Category: Religious Astrology

  • हजार कमल लेकर पहुंचे थे विष्णु जी, शिव ने छिपा दिया एक फूल तो चढ़ा दिया अपना कमलनयन, फिर मिला दिव्य वरदान

    हजार कमल लेकर पहुंचे थे विष्णु जी, शिव ने छिपा दिया एक फूल तो चढ़ा दिया अपना कमलनयन, फिर मिला दिव्य वरदान



    नई दिल्ली । सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान महादेव की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। सावन के सोमवार पर श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और भगवान शिव से सुख शांति समृद्धि तथा मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। शिव पुराण में भगवान शिव से जुड़ी ऐसी अनेक कथाओं का वर्णन मिलता है जिनमें उनकी करुणा के साथ साथ भक्तों की परीक्षा लेने वाली लीलाओं का भी उल्लेख है। ऐसी ही एक कथा भगवान विष्णु से जुड़ी है जिसमें भगवान शिव ने उनकी भक्ति की कठिन परीक्षा ली और अंत में प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य सुदर्शन चक्र प्रदान किया।

    पौराणिक कथा के अनुसार एक समय दानवों और दैत्यों का अत्याचार बहुत बढ़ गया था। उनके बढ़ते प्रभाव से देवता चिंतित हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने भगवान शिव को प्रसन्न करने का संकल्प लिया। इसके बाद उन्होंने कैलाश पर्वत पर पहुंचकर महादेव की विधि विधान से आराधना शुरू की। भगवान विष्णु ने शिव की स्तुति करते हुए उनके एक हजार नामों का स्मरण किया और प्रत्येक नाम के साथ भगवान शिव को एक कमल पुष्प अर्पित करने का संकल्प लिया।

    कथा के अनुसार भगवान विष्णु की भक्ति और उनके संकल्प की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ने एक लीला रची। उन्होंने भगवान विष्णु द्वारा पूजा के लिए लाए गए एक हजार कमल पुष्पों में से एक कमल को छिपा दिया। भगवान विष्णु को इसकी जानकारी नहीं थी। जब पूजा के दौरान उन्होंने कमल गिनने शुरू किए तो एक पुष्प कम मिला। उन्होंने काफी खोज की लेकिन वह कमल कहीं नहीं मिला।

    भगवान विष्णु को कमलनयन भी कहा जाता है। जब उन्हें लगा कि उनकी पूजा एक कमल के अभाव में अधूरी रह जाएगी तो उन्होंने अपनी भक्ति को पूरा करने के लिए अद्भुत त्याग का निर्णय लिया। उन्होंने अपने एक नेत्र को कमल के समान मानकर उसे भगवान शिव को अर्पित करने का संकल्प किया। जैसे ही भगवान विष्णु अपना नेत्र अर्पित करने के लिए आगे बढ़े उसी समय भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट हो गए।

    भगवान शिव ने भगवान विष्णु को रोक दिया और उनकी आंख को पहले जैसा कर दिया। महादेव ने विष्णु जी की अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। तब भगवान विष्णु ने किसी व्यक्तिगत सुख की मांग नहीं की बल्कि दानवों और दैत्यों के अत्याचार से सृष्टि की रक्षा करने के लिए एक ऐसे दिव्य और अजेय अस्त्र की इच्छा जताई जिससे अधर्म का नाश किया जा सके।

    भगवान शिव ने उनकी इच्छा पूरी करते हुए उन्हें दिव्य सुदर्शन चक्र प्रदान किया। यही सुदर्शन चक्र आगे चलकर भगवान विष्णु के प्रमुख अस्त्रों में शामिल हुआ। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने इसी दिव्य अस्त्र की शक्ति से दैत्यों का संहार किया और सृष्टि की रक्षा की। इस तरह भगवान शिव और भगवान विष्णु के बीच भक्ति तथा आशीर्वाद का यह प्रसंग हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है।

    सावन में इस कथा का स्मरण भक्तों को भक्ति के साथ समर्पण और निस्वार्थ भाव का संदेश भी देता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं। सावन के दौरान श्रद्धालु जलाभिषेक रुद्राभिषेक बेलपत्र अर्पित करने और शिव मंत्रों का जाप करने जैसी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं। मान्यता के अनुसार सच्चे मन से की गई शिव आराधना से मन को शांति मिलती है और भक्त के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि इन धार्मिक मान्यताओं को आस्था और पौराणिक परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाता है।

    भगवान शिव और भगवान विष्णु की यह कथा इस बात का प्रतीक मानी जाती है कि सच्ची भक्ति में केवल पूजा की विधि नहीं बल्कि श्रद्धा त्याग और समर्पण का भाव भी महत्वपूर्ण होता है। सावन के पावन महीने में इस कथा का स्मरण भक्तों को अपनी आस्था को और मजबूत करने तथा जीवन में सत्य धर्म और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

  • कहीं पाताल में समा जाता है जल तो कहीं बिजली गिरते ही टूट जाता है शिवलिंग, जानें महादेव के 5 रहस्यमयी धाम

    कहीं पाताल में समा जाता है जल तो कहीं बिजली गिरते ही टूट जाता है शिवलिंग, जानें महादेव के 5 रहस्यमयी धाम


    नई दिल्ली । सावन का दूसरा सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पावन अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। भारत में भगवान शिव को समर्पित हजारों मंदिर हैं लेकिन इनमें कुछ ऐसे धाम भी हैं जो अपनी अनोखी प्राकृतिक परिस्थितियों और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन मंदिरों के बारे में ऐसी कई कथाएं प्रचलित हैं जिन्हें सुनकर श्रद्धालु भी आश्चर्यचकित रह जाते हैं। आइए जानते हैं भगवान शिव के ऐसे ही पांच अनोखे धामों के बारे में।

    गुजरात के कैंबे तट पर अरब सागर के बीच स्थित स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर सबसे अनोखे शिव मंदिरों में गिना जाता है। इस मंदिर की खासियत यह है कि ज्वार आने पर समुद्र का पानी शिवलिंग को पूरी तरह ढक लेता है और मंदिर कुछ समय के लिए दिखाई देना बंद हो जाता है। ज्वार उतरने के बाद मंदिर फिर नजर आने लगता है। इसी वजह से श्रद्धालु यहां समुद्र के ज्वार भाटे के समय को ध्यान में रखकर दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार तारकासुर के वध के बाद भगवान कार्तिकेय ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी।

    गुजरात के भावनगर जिले में स्थित निष्कलंक महादेव मंदिर भी समुद्र के बीच अपनी अनोखी पहचान रखता है। कोलियाक तट से करीब तीन किलोमीटर अंदर स्थित यह मंदिर ज्वार आने पर पानी में डूब जाता है और केवल मंदिर का ध्वज दिखाई देता है। समुद्र का पानी उतरने के बाद श्रद्धालु पैदल चलकर यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी। इसी धार्मिक विश्वास के कारण यह स्थान भक्तों के बीच विशेष महत्व रखता है।

    राजस्थान के धौलपुर में चंबल के बीहड़ों के बीच स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर भी अपने रहस्यमय स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। यहां शिवलिंग के रंग बदलने को लेकर मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि सुबह इसका रंग लाल दिखाई देता है जबकि दोपहर में केसरिया और शाम के समय काला नजर आता है। इसके अलावा शिवलिंग की गहराई को लेकर भी कई तरह की मान्यताएं हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर आस्था और रहस्य का अनोखा संगम है।

    छत्तीसगढ़ में स्थित लक्ष्मेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी विशेष मान्यताओं के कारण प्रसिद्ध है। यहां मौजूद शिवलिंग को लक्ष्यलिंग कहा जाता है और इसमें हजारों छोटे छिद्र होने की बात कही जाती है। मान्यता है कि इनमें से एक छिद्र पाताल तक जाता है और उसमें चढ़ाया गया जल दिखाई नहीं देता। वहीं एक अन्य स्थान पर पानी हमेशा भरा रहने की मान्यता है जिसे अक्षय कुंड कहा जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार इस स्थान का संबंध भगवान राम और लक्ष्मण से भी जोड़ा जाता है।

    हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में ऊंचे पहाड़ पर स्थित बिजली महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि करीब 12 वर्ष के अंतराल पर यहां शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है। इसके बाद मंदिर के पुजारी मक्खन की सहायता से शिवलिंग के टुकड़ों को जोड़ते हैं और कुछ समय बाद वह दोबारा अपने पुराने स्वरूप में आ जाता है। इसी मान्यता ने इस मंदिर को देशभर में अलग पहचान दी है।
    हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में ऊंचे पहाड़ पर स्थित बिजली महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि करीब 12 वर्ष के अंतराल पर यहां शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है। इसके बाद मंदिर के पुजारी मक्खन की सहायता से शिवलिंग के टुकड़ों को जोड़ते हैं और कुछ समय बाद वह दोबारा अपने पुराने स्वरूप में आ जाता है। इसी मान्यता ने इस मंदिर को देशभर में अलग पहचान दी है।

    भगवान शिव के इन पांचों धामों की खासियत सिर्फ इनके धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है। समुद्र के ज्वार से मंदिर का डूबना हो या प्राकृतिक घटनाओं से जुड़ी मान्यताएं इन स्थानों का वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव देता है। हालांकि इनसे जुड़े चमत्कारों और मान्यताओं को धार्मिक विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए। सावन के पवित्र महीने में इन धामों की चर्चा और भी बढ़ जाती है और देशभर से श्रद्धालु महादेव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।

  • सावन के दूसरे सोमवार पर फलाहार में बनाएं कुरकुरी कुट्टू की पकौड़ी, आसान है इसकी रेसिपी

    सावन के दूसरे सोमवार पर फलाहार में बनाएं कुरकुरी कुट्टू की पकौड़ी, आसान है इसकी रेसिपी


    नई दिल्ली । 
    सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान आने वाले सोमवार को श्रद्धालु व्रत रखते हैं और पूरे दिन फलाहार करते हुए भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। इस साल सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ रहा है। ऐसे में व्रत रखने वाले लोगों के सामने अक्सर यह सवाल रहता है कि फलाहार में ऐसा क्या बनाया जाए जो स्वादिष्ट होने के साथ आसानी से तैयार भी हो जाए।

    व्रत के दौरान कुट्टू का आटा कई घरों में इस्तेमाल किया जाता है। इससे पूरी, चीला, पराठा और पकौड़ी जैसे कई व्यंजन बनाए जा सकते हैं। अगर सोमवार के व्रत में कुछ अलग और स्वादिष्ट खाने का मन है, तो कुट्टू के आटे से बनने वाली आलू की पकौड़ी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

    कुट्टू की पकौड़ी बनाने के लिए मुख्य रूप से कुट्टू का आटा और आलू की जरूरत होती है। इसके साथ स्वाद के लिए सेंधा नमक, हरी मिर्च, अदरक, धनिया और काली मिर्च का इस्तेमाल किया जा सकता है। व्रत के दौरान सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का ही प्रयोग किया जाता है।

    इस रेसिपी के लिए करीब एक कटोरी कुट्टू का आटा लिया जा सकता है। इसके साथ छह आलू, एक हरी मिर्च, एक चम्मच अदरक, धनिया, काली मिर्च और सेंधा नमक की जरूरत होगी। सामग्री की मात्रा स्वाद और जरूरत के अनुसार कम या ज्यादा की जा सकती है।

    सबसे पहले आलू को उबालकर ठंडा कर लें और फिर उन्हें अच्छी तरह मैश कर लें। इसके बाद इसमें बारीक कटी हरी मिर्च, अदरक, धनिया, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाएं। सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाने के बाद इसमें कुट्टू का आटा डालकर मिश्रण तैयार किया जा सकता है।

    कुट्टू का आटा मिलाते समय मिश्रण की स्थिरता का ध्यान रखना जरूरी है। इसे इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि पकौड़ी आसानी से आकार ले सके। जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर मिश्रण को तैयार किया जा सकता है। इसके बाद तैयार मिश्रण से छोटे-छोटे हिस्से लेकर पकौड़ी का आकार दिया जा सकता है।

    अब एक कड़ाही में तेल गर्म करें। तेल पर्याप्त गर्म होने के बाद तैयार पकौड़ियों को सावधानी से डालें और उन्हें मध्यम आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक पकाएं। पकौड़ियों को बीच-बीच में पलटते रहें, ताकि वे सभी तरफ से अच्छी तरह पक जाएं।

    तैयार होने के बाद पकौड़ियों को कड़ाही से निकालकर कुछ देर के लिए अतिरिक्त तेल निकलने दें। इसके बाद इन्हें व्रत में खाई जाने वाली चटनी या दही के साथ परोसा जा सकता है। अगर आप व्रत के दौरान तेल कम इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो पकौड़ी तैयार करने की अपनी पसंदीदा कम तेल वाली विधि भी अपना सकते हैं।

    कुट्टू की पकौड़ी सावन सोमवार के फलाहार में स्वाद में बदलाव लाने का आसान तरीका है। आलू और कुट्टू के आटे से तैयार यह व्यंजन कम सामग्री में बनाया जा सकता है और परिवार के अन्य सदस्य भी इसे पसंद कर सकते हैं। हालांकि व्रत में भोजन को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार ही सामग्री का इस्तेमाल करना उचित है।

  • रक्षाबंधन 2026 पर नहीं रहेगा भद्रा का साया, जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    रक्षाबंधन 2026 पर नहीं रहेगा भद्रा का साया, जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    नई दिल्ली । रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। सावन मास की पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस त्योहार में बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं भाई भी बहन की सुरक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेते हैं। वर्ष 2026 में रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ समय को लेकर लोगों के बीच विशेष उत्सुकता बनी हुई है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। उदयकाल में पूर्णिमा तिथि होने के कारण रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। ऐसे में बहनों को 28 अगस्त को ही भाई की कलाई पर राखी बांधनी चाहिए।

    रक्षाबंधन 2026 की सबसे खास बात यह है कि इस बार राखी बांधने के समय भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है और इसी वजह से रक्षाबंधन पर राखी बांधने के समय भद्रा की स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस बार भद्रा 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी।

    राखी बांधने के लिए इस वर्ष सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इस अवधि में बहनें भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांध सकती हैं। इस शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 3 घंटे 51 मिनट रहेगी। भद्रा समाप्त होने के कारण इस अवधि में राखी बांधने को लेकर कोई भद्रा बाधा नहीं बताई गई है।

    हालांकि, रक्षाबंधन के दिन राहुकाल का भी ध्यान रखना जरूरी होगा। 28 अगस्त को राहुकाल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इसलिए शुभ कार्य करने वाले परिवार इस अवधि में राखी बांधने से बच सकते हैं। राखी बांधने की योजना बनाते समय शुभ मुहूर्त और राहुकाल दोनों को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा।

    रक्षाबंधन की पूजा के लिए राखी की थाली को भी विधि-विधान से तैयार किया जाता है। थाली में राखी के साथ रोली, अक्षत यानी चावल, दीपक और मिठाई रखी जाती है। सबसे पहले भाई को आसन पर बैठाकर उनके मस्तक पर रोली से तिलक लगाया जाता है और अक्षत अर्पित किए जाते हैं।

    इसके बाद भाई की आरती उतारकर उनकी दाईं कलाई पर राखी बांधी जाती है। राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाई जाती है। बहन अपने भाई की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती है। भाई भी बहन को उपहार देकर उसके प्रति अपने स्नेह और जिम्मेदारी का भाव प्रकट करता है।

    इस तरह वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक राखी बांधने का शुभ समय रहेगा और इस दौरान भद्रा का प्रभाव नहीं होगा। परिवार शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर भाई-बहन के इस खास पर्व को विधि-विधान और उल्लास के साथ मना सकते हैं।

  • भगवान शिव का दिन सोमवार घर की ऊर्जा सुधारने के लिए अपनाएं ये असरदार वास्तु टिप्स

    भगवान शिव का दिन सोमवार घर की ऊर्जा सुधारने के लिए अपनाएं ये असरदार वास्तु टिप्स


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ वास्तु शास्त्र में भी सोमवार को घर के वातावरण को सकारात्मक बनाने के लिए कुछ आसान उपाय किए जाते हैं। माना जाता है कि घर में साफ सफाई सकारात्मक सोच और सही दिशा का ध्यान रखने से वातावरण बेहतर बनाया जा सकता है। सोमवार के दिन किए जाने वाले कुछ वास्तु उपाय घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का माहौल बनाने में सहायक माने जाते हैं। हालांकि इन उपायों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के रूप में ही देखना चाहिए।

    सोमवार के दिन सबसे पहले घर की साफ सफाई पर ध्यान देना चाहिए। खासतौर पर घर के मुख्य द्वार के आसपास गंदगी या अनावश्यक सामान जमा नहीं होना चाहिए। वास्तु परंपरा में मुख्य द्वार को घर में ऊर्जा के प्रवेश का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसलिए सोमवार की सुबह मुख्य द्वार को साफ करके वहां स्वच्छ पानी का छिड़काव किया जा सकता है। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करें और भगवान शिव की पूजा करें। पूजा स्थल को व्यवस्थित और स्वच्छ रखना भी सकारात्मक वातावरण के लिए अच्छा माना जाता है।

    सोमवार को घर के पूजा स्थान में भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग की विधि अनुसार पूजा की जा सकती है। शिवलिंग पर जल अर्पित करना और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। यदि घर में शिवलिंग स्थापित है तो उसकी पूजा अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार ही करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और घर परिवार की सुख शांति के लिए प्रार्थना करें।

    वास्तु से जुड़े पारंपरिक उपायों में सोमवार के दिन घर के उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण को साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि यह स्थान पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त होता है। यहां बेकार सामान जूते चप्पल या गंदगी जमा करने से बचना चाहिए। अगर घर में पूजा का स्थान इसी दिशा में है तो उसे विशेष रूप से साफ रखना बेहतर माना जाता है।

    सोमवार को घर में सुगंधित वातावरण बनाए रखने के लिए धूप या दीपक जलाया जा सकता है। हालांकि धूप का इस्तेमाल करते समय कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखना जरूरी है। घर में प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवेश भी वातावरण को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए दिन के समय पर्दे खोलकर घर में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी आने दें।

    धन और समृद्धि से जुड़े वास्तु उपायों में भी सोमवार को घर को अव्यवस्थित रखने से बचने की सलाह दी जाती है। घर में टूटे हुए सामान बेकार इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं या लंबे समय से इस्तेमाल नहीं होने वाली चीजों को जमा करके रखने के बजाय उन्हें व्यवस्थित करना बेहतर होता है। मान्यता है कि साफ और व्यवस्थित घर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है और इससे घर का वातावरण भी बेहतर महसूस होता है।

    सोमवार के दिन परिवार के सदस्यों के साथ शांत व्यवहार करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन क्रोध विवाद और नकारात्मक बातचीत से बचकर भगवान शिव का स्मरण करना शुभ होता है। जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना या अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी पुण्यदायक माना जाता है। इस तरह सोमवार को पूजा के साथ घर की साफ सफाई और सकारात्मक व्यवहार पर ध्यान देकर दिन को बेहतर बनाया जा सकता है। वास्तु उपायों को अंधविश्वास के बजाय पारंपरिक मान्यताओं के रूप में समझना चाहिए और किसी भी बड़े बदलाव से पहले व्यावहारिक जरूरतों को प्राथमिकता देना बेहतर है।

  • सावन सोमवार व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम एक छोटी गलती पड़ सकती है भारी

    सावन सोमवार व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम एक छोटी गलती पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली । सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय माना जाता है और इस दौरान पड़ने वाले सोमवार का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने तथा व्रत रखने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने सुख समृद्धि पारिवारिक शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से सावन सोमवार का व्रत रखते हैं। अविवाहित लोग अच्छे जीवनसाथी की कामना से भी यह व्रत करते हैं। हालांकि व्रत का पूरा लाभ पाने के लिए केवल उपवास करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि पूजा पाठ के साथ कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है।

    सावन सोमवार के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनने के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में या शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करना शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करने के बाद दूध दही शहद और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र धतूरा और पुष्प अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वह साफ और साबुत हो। पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है।

    सावन सोमवार व्रत में खानपान का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जल व्रत रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का तरीका चुनना उचित होता है। फल दूध दही मखाना कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन और सेंधा नमक का सेवन व्रत के दौरान किया जा सकता है। सामान्य नमक अनाज और तामसिक भोजन से बचने की परंपरा है। यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है तो लंबे समय तक भूखे या निर्जल रहने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होता है।

    व्रत के दौरान केवल भोजन से जुड़े नियमों का ही नहीं बल्कि व्यवहार से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार के दिन क्रोध झूठ निंदा और किसी को अपशब्द कहने से बचना चाहिए। मन को शांत रखते हुए भगवान शिव का स्मरण करना और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना शुभ माना जाता है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तु का दान भी किया जा सकता है।

    सावन सोमवार की शाम भगवान शिव की दोबारा पूजा और आरती करने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान शिव को भोग अर्पित करें और फिर प्रसाद ग्रहण करें। पूजा के दौरान परिवार की सुख शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की जा सकती है। हालांकि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत की परंपराएं अलग हो सकती हैं इसलिए अपने परिवार की धार्मिक परंपरा का भी ध्यान रखना चाहिए। सावन सोमवार व्रत का सबसे महत्वपूर्ण नियम श्रद्धा संयम और सात्विक विचारों के साथ भगवान शिव की आराधना करना माना जाता है।

  • सोमवार व्रत से मिलेगा महादेव का आशीर्वाद, सुबह से शाम तक ऐसे करें पूजा और इन जरूरी नियमों का रखें ध्यान

    सोमवार व्रत से मिलेगा महादेव का आशीर्वाद, सुबह से शाम तक ऐसे करें पूजा और इन जरूरी नियमों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि सोमवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है। खासतौर पर सावन के सोमवार का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। माना जाता है कि इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने और पूरे विधि विधान से पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। कई भक्त सुख समृद्धि पारिवारिक शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से सोमवार का व्रत रखते हैं। वहीं अविवाहित लोग मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति और विवाहित लोग दांपत्य जीवन में सुख शांति के लिए भी यह व्रत करते हैं।

    सोमवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनने के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में या किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का अभिषेक करना शुभ माना जाता है। सबसे पहले शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। इसके बाद दूध दही शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जा सकता है। हालांकि पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री शुद्ध और सात्विक होनी चाहिए। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र धतूरा और पुष्प अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र बेहद प्रिय माना जाता है इसलिए बेलपत्र चढ़ाते समय श्रद्धा और भक्ति का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    पूजा के दौरान भगवान शिव के साथ माता पार्वती गणेश जी और भगवान कार्तिकेय का भी स्मरण किया जा सकता है। इसके बाद धूप दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। सोमवार व्रत में महामृत्युंजय मंत्र या भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करना भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप कर सकते हैं। पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें और दिनभर भगवान शिव का ध्यान करते हुए सात्विक आहार का पालन करें।

    सोमवार व्रत में भोजन को लेकर अलग अलग परंपराएं हैं। कुछ लोग पूरे दिन निर्जल व्रत रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। फल दूध दही मखाना कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन और सेंधा नमक का सेवन कई व्रत रखने वाले लोग करते हैं। अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही व्रत का पालन करना उचित माना जाता है। व्रत के दौरान अनाज नमक की सामान्य किस्म और तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है।

    शाम के समय दोबारा भगवान शिव की पूजा और आरती करने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान शिव को भोग लगाएं और फिर प्रसाद ग्रहण करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार के दिन क्रोध झूठ निंदा और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है।

    ध्यान रखें कि सोमवार व्रत की विधि और नियम अलग अलग क्षेत्रों तथा परिवारों की परंपराओं के अनुसार कुछ अलग हो सकते हैं। इसलिए व्रत करते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं का भी ध्यान रखना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा संयम और सकारात्मक भावना के साथ भगवान शिव की आराधना करना है।

  • उच्च राशि में गुरु की ‘अमृत दृष्टि’, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत, करियर-कारोबार में मिल सकता है बड़ा लाभ

    उच्च राशि में गुरु की ‘अमृत दृष्टि’, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत, करियर-कारोबार में मिल सकता है बड़ा लाभ


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धन-संपत्ति, संतान, धर्म और भाग्य का कारक ग्रह माना जाता है। जब बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित होते हैं, तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उनके शुभ प्रभाव और भी प्रबल हो जाते हैं। गुरु की पांचवीं, सातवीं और नौवीं दृष्टि को विशेष फलदायी माना गया है।

    मान्यता है कि गुरु जिस भाव में विराजमान होते हैं, उससे भी अधिक शुभ प्रभाव उनकी दृष्टि से मिलने वाले भावों पर पड़ सकता है। इस समय उच्च राशि में स्थित गुरु की तीन दिव्य दृष्टियां तीन राशियों के लिए विशेष लाभकारी मानी जा रही हैं। इससे करियर, कारोबार और आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव के योग बन सकते हैं।

    वृश्चिक राशि
    गुरु कर्क राशि में रहते हुए वृश्चिक राशि के पंचम भाव पर अपनी पांचवीं दृष्टि डाल रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक यह समय विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए अनुकूल हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों की निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी और सही रणनीति से आर्थिक लाभ के अवसर बन सकते हैं। शेयर बाजार या रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भी फायदा मिलने के योग हैं। संतान पक्ष से कोई अच्छी खबर मिल सकती है, जिससे परिवार में खुशी का माहौल बनेगा।

    मकर राशि
    मकर राशि के सप्तम भाव पर गुरु की सातवीं समसप्तक दृष्टि पड़ रही है। सप्तम भाव को व्यापार और साझेदारी से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में नए कारोबारी सौदे तय होने और साझेदारी में काम करने वालों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। कार्यस्थल पर आपकी स्थिति मजबूत हो सकती है और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने से प्रमोशन के रास्ते खुल सकते हैं। निजी जीवन की बात करें तो वैवाहिक रिश्तों में चल रहा तनाव कम हो सकता है और आपसी तालमेल बेहतर होने की उम्मीद है।

    मीन राशि
    मीन राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं। इस राशि के नवम भाव पर गुरु की नौवीं दृष्टि पड़ रही है। नवम भाव को भाग्य, धर्म और लंबी यात्राओं से संबंधित माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार गुरु की यह दृष्टि लंबे समय से अटके कामों में गति ला सकती है। सरकारी और कानूनी मामलों में सफलता के रास्ते खुल सकते हैं। मनचाही जगह नौकरी ट्रांसफर या विदेश से संबंधित कोई अवसर भी मिल सकता है। कारोबारी नए प्रोजेक्ट शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। धार्मिक यात्राओं के योग बनने के साथ किसी बड़े गुरु या अनुभवी व्यक्ति का मार्गदर्शन भी मिल सकता है।

  • Aaj Ka Rashifal 10 August 2026: सावन के दूसरे सोमवार 3 राशियों पर बरसेगी भोलेनाथ की कृपा, धन लाभ के साथ खुलेंगे तरक्की के रास्ते

    Aaj Ka Rashifal 10 August 2026: सावन के दूसरे सोमवार 3 राशियों पर बरसेगी भोलेनाथ की कृपा, धन लाभ के साथ खुलेंगे तरक्की के रास्ते


    नई दिल्ली । आज 10 अगस्त 2026 को सावन का दूसरा सोमवार है और धार्मिक दृष्टि से यह दिन बेहद खास माना जा रहा है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और सोमवार के दिन शिव आराधना का महत्व और भी बढ़ जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज कुछ राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में लाभ मिल सकता है जबकि कई लोगों के लिए नौकरी कारोबार और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव के संकेत हैं। खासतौर पर मेष वृषभ और कर्क राशि के जातकों के लिए आज का दिन धन लाभ और तरक्की के लिहाज से अच्छा रहने की संभावना है।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन आर्थिक रूप से राहत देने वाला हो सकता है। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की उम्मीद बन सकती है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में अपनी मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। अधिकारियों की ओर से सहयोग मिलने के साथ नई जिम्मेदारी भी मिल सकती है। कारोबार करने वालों के लिए कोई नया सौदा लाभ का कारण बन सकता है। परिवार में किसी शुभ समाचार से माहौल खुशनुमा रहेगा। सावन के दूसरे सोमवार पर भगवान शिव का जलाभिषेक करना आपके लिए शुभ फलदायी माना जा सकता है।

    वृषभ राशि वालों के लिए आज का दिन धन लाभ के कई अवसर लेकर आ सकता है। आय के नए साधन बनने के संकेत हैं और पुराने निवेश से भी लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि आर्थिक मामलों में किसी भी तरह का जोखिम लेने से पहले अच्छी तरह विचार करना जरूरी होगा। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को कोई अच्छी खबर मिल सकती है। व्यापारियों को पुराने संपर्कों से फायदा मिल सकता है। दांपत्य जीवन में आपसी समझ और प्रेम बढ़ेगा। आज परिवार के साथ धार्मिक गतिविधियों में शामिल होना मानसिक शांति दे सकता है।

    कर्क राशि के जातकों के लिए सावन का दूसरा सोमवार विशेष शुभ रह सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं और रुके हुए काम दोबारा गति पकड़ सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। कारोबार में किसी नई योजना पर काम शुरू करने का अवसर मिल सकता है। परिवार के किसी सदस्य से महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। धन से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचना बेहतर रहेगा। स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न करें और पर्याप्त आराम लें।

    मिथुन राशि वालों के लिए दिन सामान्य से बेहतर रहने की संभावना है। कामकाज में व्यस्तता बढ़ेगी लेकिन मेहनत का परिणाम भी प्राप्त होगा। सिंह राशि के जातकों को करियर में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। कन्या राशि वालों के रुके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं। तुला राशि के जातकों को खर्चों पर नियंत्रण रखना होगा। वृश्चिक राशि वालों के लिए कार्यक्षेत्र में सफलता के योग बन रहे हैं। धनु राशि के लोगों को यात्रा या काम से जुड़ा कोई नया अवसर मिल सकता है। मकर राशि वालों को पुराने निवेश से फायदा हो सकता है। कुंभ राशि के जातकों को रिश्तों में मधुरता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। मीन राशि वालों के लिए दिन सकारात्मक रह सकता है और कोई शुभ समाचार मन प्रसन्न कर सकता है।

    सावन के दूसरे सोमवार पर सभी राशि के जातक अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। शिवलिंग पर जल अर्पित करना और भगवान शिव का ध्यान करना धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ माना जाता है। हालांकि राशिफल सामान्य ज्योतिषीय आकलन पर आधारित होता है और इसे निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए। आर्थिक या अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय अपनी परिस्थितियों और उचित सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।

  • सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को, 6 साल बाद बन रहे शुभ संयोग में जानें पूजा विधि और शिव आराधना का सही तरीका

    सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को, 6 साल बाद बन रहे शुभ संयोग में जानें पूजा विधि और शिव आराधना का सही तरीका

    नई दिल्ली ।सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान आने वाले सोमवार को शिव भक्तों के लिए खास महत्व प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और बेलपत्र, फूल, धतूरा, फल तथा प्रसाद अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस वर्ष सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ रहा है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस बार सावन के दूसरे सोमवार का महत्व इसलिए और बढ़ गया है क्योंकि सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। उपलब्ध धार्मिक जानकारी के अनुसार, ऐसा शुभ संयोग करीब छह साल बाद बन रहा है। शिव भक्तों के लिए सोमवार और प्रदोष दोनों ही भगवान शिव की उपासना से जुड़े महत्वपूर्ण अवसर माने जाते हैं।

    सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेने की परंपरा है। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दूध या अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक भी कर सकते हैं।

    पूजा के दौरान भगवान शिव को बेलपत्र, शमी, कनेर, धतूरा, चावल और फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आराधना की जाती है। फल, पान, सुपारी और प्रसाद भी पूजा में शामिल किए जा सकते हैं। श्रद्धालु पूरे दिन व्रत रखते हुए भगवान शिव का स्मरण और मंत्र जाप करते हैं।

    भगवान शिव की पूजा में ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप विशेष रूप से किया जाता है। इसे शिव का सरल और प्रमुख मंत्र माना जाता है। श्रद्धालु पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप अपनी श्रद्धा के अनुसार कर सकते हैं।

    सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का संयोग होने के कारण इस दिन शिव आराधना का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। प्रदोष व्रत भी भगवान शिव को समर्पित होता है और प्रदोष काल में शिव पूजा करने की परंपरा है। ऐसे में भक्त सोमवार की पूजा के साथ प्रदोष काल में भी भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।

    इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी किया जाता है। मंत्र है, “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥” धार्मिक मान्यताओं में इस मंत्र को भगवान शिव की उपासना से जुड़ा महत्वपूर्ण मंत्र माना गया है।

    सावन सोमवार के अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और पूरे दिन सात्विक जीवनशैली का पालन करते हैं।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पूजा में दिखावे के बजाय श्रद्धा और भक्ति को महत्व दिया जाता है। इसलिए श्रद्धालु अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा सामग्री का उपयोग कर सकते हैं। व्रत रखने वाले लोगों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए।

    10 अगस्त का दूसरा सावन सोमवार इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि इस दिन सोमवार और प्रदोष व्रत का संयोग बताया जा रहा है। श्रद्धालु सुबह से शिव पूजा के साथ दिनभर भगवान शिव का स्मरण कर सकते हैं और प्रदोष काल में भी विधिपूर्वक आराधना कर सकते हैं।