राम गोपाल वर्मा ने लेखक हुसैन ज़ैदी के साथ बातचीत में कहा कि अंडरवर्ल्ड की हर कार्रवाई सोची-समझी रणनीति का हिस्सा होती थी गैंगस्टर बड़े और असरदार नामों को घुमाकर इंडस्ट्री में डर का माहौल बनाती थी ताकि बाकी लोग अपने आप उनके दबाव में आ जाएं उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि शाहरुख खान सलमान खान और राकेश रोशन जैसे बड़े नामों को एडजस्ट करना इसी रणनीति का हिस्सा था।
उनके अनुसार अंडरवर्ल्ड का मकसद केवल वसूली नहीं था बल्कि सत्ता और कंट्रोल हासिल करना भी था जब कोई बड़ा सितारा या फिल्ममेकर उनकी बात सहमत से मना करता था तो उसे एक उदाहरण बनाने की कोशिश की जाती थी ताकि बाकी लोग डर जाएं यह डर ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता था।
इसी संदर्भ में उन्होंने साल 2000 में राकेश रोशन पर हुए हमले का जिक्र किया यह हमला फिल्म कहो ना… प्यार है की जबरदस्त कामयाबी के तुरंत बाद हुआ था बताया जाता है कि अंडरवर्ल्ड फिल्म की तारीखों और काम पर कंट्रोल चाहता था और जब इसका विरोध किया गया तो 21 जनवरी 2000 को उनके ऑफिस के बाहर प्रवर्तन की घटना सामने आई हालांकि किस्मत से वह इस हमले में बच गए।
वहीं 1997 में हुई गुलशन कुमार की हत्या को लेकर भी राम गोपाल वर्मा ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि गुलशन कुमार की बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव उन्हें अंडरवर्ल्ड के निशाने पर ले आया था। उनके अनुसार अबू सलेम जैसे अपराधियों के लिए यह घटना अपनी ताकत और पहचान स्थापित करने का एक जरिया भी रही होगी।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गुलशन कुमार ने कथित तौर पर जबरन वसूली की संस्थाओं के आगे झुकने से इनकार कर दिया था और यही उनके खिलाफ साजिश की एक बड़ी वजह बन सकती है उस दौर में जो भी व्यक्ति दबाव के आगे नहीं झुकता था उसे अंजाम देने के लिए तैयार रहना पड़ता था
यह पूरी घटना उस समय के बॉलीवुड की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है जब फिल्म इंडस्ट्री को सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि अपराध जगत के प्रभाव का भी सामना करना पड़ रहा था राम गोपाल वर्मा के ये खुलेसे न केवल उस दौर की जलनता को सामने लाते हैं बल्कि यह भी बताते हैं कि किस तरह डर और दबाव के जरिए एक पूरी इंडस्ट्री को प्रभावित करने की कोशिश की गई









