल, ईडी ने आजम खान के खिलाफ 14 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया था। दूसरी ओर, हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई की उम्मीद थी। इसी बीच ईडी की टीम सीआरपीएफ जवानों के साथ रामपुर जेल के बाहर पहुंच गई। जेल से बाहर आते ही टीम ने आजम खान को हिरासत में ले लिया और बाद में गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। अब्दुल्ला आजम की रिहाई को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    दो पैन कार्ड मामले में हाईकोर्ट से मिली थी राहत

    आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने दो पैन कार्ड मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों ने क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल कर दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहा करने की मांग की थी।

    15 अक्टूबर को मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद जस्टिस समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों की जमानत याचिका मंजूर करते हुए सजा निलंबित कर दी। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग अदालत ने खारिज कर दी थी।

    रिहाई के बाद आजम खान ने उठाए सवाल

    रामपुर जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब कहने के लिए क्या बचा है और वह क्या कह सकते हैं। उनके मुताबिक, कानून का अस्तित्व ही खत्म हो गया है।

    आजम खान ने सवाल किया, ‘क्या मुस्लिम होने की यही सजा है?’ उन्होंने कहा कि उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि एक मुस्लिम ने यूनिवर्सिटी बनाई। उन्होंने बच्चों के लिए स्कूल बनाए और क्या यही उनका अपराध है?

    ED ने 1,170 करोड़ की संपत्तियां अटैच करने का किया था दावा

    प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को बताया था कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत रामपुर स्थित आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और भवनों को अटैच किया है। एजेंसी के मुताबिक, इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये है।

    ईडी का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित सरकारी फंड का इस्तेमाल निजी यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि आजम खान ने उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री और जल निगम में कैबिनेट मंत्री रहते हुए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कथित अनियमितताओं के लिए किया।

    वहीं, रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने जुलाई में यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी की ओर से अपील दायर की गई थी। ईडी ने इस मामले में अगस्त में छापेमारी कर आजम खान से पूछताछ भी की थी।

    अखिलेश यादव बोले- वक्त बदलता है तो तख्त भी बदल जाता है

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, ‘आज के हुक्मरानों को याद रहे, जब वक्त बदल जाता है तो तख्त बदल जाता है।’

    अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान के खिलाफ मुकदमों की जो साजिश की जा रही है, उसे पूरा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया देख रही है। उन्होंने एक उम्रदराज व्यक्ति को बार-बार मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने को बेहद कायराना हरकत बताया।

    सपा प्रमुख ने कहा कि सत्ता जिस गलत रवायत को बढ़ावा दे रही है, हवा बदलने पर उसे खुद भी इसका सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब नाइंसाफी हद से गुजर जाती है तो वह जुल्म करने वालों के लिए ही कहर बन जाती है। अखिलेश ने इस पूरी कार्रवाई को बेहद निंदनीय बताया।

    इससे पहले अखिलेश यादव ने जेल में आजम खान से मुलाकात की थी। उन्होंने बीजेपी सरकार पर आजम खान के खिलाफ राजनीतिक बदले की कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। अखिलेश ने यह भी दावा किया था कि उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए हैं।

  • राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम मोदी ने सरदार पटेल को किया नमन, एकता नगर को दी 400 करोड़ रुपये की सौगात

    राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम मोदी ने सरदार पटेल को किया नमन, एकता नगर को दी 400 करोड़ रुपये की सौगात

    नई दिल्ली । देश के पहले गृहमंत्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर गुजरात के नर्मदा जिले स्थित एकता नगर (केवड़िया) में मुख्य राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां पहुंचकर दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित की और सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने देशवासियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। कार्यक्रम के साथ ही प्रधानमंत्री ने एकता नगर के विकास को गति देने के लिए 400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एकता नगर में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने से जुड़ी योजनाओं की शुरुआत की। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। विकास योजनाओं में स्मार्ट परिवहन संपर्क व्यवस्था, हरित ऊर्जा से जुड़ी पहल, पर्यटकों की आवाजाही आसान बनाने के लिए नए वॉकवे और सुरक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण शामिल है। इसके अलावा स्थानीय जनजातीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने से जुड़ी योजनाएं भी इन परियोजनाओं का हिस्सा हैं।

    प्रधानमंत्री ने एकता नगर के विकास और उसकी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यह स्थान अब केवल एक स्मारक तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता और पर्यावरण के अनुकूल विकास के वैश्विक मॉडल के रूप में आगे बढ़ रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी और सुविधाओं को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

    विकास परियोजनाओं के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री ने एकता नगर में तैयार किए गए रेन फॉरेस्ट और वामन वृक्ष वाटिका का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद जैव विविधता, दुर्लभ वनस्पतियों और विभिन्न पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए किए गए इंतजामों की जानकारी ली। अधिकारियों ने उन्हें इन हरित क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रबंधों के बारे में बताया।

    नर्मदा नदी के साधु बेट द्वीप पर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित स्मारक है। इसकी मुख्य प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर यानी 597 फीट है। आधार सहित इसकी कुल ऊंचाई लगभग 240 मीटर बताई जाती है। यह अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग दोगुनी ऊंची है। प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी. सुतार ने इस प्रतिमा को डिजाइन किया था, जबकि इसका निर्माण लार्सन एंड टुब्रो कंपनी ने किया। निर्माण कार्य 33 महीने में पूरा किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2018 को सरदार पटेल की 143वीं जयंती के अवसर पर इस स्मारक को राष्ट्र को समर्पित किया था।

    राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह के दौरान भव्य परेड का भी आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री ने परेड की सलामी ली। इसमें सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और गुजरात पुलिस के जवानों ने हिस्सा लिया। सुरक्षा बलों के दस्तों ने अनुशासन और शौर्य का प्रदर्शन किया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक नृत्यों और डेयरडेविल्स जवानों के हैरतअंगेज करतबों ने समारोह को विशेष बनाया। कार्यक्रम के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया।

    समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से सरदार पटेल के आदर्शों पर चलने और देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सरदार पटेल ने 562 से अधिक देसी रियासतों का विलय कर भारत को एकजुट करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री ने इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए देश के 140 करोड़ नागरिकों से संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करने का संकल्प दोहराने की अपील की।