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  • Gold नहीं तो क्या? 1 साल में रकम दोगुनी करने के लिए बेस्ट इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस

    Gold नहीं तो क्या? 1 साल में रकम दोगुनी करने के लिए बेस्ट इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस


    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और विदेशी मुद्रा बचाने की अपीलों के बीच निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है अगर सोना न खरीदें तो पैसा कहां लगाएं? सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इसकी रिटर्न ग्रोथ सीमित और अस्थिर भी रहती है। इसी वजह से अब लोग ऐसे विकल्प खोज रहे हैं जो बेहतर ग्रोथ और रिटर्न दे सकें।

    1. शेयर बाजार – हाई रिस्क, हाई रिटर्न का खेल
    भारतीय शेयर बाजार लंबे समय में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले विकल्पों में माना जाता है।
    सही स्टॉक्स चुनने पर एक साल में अच्छा मुनाफा संभव है, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव और जोखिम भी ज्यादा होता है।
    फायदा: हाई ग्रोथ पोटेंशियल
    जोखिम: मार्केट वोलैटिलिटी

    2. म्यूचुअल फंड – संतुलित और प्रोफेशनल निवेश
    म्यूचुअल फंड उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जो डायरेक्ट शेयर मार्केट का जोखिम नहीं लेना चाहते।
    SIP के जरिए छोटे निवेश से शुरुआत
    लंबे समय में स्थिर रिटर्न की संभावना
    एक्सपर्ट मैनेजमेंट का फायदा

    3. रियल एस्टेट और REITs – स्थिर आय का जरिया
    REIT (Real Estate Investment Trust) उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जो प्रॉपर्टी में सीधे निवेश नहीं कर सकते।
    कम पैसे में रियल एस्टेट एक्सपोजर
    किराये जैसी नियमित आय
    लंबी अवधि में वैल्यू ग्रोथ

    4. गोल्ड ETF – सोने का डिजिटल विकल्प
    गोल्ड ETF उन निवेशकों के लिए सही है जो सोना छोड़ना नहीं चाहते लेकिन फिजिकल गोल्ड से बचना चाहते हैं।
    स्टोरेज की झंझट नहीं
    बाजार से जुड़े रिटर्न
    आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है

     क्या सच में 1 साल में पैसा डबल हो सकता है?
    यह समझना जरूरी है कि कोई भी निवेश चाहे शेयर बाजार हो या म्यूचुअल फंड गारंटीड डबल रिटर्न नहीं देता।
    उच्च रिटर्न के साथ हमेशा जोखिम भी जुड़ा होता है। इसलिए निवेश सोच-समझकर और विविधता के साथ करना चाहिए।

    अगर आप सोने में निवेश कम करके अपने पैसे को बढ़ाना चाहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, REIT (Real Estate Investment Trust) और गोल्ड ETF जैसे विकल्प बेहतर हो सकते हैं लेकिन समझदारी और रिस्क मैनेजमेंट सबसे जरूरी है।

  • साल 2026 की टॉप 10 फिल्में: लिस्ट में बड़े सरप्राइज, एक फिल्म ने तो 8.5+ रेटिंग हासिल की

    साल 2026 की टॉप 10 फिल्में: लिस्ट में बड़े सरप्राइज, एक फिल्म ने तो 8.5+ रेटिंग हासिल की


    नई दिल्ली । साल 2026 भारतीय और ग्लोबल सिनेमा के लिए बेहद खास साबित हो रहा है। जहां कुछ फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़े हैं, वहीं कुछ बड़े नाम भी फ्लॉप साबित हुए हैं। इस लिस्ट में एक फिल्म ने 8.5+ IMDb रेटिंग के साथ सबको चौंका दिया है।

     2026 में सिनेमा का धमाका – टॉप 10 फिल्मों की लिस्ट
    साल 2026 में फिल्मों ने दर्शकों को हर तरह का अनुभव दिया है एक्शन, ड्रामा, थ्रिलर से लेकर हॉरर-कॉमेडी तक। इस साल कई बड़ी फिल्मों ने कमाई और रेटिंग दोनों में कमाल किया है।

     1. धुरंधर 2: द रिवेंज – साल की सबसे बड़ी हिट
    धुरंधर 2: द रिवेंज इस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई है।
    रणवीर सिंह की यह स्पाई थ्रिलर न सिर्फ भारत बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी छा गई।

     2. बॉर्डर 2 – देशभक्ति का जोश
    बॉर्डर 2 ने दर्शकों में देशभक्ति का जोश जगाया।
    रेटिंग भले ही 6.1 रही, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने अच्छा प्रदर्शन किया।

    3. मन शंकर वर प्रसाद गारू – साउथ का मसाला हिट
    मन शंकर वर प्रसाद गारू ने टॉलीवुड की ताकत फिर साबित की।
    300 करोड़ से ज्यादा की कमाई के साथ यह टॉप 3 में शामिल रही।

    4. भूत बंगला – हॉरर कॉमेडी का तड़का
    भूत बंगला ने दर्शकों को डर और हंसी दोनों का मजा दिया।
    अक्षय कुमार की इस फिल्म ने 243 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया।

    5. द राजा साब – उम्मीदों पर नहीं उतरी खरी
    द राजा साब प्रभास की यह फिल्म फ्लॉप साबित हुई।
    कम रेटिंग (3.1) और कमजोर कहानी इसकी सबसे बड़ी कमजोरी रही।

    6. वाझा 2 – मलयालम सिनेमा की चमक
    वाझा 2: बायोपिक ऑफ ए बिलियन ब्रदर्स ने कम बजट में बड़ी सफलता हासिल की।
    8.2 IMDb रेटिंग के साथ यह ब्लॉकबस्टर बन गई।

    7. ओ रोमियो – रीमेक का संघर्ष
    ओ रोमियो दर्शकों को खास प्रभावित नहीं कर पाई और औसत प्रदर्शन किया।

    8. प्रोजेक्ट हेल मेरी – ग्लोबल सुपरहिट
    प्रोजेक्ट हेल मेरी ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 5700 करोड़ से ज्यादा कमाई कर तहलका मचा दिया।

     9. उस्ताद भगत सिंह – कमजोर परफॉर्मेंस
    उस्ताद भगत सिंह की शुरुआत अच्छी रही लेकिन बाद में फिल्म की पकड़ कमजोर पड़ गई।

     10. राजा शिवाजी – मराठी सिनेमा की शान
    राजा शिवाजी को दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों ने सराहा।
    यह फिल्म मराठी सिनेमा के लिए गौरव बनकर उभरी।

    साल 2026 में सिनेमा ने हर तरह के रंग दिखाए जहां धुरंधर 2: द रिवेंज जैसी फिल्में सुपरहिट रहीं, वहीं कुछ बड़े स्टार्स की फिल्में फ्लॉप भी साबित हुईं। इस साल की खास बात यह रही कि कंटेंट और कहानी ने स्टार पावर को पीछे छोड़ दिया।
  • .मल्टीबैगर स्टॉक बना निवेशकों की लॉटरी, 3 साल में 2400% रिटर्न के बाद अब बोनस शेयर का बड़ा ऐलान

    .मल्टीबैगर स्टॉक बना निवेशकों की लॉटरी, 3 साल में 2400% रिटर्न के बाद अब बोनस शेयर का बड़ा ऐलान

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में एक बार फिर मल्टीबैगर स्टॉक्स ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। स्मॉलकैप कैटेगरी की एक कंपनी वी-मार्क इंडिया ने हाल ही में ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने निवेशकों को चौंका दिया है। कंपनी ने 5:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी करने का फैसला लिया है, जिसके बाद इसके शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली और यह करीब 11 प्रतिशत तक उछल गया।

    बोनस शेयर का मतलब यह है कि जिन निवेशकों के पास कंपनी का एक शेयर होगा, उन्हें अतिरिक्त पांच शेयर मुफ्त में दिए जाएंगे। इस फैसले से बाजार में सकारात्मक माहौल बना और निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ गई। हालांकि इस प्रस्ताव को अभी शेयरधारकों की मंजूरी मिलना बाकी है।

    इस कंपनी की सबसे बड़ी खासियत इसका मल्टीबैगर रिटर्न है। पिछले तीन वर्षों में इस स्टॉक ने लगभग 2400 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, यानी निवेशकों की पूंजी कई गुना बढ़ चुकी है। अगर किसी ने कुछ साल पहले इसमें निवेश किया होता, तो उसकी रकम आज कई गुना ज्यादा हो सकती थी। यही कारण है कि यह स्टॉक लगातार चर्चा में बना हुआ है।

    कंपनी वायर और केबल निर्माण के क्षेत्र में काम करती है और इसका उपयोग पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में बड़े पैमाने पर होता है। इसके उत्पादों की मांग सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में बनी रहती है, जिससे इसका बिजनेस लगातार मजबूत हो रहा है।

    बीते कुछ वर्षों में कंपनी के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया है। एक साल के भीतर भी इसमें कई गुना तेजी देखने को मिली है, जबकि एक महीने के अंदर भी इसमें तेज उछाल दर्ज किया गया है। इस मजबूत प्रदर्शन ने इसे स्मॉलकैप से मल्टीबैगर स्टॉक की श्रेणी में ला दिया है।

    कंपनी का भविष्य विस्तार पर भी जोर है। आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए बाजारों में विस्तार करने की योजना है। इसके साथ ही कंपनी का फोकस पावर ट्रांसमिशन, रिन्यूएबल एनर्जी और निर्यात जैसे क्षेत्रों पर भी है।

    कुल मिलाकर यह स्टॉक उन निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है जो लंबी अवधि में मजबूत रिटर्न की तलाश में रहते हैं। बोनस शेयर की घोषणा ने इसके प्रति बाजार की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।

  • पश्चिम एशिया संकट पर ईरान का पलटवार, अमेरिका-इजराइल को बताया जिम्‍मेदार, ट्रंप की सख्‍ती से बढ़ा तनाव

    पश्चिम एशिया संकट पर ईरान का पलटवार, अमेरिका-इजराइल को बताया जिम्‍मेदार, ट्रंप की सख्‍ती से बढ़ा तनाव

    वॉशिंगटन । पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई देशों में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर असर पड़ा है। इस बीच ईरान ने इन हालात के लिए खुद को जिम्मेदार मानने से इनकार करते हुए अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई देशों में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर असर पड़ा है। इस बीच ईरान ने इन हालात के लिए खुद को जिम्मेदार मानने से इनकार करते हुए अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि भारत समेत कई देशों में पैदा हुई मौजूदा स्थिति के लिए ईरान नहीं, बल्कि अमेरिका और इजराइल जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि यह संघर्ष ईरान पर थोपा गया है और देश इससे खुश नहीं है।

    “हमने नहीं शुरू की यह जंग”
    एक साक्षात्कार में बघाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका और इजराइल की भूमिका की जवाबदेही तय करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन देशों की कार्रवाई से ही मौजूदा हालात पैदा हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से प्रभावित देशों के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले यह समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित था और हर देश के लिए खुला था।

    होर्मुज पर ईरान का दावा
    बघाई ने यह भी कहा कि ईरान ने जो भी कदम उठाए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में हैं। उनका कहना है कि अमेरिका और इजराइल ने खाड़ी क्षेत्र के देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए किया, जिसके जवाब में ईरान को कार्रवाई करनी पड़ी। ईरान का कहना है कि वह खुद भी इस जलमार्ग पर निर्भर है, इसलिए उसकी प्राथमिकता इसकी सुरक्षा है।

    अमेरिका की सख्त नीति
    दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने वैश्विक बैंकों को ईरानी मनी लॉन्ड्रिंग और तेल नेटवर्क पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान शेल कंपनियों और क्रिप्टो नेटवर्क के जरिए प्रतिबंधित तेल का व्यापार कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ संघर्ष विराम “कमजोर स्थिति” में पहुंच चुका है और उन्होंने तेहरान के शांति प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।

    तेल कारोबार पर सख्ती
    अमेरिकी प्रशासन ने बैंकों से संदिग्ध कंपनियों की पहचान करने को कहा है, खासकर उन फर्मों पर नजर रखने के लिए जो अचानक बड़े वित्तीय लेनदेन कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024 में ईरान से जुड़ी कंपनियों ने करीब 4 अरब डॉलर का तेल कारोबार किया है। अब अमेरिका इराक, यूएई और ओमान जैसे देशों पर भी दबाव बना रहा है ताकि ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

  • शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्‍या के आरोपी राज को लेकर उनकी मां का भावुक बयान, गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

    शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्‍या के आरोपी राज को लेकर उनकी मां का भावुक बयान, गिरफ्तारी पर उठाए सवाल


    बलिया। कोलकाता में बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) की हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए बलिया निवासी राज सिंह को लेकर नया मोड़ सामने आया है। आरोपी की मां जामवंती सिंह ने बेटे के समर्थन में सामने आकर पूरी घटना का क्रम बताया और उसकी बेगुनाही का दावा किया है।

    उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनका बेटा कई दिनों तक उनके साथ ही था और ऐसे में वह किसी वारदात में शामिल कैसे हो सकता है। मां का कहना है कि पूरा परिवार लखनऊ में एक शादी समारोह में शामिल होने गया था, जिसके बाद धार्मिक यात्रा भी की गई।

    शादी से लेकर अयोध्या दर्शन तक का सफर
    जामवंती सिंह के मुताबिक, 7 तारीख को राज लखनऊ में एक एमएलसी की बेटी की शादी में शामिल होने गया था। इसी दौरान परिवार ने भी साथ चलने की इच्छा जताई। इसके बाद पूरा परिवार राज, ड्राइवर, एक दोस्त, एक अन्य व्यक्ति और स्वयं मां लखनऊ पहुंचा और एक गेस्ट हाउस में रुका।

    रात में राज शादी समारोह में गया और बाद में वापस लौट आया। अगले दिन सुबह सभी लोग अंबेडकर नगर स्थित किछौछा शरीफ पहुंचे, जहां उन्होंने दरगाह पर चादर चढ़ाई। इसके बाद परिवार अयोध्या गया और वहां राम मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। मां ने कहा कि पूरे दिन की यात्रा के बाद सभी ने रास्ते में भोजन किया और सामान्य रूप से समय बिताया।

    अचानक गिरफ्तारी का आरोप
    राज की मां का कहना है कि जब वे अयोध्या से लौट रहे थे, तभी उनकी गाड़ी को पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद बेटे को हिरासत में ले लिया गया और परिवार को महिला थाने में बैठा दिया गया। उनके अनुसार, पूरी रात उन्हें मामले की जानकारी नहीं दी गई। अगले दिन थोड़ी देर के लिए बेटे से मुलाकात कराई गई, जिसके बाद पता चला कि कोलकाता पुलिस उसे अपने साथ ले जा रही है। मां ने रोते हुए कहा कि उन्हें अब तक नहीं पता कि उनका बेटा कहां है और उसे किस आधार पर ले जाया गया।

    CCTV और मोबाइल रिकॉर्ड का दावा
    जामवंती सिंह ने दावा किया कि उनके पास बेटे की मौजूदगी के कई सबूत हैं। उन्होंने कहा कि घर के CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड से यह साबित हो सकता है कि राज लगातार परिवार के साथ था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़े तो शादी समारोह, बाजार और यात्रा के सभी वीडियो और सबूत जांच एजेंसियों को दिए जा सकते हैं।

    आपराधिक रिकार्ड
    राज सिंह की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें वह यूपी सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह, बीजेपी विधायक प्रिंसू सिंह और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ नजर आ रहा है। पुलिस के अनुसार, राज का आपराधिक इतिहास भी रहा है। वर्ष 2020 में उस पर एक अंडा व्यवसायी की हत्या का आरोप लगा था और वह फिलहाल जमानत पर बाहर था।

    वहीं राज की मां ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सच सामने आना चाहिए और बिना ठोस सबूत के किसी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

  • अर्थव्यवस्था को बचाने की कवायद… जानें सोना और तेल के इस्तेमाल में कटौती की अपील का क्या है मकसद?

    अर्थव्यवस्था को बचाने की कवायद… जानें सोना और तेल के इस्तेमाल में कटौती की अपील का क्या है मकसद?


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में संघर्ष से वैश्विक आपूर्ति शृंखला (Global Supply Chain) में आई रुकावट और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) सुरक्षित रखने के लिए सोने, पेट्रोल-डीजल और खाने के तेल के इस्तेमाल में कटौती की पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अपील पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अपील का मुख्य मकसद डॉलर की मांग कम करना, रुपये को मजबूत करना और अर्थव्यवस्था को संभावित झटकों से बचाना है। विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ती आयात लागत और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव से दबाव लगातार बढ़ रहा है। भारत तेल का शुद्ध आयातक है और तेल की 89 फीसदी जरूरतें बाहरी स्रोतों से पूरी करता है और इसके लिए उसे अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।


    6 अरब डॉलर का सोना हर माह खरीदता है भारत

    भारत सोने का उत्पादक नहीं है। पिछले वर्ष अकेले सोने पर करीब 72 अरब डॉलर खर्च किए गए। यानी, हर माह छह अरब डॉलर। उपभोक्ता आयात और एक आरक्षित संपत्ति के रूप में सोने की दोहरी भूमिका स्थिति को और जटिल बना देती है। आरबीआई तेजी से सोना जमा कर रहा है। एक साल में उसने लंदन से 168 टन सोना खरीदा है, जिससे मार्च तक उसके पास 880 टन सोना हो गया है। भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की 16% हिस्सेदारी है, जो पिछले वर्ष के 10% से अधिक है। हालांकि, घरेलू सोने की खरीद का आर्थिक असर अलग होता है।

    आरबीआई के रिजर्व प्रबंधन कार्यों के विपरीत आयातित सोने की उपभोक्ता मांग अर्थव्यवस्था में डॉलर के प्रवाह को सीधे तौर पर बढ़ा देती है। इसलिए, बड़े पैमाने पर सोने के आयात से चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है और डॉलर की मांग बढ़ सकती है। इससे समय के साथ रुपया कमजोर पड़ सकता है। जैसे-जैसे डॉलर बाहर जाता है, रुपया कमजोर होता जाता है, सोना और भी महंगा हो जाता है। इससे दुष्चक्र पैदा हो जाता है, जिसमें भारतीय उपभोक्ता सोने के लिए अधिक रुपये चुकाता है, क्योंकि सोने की पिछली खरीद ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया होता है।


    आयात में बढ़ोतरी से बढ़ रहा दबाव

    थिंक टैंक वैश्विक व्यापार अनुसंधान पहल (जीटीआरआई) ने पीएम की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि सोने के आयात में हो रही भारी बढ़ोतरी विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रही है और व्यापार असंतुलन को बढ़ा रही है। जीटीआरआई के अनुसार, भारत के गोल्ड बार का आयात 2022 में 36.5 अरब डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 58.9 अरब डॉलर हो गया। थिंक टैंक ने सरकार से आग्रह किया है कि विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रखने के लिए, भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौते के तहत कीमती धातुओं पर दी जाने वाली रियायतों की समीक्षा करे। हाल में सोने के आयात में हुई बढ़ोतरी में इसकी बड़ी भूमिका रही है। अमीरात से 2022 में जहां गोल्ड बार का आयात 2.9 अरब डॉलर था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 16.5 अरब डॉलर हो गया।


    89% तेल का आयात करता है भारत

    तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भी डॉलर के बाहर जाने में वृद्धि के रूप में सामने आता है। हालांकि पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई हैं, पर इसकी भरपाई सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने की है। इन कंपनियों को खुदरा कीमत और आयात कीमत के बीच के अंतर का सामना करना पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उछाल के कारण इन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) को एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर भी नुकसान हो रहा है, जिससे उन पर दबाव और बढ़ गया है। इसे देखते हुए कि सरकार ने ओएमसी को इन नुकसानों की भरपाई करने की कोई योजना नहीं होने का संकेत दिया है, कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद है और कंपनियां खुद भी इस तरह के बदलाव के लिए जोर दे रही हैं। हालांकि, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कुछ ही दिनों में पूरी आपूर्ति शृंखला में फैल जाती है।


    खाद्य तेल : विकल्प सीमित थाली की बढ़ती जा रही लागत

    भारत खाने के तेल की जरूरतों के लिए आयात पर बहुत निर्भर है, खासकर इंडोनेशिया और मलयेशिया से पाम तेल तथा रूस और यूक्रेन से सूरजमुखी का तेल मंगाता है। पीएम मोदी ने कहा था कि यदि हर घर खाने के तेल का इस्तेमाल कम कर दे, तो राष्ट्रीय खजाने के साथ परिवार की सेहत भी सुधरेगी। सोने की खरीद टाला जा सकता है या सैद्धांतिक रूप से ईंधन की बचत की जा सकती है, लेकिन खाने के तेल के विकल्प सीमित हैं। यह रोजमर्रा की आवश्यक चीज है। रुपये की गिरावट से यह समस्या और भी बढ़ गई है। कमजोर रुपया आयातित तेल के हर लीटर की कीमत बढ़ा देता है और खाने के तेल की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी आपूर्ति शृंखला के जरिये तेजी से उपभोक्ता की थाली तक पहुंच जाती है। घरेलू स्तर पर उपलब्ध सरसों के तेल जैसे विकल्प मौजूद हैं, लेकिन इनका उत्पादन इतनी तेजी से नहीं बढ़ाया जा सकता कि ये आयात की जगह ले सकें।


    रासायनिक उर्वरक : बढ़ रहीं कीमतें, खाने-पीने की वस्तुओं पर असर

    प. एशिया आपूर्ति मार्गों में भारी रुकावट की वजह से आयात किए गए यूरिया की कीमत फरवरी में 508 डॉलर से बढ़कर 935 डॉलर प्रति टन हो गई है। इसी तरह, डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) की कीमत पिछले साल के 680 डॉलर से बढ़कर 925 डॉलर प्रति टन होने की उम्मीद है। अमोनिया की कीमतें भी 435 डॉलर से बढ़कर 850–900 डॉलर प्रति टन हो गई हैं, जो दोगुनी से भी अधिक हैं। यूरिया आयात का लगभग 75% हिस्सा खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों से आता है।

    खाद के घरेलू उत्पादन को भी झटका लगा है। खाड़ी से एलएनजी की आपूर्ति में रुकावटों के कारण मार्च में यूरिया का उत्पादन 25 लाख टन की सामान्य मासिक दर के मुकाबले घटकर 15 लाख टन रह गया। जून में स्टॉक की पर्याप्त भरपाई नहीं हुई, तो खेती में इस्तेमाल चीजों की बढ़ी लागत का असर खाद्य वस्तुओं पर पड़ेगा।


    यूरिया आयात का 75% हिस्सा जीसीसी से आता है

    घरेलू यूरिया प्लांट फीडस्टॉक के तौर पर एलएनजी पर निर्भर रहते हैं, जिसका 60% से अधिक हिस्सा कतर, यूएई व ओमान से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात किया जाता है। इस मार्ग में बाधा ने उर्वरक आयात को प्रभावित किया। खरीफ मौसम के लिए 194 लाख टन यूरिया की जरूरत है, जबकि अप्रैल में स्टॉक केवल 55 लाख टन था।

  • Cannes Queen ऐश्वर्या राय ब्रांड वीडियो से गायब, आलिया भट्ट की एंट्री पर मचा बवाल

    Cannes Queen ऐश्वर्या राय ब्रांड वीडियो से गायब, आलिया भट्ट की एंट्री पर मचा बवाल

    नई दिल्ली  कान्स फिल्म फेस्टिवल हमेशा से भारत के लिए खास रहा है और इसमें ऐश्वर्या राय बच्चन को ‘कान्स क्वीन’ कहा जाता है। साल 2004 से वह लगातार लोरियल पेरिस की ग्लोबल एंबेसडर के रूप में रेड कार्पेट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रही हैं। लेकिन इस बार फेस्टिवल से पहले ब्रांड द्वारा जारी एक प्रमोशनल वीडियो में उनकी गैरमौजूदगी ने फैंस को हैरान कर दिया है।

    वीडियो में आलिया भट्ट की मौजूदगी, ऐश्वर्या गायब
    इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो में कान्स के मशहूर मार्टिनेज होटल की झलक दिखाई गई, जहां ब्रांड से जुड़ी कई इंटरनेशनल और भारतीय सेलिब्रिटीज के पोस्टर नजर आए। इनमें आलिया भट्ट का पोस्टर भी शामिल था।
    हालांकि, लंबे समय से कान्स की पहचान बन चुकी ऐश्वर्या राय बच्चन का कोई पोस्टर या जिक्र नहीं दिखा, जिससे फैंस काफी निराश हो गए।

    सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्स
    वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि ऐश्वर्या राय को क्यों शामिल नहीं किया गया। एक यूजर ने लिखा कि “ऐश्वर्या को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता।”
    दूसरे ने पूछा “कान्स की असली क्वीन कहां हैं? वहीं कई फैंस ने ब्रांड पर भारत में ऐश्वर्या की लोकप्रियता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

     ऐश्वर्या राय और कान्स का पुराना रिश्ता
    ऐश्वर्या राय बच्चन लंबे समय से कान्स रेड कार्पेट की सबसे चर्चित भारतीय चेहरों में से एक रही हैं। उनके लुक्स, गाउन स्टाइल और बोल्ड मेकअप हर साल सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे हैं। उनकी उपस्थिति को अक्सर भारत की ग्लोबल फैशन पहचान से जोड़ा जाता है।

     ब्रांड की चुप्पी बनी चर्चा का विष
    अब तक लोरियल पेरिस की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसी वजह से फैंस की नाराजगी और सवाल और बढ़ते जा रहे हैं।

     

    =कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 से पहले यह विवाद सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। जहां एक तरफ आलिया भट्ट की मौजूदगी को लेकर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐश्वर्या राय बच्चन की गैरमौजूदगी ने फैंस को निराश कर दिया है।

  • तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश

    तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की शपथ लेते ही सी जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) ऐक्शन मोड में हैं। उन्होंने बड़ा आदेश देते हुए कहा है कि पूजा के स्थलों, स्कूलों और बस अड्डों के आसपास 500 मीटर के दायरे में सभी शराब की सरकारी दुकानें तत्काल बंद कर दी जाएं। सख्त आदेश जारी करते हुए विजय ने कहा है कि यह फैसला दो हफ्ते के अंदर ही लागू होगा।

    बता दें कि मुख्यमंत्री बनते ही मंच पर ही उन्होंने अपने वादों को पूरा करने के लिए तीन फैसलों पर साइन कर दिए थे। पहला आदेश 200 यूनिट फ्री बिजली देने को लेकर था। दूसरा आदेश महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने और तीसरा नशे की सस्या से निपटने के लिए हर जिले में विशेष फोर्स का गठन करना था।

    सोमवार को ही सीएम विजय समेत सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने विधानसभा में शपथ ली है। सबसे पहले मुख्यमंत्री विजय ने विधायक के रूप में शपथ ली और मंत्रियों में एन आनंद, आधव अर्जुन, केजी अरुणराज, केए सेनगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन और टीके प्रभु ने भी शपथ ली। इसके बाद द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) विधायक दल के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन, पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम तथा अन्य विधायकों ने पद की शपथ ली।

    विजय, उदयनिधि और पनीरसेल्वम उन विधायकों में शामिल थे जिन्होंने “पूर्ण निष्ठा” के नाम पर शपथ ली। पलानीस्वामी और पीएमके की सौम्या अंबुमणि उन विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। महिला मंत्री कीर्तना शुरुआत में अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं और उन्हें इसे लाने के लिए वापस जाना पड़ा।

    जब विधानसभा के प्रधान सचिव के. श्रीनिवासन ने माइक पर कीर्तना का नाम शपथ लेने के लिए पुकारा, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी के सामने बने मंच की ओर बढ़ीं। विधानसभा की परंपरा के अनुसार, शपथ लेने वाले विधायक कार्यवाहक अध्यक्ष की ओर मुख करके खड़े होते हैं। जैसे ही कीर्तना मंच के पास पहुंचीं, सचिव श्रीनिवासन ने हाथ उठाकर उनसे निर्वाचन प्रमाण-पत्र मांगा। हालांकि, वह प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं। श्रीनिवासन को उन्होंने क्या जवाब दिया, यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है।

    बाद में, कीर्तना प्रमाण-पत्र सदन में लेकर आईं और अधिकारी को सौंप दिया तथा ईश्वर के नाम पर शपथ ली। वेलाचेरी से ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) के विधायक आर. कुमार जब अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र जमा करने के बाद शपथ लेने ही वाले थे, तभी अधिकारी श्रीनिवासन ने उन्हें रोक दिया। श्रीनिवासन ने कुमार का ध्यान इस ओर दिलाया कि उनके द्वारा जमा किए गए प्रमाण-पत्र पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज है।

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच 15 मई को यूरोप और यूएई के टूर पर जाएंगे PM मोदी, इन मुद्दों पर रहेगा फोकस

    पश्चिम एशिया संकट के बीच 15 मई को यूरोप और यूएई के टूर पर जाएंगे PM मोदी, इन मुद्दों पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) में तनाव के बीच दुनियाभर में पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) 15 से 20 मई तक यूरोप और यूएई की यात्रा पर जाने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक इस यात्रा के दौरन वह ऊर्जा सहयोग और व्यापार को बढ़ाने को लेकर कई समझौते कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) यूएई (UAE) और इटली (Italy) में रुकेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी , नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे का भी दौरा करेंगे। वह 15 मई को सबसे पहले यूएई पहुचेंगे और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे।


    किन मुद्दों पर होगा फोकस

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी इस यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वैश्विक नेताओं से चर्चा करेंगे। इसके अलावा यूरोप के देशों के साथ सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक साझेदारी को बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। जानकारी के मुताबिक यात्रा के दौरान सभी देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर भी चर्चा की जाएगी।


    यूएई के बाद की यात्रा

    बता दें कि यूएई भारत का बड़ा एनर्जी पार्टनर है। इसके अलावा भी निवेश के मामले में वह भारत का सातवां सबसे बड़ा स्रोत है। यहां 45 लाख से ज्यादा भारतीय भी रहते हैं। यूएई के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड पहुंचेंगे और पीएम रॉब जेटेन से मुलकात करेंगे। वह 17 मई तक नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इसके बाद वह स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टनर्स के न्योते पर 17 से 18 मई तक के लिए स्वीडन के गोथेनबर्ग पहुंचेंगे। चौथे चरण में प्रधानमंत्री नॉर्वे पहुंचेंगे और भारत-नॉर्डिक शिखऱ सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वर्ष 1983 के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी।

    इस मुद्दे को लेकर हो सकती है अहम बात
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड दूसरी बार जा रहे हैं। यहां वह पीएम विलियम- अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मिलेंगे। पीएम मोदी इस यात्रा के दौरान रक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और नवाचार के मामलों को आगे बढ़ाने के लिए चर्चा करेंगे। यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली जाएंगे और यहां प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात करेंगे।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा रक्षा, सुरक्षा, नवाचार, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल पर रणनीतिक साझेदारी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उच्च स्तरीय बैठकों और घनिष्ठ सहयोग की गति को और मजबूत करेगी। मंत्रालय ने कहा कि उनकी यह यात्रा बहुआयामी साझेदारी को और गहरा और विस्तारित करने का अवसर प्रदान करेगी। अपनी वार्ता में दोनों पक्ष हरित परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), उभरती प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं, रक्षा, अंतरिक्ष, लोगों का लोगों से संबंध और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

  • Cannes Queen’ ऐश्वर्या राय ब्रांड वीडियो से गायब, फैंस भड़के – आलिया भट्ट की मौजूदगी पर चर्चा तेज

    Cannes Queen’ ऐश्वर्या राय ब्रांड वीडियो से गायब, फैंस भड़के – आलिया भट्ट की मौजूदगी पर चर्चा तेज


    नई दिल्ली  कान्स फिल्म फेस्टिवल हमेशा से भारत के लिए खास रहा है और इसमें ऐश्वर्या राय बच्चन को ‘कान्स क्वीन’ कहा जाता है। साल 2004 से वह लगातार लोरियल पेरिस की ग्लोबल एंबेसडर के रूप में रेड कार्पेट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रही हैं। लेकिन इस बार फेस्टिवल से पहले ब्रांड द्वारा जारी एक प्रमोशनल वीडियो में उनकी गैरमौजूदगी ने फैंस को हैरान कर दिया है।

    वीडियो में आलिया भट्ट की मौजूदगी, ऐश्वर्या गायब
    इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो में कान्स के मशहूर मार्टिनेज होटल की झलक दिखाई गई, जहां ब्रांड से जुड़ी कई इंटरनेशनल और भारतीय सेलिब्रिटीज के पोस्टर नजर आए। इनमें आलिया भट्ट का पोस्टर भी शामिल था।
    हालांकि, लंबे समय से कान्स की पहचान बन चुकी ऐश्वर्या राय बच्चन का कोई पोस्टर या जिक्र नहीं दिखा, जिससे फैंस काफी निराश हो गए।

    सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्स
    वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि ऐश्वर्या राय को क्यों शामिल नहीं किया गया। एक यूजर ने लिखा कि “ऐश्वर्या को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता।”
    दूसरे ने पूछा “कान्स की असली क्वीन कहां हैं? वहीं कई फैंस ने ब्रांड पर भारत में ऐश्वर्या की लोकप्रियता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

     ऐश्वर्या राय और कान्स का पुराना रिश्ता
    ऐश्वर्या राय बच्चन लंबे समय से कान्स रेड कार्पेट की सबसे चर्चित भारतीय चेहरों में से एक रही हैं। उनके लुक्स, गाउन स्टाइल और बोल्ड मेकअप हर साल सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे हैं। उनकी उपस्थिति को अक्सर भारत की ग्लोबल फैशन पहचान से जोड़ा जाता है।

     ब्रांड की चुप्पी बनी चर्चा का विष
    अब तक लोरियल पेरिस की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसी वजह से फैंस की नाराजगी और सवाल और बढ़ते जा रहे हैं।

    कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 से पहले यह विवाद सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। जहां एक तरफ आलिया भट्ट की मौजूदगी को लेकर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐश्वर्या राय बच्चन की गैरमौजूदगी ने फैंस को निराश कर दिया है।