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  • IPL 2026 Playoff Race: GT टॉप-2 में फिर भी सबसे पीछे! जानिए किस टीम के कितने प्रतिशत चांस

    IPL 2026 Playoff Race: GT टॉप-2 में फिर भी सबसे पीछे! जानिए किस टीम के कितने प्रतिशत चांस


    नई दिल्ली ।  आईपीएल 2026 अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां हर मैच प्लेऑफ की तस्वीर बदल रहा है। शनिवार को गुजरात टाइटंस ने राजस्थान रॉयल्स को 77 रनों से हराकर न सिर्फ शानदार जीत दर्ज की, बल्कि पॉइंट्स टेबल में भी दूसरा स्थान हासिल कर लिया। शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम ने इस मुकाबले में ऐसा दमदार प्रदर्शन किया, जिसने बाकी टीमों की टेंशन बढ़ा दी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी जीत के बावजूद गुजरात टाइटंस को प्लेऑफ की दौड़ में सबसे कमजोर दावेदार माना जा रहा है।
    आंकड़ों के मुताबिक गुजरात टाइटंस के प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना 72.52 प्रतिशत है, जो टॉप-5 टीमों में सबसे कम है। जबकि सनराइजर्स हैदराबाद, पंजाब किंग्स, राजस्थान रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु उससे आगे हैं। क्रिकेट फैंस के लिए यह आंकड़ा चौंकाने वाला जरूर है, लेकिन इसके पीछे टीमों का आगामी शेड्यूल सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है।
    SRH बनी सबसे मजबूत दावेदार
    इस समय प्लेऑफ की रेस में सबसे मजबूत स्थिति सनराइजर्स हैदराबाद की नजर आ रही है। हैदराबाद के प्लेऑफ में पहुंचने के चांस 89.59 प्रतिशत बताए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, टीम के टॉप-2 में फिनिश करने की संभावना भी 60 प्रतिशत से ज्यादा है। लगातार संतुलित प्रदर्शन ने SRH को इस सीजन की सबसे खतरनाक टीम बना दिया है।
    पंजाब और राजस्थान भी मजबूत स्थिति में
    पंजाब किंग्स के प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना 84.81 प्रतिशत आंकी गई है। टीम ने इस सीजन कई करीबी मुकाबले जीतकर खुद को मजबूत स्थिति में पहुंचाया है। वहीं राजस्थान रॉयल्स, हालिया हार के बावजूद 80.31 प्रतिशत चांस के साथ रेस में बनी हुई है। हालांकि खराब नेट रन रेट उसकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हो सकती है।
    RCB और GT के बीच कांटे की टक्कर
    आरसीबी के प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना 77.55 प्रतिशत है, जबकि गुजरात 72.52 प्रतिशत पर है। दोनों टीमों के बीच फर्क ज्यादा नहीं है, लेकिन गुजरात का बाकी शेड्यूल उसे मुश्किल में डाल रहा है। GT को अपने आखिरी लीग मैचों में सनराइजर्स हैदराबाद, कोलकाता नाइट राइडर्स और चेन्नई सुपर किंग्स जैसी मजबूत टीमों का सामना करना है। दूसरी ओर राजस्थान के मुकाबले अपेक्षाकृत कमजोर टीमों के खिलाफ हैं, जिससे उसके चांस ज्यादा माने जा रहे हैं।
    चेन्नई अब भी रेस में जिंदा
    चेन्नई सुपर किंग्स ने खराब शुरुआत के बावजूद वापसी की है। टीम के प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना फिलहाल 38.81 प्रतिशत है। हालांकि अगर ऋतुराज गायकवाड़ की टीम अपने बाकी मुकाबले जीत जाती है, तो पूरा समीकरण बदल सकता है।
    इन टीमों का सपना लगभग खत्म
    कोलकाता नाइट राइडर्स, मुंबई इंडियंस, लखनऊ सुपर जायंट्स और दिल्ली कैपिटल्स की उम्मीदें अब लगभग खत्म मानी जा रही हैं। दिल्ली के प्लेऑफ चांस शून्य प्रतिशत बताए गए हैं, जबकि मुंबई और लखनऊ भी 2 प्रतिशत से नीचे पहुंच चुके हैं। अब आईपीएल 2026 का हर मुकाबला करो या मरो जैसा बन चुका है। आने वाले दिनों में पॉइंट्स टेबल में और बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।

  • CSK बनी ‘साइलेंट किलर’! RCB-राजस्थान का प्लेऑफ सपना तोड़ सकता है चेन्नई का डरावना समीकरण

    CSK बनी ‘साइलेंट किलर’! RCB-राजस्थान का प्लेऑफ सपना तोड़ सकता है चेन्नई का डरावना समीकरण


    नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स ने खराब शुरुआत के बाद जोरदार वापसी की है। अब ऋतुराज गायकवाड़ की टीम ऐसा समीकरण बना रही है, जो RCB और राजस्थान रॉयल्स जैसी मजबूत टीमों को प्लेऑफ से बाहर कर सकता है। गुजरात की बड़ी जीत के बाद पॉइंट्स टेबल का खेल और रोमांचक हो गया है।

    आईपीएल 2026 अब अपने सबसे रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है। 52 मुकाबले पूरे होने के बाद भी कोई टीम आधिकारिक तौर पर प्लेऑफ में नहीं पहुंची है और न ही कोई बाहर हुई है। लेकिन इसी बीच चेन्नई सुपर किंग्स ने ऐसा ‘साइलेंट किलर’ अवतार दिखाया है, जिसने आरसीबी और राजस्थान रॉयल्स जैसी दावेदार टीमों की टेंशन बढ़ा दी है। सीजन की शुरुआत में लगातार तीन हार झेलने वाली चेन्नई अब जबरदस्त वापसी कर चुकी है और प्लेऑफ की रेस को पूरी तरह पलटने की स्थिति में पहुंच गई है।

    शनिवार को गुजरात टाइटंस ने राजस्थान रॉयल्स को 77 रनों से हराकर पॉइंट्स टेबल में बड़ा उलटफेर कर दिया। जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में गुजरात ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 229 रन बनाए। जवाब में राजस्थान की टीम 152 रन पर सिमट गई। राशिद खान की घातक गेंदबाजी ने राजस्थान की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। इस हार के बाद राजस्थान 12 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर खिसक गई और यहीं से चेन्नई के लिए प्लेऑफ के दरवाजे खुलते नजर आने लगे।

    चेन्नई सुपर किंग्स फिलहाल 10 मैचों में 10 अंक लेकर छठे नंबर पर है, लेकिन टीम के पास अभी 4 मुकाबले बाकी हैं। यही चार मैच पूरे टूर्नामेंट का समीकरण बदल सकते हैं। अगर चेन्नई अपने सभी बचे हुए मैच जीत लेती है, तो उसके 18 अंक हो जाएंगे और टीम सीधे टॉप-2 में पहुंच सकती है। यही स्थिति आरसीबी और राजस्थान दोनों के लिए खतरे की घंटी बन गई है।

    आरसीबी के पास फिलहाल 12 अंक हैं और उसे मुंबई, कोलकाता, पंजाब और हैदराबाद जैसी मजबूत टीमों से भिड़ना है। अगर आरसीबी अपने चार में से तीन मैच हार जाती है और चेन्नई लगातार जीत दर्ज करती है, तो बेहतर नेट रन रेट होने के बावजूद बेंगलुरु की टीम 14 अंकों पर अटककर बाहर हो सकती है।

    राजस्थान रॉयल्स की स्थिति भी ज्यादा मजबूत नहीं दिख रही। टीम के पास अधिकतम 18 अंक तक पहुंचने का मौका जरूर है, लेकिन खराब नेट रन रेट और लगातार दबाव उसके लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है। दिल्ली, लखनऊ और मुंबई के खिलाफ बचे मुकाबलों में एक हार भी राजस्थान की राह कठिन बना सकती है, जबकि दो हार सीधे प्लेऑफ से बाहर कर सकती हैं।

    चेन्नई के पास सबसे बड़ा फायदा यह है कि उसके कुछ मुकाबले उन्हीं टीमों के खिलाफ हैं, जो प्लेऑफ की रेस में उससे ऊपर हैं। यानी CSK सिर्फ खुद अंक नहीं जुटाएगी, बल्कि प्रतिद्वंद्वियों को भी पीछे धकेलेगी। लखनऊ के खिलाफ आज का मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है। अगर चेन्नई यह मैच बड़े अंतर से जीतती है, तो टीम टॉप-4 में एंट्री कर सकती है और राजस्थान नीचे खिसक जाएगा।

    चेपॉक का इतिहास भी चेन्नई के पक्ष में जाता है। घरेलू मैदान पर CSK हमेशा खतरनाक टीम साबित हुई है। ऐसे में ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी में टीम अगर लगातार जीत का सिलसिला जारी रखती है, तो आईपीएल 2026 के प्लेऑफ की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। अब सभी की नजरें चेन्नई के अगले मुकाबलों पर टिकी हैं, क्योंकि यही मैच तय करेंगे कि कौन प्लेऑफ में जाएगा और किसका सपना टूटेगा।

  • शनि जयंती के शुभ संयोग से खुलेंगे भाग्य के द्वार, इन 5 राशि वालों को मिलेगा अपार धन-लाभ

    शनि जयंती के शुभ संयोग से खुलेंगे भाग्य के द्वार, इन 5 राशि वालों को मिलेगा अपार धन-लाभ


    नई दिल्ली  साल 2026 की शनि जयंती कई मायनों में बेहद खास रहने वाली है। 16 मई को पड़ने वाली इस शनि जयंती पर ग्रहों की ऐसी दुर्लभ स्थिति बन रही है, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है। खास बात यह है कि इस बार शनि जयंती शनिवार के दिन ही आ रही है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दौरान बुधादित्य राजयोग और केदार योग का निर्माण हो रहा है, जिसका असर कई राशियों पर सकारात्मक रूप से दिखाई देगा। इनमें खास तौर पर 5 राशियों के लोगों की किस्मत अचानक चमक सकती है।
    दरअसल, 15 मई 2026 को सूर्य और बुध का वृषभ राशि में गोचर होगा। इन दोनों ग्रहों की युति से बुधादित्य राजयोग बनेगा, जो बुद्धि, करियर, सम्मान और धन लाभ का कारक माना जाता है। वहीं 7 घरों में ग्रहों की उपस्थिति से बनने वाला केदार योग आर्थिक मजबूती और सुख-समृद्धि का संकेत देता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इन शुभ योगों का सबसे ज्यादा फायदा वृषभ, सिंह, तुला, वृश्चिक और कुंभ राशि के लोगों को मिल सकता है।
    वृषभ राशि वालों को मिलेगा करियर में बड़ा उछाल
    वृषभ राशि में ही बुधादित्य योग बन रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों को सबसे ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी और पदोन्नति मिल सकती है। कारोबारियों को पुराने क्लाइंट्स से बड़ा फायदा होने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में भी राहत मिल सकती है।
    सिंह राशि वालों की बढ़ेगी प्रतिष्ठा
    सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय सामाजिक सम्मान और प्रोफेशनल सफलता लेकर आ सकता है। ऑफिस में आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। नए बिजनेस अवसर मिल सकते हैं और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा।
    तुला राशि वालों को होगा धन लाभ
    तुला राशि के लोगों के लिए केदार योग बेहद शुभ माना जा रहा है। संपत्ति खरीदने के योग बन सकते हैं। निवेश से लाभ होगा और लंबे समय से रुके काम पूरे हो सकते हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और मानसिक तनाव कम होगा।
    वृश्चिक राशि वालों को मिल सकती है नई नौकरी
    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि जयंती नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है। नौकरी बदलने का अवसर मिल सकता है। विदेश यात्रा या पढ़ाई के योग भी बन रहे हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा और करियर में नई दिशा मिल सकती है।
    कुंभ राशि वालों के लिए खुलेगा सफलता का रास्ता
    कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं, इसलिए शनि जयंती का प्रभाव इस राशि पर विशेष रूप से देखने को मिलेगा। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। करियर में उम्मीद से बड़ी सफलता मिल सकती है। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है और सेहत में भी सुधार आने के संकेत हैं।
    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनि जयंती के दिन शनिदेव की पूजा, दान और संयमित जीवनशैली अपनाने से शुभ फलों में वृद्धि होती है। हालांकि किसी भी भविष्यवाणी को पूरी तरह निश्चित मानने के बजाय इसे आस्था और विश्वास के रूप में देखना चाहिए।
  • कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    नई दिल्ली। भारत में खाने की बात हो और प्याज-लहसुन का जिक्र न आए, ऐसा शायद ही कभी होता हो। हर घर की रसोई से लेकर बड़े-बड़े होटलों तक इन दोनों का इस्तेमाल आम माना जाता है। लेकिन जम्मू-कश्मीर का कटरा एक ऐसा शहर है, जहां पहुंचते ही खान-पान की पूरी तस्वीर बदल जाती है। यहां न बाजारों में प्याज-लहसुन बिकता दिखाई देता है, न ढाबों और होटलों के खाने में इसका इस्तेमाल होता है और न ही लोग इसे अपने घरों में रखना पसंद करते हैं। यही वजह है कि कटरा को देश के सबसे अनोखे धार्मिक शहरों में गिना जाता है।

    कटरा माता वैष्णो देवी मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां से माता के दरबार के लिए यात्रा शुरू करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यात्रा शुरू करने से पहले शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। इसी वजह से पूरे शहर में सात्विक भोजन की परंपरा विकसित हुई। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्याज और लहसुन तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं, जो मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि वर्षों से यहां इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता।

    सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह परंपरा किसी सरकारी आदेश या कानूनी प्रतिबंध के कारण नहीं चल रही, बल्कि लोगों की आस्था और आपसी सम्मान से कायम है। यहां रहने वाले दूसरे धर्मों के लोग, यहां तक कि मुस्लिम परिवार भी स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए प्याज-लहसुन से दूरी बनाए रखते हैं। यही सामाजिक सौहार्द कटरा को बाकी शहरों से अलग पहचान देता है।

    अक्सर लोगों को लगता है कि बिना प्याज और लहसुन के खाना स्वादिष्ट नहीं हो सकता, लेकिन कटरा इस सोच को बदल देता है। यहां के रसोइए हींग, अदरक, हरी मिर्च और खास मसालों के इस्तेमाल से ऐसा स्वाद तैयार करते हैं कि श्रद्धालु खाने की तारीफ किए बिना नहीं रहते। दाल, कढ़ी, सब्जियां, पूरी और चटनियों का स्वाद यहां अलग ही अनुभव देता है। कई लोग तो कटरा के सात्विक भोजन को सेहत और स्वाद का बेहतरीन मेल मानते हैं।

    कटरा की यह परंपरा सिर्फ खान-पान तक सीमित नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और धार्मिक वातावरण का हिस्सा बन चुकी है। दुकानदार भी प्याज-लहसुन का स्टॉक नहीं रखते और यदि कोई पर्यटक इसकी मांग करता है, तो उसे विनम्रता से यहां की परंपरा के बारे में बताया जाता है। यही वजह है कि कटरा आज भी अपनी आध्यात्मिक पहचान और सात्विक जीवनशैली के कारण देश-दुनि

  • ग्लोइंग और साफ त्वचा के लिए Azelaic Acid बना पसंदीदा विकल्प, एक्सपर्ट्स ने बताए इसके फायदे

    ग्लोइंग और साफ त्वचा के लिए Azelaic Acid बना पसंदीदा विकल्प, एक्सपर्ट्स ने बताए इसके फायदे

    नई दिल्ली ।आज के समय में स्किनकेयर केवल सुंदर दिखने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोग अब अपनी त्वचा को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने पर भी ध्यान देने लगे हैं। बाजार में मौजूद कई एक्टिव इंग्रीडिएंट्स के बीच Azelaic Acid तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। त्वचा विशेषज्ञ इसे एक ऐसा तत्व मानते हैं जो चेहरे की कई सामान्य समस्याओं पर एक साथ काम करने की क्षमता रखता है।

    Azelaic Acid खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है जो मुहांसों, चेहरे की लालिमा, असमान स्किन टोन और जिद्दी दाग-धब्बों से परेशान रहते हैं। यह त्वचा को धीरे-धीरे साफ और संतुलित बनाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह त्वचा पर ज्यादा कठोर प्रभाव डाले बिना असर दिखाता है, इसलिए संवेदनशील त्वचा वाले लोग भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।

    यह एक्टिव त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाने के बजाय अंदर से काम करता है। यह स्किन पोर्स को साफ रखने, बैक्टीरिया को नियंत्रित करने और सूजन को कम करने में मदद करता है। इसी कारण इसे पिंपल्स और उनके निशानों दोनों पर असरदार माना जाता है। कई लोग इसे अपने स्किनकेयर रूटीन का स्थायी हिस्सा बना रहे हैं क्योंकि यह लंबे समय तक त्वचा की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है।

    त्वचा विशेषज्ञ बताते हैं कि Azelaic Acid का इस्तेमाल धीरे-धीरे शुरू करना चाहिए। शुरुआत में कम प्रतिशत वाले प्रोडक्ट्स का उपयोग बेहतर माना जाता है ताकि त्वचा इस एक्टिव के अनुकूल हो सके। शुरुआती दिनों में हल्की झुनझुनी, खुजली या सूखापन महसूस होना सामान्य हो सकता है, लेकिन समय के साथ त्वचा इसकी आदी हो जाती है। यदि जलन अधिक महसूस हो तो विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी होता है।

    इस एक्टिव की खास बात यह भी है कि इसे अन्य स्किनकेयर तत्वों के साथ संतुलित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। कई लोग इसे नियासिनमाइड और विटामिन-सी जैसे इंग्रीडिएंट्स के साथ उपयोग करते हैं ताकि त्वचा की चमक और रंगत बेहतर हो सके। हालांकि, किसी भी नए एक्टिव को रूटीन में शामिल करने से पहले अपनी त्वचा की जरूरतों को समझना बेहद जरूरी माना जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आज की जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण और तनाव के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं पहले से ज्यादा बढ़ गई हैं। ऐसे में Azelaic Acid जैसे एक्टिव्स लोगों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आए हैं। यह न केवल चेहरे की बनावट को बेहतर बनाने में मदद करता है, बल्कि त्वचा को अधिक संतुलित और स्वस्थ दिखाने में भी योगदान देता है।

    स्किनकेयर में धैर्य को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है और Azelaic Acid के साथ भी यही बात लागू होती है। इसके परिणाम धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। कुछ लोगों को शुरुआती सुधार कुछ हफ्तों में महसूस हो सकता है, जबकि दाग-धब्बों और पिग्मेंटेशन पर असर दिखने में अधिक समय लग सकता है। नियमित और सही इस्तेमाल के साथ यह त्वचा की रंगत और टेक्सचर में स्पष्ट बदलाव ला सकता है।

  • रेस्टोरेंट स्टाइल स्वाद अब घर में, पनीर दो प्याजा की सिंपल रेसिपी से बढ़ाएं खाने का मज़ा..

    रेस्टोरेंट स्टाइल स्वाद अब घर में, पनीर दो प्याजा की सिंपल रेसिपी से बढ़ाएं खाने का मज़ा..


    नई दिल्ली ।
    रसोई में कुछ ऐसी डिशें होती हैं जो साधारण सामग्री से बनकर भी स्वाद में बेहद खास बन जाती हैं और उन्हीं में से एक है पनीर दो प्याजा। यह डिश अपने मसालेदार फ्लेवर, प्याज की खास बनावट और ढाबे जैसे स्वाद के कारण हर घर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए किसी जटिल प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती, बल्कि कुछ आसान स्टेप्स को फॉलो करके ही एक बेहतरीन लंच या डिनर तैयार किया जा सकता है।

    इस डिश की असली पहचान इसका नाम है, जिसमें “दो प्याजा” का मतलब है प्याज का दो अलग-अलग रूपों में इस्तेमाल। एक तरफ बारीक कटा प्याज ग्रेवी को गहराई और स्वाद देता है, जबकि दूसरी तरफ बड़े टुकड़ों में कटा प्याज डिश में हल्का क्रंच और ताजगी जोड़ता है। यही संयोजन इसे बाकी पनीर की सब्जियों से अलग बनाता है और इसे खास स्वाद प्रदान करता है।

    पनीर दो प्याजा बनाने की शुरुआत सामग्री की तैयारी से होती है। पनीर को मध्यम आकार के क्यूब्स में काटकर अलग रखा जाता है। प्याज को दो हिस्सों में बांटा जाता है, एक हिस्सा बारीक काटा जाता है और दूसरा बड़े टुकड़ों में रखा जाता है। इसके साथ टमाटर, अदरक-लहसुन पेस्ट और हरी मिर्च मिलकर इस डिश की बेस ग्रेवी तैयार करते हैं, जो आगे चलकर मसालों के साथ मिलकर गहरा स्वाद देती है।

    पकाने की प्रक्रिया में सबसे पहले तेल या बटर को गर्म किया जाता है और उसमें बारीक कटे प्याज को सुनहरा होने तक भुना जाता है। इसके बाद अदरक-लहसुन पेस्ट और हरी मिर्च डालकर उसकी कच्ची खुशबू खत्म की जाती है। फिर टमाटर मिलाकर तब तक पकाया जाता है जब तक मिश्रण तेल न छोड़ने लगे। इसके बाद हल्दी, धनिया और लाल मिर्च पाउडर डालकर मसाले को अच्छे से मिलाया जाता है ताकि ग्रेवी का स्वाद और रंग दोनों निखर जाएं।

    इसके बाद पनीर के टुकड़े धीरे-धीरे डालकर हल्के हाथों से मिलाए जाते हैं ताकि उनका आकार बना रहे और वे मसाले को अच्छी तरह सोख लें। जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर इसे कुछ मिनट तक पकने दिया जाता है। इसके बाद बड़े कटे हुए प्याज डाले जाते हैं, जो हल्का पककर भी अपनी क्रंची बनावट बनाए रखते हैं और डिश में एक अलग टेक्सचर जोड़ते हैं।

    अंत में गरम मसाला और हरा धनिया डालकर इसे सजाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू दोनों और बढ़ जाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में एक साधारण किचन को रेस्टोरेंट जैसे स्वाद में बदल देती है। तैयार पनीर दो प्याजा को गरमा-गरम रोटी, नान या जीरा राइस के साथ परोसा जाए तो इसका स्वाद और भी शानदार हो जाता है।

    इस तरह यह डिश न केवल रोजमर्रा के खाने को खास बनाती है बल्कि किसी भी मौके पर एक बेहतरीन विकल्प के रूप में भी सामने आती है। सरल सामग्री और आसान विधि के कारण यह हर घर की पसंद बनती जा रही है और अपने ढाबे जैसे स्वाद के कारण लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

  • Bengal: चुनाव में करारी हार के बाद TMC में घमासान…. विधायकों ने खोला आलाकमान के खिलाफ मार्चा

    Bengal: चुनाव में करारी हार के बाद TMC में घमासान…. विधायकों ने खोला आलाकमान के खिलाफ मार्चा


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal ) विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) के हाथों मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदरखाने भारी घमासान शुरू हो गया है। इतने सालों तक पार्टी लाइन का सख्ती से पालन करने वाले कई विधायक और दिग्गज नेता अब अपनी ही लीडरशिप के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। पूर्व क्रिकेटर और मंत्री रहे मनोज तिवारी से लेकर सांसद-अभिनेता देव तक ने पार्टी आलाकमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कुछ नेताओं ने तो चुनाव में हुई इस हार का सीधा ठीकरा महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के सिर फोड़ दिया है। हार के बाद ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने के फैसले पर भी कई विधायकों ने असहमति जताई है।


    गुटबाजी और ‘लॉबी’ को ठहराया हार का जिम्मेदार

    पार्टी के कई विधायकों ने खुलेआम गुटबाजी को हार की सबसे बड़ी वजह बताया है। मुर्शिदाबाद के हरिहरपारा से टीएमसी विधायक नियामत शेख ने सीधे तौर पर कहा, “पार्टी में सिर्फ लॉबी और गुटबाजी हावी है।” उन्होंने इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। नियामत शेख ने बताया कि उन्होंने बार-बार आलाकमान को मुर्शिदाबाद में बढ़ती गुटबाजी को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आलाकमान पर आरोप लगाया कि जमीनी हकीकत यानी ‘ह्यूमन फैक्टर’ को नजरअंदाज कर सोशल मीडिया और तकनीक पर ज्यादा भरोसा किया गया।

    शेख ने चुनाव से ठीक पहले हुमायूं कबीर को सस्पेंड किए जाने को भी गलत फैसला बताया। हुमायूं कबीर ने बाद में अपनी नई पार्टी (AUJP) बनाई और दो सीटें जीतीं, जिससे मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो गया।


    मुस्लिम वोटों का बंटवारा और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज से टीएमसी विधायक अखरुज्जमां ने भी अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में हार का कारण मुस्लिम वोटों के बंटवारे को माना है। उनका कहना था कि मुसलमानों ने टीएमसी और बीजेपी को छोड़कर बाकी सबको वोट दिया। एक अन्य टीएमसी विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमारा मुस्लिम वोट बैंक बिखर गया, जबकि हिंदू वोट पूरी तरह से एकजुट होकर बीजेपी के पक्ष में चला गया। इस विधायक ने चुनावी रणनीतिकार एजेंसी (I-PAC) पर अत्यधिक निर्भर रहने और उन्हें ‘बिचौलिया’ बना देने पर भी भारी नाराजगी जताई।

    ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर अपनों के ही सवाल
    विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। अब इस फैसले पर पार्टी के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं। हावड़ा के बागनान से चार बार के विधायक अरुणभ सेन ने तंज कसते हुए कहा, “ममता बनर्जी एक बड़ा नाम हैं। लेकिन अगर मैं उनकी जगह होता, तो इतनी बड़ी हार के बाद निश्चित तौर पर इस्तीफा दे देता।”

    एक अन्य विधायक ने कहा कि हमें हार स्वीकार करनी चाहिए। हार न मानने की जिद लोगों के बीच पार्टी की छवि को और खराब कर रही है। हालांकि, वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने ममता बनर्जी का बचाव करते हुए कहा कि इस्तीफा न देने का फैसला ममता का अकेले का नहीं था, बल्कि यह सभी निर्वाचित विधायकों का सर्वसम्मत फैसला था।


    देव और मनोज तिवारी का सीधा हमला

    सांसद देव की नाराजगी: लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले और विधानसभा चुनाव में प्रचार करने वाले अभिनेता देव ने मीडिया से कहा कि वह ‘घाटल मास्टरप्लान’ को लेकर अब झूठ नहीं बोलेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता और अभिषेक बनर्जी ने उन्हें झूठा भरोसा दिया था कि बाढ़ नियंत्रण से जुड़े इस लंबे समय से लटके प्रोजेक्ट को जल्द पूरा किया जाएगा।

    मनोज तिवारी के गंभीर आरोप: चुनाव परिणाम आने के महज दो दिन बाद पूर्व खेल राज्य मंत्री मनोज तिवारी ने एक फेसबुक लाइव में टीएमसी सरकार को ‘भ्रष्ट’ बताते हुए कहा कि इसे सत्ता से उखाड़ फेंकना ही सही था। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी और पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास ने उन्हें सरकार में पूरी तरह किनारे कर दिया था। तिवारी ने बीजेपी को उसकी इस ‘प्रचंड जीत’ के लिए बधाई भी दी।

    वोटर लिस्ट में गड़बड़ी: मालदा के मालतीपुर से विधायक अब्दुर रहीम बोक्सी और केएमसी के डिप्टी मेयर अतिन घोष ने चुनाव आयोग के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को हार का बड़ा कारण बताया। अतिन घोष ने राज्यभर में चल रही भारी सत्ता विरोधी लहर और धार्मिक ध्रुवीकरण को भी हार की वजह बताया।

    पार्टी के खिलाफ बढ़ती बयानबाजी को देखते हुए टीएमसी ने अपने 5 प्रवक्ताओं- रिजू दत्ता, कृष्णेंदु चौधरी, कोहिनूर मजूमदार, पापिया घोष और कार्तिक घोष को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोहिनूर मजूमदार और कृष्णेंदु चौधरी ने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के काम करने के तरीके की आलोचना की थी, जबकि रिजू दत्ता ने चुनाव के बाद हुई हिंसा को रोकने के लिए बीजेपी के उठाए गए कदमों की तारीफ की थी।

  • West Bengal: TMC ने चुना विपक्ष का नेता… दो डिप्टी लीटर का भी ऐलान, जानें किसे सौंपी जिम्मेदारी

    West Bengal: TMC ने चुना विपक्ष का नेता… दो डिप्टी लीटर का भी ऐलान, जानें किसे सौंपी जिम्मेदारी


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) ने चुनाव हारने के बाद नेता विपक्ष (Leader of Opposition) चुन लिया है। शोभनदेव चट्टोपाध्याय (Shobhandev Chattopadhyay.) को यह अहम जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा, असीमा पात्रा और नैना बंद्योपाध्याय विपक्ष की डिप्टी लीडर होंगी। वहीं, फिरहाद हकीम मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) होंगे।

    पश्चिम बंगाल में डेढ़ दशक तक राज करने के बाद तृणमूल कांग्रेस को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा है। इतिहास में पहली बार राज्य में भाजपा ने बहुमत हासिल किया और 207 विधायकों के साथ सरकार बनाई है। भवानीपुर से ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी राज्य के नए मुख्यमंत्री बने हैं। उनके शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एनडीए शासित प्रदेशों के तमाम मुख्यमंत्रियों समेत भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

    चार मई को आए बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के अनुसार, भाजपा को 207, तृणमूल कांग्रेस को 80, कांग्रेस को दो, हुमायूं कबीर की पार्टी को दो, सीपीआईएम और एआईएसएफ को एक-एक सीट मिली है। 2011 से राज्य में ममता बनर्जी की सरकार थी।

    इससे पहले, ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में हालिया विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुकाबला करने के लिए शनिवार को सभी विपक्षी दलों से एक ”संयुक्त मंच” बनाने के वास्ते एकजुट होने की अपील की। पूर्व मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों से जुड़े सभी छात्र संघों और गैर सरकारी संगठनों से भी भाजपा के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। बनर्जी ने कहा, ”मैं सभी विपक्षी दलों, जिनमें वामपंथी और धुर-वामपंथी दल शामिल हैं, से भाजपा के खिलाफ एक संयुक्त मंच बनाने के लिए एकजुट होने का आह्वान करती हूं।”

  • MP के वन विभाग ने रचा इतिहास… भोपाल से उड़ा गिद्ध 3000KM का सफर कर पहुंचा उज्बेकिस्तान

    MP के वन विभाग ने रचा इतिहास… भोपाल से उड़ा गिद्ध 3000KM का सफर कर पहुंचा उज्बेकिस्तान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का वन विभाग (Forest Department) अब सिर्फ बाघों (Tigers) के ही नहीं, बल्कि गिद्धों (Vultures) के संरक्षण में भी दुनिया के लिए मिसाल पेश कर रहा है. हाल ही में राज्य के गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र (VCBC) केरवा में इलाज पाकर ठीक हुए दो सिनेरियस गिद्धों (Two Cinereous Vultures) ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर वैज्ञानिक जगत को हैरान कर दिया है.

    दरअसल, दिसंबर 2025 में विदिशा के सिरोंज से एक घायल सिनेरियस गिद्ध को बचाया गया था. भोपााल के वन विहार में और BNHS संचालित VCBC में इलाज के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे 23 फरवरी को हलाली बांध क्षेत्र में आजाद किया।

    WWF-India के सहयोग से इस पर GPS लगाया गया था. डेटा के अनुसार, 10 अप्रैल को इसने उड़ान भरी और राजस्थान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान को पार करते हुए 4 मई को उज्बेकिस्तान पहुंच गया. विदिशा से उज्बेकिस्तान तक गिद्ध का 3000 किमी का सफर देख हर कोई हैरान है।


    पाकिस्तान में फंसी मादा गिद्ध का रेस्क्यू

    एक अन्य मामला शाजापुर के सुसनेर से रेस्क्यू की गई मादा सिनेरियस गिद्ध का है. 25 मार्च को रिहा होने के बाद यह गिद्ध पाकिस्तान पहुंच गई. 7 अप्रैल को वहां आए भीषण ओलावृष्टि तूफान के कारण यह उड़ने में असमर्थ हो गई और जमीन पर गिर पड़ी।


    इंटरनेशनल कॉर्डिनेशन

    सिग्नल गायब होने पर WWF-India ने तुरंत WWF-पाकिस्तान से संपर्क किया. पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे पंजाब प्रांत के खानेवाल जिले से सुरक्षित बरामद कर लिया. फिलहाल वह स्थानीय वल्चर सेंटर में स्वस्थ हो रही है।


    GPS से रीयल-टाइम निगरानी

    अधिकारियों का कहना है कि यह लंबी यात्राएं गिद्धों की अद्भुत दिशा-ज्ञान क्षमता और सहनशक्ति का प्रमाण हैं. माइक्रोचिप और GPS-GSM टेलीमेट्री डिवाइस की मदद से वन विभाग इनकी रीयल-टाइम निगरानी कर पा रहा है. इससे पहले साल 2025 में भी एक यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध कजाकिस्तान तक 4300 किमी की यात्रा कर वापस भारत लौटा था.


    गिद्धों का महत्व

    सिनेरियस गिद्ध एशिया और यूरोप की सबसे बड़ी पक्षी प्रजातियों में से एक है. ये वन ईकोसिस्टम की सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं।

  • गर्मी में त्वचा को मिलेगी राहत, खीरे से बना यह फेस मास्क देगा नैचुरल ग्लो..

    गर्मी में त्वचा को मिलेगी राहत, खीरे से बना यह फेस मास्क देगा नैचुरल ग्लो..

    नई दिल्ली ।गर्मी का मौसम आते ही त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। तेज धूप, गर्म हवाएं, पसीना और धूल-मिट्टी मिलकर चेहरे की प्राकृतिक चमक को कम कर देते हैं, जिससे त्वचा बेजान और थकी हुई नजर आने लगती है। ऐसे समय में लोग अक्सर बाजार में मिलने वाले महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हर बार ये जरूरी नहीं कि वे त्वचा पर अच्छा असर दिखाएं। इसी कारण अब प्राकृतिक और घरेलू उपायों की ओर लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है, जिनमें खीरे से बना फेस मास्क एक आसान और प्रभावी विकल्प माना जा रहा है।

    खीरे में प्राकृतिक रूप से पानी की मात्रा अधिक होती है, जो त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करने में मदद करता है। यह त्वचा को ठंडक देने के साथ-साथ उसे ताजगी भी प्रदान करता है। जब इसे दही और शहद के साथ मिलाकर फेस मास्क के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो इसका असर और भी बेहतर हो जाता है। दही त्वचा की सफाई करने और डेड स्किन हटाने में मदद करता है, जबकि शहद त्वचा में नमी बनाए रखता है और उसे मुलायम बनाता है। इन तीनों सामग्रियों का संयोजन त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और चमकदार बनाने में सहायक होता है।

    इस फेस मास्क को बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है। सबसे पहले एक ताजा खीरा लिया जाता है, जिसे अच्छे से धोकर कद्दूकस कर लिया जाता है। इसके बाद इसमें दही और शहद मिलाकर एक चिकना और संतुलित मिश्रण तैयार किया जाता है। ध्यान रखा जाता है कि मिश्रण न तो ज्यादा पतला हो और न ही ज्यादा गाढ़ा, ताकि इसे चेहरे पर आसानी से लगाया जा सके।

    लगाने से पहले चेहरे को साफ पानी से धोना जरूरी होता है, ताकि त्वचा पर मौजूद गंदगी और तेल हट जाए। इसके बाद तैयार फेस मास्क को चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाया जाता है और लगभग 15 से 20 मिनट तक छोड़ दिया जाता है। सूखने के बाद इसे ठंडे पानी से धो दिया जाता है, जिससे त्वचा में तुरंत ताजगी और ठंडक का एहसास होता है। नियमित रूप से सप्ताह में दो से तीन बार इसका इस्तेमाल करने से त्वचा में धीरे-धीरे निखार देखने को मिलता है।

    खीरे का यह फेस मास्क कई तरह से फायदेमंद माना जाता है। यह त्वचा को ठंडक देता है और धूप से होने वाली टैनिंग को कम करने में मदद करता है। दही त्वचा को साफ और फ्रेश बनाता है, जबकि शहद उसे नमी प्रदान करता है, जिससे त्वचा रूखी नहीं होती। इन सभी तत्वों का संतुलित उपयोग त्वचा को प्राकृतिक रूप से मुलायम, साफ और चमकदार बनाने में सहायक होता है।

    हालांकि, किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले सावधानी रखना जरूरी है। अगर त्वचा संवेदनशील है तो पहले पैच टेस्ट करना बेहतर होता है ताकि किसी भी प्रकार की एलर्जी से बचा जा सके। इसके अलावा आंखों के आसपास इस मास्क का उपयोग नहीं करना चाहिए और हमेशा ताजा सामग्री का ही प्रयोग करना चाहिए ताकि त्वचा को सुरक्षित और सही लाभ मिल सके।