Category: Religious Astrology

  • केवल एक फूल नहीं, श्रद्धा का प्रतीक है मंत्र पुष्पांजलि, जानिए क्यों हर धार्मिक अनुष्ठान इसके बिना माना जाता है अधूरा

    केवल एक फूल नहीं, श्रद्धा का प्रतीक है मंत्र पुष्पांजलि, जानिए क्यों हर धार्मिक अनुष्ठान इसके बिना माना जाता है अधूरा

    नई दिल्ली  : सनातन धर्म में जब कभी भी पूजा-पाठ, हवन या कोई बड़ा अनुष्ठान किया जाता है, तो उसकी समाप्ति पर पु्ष्पांजलि की जाती है. पूजन के बाद मंत्र पुष्पांजलि की परंपरा सदियों पुरानी है. कहा जाता है कि यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है, जो आज के भौतिकवादी युग में भी जीवंत है. वैसे तो पूजा-पाठ करने वाला हर व्यक्ति ‘पुष्पांजलि’ इस शब्द से परिचित होता है, लेकिन कई बार लोग इसका महत्व और वास्तविक अर्थ नहीं समझ पाते, जिसकी वजह से अनुष्ठान का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं होता. ऐसे में आइए जानते हैं कि पूजा-पाठ या हवन इत्यादि धार्मिक अनुष्ठान के बाद पुष्पांजलि क्यों की जाती है, इसका महत्व क्या है और इसके फायदे क्या हैं.

    क्या होती है मंत्र पुष्पांजलि?

    किसी भी पूजा-पाठ या हवन या अन्य धार्मिक अनुष्ठान की समाप्ति पर देवी-देवताओं के प्रति आदर प्रकट करने के लिए दोनों हाथों को जोड़कर उसमें फूल रखे जाते हैं. इसके बाद विशेष मंत्रों का उच्चारण करते हुए उस फूल को देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है. शास्त्रों के मुताबिक, इसे ही पुष्पांजलि का जाता है. चूंकि यह प्रक्रिया विशेष मंत्र और फूल के साथ की जाती है, इसलिए इसे मंत्र पुष्पांजलि भी कहते हैं.

    क्या है मंत्र पुष्पांजलि का महत्व?

    शास्त्रों के अनुसार, मंत्र पुष्पांजलि देवी-देवताओं के प्रति भक्ति और निष्ठा को प्रकट करने के लिए की जाती है. कहा जाता है देवी-देवताओं को मंत्रों के साथ पुष्प अर्पित करने से मन रहता है और विचारों में शुद्धता आती है. ऐसा करने से आत्मिक शांति और संतोष मिलता है. पुराणों के मुताबिक, मंत्र पुष्पांजलि भगवान को धन्यवाद ज्ञापित करने और परिवार के सदस्यों की सुख-शांति के लिए की जाती है. मान्यतानुसार, मंत्र पुष्पांजलि करने से देवी-देवता प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं.
    पुष्पांजलि मंत्र
    “ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तनि धर्माणि प्रथमान्यासन्
    ते ह नाकं महिमान: सचंत यत्र पूर्वे साध्या: संति देवा:”
    “ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने
    नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे
    स मस कामान् काम कामाय मह्यं
    कामेश्र्वरो वैश्रवणो ददातु कुबेराय वैश्रवणाय
    महाराजाय नम:”
    “ॐ स्वस्ति, साम्राज्यं भौज्यं स्वाराज्यं
    वैराज्यं पारमेष्ट्यं राज्यं महाराज्यमाधिपत्यमयं
    समन्तपर्यायीस्यात् सार्वभौमः सार्वायुषः आन्तादापरार्धात्
    पृथीव्यै समुद्रपर्यंताया एकराळ इति”

  • भोजन से पहले करें इन शक्तिशाली मंत्रों का उच्चारण, शरीर को मिलेगा पूरा पोषण और मन रहेगा शांत

    भोजन से पहले करें इन शक्तिशाली मंत्रों का उच्चारण, शरीर को मिलेगा पूरा पोषण और मन रहेगा शांत

    नई दिल्ली : हिन्दू धर्म में दैनिक दिनचर्या से जुड़े कई नियम बताए गए हैं जो जीवन जीने के तरीके को और सरल व उद्येश्यपूर्ण बनाते हैं. इन्हीं में से एक है भोजन से जुड़े नियम जिसका पालन कर एक व्यक्ति सकारात्मक सोच और स्वस्थ्य शरीर पा सकता है. क्या आप जानते हैं कि हिंदू धर्म में भोजन करने व भोजन करने के बाद के लिए कुछ मंत्र बताए गए हैं जिनका जाप कर हम अन्न और मां अन्नपूर्ण के लिए आभार व्यक्त करते हैं. साथ ही भोजन से जुड़े कुछ नियम भी है जिनका पालन करने से मन शांति रहता है और शारीरिक ऊर्ज संतुलित रहती है. आइए भोजन मंत्र और भोजन करने के लिए नियम जानें.


    भोजन से पहले मंत्र जाप

    भोजन करने से पहले पालथी मारकर बैठें और मां अन्नपूर्णा व सामने रखे भोजन को प्रणाम करें. इसके बाद आभार मंत्र या अन्नपूर्णा मंत्र का पाठ करें. ये मंत्र है-
    पहला भोजन मंत्र
    ॐ सह नाववतु ।
    सह नौ भुनक्तु ।
    सह वीर्यं करवावहै ।
    तेजस्विनावधीतमस्तु ।
    मा विद्‌विषावहै ॥
    ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

    दूसरा भोजन मंत्र
    ॐ अन्नपूर्णे सदापूर्णे
    शंकरप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्यर्थम् भिक्षां देहि च पार्वति।
    ॐ सहनाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
    तेजस्विनावधीतमस्तु। मा विद्विषावहै ॥
    ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:: ॥


    तीसरा भोजन मंत्र

    ब्रहमार्पणं ब्रहमहविर्‌ब्रहमाग्नौ ब्रहमणा हुतम्।
    ब्रहमैव तेन गन्तव्यं ब्रहमकर्मसमाधिना ॥
    ॐ सहनाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
    तेजस्विनावधीतमस्तु। मा विद्विषावहै ॥
    ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:: ॥

    खाना खाने के बाद का मंत्र
    इन चारों मंत्र के अलावा कुछ और मंत्र का जाप खाना खाने के बाद करने से भोजन शरीर में लगता है और पाचन क्रिया भी अच्छी रहती है. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को खाए गए भोजन से लाभ होता है. ये मंत्र है-
    पहला मंत्र
    ‘अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभवः।’
    ‘यज्ञाद भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्म समुद् भवः।।’

    दूसरा मंत्र

    ‘अगस्त्यम कुम्भकर्णम च शनिं च बडवानलनम।’
    ‘भोजनं परिपाकारथ स्मरेत भीमं च पंचमं ।।’

    भोजन करने के नियम

    भोजन करने से पहले अपने 5 अंगों को 2 हाथ, 2 पैर और मुख को अच्छे धोकर साफ कर लें. तभी भोजन करें.

    भोजन करने से पहले अन्नपूर्णा माता की स्तुति करें और उनका आभार व्यक्त कर धन्यवाद करें. प्रार्थना करें कि ‘सभी भूखों को भोजन मिले’.

    भोजन बनाने वाले व्यक्ति को ध्यान रखना चाहिए कि वो स्नान करके शुद्ध मन से भोजन पकाए.

    रसोई में बनी पहली रोटी गाय को दें और आखिरी दो रोटी, कुत्ते और कौवे के लिए निकालें. इसके बाद अग्निदेव को भी थोड़ा सा अन्न भोग के लिए दें.

    पूरा परिवार भोजन साथ बैठकर ही करें. परिवार के सदस्यों में प्यार और लगाव बना रहेगा. मन में प्रेम और एकता का भाव आएगा.

    सुबह और शाम में ही भोजन करने का नियम है क्योंकि सूर्योदय से 2 घंटे बाद और सूर्यास्त से 2.30 घंटे पहले पाचनक्रिया की जठराग्नि प्रबल रहती है.

    भोजन पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंख करके ही करें. दक्षिण दिशा की ओर किया भोजन प्रेत को जाता है. इस दिशा में किए भोजन से रोग होता है.

  • बुध गोचर का असर: 4 राशियों के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें, रहें सावधान

    बुध गोचर का असर: 4 राशियों के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें, रहें सावधान


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, व्यापार, संवाद और तर्क का कारक माना गया है। हाल ही में बुध ग्रह ने रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किया है, जिसका असर सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिल सकता है। चंद्रमा के नक्षत्र रोहिणी में बुध का गोचर मानसिक स्थिति, भावनाओं और निर्णय क्षमता पर प्रभाव डाल सकता है। इस दौरान कई लोगों को तनाव, असमंजस और कार्यक्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

    ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह गोचर कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इन जातकों को करियर, सेहत और पारिवारिक जीवन में सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

    मेष राशि पर प्रभाव
    मेष राशि के जातकों के लिए यह समय कार्यस्थल पर तनाव बढ़ा सकता है। ऑफिस में सहकर्मियों के साथ विवाद की स्थिति बन सकती है। आर्थिक मामलों में भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है, अन्यथा नुकसान की संभावना बन सकती है।

    वृश्चिक राशि पर प्रभाव
    वृश्चिक राशि वालों के लिए यह गोचर पारिवारिक जीवन में तनाव ला सकता है। घर-परिवार में मतभेद और रिश्तों में दूरी बढ़ने की आशंका है। साथ ही सेहत को लेकर भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।

    धनु राशि पर प्रभाव
    धनु राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में बाधाओं से भरा हो सकता है। कामकाज में रुकावटें और निराशा का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में धैर्य और संयम बनाए रखना जरूरी होगा।

    कुंभ राशि पर प्रभाव
    कुंभ राशि के लोगों को आर्थिक और मानसिक दबाव झेलना पड़ सकता है। अचानक खर्च बढ़ने से बजट बिगड़ सकता है। करीबी लोगों से विवाद की स्थिति भी बन सकती है, जिससे रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है।

    बुध गोचर का यह प्रभाव हर राशि पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेगा, लेकिन मेष, वृश्चिक, धनु और कुंभ राशि के जातकों को इस समय विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। संयम, सोच-समझकर निर्णय और धैर्य इस समय सबसे बड़ी कुंजी साबित हो सकते हैं।

  • बुधवार व्रत विधि: कब और कैसे शुरू करें, जानें पूरी पूजा प्रक्रिया

    बुधवार व्रत विधि: कब और कैसे शुरू करें, जानें पूरी पूजा प्रक्रिया


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म और सनातन परंपरा में सप्ताह के हर दिन का विशेष महत्व बताया गया है। बुधवार का दिन विशेष रूप से भगवान श्री गणेश और नवग्रहों के राजकुमार बुध देवता को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में बुद्धि, विवेक, धन, करियर और कारोबार में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
    बुधवार व्रत कब और कैसे शुरू करें
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार व्रत की शुरुआत किसी भी हिंदी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से करना शुभ माना जाता है। यदि उस दिन बुध ग्रह का विशेष नक्षत्र हो, तो इसका फल और भी अधिक बढ़ जाता है। व्रत को कम से कम 21 या 45 बुधवार तक रखने की परंपरा बताई गई है। यदि किसी कारणवश व्रत टूट जाए, तो आगे से फिर नियमपूर्वक इसे जारी रखा जा सकता है और अंत में उद्यापन करना आवश्यक माना जाता है।

    बुधवार व्रत की पूजा विधि
    व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ या हरे रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थान में भगवान गणेश और बुध देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिवत पूजा की जाती है। गणपति को दूर्वा घास अत्यंत प्रिय मानी गई है, इसलिए 21 गांठों वाली दूर्वा अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही बुध देवता को हरे रंग की वस्तुएं, हरी मूंग दाल या हरे वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान बुध मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी बताया गया है। अंत में गणेश जी और बुध देव की आरती कर व्रत पूर्ण किया जाता है।

    व्रत के प्रमुख लाभ और धार्मिक महत्व
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार व्रत करने से व्यक्ति की बुद्धि तेज होती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। करियर और व्यवसाय में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है जो नौकरी, व्यापार या शिक्षा में प्रगति चाहते हैं।

    बुधवार व्रत का उद्यापन कैसे करे
    व्रत अवधि पूरी होने के बाद उद्यापन करना आवश्यक माना जाता है। उद्यापन के दिन सुबह स्नान कर गणेश और बुध देव की विशेष पूजा की जाती है। इसके बाद बुध मंत्रों का अधिक संख्या में जाप और हवन करने की परंपरा है। अंत में ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान दिया जाता है। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
  • जून 2026 वाहन खरीद मुहूर्त: 17 से 29 तक 7 दिन रहेंगे सबसे शुभ, जानें पूरी डिटेल

    जून 2026 वाहन खरीद मुहूर्त: 17 से 29 तक 7 दिन रहेंगे सबसे शुभ, जानें पूरी डिटेल




    नई दिल्ली। जून 2026 में नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए पंचांग के अनुसार खास शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक इस समय अधिक मास (मलमास) का प्रभाव चल रहा है, जिसकी वजह से मई 2026 में वाहन खरीदने जैसे मांगलिक कार्यों को शुभ नहीं माना जा रहा है। ऐसे में अब लोगों की नजर जून महीने के शुभ मुहूर्तों पर टिकी है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जून 2026 में 17 जून से 29 जून के बीच कुल 7 ऐसे दिन हैं, जब वाहन खरीदना शुभ फल देने वाला माना गया है। इन दिनों में अलग-अलग नक्षत्रों का शुभ संयोग बन रहा है, जो नई शुरुआत और समृद्धि के लिए अनुकूल माने जाते हैं।

    जून 2026 के शुभ वाहन खरीद मुहूर्त इस प्रकार हैं:
    17 जून (बुधवार) – पुनर्वसु नक्षत्र
    19 जून (शुक्रवार) – आश्लेषा नक्षत्र
    21 जून (रविवार) – पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र
    22 जून (सोमवार) – उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र
    24 जून (बुधवार) – चित्रा नक्षत्र
    27 जून (शनिवार) – अनुराधा नक्षत्र
    29 जून (सोमवार) – मूल नक्षत्र

    इन तारीखों को वाहन खरीदना विशेष रूप से शुभ माना गया है क्योंकि इन दिनों में नक्षत्रों का ऐसा संयोग बनता है, जो नए कार्यों की शुरुआत के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

    विशेष मुहूर्त की खास बातें:
    17 जून को पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग वाहन खरीद के लिए बेहद अनुकूल रहेगा।
    19 जून को आश्लेषा नक्षत्र के दौरान सुबह का समय खास शुभ बताया गया है।
    21 और 22 जून को लगातार शुभ नक्षत्रों का प्रभाव रहेगा, जिससे इन दिनों में खरीदारी लाभकारी मानी गई है।
    27 और 29 जून को अंतिम शुभ संयोग बन रहा है, जो वाहन खरीद के लिए उत्तम अवसर माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन शुभ मुहूर्तों में खरीदी गई नई गाड़ी जीवन में सुख, समृद्धि और प्रगति का संकेत देती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि वाहन खरीदते समय केवल मुहूर्त ही नहीं, बल्कि अपनी आवश्यकता, बजट और उपयोगिता का भी ध्यान रखना जरूरी है।

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  • बुधवार के उपाय: धन-वैभव और करियर में तरक्की पाने के आसान टोटके

    बुधवार के उपाय: धन-वैभव और करियर में तरक्की पाने के आसान टोटके


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार बुधवार का संबंध भगवान गणेश और बुध ग्रह से माना गया है। बुध ग्रह को बुद्धि, व्यापार, वाणी और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है। यदि कुंडली में बुध कमजोर हो, तो व्यक्ति को आर्थिक परेशानी, मानसिक तनाव और करियर में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बुधवार के दिन कुछ सरल उपाय अपनाकर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता पाई जा सकती है।

    बुध ग्रह को मजबूत करने के उपाय
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुधवार के दिन बुध ग्रह से जुड़े मंत्रों का जाप बेहद लाभकारी माना गया है।

    बीज मंत्र:
    “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः”
    इस मंत्र का श्रद्धा के साथ जाप करने से बुद्धि तेज होती है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है।

    धन-समृद्धि के लिए करें ये उपाय
    बुधवार के दिन हरे रंग की वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से—
    हरी मूंग दाल का दान करें
    जरूरतमंदों को हरी वस्तुएं दें
    मान्यता है कि इससे भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

    कर्ज और आर्थिक संकट से मुक्ति का उपाय
    यदि कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी या कर्ज से परेशान है, तो बुधवार के दिन ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
    यह उपाय जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने और आर्थिक स्थिरता देने में सहायक माना जाता है।

    गणपति बप्पा को प्रसन्न करने के सरल उपाय
    बुधवार के दिन भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए ये उपाय करें-
    गणेश जी को 11 या 21 दूर्वा अर्पित करें
    “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें
    गणेश जी की विधिवत पूजा करें
    इन उपायों से जीवन में रुकावटें दूर होने और कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है।

    गौ सेवा से मिलेगा सौभाग्य
    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार बुधवार के दिन गाय को हरी घास खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे-
    सौभाग्य में वृद्धि होती है
    मानसिक शांति मिलती है
    जीवन की परेशानियां कम होती हैं

     बुध दोष से मुक्ति के उपाय
    यदि कुंडली में बुध ग्रह कमजोर हो तो माता दुर्गा की उपासना करना लाभकारी माना जाता है।

    मंत्र:
    “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”
    इस मंत्र का नियमित जाप करने से बुध दोष कम होता है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।

    बुधवार के दिन किए गए ये सरल उपाय जीवन में धन, बुद्धि और सफलता के मार्ग खोल सकते हैं। श्रद्धा और नियमितता के साथ इन उपायों को अपनाने से करियर और कारोबार में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।

  • मीन राशिफल (20 मई 2026): मिला-जुला रहेगा दिन, सेहत और खर्च पर रखें ध्यान

    मीन राशिफल (20 मई 2026): मिला-जुला रहेगा दिन, सेहत और खर्च पर रखें ध्यान


    नई दिल्ली। मीन राशि के जातकों के लिए 20 मई 2026 का दिन मिश्रित परिणाम लेकर आ सकता है। दिन की शुरुआत थोड़ी सामान्य रहेगी, लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ेगा, कामकाज में अतिरिक्त दबाव महसूस हो सकता है।

    Pisces वालों को आज अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाने की जरूरत होगी। मन में उत्साह रहेगा, लेकिन काम की अधिकता के कारण थकान भी महसूस हो सकती है।

    आर्थिक मामलों में किसी भी बड़े निर्णय से पहले सोच-विचार करना जरूरी होगा। अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है, इसलिए बजट पर नियंत्रण रखें। निवेश या लेन-देन में जल्दबाजी नुकसानदायक हो सकती है।

    सेहत को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। बदलते मौसम या तनाव के कारण हल्की परेशानी हो सकती है, इसलिए आराम और संतुलित दिनचर्या अपनाएं।

    परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी और दिन के तनाव में कमी आएगी।

    मीन राशि वालों के लिए यह दिन न तो बहुत अच्छा और न ही बहुत खराब रहेगा। धैर्य और संतुलन से दिन को बेहतर बनाया जा सकता है।

  • नारद पुराण: मृत्यु के बाद यमलोक की यात्रा और पाप-पुण्य के फल का रहस्य, जानिए आत्मा को कैसे मिलते हैं परिणाम

    नारद पुराण: मृत्यु के बाद यमलोक की यात्रा और पाप-पुण्य के फल का रहस्य, जानिए आत्मा को कैसे मिलते हैं परिणाम



    नई दिल्ली। नारद पुराण में जीवन, मृत्यु और परलोक से जुड़े गहरे रहस्यों का वर्णन मिलता है। इसमें बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा अपने कर्मों के अनुसार यमलोक की यात्रा करती है और वहीं उसे पाप और पुण्य का फल प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार यह यात्रा साधारण नहीं होती, बल्कि यह पूरी तरह व्यक्ति के जीवन में किए गए कर्मों पर निर्भर करती है।

    नारद पुराण के अनुसार यमलोक का मार्ग अत्यंत लंबा बताया गया है, जिसे छियासी हजार योजन तक फैला हुआ कहा गया है। मान्यता के अनुसार एक योजन लगभग 13 किलोमीटर के बराबर होता है, ऐसे में यह दूरी अत्यंत विशाल मानी जाती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में धर्म, दान और पुण्य कर्म करता है, उसकी यह यात्रा सरल और सुखद होती है, जबकि पाप कर्म करने वालों को इस मार्ग में कठिनाइयों और कष्टों का सामना करना पड़ता है।

    पुराणों में वर्णन मिलता है कि यमलोक के मार्ग में अनेक प्रकार की बाधाएं आती हैं, कहीं कीचड़, कहीं अग्नि, कहीं तीखी धार वाली शिलाएं और कहीं कांटों से भरे मार्ग मिलते हैं। पाप कर्म करने वाले जीवों को यमदूत विभिन्न प्रकार की पीड़ाओं के बीच यमलोक तक ले जाते हैं। वे भय और कष्ट के साथ अपनी यात्रा पूरी करते हैं और अपने जीवन के पापों का फल भोगते हैं।

    इसके विपरीत, जो लोग अपने जीवन में दान-पुण्य और धर्म का पालन करते हैं, उन्हें इस मार्ग में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता। ऐसे जीवों को उत्तम भोजन, वस्त्र, आभूषण और सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि अन्न दान करने वाले को उत्तम भोजन, जल दान करने वाले को शीतल पेय, वस्त्र दान करने वाले को दिव्य वस्त्र और गोदान करने वाले को विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

    नारद पुराण में यह भी बताया गया है कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता की सेवा करता है, ब्राह्मणों का सम्मान करता है, धर्म का पालन करता है और सदैव ईश्वर के ध्यान में लीन रहता है, उसे यमलोक की यात्रा में विशेष सम्मान मिलता है और वह सुखपूर्वक धर्मराज के लोक तक पहुंचता है।

    अंत में धर्मराज जीवों को उनके कर्मों के अनुसार निर्णय देते हैं। पुण्यात्माओं को स्वर्ग और सुखमय लोक प्राप्त होता है, जबकि पापियों को उनके कर्मों के अनुसार कष्टदायक फल भोगना पड़ता है। पुराणों में यह संदेश दिया गया है कि मानव जीवन दुर्लभ है और इसे धर्म, सत्य, दान और अच्छे कर्मों में लगाना चाहिए, क्योंकि अंततः हर जीव को अपने कर्मों का ही फल प्राप्त होता है।

  • गंगा दशहरा 2026 की सही तारीख और स्नान मुहूर्त को लेकर असमंजस खत्म

    गंगा दशहरा 2026 की सही तारीख और स्नान मुहूर्त को लेकर असमंजस खत्म


    नई दिल्ली(New Delhi)। 
    ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाने वाला पावन पर्व Ganga Dussehra इस वर्ष 2026 में 24 मई की शाम से शुरू होकर 25 मई की दोपहर तक रहेगा। इसी कारण इसकी सही तिथि को लेकर श्रद्धालुओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी कि पर्व 24 मई को मनाया जाए या 25 मई को।

    पंचांग गणना के अनुसार उदया तिथि को महत्व देते हुए इस बार गंगा दशहरा 25 मई 2026, सोमवार को मनाना ही शास्त्रसम्मत और शुभ माना जा रहा है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं और इसी कारण इस पर्व को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। इसी वजह से देशभर में प्रयागराज, वाराणसी और हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

    इस वर्ष गंगा स्नान के लिए दो प्रमुख शुभ मुहूर्त बताए गए हैं—ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:40 से 05:23 बजे तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:17 से 01:10 बजे तक। इसके अलावा सूर्योदय के समय 06:06 बजे स्नान और सूर्य अर्घ्य देना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार हस्त नक्षत्र और रवि योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि यह पर्व धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • बड़ा मंगल का शुभ योग, इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे धन और सफलता के द्वार

    बड़ा मंगल का शुभ योग, इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे धन और सफलता के द्वार



    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बड़ा मंगल का दिन इस बार बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन Gajakesari Rajyog का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस योग का निर्माण तब होता है जब गुरु ग्रह और चंद्रमा एक ही राशि में आकर युति करते हैं। 19 मई 2026 को यह संयोग मिथुन राशि में बन रहा है, जिससे इसका प्रभाव और अधिक शक्तिशाली माना जा रहा है।

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह योग व्यक्ति के जीवन में धन लाभ, सफलता, मान-सम्मान और रुके हुए कार्यों में प्रगति का संकेत देता है। विशेष रूप से कुछ राशियों पर इसका प्रभाव अधिक शुभ बताया जा रहा है। मेष राशि के जातकों के लिए कार्यस्थल पर सराहना और आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं, हालांकि उन्हें क्रोध और फिजूलखर्ची से बचने की सलाह दी गई है।

    वृषभ राशि वालों के लिए यह समय करियर में उन्नति और पारिवारिक सुख लेकर आ सकता है, वहीं मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग सबसे अधिक फलदायी माना जा रहा है क्योंकि यह युति उनकी ही राशि में बन रही है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव और आर्थिक मजबूती के संकेत हैं। सिंह राशि वालों के लिए अचानक धन लाभ और प्रमोशन के अवसर बन सकते हैं, जबकि मीन राशि के जातकों के लिए सुख-सुविधाओं में वृद्धि और रुका हुआ धन मिलने की संभावना बताई जा रही है।

    हालांकि यह ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित भविष्यफल है और वास्तविक परिणाम व्यक्ति के कर्म और परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।