Category: Religious Astrology

  • देशभर में बुद्ध पूर्णिमा की धूम… आज कई ग्रह बदलेंगे चाल… इन राशियों पर होगी धनवर्षा!

    देशभर में बुद्ध पूर्णिमा की धूम… आज कई ग्रह बदलेंगे चाल… इन राशियों पर होगी धनवर्षा!


    नई दिल्ली।
    देशभर में आज बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima 2026) मनाई जा रही है. द्रिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह (Vaishakh month) के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हर वर्ष बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है. बुद्ध पूर्णिमा को ही वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. कहते हैं कि इसी दिन गौतम बुद्ध (Gautam Buddha) का जन्म, उन्हें ज्ञान और महानिर्वाण की प्राप्ति हुई थी. इस दिन श्रीहरि और माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है. इस बार की बुद्ध पूर्णिमा सिर्फ धार्मिक लिहाज से ही नहीं, बल्कि ज्योतिष नजरिए से भी बहुत ही खास मानी जी रही है. दरअसल, आज कई ग्रह अपनी चाल में परिवर्तन करेंगे और कुछ राजयोगों का भी निर्माण होगा।

    द्रिक पंचांग के अनुसार, बुद्धि के देवता बुध आज मेष राशि में अस्त हो रहे हैं. इसके अलावा, आज मेष राशि में सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण होने जा रहा है. आज सिद्धि योग का निर्माण भी हो रहा है. तो चलिए जानते हैं कि बुद्धि पूर्णिमा इन सभी शुभ योगों के बनने से किन राशियों को लाभ होगा।

    मेष राशि

    बुधादित्य राजयोग का असर मेष राशि के लोगों के लिए काफी फायदेमंद रहने वाला है. इस समय पुराने अटके काम धीरे-धीरे पूरे हो सकते हैं. पैसों से जुड़ी परेशानियों में कमी आएगी. कर्ज से राहत मिलने के संकेत हैं. करियर में भी नई संभावनाएं बनेंगी, जिससे तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं.


    वृषभ राशि

    इस राजयोग के चलते वृषभ राशि वालों के जीवन में सुख-सुविधाएं बढ़ सकती हैं. आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं. धन लाभ के योग बन रहे हैं. अगर कहीं निवेश करने का विचार है, तो समय आपके पक्ष में रह सकता है. आगे चलकर अच्छा फायदा दे सकता है।


    मिथुन राशि

    मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है. आत्मविश्वास बढ़ेगा. फैसले लेने में आसानी होगी. हालांकि इस दौरान खर्चों पर ध्यान देना जरूरी है, वरना बजट बिगड़ सकता है. सही योजना बनाकर चलेंगे तो अच्छे परिणाम मिल सकते हैं.

    मीन राशि
    मीन राशि वालों के लिए यह समय मिला-जुला रह सकता है. कोई भी बड़ा आर्थिक फैसला लेने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना जरूरी होगा. जल्दबाजी में उठाया गया कदम नुकसान दे सकता है, लेकिन समझदारी से लिए गए निर्णय लाभ दिला सकते हैं. इस दौरान सोच में सकारात्मकता भी बढ़ेगी।

  • बुद्ध जयंती 2026: जीवन में शांति और सकारात्मकता लाने वाले सुंदर शुभकामना संदेश..

    बुद्ध जयंती 2026: जीवन में शांति और सकारात्मकता लाने वाले सुंदर शुभकामना संदेश..

    नई दिल्ली । बुद्ध पूर्णिमा का पर्व हर साल वैशाख पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है और यह दिन बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इसी दिन गौतम बुद्ध को बोधगया में ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि जीवन में शांति, करुणा और आत्मज्ञान का संदेश देने वाला विशेष अवसर भी है।

    यह दिन गौतम बुद्ध के जीवन की तीन महत्वपूर्ण घटनाओं—जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—को एक साथ स्मरण करने का प्रतीक है। इस अवसर पर दुनिया भर में लोग मंदिरों में दर्शन करते हैं, ध्यान करते हैं और दान-पुण्य जैसे कार्यों में भाग लेते हैं। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं बल्कि मन को शांत और स्थिर बनाना भी होता है।

    गौतम बुद्ध ने अपने जीवन में जो उपदेश दिए, वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सदियों पहले थे। उन्होंने अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग का संदेश दिया, जो मनुष्य को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उनकी शिक्षाएं यह बताती हैं कि असली सुख बाहरी चीजों में नहीं बल्कि भीतर की शांति में छिपा होता है।

    बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं भेजकर सकारात्मकता और शांति का संदेश साझा करते हैं। यह परंपरा न केवल रिश्तों को मजबूत बनाती है बल्कि समाज में सौहार्द और भाईचारे की भावना को भी बढ़ावा देती है। संदेशों के माध्यम से लोग यह व्यक्त करते हैं कि जीवन में प्रेम, धैर्य और करुणा को अपनाकर ही सच्चा संतुलन प्राप्त किया जा सकता है।

    यह पर्व हमें यह भी याद दिलाता है कि जीवन की जटिलताओं के बीच भी मन की शांति को बनाए रखना संभव है। ध्यान, आत्मचिंतन और सकारात्मक सोच के जरिए व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर दिशा दे सकता है। बुद्ध की शिक्षाएं हमें सिखाती हैं कि क्रोध और लालच से दूर रहकर एक सरल और शांत जीवन जिया जा सकता है।

  • 1 मई 2026: बुद्ध पूर्णिमा पर चमकेगा इन राशियों का भाग्य, जानें किसे मिलेगा लाभ और किसे बरतनी होगी सावधानी

    1 मई 2026: बुद्ध पूर्णिमा पर चमकेगा इन राशियों का भाग्य, जानें किसे मिलेगा लाभ और किसे बरतनी होगी सावधानी


    नई दिल्ली। 1 मई 2026 का दिन खास ज्योतिषीय संयोग लेकर आया है। शुक्रवार होने के कारण यह दिन सुख, समृद्धि और प्रेम का प्रतीक माना जाता है, वहीं बुद्ध पूर्णिमा का प्रभाव आध्यात्मिक ऊर्जा को भी बढ़ाता है। ऐसे में ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव के संकेत दे रही है।

    मेष राशि वालों के लिए दिन राहत भरा रहेगा। पुराने विवाद सुलझ सकते हैं और करियर में नई शुरुआत के अवसर मिलेंगे। वृषभ राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी और रुके हुए काम पूरे होंगे, हालांकि खर्चों पर नियंत्रण जरूरी रहेगा। मिथुन राशि के लोगों को मेहनत का फल मिलेगा, लेकिन आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेना होगा।

    कर्क राशि के लिए दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है, जहां रिश्तों में हल्की तकरार हो सकती है, लेकिन धैर्य से सब संभल जाएगा। सिंह राशि वालों के लिए दिन अवसरों से भरा रहेगा, धन लाभ और नए काम की शुरुआत के योग बन रहे हैं। वहीं कन्या राशि के जातकों को जल्दबाजी से बचने और शांत रहकर निर्णय लेने की जरूरत है।

    तुला राशि वालों के जीवन में उतार-चढ़ाव रह सकते हैं। आय के साथ खर्च भी बढ़ेंगे, इसलिए संतुलन बनाना जरूरी होगा। वृश्चिक राशि के जातकों के लिए दिन प्रगति का संकेत दे रहा है, खासतौर पर काम के सिलसिले में यात्रा लाभदायक हो सकती है। धनु राशि वालों को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी होगी और किसी भी बड़े निवेश से बचना बेहतर रहेगा।

    मकर राशि के लोगों को कार्यक्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन मेहनत से सफलता मिलेगी। कुंभ राशि वालों के लिए दिन सामान्य रहेगा, जहां रिश्तों और खर्चों दोनों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। वहीं मीन राशि के जातकों के लिए दिन बेहद शुभ रहने वाला है—प्रेम, करियर और आत्मविश्वास तीनों में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिलेगी।

    कुल मिलाकर, यह दिन कुछ राशियों के लिए उन्नति और खुशियों का संदेश लेकर आया है, जबकि कुछ को संयम और समझदारी से आगे बढ़ने की सलाह देता है। ग्रहों की चाल यह संकेत दे रही है कि धैर्य और संतुलन बनाए रखने से हर स्थिति को अपने पक्ष में किया जा सकता है।

  • 1 मई 2026 का राशिफल: आज कैसा रहेगा आपका दिन ? जानें किस राशि की चमकेगी किस्मत

    1 मई 2026 का राशिफल: आज कैसा रहेगा आपका दिन ? जानें किस राशि की चमकेगी किस्मत


    नई दिल्ली । आज 1 मई 2026 और शुक्रवार का दिन है। शुक्रवार का दिन शुक्र ग्रह और मां मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। यह दिन सुख, ऐश्वर्य, प्रेम और भौतिक सुविधाओं को बढ़ाने वाला माना जाता है। साथ ही इस दिन बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व भी रहेगा। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार कुछ राशियों के लिए दिन लाभकारी रहेगा, जबकि कुछ को सतर्क रहने की जरूरत है। जानिए सभी 12 राशियों का हाल-

    मेष राशि

    आज का दिन सकारात्मक रहेगा। पुराने विवाद खत्म होने से राहत मिलेगी। प्रेम संबंधों में सुधार होगा और करियर में अच्छे अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी और परिवार में तालमेल रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

    वृषभ राशि

    दिन आपके पक्ष में रहेगा। कार्यक्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करेंगे और रुके काम पूरे हो सकते हैं। धन लाभ के संकेत हैं, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है। किसी खास व्यक्ति से मुलाकात फायदेमंद साबित हो सकती है।

    मिथुन राशि

    मिला-जुला दिन रहेगा। कार्यक्षेत्र में खुद को साबित करने के मौके मिलेंगे, लेकिन आर्थिक मामलों में सतर्क रहें। निवेश से पहले सलाह लेना बेहतर रहेगा। मानसिक चिंता रह सकती है, हालांकि प्रेम जीवन अच्छा रहेगा।

    कर्क राशि

    दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। रिश्तों में हल्की नोकझोंक संभव है, लेकिन समझदारी से स्थिति संभल जाएगी। काम में मेहनत अधिक करनी पड़ेगी। सेहत का ध्यान रखें और परिवार के साथ समय बिताएं।

    सिंह राशि
    अवसरों से भरा दिन रहेगा। नए काम की शुरुआत सफल हो सकती है और धन लाभ के योग हैं। मित्रों का सहयोग मिलेगा। प्रेम संबंधों में जल्दबाजी से बचें। परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा।

    कन्या राशि

    सावधानी से दिन बिताने की जरूरत है। जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें। कार्यक्षेत्र में तनाव हो सकता है, लेकिन अंत में स्थिति सामान्य हो जाएगी। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाएं।

    तुला राशि

    उतार-चढ़ाव वाला दिन रह सकता है। आय बढ़ सकती है, लेकिन खर्च भी बढ़ेंगे। काम में सुस्ती महसूस हो सकती है। नए कार्य शुरू करने से बचें। रिश्तों में दूरी बनाकर खुद को समझने का समय लें।

    वृश्चिक राशि

    प्रगति का दिन रहेगा। काम के सिलसिले में यात्रा के योग हैं। नए कार्य शुरू कर सकते हैं। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। हालांकि परिवार में किसी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है।

    धनु राशि

    संभलकर रहने की जरूरत है। आर्थिक मामलों में तनाव हो सकता है। किसी भी बड़े निवेश से बचें। रिश्तों में बहस से दूरी बनाए रखें। यात्रा के दौरान सतर्क रहें।

    मकर राशि

    काम पर ध्यान केंद्रित करने वाला दिन रहेगा। कुछ रुकावटें आ सकती हैं, लेकिन मेहनत से उन्हें पार कर लेंगे। रिश्तों में छोटी बातों को नजरअंदाज करें। वाहन चलाते समय सावधानी रखें।

    कुंभ राशि

    मिश्रित परिणाम वाला दिन रहेगा। खर्चों पर नियंत्रण रखें और वाणी में संयम बरतें। परिवार में हल्का तनाव हो सकता है, लेकिन स्थिति संभल जाएगी। कोई नया व्यक्ति जीवन में आ सकता है।

    मीन राशि

    खुशियों से भरा दिन रहेगा। प्रेम जीवन में अच्छे मौके मिलेंगे। कार्यक्षेत्र में लाभ और नई डील के संकेत हैं। परिवार में सामंजस्य रहेगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा।

  • बुद्ध पूर्णिमा 2026 का शुभ पर्व 1 मई को, जानें स्नान दान का सही समय और आसान पूजा विधि

    बुद्ध पूर्णिमा 2026 का शुभ पर्व 1 मई को, जानें स्नान दान का सही समय और आसान पूजा विधि


    नई दिल्ली । वैशाख माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला बुद्ध पूर्णिमा का पर्व धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है यह दिन भगवान बुद्ध के जन्म ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण तीनों से जुड़ा हुआ माना जाता है इसलिए इस तिथि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 1 मई को मनाया जाएगा

    पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल की रात 9 बजकर 12 मिनट से प्रारंभ होकर 1 मई की रात 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगी उदयातिथि के अनुसार 1 मई को ही स्नान दान और पूजा करना अधिक शुभ माना गया है इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करते हैं और व्रत रखकर भगवान का ध्यान करते हैं

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा के दिन किया गया स्नान दान और पूजा व्यक्ति के जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है इस दिन जरूरतमंद लोगों की सहायता करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है कहा जाता है कि इस दिन किए गए अच्छे कार्यों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है

    स्नान और दान के लिए प्रातः काल का समय सबसे शुभ माना गया है इस दिन सुबह 4 बजकर 15 मिनट से 4 बजकर 58 मिनट तक स्नान और दान का विशेष मुहूर्त बताया गया है इस समय पवित्र स्नान कर गरीबों को अन्न वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत फलदायी होता है

    पूजा विधि की बात करें तो सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है दिनभर सात्विकता का पालन करते हुए भगवान का स्मरण किया जाता है शाम के समय जब चंद्रमा उदित होता है तब चंद्रमा को जल अर्पित किया जाता है इस दौरान सफेद फूल चावल और कुमकुम का प्रयोग किया जाता है अर्घ्य देते समय मन में अपनी इच्छाओं को रखते हुए प्रार्थना करना शुभ माना जाता है

    इस दिन कुछ विशेष कार्य करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है जैसे भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना या करवाना जरूरतमंद लोगों को भोजन या कपड़े देना और भगवान शिव माता पार्वती की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है इसके अलावा हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने से मानसिक शांति मिलती है

    हालांकि इस दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए पूजा में बासी फूल या टूटे हुए चावल का उपयोग नहीं करना चाहिए और गुस्से तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए तामसिक भोजन से बचना चाहिए और यदि व्रत न कर सकें तो सात्विक आहार ही ग्रहण करना चाहिए

    रात्रि में चंद्रमा की रोशनी में बैठकर ॐ सोमाय नमः मंत्र का जाप करना भी विशेष लाभकारी माना गया है इससे मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है बुद्ध पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं बल्कि आत्म शुद्धि और सद्भावना का संदेश देने वाला दिन है जो हर व्यक्ति को अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देता है

  • ज्येष्ठ माह का पहला बड़ा मंगल 2026, सुंदरकांड पाठ की सही विधि और लाभ जानना है जरूरी

    ज्येष्ठ माह का पहला बड़ा मंगल 2026, सुंदरकांड पाठ की सही विधि और लाभ जानना है जरूरी

    नई दिल्ली । ज्येष्ठ माह में आने वाले मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है और यह दिन भगवान हनुमान की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी महीने के एक मंगलवार को भगवान राम और भगवान हनुमान की पहली भेंट हुई थी यही कारण है कि इस पूरे महीने के मंगलवार विशेष महत्व रखते हैं इसके अलावा यह भी माना जाता है कि इसी माह में हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त हुआ था

    वर्ष 2026 में ज्येष्ठ माह 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक रहेगा इस बार अधिक मास के कारण एक दुर्लभ संयोग बन रहा है जिसमें कुल आठ मंगलवार पड़ रहे हैं आमतौर पर चार या पांच बड़ा मंगल ही होते हैं लेकिन इस बार श्रद्धालुओं को हनुमान भक्ति के अधिक अवसर मिलेंगे पहला बड़ा मंगल 5 मई को मनाया जाएगा

    इस दिन सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है सुंदरकांड गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस का एक महत्वपूर्ण भाग है जिसमें भगवान राम की महिमा और हनुमान जी की भक्ति का अद्भुत वर्णन किया गया है धार्मिक मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं

    सुंदरकांड पाठ करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है पाठ शुरू करने से पहले स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करना चाहिए इसके बाद पूजा स्थान को साफ कर हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें प्रतिमा ऐसी हो जिसमें भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण भी दिखाई दें पाठ करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है

    पाठ के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखना चाहिए और सात्विक भाव से भगवान का स्मरण करना चाहिए सुंदरकांड का पाठ एक बार में पूरा किया जा सकता है या फिर इसे नियमित रूप से कुछ दिनों तक किया जा सकता है कई लोग 11 दिन 21 दिन 31 दिन या 41 दिन तक इसका पाठ करते हैं जिससे विशेष फल की प्राप्ति होती है यदि ब्रह्म मुहूर्त में यह पाठ किया जाए तो इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुंदरकांड का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है भय और संकट समाप्त होते हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है और उनकी कृपा से भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं

    यह व्रत और पाठ केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है बल्कि यह जीवन में विश्वास शक्ति और धैर्य को मजबूत करने का माध्यम भी है बड़ा मंगल के दिन श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया सुंदरकांड पाठ व्यक्ति के जीवन में सुख शांति और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है

  • मई में कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत 2026, पूजन विधि से लेकर सामग्री तक सबकुछ यहां जानें

    मई में कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत 2026, पूजन विधि से लेकर सामग्री तक सबकुछ यहां जानें


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह का विशेष महत्व माना जाता है और इसी महीने में आने वाला वट सावित्री व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण होता है यह व्रत पति की लंबी आयु सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं और माता सावित्री का स्मरण करती हैं जिन्होंने अपने तप और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे

    पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को रखा जाएगा इस बार अमावस्या तिथि 16 मई शनिवार को सुबह 5 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर देर रात 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगी उदयातिथि के आधार पर व्रत 16 मई को ही रखा जाएगा इस दिन शनिवार होने के कारण शनि अमावस्या का विशेष संयोग भी बन रहा है जिससे इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है

    पूजन के लिए अभिजीत मुहूर्त को अत्यंत शुभ माना गया है इस दिन सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक का समय पूजा के लिए श्रेष्ठ रहेगा इस समय में विधिपूर्वक वट वृक्ष की पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है

    वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं इसके बाद सोलह श्रृंगार कर व्रत का संकल्प लिया जाता है महिलाएं वट वृक्ष के पास जाकर पूजा करती हैं और जल अक्षत तिल फूल और सिंदूर अर्पित करती हैं इसके साथ ही कच्चे सूत को वट वृक्ष के चारों ओर लपेटते हुए उसकी परिक्रमा की जाती है यह परिक्रमा सात इक्कीस या एक सौ आठ बार की जा सकती है

    पूजा के दौरान वट सावित्री व्रत कथा का पाठ करना भी आवश्यक माना गया है कथा के माध्यम से माता सावित्री के अद्भुत साहस और पतिव्रता धर्म का स्मरण किया जाता है इसके बाद महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुख समृद्धि की कामना करती हैं

    पूजन सामग्री में तांबे का लोटा गंगाजल सिंदूर रोली कलावा कच्चा सूत अगरबत्ती दीपक फूल तिल अक्षत फल मिठाई और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल होती हैं पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को विशेष रूप से वर वधू के प्रतीक स्वरूप वस्त्र भी रखने होते हैं

    धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनों का वास होता है इसलिए इसकी पूजा करने से त्रिदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है यह व्रत केवल परंपरा नहीं बल्कि वैवाहिक जीवन में प्रेम विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है जो परिवार में सुख शांति और समृद्धि लाने का संदेश देता है

  • नरसिंह जयंती पर पढ़ें अद्भुत कथा: जब खंभे से प्रकट होकर भगवान ने खत्म किया अधर्म का आतंक

    नरसिंह जयंती पर पढ़ें अद्भुत कथा: जब खंभे से प्रकट होकर भगवान ने खत्म किया अधर्म का आतंक


    नई दिल्ली । आज पूरे देश में नरसिंह जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह पावन दिन भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और कथा श्रवण करने से जीवन के सभी भय, संकट और बाधाएं दूर होती हैं तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    सनातन परंपरा के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह जयंती मनाई जाती है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इसी दिन प्रदोष काल में भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण कर अधर्म का अंत किया और अपने परम भक्त Prahlada की रक्षा की। यही कारण है कि यह पर्व धर्म की विजय और आस्था की शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

    पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में दिति और ऋषि कश्यप के दो पुत्र हुए जिनका नाम हिरण्याक्ष और Hiranyakashipu था। दोनों ही अत्यंत शक्तिशाली लेकिन अहंकारी दैत्य थे। हिरण्याक्ष ने अपने अभिमान में पृथ्वी को रसातल में ले जाने का प्रयास किया जिसे भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर समाप्त किया। अपने भाई की मृत्यु से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान प्राप्त किया जिससे वह लगभग अजेय हो गया।

    इस वरदान के कारण हिरण्यकश्यप का अहंकार बढ़ता गया और उसने स्वयं को ही भगवान घोषित कर दिया। उसने अपने राज्य में भगवान विष्णु की पूजा पर रोक लगा दी और सभी को अपनी ही आराधना करने के लिए बाध्य किया। इसी बीच उसके घर पुत्र प्रह्लाद का जन्म हुआ जो बचपन से ही भगवान विष्णु के परम भक्त थे।

    हिरण्यकश्यप ने कई बार प्रह्लाद को अपनी भक्ति छोड़ने के लिए कहा लेकिन वे अडिग रहे। क्रोध में आकर उसने अपने ही पुत्र को मारने के कई प्रयास किए लेकिन हर बार भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए। अंततः जब उसने प्रह्लाद से पूछा कि उसका भगवान कहां है और प्रह्लाद ने उत्तर दिया कि वह हर जगह मौजूद हैं तो हिरण्यकश्यप ने एक खंभे की ओर इशारा करते हुए चुनौती दी।

    तभी उस खंभे से भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में प्रकट हुए। यह रूप आधा मनुष्य और आधा सिंह का था। भगवान ने संध्या काल में, घर की दहलीज पर, हिरण्यकश्यप को अपनी गोद में रखकर अपने नाखूनों से उसका वध कर दिया। इस प्रकार उन्होंने ब्रह्मा के वरदान की सभी शर्तों को पूर्ण करते हुए अधर्म का अंत किया।

    इसके बाद भगवान नरसिंह ने अपने भक्त प्रह्लाद को आशीर्वाद दिया और सभी देवताओं ने उनकी स्तुति की। यह कथा इस बात का प्रतीक है कि सच्ची भक्ति और विश्वास के आगे सबसे बड़ा अहंकार भी टिक नहीं सकता।

    नरसिंह जयंती का यह पर्व हमें सिखाता है कि जब भी धर्म पर संकट आता है तब भगवान स्वयं अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। इस दिन व्रत, पूजा और कथा का श्रवण करने से जीवन में साहस, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा सभी प्रकार के भय और कष्ट दूर होते हैं।

  • आज नरसिंह जयंती का महापर्व: दुर्लभ संयोग में करें सही पूजा, इन गलतियों से दूर रहें वरना मिलेगा विपरीत फल

    आज नरसिंह जयंती का महापर्व: दुर्लभ संयोग में करें सही पूजा, इन गलतियों से दूर रहें वरना मिलेगा विपरीत फल


    नई दिल्ली । आज पूरे देश में नरसिंह जयंती का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान विष्णु के उग्र और रक्षक अवतार भगवान नरसिंह को समर्पित है जिनकी पूजा से भक्तों के जीवन से भय, बाधाएं और शत्रु समाप्त होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष फल मिलता है लेकिन छोटी-छोटी गलतियां भी पूजा का प्रभाव कम कर सकती हैं इसलिए सावधानी बेहद जरूरी मानी गई है।

    पंचांग के अनुसार इस वर्ष चतुर्दशी तिथि 29 अप्रैल की शाम से शुरू होकर 30 अप्रैल की रात तक रहेगी और उदयातिथि के आधार पर आज गुरुवार को ही नरसिंह जयंती मनाई जा रही है। इस बार का पर्व इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन दो बेहद शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहे हैं जो इसकी आध्यात्मिक शक्ति को कई गुना बढ़ा देते हैं।

    पहला संयोग है गुरुवार का जो भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित दिन माना जाता है। ऐसे में नरसिंह जयंती का इस दिन पड़ना इसे और भी फलदायी बना देता है। दूसरा बड़ा संयोग है रवि योग का निर्माण जिसे ज्योतिष शास्त्र में सभी दोषों को समाप्त करने वाला और कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में की गई पूजा, व्रत और दान अक्षय फल प्रदान करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

    इस पावन अवसर पर भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ-सुथरे तथा पीले या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान नरसिंह की मूर्ति या तस्वीर का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के दौरान भगवान को प्रसन्न करने के लिए सत्तू, तिल और गुड़ का दान करना भी विशेष फलदायी बताया गया है। इन उपायों से भगवान की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

    लेकिन जितना जरूरी सही पूजा करना है उतना ही जरूरी कुछ गलतियों से बचना भी है। इस दिन घर में किसी भी प्रकार का झगड़ा या क्लेश करना अशुभ माना जाता है क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और पूजा का फल नष्ट हो सकता है। इसके अलावा प्याज, लहसुन या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सात्विकता बनाए रखना बेहद आवश्यक है।

    इसके साथ ही किसी भी असहाय या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान करना बहुत बड़ा दोष माना गया है। नरसिंह भगवान को धर्म और न्याय का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस दिन करुणा, दया और सेवा भाव रखना विशेष रूप से जरूरी होता है। ऐसा करने से ही पूजा का पूरा लाभ प्राप्त होता है।

    नरसिंह जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि यह आस्था और विश्वास का प्रतीक भी है। यह हमें सिखाता है कि यदि विश्वास अटूट हो तो भगवान किसी भी रूप में अपने भक्त की रक्षा के लिए प्रकट हो सकते हैं। इसलिए इस दिन श्रद्धा, नियम और सकारात्मक भाव के साथ पूजा करना ही सबसे बड़ा उपाय है जो जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा प्रदान करता है।

  • समानता और सेवा के संदेश के साथ मनाया गया गुरु अमरदास जी का प्रकाश पर्व, नेताओं ने किया नमन

    समानता और सेवा के संदेश के साथ मनाया गया गुरु अमरदास जी का प्रकाश पर्व, नेताओं ने किया नमन

    नई दिल्ली । सिख धर्म के तीसरे गुरु श्री गुरु अमरदास जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर देशभर में श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला। इस पावन अवसर पर कई प्रमुख नेताओं ने गुरु साहिब को नमन करते हुए उनके आदर्शों और शिक्षाओं को याद किया। पूरे देश में यह दिन सेवा, समानता और विनम्रता के संदेश के रूप में मनाया गया।

    इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरु अमरदास जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके जीवन से हमें निस्वार्थ सेवा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने समाज में समानता और मानवता के कल्याण के लिए जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुरु साहिब को नमन करते हुए उनके जीवन को समर्पण, सेवा और विनम्रता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि गुरु अमरदास जी ने समाज में महिलाओं को सम्मान और समान अधिकार दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया, जो आज भी प्रेरणादायक है।

    इसके अलावा अन्य नेताओं ने भी इस अवसर पर अपने संदेश साझा किए और गुरु अमरदास जी के जीवन मूल्यों को याद किया। कई संदेशों में ‘पंगत और संगत’ की परंपरा का उल्लेख किया गया, जिसे सामाजिक एकता और समानता का मजबूत आधार माना जाता है।

    गुरु अमरदास जी की शिक्षाओं में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने, समानता स्थापित करने और मानवता को सर्वोपरि रखने का संदेश शामिल है। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम करते हैं और लोगों को एकता के सूत्र में बांधते हैं।

    इस प्रकाश पर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि गुरु साहिब की शिक्षाएं केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने वाली हैं, जो हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।