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  • ईस्टर के मौके पर देश के शीर्ष नेताओं का संदेश, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी बधाई

    ईस्टर के मौके पर देश के शीर्ष नेताओं का संदेश, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी बधाई


    नई दिल्ली।ईस्टर के पावन अवसर पर देशभर में उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। इस खास दिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और इस पर्व के आध्यात्मिक महत्व को साझा किया। नेताओं ने अपने संदेशों में शांति, प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि ईस्टर आशा, नए जीवन और सकारात्मकता का प्रतीक है। उन्होंने कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। साथ ही उन्होंने यीशु मसीह की शिक्षाओं को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन हमें दया, करुणा और एकता का मार्ग दिखाता है। प्रधानमंत्री ने लोगों से इन मूल्यों को अपनाकर समाज में सद्भाव बढ़ाने की अपील की।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी ईस्टर की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन यीशु मसीह के पुनरुत्थान की याद दिलाता है, जो सत्य और प्रेम की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें त्याग, क्षमा और करुणा जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करता है। राष्ट्रपति ने देशवासियों से शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी अपने संदेश में कहा कि ईस्टर का पर्व नए आरंभ, आस्था और उम्मीद का संदेश देता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह दिन सभी के जीवन में खुशियां, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आएगा।

    क्या है ईस्टर का महत्व?

    ईसाई धर्म में ईस्टर सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जिसे यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार, रोमन शासन द्वारा सूली पर चढ़ाए जाने के तीन दिन बाद यीशु मसीह मृतकों में से जीवित हो उठे थे। यह घटना पाप और मृत्यु पर विजय का प्रतीक मानी जाती है।

    ईस्टर ‘होली वीक’ का अंतिम और सबसे प्रमुख दिन होता है। इस सप्ताह में पाम संडे, मौंडी थर्सडे और गुड फ्राइडे जैसे महत्वपूर्ण दिन शामिल होते हैं, जो यीशु मसीह के जीवन की अहम घटनाओं को दर्शाते हैं।

    ईस्टर एग्स की परंपरा

    इस पर्व का एक खास आकर्षण ‘ईस्टर एग्स’ भी होते हैं। अंडों को नए जीवन और आशा का प्रतीक माना जाता है। परंपरागत रूप से इन्हें रंग-बिरंगे या लाल रंग में सजाया जाता है, जो त्याग और पुनर्जन्म का संकेत देते हैं।

  • बैंकिंग सेक्टर में नौकरियों का सुनहरा अवसर, 1000 पदों पर निकली भर्ती, आवेदन प्रक्रिया शुरू

    बैंकिंग सेक्टर में नौकरियों का सुनहरा अवसर, 1000 पदों पर निकली भर्ती, आवेदन प्रक्रिया शुरू

    नई दिल्ली। सरकारी बैंक में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए पंजाब एंड सिंध बैंक ने लोकल बैंक ऑफिसर के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। यह बैंक भारत सरकार के स्वामित्व वाला संस्थान है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

    जारी अधिसूचना के अनुसार, इस भर्ती के तहत कुल 1,000 पद भरे जाएंगे। इन पदों के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में वैकेंसी निर्धारित की गई है। सबसे ज्यादा 200 पद उत्तर प्रदेश में हैं, जबकि गुजरात में 125 और पंजाब में 100 पदों पर भर्ती होगी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 80-80, तमिलनाडु में 65, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में 60-60 पद, असम में 50, तेलंगाना में 30, पश्चिम बंगाल में 30, हिमाचल प्रदेश में 20, अरुणाचल प्रदेश में 15, झारखंड और केरल में 10-10 और नागालैंड में 5 पद शामिल हैं।

    इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की आयु 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। हालांकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएशन करने वाले उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहले लिखित परीक्षा और उसके बाद इंटरव्यू। अंतिम चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा।

    चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतन दिया जाएगा। इस पद पर नियुक्ति मिलने के बाद उम्मीदवारों को 48,480 रुपए से लेकर 85,920 रुपए तक का मासिक वेतन मिलेगा।

    आवेदन शुल्क भी निर्धारित किया गया है। सामान्य, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 850 रुपए के साथ लागू टैक्स और पेमेंट गेटवे शुल्क देना होगा। वहीं, एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शुल्क 100 रुपए रखा गया है, जिस पर अतिरिक्त टैक्स और चार्ज लागू होंगे।

    इच्छुक और योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 अप्रैल 2026 तय की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन फॉर्म भरने के बाद उसका प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।

    यह भर्ती उन युवाओं के लिए शानदार अवसर है, जो बैंकिंग सेक्टर में अपना करियर बनाना चाहते हैं।

  • केरल में सियासी हलचल तेज! अमित शाह के रोड शो से पहले बेपोर में बढ़ी हलचल

    केरल में सियासी हलचल तेज! अमित शाह के रोड शो से पहले बेपोर में बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली।केरल के बेपोर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित रोड शो से पहले सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। रविवार को होने वाले इस बड़े राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं और स्थानीय स्तर पर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सड़कें सजाई जा रही हैं, कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट रही है और जगह-जगह स्वागत की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ऐसे में बेपोर एक तरह से राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है।

    स्थानीय लोगों में भी इस कार्यक्रम को लेकर जबरदस्त उत्सुकता है। कई लोगों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे अमित शाह के स्वागत के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि “हमारे नेता अमित शाह यहां आ रहे हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है। बड़ी संख्या में लोग उनके रोड शो में शामिल होने के लिए तैयार हैं।” वहीं, कुछ भाजपा समर्थकों ने उम्मीद जताई कि अगर भारतीय जनता पार्टी को राज्य में मौका मिलता है तो विकास की रफ्तार तेज होगी और राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा।

    दिनभर रहेंगे व्यस्त, कई कार्यक्रमों में लेंगे हिस्सा

    अमित शाह का कार्यक्रम केवल बेपोर तक सीमित नहीं रहेगा। रोड शो के बाद वे एर्नाकुलम के कुन्नाथुनाद क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करेंगे, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता से संवाद करेंगे। इसके बाद शाम को तिरुवनंतपुरम के कट्टकड़ा इलाके में उनकी एक और बड़ी जनसभा प्रस्तावित है। दिन के अंत में वे थंपानूर में प्रवासी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी करेंगे। इस तरह उनका पूरा दिन राजनीतिक गतिविधियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों से भरा रहेगा।

    भाजपा का चुनावी अभियान तेज

    इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी केरल में चुनावी अभियान को धार देने पहुंचे हैं। उन्होंने तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्र सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में पिछले 11 वर्षों में शासन व्यवस्था और राजनीतिक संस्कृति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकारें जनहित, जवाबदेही और विकास के मुद्दों पर काम करती हैं, जिससे अन्य दलों को भी अपनी कार्यशैली बदलनी पड़ी है।

    नड्डा ने यह भी कहा कि पहले की राजनीति में विभाजन और तुष्टीकरण का बोलबाला था, लेकिन अब विकास-केन्द्रित राजनीति का दौर है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इस संदेश को आम जनता तक पहुंचाएं और राज्य में पार्टी को मजबूत करें।

    बदलाव की उम्मीद या सियासी रणनीति?

    केरल में पारंपरिक रूप से मजबूत राजनीतिक दलों के बीच भाजपा अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में अमित शाह और जेपी नड्डा के दौरे को पार्टी की रणनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। बेपोर में उमड़ा उत्साह यह संकेत जरूर देता है कि भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

  • MP के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म: मुफ्त इलाज पर रोक, मरीजों की परेशानी बढ़ी

    MP के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म: मुफ्त इलाज पर रोक, मरीजों की परेशानी बढ़ी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज कराने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। प्रदेश के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म हो गई है। इसमें राजधानी भोपाल के 51, इंदौर के 30, ग्वालियर के 33 और जबलपुर के 12 अस्पताल शामिल हैं। कुल मिलाकर चार प्रमुख शहरों में 398 में से 126 अस्पताल प्रभावित हुए हैं।

    जानकारी के अनुसार, NABH सर्टिफिकेट न मिलने के कारण इन अस्पतालों में अब मुफ्त इलाज उपलब्ध नहीं होगा। वहीं, फुल NABH प्रमाणित अस्पताल “डीम्ड इंपैनलमेंट” का लाभ प्राप्त करेंगे और अस्पतालों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर भुगतान किया जाएगा। एंट्री लेवल NABH अस्पतालों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान मिलेगा। साथ ही मरीजों के फीडबैक से अस्पतालों की निगरानी भी की जाएगी।

    NABH सर्टिफिकेट अस्पतालों की गुणवत्ता और सुरक्षा का प्रमाण होता है। इसमें 600 से अधिक मानकों पर अस्पतालों की जांच की जाती है। ये मानक मरीजों की सुरक्षा, साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, नर्सिंग स्टाफ, इमरजेंसी सेवाएं और सर्जरी प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं। सरकार का मानना है कि NABH प्रमाणपत्र मरीजों को सुरक्षित और भरोसेमंद इलाज की गारंटी देता है।

    इस फैसले के बाद प्रभावित अस्पतालों के मरीजों को अब मुफ्त इलाज के विकल्प सीमित होंगे। मरीजों को अब अपने नजदीकी फुल NABH प्रमाणित अस्पतालों में इलाज कराने की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन अल्पकाल में लोग असुविधा और परेशानियों का सामना कर सकते हैं।

    मंत्रालय ने बताया कि आगामी दिनों में अस्पतालों को NABH मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। वहीं, मरीजों से फीडबैक लेकर अस्पतालों की सेवाओं की निगरानी की जाएगी ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

    इस बदलाव से मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और मरीजों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, हालांकि फिलहाल लोगों को अस्पतालों के चयन में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

  • समुद्री जीवन की लाइफलाइन ‘कोरल रीफ’ पर संकट, समझिए कोरल ब्लीचिंग का असर

    समुद्री जीवन की लाइफलाइन ‘कोरल रीफ’ पर संकट, समझिए कोरल ब्लीचिंग का असर


    नई दिल्ली।समुद्र की गहराइयों में मौजूद कोरल रीफ यानी मूंगा चट्टानें प्रकृति की सबसे अद्भुत और जीवंत संरचनाओं में गिनी जाती हैं। इन्हें ‘समुद्र का वर्षावन’ भी कहा जाता है, क्योंकि ये बेहद कम क्षेत्र में फैली होने के बावजूद समुद्री जैव-विविधता का बड़ा आधार हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, दुनिया के महासागरों के सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्से में मौजूद ये रीफ करीब 25 प्रतिशत समुद्री जीवों को आश्रय, भोजन और सुरक्षा प्रदान करती हैं। छोटे-छोटे जीवों यानी पॉलिप्स द्वारा हजारों साल में बनने वाली ये संरचनाएं समुद्र की पारिस्थितिकी को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।

    कोरल रीफ केवल जैव-विविधता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। ये चट्टानें समुद्री तूफानों और चक्रवातों की तीव्रता को कम कर तटों को क्षरण से बचाती हैं। इसके अलावा, मत्स्य पालन, पर्यटन और शोध गतिविधियों के जरिए ये वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देती हैं। ऑस्ट्रेलिया में स्थित ग्रेट बैरियर रीफ दुनिया की सबसे बड़ी कोरल रीफ है, जो हजारों समुद्री प्रजातियों का घर है और लाखों लोगों की आजीविका का आधार बनी हुई है।

    क्या है कोरल और रीफ में अंतर?

    वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो ‘रीफ’ समुद्र तल से ऊपर उठी किसी भी संरचना को कहा जाता है, जबकि ‘कोरल’ सूक्ष्म जीव होते हैं जो कैल्शियम कार्बोनेट का ढांचा बनाते हैं। इन कोरल के समूह को ‘कोरल कॉलोनी’ कहा जाता है और जब ये बड़े पैमाने पर संरचना बनाते हैं, तो उसे कोरल रीफ कहा जाता है। कोरल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—कठोर और कोमल। कठोर कोरल ही रीफ का मजबूत ढांचा तैयार करते हैं।

    क्यों खतरनाक है ‘कोरल ब्लीचिंग’?

    आज इन खूबसूरत संरचनाओं पर सबसे बड़ा खतरा कोरल ब्लीचिंग का मंडरा रहा है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें समुद्र का तापमान बढ़ने पर कोरल अपने अंदर मौजूद ‘जूक्सैन्थेली’ नामक शैवाल को बाहर निकाल देते हैं। यही शैवाल कोरल को रंग और पोषण देता है। इसके निकलने से कोरल का रंग सफेद हो जाता है और वह कमजोर पड़ जाता है। यदि तापमान लंबे समय तक अधिक बना रहे, तो कोरल की मृत्यु भी हो सकती है।

    हाल के वर्षों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है। 2023 से 2025 के बीच हुई वैश्विक ब्लीचिंग घटना ने दुनिया के लगभग 84 प्रतिशत कोरल रीफ को प्रभावित किया, जो अब तक की सबसे गंभीर स्थिति मानी जा रही है। इसके अलावा प्रदूषण, समुद्री गाद और जलवायु परिवर्तन भी इस संकट को और गहरा कर रहे हैं।

    क्यों जरूरी है संरक्षण?

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोरल रीफ खत्म होते हैं, तो इसका असर सिर्फ समुद्री जीवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तटीय आबादी, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। इसलिए इनका संरक्षण बेहद जरूरी है। समुद्र के इस ‘जीवंत खजाने’ को बचाने के लिए जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण, प्रदूषण कम करना और सतत विकास के उपाय अपनाना समय की मांग है।

  • मंदिर में चक्कर लगाने का विज्ञान! क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे छिपा रहस्य

    मंदिर में चक्कर लगाने का विज्ञान! क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे छिपा रहस्य


    नई दिल्ली।मंदिरों में घड़ी की सुई की दिशा में यानी क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह सिर्फ एक धार्मिक रिवाज नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। माना जाता है कि मंदिर का गर्भगृह एक शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र होता है, जहां से सकारात्मक ऊर्जा निरंतर प्रवाहित होती रहती है।

    आध्यात्मिक कारण: ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम

    हिंदू धर्म में प्रदक्षिणा का अर्थ होता है-ईश्वर को अपने जीवन का केंद्र मानकर उनके चारों ओर घूमना। क्लॉकवाइज दिशा में चलने से देवता हमेशा आपकी दाईं ओर रहते हैं, जिसे शुभ और पवित्र माना गया है।

    इससे मन में श्रद्धा, शांति और सकारात्मकता का संचार होता है। मान्यता है कि इस प्रक्रिया से व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और वह आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनता है।

    वैज्ञानिक कारण: ऊर्जा प्रवाह के साथ तालमेल

    क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे एक वैज्ञानिक सोच भी जुड़ी है। Sadhguru Jaggi Vasudev के अनुसार, उत्तरी गोलार्ध में ऊर्जा का प्रवाह घड़ी की दिशा में होता है।

    इसी कारण मंदिरों में उसी दिशा में परिक्रमा करने से शरीर उस ऊर्जा के साथ तालमेल बैठाता है। इससे मानसिक शांति, शारीरिक स्फूर्ति और बेहतर एकाग्रता प्राप्त होती है।

    यह भी कहा जाता है कि इस दिशा में चलने से शरीर ब्रह्मांडीय ऊर्जा को अधिक प्रभावी तरीके से अवशोषित कर पाता है।

    गीले कपड़ों में प्रदक्षिणा का महत्व

    धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि गीले कपड़ों में परिक्रमा करने से ऊर्जा ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है। पुराने समय में मंदिरों के पास कुंड या कुएं होते थे, जहां स्नान कर भक्त गीले वस्त्रों में ही प्रदक्षिणा करते थे।

    गीलापन शरीर को ऊर्जा के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है।

    अलग-अलग देवताओं की परिक्रमा संख्या

    शास्त्रों में विभिन्न देवताओं के लिए प्रदक्षिणा की संख्या भी निर्धारित है-

    भगवान गणेश: 3 बार
    भगवान विष्णु: 4 बार
    मां दुर्गा: 1 बार
    भगवान शिव: आधी परिक्रमा (जलधारी तक)
    यह नियम ऊर्जा संतुलन और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर बनाए गए हैं।

    मंदिर में क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक ऐसा अभ्यास है जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करता है। यह हमें प्राकृतिक ऊर्जा के साथ जोड़कर मानसिक शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।

  • अनूपपुर बिल्डिंग हादसा: तीन की मौत, CM डॉ मोहन यादव ने दुख जताया और पीड़ितों को मुआवजे का ऐलान किया

    अनूपपुर बिल्डिंग हादसा: तीन की मौत, CM डॉ मोहन यादव ने दुख जताया और पीड़ितों को मुआवजे का ऐलान किया


    भोपाल। अनूपपुर के कोतमा बस स्टैंड के पास शनिवार को अग्रवाल लॉज की तीन मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई, जिससे तीन लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। हादसे के समय इमारत के बगल में निर्माण कार्य भी चल रहा था, जिससे यह घटना होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का ऐलान किया। मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान और संबल योजना के तहत चार-चार लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा, रेड क्रॉस से एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। घायलों को मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान से दो-दो लाख और रेड क्रॉस से पचास-पचास हजार रुपये की राशि दी जाएगी।

    सीएम डॉ मोहन यादव ने लिखा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और ईश्वर से दिवंगतों की आत्मा की शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जा रही है ताकि उन्हें राहत मिले और स्थिति संभाली जा सके।

    हादसे की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम, कोतमा पुलिस, नगर पालिका और एसईसीएल की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया। मलबे के नीचे दबे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

    इस घटना ने शहर और राज्य में इमारतों की सुरक्षा और निर्माण मानकों के पालन की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है। सरकार ने प्रभावित परिवारों और घायलों के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया है और कहा है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी से बचा जा सके।

  • बेंगलुरु में एनएच 44 का डिजाइन खराब, रखरखाव पर भी नहीं दिया जाता ध्यान: किरण मजूमदार-शॉ

    बेंगलुरु में एनएच 44 का डिजाइन खराब, रखरखाव पर भी नहीं दिया जाता ध्यान: किरण मजूमदार-शॉ


    नई दिल्ली। फार्मा कंपनी बायोकॉन लिमिटेड की एग्जीक्यूटिव चेयरमैन किरण मजूमदार-शॉ ने रविवार को एनएच 44 की डिजाइन और रखरखाव को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई और कहा कि कई बार शिकायत करने के बाद भी इस मुद्दे का समाधान नहीं किया जा रहा है।

    एनएच 44, बेंगलुरु को होसुर से जोड़ने वाला प्रमुख आईटी कॉरिडोर है।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “पूरे देश में एनएचएआई अपने सड़क बुनियादी ढांचे की प्रशंसा करता है, फिर भी देश का प्रमुख आईटी कॉरिडोर एनएच44 (पूर्व में एनएच7) यानी होसुर रोड इतनी घटिया ढंग से डिजाइन किया गया और इसका रखरखाव खराब क्यों है?”

    उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, “ये देखने में बेहद खराब है – डिवाइडर और बैरिकेड्स की हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं है और फुटपाथ पर डामर नहीं बिछा है।”

    आगे उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को टैग करते हुए लिखा कि सालों से कई शिकायतें करने के बावजूद, यहां कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

    इसके साथ ही उन्होंने एनएचएआई को टैग करते हुए लिखा, “क्या यही वह रिकॉर्ड है जिसे एनएचएआई गौरवशाली मानता है?”

    इस पहले भी, देश की प्रमुख महिला उद्योगपति में शामिल शॉ ने पिछले साल देश में, विशेषकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में, कचरे की बढ़ती समस्या पर गंभीर चिंता जताई थी।

    पिछले साल अक्टूबर में एक एक्स पोस्ट में, उन्होंने इन शहरों की नगरपालिकाओं और राज्य सरकारों की इस मुद्दे के प्रति घोर अज्ञानता और लापरवाही की कड़ी आलोचना की थी। यह समस्या हाल ही में चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गई है।

    भारत की सबसे धनी महिलाओं में शामिल शॉ पहली पीढ़ी की कारोबारी है और उन्होंने 1978 में बायोफार्मास्युटिकल फर्म बायोकॉन की स्थापना की थी। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी नेटवर्थ करीब 3.2 अरब डॉलर है।

  • IPL 2026: CSK की बड़ी गलती? छोड़ा हुआ खिलाड़ी अब दूसरी टीम के लिए बन रहा हीरो

    IPL 2026: CSK की बड़ी गलती? छोड़ा हुआ खिलाड़ी अब दूसरी टीम के लिए बन रहा हीरो


    नई दिल्ली।चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) ने आईपीएल 2024 के लिए हुए मेगा ऑक्शन में उत्तर प्रदेश के मेरठ के एक विकेटकीपर बल्लेबाज को 8.40 करोड़ में खरीदा था। अनकैप्ड खिलाड़ी के लिए सीएसके जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी द्वारा इतनी बड़ी राशि खर्च करना सभी को हैरान कर गया था। ये खिलाड़ी थे समीर रिजवी, जो आईपीएल 2026 में डीसी के लिए सबसे बड़े मैच विनर बनकर उभरे हैं।

    सीएसके के बारे में कहा जाता है कि फ्रेंचाइजी जिन खिलाड़ियों पर निवेश करती है, उन्हें उभरने और अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने का पूरा समय देती है। समीर रिजवी के मामले में ऐसा नहीं था। पहली ही गेंद पर छक्का लगाकर सीएसके की तरफ से अपने आईपीएल करियर की शुरुआत करने वाले रिजवी के लिए आईपीएल 2024 उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। रिजवी सीजन के 8 मैचों की 5 पारियों में 12.75 के साधारण औसत से महज 51 रन बना सके। सीएसके का भरोसा रिजवी से उठ गया और आईपीएल 2025 से पहले टीम ने उन्हें रिलीज कर दिया।

    रिजवी घरेलू क्रिकेट खेल रहे थे और लगातार रन बनाते रहे।

    आईपीएल 2025 के लिए हुए मेगा ऑक्शन में दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) ने समीर पर भरोसा जताया और 95 लाख रुपये में अपने साथ जोड़ा। रिजवी को आईपीएल 2025 में डीसी की तरफ से 5 मैच खेलने को मिले। प्रदर्शन करिश्माई तो नहीं रहा, लेकिन साधारण से बेहतर रहा। रिजवी ने 4 पारियों में 1 अर्धशतक लगाते हुए 121 रन बनाए। नाबाद 58 उनका श्रेष्ठ स्कोर रहा।

    इस प्रदर्शन के बाद डीसी का भरोसा रिजवी पर और बढ़ा, और आईपीएल 2026 के लिए भी वह टीम का हिस्सा बने रहे। आईपीएल 2026 में समीर रिजवी टीम के भरोसे पर खरे उतरे हैं और टीम के लिए सबसे बड़े मैच विनर बनकर उभरे हैं।

    आईपीएल 2026 में समीर ने डीसी को मुश्किल परिस्थितियों से निकालते हुए लगातार 2 मैच अपने दम पर जिताए हैं और टीम के सबसे बड़े मैच विनर बनकर उभरे हैं।

    लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ 26 रन पर 4 विकेट गंवा चुकी डीसी को चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आए रिजवी ने नाबाद 70 रन की पारी खेल जीत दिलायी और प्लेयर ऑफ द मैच रहे। मुंबई के खिलाफ मैच में भी रिजवी ने 51 गेंदों पर 7 छक्कों और 7 चौकों की मदद से 90 रन बनाए। वह अपने पहले आईपीएल शतक से चूक गए लेकिन अपना विकेट खोने से पहले टीम के लिए जीत की पटकथा लिख चुके थे। मुंबई के खिलाफ भी रिजवी प्लेयर ऑफ द मैच रहे।

    आईपीएल 2026 की नीलामी में कार्तिक शर्मा, प्रशांत वीर जैसे युवाओं पर 28.40 (प्रत्येक पर 14.20 करोड़) खर्च करने वाली सीएसके 22 साल के रिजवी के प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें रिलीज करने के फैसले पर पछता रही होगी। बता दें कि कार्तिक शर्मा और प्रशांत वीर का प्रदर्शन अब तक बेहद साधारण रहा है।

  • विधायक बनाम न्यायपालिका: एमपी में 5 मामले जहां सजा और सदस्यता बनी मुद्दा

    विधायक बनाम न्यायपालिका: एमपी में 5 मामले जहां सजा और सदस्यता बनी मुद्दा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में विधायकों को आपराधिक मामलों में सजा मिलने और सदस्यता समाप्त होने के पांच प्रमुख मामले हाल ही में सुर्खियों में रहे। इनमें न्यायालय ने कुछ मामलों में सजा सुनाई, विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित की, लेकिन उच्च अदालतों ने कुछ विधायकों को राहत दी जिससे उनकी विधायकी बच गई।

    सबसे पहला मामला बिजावर सीट की भाजपा विधायक आशा रानी सिंह का है। वर्ष 2011 में छतरपुर जिले की बिजावर सीट से विधायक आशा रानी सिंह को अपनी नौकरानी तिजिया बाई को आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में दस साल की सजा सुनाई गई। उनके पति पर भी इसी मामले में आरोप था। सजा के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी और सीट को रिक्त घोषित कर चुनाव आयोग को सूचना भेजी। हाई कोर्ट में अपील करने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली और 31 अक्टूबर 2013 को उनकी विधायकी समाप्त हो गई।

    दूसरा मामला पवई सीट के भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी का है। 2014 में अवैध रेत उत्खनन के दौरान तहसीलदार के साथ मारपीट के मामले में 31 अक्टूबर 2019 को भोपाल की विशेष अदालत ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई। विधानसभा सचिवालय ने सदस्यता रद्द की अधिसूचना जारी की, लेकिन प्रहलाद लोधी ने हाई कोर्ट में अपील की और सात नवंबर 2019 को कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे दे दी। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई और वे विधायक बने रहे।

    तीसरा मामला खरगापुर विधानसभा सीट के राहुल सिंह लोधी का है। 2018 में उनके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने नामांकन पत्र में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने के आधार पर उनके निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया। विधानसभा सचिवालय ने सदस्यता समाप्त कर दी और सीट रिक्त घोषित की। राहुल सिंह लोधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम स्टे दे कर सदस्यता बहाल की। लेकिन उन्हें वोटिंग और कुछ भत्तों का अधिकार नहीं मिला।

    चौथा मामला विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का है। उन्हें नामांकन पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप लगा और मार्च 2026 में हाई कोर्ट ने उनके चुनाव को शून्य घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें विधायक के तौर पर काम करने की अनुमति दी लेकिन वे वेतन, भत्तों और वोटिंग में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। उनकी सुनवाई 23 जुलाई को होगी।

    पांचवां और वर्तमान में चर्चित मामला दतिया सीट के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का है। 2 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष अदालत ने उन्हें साल 1998 के बैंक धोखाधड़ी मामले में दोषी पाया और तीन साल की जेल की सजा सुनाई। सदस्यता समाप्त करने और सीट रिक्त घोषित करने की अधिसूचना विधानसभा सचिवालय ने चुनाव आयोग को भेज दी। राजेंद्र भारती ने जमानत तो पा ली है लेकिन सजा पर कनविक्शन स्टे नहीं मिला है। वे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने जा रहे हैं।

    राजेन्द्र कुमार सिंह ने इस घटनाक्रम पर कहा कि न्यायालय का काम अलग है, लेकिन रात में विधानसभा खोलकर गजट नोटिफिकेशन जारी करना संसदीय प्रक्रिया में पहले कभी नहीं हुआ। कई मामलों में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद सदस्यता बहाल की जाती है। इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश विधानसभा की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संवेदनशील संतुलन को उजागर किया है।