Category: Religious Astrology

  • घर का वास्तु सही रखना है तो जरूर करें ये काम, मुख्य द्वार से बेडरूम तक जानें जरूरी वास्तु टिप्स

    घर का वास्तु सही रखना है तो जरूर करें ये काम, मुख्य द्वार से बेडरूम तक जानें जरूरी वास्तु टिप्स


    नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं की स्थिति को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर का वातावरण व्यवस्थित और सकारात्मक रखने से परिवार में सुख शांति और समृद्धि का माहौल बना रह सकता है। यही वजह है कि लोग घर बनाते समय दिशा का ध्यान रखने के साथ फर्नीचर पूजा स्थान रसोई और मुख्य द्वार से जुड़े वास्तु नियमों को भी महत्व देते हैं। अगर आप भी अपने घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखना चाहते हैं तो कुछ आसान वास्तु उपायों को अपनाया जा सकता है।

    घर का मुख्य द्वार वास्तु की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता के अनुसार मुख्य द्वार साफ सुथरा और अच्छी तरह रोशन होना चाहिए। दरवाजे के आसपास कूड़ा कबाड़ या बेकार सामान जमा नहीं करना चाहिए। घर में प्रवेश करने वाला स्थान जितना साफ और व्यवस्थित रहेगा उतना ही अच्छा वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है। मुख्य द्वार पर सुंदर शुभ चिन्ह या धार्मिक प्रतीक लगाने की परंपरा भी कई घरों में देखने को मिलती है।

    घर के पूजा स्थान को भी वास्तु में विशेष महत्व दिया जाता है। पूजा घर को साफ और शांत जगह पर रखना बेहतर माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थान के आसपास अनावश्यक सामान जमा करने से बचना चाहिए। नियमित रूप से दीपक जलाने और पूजा स्थान की सफाई रखने से घर का वातावरण सकारात्मक बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    रसोई के लिए भी वास्तु में कुछ नियम बताए गए हैं। अग्नि तत्व से जुड़ी रसोई को घर की दक्षिण पूर्व दिशा से जोड़कर देखा जाता है। गैस चूल्हे और अन्य अग्नि से संबंधित उपकरणों को व्यवस्थित रखना चाहिए। रसोई में गंदगी या लंबे समय तक बर्तन जमा रखने से बचना बेहतर माना जाता है। भोजन बनाने और खाने की जगह साफ रखने से घर में स्वच्छता और सकारात्मकता बनी रहती है।

    बेडरूम में भी वास्तु के अनुसार संतुलित वातावरण रखना जरूरी माना जाता है। कमरे में जरूरत से ज्यादा सामान नहीं रखना चाहिए। बिस्तर के आसपास इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बेकार वस्तुओं का ढेर लगाने से बचें। कमरे में पर्याप्त रोशनी और हवा का आना जरूरी है। मान्यता के अनुसार सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। इससे मानसिक शांति और अच्छी नींद मिलने की धार्मिक मान्यता है।

    घर में टूटे हुए सामान को लंबे समय तक संभालकर रखना भी वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। टूटे शीशे बंद घड़ी खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान और बेकार वस्तुओं को घर से हटाते रहना चाहिए। इससे घर व्यवस्थित रहता है और अनावश्यक सामान जमा नहीं होता। विशेष रूप से प्रवेश द्वार के आसपास ऐसी वस्तुएं रखने से बचना चाहिए।

    घर में पौधे लगाने से भी वातावरण बेहतर बनाया जा सकता है। तुलसी के पौधे को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। इसे साफ जगह पर रखना और नियमित देखभाल करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा घर में ऐसे पौधे लगाए जा सकते हैं जिनसे कमरे में हरियाली और ताजगी बनी रहे। सूखे और मुरझाए पौधों को लंबे समय तक घर में नहीं रखना चाहिए।

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर में पानी के रिसाव को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नल से लगातार पानी टपकना या पाइपलाइन में लीकेज होना ठीक नहीं माना जाता। व्यावहारिक रूप से भी पानी की बर्बादी रोकने और घर की दीवारों को नुकसान से बचाने के लिए ऐसे रिसाव की जल्द मरम्मत करानी चाहिए।

    सबसे जरूरी बात यह है कि घर को साफ सुथरा और व्यवस्थित रखना किसी भी वास्तु उपाय का आधार माना जा सकता है। पर्याप्त रोशनी हवा स्वच्छता और सामान की सही व्यवस्था घर के वातावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम सम्मान और सकारात्मक व्यवहार भी सुखी घर के लिए उतना ही जरूरी है।

    कुल मिलाकर मुख्य द्वार की सफाई पूजा स्थान की उचित व्यवस्था रसोई और बेडरूम को व्यवस्थित रखना टूटे सामान को हटाना और घर में हरियाली बनाए रखना जैसे उपाय वास्तु परंपराओं में शुभ माने जाते हैं। हालांकि वास्तु से जुड़े लाभ धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय नहीं माना जाता। घर की सुरक्षा स्वच्छता और सुविधा से जुड़े फैसले हमेशा व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखकर ही लेने चाहिए।

  • सूर्य-गुरु का दुर्लभ संयोग बदल सकता है किस्मत का रुख, मेष सिंह और धनु राशि वालों को मिलेंगे बड़े लाभ के संकेत

    सूर्य-गुरु का दुर्लभ संयोग बदल सकता है किस्मत का रुख, मेष सिंह और धनु राशि वालों को मिलेंगे बड़े लाभ के संकेत


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के गोचर और उनके आपसी संबंधों को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी क्रम में 17 अगस्त 2026 को सूर्य देव ने अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश किया है और अब वह 17 सितंबर तक सिंह राशि में रहेंगे। सूर्य के सिंह राशि में पहुंचते ही देवगुरु बृहस्पति के साथ द्विद्वादश योग का निर्माण हुआ है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जब दो ग्रह एक दूसरे से दूसरे और बारहवें भाव में स्थित होते हैं तो द्विद्वादश योग बनता है। इस योग में गुरु सूर्य से बारहवें भाव में और सूर्य गुरु से दूसरे भाव में स्थित माने जा रहे हैं। सूर्य को मान सम्मान नेतृत्व और आत्मविश्वास का कारक माना जाता है जबकि गुरु ज्ञान विस्तार समृद्धि और सौभाग्य से जुड़े ग्रह हैं। ऐसे में इस योग को कई राशियों के लिए शुभ और आर्थिक रूप से लाभकारी माना जा रहा है।

    मेष राशि

    मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य और गुरु का यह संबंध काफी सकारात्मक माना जा रहा है। इस अवधि में कार्यक्षेत्र में आपकी नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आ सकती है। नौकरी करने वालों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि से जुड़ा कोई अच्छा समाचार मिल सकता है। अधिकारियों और वरिष्ठ लोगों का सहयोग मिलने की संभावना रहेगी। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए नए कारोबारी समझौते लाभदायक साबित हो सकते हैं। आय के नए स्रोत बनने के संकेत हैं और अचानक धन लाभ भी हो सकता है। इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ समाज में मान सम्मान बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

    सिंह राशि

    सूर्य का गोचर सिंह राशि में ही हुआ है इसलिए इस राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष महत्व रखता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सिंह राशि वालों के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि हो सकती है। लंबे समय से अटके हुए काम दोबारा गति पकड़ सकते हैं। आर्थिक मोर्चे पर भी राहत मिलने के संकेत हैं और अटका हुआ धन वापस मिलने की संभावना बन सकती है। इसके अलावा नए निवेश से भविष्य में लाभ मिलने के योग बताए गए हैं। परिवार में मांगलिक कार्य हो सकते हैं और वरिष्ठ लोगों का मार्गदर्शन भी प्राप्त होगा।

    धनु राशि

    धनु राशि के स्वामी स्वयं देवगुरु बृहस्पति माने जाते हैं इसलिए सूर्य के इस गोचर को इस राशि के लिए विशेष शुभ बताया जा रहा है। इस दौरान अटके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अच्छी खबर मिल सकती है। विदेश से जुड़े काम कारोबार या अवसरों में सफलता के संकेत हैं। इसके साथ ही सुख सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है और परिवार में सकारात्मक माहौल बनने की संभावना है।

    सूर्य और गुरु को मजबूत करने के उपाय

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य और गुरु के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाने के लिए सुबह सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल अर्पित किया जा सकता है। जल में रोली और पीला पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य देने की सलाह दी जाती है। इसके साथ सूर्य मंत्र और बृहस्पति मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। हालांकि ऐसे उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय नहीं माना जाता।

    कुल मिलाकर 17 अगस्त से 17 सितंबर तक सूर्य के सिंह राशि में रहने के दौरान बनने वाला द्विद्वादश योग ज्योतिषीय गणना के अनुसार मेष सिंह और धनु राशि वालों के लिए आर्थिक और करियर के लिहाज से अनुकूल माना जा रहा है। इन जातकों को नौकरी में तरक्की कारोबार में नए अवसर रुके हुए धन की वापसी और आय के नए रास्ते मिलने के संकेत बताए गए हैं। हालांकि राशिफल और ग्रहों से जुड़ी भविष्यवाणियां ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित होती हैं इसलिए किसी बड़े आर्थिक या निवेश संबंधी फैसले को केवल इनके आधार पर लेना उचित नहीं है।

  • बुध अस्त होते ही चमकेगी किस्मत, मिथुन से मीन तक इन राशियों को मिलेंगे आर्थिक लाभ के संकेत

    बुध अस्त होते ही चमकेगी किस्मत, मिथुन से मीन तक इन राशियों को मिलेंगे आर्थिक लाभ के संकेत


    नई दिल्ली। ग्रहों की चाल का ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व माना जाता है। इसी क्रम में ग्रहों के राजकुमार कहे जाने वाले बुध 18 अगस्त 2026 से अस्त अवस्था में जा रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार बुध 18 सितंबर तक अस्त रहेंगे। बुध के अस्त होने की स्थिति तब बनती है जब वह सूर्य के बेहद करीब आ जाते हैं। इस अवधि को सभी राशियों के लिए एक जैसा नहीं माना जाता है। कुछ राशियों को इस दौरान सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है जबकि कुछ जातकों के लिए आर्थिक और करियर से जुड़े मामलों में अच्छे अवसर बनने के संकेत मिल सकते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध बुद्धि संवाद व्यापार गणना और तर्क क्षमता से जुड़े ग्रह माने जाते हैं। ऐसे में बुध की स्थिति का प्रभाव कारोबार नौकरी शिक्षा और आर्थिक फैसलों पर देखा जाता है। 18 अगस्त से 18 सितंबर तक की अवधि में चार राशियों के लिए विशेष लाभ के संकेत बताए गए हैं। हालांकि राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित होते हैं और इन्हें निश्चित आर्थिक भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।

    मिथुन राशि

    बुध के अस्त होने की अवधि मिथुन राशि के जातकों के लिए कई मामलों में सकारात्मक रह सकती है। संवाद और संपर्क से जुड़े कामों में प्रगति के अवसर बन सकते हैं। कारोबार करने वाले लोगों को अपनी समझदारी और रणनीति के दम पर फायदा मिल सकता है। आय बढ़ाने के नए रास्ते सामने आने की संभावना है। भाई बहनों के साथ रिश्तों में भी सुधार हो सकता है। किसी छोटी यात्रा या नई योजना की तैयारी भविष्य में लाभकारी साबित हो सकती है।

    सिंह राशि

    सिंह राशि वालों के लिए यह अवधि करियर और आर्थिक मामलों में महत्वपूर्ण हो सकती है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दौरान नेतृत्व क्षमता का प्रभाव बढ़ सकता है और कार्यक्षेत्र में अपनी बात स्पष्ट तरीके से रखने का लाभ मिल सकता है। कारोबार में नई योजनाओं पर काम करने का मौका मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि रुका हुआ धन वापस मिलने के संकेत बताए गए हैं। महत्वपूर्ण आर्थिक या व्यावसायिक फैसले लेते समय जल्दबाजी से बचना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

    तुला राशि

    तुला राशि के जातकों के लिए बुध का अस्त होना आय और लाभ से जुड़े मामलों में नए अवसर लेकर आ सकता है। पुराने निवेश से फायदा मिलने की संभावना जताई गई है। लंबे समय से अटके कामों को पुराने संपर्कों की मदद से आगे बढ़ाया जा सकता है। दोस्तों और सहकर्मियों का सहयोग भी आपके लिए उपयोगी साबित होगा। यदि आप आर्थिक मामलों में सही रणनीति बनाकर आगे बढ़ते हैं तो लाभ की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। कारोबार से जुड़े लोगों को भी नए अवसरों पर नजर रखनी चाहिए।

    मीन राशि

    मीन राशि वालों के लिए यह अवधि मेहनत और समझदारी के जरिए बेहतर परिणाम पाने वाली हो सकती है। कामकाज में बनाई गई योजनाओं का फायदा मिल सकता है। प्रतियोगिता से जुड़े मामलों में लगातार मेहनत करने से स्थिति मजबूत हो सकती है। उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को भी अपनी रणनीति बेहतर करने का अवसर मिलेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दौरान आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। हालांकि किसी भी बड़े निवेश या आर्थिक फैसले में व्यावहारिक सोच और जरूरी जांच पड़ताल को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।

    कुल मिलाकर 18 अगस्त से 18 सितंबर तक बुध के अस्त रहने की अवधि को ज्योतिषीय दृष्टि से इन चार राशियों के लिए अपेक्षाकृत शुभ बताया जा रहा है। मिथुन राशि को आय और संपर्क से लाभ सिंह राशि को रुका धन मिलने के संकेत तुला राशि को पुराने निवेश और नए अवसरों से फायदा तथा मीन राशि को कामकाज और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिल सकते हैं। फिर भी धन से जुड़े किसी फैसले को केवल राशिफल के आधार पर लेने के बजाय अपनी आर्थिक स्थिति जोखिम और परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • 18 अगस्त 2026 करियर राशिफल: चंद्रमा तुला राशि में, नौकरी और कारोबार में मिलेंगे नए अवसर, धन संबंधी फैसलों में बरतें सावधानी

    18 अगस्त 2026 करियर राशिफल: चंद्रमा तुला राशि में, नौकरी और कारोबार में मिलेंगे नए अवसर, धन संबंधी फैसलों में बरतें सावधानी

    नई दिल्ली । 18 अगस्त 2026 का दिन करियर और आर्थिक मामलों में संतुलन बनाकर चलने का संकेत दे रहा है। तुला राशि में चंद्रमा का प्रभाव बातचीत, साझेदारी और टीमवर्क को मजबूत कर सकता है। वहीं सिंह राशि में सूर्य आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने वाला रहेगा। मिथुन राशि में मंगल सक्रियता बढ़ाएगा, लेकिन जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना जरूरी होगा। कर्क राशि में बुध और गुरु की स्थिति बचत तथा पारिवारिक वित्तीय योजना पर ध्यान देने का संकेत दे रही है। कन्या राशि वालों को फिजूलखर्ची से बचना होगा, जबकि मीन राशि वालों के लिए धैर्य और अनुशासन महत्वपूर्ण रहेगा।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज बातचीत के जरिए काम आसान होने के योग हैं। अटका हुआ धन शांतिपूर्वक बातचीत करने से वापस मिलने की संभावना बन सकती है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारी लेने का अवसर मिलेगा और सहकर्मियों के साथ नरमी से पेश आना लाभ देगा। वृष राशि वालों को बचत पर ध्यान देना चाहिए। दफ्तर में अनुभवी अधिकारियों से बातचीत अच्छी रह सकती है और आपके काम की सराहना हो सकती है। नौकरी बदलने का विचार है तो जल्दबाजी के बजाय सभी पहलुओं की जांच करें।

    मिथुन राशि के लिए आज बातचीत और संपर्क महत्वपूर्ण रहेंगे। मीटिंग, लेखन और नए लोगों से जुड़ने वाले कामों में सफलता मिल सकती है। हालांकि निवेश या किसी को पैसा देने से पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी है। कर्क राशि वालों की आर्थिक योजना मजबूत रह सकती है। परिवार और भविष्य से जुड़े खर्चों पर ध्यान रहेगा। कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलेगा और लगातार मेहनत का सकारात्मक परिणाम सामने आ सकता है।

    सिंह राशि वालों में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ेगा। कार्यस्थल पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है, लेकिन केवल अपनी बात मनवाने के बजाय दूसरों की राय सुनना बेहतर रहेगा। धन के मामले में दिखावे पर खर्च करने से बचें। कन्या राशि वालों को बजट पर विशेष नजर रखनी होगी। सुख-सुविधाओं से जुड़ी खरीदारी का मन बन सकता है, लेकिन आज बचत करना अधिक उपयोगी रहेगा। कार्यक्षेत्र में छोटी गलतियां पकड़ने की क्षमता मजबूत रहेगी, फिर भी दूसरों की कमियां निकालने के बजाय समाधान पर ध्यान दें।

    तुला राशि वालों के लिए दिन संतुलित फैसलों और टीम के साथ बेहतर तालमेल का रहेगा। पैसों से जुड़े निर्णयों में किसी भरोसेमंद व्यक्ति की सलाह उपयोगी हो सकती है। कार्यस्थल पर मतभेद होने की स्थिति में आपकी समझदारी समस्या को सुलझाने में मदद करेगी। वृश्चिक राशि वालों को अपनी आर्थिक योजनाओं को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। अनावश्यक खर्च से बचें और किसी बड़े वादे से पहले सभी तथ्यों की जांच करें। काम में एकाग्रता बनाए रखने से लाभ होगा।

    धनु राशि वालों के लिए नए विचार कमाई के अवसर खोल सकते हैं, लेकिन हर प्रस्ताव में निवेश करना उचित नहीं होगा। नेटवर्किंग और नए लोगों से संपर्क करियर में मददगार साबित हो सकता है। मकर राशि वालों को पुरानी योजनाओं और जिम्मेदारियों की समीक्षा करनी चाहिए। कोई रुका हुआ काम सुधार के बाद आगे बढ़ सकता है। कुंभ राशि वालों की अलग सोच कार्यक्षेत्र में ध्यान आकर्षित करेगी, लेकिन नए विचारों को लागू करने से पहले बजट और जोखिम की जांच जरूरी है।

    मीन राशि वालों के लिए दिन धैर्य और लगातार प्रयास का संदेश दे रहा है। रुका हुआ आर्थिक मामला धीरे-धीरे सुलझ सकता है। कार्यक्षेत्र में गति अपेक्षाकृत धीमी महसूस हो सकती है, लेकिन मेहनत बेकार नहीं जाएगी। अपनी कुशलता बढ़ाने और अधूरे काम पूरे करने पर ध्यान देना बेहतर रहेगा। कुल मिलाकर 18 अगस्त का दिन करियर में संवाद, सहयोग और संतुलन को महत्व देने वाला है। आर्थिक मामलों में भावनात्मक फैसलों से बचकर योजना के अनुसार आगे बढ़ने से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहेगी।

  • घर की तरक्की के लिए मंगलवार को करें ये काम, वास्तु के अनुसार बदल सकती है घर की ऊर्जा

    घर की तरक्की के लिए मंगलवार को करें ये काम, वास्तु के अनुसार बदल सकती है घर की ऊर्जा


    नई दिल्ली । मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ आसान उपाय करने से घर के वातावरण में सकारात्मकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। माना जाता है कि घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा का असर परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य मनोदशा और कामकाज पर भी पड़ सकता है। ऐसे में मंगलवार को घर की साफ सफाई से लेकर पूजा स्थल और मुख्य द्वार तक कुछ बातों का ध्यान रखना शुभ माना जाता है। इन उपायों का उद्देश्य घर के वातावरण को व्यवस्थित और सकारात्मक बनाए रखना है।

    मंगलवार के दिन सुबह उठकर सबसे पहले घर की साफ सफाई करना अच्छा माना जाता है। विशेष रूप से मुख्य द्वार के आसपास गंदगी या अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए। वास्तु मान्यताओं में मुख्य द्वार को घर में ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान माना गया है। इसलिए मंगलवार को मुख्य दरवाजे को साफ करके वहां दीपक जलाया जा सकता है। यदि संभव हो तो दरवाजे के आसपास स्वच्छता बनाए रखते हुए शुभ चिह्न भी बनाए जा सकते हैं।

    मंगलवार को घर के पूजा स्थल की सफाई करना भी शुभ माना जाता है। पूजा स्थान में लंबे समय से रखे पुराने फूल और खराब हो चुकी पूजन सामग्री को हटा देना चाहिए। इसके बाद भगवान हनुमान की पूजा कर दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करने से मन को शांति और आत्मविश्वास मिलने की मान्यता है।

    वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में घर के दक्षिण दिशा को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मंगलवार को इस दिशा में अनावश्यक कबाड़ या टूटा हुआ सामान रखने से बचने की सलाह दी जाती है। घर में यदि कोई खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान या लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं आने वाली वस्तुएं पड़ी हैं तो उन्हें व्यवस्थित करना बेहतर माना जाता है। घर को साफ और व्यवस्थित रखने से सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है।

    मंगलवार के दिन लाल रंग को भी विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी को लाल रंग प्रिय माना जाता है। इसलिए पूजा के दौरान लाल फूल अर्पित किए जा सकते हैं। घर में बहुत अधिक लाल रंग का इस्तेमाल करने के बजाय पूजा या सजावट में सीमित रूप से लाल रंग का प्रयोग करना बेहतर माना जाता है।

    इस दिन घर में क्रोध और विवाद का माहौल बनाने से बचना चाहिए। वास्तु से जुड़े उपाय केवल वस्तुओं की दिशा या स्थान बदलने तक सीमित नहीं माने जाते बल्कि घर के वातावरण और व्यवहार को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और शांतिपूर्ण व्यवहार रहने से घर का माहौल सकारात्मक बना रहता है।

    मंगलवार को घर में हनुमान जी की पूजा के साथ जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि सेवा और दान से मन में सकारात्मक भाव पैदा होते हैं। हालांकि वास्तु और धार्मिक उपाय आस्था पर आधारित होते हैं और इनके परिणाम की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है। इन्हें श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ अपनाया जा सकता है।

  • मंगलवार का व्रत रख रहे हैं तो जान लें ये जरूरी नियम, हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए ऐसे करें पूजा

    मंगलवार का व्रत रख रहे हैं तो जान लें ये जरूरी नियम, हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए ऐसे करें पूजा


    नई दिल्ली । मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से जीवन में आने वाली परेशानियां कम होती हैं और व्यक्ति को साहस आत्मविश्वास तथा मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। मंगलवार का व्रत मंगल ग्रह से भी जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि विधि विधान से मंगलवार का व्रत करने से मंगल दोष से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है। खासतौर पर ऐसे लोग जो बार बार बाधाओं का सामना कर रहे हैं या जिनके काम बनते बनते रुक जाते हैं वे मंगलवार के दिन हनुमान जी की आराधना कर सकते हैं।

    मंगलवार व्रत की शुरुआत सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने और साफ वस्त्र धारण करने से करनी चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके भगवान हनुमान की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। पूजा से पहले व्रत का संकल्प लें और मन में अपनी श्रद्धा तथा पूजा का उद्देश्य रखें। इसके बाद हनुमान जी को सिंदूर चमेली का तेल लाल फूल और गुड़ चने का भोग अर्पित किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही बजरंग बाण और हनुमान जी के मंत्रों का जाप भी श्रद्धा के साथ किया जा सकता है। यदि संभव हो तो मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर जाकर दर्शन करें और वहां दीपक जलाएं। कई लोग इस दिन सुंदरकांड का पाठ भी करते हैं। मान्यता है कि इससे मन को शांति मिलती है और नकारात्मक विचारों से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।

    मंगलवार व्रत में खानपान का भी विशेष महत्व माना जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं जबकि कुछ लोग एक समय सात्विक भोजन करते हैं। व्रत के दौरान मांसाहार शराब और तामसिक भोजन से दूर रहने की धार्मिक परंपरा है। साथ ही किसी के प्रति क्रोध या अपशब्दों से बचना चाहिए क्योंकि व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं बल्कि मन और व्यवहार को संयमित रखने की साधना भी माना जाता है।

    शाम के समय दोबारा हनुमान जी की पूजा करें। दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और भगवान को गुड़ चने या अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद आरती करें और परिवार की सुख शांति तथा समृद्धि की कामना करें। व्रत खोलते समय सात्विक भोजन ग्रहण करना उचित माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार का व्रत लगातार कई मंगलवार तक करने की परंपरा भी है। कुछ लोग मनोकामना पूरी होने तक व्रत करते हैं और बाद में उद्यापन करते हैं। हालांकि व्रत की अवधि और नियम अलग अलग परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार नियमों का पालन करना बेहतर माना जाता है।

    मंगलवार व्रत को लेकर मान्यताएं धार्मिक आस्था पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक भविष्यवाणी या निश्चित परिणाम के रूप में नहीं देखना चाहिए। श्रद्धा के साथ पूजा करते हुए अपने कर्म और व्यवहार को सकारात्मक रखना ही इस व्रत का प्रमुख उद्देश्य माना जाता है।

  • आज का राशिफल 18 अगस्त 2026: 3 राशियों को मिलेगा पैसा और सफलता का लाभ, जानें मेष से मीन तक भविष्यफल

    आज का राशिफल 18 अगस्त 2026: 3 राशियों को मिलेगा पैसा और सफलता का लाभ, जानें मेष से मीन तक भविष्यफल


    नई दिल्ली । 18 अगस्त 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए खास रहने वाला है। ग्रहों की चाल में बनने वाली विशेष स्थिति का असर लोगों के कामकाज धन संबंधी मामलों पारिवारिक जीवन और करियर पर देखने को मिल सकता है। कुछ राशियों के लिए आज आर्थिक लाभ के नए अवसर बन सकते हैं जबकि कुछ जातकों को अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी। कारोबार करने वालों के लिए दिन महत्वपूर्ण रह सकता है और नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा 18 अगस्त का दिन।

    मेष राशि वालों के लिए आज का दिन मेहनत के परिणाम देने वाला रह सकता है। लंबे समय से अटका कोई काम पूरा होने की उम्मीद है। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और आमदनी बढ़ाने का कोई नया रास्ता सामने आ सकता है। हालांकि जल्दबाजी में निवेश करने से बचना बेहतर रहेगा।

    वृषभ राशि के जातकों को आज आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी होगी। अचानक कोई खर्च सामने आ सकता है। परिवार के किसी सदस्य से महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। कारोबारियों के लिए दिन सामान्य रहेगा लेकिन नई योजना पर काम शुरू करने से पहले अच्छी तरह विचार करना लाभकारी होगा।

    मिथुन राशि के लिए आज का दिन सकारात्मक संकेत लेकर आ सकता है। नौकरी में तरक्की या नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन सकते हैं। व्यापार में भी लाभ की संभावना है। किसी पुराने संपर्क से आर्थिक फायदा मिल सकता है। परिवार में माहौल खुशनुमा रहेगा।

    कर्क राशि वालों को आज भावनाओं पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी। काम का दबाव बढ़ सकता है लेकिन समझदारी से परिस्थितियों को संभालने में सफलता मिलेगी। धन से जुड़े फैसले सोच समझकर लें। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा।

    सिंह राशि के जातकों के लिए आज का दिन खास रह सकता है। ग्रहों की अनुकूल स्थिति से आर्थिक लाभ के अवसर बन सकते हैं। नौकरी और कारोबार में नई उपलब्धि मिल सकती है। किसी पुराने निवेश से फायदा मिलने की संभावना है। सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ सकती है।

    कन्या राशि वालों को आज अपने काम पर पूरा ध्यान देना होगा। छोटी गलती परेशानी पैदा कर सकती है। हालांकि मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने के संकेत हैं। धन की स्थिति सामान्य रहेगी और परिवार में किसी सदस्य की मदद करनी पड़ सकती है।

    तुला राशि के लिए आज का दिन धन लाभ के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। व्यापार में कोई बड़ा सौदा लाभ दे सकता है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है।

    वृश्चिक राशि वालों को आज करियर में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। नई जिम्मेदारी मिलने से व्यस्तता बढ़ सकती है लेकिन इसका फायदा भविष्य में मिलेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बनाई गई योजना सफल हो सकती है।

    धनु राशि के जातकों को आज भाग्य का साथ मिल सकता है। यात्रा से जुड़े काम में लाभ मिलने के संकेत हैं। विद्यार्थियों के लिए दिन अच्छा रहेगा। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को सकारात्मक खबर मिल सकती है।

    मकर राशि वालों के लिए आज का दिन मिलाजुला रहेगा। धन आएगा लेकिन खर्च भी बढ़ सकता है। किसी करीबी से मतभेद होने की संभावना है इसलिए बातचीत में संयम रखें। कार्यक्षेत्र में मेहनत जारी रखने से सफलता मिलेगी।

    कुंभ राशि के जातकों को आज अचानक आर्थिक लाभ मिल सकता है। रुका हुआ काम पूरा होने से राहत मिलेगी। व्यापार में नई डील मिलने की संभावना है। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी।

    मीन राशि वालों के लिए आज का दिन नई उम्मीद लेकर आ सकता है। करियर में बदलाव की योजना बना रहे हैं तो समय अनुकूल रह सकता है। धन संबंधी मामलों में फायदा मिल सकता है। किसी पुराने मित्र से मुलाकात मन प्रसन्न कर सकती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 18 अगस्त को बनने वाली ग्रह स्थिति कुछ राशियों के लिए आर्थिक रूप से विशेष फलदायी रह सकती है। हालांकि राशिफल सामान्य ज्योतिषीय आकलन पर आधारित होता है। किसी भी बड़े आर्थिक या व्यक्तिगत फैसले से पहले अपनी परिस्थितियों और विशेषज्ञ सलाह को ध्यान में रखना उचित रहेगा।

  • सावन के तीसरे सोमवार पर शिव भक्तों के लिए बड़ा अवसर, नाग पंचमी के साथ खास संयोग; ऐसे करें भोलेनाथ का जलाभिषेक

    सावन के तीसरे सोमवार पर शिव भक्तों के लिए बड़ा अवसर, नाग पंचमी के साथ खास संयोग; ऐसे करें भोलेनाथ का जलाभिषेक


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव भक्त व्रत रखते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करके सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इस बार 17 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा सोमवार मनाया जाएगा और इसी दिन नाग पंचमी भी पड़ रही है। पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम से शुरू होकर 17 अगस्त की शाम तक रहेगी और उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी। इस वजह से सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ पड़ना धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है।

    इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग भगवान शिव से जुड़े हुए हैं और शिवजी के गले में नाग के विराजमान होने के कारण नाग पंचमी की पूजा का संबंध शिव आराधना से भी माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित कर सकते हैं और बेलपत्र पुष्प अक्षत तथा अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री चढ़ा सकते हैं। नाग देवता की प्रतिमा या शिवलिंग के साथ स्थापित नाग प्रतिमा की भी पूजा की जा सकती है।

    17 अगस्त को शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए अलग अलग पंचांगों में समय में थोड़ा अंतर मिल सकता है। आपके दिए गए पंचांग के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 24 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सुबह 5 बजकर 51 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट तक अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त बताया गया है। सुबह 9 बजकर 8 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक शुभ उत्तम मुहूर्त रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक बताया गया है। स्थानीय सूर्योदय और शहर के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर संभव है इसलिए पूजा के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा। नाग पंचमी के लिए भी अलग पंचांगों में सुबह के मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर दिया गया है।

    सावन सोमवार की पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। श्रद्धा के अनुसार दूध और पंचामृत से अभिषेक भी किया जा सकता है। भगवान शिव को बेलपत्र पुष्प और फल अर्पित करें तथा धूप और दीप जलाकर पूजा करें। इसके बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना और शिव आरती करना धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।

    व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या जलाहार कर सकते हैं। कई परंपराओं में सावन सोमवार के व्रत में अनाज और सामान्य नमक से परहेज किया जाता है। हालांकि व्रत के नियम परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले लोगों को कठिन या निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

    इस दिन नाग पंचमी होने के कारण नाग देवता की प्रतिमा पर भी जल पुष्प और पूजा सामग्री अर्पित की जा सकती है। जीवित सांपों को पकड़कर पूजा करने या उन्हें जबरन दूध पिलाने से बचना चाहिए। धार्मिक आस्था का पालन करते हुए नाग देवता की प्रतिमा का पूजन करना अधिक सुरक्षित तरीका है।

    इस तरह 17 अगस्त का दिन शिव भक्तों के लिए धार्मिक रूप से विशेष माना जा रहा है। सावन सोमवार और नाग पंचमी का यह मेल श्रद्धालुओं को एक ही दिन भगवान शिव और नाग देवता की आराधना का अवसर देगा। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा संयम और सकारात्मक भाव माना जाता है। ज्योतिष से जुड़े शुभ प्रभावों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए क्योंकि इनके प्रभावों का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • क्यों खास हैं नाग? कालसर्प दोष, अश्लेषा नक्षत्र और नागयज्ञ से जुड़ी है हजारों साल पुरानी परंपरा

    क्यों खास हैं नाग? कालसर्प दोष, अश्लेषा नक्षत्र और नागयज्ञ से जुड़ी है हजारों साल पुरानी परंपरा


    नई दिल्ली । सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। भारतीय परंपरा में नागों का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि ज्योतिष पौराणिक कथाओं लोकविश्वास और प्रकृति से भी उनका गहरा संबंध बताया गया है। खेतों में फसलों की रक्षा करने वाले सांपों से लेकर भगवान शिव के गले में विराजमान नाग तक भारतीय संस्कृति में सर्प को कई अलग अलग रूपों में देखा गया है। यही वजह है कि नाग पंचमी के अवसर पर नाग पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

    ज्योतिष की बात करें तो सर्पों का संबंध राहु से जोड़ा जाता है। मान्यता के अनुसार नवग्रहों में राहु के अधिदेवता काल और प्रतिदेवता सर्प माने जाते हैं। इसी कारण राहु से जुड़े दोषों की शांति के लिए सर्प और नाग देवता की पूजा का विधान बताया जाता है। कुंडली में कालसर्प दोष होने की स्थिति में भी ज्योतिषीय परंपराओं में नाग पूजा और उससे जुड़े उपाय बताए जाते हैं। हालांकि कालसर्प दोष को लेकर ज्योतिषियों के बीच अलग अलग मत भी पाए जाते हैं।

    नागों का संबंध केवल ग्रहों तक ही सीमित नहीं है। 27 नक्षत्रों में अश्लेषा नक्षत्र के देवता भी सर्प माने गए हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में अश्लेषा का संबंध नाग शक्ति से जोड़ा जाता है। इसी तरह प्राचीन ज्योतिष परंपराओं में नक्षत्रों के वाहनों और प्राकृतिक घटनाओं के बीच संबंध जोड़कर वर्षा के अनुमान लगाने की परंपरा भी बताई गई है। बारिश के मौसम में आकाशीय घटनाओं को समझने में इन प्रतीकों का उपयोग प्राचीन काल से होता रहा है।

    भारतीय पौराणिक कथाओं में नागों की भूमिका और भी व्यापक है। रामायण में लक्ष्मण को शेषनाग का अवतार माना जाता है जबकि महाभारत की परंपरा में बलराम का संबंध भी शेषनाग से जोड़ा जाता है। रामायण में मेघनाद की पत्नी सुलोचना को नागकन्या बताया गया है। वहीं सुरसा का उल्लेख नागों की माता के रूप में मिलता है। इन कथाओं में नाग केवल एक जीव के रूप में नहीं बल्कि शक्ति और रहस्य के प्रतीक के तौर पर भी दिखाई देते हैं।

    महाभारत में भी नागों की कहानी बेहद महत्वपूर्ण है। अर्जुन का विवाह नागकन्या उलूपी से हुआ था। आगे चलकर राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डंसने से हुई। परीक्षित की मृत्यु से क्रोधित उनके पुत्र जन्मेजय ने नागों के विनाश के लिए नागयज्ञ शुरू कराया। कहा जाता है कि इस यज्ञ में बड़ी संख्या में नाग अग्नि में गिरने लगे थे। इसी दौरान ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तीक ने यज्ञ को रुकवाया और नागों की रक्षा की। इस कथा को नाग पंचमी की धार्मिक परंपराओं से भी जोड़ा जाता है।

    नागों का उल्लेख कृष्ण की कथाओं में भी मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग के दमन की कथा भारतीय लोकजीवन में बेहद प्रसिद्ध है। वहीं महाभारत में भीम के नागलोक पहुंचने और वहां उन्हें असाधारण शक्ति प्राप्त होने का वर्णन मिलता है। मेघनाद द्वारा राम और लक्ष्मण को नागपाश में बांधने की कथा भी नागों के महत्व को दर्शाती है।

    भारतीय परंपरा में नागों को केवल भय और विष का प्रतीक नहीं माना गया बल्कि उन्हें शक्ति संरक्षण उर्वरता और प्रकृति से जोड़कर भी देखा गया है। कश्मीर का अनंतनाग भी नाग परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नाम है। इतिहास और लोककथाओं में इस क्षेत्र का संबंध नागों से बताया गया है।

    इस तरह कालसर्प दोष की ज्योतिषीय मान्यताओं से लेकर जन्मेजय के नागयज्ञ तक और कृष्ण की कालिया नाग कथा से लेकर शेषनाग की पौराणिक अवधारणा तक नाग भारतीय संस्कृति के अनेक स्तरों पर दिखाई देते हैं। यही वजह है कि नाग पंचमी केवल सांपों की पूजा का पर्व नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता में प्रकृति पौराणिक परंपरा और धार्मिक प्रतीकों के बीच गहरे संबंध को समझने का अवसर भी है।

  • नाग पंचमी 2026 की तारीख को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन, 17 अगस्त को करें पूजा; जानें तिथि से लेकर जरूरी नियम तक

    नाग पंचमी 2026 की तारीख को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन, 17 अगस्त को करें पूजा; जानें तिथि से लेकर जरूरी नियम तक


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में नाग पंचमी का पर्व भगवान शिव और नाग देवता की आराधना से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। इस बार पंचमी तिथि 16 अगस्त 2026 की शाम करीब 4 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 17 अगस्त की शाम करीब 5 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त 2026 सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन सावन सोमवार भी पड़ रहा है जिसके कारण भगवान शिव और नाग देवता की पूजा का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। 17 अगस्त की तारीख की पुष्टि कई पंचांग आधारित स्रोतों ने भी की है।

    नाग पंचमी की पूजा के लिए 17 अगस्त को सुबह 5 बजकर 51 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। यह मुहूर्त नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार है और दूसरे शहरों में सूर्योदय तथा स्थानीय पंचांग के आधार पर समय में अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी दूसरे शहर में रहते हैं तो स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना बेहतर रहेगा।

    नाग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव तथा नाग देवता का ध्यान करके पूजा का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें। नाग देवता की प्रतिमा पर भी जल अर्पित करके चंदन अक्षत और पुष्प चढ़ाए जा सकते हैं। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें और दीपक जलाकर आरती करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव और नाग देवता से सुख शांति और परिवार की मंगलकामना की जाती है।

    कई स्थानों पर नाग पंचमी के दिन नाग देवता की प्रतिमा पर दूध अर्पित करने की परंपरा भी है। हालांकि जीवित सांपों को पकड़कर उन्हें दूध पिलाना या उनके मुंह को दूध में डुबोना उचित नहीं है। सांप सामान्य रूप से दूध पीने वाले जीव नहीं होते और जबरदस्ती दूध पिलाने से उन्हें नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए नाग देवता की प्रतिमा का पूजन करना अधिक सुरक्षित और उचित तरीका है। नाग पंचमी की परंपराएं भी सांपों और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देती हैं।

    नाग पंचमी को लेकर धार्मिक मान्यताओं में कहा जाता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से भय दूर होता है और परिवार में सुख समृद्धि आती है। कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में नाग पूजा को राहु केतु और कालसर्प दोष से जुड़े उपायों के साथ भी जोड़ा जाता है। हालांकि कालसर्प दोष और उससे जुड़े उपाय ज्योतिषीय मान्यताओं का विषय हैं और इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अलग अलग ज्योतिषीय परंपराओं में इसके प्रभाव और उपायों को लेकर मतभेद भी पाए जाते हैं।

    नाग पंचमी से जुड़ी धार्मिक कथाओं में राजा जनमेजय और आस्तिक मुनि का प्रसंग भी प्रमुख माना जाता है। मान्यता है कि राजा जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की मृत्यु के बाद नागों के विनाश के लिए नाग यज्ञ कराया था। इसी दौरान आस्तिक मुनि ने यज्ञ को रोककर नागों की रक्षा की। इस कथा को नाग पंचमी की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है और इसके माध्यम से जीवों के प्रति दया तथा संरक्षण का संदेश भी मिलता है।

    इस तरह 17 अगस्त को नाग पंचमी के अवसर पर भगवान शिव और नाग देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है। इस बार सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक ही दिन पड़ना भक्तों के लिए धार्मिक दृष्टि से विशेष अवसर माना जा रहा है। पूजा में आस्था के साथ स्वच्छता और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का ध्यान रखना भी जरूरी है।