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  • बाणगंगा पुलिस पर आरोप: 9 घंटे शव लेकर घूमते रहे परिजन, सिस्टम की बड़ी लापरवाही उजागर

    बाणगंगा पुलिस पर आरोप: 9 घंटे शव लेकर घूमते रहे परिजन, सिस्टम की बड़ी लापरवाही उजागर


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Indore से सामने आया यह मामला सिस्टम की संवेदनहीनता और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक 21 वर्षीय युवक की करंट लगने से मौत के बाद उसके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए परिजन लगभग 9 घंटे तक बाइक पर लेकर इधर-उधर भटकते रहे।

    घटना 11 मई की बताई जा रही है, जब निर्माणाधीन मकान में काम के दौरान युवक को करंट लग गया था। परिजन उसे तुरंत अरबिंदो अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। लेकिन परिवार यह मानने को तैयार नहीं था और शव को लेकर दूसरी जगह इलाज के लिए निकल गया।

    यहीं से स्थिति और जटिल हो गई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन बाणगंगा थाना पुलिस की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया और स्पष्ट रूप से कहा कि “अब शव ले गए हैं, तुम जानो तुम्हारा काम जाने।”

    इसके बाद परिजन शव को बाइक पर लेकर इंदौर और आसपास के इलाकों में अस्पताल दर अस्पताल घूमते रहे। सांवेर के एक अस्पताल में भी डॉक्टरों ने युवक को मृत घोषित किया, लेकिन तब तक परिवार मानसिक रूप से बेहद आहत और आक्रोशित हो चुका था।

    स्थिति तब और बिगड़ गई जब अलग-अलग जगहों पर पुलिस और अस्पताल के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई दी। परिजन कई घंटों तक शव को लेकर सड़कों पर भटकते रहे, जिससे स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी गई।

    आखिरकार देर रात शव को वापस अस्पताल की मर्चुरी में रखा गया, लेकिन अगले दिन भी पोस्टमॉर्टम में देरी को लेकर परिजनों ने हंगामा किया। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी की गई, तब जाकर पोस्टमॉर्टम हो सका और अंतिम संस्कार किया गया।

    इस पूरे मामले ने Indore में स्वास्थ्य व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के बीच तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की स्थिति बनी हो और पुलिस की लापरवाही के कारण परिजन परेशान हुए हों।

    वहीं पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच की बात कही है और कहा है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना न केवल एक परिवार के दर्द को दिखाती है, बल्कि यह भी सवाल उठाती है कि आपात स्थितियों में सिस्टम कितना तैयार और संवेदनशील है।

  • एमपी में लू का कहर: इंदौर-उज्जैन में तेज गर्मी का ऑरेंज अलर्ट, कल से कई जिलों में असर

    एमपी में लू का कहर: इंदौर-उज्जैन में तेज गर्मी का ऑरेंज अलर्ट, कल से कई जिलों में असर


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश इस समय भीषण गर्मी और हीट वेव की चपेट में है। राज्य के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार अगले चार दिन तक प्रदेश का बड़ा हिस्सा लू की चपेट में रहेगा।

    इंदौर और उज्जैन संभाग में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर मानी जा रही है, जहां तेज लू को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में दिन के साथ-साथ रात में भी तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिसे “वॉर्म नाइट” की स्थिति कहा जा रहा है।

    राजधानी Bhopal सहित जबलपुर, ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में भी तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इन शहरों में गर्म हवाओं का असर देखने को मिलेगा और दिन के समय लू जैसी स्थिति बन सकती है।

    बुधवार को प्रदेश के कई जिलों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। खजुराहो में सबसे अधिक 45.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया, जो इस सीजन का सबसे गर्म दिन माना जा रहा है। रतलाम और धार भी अत्यधिक गर्म जिलों में शामिल रहे, जहां पारा 45 डिग्री के आसपास पहुंच गया।

    शाजापुर, गुना, सागर और अन्य जिलों में भी तापमान 44 डिग्री या उससे अधिक दर्ज किया गया, जिससे साफ है कि गर्मी का असर पूरे राज्य में फैल चुका है।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहा। उज्जैन में 44.7 डिग्री, इंदौर में 43.6 डिग्री, भोपाल में 43.2 डिग्री, ग्वालियर में 42 डिग्री और जबलपुर में 42.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग का कहना है कि यह स्थिति अगले चार दिनों तक बनी रह सकती है और कई जिलों में लू की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। खासकर इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा।

    इसके साथ ही कुछ इलाकों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि की भी हल्की संभावना जताई गई है, जिससे मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है, लेकिन इससे गर्मी से राहत की उम्मीद कम ही है।

    कुल मिलाकर मध्यप्रदेश फिलहाल भीषण गर्मी के दौर से गुजर रहा है और लोगों को सलाह दी गई है कि दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त पानी का सेवन करें।

  • सदन में विजय की जीत पर शिवशंकर का बड़ा दावा, AIADMK के 25 विधायकों ने बदला पाला।

    सदन में विजय की जीत पर शिवशंकर का बड़ा दावा, AIADMK के 25 विधायकों ने बदला पाला।


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों भारी उथल-पुथल का दौर जारी है, जहाँ नई नवेली सरकार और पुराने स्थापित दलों के बीच जुबानी जंग अब गंभीर आरोपों में तब्दील हो गई है। हाल ही में विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेट्री कझगम के प्रमुख सी जोसेफ विजय पर विपक्षी दल डीएमके ने विधायकों की खरीद-फरोख्त यानी ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के बेहद संगीन आरोप जड़े हैं। डीएमके विधायक शिवशंकर ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि विजय ने सदन में विश्वास मत हासिल करने के लिए लोकतंत्र की मर्यादाओं को ताक पर रखकर विपक्षी विधायकों का सौदा किया है। यह मामला इसलिए अधिक गंभीर हो गया है क्योंकि विजय ने अपनी पार्टी की स्थापना के समय राज्य की जनता से एक भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी शासन देने का वादा किया था, लेकिन अब उनकी इस छवि पर विपक्षी हमलों ने सवालिया निशान लगा दिए हैं।

    विधानसभा के भीतर हुए घटनाक्रम ने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने 144 मतों के साथ बहुमत साबित किया, जबकि सदन में उनकी पार्टी और सहयोगियों के पास कुल विधायकों की संख्या महज 120 थी। यह अतिरिक्त 24 वोटों का अंतर ही इस विवाद की मुख्य जड़ बना हुआ है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि एआईएडीएमके के लगभग 25 विधायकों ने अपनी पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करते हुए सरकार के पक्ष में मतदान किया। इसमें मन्नारगुडी के कद्दावर नेता कामराज का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर ऐन वक्त पर पाला बदलकर सत्ता पक्ष का साथ दिया। डीएमके ने इस पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या करार देते हुए सदन से वॉकआउट किया और इस जीत को अनैतिक बताया।

    दूसरी ओर, मुख्यमंत्री विजय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे जनता के जनादेश का अपमान बताया है। विधानसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार आम लोगों की सरकार है और यह बहुमत तमिलनाडु में राजनीतिक बदलाव की उस इच्छा को दर्शाता है जो जनता ने चुनाव के दौरान व्यक्त की थी। विजय का तर्क है कि उनकी पार्टी ने बेहद कम समय में जनता का बड़ा विश्वास हासिल किया है और 34.92 प्रतिशत वोट शेयर मिलना इस बात का प्रमाण है कि लोग अब पारंपरिक राजनीति से ऊब चुके हैं। उन्होंने सरकार को अल्पमत की सरकार कहने वाले आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि उनका प्रशासन समावेशी विकास और सभी समुदायों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और वे किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आएंगे।

    इस पूरे प्रकरण ने राज्य की कानून व्यवस्था और राजनीतिक सुचिता पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री अपनी जीत का जश्न मना रहे हैं और इसे बदलाव की लहर बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इस जीत के पीछे के ‘मैनेजमेंट’ को लेकर हमलावर है। विधायकों का इस तरह से क्रॉस वोटिंग करना आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में बड़े फेरबदल का संकेत दे रहा है। यदि इन आरोपों की गहराई से जांच होती है, तो यह न केवल सरकार की स्थिरता बल्कि मुख्यमंत्री विजय की उस ‘क्लीन इमेज’ के लिए भी बड़ी चुनौती होगी जिसे उन्होंने पिछले तीन सालों की कड़ी मेहनत से बनाया है। फिलहाल, चेन्नई की गलियारों में चर्चा इस बात की है कि क्या यह नई सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर पाएगी या फिर गठबंधन और तोड़-फोड़ की यह राजनीति किसी नए संकट को जन्म देगी।

  • पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में शांतिदूत बनेगा भारत: पाकिस्तान की विफलता के बाद अब 'महान राष्ट्र' हिंदुस्तान से ईरान को बड़ी उम्मीदें।

    पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में शांतिदूत बनेगा भारत: पाकिस्तान की विफलता के बाद अब 'महान राष्ट्र' हिंदुस्तान से ईरान को बड़ी उम्मीदें।


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच वैश्विक कूटनीति का रुख अब तेजी से नई दिल्ली की ओर मुड़ रहा है। पाकिस्तान द्वारा तनाव कम करने के तमाम प्रयासों के विफल होने के बाद, अब ईरान ने खुलकर भारत के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भारत को एक ‘महान राष्ट्र’ और एक स्वतंत्र विकासशील शक्ति बताते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया को इस समय भारत जैसे संतुलित दृष्टिकोण वाले देश की सख्त जरूरत है। उनका यह बयान उस समय आया है जब ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच रहे हैं। ईरान का मानना है कि भारत की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर ब्रिक्स की एकजुटता का संदेश भी देगी।

    ईरानी प्रशासन ने वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को अपरिहार्य माना है। तेहरान का तर्क है कि भारत जैसे देश, जिनकी नीति स्वतंत्र और शांतिप्रिय रही है, वर्तमान युद्ध को रोकने और क्षेत्र में सुरक्षा बहाल करने की क्षमता रखते हैं। विशेष रूप से ब्रिक्स के भीतर चल रही आंतरिक खींचतान के बीच ईरान चाहता है कि भारत अपनी प्रभावशीलता का उपयोग कर साझा घोषणापत्र पर सहमति बनाए। संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ ईरान के वैचारिक मतभेदों के बावजूद, ईरान की भारत से यह अपेक्षा है कि वह इस महत्वपूर्ण समूह को विभाजित होने से बचाएगा। यह कूटनीतिक विश्वास भारत की बढ़ती सॉफ्ट पावर और उसकी विश्वसनीय विदेश नीति का प्रमाण है, जो शत्रुतापूर्ण गुटों के बीच भी मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार रहता है।

    हालांकि, कूटनीतिक मधुरता के साथ-साथ सामरिक चुनौतियां भी कम नहीं हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जहाँ कई भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि इस जलमार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों को अब सेवा शुल्क देना होगा। ईरान का तर्क है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों की उन बाध्यताओं से मुक्त है जो उसे इस तरह के टैक्स लगाने से रोकते हैं। यह भारत के लिए एक व्यापारिक चुनौती भी है, क्योंकि उसके ऊर्जा हितों और मालवाहक जहाजों की सुरक्षा सीधे तौर पर इस जलमार्ग से जुड़ी हुई है। भारत को अब अपनी कूटनीतिक कुशलता का परिचय देते हुए एक तरफ ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को बचाना है और दूसरी तरफ वैश्विक व्यापारिक सुगमता को भी बहाल कराना है।

    ईरान ने अपने पड़ोसी देशों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनकी धरती का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य ठिकानों द्वारा ईरान पर हमले के लिए किया जा रहा है। ऐसी जटिल स्थिति में भारत के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ ईरान की उच्चस्तरीय बातचीत इस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है। ब्रिक्स बैठक के इतर होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में भारत, रूस और ईरान के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर केंद्रित चर्चा होने की प्रबल संभावना है। कुल मिलाकर, ईरान का भारत को एक ‘महान राष्ट्र’ के रूप में संबोधित करना यह दर्शाता है कि अब मध्य-पूर्व का समाधान वाशिंगटन या इस्लामाबाद के बजाय नई दिल्ली की कूटनीतिक मेज पर तलाशा जा रहा है। भारत के लिए यह अपनी वैश्विक नेतृत्व क्षमता को सिद्ध करने का एक ऐतिहासिक अवसर है।

  • डॉक्टर परिवार की घिनौनी साजिश: 4 बच्चों की सफलता के बाद 5वें के लिए खरीदा पेपर, पूरा कुनबा CBI के जाल में फंसा।

    डॉक्टर परिवार की घिनौनी साजिश: 4 बच्चों की सफलता के बाद 5वें के लिए खरीदा पेपर, पूरा कुनबा CBI के जाल में फंसा।


    नई दिल्ली । राजस्थान के जयपुर जिले से शुरू हुई यह कहानी किसी थ्रिलर फिल्म के पटकथा जैसी लगती है, जहाँ सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ चुके लोग ही व्यवस्था की जड़ें खोदने में लग गए। जमवा-रामगढ़ के एक रसूखदार बीवाल परिवार ने अपनी साख को दांव पर लगाकर वह रास्ता चुना जो सीधे अपराध की दुनिया की ओर ले जाता है। इस परिवार की पृष्ठभूमि बेहद प्रभावशाली रही है, जिसके चार बच्चे पहले ही अपनी मेहनत के दम पर डॉक्टर बनकर समाज में मिसाल पेश कर चुके थे। लेकिन इस बार लालच और अनुचित तरीके से सफलता हासिल करने की जिद ने इस पूरे परिवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई के शिकंजे में ला खड़ा किया है। नीट-यूजी 2026 की परीक्षा से ठीक पहले व्हाट्सएप पर तैरते कुछ पन्नों ने न केवल एक छात्र का भविष्य अंधकार में डाल दिया, बल्कि एक प्रतिष्ठित परिवार की बरसों की कमाई हुई इज्जत को भी मिट्टी में मिला दिया।

    सीबीआई की जांच में सामने आया है कि इस साजिश का केंद्र बिंदु दिनेश बीवाल और उसके भाई मांगीलाल थे। इनका भतीजा विकास, जो पिछले साल इस कठिन परीक्षा में असफल हो गया था, इस बार उनके निशाने पर था। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह डील गुरुग्राम और नासिक के अन्य गिरोहों के साथ मिलकर तय की गई थी। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में जब हजारों छात्र रातों को जागकर अपनी तैयारी को अंतिम रूप दे रहे थे, तब यह परिवार व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से प्रश्नपत्रों के सौदे कर रहा था। दिनेश ने न केवल अपने परिजनों के लिए यह पेपर हासिल किया, बल्कि सूत्रों का कहना है कि उसने इसे लगभग दस अन्य लोगों के साथ भी साझा किया, जिससे यह जाल और भी गहरा होता चला गया। यह महज एक पेपर की चोरी नहीं थी, बल्कि उन लाखों ईमानदार छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ था जो दिन-रात एक कर इस परीक्षा की तैयारी करते हैं।

    इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ सीकर के एक सजग कोचिंग शिक्षक की सतर्कता से हुआ। जब उन्होंने व्हाट्सएप पर वायरल हो रहे गेस पेपर की तुलना असली सवालों से की, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने बिना देरी किए अधिकारियों को ईमेल के जरिए इसकी सूचना दी, जिसके बाद राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप ने प्रारंभिक जांच शुरू की। हालांकि, जांच की कमान सीबीआई के हाथों में आने के महज चौबीस घंटों के भीतर ही बीवाल परिवार के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब जांच का दायरा सीकर के उन कोचिंग संस्थानों तक भी पहुंच गया है, जहां यह संदेह जताया जा रहा है कि यह लीक हुआ पेपर बड़े पैमाने पर फैलाया गया था। इस मामले ने एक बार फिर से देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी खामियों को उजागर कर दिया है।

    प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब स्थानीय जांच एजेंसियों को शुरुआती दिनों में ही पेपर लीक होने के पुख्ता संकेत मिल गए थे, तो आखिर एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों हुई। सरकार और संबंधित विभागों की यह चुप्पी उन दलालों और माफियाओं के लिए मददगार साबित हुई जिन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस प्रश्नपत्र को आग की तरह फैला दिया। वर्तमान में सीबीआई इन सभी आरोपियों को दिल्ली ले जाकर कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचा जा सके। यह मामला समाज के लिए एक कड़ा सबक है कि शॉर्टकट से हासिल की गई सफलता न केवल अस्थाई होती है, बल्कि वह आपके पूरे जीवन की गरिमा को भी समाप्त कर सकती है। अब इस परिवार के वो सदस्य जो वास्तव में डॉक्टर हैं, वे भी समाज के शक के घेरे में आ गए हैं और उनकी पूर्व की सफलताओं पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।

  • कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो गुजरने पर घमासान, मेट्रो प्रबंधन रखेगा अपना पक्ष

    कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो गुजरने पर घमासान, मेट्रो प्रबंधन रखेगा अपना पक्ष


    नई दिल्ली।  भोपाल में चल रहे बहुचर्चित मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। Bhopal Metro के अंडरग्राउंड रूट को लेकर उठे विवाद पर आज वक्फ ट्रिब्यूनल में अहम सुनवाई होनी है। इस सुनवाई में मेट्रो प्रबंधन अपना पक्ष पेश करेगा।

    मामला उस प्रस्तावित मार्ग से जुड़ा है, जिसके तहत मेट्रो लाइन को शहर के कुछ संवेदनशील इलाकों से होकर अंडरग्राउंड गुजारा जाना है। विवाद खासतौर पर उन क्षेत्रों को लेकर है जहां कब्रिस्तान और वक्फ संपत्तियां स्थित हैं। स्थानीय पक्ष का आरोप है कि निर्माण कार्य से धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

    वक्फ ट्रिब्यूनल में दायर याचिकाओं में कहा गया है कि इन क्षेत्रों के नीचे सुरंग बनाने से जमीन की संरचना प्रभावित हो सकती है और इससे कब्रों व धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसी आधार पर निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई है।

    वहीं दूसरी ओर, Bhopal Metro प्रबंधन का पक्ष है कि यह परियोजना अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों के अनुसार तैयार की जा रही है। उनका दावा है कि अंडरग्राउंड निर्माण के दौरान सतह पर मौजूद संरचनाओं को नुकसान नहीं होगा और सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं।

    इस विवाद को लेकर पहले भी कई सुनवाई हो चुकी हैं, लेकिन आज की तारीख को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मेट्रो प्रबंधन पहली बार विस्तृत रूप से अपना तकनीकी और कानूनी पक्ष प्रस्तुत करेगा। ट्रिब्यूनल में दोनों पक्षों की दलीलों के बाद आगे की दिशा तय हो सकती है।

    शहर में यह मामला सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का नहीं, बल्कि धार्मिक और कानूनी संवेदनशीलता से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। एक ओर जहां Bhopal Metro को शहर के विकास और ट्रैफिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय समुदायों की चिंताओं ने इसे विवादित बना दिया है।

    आज की सुनवाई पर पूरे शहर की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर मेट्रो प्रोजेक्ट की आगे की गति और डिजाइन पर पड़ सकता है।

  • बड़ा खुलासा: CBSE 12th में प्राइवेट स्कूल पीछे, लड़कियों ने हर सेक्टर में दिखाया दम

    बड़ा खुलासा: CBSE 12th में प्राइवेट स्कूल पीछे, लड़कियों ने हर सेक्टर में दिखाया दम


    नई दिल्ली। इस बार के Central Board of Secondary Education (CBSE) 12वीं रिजल्ट 2026 ने देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की एक स्पष्ट तस्वीर सामने रख दी है। परिणामों में जहां सरकारी मॉडल पर आधारित स्कूलों ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं निजी स्कूलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

    सबसे बेहतर प्रदर्शन जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने किया। इन संस्थानों ने लगातार उच्च पास प्रतिशत के साथ यह साबित किया कि अनुशासन, नियमित मूल्यांकन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था का सीधा असर छात्रों के परिणामों पर पड़ता है। JNV का पास प्रतिशत 98.16% और KV का 97.90% दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है।

    दूसरी ओर, आदिवासी क्षेत्रों में संचालित एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) ने भी बेहतर प्रदर्शन किया और सीमित संसाधनों के बावजूद 85.47% का पास प्रतिशत हासिल किया। यह संकेत देता है कि सही दिशा और प्रयासों से परिणाम बेहतर किए जा सकते हैं।

    सबसे चिंताजनक स्थिति निजी या इंडिपेंडेंट स्कूलों की रही, जहां सबसे ज्यादा छात्र पंजीकृत होने के बावजूद पास प्रतिशत केवल 76.85% रहा। यह सभी श्रेणियों में सबसे कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रदर्शन के पीछे कई कारण हो सकते हैं बढ़ता शैक्षणिक दबाव, परीक्षा की तैयारी में कमी और छात्रों पर मानसिक तनाव।

    पूरे देश में एक और महत्वपूर्ण ट्रेंड सामने आया हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया। भोपाल रीजन में भी लड़कियों का पास प्रतिशत 82.19% रहा, जबकि लड़कों का 76.87% रहा। यह अंतर लगभग 5% का है, जो शिक्षा में बढ़ती महिला भागीदारी और उनकी निरंतरता को दर्शाता है।

    भोपाल रीजन, जो देश के सबसे बड़े रीजन में से एक है, इस बार राष्ट्रीय स्तर पर 19वें स्थान पर रहा। कुल 1291 स्कूलों वाले इस रीजन का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से पीछे रहा, जिससे शिक्षा विशेषज्ञों ने गुणवत्ता सुधार की जरूरत पर जोर दिया है।

    आंकड़ों के अनुसार, कुल छात्रों में से 12.14% विद्यार्थी ऐसे रहे जो सभी विषयों में असफल हो गए। यह एक गंभीर संकेत है, जो पढ़ाई के स्तर, डिजिटल डिस्ट्रैक्शन और पोस्ट-कोविड सीखने की गिरावट की ओर इशारा करता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्कूलों की सफलता का मुख्य कारण नियमित मॉनिटरिंग, प्रशिक्षित शिक्षक और संरचित शिक्षा प्रणाली है। वहीं निजी स्कूलों में व्यावसायिक दबाव और असमान शिक्षण गुणवत्ता इसके कमजोर प्रदर्शन की वजह हो सकती है।

    कुल मिलाकर यह रिजल्ट बताता है कि शिक्षा में सिर्फ फीस या संसाधन ही नहीं, बल्कि अनुशासन, गुणवत्ता और लगातार निगरानी ही असली सफलता की कुंजी है।

  • मुंबई में CNG हुआ महंगा, बढ़े दाम, ऑटो-टैक्सी किराया बढ़ने की आशंका

    मुंबई में CNG हुआ महंगा, बढ़े दाम, ऑटो-टैक्सी किराया बढ़ने की आशंका

    नई दिल्ली। महंगाई का असर एक बार फिर आम जनता की जेब पर पड़ा है। सोना और दूध के बाद अब सीएनजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो गई है। इसका सीधा असर सबसे पहले मुंबई में देखने को मिला है, जहां CNG के दाम 2 रुपये प्रति किलो बढ़ा दिए गए हैं।

    Mahanagar Gas Limited ने कीमतों में संशोधन करते हुए सीएनजी का रेट 82 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 84 रुपये प्रति किलो कर दिया है। यह नई दरें 14 मई से मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई सहित पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र में लागू हो गई हैं।

    कंपनी के अनुसार, यह बढ़ोतरी वैश्विक परिस्थितियों के कारण हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, गैस खरीद लागत में इजाफा, रुपये में गिरावट और सप्लाई चेन बाधित होने जैसे कारणों को इस मूल्य वृद्धि के पीछे जिम्मेदार बताया गया है।

    सीएनजी की कीमत बढ़ने का सीधा असर परिवहन व्यवस्था पर पड़ने की संभावना है। मुंबई में बड़ी संख्या में वाहन सीएनजी पर चलते हैं, जिनमें ऑटो, टैक्सी और निजी वाहन शामिल हैं। बढ़ी हुई कीमतों के बाद परिवहन लागत में इजाफा तय माना जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई में ऑटो यूनियनों ने किराया बढ़ाने की मांग भी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि सीएनजी की कीमत 2 रुपये बढ़ने से प्रति किलोमीटर संचालन लागत में बढ़ोतरी होगी, जिसका बोझ यात्रियों पर पड़ेगा।

    आंकड़ों के अनुसार, मुंबई महानगर क्षेत्र में लाखों वाहन सीएनजी पर चलते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी शामिल हैं। इसके अलावा सीएनजी बसों पर भी इस बढ़ोतरी का सीधा असर देखने को मिलेगा।

    यूनियनों और प्रशासन के बीच किराया संशोधन को लेकर जल्द बैठक होने की संभावना है। आने वाले दिनों में यदि फैसला होता है, तो मुंबई में ऑटो और टैक्सी का सफर भी महंगा हो सकता है।

  • इजरायल की स्थापना की ऐतिहासिक कहानी: कैसे 1948 में बना यहूदी राष्ट्र और बदला पश्चिम एशिया का नक्शा

    इजरायल की स्थापना की ऐतिहासिक कहानी: कैसे 1948 में बना यहूदी राष्ट्र और बदला पश्चिम एशिया का नक्शा

    नई दिल्ली। 14 मई 1948 को तेल अवीव में यहूदी एजेंसी के अध्यक्ष डेविड बेन-गुरियन ने इजरायल की स्वतंत्रता की घोषणा की। इसके साथ ही लगभग 2,000 वर्षों के बाद यहूदियों का एक स्वतंत्र राष्ट्र अस्तित्व में आया और बेन-गुरियन देश के पहले प्रधानमंत्री बने। उसी दिन ब्रिटिश शासन की समाप्ति के बाद क्षेत्र में तनाव और संघर्ष की स्थिति भी तेजी से बढ़ गई।

    घोषणा के तुरंत बाद ही कई अरब देशों और यहूदी समुदायों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। उसी शाम मिस्र की ओर से हवाई हमले की खबरें सामने आईं, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए। हालांकि तेल अवीव में बिजली संकट और युद्ध की आशंका के बावजूद यहूदी समुदाय ने अपने नए राष्ट्र के जन्म को ऐतिहासिक क्षण के रूप में मनाया।

    आधुनिक इजरायल की नींव 19वीं सदी के अंत में शुरू हुए ज़ायोनिस्ट आंदोलन से जुड़ी मानी जाती है। 1896 में ऑस्ट्रियाई पत्रकार थियोडोर हर्ज़ल ने अपनी पुस्तक द ज्यूइश स्टेट में यहूदी राष्ट्र की अवधारणा को मजबूत किया और 1897 में स्विट्जरलैंड में पहला ज़ायोनिस्ट कांग्रेस आयोजित किया।

    प्रथम विश्व युद्ध के बाद ओटोमन साम्राज्य के पतन के साथ ब्रिटेन ने फिलिस्तीन पर नियंत्रण स्थापित किया। 1917 की बाल्फोर घोषणा के जरिए ब्रिटेन ने यहूदी मातृभूमि के समर्थन का संकेत दिया, जिसे बाद में लीग ऑफ नेशंस के शासनादेश में शामिल किया गया।

    इसके बाद 1920 और 1930 के दशक में फिलिस्तीन में यहूदियों और अरबों के बीच तनाव बढ़ता गया। ब्रिटिश शासन ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश में यहूदी आप्रवासन पर कई बार रोक लगाने का प्रयास किया, लेकिन संघर्ष लगातार बढ़ता रहा।

    द्वितीय विश्व युद्ध और होलोकॉस्ट के बाद यहूदी प्रवासन में तेजी आई। युद्ध के बाद ब्रिटेन ने मामला संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिया, जहां 1947 में फिलिस्तीन के विभाजन का प्रस्ताव पारित हुआ। इसके तहत यहूदी और अरब क्षेत्रों का अलग-अलग विभाजन तय किया गया।

    14 मई 1948 को ब्रिटिश शासन की समाप्ति के साथ ही इजरायल राज्य की आधिकारिक घोषणा की गई। अगले ही दिन मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, लेबनान और इराक की सेनाओं ने इजरायल पर हमला कर दिया, जिससे पहला अरब-इजरायल युद्ध शुरू हुआ।

    कम संसाधनों के बावजूद इजरायली सेना ने संघर्ष जारी रखा और बाद में कई क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। 1949 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ, जिसके बाद इजरायल की सीमाओं को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली।

    इसके बाद 1967 के छह दिवसीय युद्ध में इजरायल ने अपने क्षेत्र का और विस्तार किया। 1979 में मिस्र के साथ ऐतिहासिक शांति समझौता हुआ, जिसके तहत सिनाई प्रायद्वीप वापस किया गया। 1993 में इजरायल और फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) के बीच भी शांति समझौते की शुरुआत हुई, हालांकि क्षेत्र में तनाव और संघर्ष पूरी तरह खत्म नहीं हो सका।

    आज भी इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, जो पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक कूटनीति को लगातार प्रभावित करता रहा है।

  • RCB vs KKR: विराट कोहली ने रचा इत‍िहास, रोहित और धोनी को छोड़ा पीछे, IPL में बनाए कई रिकॉर्ड

    RCB vs KKR: विराट कोहली ने रचा इत‍िहास, रोहित और धोनी को छोड़ा पीछे, IPL में बनाए कई रिकॉर्ड

    रायपुर। आईपीएल 2026 में बुधवार (13 मई) को रायपुर में खेले गए मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bengaluru) और कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders) के बीच स्टार बल्लेबाज Virat Kohli ने मैदान पर उतरते ही इतिहास रच दिया। इस मुकाबले में उन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए और आईपीएल इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।

    विराट कोहली अब आईपीएल इतिहास में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। यह मुकाबला उनके IPL करियर का 279वां मैच रहा, जिसके साथ उन्होंने MS Dhoni और Rohit Sharma को पीछे छोड़ दिया, जो इससे पहले 278-278 मैचों के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष पर थे।

    मैच में कोहली ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 60 गेंदों पर नाबाद 105 रन बनाए। उनकी इस पारी में 11 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। यह उनके आईपीएल करियर का 9वां शतक था, जबकि टी20 करियर का 10वां शतक। उनकी पारी की बदौलत आरसीबी ने यह मुकाबला 6 विकेट से जीत लिया।

    टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने के मामले में कोहली अब 10 शतकों के साथ सूची में शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। आईपीएल में भी उनके नाम अब 9 शतक दर्ज हो चुके हैं, जिससे वह इस लीग के सबसे सफल शतक बनाने वाले बल्लेबाजों में एक बन गए हैं।

    इसके अलावा कोहली ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। वह आईपीएल इतिहास में एक ही फ्रेंचाइजी के लिए सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए हैं, क्योंकि उन्होंने अपने पूरे आईपीएल करियर में सिर्फ आरसीबी का प्रतिनिधित्व किया है।

    आईपीएल में सबसे ज्यादा 400+ रन वाले सीजन के मामले में भी कोहली सबसे आगे हैं। उन्होंने 12 सीजन में 400 या उससे ज्यादा रन बनाए हैं, जो किसी भी बल्लेबाज से अधिक है।

    मैच के दौरान कोहली ने टी20 क्रिकेट में 14,000 रन का आंकड़ा भी सबसे तेज पार किया, जिसमें उन्होंने अन्य दिग्गजों की तुलना में कम पारियां खेलीं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने एक और बड़ा माइलस्टोन हासिल किया।

    आरसीबी की प्लेऑफ की उम्मीदों के बीच कोहली का यह फॉर्म टीम के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि आने वाले मैचों में वह अपने रिकॉर्ड को और कितनी ऊंचाई तक ले जाते हैं।