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  • दिवाली पर घर में बनाएं शाही सोहन हलवा, देसी घी और मेवों से तैयार होगी स्वादिष्ट पारंपरिक मिठाई

    दिवाली पर घर में बनाएं शाही सोहन हलवा, देसी घी और मेवों से तैयार होगी स्वादिष्ट पारंपरिक मिठाई

    नई दिल्ली ।दिवाली का त्योहार मिठाइयों के बिना अधूरा माना जाता है। इस मौके पर घरों में मेहमानों के स्वागत के लिए तरह-तरह के पकवान और मिठाइयां तैयार की जाती हैं। आमतौर पर लोग बाजार से मिठाइयां खरीदते हैं, लेकिन इस बार त्योहार पर कुछ अलग बनाने की योजना है तो घर पर पारंपरिक सोहन हलवा तैयार कर सकते हैं। देसी घी, चीनी, गेहूं के आटे और ढेर सारे मेवों से बनने वाली यह मिठाई स्वाद के साथ त्योहार की मिठास भी बढ़ा सकती है।

    सोहन हलवा उत्तर भारत की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाइयों में शामिल है। इसकी खास पहचान गाढ़ी बनावट, हल्के खिंचाव और घी की खुशबू से होती है। इसमें काजू, बादाम और पिस्ता जैसे मेवे मिलाने से इसका स्वाद और बेहतर हो जाता है। इसे तैयार करने में थोड़ा समय और लगातार मेहनत की जरूरत होती है, लेकिन सही तरीके से बनाने पर हलवा अच्छी तरह जमता है और इसे मनचाहे आकार में काटकर परोसा जा सकता है।

    इसे बनाने के लिए 4 बड़े चम्मच अंकुरित गेहूं का आटा, 4 बड़े चम्मच मैदा, एक कप चीनी, एक कप देसी घी और एक कप पानी की जरूरत होगी। इसके अलावा आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर, 2 बड़े चम्मच बारीक कटे काजू, 2 बड़े चम्मच बादाम और एक बड़ा चम्मच पिस्ता लेना होगा।

    हलवा बनाने की शुरुआत सांचे तैयार करने से करें। इसके लिए छोटी स्टील की कटोरियों या किसी चौड़े सांचे में थोड़ा देसी घी लगाकर चिकना कर लें। अब इनके तले में कटे हुए काजू, बादाम और पिस्ता फैला दें। इससे हलवा जमने के बाद ऊपर की तरफ मेवे दिखाई देंगे और मिठाई आकर्षक लगेगी।

    इसके बाद एक बर्तन में अंकुरित गेहूं का आटा और मैदा डालें। इसमें धीरे-धीरे पानी मिलाकर अच्छी तरह फेंटें। ध्यान रखें कि घोल में किसी तरह की गांठ न रहे। अब इसे कुछ देर के लिए अलग रख दें।

    अगले चरण में भारी तले वाली कड़ाही में चीनी और पानी डालकर गर्म करें। चीनी पूरी तरह घुल जाने के बाद तैयार आटे का घोल धीरे-धीरे चाशनी में मिलाएं। इस दौरान मिश्रण को लगातार चलाते रहना जरूरी है, ताकि वह कड़ाही के तले में चिपके नहीं और उसमें गांठें न बनें।

    जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे तो इसमें थोड़ा-थोड़ा करके देसी घी डालें। हर बार घी डालने के बाद मिश्रण को अच्छी तरह चलाएं। इसे मध्यम से धीमी आंच पर पकाते रहें। सोहन हलवे की सही बनावट पाने के लिए इस प्रक्रिया में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। लगातार चलाने से मिश्रण समान रूप से पकता है।

    जब हलवा गाढ़ा होकर कड़ाही के किनारों को छोड़ने लगे और उसमें चमक दिखाई देने लगे, तब इलायची पाउडर मिला दें। इसके बाद गैस बंद कर दें। तैयार मिश्रण को तुरंत घी लगे सांचों में डालें और ऊपर से बचे हुए मेवे सजा दें।

    हलवे को कमरे के तापमान पर करीब 3 से 4 घंटे तक जमने दें। अच्छी तरह सेट होने के बाद इसे सांचे से निकालकर मनचाहे आकार में काट लें। इस तरह घर पर तैयार सोहन हलवा मेहमानों को परोसने के लिए तैयार हो जाएगा।

    हलवा बनाते समय कुछ सावधानियां रखना भी जरूरी है। हमेशा भारी तले वाली कड़ाही का इस्तेमाल करें और आटे के घोल को अच्छी तरह फेंटें। घी एक साथ डालने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिलाएं। पकाते समय मिश्रण लगातार चलाते रहें। तैयार हलवे को सांचे में डालने में देरी न करें, क्योंकि ठंडा होने पर यह जल्दी जमने लगता है। पूरी तरह ठंडा और सेट होने के बाद ही इसके टुकड़े काटें।

    तैयार सोहन हलवे को एयरटाइट डिब्बे में रखकर सुरक्षित रखा जा सकता है। दिवाली से पहले इसे तैयार करने से त्योहार के दिन मिठाई बनाने की भागदौड़ कम होगी और घर आए मेहमानों को पारंपरिक स्वाद वाली मिठाई परोसने का मौका मिलेगा।

  • World Vegan Day 2026: क्या है वीगन डाइट, दूध-दही से दूरी के बावजूद सेहत को मिल सकते हैं ये फायदे…

    World Vegan Day 2026: क्या है वीगन डाइट, दूध-दही से दूरी के बावजूद सेहत को मिल सकते हैं ये फायदे…

    नई दिल्ली । हर साल 1 नवंबर को विश्व वीगन दिवस यानी World Vegan Day मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पशुओं की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। पिछले कुछ वर्षों में पूरी तरह पौधों पर आधारित भोजन का चलन बढ़ा है। हालांकि, वीगन डाइट को लेकर अब भी कई लोगों के मन में सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि वीगन भोजन सामान्य शाकाहारी खानपान से कैसे अलग है और इसमें दूध, दही तथा पनीर जैसे खाद्य पदार्थों के बिना शरीर को जरूरी पोषण कैसे मिल सकता है।

    वीगन डाइट पूरी तरह पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों पर आधारित होती है। इसमें मांस, मछली, अंडे और दूध से बने उत्पादों का सेवन नहीं किया जाता। सामान्य शाकाहारी भोजन में मांस और मछली से परहेज किया जाता है, लेकिन दूध, दही, घी, मक्खन और पनीर जैसे डेयरी उत्पाद शामिल हो सकते हैं। इसके विपरीत, वीगन आहार अपनाने वाले लोग इन सभी पशु-आधारित खाद्य पदार्थों से दूरी रखते हैं। इसमें शहद का इस्तेमाल भी नहीं किया जाता, क्योंकि यह मधुमक्खियों से प्राप्त होता है। वीगन जीवनशैली अपनाने वाले कुछ लोग कपड़ों और अन्य वस्तुओं में चमड़े, ऊन तथा रेशम से बने उत्पादों से भी परहेज करते हैं।

    वीगन डाइट में खाने के कई विकल्प उपलब्ध हैं। गेहूं, चावल, ओट्स, बाजरा और मक्का जैसे अनाज इसका हिस्सा हो सकते हैं। इसके अलावा अरहर, मूंग, मसूर, चना और राजमा जैसी दालें शरीर को प्रोटीन देने में मदद करती हैं। सेब, केला, संतरा और पपीता जैसे फल तथा पालक, ब्रोकोली और अन्य मौसमी सब्जियां भी इस आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बादाम, अखरोट, काजू, मूंगफली और विभिन्न बीजों से भी पोषक तत्व प्राप्त किए जा सकते हैं।

    प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए सोयाबीन, टोफू, दालें, चना और बीन्स उपयोगी विकल्प हैं। दूध की जगह सोया मिल्क, बादाम मिल्क और ओट्स मिल्क जैसे पौधों से बने पेय इस्तेमाल किए जा सकते हैं। सामान्य पनीर के स्थान पर टोफू का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। हालांकि, सभी विकल्पों की पोषण संबंधी गुणवत्ता समान नहीं होती। इसलिए खाद्य पदार्थ चुनते समय उनमें मौजूद प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।

    संतुलित तरीके से अपनाई गई वीगन डाइट सेहत के लिए कई तरह से लाभकारी हो सकती है। फल, सब्जियों, दालों और साबुत अनाज में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन को बेहतर रखने और कब्ज की समस्या कम करने में मदद कर सकती है। फाइबर से भरपूर भोजन खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा महसूस हो सकता है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है।

    पौधों पर आधारित संतुलित आहार हृदय स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी हो सकता है। इसमें संतृप्त वसा कम रखने और साबुत अनाज, फल तथा सब्जियों को प्राथमिकता देने से खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर नियंत्रण में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, ये फायदे इस बात पर निर्भर करते हैं कि भोजन कितना संतुलित है और उसमें तले हुए, अधिक चीनी वाले तथा अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ कितनी मात्रा में शामिल हैं।

    वीगन डाइट अपनाते समय कुछ पोषक तत्वों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। दूध और डेयरी उत्पाद नहीं लेने के कारण कैल्शियम तथा विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विटामिन बी12 भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसकी कमी से शरीर में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा आयरन, जिंक, ओमेगा-3 फैटी एसिड और पर्याप्त प्रोटीन का सेवन सुनिश्चित करना जरूरी है।

    इन जरूरतों को पूरा करने के लिए फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ, दालें, बीन्स, नट्स और बीजों को नियमित भोजन में शामिल किया जा सकता है। विटामिन बी12 के लिए फोर्टिफाइड उत्पाद या चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सप्लीमेंट की जरूरत पड़ सकती है। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को आहार में बड़ा बदलाव करने से पहले योग्य पोषण विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इस तरह सही योजना और पोषक तत्वों पर ध्यान देकर वीगन डाइट को संतुलित जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सकता है।

  • फ्रांस में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बीच कौन फैला रहा हिंसा, नकाबपोश 'कैसर्स' की भूमिका से बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

    फ्रांस में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बीच कौन फैला रहा हिंसा, नकाबपोश 'कैसर्स' की भूमिका से बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

    नई दिल्ली ।फ्रांस में महंगाई, आर्थिक असमानता और सरकारी नीतियों के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन अब हिंसक घटनाओं के कारण चर्चा में हैं। लगातार तीसरे सप्ताहांत हजारों लोग सड़कों पर उतरे। देश के अधिकांश हिस्सों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन 31 अक्टूबर को रैलियां समाप्त होने के दौरान पेरिस सहित कई शहरों में नकाबपोश लोगों के समूहों की पुलिस से झड़प हो गई। इन घटनाओं के बाद सवाल उठने लगा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बीच हिंसा फैलाने वाले ये लोग कौन हैं और उनका विरोध करने का तरीका क्या है?

    फ्रांस में ऐसे उपद्रवियों के लिए ‘कैसर्स’ शब्द इस्तेमाल किया जाता है। फ्रांसीसी भाषा में इसका अर्थ तोड़फोड़ करने वाले होता है। ये किसी एक पंजीकृत संगठन या राजनीतिक दल के सदस्य नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग छोटे समूहों में सक्रिय रहते हैं। प्रदर्शन के दौरान इनकी गतिविधियों में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, पुलिस से भिड़ना और सरकारी व्यवस्था के खिलाफ हिंसक कार्रवाई करना शामिल बताया जाता है।

    इन समूहों में अक्सर युवा और कट्टर वामपंथी विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं की मौजूदगी बताई जाती है। इन्हें कई बार अल्ट्रा-लेफ्ट समूहों के रूप में भी पहचाना जाता है। हालांकि, इनका कोई केंद्रीय नेतृत्व या साझा सदस्यता व्यवस्था सामने नहीं आई है। अलग-अलग समूहों में सक्रिय रहने के कारण इनकी पहचान और संगठनात्मक ढांचे का पता लगाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना रहता है।

    कैसर्स आमतौर पर बड़े प्रदर्शनों के दौरान रैलियों के किनारे या उनके अंतिम पड़ाव पर सक्रिय होते हैं। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने के बजाय ये पुलिस के साथ टकराव और तोड़फोड़ की घटनाओं में शामिल होते हैं। पहचान छिपाने के लिए नकाब, चश्मे और काले कपड़ों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ घटनाओं में इनके पास हथौड़े और आतिशबाजी से जुड़ी सामग्री भी देखी गई है। बैंकों, रियल एस्टेट कार्यालयों और बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की घटनाएं भी इनके विरोध के तरीकों में शामिल बताई जाती हैं।

    31 अक्टूबर को फ्रांस के विभिन्न शहरों में करीब 3.20 लाख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। इनमें लगभग 70 हजार लोग अकेले पेरिस में सड़कों पर उतरे थे। अधिकांश रैलियां शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन राजधानी में पोर्टे डी शारांटों के आसपास स्थिति बिगड़ गई। काले कपड़े पहने दर्जनों नकाबपोश लोगों ने हथौड़ों से सड़क के पत्थर उखाड़कर पुलिस पर फेंके। सुरक्षा बलों पर एक आग लगाने वाला उपकरण भी फेंका गया। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस, स्टन ग्रेनेड और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कुछ सौ उपद्रवियों का एक समूह लगातार सुरक्षा बलों पर हमले कर रहा था। पेरिस में 400 से 800 कट्टर वामपंथी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, यह अनुमानित संख्या थी और इससे सभी उपद्रवियों की प्रमाणित पहचान नहीं होती।

    इस बार हैलोवीन के त्योहार ने भी सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी। कई प्रदर्शनकारी स्पाइडरमैन और फ्रैंकेंस्टाइन जैसे किरदारों की पोशाक पहनकर पहुंचे। कुछ लोगों ने हैलोवीन के मुखौटों से चेहरे ढके। गृह मंत्री लॉरां नूनेज ने चेतावनी दी थी कि पहचान छिपाने के लिए चेहरा ढकने वालों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। सोशल मीडिया पर हैलोवीन की रात क्रांति शुरू करने की अपील वाले संदेश भी सामने आए थे।

    इन घटनाओं के बीच कैसर्स को अप्रवासी समुदाय से जोड़ने की कोशिशों पर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन हिंसक समूहों को सीधे अप्रवासी समुदाय से जोड़ने का कोई ठोस आधार नहीं है। इनमें फ्रांसीसी नागरिकों और कट्टर वामपंथी विचारधारा से जुड़े युवाओं की भी बड़ी संख्या बताई गई है।

    दरअसल, मौजूदा आंदोलन की शुरुआत महंगाई, बढ़ती जीवनयापन लागत, आर्थिक असमानता और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति के विरोध में हुई थी। इसमें छात्र, ट्रेड यूनियन और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोग शामिल हैं। पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के घायल होने के बाद नागरिक स्वतंत्रता तथा विरोध के अधिकार की मांग भी आंदोलन का हिस्सा बन गई।

    17 अक्टूबर को हुए शुरुआती बड़े प्रदर्शनों के दौरान कई शहरों में दुकानों में लूटपाट और सार्वजनिक इमारतों में आगजनी हुई थी। अब छात्र संगठनों ने नवंबर के पहले सप्ताह में स्कूलों और विश्वविद्यालयों को बंद कराने तथा 5 नवंबर को मजदूर संगठनों के साथ प्रदर्शन करने की घोषणा की है। ऐसे में फ्रांस में आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनी रहेगी।

  • भारत की कूटनीति में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह बड़ा बदलाव, अमेरिका से यूरोप तक कई अहम मुलाकातों ने बढ़ाई हलचल|

    भारत की कूटनीति में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह बड़ा बदलाव, अमेरिका से यूरोप तक कई अहम मुलाकातों ने बढ़ाई हलचल|

    नई दिल्ली ।अक्टूबर 2026 का आखिरी सप्ताह भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहा। 25 से 31 अक्टूबर के बीच भारत ने यूरोप, पश्चिम एशिया, उत्तरी अमेरिका और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क तेज किए। इस दौरान उच्चस्तरीय यात्राओं, द्विपक्षीय बैठकों और बहुपक्षीय सम्मेलनों के जरिए व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। सप्ताह के दौरान भारत ने पुराने साझेदारों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ नए सहयोग की संभावनाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया।

    इस सप्ताह की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधि 30 और 31 अक्टूबर को अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक रही। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने वैश्विक संघर्षों, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा।

    जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति और बातचीत के माध्यम से तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने युद्धों के व्यापक आर्थिक प्रभावों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, किसी क्षेत्र में होने वाला संघर्ष केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाद्य आपूर्ति, ऊर्जा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित करता है। इसका असर विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों पर पड़ता है।

    अटलांटा में ही क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक भी हुई। इसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक समन्वय से जुड़े विषयों पर चर्चा की। इस बैठक को आगामी क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना गया।

    जी-20 बैठक के दौरान जयशंकर ने कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। 30 अक्टूबर को उन्होंने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास से बातचीत की। इस दौरान यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

    कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ हुई मुलाकात में दोनों देशों के बीच सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। वहीं, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ भी बातचीत हुई। इन संपर्कों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और भारत के बीच प्रौद्योगिकी एवं नवाचार साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

    जयशंकर ने अर्जेंटीना, ब्राजील, मैक्सिको और जर्मनी के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की। अर्जेंटीना के साथ व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा और परमाणु सहयोग जैसे विषय चर्चा में रहे। मैक्सिको के साथ बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों को और गति देने पर जोर दिया गया। इन बैठकों के जरिए भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के अवसर तलाशे।

    इससे पहले 25 से 28 अक्टूबर तक लिकटेंस्टीन के वंशानुगत राजकुमार एलोइस अपनी पत्नी राजकुमारी सोफी के साथ भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस में उनसे मुलाकात की। बातचीत में व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुए समझौते के तहत आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाना भी प्रमुख विषय रहा।

    यूरोप के साथ संबंधों को लेकर ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री बीट माइनल-राइजिंगर की भारत यात्रा भी महत्वपूर्ण रही। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बातचीत में व्यापार, प्रौद्योगिकी और यूरोपीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। इसके साथ ही खाड़ी देशों के साथ भारत के बढ़ते संपर्क भी व्यापक कूटनीतिक गतिविधियों का हिस्सा रहे।

    पूरे सप्ताह की गतिविधियों से भारत की विदेश नीति की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं सामने आईं। पहली, अमेरिका, यूरोप और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख साझेदारों के साथ रणनीतिक संवाद बनाए रखना। दूसरी, व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते तलाशना। तीसरी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों के बीच बातचीत तथा कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देना।

    इस तरह अक्टूबर का अंतिम सप्ताह भारत के लिए केवल बैठकों और यात्राओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक मंचों पर अपनी प्राथमिकताएं रखने और विभिन्न देशों के साथ साझेदारी को आगे बढ़ाने का अवसर भी बना।

  • अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन ने बनाया नया रिकॉर्ड, 23 प्रतिशत की छलांग के साथ सरकारी खजाने में आए 2.31 लाख करोड़

    अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन ने बनाया नया रिकॉर्ड, 23 प्रतिशत की छलांग के साथ सरकारी खजाने में आए 2.31 लाख करोड़

    नई दिल्ली ।देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह के मोर्चे पर अक्टूबर 2026 में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान सकल जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 22.9 प्रतिशत उछलकर 2.31 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। पिछले साल अक्टूबर 2025 में यह आंकड़ा 1.88 लाख करोड़ रुपये था। ताजा आंकड़े देश में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और आयात से मिलने वाले कर राजस्व में बढ़ोतरी को दर्शाते हैं।

    रिफंड की राशि घटाने के बाद अक्टूबर में शुद्ध जीएसटी राजस्व 25.6 प्रतिशत बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी महीने में यह 1.61 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। सकल और शुद्ध दोनों तरह के राजस्व में हुई वृद्धि से कर संग्रह में मजबूती का संकेत मिला है।

    अक्टूबर के दौरान घरेलू जीएसटी संग्रह में 15.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 1.59 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके मुकाबले आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व में कहीं अधिक तेजी देखने को मिली। आयात पर मिलने वाला कर 42.2 प्रतिशत बढ़कर 72,246 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल अक्टूबर में इस मद से 50,796 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।

    घरेलू जीएसटी संग्रह में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) का योगदान 42,935 करोड़ रुपये रहा। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) के रूप में 51,340 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) का घरेलू संग्रह 64,769 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। आयात से प्राप्त आईजीएसटी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जिसने कुल कर संग्रह को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले सात महीनों यानी अप्रैल से अक्टूबर के दौरान भी जीएसटी संग्रह में सकारात्मक रुझान बना रहा। इस अवधि में सकल जीएसटी कलेक्शन 13.2 प्रतिशत बढ़कर 14.77 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 13.05 लाख करोड़ रुपये था। वहीं, शुद्ध जीएसटी राजस्व 12.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12.69 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 11.27 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।

    अक्टूबर में जीएसटी रिफंड की राशि में भी बढ़ोतरी हुई। कुल रिफंड 6.5 प्रतिशत बढ़कर 27,934 करोड़ रुपये रहा, जबकि अक्टूबर 2025 में यह 26,225 करोड़ रुपये था। घरेलू कारोबार से संबंधित रिफंड 9.8 प्रतिशत बढ़कर 14,007 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, आईसीईजीएटीई के माध्यम से संसाधित निर्यात रिफंड 3.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 13,927 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    रिफंड को समायोजित करने के बाद घरेलू शुद्ध जीएसटी संग्रह 16.4 प्रतिशत बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। दूसरी ओर, कस्टम्स से जुड़े शुद्ध जीएसटी राजस्व में 56.2 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई और यह 58,319 करोड़ रुपये रहा। इससे आयात पर मिलने वाले कर राजस्व की मजबूत स्थिति सामने आई।

    अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच कुल जीएसटी रिफंड 16.9 प्रतिशत बढ़कर 2.08 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें घरेलू रिफंड 19.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.18 लाख करोड़ रुपये और आयात से जुड़े रिफंड 13.4 प्रतिशत बढ़कर 89,733 करोड़ रुपये रहे। इस तरह चालू वित्त वर्ष के शुरुआती सात महीनों में जीएसटी संग्रह और रिफंड दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • कन्नड़ राज्योत्सव पर बेंगलुरु-मुंबई को मिली नई सौगात, अश्विनी वैष्णव ने शुरू की वंदे भारत स्लीपर सेवा

    कन्नड़ राज्योत्सव पर बेंगलुरु-मुंबई को मिली नई सौगात, अश्विनी वैष्णव ने शुरू की वंदे भारत स्लीपर सेवा

    नई दिल्ली । कर्नाटक के स्थापना दिवस यानी कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल कनेक्टिविटी को नई सुविधा मिली है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को बेंगलुरु के एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल (एसएमवीटी) से वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस नई ट्रेन सेवा का उद्देश्य देश के दो प्रमुख शहरों के बीच रात के समय यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाना है। इससे तकनीकी और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बेंगलुरु का संपर्क देश की वित्तीय राजधानी मुंबई से बेहतर होगा।

    उद्घाटन समारोह में केंद्रीय रेल राज्यमंत्री वी. सोमन्ना, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और एचडी कुमारस्वामी मौजूद रहे। इनके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या, पी.सी. मोहन और सी.एन. मंजूनाथ तथा राज्यसभा सदस्य लहर सिंह सिरोया और जगेश ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

    इस अवसर पर अश्विनी वैष्णव ने कर्नाटक और बेंगलुरु के लोगों को कन्नड़ राज्योत्सव की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस विशेष अवसर पर बेंगलुरु और मुंबई के बीच वंदे भारत स्लीपर सेवा की शुरुआत की जा रही है। उनके अनुसार, यह देश की तीसरी वंदे भारत स्लीपर सेवा होगी। उन्होंने इस रेल सेवा को तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी बेंगलुरु और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र मुंबई को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सुविधा बताया।

    रेल मंत्री ने बताया कि ट्रेन के निर्माण और डिजाइन में यात्रियों की सुविधा तथा सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इसमें यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई नए फीचर शामिल किए गए हैं। लोकोमोटिव पायलटों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसके अलावा बर्थ पर आसानी से चढ़ने और उतरने के लिए भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। दिव्यांग यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भी ट्रेन में विशेष प्रावधान किए गए हैं।

    वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस में कुल 823 यात्रियों के सफर करने की क्षमता होगी। ट्रेन में 11 एसी थ्री-टियर कोच होंगे, जिनमें 611 यात्रियों के लिए जगह उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा चार एसी टू-टियर कोच में 188 यात्री सफर कर सकेंगे। ट्रेन में एक फर्स्ट एसी कोच भी होगा, जिसकी क्षमता 24 यात्रियों की होगी। इस तरह अलग-अलग श्रेणियों के यात्रियों को एक ही ट्रेन में यात्रा का विकल्प मिलेगा।

    रेल राज्यमंत्री वी. सोमन्ना ने इस मौके पर केंद्र सरकार की रेलवे विकास योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में कर्नाटक में रेलवे के विकास पर 52 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। उनके मुताबिक, देशभर में 14 हजार रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए हैं, जिनमें 900 से अधिक ओवरब्रिज कर्नाटक में हैं। उन्होंने उत्तरी, मध्य और दक्षिणी कर्नाटक में रेलवे कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

    दक्षिण पश्चिम रेलवे इस नई सेवा का संचालन और रखरखाव करेगा। इसके लिए ट्रेन को दो नंबर दिए गए हैं। ट्रेन संख्या 27652 बेंगलुरु के एसएमवीटी से मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के बीच चलेगी, जबकि 27651 मुंबई से बेंगलुरु के लिए निर्धारित की गई है।

    बेंगलुरु से मुंबई जाने वाली ट्रेन शाम 7 बजकर 45 मिनट पर रवाना होगी और अगले दिन सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर सीएसएमटी पहुंचेगी। इस यात्रा में करीब 16 घंटे लगेंगे। वापसी में ट्रेन मुंबई से रात 8 बजकर 10 मिनट पर रवाना होगी और अगले दिन दोपहर बेंगलुरु पहुंचेगी। यह सेवा सप्ताह में छह दिन संचालित होगी। बेंगलुरु से मुंबई की यात्रा सोमवार को और मुंबई से बेंगलुरु की वापसी मंगलवार को ट्रेन नहीं चलेगी। रातभर की इस रेल सेवा से दोनों शहरों के बीच यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी का विकल्प मिलेगा।

  • सरदार पटेल की विरासत को अमेरिका में मिलेगी नई पहचान, अटलांटा में बनने जा रहा 'आयरन मैन यूनिटी बैंक'

    सरदार पटेल की विरासत को अमेरिका में मिलेगी नई पहचान, अटलांटा में बनने जा रहा 'आयरन मैन यूनिटी बैंक'


    नई दिल्ली ।भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत अब अमेरिका में एक नई पहचान हासिल करने की तैयारी में है। अटलांटा क्षेत्र में उनके नाम और विचारों से प्रेरित एक सामुदायिक बैंक स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है। प्रस्तावित संस्थान का नाम ‘आयरन मैन यूनिटी बैंक’ रखा गया है। इसके आयोजकों को उम्मीद है कि आवश्यक सरकारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अप्रैल 2027 तक बैंक की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, फिलहाल इसकी स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं।

    कम्युनिटी लीडर डॉ. वासुदेव पटेल ने बताया कि बैंक की स्थापना की दिशा में काम किया जा रहा है। उनके अनुसार, संस्थान अगले छह महीनों में शुरू हो सकता है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि शेष सरकारी प्रक्रियाएं अप्रैल 2027 तक पूरी कर ली जाएंगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समयसीमा फिलहाल अनुमान पर आधारित है और बैंक की वास्तविक शुरुआत औपचारिक मंजूरियों पर निर्भर करेगी।

    प्रस्तावित बैंक की पहचान को सरदार पटेल के व्यक्तित्व और राष्ट्रीय एकता में उनके योगदान से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके लिए बैंक के लोगो में गुजरात स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की झलक शामिल करने का प्रस्ताव है। यह प्रतीक बैंक के चेक और अन्य ब्रांडिंग सामग्री पर भी दिखाई देगा। आयोजकों का उद्देश्य बैंक की पहचान के माध्यम से ग्राहकों को भारत के एकीकरण में सरदार पटेल की ऐतिहासिक भूमिका से परिचित कराना है।

    डॉ. पटेल के अनुसार, बैंक के लोगो को देखकर अलग-अलग समुदायों के लोग इसके पीछे की कहानी जानने में रुचि दिखा सकते हैं। इससे उन्हें सरदार पटेल के योगदान और भारत को एकजुट करने में निभाई गई उनकी भूमिका के बारे में जानकारी देने का अवसर मिलेगा। इस तरह प्रस्तावित बैंक केवल वित्तीय संस्थान की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसकी ब्रांडिंग में भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय एकता से जुड़े प्रतीकों को भी प्रमुखता दी जाएगी।

    हालांकि, बैंक की योजना को लेकर अभी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने नहीं आई हैं। डॉ. वासुदेव पटेल ने इसकी प्रस्तावित पूंजी, मालिकाना हक की व्यवस्था और पूरी की जाने वाली सरकारी औपचारिकताओं का विस्तृत विवरण साझा नहीं किया। ऐसे में बैंक की स्थापना, संचालन और वित्तीय ढांचे से जुड़ी अंतिम तस्वीर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    इस प्रस्ताव की जानकारी अटलांटा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आई। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया था। इसमें भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया। इस प्रतिमा को अमेरिका के फेडरेशन ऑफ गुजराती एसोसिएशन्स की राष्ट्रीय टीम ने प्रायोजित किया था। संगठन के अध्यक्ष डॉ. वासुदेव पटेल ने इसकी जानकारी दी।

    सरदार वल्लभभाई पटेल स्वतंत्र भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे। देश की आजादी के बाद विभिन्न रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कराने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। उनके प्रयासों से स्वतंत्र भारत के एकीकरण की प्रक्रिया को मजबूती मिली। इसी योगदान के कारण उन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है।

    गुजरात में स्थापित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी उनकी इसी ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। सरदार पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। अटलांटा में प्रस्तावित बैंक का नाम और प्रतीक इसी विरासत को अमेरिका में पहचान दिलाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इसके शुरू होने की अंतिम तारीख सरकारी मंजूरियों और बाकी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।

  • भारत-स्पेन संबंधों को नई ऊंचाई देने स्पेन जाएंगे पबित्रा मार्गेरिटा, मैड्रिड में कई अहम बैठकों पर रहेंगी नजरें

    भारत-स्पेन संबंधों को नई ऊंचाई देने स्पेन जाएंगे पबित्रा मार्गेरिटा, मैड्रिड में कई अहम बैठकों पर रहेंगी नजरें

    नई दिल्ली ।विदेश एवं कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा 3 नवंबर से तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर स्पेन जाएंगे। इस दौरान वह 30वें इबेरो-अमेरिकन कॉन्फ्रेंस शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत इस सम्मेलन में एसोसिएट ऑब्जर्वर यानी सहयोगी पर्यवेक्षक के रूप में भाग ले रहा है। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच राजनयिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    स्पेन में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में लैटिन अमेरिका और यूरोप के कई देश हिस्सा लेते हैं। वर्तमान में इसके सदस्य देशों की संख्या 22 है। इनमें लैटिन अमेरिका के 19 देश और यूरोप के तीन देश स्पेन, पुर्तगाल तथा अंडोरा शामिल हैं। इसके अलावा सम्मेलन में 12 एसोसिएट ऑब्जर्वर और 20 कंसल्टेटिव ऑब्जर्वर भी जुड़े हुए हैं। भारत सहयोगी पर्यवेक्षक के रूप में इस मंच की गतिविधियों में भागीदारी कर रहा है।

    पबित्रा मार्गेरिटा की यात्रा के दौरान सम्मेलन के इतर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। इन मुलाकातों में आपसी सहयोग और साझा हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा राज्य मंत्री स्पेन की राजधानी मैड्रिड में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। इससे स्पेन में बसे भारतीय नागरिकों के साथ संपर्क और संवाद को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    यह यात्रा भारत और स्पेन के बीच वर्ष 2026 के लिए घोषित संयुक्त पहल के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों ने 2026 को संस्कृति, पर्यटन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संयुक्त वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत दोनों देशों में विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। राज्य मंत्री की यात्रा इन्हीं आयोजनों की कड़ी का हिस्सा होगी।

    भारत और स्पेन के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1956 में स्थापित हुए थे। वर्ष 2026 में दोनों देशों के संबंधों के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर दोनों देशों ने सहयोग के नए क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। इसी वर्ष आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज भी नई दिल्ली पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।

    दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई थी। भारत और स्पेन के बीच रक्षा आधुनिकीकरण, एयरोस्पेस, नौसैनिक तकनीक और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी विकसित हो रही है।

    व्यापारिक मोर्चे पर स्पेन यूरोप में भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 9.9 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। भारत में 250 से अधिक स्पेनिश कंपनियां सक्रिय रूप से कारोबार कर रही हैं। इन कंपनियों की मौजूदगी दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के विस्तार को दर्शाती है।

    स्पेन में भारतीय समुदाय की संख्या लगभग 75 हजार बताई जाती है। दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क बढ़ाने के लिए भी कई प्रयास किए गए हैं। अगस्त 2024 में बार्सिलोना में भारत का नया महावाणिज्य दूतावास खोला गया था। इससे स्पेन में भारतीय नागरिकों को राजनयिक और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।

    शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। स्पेन के वलाडोलिड विश्वविद्यालय में हिंदी और भारतीय अध्ययन से जुड़ी पीठ स्थापित है। इसके अलावा स्पेन के कई शहरों में हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पबित्रा मार्गेरिटा की आगामी यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों और सम्मेलन में भागीदारी से इन सांस्कृतिक, शैक्षणिक, व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को आगे बढ़ाने के अवसर मिलेंगे।

  • ईरान के रहस्यमयी परमाणु ठिकाने पर ट्रंप की नजर, पिकएक्स माउंटेन को लेकर फिर दी हमले की चेतावनी

    ईरान के रहस्यमयी परमाणु ठिकाने पर ट्रंप की नजर, पिकएक्स माउंटेन को लेकर फिर दी हमले की चेतावनी

    नई दिल्ली ।अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में ईरान के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत की तारीफ करते हुए भी उसके एक महत्वपूर्ण भूमिगत परमाणु ठिकाने पिकएक्स माउंटेन का जिक्र किया। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के कुछ परमाणु प्रतिष्ठान अभी भी ऐसे हैं, जिनसे निपटना बाकी है। ट्रंप ने विशेष रूप से पिकएक्स माउंटेन को संभावित सैन्य लक्ष्य बताते हुए कहा कि इस पर तेजी से हमला किया जा सकता है। उनकी इस टिप्पणी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी सैन्य रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    पिकएक्स माउंटेन ईरान के इस्फहान प्रांत में स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र है। इसे स्थानीय भाषा में कूह-ए कोलांग गज ला कहा जाता है। अंग्रेजी में इसे पिकएक्स माउंटेन नाम इसलिए दिया गया है, क्योंकि स्थानीय शब्द कोलांग का संबंध कुदाल या पहाड़ खोदने वाले औजार से है। यह स्थान ईरान के प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठान नतांज से लगभग दो किलोमीटर दक्षिण में और राजधानी तेहरान से करीब 220 किलोमीटर दूर स्थित है।

    इस पहाड़ी के भीतर सुरंगों का एक बड़ा भूमिगत परिसर विकसित किया गया है। यहां दो अलग-अलग सुरंग परिसरों के प्रवेश मार्ग बनाए गए हैं। इस ठिकाने की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक भौगोलिक सुरक्षा है। पहाड़ के भीतर मजबूत ग्रेनाइट चट्टानों के बीच सुरंगें बनाई गई हैं। माना जाता है कि इसकी गहराई और चट्टानों की मजबूती इसे सामान्य हवाई हमलों से काफी हद तक सुरक्षित बना सकती है।

    पश्चिमी देशों के परमाणु विशेषज्ञों की चिंता इस परिसर के संभावित इस्तेमाल को लेकर है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान यहां यूरेनियम संवर्धन की सुविधा विकसित कर सकता है। ऐसी भूमिगत संरचना का उद्देश्य संवेदनशील परमाणु गतिविधियों को संभावित सैन्य हमलों से सुरक्षित रखना हो सकता है। हालांकि, अभी तक इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि यहां यूरेनियम संवर्धन का काम शुरू हो चुका है।

    यूरेनियम संवर्धन परमाणु ईंधन तैयार करने की प्रक्रिया है। कम संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल बिजली उत्पादन करने वाले परमाणु संयंत्रों में किया जा सकता है, जबकि अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का उपयोग परमाणु हथियार बनाने में भी संभव है। इसी वजह से ईरान की भूमिगत परमाणु सुविधाओं को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंता बनी हुई है।

    16 अक्टूबर 2026 की एक विशेषज्ञ रिपोर्ट में उपग्रह तस्वीरों के आधार पर इस परिसर की स्थिति का आकलन किया गया था। इसमें बताया गया कि सुरंगों के प्रवेश मार्गों पर मिट्टी के अवरोध अब भी मौजूद हैं। इससे संकेत मिलता है कि वहां फिलहाल नियमित परिचालन या बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियां नहीं हो रही हैं। हालांकि, परिसर में महत्वपूर्ण उपकरण या सामग्री मौजूद होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया।

    इससे पहले जुलाई में आई मीडिया रिपोर्टों में इजरायली खुफिया एजेंसियों के हवाले से दावा किया गया था कि ईरान ने यहां सेंट्रीफ्यूज और उनके पुर्जे पहुंचाए हैं। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    इस ठिकाने को निशाना बनाने में अमेरिका के सामने सैन्य चुनौती भी कम नहीं होगी। अमेरिकी सेना के पास जीबीयू-57 जैसे शक्तिशाली बंकर बस्टर बम हैं, जिन्हें जमीन के भीतर बने मजबूत ठिकानों को भेदने के लिए तैयार किया गया है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ के भीतर काफी गहराई में मौजूद पूरे परिसर को नष्ट करना आसान नहीं होगा।

    संभावित हमले में सुरंगों के प्रवेश द्वार, बिजली आपूर्ति, वेंटिलेशन और दूसरे सहायक ढांचे को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। लेकिन इससे यह सुनिश्चित नहीं होगा कि पहाड़ के भीतर मौजूद सभी सुविधाएं भी पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। अमेरिका के सामने एक बड़ी चुनौती संभावित परमाणु उपकरणों और सामग्री को दोबारा इस्तेमाल होने से रोकने की भी होगी।

    ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि पश्चिमी देशों को उसकी संवर्धन गतिविधियों और भूमिगत ढांचे पर संदेह है। नतांज और फोर्दो जैसे परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद भी पिकएक्स माउंटेन चर्चा में बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने अब तक इस परिसर का निरीक्षण नहीं किया है। ऐसे में वहां मौजूद उपकरणों, गतिविधियों और वास्तविक उद्देश्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

  • पंजाब चुनाव से पहले AAP में बगावत, 40 उम्मीदवारों की सूची आते ही दो विधायकों ने छोड़ी पार्टी..

    पंजाब चुनाव से पहले AAP में बगावत, 40 उम्मीदवारों की सूची आते ही दो विधायकों ने छोड़ी पार्टी..

    नई दिल्ली । पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को लगातार दो दिनों में बड़ा झटका लगा है। पार्टी की ओर से 31 अक्टूबर को 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी किए जाने के अगले ही दिन उसके दो मौजूदा विधायकों ने प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वाले नेताओं में पटियाला जिले की सनौर विधानसभा सीट से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना सीट से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा शामिल हैं। दोनों के फैसले से चुनाव से पहले पार्टी के भीतर असंतोष और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    दोनों विधायकों के इस्तीफे की जानकारी 1 नवंबर को सामने आई। हरमीत सिंह पठानमाजरा ने अपना इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा है। वहीं चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने की घोषणा की। दोनों विधायकों के नाम 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जारी की गई आम आदमी पार्टी की पहली सूची में शामिल नहीं थे। इस घटनाक्रम के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    दोनों नेताओं ने चंडीगढ़ में रविवार शाम 4:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने की जानकारी दी थी। इसमें उनके पार्टी छोड़ने के फैसले और इसके पीछे के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई गई। उनके भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की भी चर्चा सामने आई, हालांकि इस्तीफे के समय तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। इसलिए उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

    हरमीत सिंह पठानमाजरा और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ और उनके विधानसभा क्षेत्र में नदी-नालों की सफाई के मुद्दे पर उन्होंने सरकार तथा पार्टी नेतृत्व के कामकाज पर सवाल उठाए थे। इस घटनाक्रम के बाद उनके और भगवंत मान सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनने लगी थी। इसके बाद उनकी सरकारी सुरक्षा वापस लिए जाने का मामला भी चर्चा में आया था।

    चेतन सिंह जौड़ामाजरा समाना विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि, सितंबर 2024 में मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल के दौरान उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना क्षेत्र में पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर भी बदलाव हुए। पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को आम आदमी पार्टी में शामिल करने और उन्हें समाना विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाए जाने के बाद जौड़ामाजरा की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं।

    दूसरी ओर, हरमीत सिंह पठानमाजरा लंबे समय से पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों को लेकर चर्चा में रहे हैं। सितंबर 2025 में बाढ़ की स्थिति और अपने क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने सरकार के सामने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि क्षेत्र में नदी-नालों की सफाई और बाढ़ से बचाव के लिए पर्याप्त कदम उठाने की जरूरत है। इस मुद्दे पर उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद सामने आए थे। बाद के घटनाक्रम में उनकी सरकारी सुरक्षा वापस लिए जाने की बात भी सामने आई थी।

    पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए आम आदमी पार्टी ने पहले ही उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 31 अक्टूबर को घोषित पहली सूची में 40 विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए थे। पार्टी ने चुनाव से काफी पहले उम्मीदवारों की घोषणा करके अपनी तैयारियों को गति देने की कोशिश की है। हालांकि, सूची जारी होने के अगले ही दिन दो मौजूदा विधायकों के इस्तीफे ने पार्टी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

    पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं और 2027 में होने वाले चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी के दो विधायकों का पार्टी छोड़ना चुनावी तैयारियों के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों नेताओं की आगे की राजनीतिक गतिविधियों और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।