Category: Religious Astrology

  • नौतपा 2026: इन दानों से सूर्य देव की कृपा और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करें

    नौतपा 2026: इन दानों से सूर्य देव की कृपा और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करें


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में नौतपा को अत्यंत महत्वपूर्ण काल माना गया है। इस अवधि में सूर्य देव अपनी चरम ऊर्जा पर होते हैं और धरती पर भीषण गर्मी महसूस की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय किए गए दान-पुण्य से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति को जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। साथ ही, पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है जिससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

    साल 2026 में नौतपा 25 मई से 2 जून तक रहेगा। इस दौरान किए गए छोटे-छोटे दान भी बड़ा पुण्य प्रदान करते हैं और कुंडली में सूर्य की स्थिति को मजबूत करते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, नौतपा में गेहूं और चावल का दान सबसे उत्तम माना गया है। इससे घर में अन्न की कमी नहीं होती और पितृ भी प्रसन्न होते हैं। गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न दान करना अत्यंत शुभ फल देता है।

    गर्मी के इस मौसम में खरबूजे का दान भी विशेष महत्व रखता है। इसमें जल की मात्रा अधिक होती है, जिससे प्यासे लोगों को राहत मिलती है और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है।

    इसी तरह जल दान यानी प्यासे लोगों को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। इससे जीवन की परेशानियां कम होती हैं और मानसिक शांति मिलती है।

    नौतपा में शरबत का दान भी अत्यंत शुभ माना जाता है। राहगीरों और जरूरतमंदों को ठंडा शरबत पिलाने से सूर्य और चंद्र दोनों की कृपा प्राप्त होती है, जिससे यश और सम्मान बढ़ता है।

    इसके अलावा पंखा दान भी बहुत फलदायी माना गया है। मंदिर, अस्पताल या जरूरतमंदों को पंखा देने से जीवन में सुख-शांति आती है और दरिद्रता दूर होती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नौतपा में सूर्य देव की उपासना का भी विशेष महत्व है। इस दौरान सुबह सूर्य को जल अर्पित करना, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना और जरूरतमंदों की सहायता करना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है।

    कुल मिलाकर, नौतपा का यह समय केवल भीषण गर्मी का नहीं बल्कि दान-पुण्य के जरिए जीवन में शुभता और समृद्धि लाने का भी विशेष अवसर माना जाता है।

  • रविवार व्रत का महत्व और पूजा विधि, किन लोगों के लिए है लाभकारी

    रविवार व्रत का महत्व और पूजा विधि, किन लोगों के लिए है लाभकारी


    नई दिल्ली । रविवार का दिन ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य देव को समर्पित माना गया है। इस दिन किए जाने वाले व्रत और पूजा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि सूर्य आत्मबल, नेतृत्व क्षमता, स्वास्थ्य, पिता का सुख और सामाजिक प्रतिष्ठा के कारक ग्रह हैं। जब कुंडली में सूर्य मजबूत होता है तो व्यक्ति जीवन में सफलता और सम्मान प्राप्त करता है, वहीं कमजोर सूर्य जीवन में बाधाएं बढ़ा सकता है।
     एक विशेष रविवार को रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, शुक्ल योग और ब्रह्म योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि ऐसे शुभ योग में सूर्य उपासना करने से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।

    रविवार व्रत का महत्व
    धार्मिक ग्रंथों, विशेषकर स्कंद पुराण और नारद पुराण में रविवार व्रत का उल्लेख मिलता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर हो या जिनके जीवन में आत्मविश्वास, सम्मान और सफलता की कमी हो। मान्यता है कि लगातार 12 रविवार तक व्रत रखने और विधिपूर्वक सूर्य उपासना करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। व्रत का समापन उद्यापन के साथ किया जाता है।

    सूर्य देव की पूजा विध
    रविवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और पूजा स्थल को स्वच्छ रखना चाहिए। इसके बाद एक चौकी पर लाल या साफ कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखी जाती है।

    तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें रोली, अक्षत और लाल फूल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य देना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके साथ “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करने और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है।  इस दिन गुड़ और गेहूं का दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है, जबकि नमक का सेवन टालने की सलाह दी जाती है।

    किन लोगों को करना चाहिए रविवार व्रत
    रविवार व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है-
    जिनका आत्मविश्वास कमजोर हो
    जिनका अपने पिता से मतभेद रहता हो
    जिन्हें करियर या सरकारी कार्यों में बाधा आती हो
    जो आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हों
    जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हों
    जिनके जीवन में मान-सम्मान की कमी हो

    रविवार व्रत और सूर्य उपासना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है। शुभ योग में की गई सूर्य आराधना जीवन में नई दिशा, सफलता और सम्मान दिलाने में सहायक मानी गई है।

  • ज्योतिष उपाय: गुड़ और गेहूं के दान से चमक सकती है किस्मत

    ज्योतिष उपाय: गुड़ और गेहूं के दान से चमक सकती है किस्मत


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव को समर्पित माना गया है। सूर्य को आत्मबल, नेतृत्व क्षमता, स्वास्थ्य और सफलता का कारक ग्रह माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्यदेव की उपासना और विशेष दान करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और बाधाएं दूर होती हैं।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुड़ और गेहूं सूर्य से जुड़ी अत्यंत शुभ वस्तुएं मानी जाती हैं। इनका दान करने से सूर्य मजबूत होता है और व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य, सफलता और मानसिक शक्ति बढ़ती है। माना जाता है कि ये वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर जीवन में नई संभावनाओं के द्वार खोलती हैं।

    रविवार के दिन मनोकामना पूर्ति के लिए एक सरल उपाय बताया गया है। लाल कपड़े में थोड़ा गेहूं और गुड़ बांधकर किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से रुके हुए कार्यों में गति आती है और नौकरी, व्यापार तथा करियर में आने वाली बाधाएं कम होती हैं।

    सूर्य उपासना की विधि के अनुसार, रविवार की सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें गुड़, लाल फूल और लाल चंदन मिलाकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद गेहूं के आटे से बनी रोटी या लड्डू का भोग सूर्यदेव को अर्पित करना शुभ माना गया है।

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, घर से किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए निकलते समय गुड़ का सेवन करके पानी पीना भी शुभ फल देता है और सफलता की संभावना बढ़ती है।

    पारिवारिक जीवन में सुख-शांति के लिए भी एक विशेष उपाय बताया गया है। लगातार तीन रविवार तक सवा किलो गुड़ को पवित्र नदी में प्रवाहित करने से पारिवारिक तनाव, मनमुटाव और मानसिक अशांति दूर होने की मान्यता है।

    कुल मिलाकर, रविवार के दिन सूर्य देव की उपासना और गुड़-गेहूं जैसे सरल उपाय न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता के लिए भी अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।

  • Aaj Ka Rashifal 24 May 2026: गजलक्ष्मी और बुधादित्य योग से इन राशियों को मिलेगा लाभ

    Aaj Ka Rashifal 24 May 2026: गजलक्ष्मी और बुधादित्य योग से इन राशियों को मिलेगा लाभ

    नई दिल्ली। 24 मई 2026, रविवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चंद्रमा पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र से सिंह राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे कई राशियों के जीवन में बदलाव और नए अवसरों के संकेत मिल रहे हैं। सूर्य और बुध की युति वृषभ राशि में बुधादित्य योग का निर्माण कर रही है, जो बुद्धि, निर्णय क्षमता और आर्थिक मामलों में मजबूती प्रदान करता है। वहीं मिथुन राशि में शुक्र और गुरु की युति से गजलक्ष्मी योग बन रहा है, जो धन, समृद्धि और सौभाग्य को बढ़ाने वाला माना जाता है।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह दिन आत्मविश्वास और उत्साह बढ़ाने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में प्रगति और यात्रा के योग बन रहे हैं। वृषभ राशि वालों को आर्थिक लाभ और सामाजिक प्रतिष्ठा मिल सकती है। व्यापार और नौकरी दोनों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है।

    मिथुन राशि के जातकों के लिए पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा और आर्थिक संतुलन बना रहेगा। कर्क राशि वालों को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है। सिंह राशि के लिए यह दिन राजनीतिक और सामाजिक संपर्कों से लाभ दिलाने वाला रहेगा।

    कन्या राशि के जातकों के लिए महत्वपूर्ण कार्य पूरे होने और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता के योग बन रहे हैं। तुला राशि वालों को परिवार के साथ आनंदमय समय और धार्मिक यात्राओं का लाभ मिल सकता है। वृश्चिक राशि के जातकों के लिए पारिवारिक सम्मान और व्यापार में लाभ के संकेत हैं।

    धनु राशि के लिए यह दिन सुख-सुविधाओं और सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी का अवसर लेकर आएगा। मकर राशि वालों को कार्यों में दबाव महसूस हो सकता है, इसलिए धैर्य रखना जरूरी होगा। कुंभ राशि के जातकों के लिए यह दिन भाग्यवृद्धि और रुके हुए कार्य पूरे होने का संकेत दे रहा है।

    मीन राशि वालों के लिए पारिवारिक सहयोग और धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी, हालांकि स्वास्थ्य को लेकर सावधानी जरूरी है।

    कुल मिलाकर 24 मई का दिन कई राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ रहा है। विशेष रूप से मिथुन, सिंह, तुला और कुंभ राशि के जातकों को गजलक्ष्मी और बुधादित्य योग का भरपूर लाभ मिलने की संभावना है।

  • हनुमान भक्ति का अनोखा केंद्र: टूंडला का मंदिर, जहां चोला चढ़ाने लगे थे अंग्रेज अधिकारी

    हनुमान भक्ति का अनोखा केंद्र: टूंडला का मंदिर, जहां चोला चढ़ाने लगे थे अंग्रेज अधिकारी

    नई दिल्ली ।   वैसे तो देशभर में हनुमान जी के कई दक्षिणमुखी मंदिर मौजूद हैं, लेकिन एक मंदिर ऐसा है जिसको लेकर यह प्रमाण है कि यहां एक ब्रटिश अधिकारी चर्च छोड़कर बजरंगबली की भक्ति में लीन हो गए और उन्हें चोला चढ़ाने लगे. कहा जाता है कि 150 साल पुराना यह हनुमान मंदिर सिद्ध पीठ है. इस दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रेल मंत्रालय ने भी अपने आधिकारिक दस्तावेजों में भी इसका नाम दर्ज कर रखा है. आइए, अब जानते हैं एक ब्रिटिश अधिकारी किस प्रकार चर्च छोड़कर हनुमान जी को चोला चढ़ाने लगा.
    कहां है यह हनुमान मंदिर?
    यह दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में मौजूद टूंडला रेलवे कॉलोनी में स्थित है. कहा जाता है कि यह प्रसिद्ध हनुमान मंदिर तकरीबन 150 वर्ष पुराना है, जिसका जिक्र रेल मंत्रालय के दस्तावे परिवार का भी गहरा लगाव रहा है.

    क्यों चर्च छोड़ हनुमान जी को चोला चढ़ाने लगे ब्रटिश अधिकारी?
    इस दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर से जुड़ी रोचक कथा ब्रटिश काल से जुड़ी है. अंग्रेजों के शासन काल में टूंडला रेलवे स्टेशन पर सोलोमन नामक एक ब्रटिश अधिकारी तैनात थे. स्थानीय श्रद्धालुओं और रेलकर्मचारियों की गहरी आस्था को देखते हुए उन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार कारवाया. स्थानीय लोग ऐसा मानते हैं कि मंदिर के जीर्णोद्धार के दौरान कुछ ऐसे अद्भुत चमत्कार हुए जिससे प्रभावित होकर ब्रटिश अधिकारी सोलोमन चर्च छोड़कर हनुमान जी के भक्त हो गए. हनुमान जी की भक्ति में लीन ब्रिटिश अधिकारी ने न सिर्फ सनातन धर्म को अपना लिया, बल्कि इस मंदिर में हनुमान जी को प्रतिदिन चोला चढ़ाने लगा. इतना नहीं, चोला चढ़ाने के साथ-साथ उस ब्रटिश अधिकारी ने नियमित रूप से पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी थी. देश जब आजाद हुआ तो उसके बाद सन् 1948 में यह दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर रेल मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों में भी शामिल हो गया.


    पीढ़ी-दर-पीढ़ी जारी है हनुमान जी की सेवा

    मान्यता है कि इस मंदिर में विराजमान हनुमान जी की सेवा का काम दशकों से एक ही परिवार संभाव रहा है. वर्ष 1951 में इस मंदिर में हनुमान जी की पूजा का काम पंडित जगदेव प्रसाद त्रिवेदी को दिया गया. जगदेव प्रसाद त्रिवेदी के देहावसान के बाद पंडित रामस्वरूप त्रिवेदी ने हनुमान जी की सेवा का संकल्प लिया और फिर इस वक्त उनके पुत्र पंडित अरुण त्रिवेदी पूरे सेवाभाव के साथ इस मंदिर के प्रधान पुजारी हैं.
    बॉलीवुड हस्तियों का भी है इस मंदिर से गहरा लगाव
    इस दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर की प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मशहूर अभिनेता राज बब्बर के पिता कौशल बब्बर ने भी कई सालों तक इस मंदिर में निःस्वार्थ भाव से हनुमान जी की सेवा की थी. इतना ही नहीं, कहा जाता है कि खुद राज बब्बर भी कई बार इस मंदिर में हनुमान जी को चोला चढ़ा चुके हैं. इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि वर्तमान में केंद्र सरकार में ऊर्जा सलाहकार व बीजेपी के प्रवक्ता नरेंद्र तनेजा ने भी लगातार 10 वर्षों तक इस हनुमान मंदिर में चोला चढ़ाया.
    क्यों खास है यह दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर?
    इस दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर से जुड़ी खास बात यह है कि पर चोला चढ़ाने से मनोकामना पूर्ण हो जाती है. कहा जाता है कि इस मंदिर में हनुमान जी को चोला चढ़ाने से लिए विदेशों से भी लोग आते हैं.
  • गर्मी के साथ ग्रहों की मार: नौतपा में इन राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण समय, बढ़ सकता है खर्च और विवाद

    गर्मी के साथ ग्रहों की मार: नौतपा में इन राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण समय, बढ़ सकता है खर्च और विवाद

    नई दिल्ली ।  सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में गोचर करते ही नौतपा प्रारंभ हो जाते हैं. नौतपा यानी कि प्रचंड गर्मी के 9 दिन. इस साल 25 मई 2026 से 2 जून 2026 तक नौतपा हैं. ज्‍योतिष के अनुसार यह समय कुछ राशियों के लिए परेशानी भरा हो सकता है.
    धन से लेकर सम्‍मान तक...
    सूर्य 25 मई से 8 जून 2026 तक रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे. सूर्य सम्‍मान, यश, आत्‍मविश्‍वास और सेहत के कारक हैं. सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आते ह 4 राशि वालों को कुछ क्षेत्रों में निगेटिविटी का सामना करना पड़ सकता है. जैसे- आर्थिक मामले, सेहत और मान-सम्‍मान.

    मिथुन राशि : बढ़ेंगे खर्च, धन हानि की आशंका

    नौतपा के दौरान मिथुन राशि वालों को धन के लेन-देन में सावधानी बरतने की जरूरत है. एक ओर खर्च बढ़ सकते हैं, लिहाजा बजट बनाकर चलना जरूरी है. वहीं धन का निवेश भी सोच-समझकर ही करें. वरना रिटर्न मिलने की बजाय मूल धन निकालना भी मुश्किल हो जाए.
    वृश्चिक राशि : गुस्‍से पर काबू रखें
    वृश्चिक राशि वालों को इस समय गुस्‍से पर काबू रखना बेहद जरूरी है, वरना बनते हुए काम बिगड़ सकते हैं. वर्कप्‍लेस पर सहकर्मियों से विवाद होने की आशंका है. ऐसे में संभलकर बात करना ही बेहतर रहेगा. अपमान होने के भी योग हैं. इस राशि के पुरुष वर्ग के लोग जीवनसाथी पर गुस्‍सा निकालने से बचें.

    धनु राशि : सेहत और पैसे में न करें लापरवाही

    धनु राशि वाले लोग इस समय अपने स्‍वास्‍थ्‍य का विशेष रूप से ध्‍यान रखें. खान-पान सही रखें वरना पेट संबंधी बीमारियां होने की आशंका है. वहीं आर्थिक मामलों में भी जल्दबाजी न करें. धन हानि हो सकती है.
    कुंभ राशि : वरिष्‍ठ लोगों से न उलझें
    नौतपा के दौरान कुंभ राशि वालों का गुस्‍सा भी बढ़ा हुआ रहेगा. मानसिक अशांति रह सकती है. ऑफिस में किसी से विवाद हो सकता है. अधिकारियों से विवाद करने से बचें. काम समय पर पूरे न हों तो धैर्य रखें. परिवार में भी कुछ तनाव रह सकता है.

  • Puja Niyam: खड़े होकर पूजा करना सही है या गलत? जानें शास्त्रीय नियम

    Puja Niyam: खड़े होकर पूजा करना सही है या गलत? जानें शास्त्रीय नियम

    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ को केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक ऊर्जा से भरने वाला साधन माना गया है। दैनिक जीवन में किए जाने वाले पूजन के कई नियम और विधियां शास्त्रों में विस्तार से बताए गए हैं, जिनका पालन करने से देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    इसी संदर्भ में एक महत्वपूर्ण सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है कि क्या खड़े होकर पूजा करना सही है या गलत। आजकल कई घरों में जगह की कमी के कारण पूजा घर को दीवार पर ऊंचाई पर स्थापित कर दिया जाता है, जिसके चलते लोग खड़े होकर ही पूजा करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में यह शंका और भी बढ़ जाती है कि क्या यह विधि शास्त्रसम्मत है या नहीं।

    धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रीय नियमों के अनुसार, पूजा करते समय आसन और स्थान का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि पूजा करते समय बैठकर पूजा करना अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। इसका कारण यह है कि जब व्यक्ति आसन पर बैठकर पूजा करता है, तो उसका शरीर स्थिर रहता है और मन एकाग्र होकर ध्यान में केंद्रित हो पाता है। इससे पूजा का प्रभाव अधिक गहरा माना जाता है।

    इसके विपरीत, खड़े होकर पूजा करने की स्थिति में मन और शरीर में वह स्थिरता नहीं बन पाती, जो ध्यान और साधना के लिए आवश्यक मानी जाती है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान भक्त का आसन भगवान के आसन से ऊंचा नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो इसे पूजा के नियमों के विरुद्ध माना गया है।

    पूजा के दौरान दिशा का भी विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि पूजा करते समय मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। इसके अलावा पूजा सामग्री जैसे धूप, दीप, अगरबत्ती और घंटी को दाईं ओर रखना चाहिए, जबकि फूल, फल, जल और शंख को बाईं ओर रखना शुभ माना गया है।

    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब इन सभी नियमों का पालन किया जाता है, तो पूजा अधिक प्रभावी और फलदायी मानी जाती है। ऐसा करने से मन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे जीवन में आने वाली नकारात्मकता दूर होती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पूजा केवल एक बाहरी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक आंतरिक साधना भी है, जिसमें अनुशासन और श्रद्धा दोनों का होना आवश्यक है। इसलिए चाहे मंदिर हो या घर, यदि संभव हो तो बैठकर ही पूजा करना अधिक उचित माना जाता है।

    कुल मिलाकर, शास्त्रीय दृष्टि से देखा जाए तो बैठकर पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है, जबकि खड़े होकर पूजा करना परिस्थितियों पर निर्भर हो सकता है, लेकिन इसे आदर्श विधि नहीं माना गया है।

  • 27 मई से बनेगा व्यातिपात योग, सूर्य-चंद्रमा की खास स्थिति से इन 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

    27 मई से बनेगा व्यातिपात योग, सूर्य-चंद्रमा की खास स्थिति से इन 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मई के अंतिम सप्ताह में एक महत्वपूर्ण ग्रह योग बनने जा रहा है, जिसे व्यातिपात योग कहा जाता है। यह योग 27 मई को सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण निर्मित होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, जब सूर्य और चंद्रमा 180 डिग्री की विपरीत स्थिति में आते हैं, तब यह योग बनता है, जिसे ऊर्जावान लेकिन तनावपूर्ण माना जाता है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह योग 27 मई सुबह 3 बजे से शुरू होकर 30 मई तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान मानसिक तनाव, कार्यों में रुकावट और निर्णय लेने में भ्रम जैसी स्थितियां बन सकती हैं। इसलिए इस अवधि में नए या शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    क्या है व्यातिपात योग?
    ज्योतिष शास्त्र में व्यातिपात योग को विशेष और संवेदनशील योग माना गया है। सूर्य और चंद्रमा की आमने-सामने की स्थिति के कारण ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे लोगों के व्यवहार, निर्णय और दैनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इस समय कई बार योजनाओं में बाधाएं और मानसिक अस्थिरता देखने को मिलती है।

    इन 3 राशियों को रहना होगा ज्यादा सावधान

    वृषभ राशि
    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक मामलों में सतर्कता बरतने का संकेत दे रहा है।
    – बड़े निवेश या पैसों के लेन-देन में जल्दबाजी से बचें।
    – खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।
    – धैर्य और समझदारी से लिया गया फैसला नुकसान से बचा सकता है।

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों को कार्यक्षेत्र में संयम बनाए रखने की सलाह दी गई है।
    – ऑफिस में सहकर्मियों या वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है।
    – किसी भी महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय को सोच-समझकर लें।
    – जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचना लाभकारी रहेगा।

    कन्या राशि
    कन्या राशि के लोगों के लिए यह समय वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण रखने का है।
    – छोटी बात भी विवाद का कारण बन सकती है।
    – किसी भी परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें।
    – शांत और संतुलित व्यवहार से कई परेशानियों से बचा जा सकता है।

    शुभ कार्यों में बरतें सावधानी
    ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि व्यातिपात योग के दौरान नए कार्य, बड़े निवेश, शुभ आयोजन या महत्वपूर्ण फैसले टालना बेहतर माना जाता है। इस समय मानसिक संतुलन और धैर्य बनाए रखना सबसे जरूरी होगा।

  • Vastu Tips: शनिवार को नमक दान करना शुभ है या अशुभ? जानें नियम

    Vastu Tips: शनिवार को नमक दान करना शुभ है या अशुभ? जानें नियम


    नई दिल्ली । वास्तु और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनिवार के दिन नमक का दान करने से बचना चाहिए। कहा जाता है कि इस दिन नमक दान करने से शनिदेव नाराज हो सकते हैं, जिससे व्यक्ति को आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
    शनिवार को नमक दान करने से क्या हो सकते हैं नुकसान?
    आर्थिक तंगी और बरकत में कम
    मान्यता है कि शनिवार को नमक दान करने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है। इससे धन हानि और आर्थिक परेशानियां बढ़ने की आशंका रहती है।

    नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव
    वास्तु शास्त्र के अनुसार नमक ऊर्जा से जुड़ी वस्तु माना जाता है। शनिवार को इसका दान या खरीदारी करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और कर्ज संबंधी परेशानियां सामने आ सकती हैं।

    परिवार में तनाव
    ऐसी भी मान्यता है कि शनिवार को नमक देने से परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद और दूरी बढ़ सकती है। घर का माहौल तनावपूर्ण हो सकता है।

    शनिवार को किन चीजों का दान करना शुभ माना गया है?
    शनिवार के दिन शनिदेव की कृपा पाने और शनि दोष कम करने के लिए इन चीजों का दान शुभ माना जाता है-
    सरसों का तेल
    काले तिल
    उड़द की दाल
    काले कपड़े या कंबल
    लोहे की वस्तुएं
    मान्यता है कि इन वस्तुओं का दान करने से शनि दोष शांत होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

    क्या करें
    अगर शनिवार को किसी जरूरतमंद की मदद करनी हो, तो नमक की जगह अन्न, वस्त्र या तेल का दान करना बेहतर माना जाता है। साथ ही शनिदेव की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।

  • शनिवार व्रत से जुड़े जरूरी नियम और धार्मिक मान्यताएं

    शनिवार व्रत से जुड़े जरूरी नियम और धार्मिक मान्यताएं


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष चल रहा हो, उनके लिए शनिवार का व्रत बेहद लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक रखा गया शनिवार व्रत जीवन की बाधाओं, आर्थिक परेशानियों और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है।

    हालांकि, कई लोग यह सवाल करते हैं कि क्या शनिदेव के लिए व्रत रखना सही है? ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यदि पूरी श्रद्धा, संयम और नियमों के साथ व्रत रखा जाए तो यह शुभ फलदायी माना जाता है।

    शनिवार व्रत के प्रमुख नियम–


    सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
    शनिवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ काले, नीले या गहरे रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद शनिदेव का ध्यान करें।

    पीपल के पेड़ की पूजा
    शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे शनि दोष कम होता है।

    इन चीजों का करें दान
    शनिवार को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल, काला कपड़ा, लोहे की वस्तुएं और कंबल का दान करना शुभ माना जाता है।

    हनुमानजी की पूजा भी करें
    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी की पूजा करने से भी शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। शनिवार को हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ लाभकारी माना जाता है।