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  • मिडिल ईस्ट तनाव के बीच महंगाई का नया झटका: घरेलू LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में ₹115 की बढ़ोतरी

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच महंगाई का नया झटका: घरेलू LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में ₹115 की बढ़ोतरी


    नई दिल्ली।
    मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत में आम लोगों को महंगाई का एक और झटका लगा है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में करीब 115 रुपये का इजाफा किया गया है। नए रेट 7 मार्च से पूरे देश में लागू कर दिए गए हैं और तेल कंपनियों की वेबसाइट पर भी इन्हें अपडेट कर दिया गया है।

    नई कीमतों के लागू होने के बाद दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर अब 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये का हो गया है। इसी तरह कोलकाता में इसकी कीमत 879 रुपये से बढ़कर 939 रुपये हो गई है। चेन्नई में पहले जहां यह सिलेंडर 868.50 रुपये में मिल रहा था वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 928.50 रुपये हो गई है। मुंबई में भी घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 912.50 रुपये तक पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी के बाद देशभर में करोड़ों परिवारों के घरेलू बजट पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    खास बात यह है कि अप्रैल 2025 के बाद पहली बार घरेलू LPG सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। करीब एक साल तक कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ था लेकिन अब अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पहले से ही महंगाई के दबाव से जूझ रहे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह फैसला खर्च बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

    घरेलू सिलेंडर के साथ साथ कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में करीब 115 रुपये की वृद्धि की गई है। नई कीमतों के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर अब 1883 रुपये में मिलेगा जबकि मुंबई में इसकी कीमत 1835 रुपये हो गई है। कोलकाता में इसका रेट बढ़कर 1990 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं चेन्नई में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2043.50 रुपये हो गई है।

    कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर होटल रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारों पर पड़ सकता है क्योंकि इन जगहों पर बड़े पैमाने पर कमर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में कारोबारियों की लागत बढ़ने की आशंका है जिसका असर आगे चलकर खाने पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है।

    केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले ही कहा था कि भारत के पास ऊर्जा आपूर्ति के कई स्रोत मौजूद हैं और देश में पेट्रोल डीजल या गैस की कोई कमी नहीं है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी सोशल मीडिया पर फैल रही उन खबरों को खारिज किया है जिनमें देश में ईंधन की कमी की बात कही जा रही थी।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े संभावित जोखिमों के बावजूद भारत ने ऊर्जा आयात के कई विकल्प तैयार कर रखे हैं जिससे सप्लाई सामान्य बनी हुई है। हालांकि एलपीजी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है और आने वाले समय में महंगाई को लेकर चर्चा और तेज हो सकती है।

  • गोल्ड मार्केट में उतार चढ़ाव होली के बाद सोना फिसला 24 कैरेट ₹1.62 लाख के करीब..

    गोल्ड मार्केट में उतार चढ़ाव होली के बाद सोना फिसला 24 कैरेट ₹1.62 लाख के करीब..


    नई दिल्ली। होली के बाद सर्राफा बाजार से निवेशकों और खरीदारों के लिए राहत की खबर सामने आई है। घरेलू बाजार में मुनाफावसूली और वैश्विक उतार चढ़ाव के कारण सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत में करीब 4,923 रुपये की कमी आई है। इसके साथ ही सोना घटकर लगभग 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है।

    इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार इससे पहले सोने का भाव करीब 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था। बाजार में गिरावट के बाद अब यह 1.62 लाख रुपये के करीब कारोबार कर रहा है।

    देश के अलग अलग शहरों में भी सोने के दामों में इसी तरह का रुख देखने को मिला। दिल्ली में 24 कैरेट सोना करीब 1,64,650 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना लगभग 1,50,940 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

    मुंबई चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव लगभग 1,64,500 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा जबकि 22 कैरेट सोना करीब 1,50,790 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया। अहमदाबाद और भोपाल में 24 कैरेट सोने का रेट करीब 1,64,550 रुपये और 22 कैरेट सोना लगभग 1,50,840 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    वहीं जयपुर लखनऊ और चंडीगढ़ में 24 कैरेट सोना 1,64,650 रुपये और 22 कैरेट सोना करीब 1,50,940 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। इसके अलावा 18 कैरेट सोने की कीमत भी लगभग 1,23,300 से 1,23,470 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रही।

    सोने के साथ साथ चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। एक किलो चांदी का भाव करीब 18,501 रुपये गिरकर लगभग 2.71 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गया।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली की वजह से आई है। त्योहार के दौरान कीमतों में तेजी आने के बाद निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिक्री शुरू कर दी जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया।

    हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वैश्विक बाजार में सोने का हाजिर भाव करीब 0.8 प्रतिशत बढ़कर 5,176.69 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है। वहीं यूएस गोल्ड फ्यूचर्स लगभग 1 प्रतिशत बढ़कर 5,186.30 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

    इस तेजी की एक बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सोने और चांदी के दाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें कॉमा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति कॉमा आयात शुल्क कॉमा जीएसटी और घरेलू मांग व आपूर्ति जैसे कारक शामिल होते हैं। इसके अलावा लंदन बुलियन मार्केट और कॉमेक्स के रुझान भी भारतीय बाजार को प्रभावित करते हैं।

  • चांदी के दामों में बड़ी गिरावट 36 दिन में ₹1.25 लाख सस्ती 3 दिन में ही ₹29 हजार टूटा भाव

    चांदी के दामों में बड़ी गिरावट 36 दिन में ₹1.25 लाख सस्ती 3 दिन में ही ₹29 हजार टूटा भाव


    नई दिल्ली।भारत में चांदी की कीमतों में इन दिनों भारी उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। वैश्विक बाजार में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव और निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण लगातार तीसरे दिन चांदी के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक चांदी की कीमतों में सिर्फ तीन दिनों के भीतर करीब 29 हजार रुपये की बड़ी गिरावट आई है।

    इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार एक किलो चांदी का भाव 3,489 रुपये टूटकर 2,60,723 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले इसका रेट 2,64,212 रुपये प्रति किलो था। यानी पिछले तीन दिनों में चांदी की कीमतों में कुल मिलाकर 29,125 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है।

    केवल चांदी ही नहीं बल्कि सोने की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली है। 24 कैरेट सोने की कीमत 1,835 रुपये गिरकर 1,58,751 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। इससे पहले 5 मार्च को सोने का भाव 1,60,586 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इस तरह तीन दिनों के दौरान सोना करीब 8,720 रुपये तक सस्ता हो चुका है।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक ऊंचे स्तर पर निवेशकों द्वारा की जा रही मुनाफावसूली इस गिरावट की मुख्य वजह है। जब किसी धातु की कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं तो निवेशक मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बिक्री शुरू कर देते हैं जिससे बाजार में दबाव बढ़ जाता है।

    भारत के प्रमुख शहरों में भी चांदी की कीमतों में गिरावट का असर देखा गया। दिल्ली मुंबई कोलकाता पटना लखनऊ नोएडा जयपुर अहमदाबाद और पुणे जैसे शहरों में 10 ग्राम चांदी का भाव करीब 2,849 रुपये रहा जबकि 100 ग्राम का रेट 28,490 रुपये और एक किलो का भाव लगभग 2,84,900 रुपये के आसपास दर्ज किया गया। वहीं चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में चांदी की कीमत थोड़ी ज्यादा रही जहां 1 किलो का रेट लगभग 2,94,900 रुपये तक पहुंचा।

    वैश्विक बाजार की बात करें तो मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर कीमती धातुओं के बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी की कीमत 83.40 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई है। वहीं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव 0.11 प्रतिशत की हल्की बढ़त के साथ करीब 2,68,569 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता नजर आया।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में भी चांदी के दामों में दबाव बना रहा। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार यहां चांदी का भाव गिरकर लगभग 2,71,700 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है। कारोबारियों का कहना है कि ऊंचे स्तर पर लगातार दूसरे दिन मुनाफावसूली होने से बाजार में कमजोरी बनी हुई है।

    अगर पिछले कुछ हफ्तों का आंकड़ा देखें तो चांदी में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 29 जनवरी 2026 को चांदी की कीमत 3.86 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद से बाजार में लगातार गिरावट आई और केवल 36 दिनों के भीतर चांदी करीब 1,25,210 रुपये सस्ती हो चुकी है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोना और चांदी की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों से प्रभावित होती हैं। इनमें डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति कॉमा आयात शुल्क कॉमा जीएसटी कॉमा अंतरराष्ट्रीय बाजार में धातुओं की मांग और आपूर्ति जैसे कारक शामिल होते हैं।

  • साउथ इंडस्ट्री में गूंजी शादी की शहनाई अल्लू सिरीश ने नयनिका रेड्डी संग लिए सात फेरे

    साउथ इंडस्ट्री में गूंजी शादी की शहनाई अल्लू सिरीश ने नयनिका रेड्डी संग लिए सात फेरे


    नई दिल्ली। साउथ फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों खुशियों का माहौल है। सुपरस्टार अल्लू अर्जुन के छोटे भाई और अभिनेता अल्लू सिरीश ने आखिरकार अपनी लॉन्गटाइम पार्टनर नयनिका रेड्डी के साथ शादी रचा ली है। 38 साल की उम्र में उन्होंने जिंदगी के इस नए सफर की शुरुआत की। दोनों ने 6 मार्च को हैदराबाद में पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ भव्य समारोह में सात फेरे लिए।

    इस शादी में फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति से जुड़ी कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं। अल्लू सिरीश के बड़े भाई अल्लू अर्जुन अपनी पत्नी स्नेहा रेड्डी और बच्चों अयान और अरहा के साथ समारोह में पहुंचे। इसके अलावा साउथ के कई दिग्गज सितारों ने भी नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया।

    मेगास्टार चिरंजीवी भी इस खास मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने कपल को नई जिंदगी की शुभकामनाएं दीं। वहीं तमिल सुपरस्टार सूर्या भी शादी में शामिल हुए और अल्लू सिरीश तथा नयनिका को बधाई दी। अभिनेता राम चरण ब्लैक कुर्ता सेट में अपनी दमदार मौजूदगी के साथ नजर आए और उन्होंने भी समारोह में चार चांद लगा दिए। इसके अलावा नंदमुरी कल्याण राम भी इस शादी में पहुंचे।

    आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम और अभिनेता पवन कल्याण भी अपनी पत्नी अन्ना लेजनेवा के साथ इस ग्रैंड वेडिंग में शामिल हुए और कपल को आशीर्वाद दिया। शादी की कई इनसाइड तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं जिनमें इंडस्ट्री के बड़े सितारे एक साथ नजर आ रहे हैं।

    इस शादी की एक दिलचस्प बात यह भी है कि अल्लू सिरीश और नयनिका ने शादी के लिए वही तारीख चुनी जिस दिन 15 साल पहले अल्लू अर्जुन ने स्नेहा रेड्डी से शादी की थी। यानी अब दोनों भाइयों की शादी की सालगिरह एक ही दिन मनाई जाएगी। इस खास कनेक्शन को फैंस ने भी नोटिस किया और सोशल मीडिया पर इसे लेकर खूब चर्चा हो रही है।

    अगर नयनिका रेड्डी की बात करें तो वह हैदराबाद की एक सफल बिजनेस प्रोफेशनल हैं और एक समृद्ध बिजनेस फैमिली से ताल्लुक रखती हैं। वह करोड़ों के कारोबार से जुड़ी हुई हैं और अब तक काफी हद तक लाइमलाइट से दूर निजी जीवन जीती रही हैं। फिल्म इंडस्ट्री से उनका कोई सीधा संबंध नहीं रहा है।

    हालांकि सगाई की घोषणा के बाद से वह धीरे धीरे सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आने लगीं। प्री वेडिंग फंक्शन्स में उनकी ग्रेसफुल मौजूदगी और पारंपरिक अंदाज ने फैंस का दिल जीत लिया था।

    अब शादी के बाद अल्लू सिरीश और नयनिका रेड्डी की यह जोड़ी सोशल मीडिया पर भी चर्चा में बनी हुई है। फैंस और फिल्मी सितारे दोनों को नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं और उनकी शादी की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं

  • MP में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के संकेत: स्टाइपेंड को लेकर जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज, जस्टिस मार्च

    MP में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के संकेत: स्टाइपेंड को लेकर जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज, जस्टिस मार्च


    भोपाल ।मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका के बीच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज हो गया है। स्टाइपेंड में बढ़ोतरी और लंबित भुगतान को लेकर नाराज रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध का नया चरण शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर काली पट्टी बांधकर ड्यूटी कर रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व Junior Doctors Association जूडा कर रही है जिसने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो सोमवार से नॉन इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा।

    आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र प्रदेश की राजधानी Bhopal सहित अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज बन गए हैं। जूडा के पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार के 7 जून 2021 के आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से CPE के आधार पर स्टाइपेंड में बढ़ोतरी लागू होनी थी और साथ ही लंबित एरियर का भुगतान भी किया जाना था। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। डॉक्टरों का आरोप है कि बार बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद भुगतान और संशोधन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है।

    जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड में देरी केवल आर्थिक समस्या नहीं है बल्कि इसका असर उनके मानसिक और पेशेवर मनोबल पर भी पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेजों में लंबे समय तक ड्यूटी करने और मरीजों की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद उन्हें अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। इसी वजह से अब उन्होंने चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति अपनाई है।

    जूडा के अनुसार विरोध की शुरुआत काली पट्टी बांधकर काम करने से की गई है ताकि मरीजों की सेवा भी जारी रहे और सरकार तक उनकी आवाज भी पहुंचे। इसके बाद रविवार को डॉक्टर जस्टिस मार्च निकालेंगे जिसमें बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टर शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होंगे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे। इस मार्च का उद्देश्य शासन और प्रशासन को यह संदेश देना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और अब इस पर तुरंत निर्णय लिया जाना चाहिए।

    डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इसके बाद भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो सोमवार से नॉन इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। इसमें ओपीडी रूटीन चेकअप और सामान्य चिकित्सा सेवाएं शामिल होंगी। हालांकि जूडा ने भरोसा दिलाया है कि इमरजेंसी सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में भी जूनियर डॉक्टर इसी मुद्दे को लेकर विरोध जता चुके हैं लेकिन स्टाइपेंड संशोधन का मामला अब भी अटका हुआ है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।

  • पुलिया से 20 फीट नीचे गिरी गर्भवती महिला, अस्पताल पहुंचते ही दिया बच्ची को जन्म; हादसे के बाद भी मां-बेटी सुरक्षित

    पुलिया से 20 फीट नीचे गिरी गर्भवती महिला, अस्पताल पहुंचते ही दिया बच्ची को जन्म; हादसे के बाद भी मां-बेटी सुरक्षित


    खरगोन । मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गंभीर सड़क हादसे के बाद भी मां और नवजात की जान सुरक्षित बच गई। जिले के भगवानपुरा क्षेत्र में स्थित सिरवेल के पास शुक्रवार को एक पुलिया पर बड़ा हादसा हो गया। एक अज्ञात बाइक की टक्कर के बाद बाइक सवार दंपती पुलिया से करीब 20 फीट नीचे जा गिरे। हादसे में गर्भवती महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही उसने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।

    मिली जानकारी के अनुसार दंपती बाइक से अस्पताल की ओर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि महिला गर्भवती थी और उसकी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी, इसलिए परिवार के सदस्य उसे अस्पताल लेकर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में सिरवेल के पास बनी पुलिया पर सामने से आ रही एक तेज रफ्तार बाइक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक का संतुलन बिगड़ गया और दंपती सीधे पुलिया से नीचे जा गिरे।

    करीब 20 फीट नीचे गिरने के कारण दोनों को चोटें आईं, वहीं गर्भवती महिला की हालत को लेकर आसपास मौजूद लोगों में चिंता बढ़ गई। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और घायल दंपती की मदद की। स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए महिला को उठाकर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।

    अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने महिला का प्राथमिक उपचार शुरू किया। इसी दौरान महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने तुरंत जरूरी इंतजाम किए और कुछ ही देर में महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। यह खबर सुनते ही वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली, क्योंकि हादसे की गंभीरता को देखते हुए सभी को मां और बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंता थी।

    डॉक्टरों के अनुसार हादसे के बावजूद मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं। फिलहाल महिला का अस्पताल में उपचार चल रहा है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। परिवार के सदस्यों ने भी राहत जताई है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी मां और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं।

    इस घटना के बाद पूरा मामला इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद महिला ने सुरक्षित बच्ची को जन्म दिया। वहीं पुलिस अज्ञात बाइक चालक की तलाश में जुटी हुई है और मामले की जांच की जा रही है।

  • ईरान-इजराइल युद्ध का असर रसोई तक: LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में भी बड़ी बढ़ोतरी

    ईरान-इजराइल युद्ध का असर रसोई तक: LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में भी बड़ी बढ़ोतरी


    जबलपुर । मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Iran–Israel conflict का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव के बीच देश में रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल कंपनियों ने घरेलू Liquefied Petroleum Gas (LPG) cylinder की कीमतों में 60 रुपये का इजाफा किया है, जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 115 रुपये तक बढ़ा दिए गए हैं। नई कीमतें तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई हैं और तेल कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपडेट कर दी गई हैं।

    इस बढ़ोतरी के बाद आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी चिंता बन सकती है, क्योंकि रसोई गैस पहले ही घरेलू बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से घरों का मासिक खर्च बढ़ना तय है।

    मध्यप्रदेश की बात करें तो यहां गैस सिलेंडर की कीमतें देश के कई बड़े शहरों से ज्यादा हो गई हैं। प्रदेश के शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद अब इसकी कीमत करीब 920 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 114 रुपये का इजाफा हुआ है, जिसके बाद इसकी कीमत 2100 रुपये से भी ज्यादा हो गई है।

    दिलचस्प बात यह है कि कई मामलों में मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं को देश के बड़े महानगरों से भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। उदाहरण के तौर पर New Delhi और Mumbai जैसे महानगरों की तुलना में मध्यप्रदेश के कई शहरों में गैस सिलेंडर महंगा मिल रहा है। परिवहन लागत और टैक्स संरचना के कारण अक्सर राज्यों में गैस के दामों में अंतर देखने को मिलता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो आने वाले समय में ईंधन और ऊर्जा से जुड़ी अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। इसका असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी देखने को मिल सकता है।

    कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने का असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर भी पड़ने की संभावना है। इससे खाने पीने की चीजों की कीमतों में भी धीरे धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। यानी गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी सिर्फ घर की रसोई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बाजार में भी महंगाई का दबाव बढ़ा सकती है।

    फिलहाल नई दरें लागू हो चुकी हैं और उपभोक्ताओं को अब बढ़ी हुई कीमतों पर ही गैस सिलेंडर खरीदना होगा। ऐसे में मिडिल ईस्ट की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि वहां के हालात का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।

  • ट्रोलिंग के बीच अदनान शेख का बड़ा बयान पत्नी ने शादी से पहले खुद बदला धर्म किसी पर दबाव नहीं

    ट्रोलिंग के बीच अदनान शेख का बड़ा बयान पत्नी ने शादी से पहले खुद बदला धर्म किसी पर दबाव नहीं

    नई दिल्ली।फेमस यूट्यूबर और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर अदनान शेख एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा विवाद है। दरअसल अदनान की शादी के समय यह आरोप लगे थे कि उन्होंने अपनी हिंदू गर्लफ्रेंड का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया और शादी के बाद उन्हें हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया। अब इन सभी आरोपों पर अदनान शेख ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है और अपनी बात सामने रखी है।

    हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अदनान शेख ने कहा कि किसी का धर्म बदलवाने का अधिकार उनके पास नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी पत्नी ने शादी से पहले ही अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया था। अदनान के अनुसार भारत एक ऐसा देश है जहां हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने की पूरी आजादी है और किसी को भी जबरदस्ती किसी पर फैसला थोपने का अधिकार नहीं है।

    अदनान ने कहा कि लोग बिना पूरी सच्चाई जाने कई तरह की बातें बना लेते हैं। उन्होंने बताया कि उनके आसपास भी ऐसे कई लोग हैं जिनके इंटरफेथ मैरिज हैं। कई परिवारों में पति हिंदू और पत्नी मुस्लिम हैं या फिर इसके उलट भी है। ऐसे में हर रिश्ते को शक की नजर से देखना सही नहीं है। अदनान का कहना है कि यह सब लोगों की छोटी सोच को दर्शाता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि प्यार और धर्म दोनों अलग चीजें हैं और दोनों का अपना महत्व होता है। किसी भी रिश्ते में सबसे जरूरी आपसी समझ और सम्मान होता है। उनके मुताबिक उन्होंने कभी भी अपनी पत्नी पर कोई दबाव नहीं डाला।

    दरअसल अदनान की पत्नी हिजाब पहनती हैं और सार्वजनिक रूप से अपना चेहरा भी नहीं दिखातीं। शादी के दौरान भी उन्होंने मास्क पहनकर ही अपना चेहरा छिपाकर रखा था। इसी वजह से सोशल मीडिया पर कई लोगों ने आरोप लगाया था कि अदनान ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया है।

    हालांकि अदनान का कहना है कि यह पूरी तरह उनकी पत्नी का व्यक्तिगत फैसला है। वह अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती हैं और इस फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक अदनान की पत्नी का असली नाम रिद्धि बताया जाता है। धर्म परिवर्तन के बाद उन्होंने अपना नाम आयशा शेख रख लिया था। दोनों की शादी साल 2024 में हुई थी और अब वे एक बच्चे के माता पिता भी बन चुके हैं।

    अदनान शेख की बात करें तो वह सोशल मीडिया की दुनिया का जाना माना नाम हैं। यूट्यूब पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं और वे कई म्यूजिक वीडियो और रियलिटी शोज में भी नजर आ चुके हैं। हाल ही में वह द 50 शो को लेकर सुर्खियों में हैं और इससे पहले वह बिग बॉस ओटीटी 3 में भी दिखाई दे चुके हैं। फिलहाल अदनान का कहना है कि उनकी और उनकी पत्नी की जिंदगी खुशहाल है और वे लोगों की आलोचनाओं के बजाय अपने परिवार और काम पर ध्यान देना चाहते हैं।

  • तेल महंगा बेरोजगारी बढ़ी निवेशकों में डर अमेरिकी बाजार में भारी बिकवाली डाउ जोंस गिरा

    तेल महंगा बेरोजगारी बढ़ी निवेशकों में डर अमेरिकी बाजार में भारी बिकवाली डाउ जोंस गिरा

    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ती तनातनी के बीच अमेरिकी शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की चिंता और अनिश्चितता के कारण 6 मार्च को कारोबार के अंत में प्रमुख अमेरिकी सूचकांक डाउ जोंस 453 अंक गिरकर 47,501 के स्तर पर बंद हुआ।

    केवल डाउ जोंस ही नहीं बल्कि अन्य प्रमुख इंडेक्स भी दबाव में नजर आए। टेक्नोलॉजी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला नैस्डैक कंपोजिट 361 अंक यानी करीब 1.59 प्रतिशत गिरकर 22,387 पर बंद हुआ। वहीं व्यापक बाजार का संकेत देने वाला एस एंड पी 500 इंडेक्स 90 अंक की गिरावट के साथ 6,740 के स्तर पर आ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों में बढ़ती अनिश्चितता और कमजोर आर्थिक संकेतकों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया है।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर भी देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई और कुछ समय के लिए 91 डॉलर से ऊपर भी चली गई। यह अप्रैल 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है और यही कारण है कि निवेशक बाजार में सतर्क रुख अपना रहे हैं।

    इसी बीच अमेरिका से आए कमजोर रोजगार आंकड़ों ने भी निवेशकों की चिंता को बढ़ा दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले महीने रोजगार वृद्धि उम्मीद से कम रही। गैर कृषि क्षेत्र में नौकरियों के अवसर घटे हैं जबकि बेरोजगारी दर बढ़कर 4.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है। विश्लेषकों का मानना है कि श्रम बाजार की कमजोरी आर्थिक गतिविधियों में संभावित सुस्ती का संकेत हो सकती है।

    इन परिस्थितियों के बीच बाजार में स्टैगफ्लेशन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। स्टैगफ्लेशन वह स्थिति होती है जब आर्थिक विकास धीमा पड़ जाता है लेकिन महंगाई लगातार बढ़ती रहती है। बढ़ती तेल कीमतें और कमजोर रोजगार आंकड़े इस आशंका को और मजबूत कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति बन सकती है।

    इसके साथ ही अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि इस साल फेडरल रिजर्व कई बार ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। लेकिन महंगाई बढ़ने की संभावना के कारण अब दरों में कटौती सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें शेयर बाजार के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं क्योंकि इससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हो जाती है।

    जहां अमेरिकी बाजारों में दबाव देखने को मिला वहीं एशियाई बाजारों में मिश्रित रुख रहा। जापान दक्षिण कोरिया और हांगकांग के प्रमुख शेयर सूचकांक हल्की बढ़त के साथ बंद हुए।

    वैश्विक संकेतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा गिरकर 78,919 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,450 के स्तर पर आ गया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है और महंगाई की आशंका मजबूत होती है तो निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। ऐसे माहौल में शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है।
  • ‘केरल स्टोरी-2’ पर राहुल गांधी की टिप्पणी, बोले- ज्यादा लोग नहीं देख रहे, यह अच्छी बात

    ‘केरल स्टोरी-2’ पर राहुल गांधी की टिप्पणी, बोले- ज्यादा लोग नहीं देख रहे, यह अच्छी बात


    नई दिल्ली। राहुल गांधी ने फिल्म The Kerala Story 2 को लेकर बड़ा बयान दिया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह फिल्म ज्यादा लोग नहीं देख रहे हैं और उनके मुताबिक यह “अच्छी खबर” है।

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने यह बात Marian College Kuttikkanam में छात्रों से बातचीत के दौरान कही।

    चर्चा के दौरान एक छात्र ने फिल्मों को प्रचार के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर सवाल पूछा था, जिसके जवाब में राहुल गांधी ने अपनी राय रखी।

    ‘फिल्म खाली-खाली लग रही है’

    राहुल गांधी ने कहा कि अच्छी बात यह है कि केरल स्टोरी-2 को लेकर दर्शकों में खास रुचि दिखाई नहीं दे रही है। उनके मुताबिक यह दिखाता है कि कुछ लोग केरल की परंपराओं और संस्कृति को ठीक से समझ नहीं पाए हैं।

    उन्होंने कहा कि आज के समय में फिल्म, टेलीविजन और मीडिया को एक तरह से “हथियार” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। राहुल के अनुसार इन माध्यमों का उपयोग लोगों को बदनाम करने, समाज में विभाजन पैदा करने और कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

    शौक और निजी जीवन पर भी की बात

    छात्रों के सवालों के जवाब में राहुल गांधी ने अपने निजी शौकों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्हें पढ़ना पसंद है और वे जिन विषयों में रुचि रखते हैं, उन पर काफी अध्ययन करते हैं।

    राहुल गांधी ने कहा कि वे बहुत ज्यादा फिल्में नहीं देखते, लेकिन शतरंज खेलना, मार्शल आर्ट्स करना, तैराकी और दौड़ना उन्हें पसंद है और फिट रहने के लिए नियमित व्यायाम भी करते हैं।

    केरल से बहुत कुछ सीखा

    राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने करीब पांच साल तक संसद में वायनाड का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन फिर भी केरल को पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं है। हालांकि वहां के लोगों से उन्होंने बहुत कुछ सीखा।

    उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे पहली बार वहां पहुंचे थे, तब एक बड़ी भूस्खलन त्रासदी हुई थी। उस समय लोगों ने जिस तरह एक-दूसरे की मदद की, उससे वे काफी प्रभावित हुए।

    राहुल के अनुसार केरल की परंपराएं और सामाजिक मूल्य बेहद मजबूत हैं।

    शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

    राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति किसी खास विचारधारा के आधार पर की जा रही है। उनके मुताबिक शिक्षा को किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं होना चाहिए।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत अभी संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के स्तर तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को एआई क्षेत्र में आगे बढ़ना है तो देश को अपने डेटा पर मजबूत नियंत्रण रखना होगा।
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