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  • सुरक्षा पर जोर: एसी बसों का 3 महीने में मेंटेनेंस और स्टाफ को प्रशिक्षण जरूरी

    सुरक्षा पर जोर: एसी बसों का 3 महीने में मेंटेनेंस और स्टाफ को प्रशिक्षण जरूरी


    मध्य प्रदेश । सागर में मंगलवार देर शाम क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में बस संचालकों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें हाल ही में यात्री बसों में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए सख्त सुरक्षा निर्देश जारी किए गए। अधिकारियों ने सभी बस ऑपरेटरों को तय समयसीमा में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

    बैठक में निर्देश दिया गया कि सभी एसी बसों के एसी सिस्टम की नियमित जांच की जाए और हर तीन महीने में उनका मेंटेनेंस व साफ-सफाई अनिवार्य रूप से कराई जाए। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि खराब रखरखाव के कारण एसी कम्प्रेसर ओवरहीट होकर शॉर्ट सर्किट और आग जैसी घटनाओं का कारण बन सकता है।

    सभी यात्री बसों में निर्धारित मानक के फायर एक्सटिंग्विशर रखना अनिवार्य किया गया है, साथ ही ड्राइवर और कंडक्टर को इसका उपयोग करने का प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में आग पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।

    क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि बसों में किसी भी प्रकार के ज्वलनशील पदार्थ जैसे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन या विस्फोटक सामग्री का परिवहन सख्ती से प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा सभी एसी बसों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS) लगाने और स्लीपर कोच बसों को AIS-119 मानकों के अनुसार तैयार करने को कहा गया है।

    जिन बस संचालकों को पहले नोटिस जारी किए गए थे, उन्हें 25 मई तक क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में वाहनों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ड्राइवर और कंडक्टरों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर सुरक्षा संबंधी सूचनाएं साझा करने की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है।

  • अस्पताल में अफरातफरी: रीवा में आग के बीच मरीजों और परिजनों से बदसलूकी

    अस्पताल में अफरातफरी: रीवा में आग के बीच मरीजों और परिजनों से बदसलूकी


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के रीवा शहर स्थित नेशनल हॉस्पिटल में मंगलवार शाम आग लगने के बाद हालात बेकाबू हो गए। अस्पताल में अफरा-तफरी के बीच बाहर निकलने की कोशिश कर रहे मरीजों और उनके परिजनों के साथ कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है।

    बुधवार को सामने आए वीडियो में कई कर्मचारी मिलकर मरीजों और परिजनों पर लाठी-डंडों से हमला करते नजर आ रहे हैं, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।

    आग के बाद भगदड़, बाहर निकलने का रास्ता बना बाधा
    जानकारी के अनुसार, आग लगने के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया। मरीज और परिजन संकरे इमरजेंसी एग्जिट से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वहां कबाड़ रखा होने के कारण रास्ता बाधित था। इसी दौरान विवाद बढ़ा और मामला मारपीट तक पहुंच गया।

    पीड़िता का आरोप: 50 हजार लेने के बाद भी पिटाई
    घायल पीड़िता सुनीता मिश्रा ने आरोप लगाया कि इलाज के नाम पर उनसे 50 हजार रुपये से अधिक लिए गए, इसके बावजूद अस्पताल कर्मचारियों ने उनके परिवार के साथ मारपीट की। उन्होंने कहा कि आग लगने के बाद भी उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया गया और महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया।

    अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधार
    अस्पताल प्रशासन की ओर से डॉक्टर अखिलेश पटेल ने आग लगने की घटना की पुष्टि की है, लेकिन मारपीट के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रबंधन का कहना है कि स्थिति को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है।

    पुलिस जांच में जुटी, अस्पताल सुरक्षा पर सवाल
    समान थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित परिवार का आवेदन प्राप्त हुआ है और सभी तथ्यों की जांच की जा रही है।

    अस्पताल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
    इस घटना के बाद रीवा के निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार कई अस्पताल बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं और आपात स्थिति के लिए पर्याप्त निकासी व्यवस्था भी नहीं है।

    रीवा अस्पताल की यह घटना न केवल लापरवाही बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षा मानकों की गंभीर कमी को उजागर करती है। आग जैसी आपात स्थिति में मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन यहां हालात इसके बिल्कुल विपरीत नजर आए।

  • अमरनाथ यात्रा को लेकर बड़ा अपडेट, रजिस्ट्रेशन ने पकड़ी रफ्तार; सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर

    अमरनाथ यात्रा को लेकर बड़ा अपडेट, रजिस्ट्रेशन ने पकड़ी रफ्तार; सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर


    नई दिल्ली । अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है और इसका असर रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। अब तक 3.5 लाख से अधिक भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि इस वर्ष यात्रा को लेकर आस्था और उत्साह दोनों चरम पर हैं। यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी और यह 57 दिनों तक चलेगी, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

    प्रशासन और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ओर से यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यात्रा मार्गों पर बर्फ हटाने और ट्रैक बहाली का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें बालटाल और पहलगाम दोनों प्रमुख मार्गों पर कई किलोमीटर तक बर्फ हटाई जा चुकी है। हालांकि अभी भी कुछ ऊंचाई वाले हिस्सों में भारी बर्फ जमा है, जिसे हटाने का काम जारी है। अधिकारियों का मानना है कि जून के मध्य तक दोनों मार्ग पूरी तरह से यात्रा के लिए तैयार कर दिए जाएंगे।

    श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार कई नए यात्री निवास तैयार किए गए हैं, जहां हजारों यात्रियों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जा रही है। पहलगाम, बालटाल, सोनमर्ग और बिजबेहड़ा जैसे प्रमुख स्थानों पर सुविधाओं को बेहतर बनाया गया है ताकि यात्रा के दौरान किसी भी तरह की असुविधा न हो। इसके साथ ही मेडिकल सुविधा, पेयजल, बिजली और संचार व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। यात्रा मार्गों के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की योजना बनाई गई है और निगरानी व्यवस्था को भी और मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि जो लोग अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए हैं, वे जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करें ताकि अंतिम समय में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इसके साथ ही यात्रियों को मौसम और स्वास्थ्य से जुड़ी सभी आवश्यक सावधानियों का पालन करने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह यात्रा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से होकर गुजरती है। बदलते मौसम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों को देखते हुए प्रशासन ने सभी तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम तेज कर दिया है।

    कुल मिलाकर, इस बार अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह और प्रशासन की तैयारियां दोनों ही उच्च स्तर पर हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि यह यात्रा अब तक की सबसे व्यवस्थित और सुरक्षित यात्राओं में से एक होगी।

  • ब्रिज निर्माण में देरी पर सख्ती: संभागायुक्त ने लगाया 5 लाख का जुर्माना

    ब्रिज निर्माण में देरी पर सख्ती: संभागायुक्त ने लगाया 5 लाख का जुर्माना


    उज्जैन । उज्जैन में सिंहस्थ 2028 महापर्व को देखते हुए शिप्रा नदी के तट पर भीड़ नियंत्रण और सुगम यातायात व्यवस्था के लिए नए ब्रिजों का निर्माण किया जा रहा है। संत महात्माओं और करोड़ों श्रद्धालुओं के स्नान को ध्यान में रखते हुए यह कार्य तेजी से कराया जा रहा है।

    संभागायुक्त और कलेक्टर ने किया निरीक्षण
    बुधवार को संभाग आयुक्त और सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह तथा कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने शिप्रा तट पर चल रहे ब्रिज निर्माण की प्रगति की जानकारी ली।

    अंगारेश्वर–सिद्धवट ब्रिज पर नाराजगी
    श्री अंगारेश्वर मंदिर से सिद्धवट मंदिर को जोड़ने वाले ब्रिज निर्माण की गति धीमी पाए जाने पर संभागायुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्माण एजेंसी पर 5 लाख रुपये की पेनल्टी लगाने के निर्देश दिए।

    क्वालिटी कंट्रोल लैब का निरीक्षण
    निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्माण स्थल पर मौजूद क्वालिटी कंट्रोल लैब का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि निर्माण सामग्री की जांच कर रिपोर्ट नियमित रूप से रजिस्टर में दर्ज की जाए।

    अन्य निर्माण कार्यों की समीक्षा
    कलेक्टर और मेला अधिकारी ने इंदौर रोड स्थित डी मार्ट के सामने रोड निर्माण और त्रिवेणी हिल्स से सिकंदरी के बीच शिप्रा तट पर चल रहे ब्रिज निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सभी कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

  • केरल में ‘वंदे मातरम्’ पर सियासी संग्राम, शपथ समारोह से शुरू हुआ विवाद पहुंचा राष्ट्रवाद बनाम सेक्युलरिज्म तक

    केरल में ‘वंदे मातरम्’ पर सियासी संग्राम, शपथ समारोह से शुरू हुआ विवाद पहुंचा राष्ट्रवाद बनाम सेक्युलरिज्म तक

    नई दिल्ली । केरल की राजनीति एक बार फिर तीखी बहस के केंद्र में आ गई है, जब राज्य में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूरे ‘वंदे मातरम्’ के बजने पर विवाद खड़ा हो गया। यह मामला अब केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की राजनीतिक विचारधाराओं के बीच गहरी खाई को उजागर करता दिख रहा है। विवाद में मुख्य रूप से Communist Party of India (Marxist) और Bharatiya Janata Party आमने-सामने आ गए हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व वाली राज्य व्यवस्था भी इस बहस के दायरे में आ गई है।

    पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण बजाया गया। इसके बाद CPM ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में केवल वही हिस्सा उपयोग किया जाना चाहिए जिसे आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया है। पार्टी का तर्क है कि गीत के कुछ हिस्सों में धार्मिक प्रतीकात्मकता का उल्लेख है, जो धर्मनिरपेक्ष परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जाता।

    दूसरी ओर, BJP ने इस आपत्ति को सख्ती से खारिज करते हुए इसे राष्ट्रीय भावनाओं का अपमान बताया है। पार्टी का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक रहा है और इसके पूरे स्वरूप का सम्मान किया जाना चाहिए। BJP नेताओं ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार देते हुए विपक्ष पर वोट बैंक को साधने का आरोप लगाया है।

    विवाद के केंद्र में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी समारोहों में किसी गीत के केवल सीमित हिस्से को ही अनुमति दी जानी चाहिए या पूरे गीत का उपयोग किया जाना चाहिए। CPM का दावा है कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति और बाद में संवैधानिक प्रक्रियाओं के दौरान यह माना गया था कि केवल प्रारंभिक हिस्से को ही औपचारिक रूप से मान्यता दी गई है। पार्टी यह भी कहती है कि भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर आधारित है और इसलिए ऐसे प्रतीकों का उपयोग सावधानीपूर्वक होना चाहिए।

    वहीं BJP का कहना है कि इस तरह की व्याख्याएं राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रेरित हैं और इससे राष्ट्रीय एकता पर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है। पार्टी नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी राष्ट्रीय गीत का कोई हिस्सा विवादित माना जा सकता है। इस मुद्दे ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक व्यापक बहस को जन्म दे दिया है।

    राज्य प्रशासन ने इस विवाद से दूरी बनाते हुए कहा है कि शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन एक अलग संस्था द्वारा किया गया था और इसमें सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। हालांकि इसके बावजूद राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है और मामला और अधिक संवेदनशील होता जा रहा है।

    अब यह विवाद केवल केरल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य राज्यों में भी इस तरह की बहसों के संकेत दिखाई देने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगे चलकर राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और सांस्कृतिक पहचान की व्यापक बहस को और तेज कर सकता है।

  • सिंहस्थ 2028 से पहले बड़ी तैयारी: गढ़कालिका मंदिर में बढ़ेंगी श्रद्धालु सुविधाएं

    सिंहस्थ 2028 से पहले बड़ी तैयारी: गढ़कालिका मंदिर में बढ़ेंगी श्रद्धालु सुविधाएं


    नई दिल्ली । धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित ऐतिहासिक गढ़कालिका मंदिर के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए 15.50 करोड़ रुपए की विस्तृत परियोजना तैयार की गई है। इस योजना का उद्देश्य सिंहस्थ 2028 से पहले मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और बढ़ती श्रद्धालु भीड़ को बेहतर तरीके से संभालना है। उज्जैन स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इस कार्य के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही चयनित एजेंसी को काम सौंपा जाएगा।

    गढ़कालिका मंदिर को उज्जैन की उत्तरी सीमा का रक्षक और एक प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नई परियोजना के तहत मंदिर परिसर की क्षमता को मौजूदा 3 से 5 हजार श्रद्धालुओं से बढ़ाकर 10 से 12 हजार श्रद्धालुओं तक किया जाएगा। वहीं सिंहस्थ 2028 के दौरान लगभग 50 हजार लोगों की भीड़ को संभालने की व्यवस्था की जाएगी।

    आधुनिक सुविधाओं से सजेगा मंदिर परिसर
    परियोजना के अंतर्गत मंदिर के शिखर और संरचना की मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पुराने चूना प्लास्टर का नवीनीकरण किया जाएगा और मंदिर के अग्रभाग को आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए छायादार प्रतीक्षालय, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय और आधुनिक कतार प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी।

    प्रवेश-निकास और पार्किंग व्यवस्था में सुधार
    मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए जाएंगे, जिससे दर्शन व्यवस्था अधिक सुचारु हो सके। इसके साथ ही लगभग 50 वाहनों की पार्किंग सुविधा विकसित की जाएगी। दिव्यांगजनों के लिए रैंप और विशेष पत्थर मार्ग भी बनाए जाएंगे ताकि सभी श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन का लाभ मिल सके।

    रोशनी और सौंदर्यीकरण पर भी जोर
    मंदिर परिसर को रात के समय आकर्षक बनाने के लिए “वॉर्म एम्बर” थीम आधारित लाइटिंग की जाएगी, जिससे गढ़कालिका मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक भव्यता और अधिक निखरेगी।

    एक साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट
    उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के अनुसार, चयनित एजेंसी को एक वर्ष के भीतर परियोजना पूरा करने का लक्ष्य दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस विकास कार्य के बाद गढ़कालिका मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बनेगा, बल्कि उज्जैन के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। `

  • ग्लोबल मार्केट का असर: डॉलर मजबूत होते ही सोना और चांदी धराशाई, कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज

    ग्लोबल मार्केट का असर: डॉलर मजबूत होते ही सोना और चांदी धराशाई, कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती का सीधा असर कीमती धातुओं पर देखने को मिला है, जहां सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में ही इन दोनों धातुओं पर दबाव बढ़ गया और दाम एक प्रतिशत से अधिक फिसल गए। निवेशकों की नजरें अब अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों और डॉलर इंडेक्स की चाल पर टिकी हुई हैं, जो फिलहाल मजबूत स्थिति में बना हुआ है।

    घरेलू वायदा बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के जून अनुबंध की शुरुआत हल्की गिरावट के साथ हुई, लेकिन कुछ ही समय में गिरावट और गहरी हो गई। कारोबार के दौरान सोने के दाम में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और यह दिन के निचले स्तर की ओर खिसकता नजर आया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर में मजबूती के कारण निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं, जिससे इसकी मांग पर दबाव बढ़ा है।

    इसी तरह चांदी के दामों में भी कमजोर रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही चांदी में गिरावट दर्ज की गई और इसका असर पूरे सत्र में दिखाई दिया। चांदी भी एक प्रतिशत से अधिक कमजोर होकर कारोबार करती रही, जिससे कमोडिटी बाजार में अस्थिरता का माहौल बन गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे। डॉलर इंडेक्स में तेजी के चलते अन्य मुद्राओं में सोने की कीमतें महंगी हो गईं, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ा। डॉलर इंडेक्स प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की ताकत को दर्शाता है और जब यह मजबूत होता है तो सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों पर दबाव बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक संकेत और अमेरिकी मुद्रा की स्थिति ही कीमती धातुओं की दिशा तय कर रहे हैं। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बाजार में बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं। इसी कारण सोना और चांदी में कमजोरी का रुझान बना हुआ है।

    भारतीय शेयर बाजार में भी इस दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला और शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर में दबाव के कारण प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी आई, जिससे समग्र बाजार धारणा प्रभावित हुई।

    फिलहाल बाजार की नजर डॉलर की आगे की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं।

  • झुलसाती गर्मी से हाहाकार: 22 शहरों में 44 डिग्री पार, वॉर्म नाइट की चेतावनी

    झुलसाती गर्मी से हाहाकार: 22 शहरों में 44 डिग्री पार, वॉर्म नाइट की चेतावनी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। मंगलवार को छतरपुर जिले के नौगांव में तापमान रिकॉर्ड 47 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे अधिक तापमान है। वहीं खजुराहो में पारा 46.4 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले 4 दिन प्रदेश में भीषण हीटवेव यानी लू का असर जारी रहेगा और हालात और गंभीर हो सकते हैं।
    22 शहरों में 44 डिग्री से ऊपर तापमान
    प्रदेश के 22 से अधिक शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया। दतिया 45.8 डिग्री के साथ तीसरा सबसे गर्म शहर रहा। इसके अलावा राजगढ़, दमोह, शाजापुर, टीकमगढ़, गुना, सागर, सतना और श्योपुर जैसे जिलों में भी पारा 45 डिग्री के आसपास रहा। ग्वालियर में पहली बार तापमान 45 डिग्री तक पहुंचा, जबकि भोपाल में 44.2 डिग्री, इंदौर में 43.7 डिग्री, उज्जैन में 43.8 डिग्री और जबलपुर में 44.6 डिग्री दर्ज किया गया।

    वॉर्म नाइट से बढ़ेगी परेशानी
    इस बार केवल दिन ही नहीं, बल्कि रातें भी राहत नहीं दे रही हैं। भोपाल में रात का तापमान 30 डिग्री तक दर्ज किया गया, जिसे मौसम वैज्ञानिकों ने वॉर्म नाइट बताया है। इससे लोगों को दिन के बाद रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।

    हीटवेव और ऑरेंज अलर्ट जारी
    मौसम विभाग ने प्रदेश के उत्तरी हिस्सों सहित कई जिलों—भिंड, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सागर और दमोह में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर सहित अधिकांश जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है।

    स्वास्थ्य को लेकर चेतावनी
    मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर न निकलने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार इस समय लू का असर सबसे अधिक होता है और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

    मध्यप्रदेश में अगले चार दिन मौसम और भी कठिन रहने वाले हैं। लगातार बढ़ता तापमान, वॉर्म नाइट और तेज लू लोगों की दिनचर्या पर असर डाल रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

  • वैश्विक दबाव के बीच शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसला; निवेशकों में बढ़ी चिंता

    वैश्विक दबाव के बीच शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसला; निवेशकों में बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई, जहां वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का सीधा असर घरेलू निवेशकों की धारणा पर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांक दबाव में आ गए और सेंसेक्स 75,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर में भारी बिकवाली के चलते देखने को मिली, जिससे पूरे बाजार का मूड कमजोर बना रहा।

    सुबह के समय सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह कई सौ अंकों की कमजोरी के साथ नीचे कारोबार करता दिखा। इसी तरह निफ्टी में भी गिरावट का रुख बना रहा और यह भी लाल निशान में खुला। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर कमजोर संकेतों, एशियाई बाजारों में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बनने के कारण बिकवाली का दबाव बढ़ गया।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई, जिससे स्पष्ट है कि रियल एस्टेट और सरकारी बैंकों के शेयरों पर दबाव अधिक रहा। इसके अलावा ऑटो, एफएमसीजी, कमोडिटी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर भी गिरावट की चपेट में रहे। हालांकि कुछ चुनिंदा सेक्टर जैसे फार्मा, हेल्थकेयर और आईटी में हल्की मजबूती देखने को मिली, जिससे बाजार को सीमित सहारा मिला।

    मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी गिरावट का असर देखने को मिला, जिससे यह संकेत मिला कि बिकवाली केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही बल्कि व्यापक बाजार पर इसका असर पड़ा है। इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर होता नजर आया और बाजार में सतर्कता का माहौल बना रहा।

    वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशिया के प्रमुख बाजारों में भी कमजोरी दर्ज की गई, जिससे घरेलू बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना। जापान, चीन, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया जैसे बाजारों में गिरावट का रुख रहा, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर पड़ा। वहीं अमेरिकी बाजार पहले ही बंद थे, जिससे वैश्विक संकेत पूरी तरह से अनिश्चित बने रहे।

    कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली, लेकिन इसका सकारात्मक असर बाजार पर दिखाई नहीं दिया। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बिकवाली और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी के बीच संतुलन की कोशिश जरूर दिखी, लेकिन बाजार का दबाव फिर भी बना रहा।

    कुल मिलाकर, कमजोर वैश्विक संकेतों, सेक्टरवार दबाव और निवेशकों की सतर्कता के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का माहौल बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत और संस्थागत निवेश की दिशा ही बाजार की चाल तय करेगी।

  • रेल कनेक्टिविटी पर जोर: CAIT ने रेल मंत्री से की अतिरिक्त ट्रेन चलाने की अपील

    रेल कनेक्टिविटी पर जोर: CAIT ने रेल मंत्री से की अतिरिक्त ट्रेन चलाने की अपील


    नई दिल्ली । मंगलवार को कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के प्रतिनिधियों ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। इस बैठक में देशभर के व्यापारिक प्रतिनिधि शामिल हुए और रेलवे सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। मध्यप्रदेश से राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर और महिला संगठन की प्रतिनिधि सीमा सिंह चौहान ने बैठक में भाग लिया और जबलपुर से जुड़ी रेल समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

    जबलपुर-दिल्ली अतिरिक्त ट्रेन की मांग
    सीमा सिंह चौहान ने रेल मंत्री को बताया कि जबलपुर से दिल्ली के बीच व्यापारिक आवागमन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मौजूदा ट्रेनों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से देर शाम एक अतिरिक्त ट्रेन शुरू करने की मांग की, जिससे व्यापारियों और यात्रियों को अधिक सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी गति देगा।

    लॉजिस्टिक्स सुधार और डेमरेज शुल्क पर राहत की मांग
    बैठक में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अन्य मुद्दे भी उठाए गए। प्रतिनिधियों ने साइडिंग सिस्टम को बेहतर बनाने, माल ढुलाई प्रक्रिया को सरल करने और व्यापारियों पर लगाए जाने वाले अनुचित डेमरेज शुल्क में राहत देने की मांग की। व्यापारियों का कहना था कि मौजूदा व्यवस्था में कई जगह देरी और अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ता है, जिससे कारोबार प्रभावित होता है।

    रेल मंत्री ने दिए सकारात्मक संकेत
    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने कहा कि मंत्री का रवैया सकारात्मक रहा और उम्मीद है कि जबलपुर के रेल कनेक्टिविटी मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।

    यह बैठक जबलपुर के व्यापारिक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि अतिरिक्त ट्रेन और लॉजिस्टिक्स सुधार की मांगें स्वीकार होती हैं, तो क्षेत्र के व्यापार और यात्रियों दोनों को बड़ा लाभ मिल सकता है।