तिल और गुड़ का दान
कपड़ों का दान
घी का दान
अन्न दान का महत्व
तांबे के पात्र
अन्य चीजें
किन चीजों का दान ना करें

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सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?

इस महासंयोग का सबसे शक्तिशाली प्रभाव मेष राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा। मेष राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है, जहाँ आर्थिक तंगी दूर होगी और धन की आवक के नए रास्ते खुलेंगे। निवेश की पुरानी योजनाएं अब फल देने लगेंगी और जो लोग लंबे समय से बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं, उनके लिए रोजगार के बेहतरीन अवसर पैदा होंगे। इसी तरह कन्या राशि के जातकों के लिए भी यह महाशिवरात्रि खुशियों की सौगात लेकर आएगी। पैतृक संपत्ति के अटके हुए मामले सुलझ सकते हैं और नया वाहन या मकान खरीदने का सपना सच हो सकता है। इस दौरान किसी प्रभावशाली व्यक्तित्व से आपकी मुलाकात करियर की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है।
मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए भी यह समय किसी बड़े टर्निंग पॉइंट की तरह होगा। मकर राशि वालों को कोर्ट-कचहरी के पुराने विवादों से मुक्ति मिलेगी और कर्ज का बोझ कम होने से मानसिक शांति का अनुभव होगा। वहीं, चूंकि यह चतुर्ग्रही योग स्वयं कुंभ राशि में ही बन रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए लाभ की संभावनाएं सबसे अधिक हैं। कुंभ राशि के जो जातक नौकरी छोड़कर स्वयं का स्टार्टअप या कारोबार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय सबसे अनुकूल है। सोने-चांदी में निवेश और संतान पक्ष से मिलने वाली खुशखबरी उनके उत्साह को दोगुना कर देगी। कुल मिलाकर, 15 फरवरी 2026 की यह महाशिवरात्रि आर्थिक सामाजिक और व्यक्तिगत विकास की दृष्टि से इन चार राशियों के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होने वाली है।

महाशिवरात्रि के दिन न करें ये काम!
बेलपत्र चढ़ाते समय रखें ध्यान
खान-पान और व्यवहार की सावधानियां
शिवलिंग की आधी परिक्रमा न करें?

आज कृष्ण प्रतिपदा तिथि रात्रि 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। दिन के प्रारंभ में आयुष्मान योग प्रभावी रहेगा जो स्वास्थ्य और दीर्घायु से जुड़ा शुभ योग माना जाता है। इसके बाद सौभाग्य योग का संयोग बनेगा जो सफलता सौभाग्य और सकारात्मक परिणामों का संकेत देता है। करण के रूप में दिन के पहले भाग में बालव और बाद में कौलव करण प्रभाव में रहेगा।
ग्रहों की स्थिति की बात करें तो आज सूर्य मकर राशि में स्थित हैं। इससे कार्यक्षेत्र में अनुशासन जिम्मेदारी और स्थायित्व का प्रभाव देखने को मिल सकता है। वहीं चंद्रमा पूरे दिन कर्क राशि में संचरण करेंगे और रात्रि 10 बजकर 47 मिनट तक इसी राशि में रहेंगे। चंद्रमा की यह स्थिति भावनात्मक संतुलन पारिवारिक विषयों और घरेलू मामलों को प्राथमिकता देती है।
आज सूर्य का उदय प्रातः 7 बजकर 9 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 1 मिनट पर होगा। चंद्रोदय सायं 6 बजकर 33 मिनट पर और चंद्रास्त प्रातः 7 बजकर 27 मिनट पर होगा।नक्षत्र की बात करें तो आज चंद्रमा आश्लेषा नक्षत्र में स्थित रहेंगे। यह नक्षत्र तीव्र बुद्धि रणनीतिक सोच और गूढ़ विषयों से जुड़ा माना जाता है। इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में सावधानी और विवेक की आवश्यकता होती है। आश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध देव हैं जबकि इसके अधिष्ठाता देवता नाग माने गए हैं।
आज के शुभ मुहूर्तों की बात करें तो धार्मिक कार्य पूजा पाठ ध्यान और जप के लिए दोपहर और रात्रि का समय अनुकूल माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत काल रात्रि 9 बजकर 16 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इन समयों में किए गए कार्यों से सकारात्मक फल मिलने की मान्यता है।
अशुभ काल में राहुकाल प्रातः 8 बजकर 30 मिनट से 9 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड प्रातः 11 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक और गुलिकाल दोपहर 1 बजकर 56 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। इस दौरान नए कार्य शुरू करने से बचना उचित माना गया है।दिन के लिए विशेष सुझाव यह है कि सोमवार के कारण शिवलिंग पर जल अर्पित करना लाभकारी रहेगा। मन की शांति के लिए ध्यान जप और मौन साधना उपयुक्त रहेगी। हल्का सात्विक भोजन और सकारात्मक सोच अपनाने से दिन और भी शुभ बन सकता है।

शास्त्रों के अनुसार सोमवार को शिवलिंग पर जल दूध या गंगाजल अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है पूजा के दौरान सफेद वस्त्र धारण करना मन को शांत रखना और शिव मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है संध्या समय दीपक प्रज्ज्वलित करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है
सोमवार को प्रातः शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का अभिषेक करने से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होने की धार्मिक मान्यता है जल के साथ दूध शहद घी या दही से अभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैंभगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है तीन पत्तियों वाला बेलपत्र सफेद पुष्प अक्षत और धतूरा अर्पित करने से सुख समृद्धि और पारिवारिक शांति में वृद्धि मानी जाती है यह उपाय विशेष रूप से गृह क्लेश और मानसिक अशांति को दूर करने के लिए किया जाता है
सोमवार की संध्या शिव मंदिर में देसी घी का दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है और आर्थिक स्थिति में सुधार के योग बनते हैं इसके साथ ही ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करने से भय तनाव और रोगों से राहत मिलने की धार्मिक मान्यता है इस दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है दूध दही चावल चीनी या रुद्राक्ष का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है
यदि नौकरी या कार्यक्षेत्र में लगातार बाधाएं आ रही हों तो शिवलिंग पर शहद अर्पित करना लाभकारी माना जाता है वहीं दांपत्य जीवन में मधुरता और वैवाहिक सुख के लिए शिव पार्वती की संयुक्त पूजा कर ॐ गौरी शंकराय नमः मंत्र का जप किया जाता हैधार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार की शिव आराधना व्यक्ति को धैर्य आत्मबल और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है नियमित रूप से की गई यह साधना जीवन में संतुलन और स्थिरता लाने में सहायक मानी जाती है

ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक 23 फरवरी को मंगल का गोचर कुंभ राशि में होगा जहां पहले से ही राहु विराजमान हैं इन दोनों ग्रहों की युति सामान्य तौर पर अशांति टकराव और गलत निर्णयों को जन्म देती है ऐसे में यह समय कई राशियों के लिए धैर्य और संयम की परीक्षा लेने वाला साबित हो सकता है
तुला राशि वालों के लिए यह समय मानसिक दबाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ा सकता है अनावश्यक चिंता नींद की कमी और निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बनी रह सकती है पारिवारिक रिश्तों में गलतफहमी उत्पन्न हो सकती है व्यापार या निवेश से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी नुकसान का कारण बन सकती है इसलिए सोच समझकर कदम उठाना जरूरी होगा
कुंभ राशि के जातकों पर इस योग का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक बताया जा रहा है क्योंकि यह योग इसी राशि में बन रहा है आर्थिक मामलों में लापरवाही भारी पड़ सकती है लेनदेन दस्तावेजों और नए समझौतों में विशेष सावधानी की जरूरत होगी घर और कार्यस्थल पर छोटी छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ सकता है इसलिए संयमित व्यवहार अपनाना लाभकारी रहेगाज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसे अशुभ योग के दौरान घबराने की बजाय संतुलित दिनचर्या अपनाना सबसे बेहतर उपाय माना जाता है नियमित पूजा पाठ ध्यान और सकारात्मक सोच से मानसिक स्थिरता बनी रहती है साथ ही इस दौरान जोखिम भरे फैसलों अनावश्यक बहस और क्रोध से दूरी बनाकर रखना चाहिए
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रह योग भविष्य के प्रति चेतावनी देते हैं न कि निश्चित संकट समय रहते सतर्कता आत्मनियंत्रण और समझदारी अपनाकर नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है फरवरी में बनने वाला यह अंगारक योग भी यही संदेश देता है कि धैर्य और विवेक से परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ा जा सकता है

महाशिवरात्रि 2026 पर बन रहे हैं ये 2 शुभ संयोग
महाशिवरात्रि का महत्व

नई दिल्ली। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘विजया एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी साधक को कठिन परिस्थितियों, शत्रुओं और मानसिक बाधाओं पर विजय दिलाने वाली मानी गई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन भगवान विष्णु की पूरी श्रद्धा के साथ उपासना करता है, उसे कार्यों में सिद्धि और अटके हुए कामों में सफलता प्राप्त होती है।
विजया एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीराम से जुड़ा है। कहा जाता है कि जब प्रभु श्रीराम माता सीता की खोज में समुद्र तट पर पहुँचे और लंका पर चढ़ाई की चुनौती सामने थी, तब मुनि वकदालभ्य के निर्देश पर उन्होंने अपनी सेना सहित विजया एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के पुण्य प्रताप से ही उन्हें समुद्र पार करने और रावण पर विजय पाने में सफलता मिली। तभी से इसे ‘जीत’ का आशीर्वाद देने वाली एकादशी कहा जाता है।
विजया एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष एकादशी तिथि दो दिनों तक व्याप्त रहेगी, लेकिन उदयातिथि की प्रधानता के कारण व्रत 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026, दोपहर 12:22 बजे।
एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, दोपहर 02:25 बजे।
व्रत की तारीख: 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)।
पूजा के विशेष मुहूर्त:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:18 से 06:10 बजे तक।
अमृत काल (सर्वोत्तम): सुबह 09:08 से 10:54 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:11 बजे तक।
पारण का समय और नियम
एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब इसका पारण (व्रत खोलना) शुभ समय और विधि के साथ किया जाए। विजया एकादशी का पारण 14 फरवरी 2026 को होगा।
पारण समय: सुबह 07:00 बजे से 09:14 बजे तक।
विशेष सावधानी: चूंकि हरि वासर सुबह 08:20 बजे समाप्त हो रहा है, इसलिए पारण के लिए सुबह 08:21 से 09:14 के बीच का समय सबसे उत्तम रहेगा।
इस दिन साधक को पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करना चाहिए। व्रत के दौरान सात्विकता बनाए रखें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें।
विजया एकादशी 2026 का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। यह व्रत शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। भगवान राम ने भी लंका विजय के लिए यह व्रत किया था। 14 फरवरी की सुबह 07:00 से 09:14 के बीच व्रत का पारण करना शुभ रहेगा।