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  • ईरान ने तुर्की की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, ईरानी राजदूत तलब

    ईरान ने तुर्की की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, ईरानी राजदूत तलब


    अंकारा। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक Iran ने बुधवार को Turkey की दिशा में एक बैलिस्टिक मिसाइल दाग दी। हालांकि NATO की एयर डिफेंस प्रणाली ने मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। इस घटना के बाद तुर्की में हड़कंप मच गया और इसे युद्ध में नाटो की पहली प्रत्यक्ष एंट्री के रूप में देखा जा रहा है।

    नाटो की प्रवक्ता Allison Hart ने बयान जारी कर कहा कि संगठन तुर्की को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करता है और अपने सभी सहयोगी देशों के साथ मजबूती से खड़ा है।

    इराक और सीरिया के एयरस्पेस से गुजरी मिसाइल

    तुर्की के रक्षा मंत्रालय के अनुसार ईरान की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल Iraq और Syria के हवाई क्षेत्र से गुजरते हुए तुर्की की ओर बढ़ रही थी। इससे पहले कि वह लक्ष्य तक पहुंचती, पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में तैनात नाटो एयर डिफेंस सिस्टम ने उसे मार गिराया।

    तुर्की प्रेसिडेंसी के कम्युनिकेशन निदेशालय ने बताया कि इंटरसेप्टर का मलबा देश के दक्षिणी प्रांत Hatay Province में गिरा। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    रणनीतिक सैन्य ठिकानों के पास गिरा मलबा

    जिस इलाके में मिसाइल का मलबा गिरा, वह तुर्की के प्रमुख सैन्य अड्डे Incirlik Air Base से लगभग 60 मील दूर बताया जा रहा है। वहीं तुर्की के Kürecik क्षेत्र में नाटो का एक महत्वपूर्ण अर्ली-वॉर्निंग रडार सिस्टम भी मौजूद है, जो बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा माना जाता है।

    तुर्की ने ईरानी राजदूत को किया तलब

    घटना के बाद तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने अपने ईरानी समकक्ष Abbas Araghchi से बातचीत कर कड़ी आपत्ति जताई। इसके साथ ही तुर्की ने Iran के राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब कर घटना पर जवाब मांगा।

    तुर्की के अधिकारियों ने चेतावनी दी कि देश के खिलाफ किसी भी दुश्मनी भरे कदम का जवाब देने का अधिकार उनके पास सुरक्षित है।

    विश्लेषकों का मानना है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो यह संघर्ष और ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व और यूरोप की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
  • ईरान की धरती पर नहीं उतरेंगे अमेरिकी सैनिक? जानिए वजह

    ईरान की धरती पर नहीं उतरेंगे अमेरिकी सैनिक? जानिए वजह


    वाशिंगटन। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए व्यापक हवाई हमलों के बाद मध्य पूर्व में युद्ध भड़क गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरानी जनता के लिए ‘आजादी’ बताया है। आसमान से बरसती मिसाइलों और भयानक बमबारी के बीच ट्रंप का ‘एंडगेम’ यानी अंतिम लक्ष्य बिल्कुल साफ हो चुका है- ईरान में पूरी तरह से सत्ता परिवर्तन। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के असली लक्ष्य को हासिल करना- बिना जमीनी सेना के लगभग असंभव है।

    इस संघर्ष ने अपने शुरुआती दिनों में ही पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। शनिवार तड़के हुए अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई शीर्ष अधिकारी और सैकड़ों नागरिक मारे गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों, अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। इराक स्थित ईरान-समर्थित गुटों और लेबनान के हिज्बुल्लाह ने भी युद्ध में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान पर जमीनी हमले की योजना की भी खबरें हैं।
    क्या केवल हवाई हमलों से सत्ता परिवर्तन संभव है?

    राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी जनता से अपील करते हुए कहा है- जब हम अपना काम खत्म कर लेंगे, तो अपनी सरकार पर कब्ब्जा कर लेना। यह आपकी होगी। हालांकि, विशेषज्ञ इस रणनीति पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

    अल-जजीरा से बात करते हुए स्टिम्सन सेंटर थिंक टैंक के केली ग्रीको ने कहा कि जमीनी सेना के बिना इतना बड़ा राजनीतिक बदलाव लाना लगभग असंभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप हवाई हमलों की ताकत को लेकर कुछ ज्यादा ही मुग्ध हो गए हैं। सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी के मैथ्यू डस ने स्पष्ट किया कि इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहां केवल हवाई हमलों से सत्ता परिवर्तन हुआ हो। उन्होंने 2011 के लीबिया युद्ध का उदाहरण दिया, जहां नाटो के हवाई हमलों के बावजूद मुअम्मर गद्दाफी को हटाने के लिए जमीनी स्तर पर विद्रोहियों को ही लड़ना पड़ा था।
    हालिया रॉयटर्स सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 25% अमेरिकी इस युद्ध का समर्थन कर रहे हैं। इसकी तुलना में 2003 के इराक युद्ध को शुरुआत में लगभग 55% जनसमर्थन प्राप्त था। डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल ने एक खुफिया ब्रीफिंग के बाद चिंता व्यक्त की है कि अमेरिका ईरान में जमीनी सेना उतारने की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बहुत अधिक बढ़ जाएगा।
    ट्रंप का ‘मास्टरप्लान’: हवा और समंदर से तबाही

    ट्रंप प्रशासन की रणनीति इराक या अफगानिस्तान जैसी नहीं है, जहां लाखों सैनिक भेजकर कब्ज़ा किया गया था। ट्रंप का दांव है कि आसमान और समंदर से ही इतना भयानक प्रहार किया जाए कि ईरान का पूरा सिस्टम ताश के पत्तों की तरह ढह जाए। इस रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत है।

    ट्रंप का मानना है कि नेतृत्व को खत्म करने से व्यवस्था अपने आप पंगु हो जाएगी। अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता, उसकी नेवी और उसके परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर रहा है ताकि ईरान के पास पलटवार की कोई ताकत ही न बचे।
    ‘बूट्स ऑन द ग्राउंड’ से परहेज क्यों?

    ट्रंप हमेशा से अमेरिका को दूसरे देशों के ‘अंतहीन युद्धों’ में फंसाने के खिलाफ रहे हैं। किसी देश में पैदल सेना भेजने का मतलब है अमेरिकी सैनिकों की लाशें वापस आना और खरबों डॉलर का खर्च। ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ का नारा इसके सख्त खिलाफ है।

    ट्रंप खुलेआम ईरानी जनता से कह रहे हैं कि वे इस मौके का फायदा उठाएं और खुद अपनी सरकार को उखाड़ फेंकें। ट्रंप को उम्मीद है कि भारी बमबारी और बदहाली से टूटकर ईरानी जनता खुद बगावत कर देगी और अमेरिका को सेना उतारने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
    ट्रंप प्रशासन के भीतर और बाहर अलग-अलग सुर

    इस युद्ध के उद्देश्यों को लेकर अमेरिकी नेताओं और प्रशासन के बयानों में काफी विरोधाभास देखने को मिल रहा है। विदेश मंत्री मार्क रूबियो ने कहा कि लक्ष्य ईरान के परमाणु और ड्रोन कार्यक्रमों तथा नौसेना को नष्ट करना है ताकि वह विदेशी हमलों से न बच सके।

    वहीं रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं होगा; हम स्पष्ट उद्देश्यों के साथ काम कर रहे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा, ‘यह एक अवैध युद्ध है जो झूठ पर आधारित है। ट्रंप प्रशासन के पास ईरान को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं है।’

    विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध की आवश्यकता और इसके सटीक लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से जनता के सामने नहीं रखा है। यह संघर्ष अब उस त्वरित सैन्य कार्रवाई से कहीं अधिक लंबा खिंचता दिख रहा है, जिसके लिए ट्रंप जाने जाते हैं, जैसे जनवरी में वेनेज़ुएला के निकोलस मादुरो का अपहरण या जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले।

  • थाईलैंड की अनोखी शादी : एक ही मंडप में दो दूल्हों संग दुल्हन ने रचाई शादी

    थाईलैंड की अनोखी शादी : एक ही मंडप में दो दूल्हों संग दुल्हन ने रचाई शादी


    बैंकॉक। शादी-ब्याह के इस सीजन में आपने कई तरह के विवाह समारोह देखे होंगे, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी शादी की तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। इस अनोखी शादी में एक दुल्हन ने एक ही मंडप में दो दूल्हों के साथ विवाह रचा लिया।

    यह अनोखा मामला Thailand का बताया जा रहा है, जहां 37 वर्षीय महिला Duangduan Ketsaro ने दो ऑस्ट्रियाई पुरुषों से शादी की। बताया जाता है कि डुआंगडुआन पहले सिंगर और सॉन्गराइटर रह चुकी हैं। शादी का समारोह सादा लेकिन पारंपरिक तरीके से आयोजित किया गया, जिसमें परिवार और करीबी दोस्त मौजूद रहे। समारोह की तस्वीरें सामने आने के बाद यह शादी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

    पहले एक से प्यार, फिर दूसरे से भी बना रिश्ता

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डुआंगडुआन की मुलाकात सबसे पहले ऑस्ट्रिया के रिटायर्ड पुलिस अधिकारी Roman से थाईलैंड के मशहूर पर्यटन शहर Pattaya में हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच रिश्ता गहरा हुआ और वे करीब पांच साल तक साथ रहे।

    कुछ समय बाद उनकी मुलाकात Macky नाम के दूसरे ऑस्ट्रियाई युवक से हुई। दोनों के बीच भी प्यार हो गया। डुआंगडुआन के मुताबिक उन्होंने अपने इस रिश्ते को कभी छिपाया नहीं और तीनों ने आपसी समझ से भविष्य को लेकर खुलकर बातचीत की।

    परिवार की सहमति से हुआ विवाह

    डुआंगडुआन ने बताया कि शादी से पहले उन्होंने अपने माता-पिता और बच्चों से भी सलाह ली थी।

    उनकी पहले की शादी से तीन बेटियां हैं और वे नानी भी बन चुकी हैं।

    उन्होंने बताया कि संगीत करियर में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्हें आर्थिक और व्यक्तिगत संघर्षों का सामना करना पड़ा। परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए उन्होंने पटाया में काम शुरू किया, जहां उनकी मुलाकात पहले रोमन और फिर मैकी से हुई।

    समय के साथ दोनों पुरुष न केवल उनकी जिंदगी का हिस्सा बने, बल्कि परिवार की जिम्मेदारियों में भी साथ देने लगे। डुआंगडुआन के अनुसार, उनके माता-पिता और बच्चे भी इस शादी से खुश हैं।

  • अमेरिका नहीं चाहता भारत बने ताकतवर, ईरानी अधिकारी का बड़ा आरोप

    अमेरिका नहीं चाहता भारत बने ताकतवर, ईरानी अधिकारी का बड़ा आरोप

    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भारत में ईरानी सुप्रीम लीडर के विशेष प्रतिनिधि Abdul Majid Hakim Elahi ने कहा कि अमेरिका अपने वैश्विक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए दुनिया में जानबूझकर युद्ध जैसी स्थितियां पैदा करता है। उनका दावा है कि ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष के पीछे भी अमेरिका की यही रणनीति है, ताकि भारत और चीन जैसे देशों को उभरने से रोका जा सके।

    खास बातचीत में इलाही ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि भारत या चीन जैसे देश वैश्विक ताकत के रूप में सामने आएं। उनके मुताबिक, अमेरिका की कोशिश रहती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसकी ताकत को कोई चुनौती न दे और इसी वजह से वह विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध की स्थितियां पैदा करता है।

    भविष्य में भारत भी होगा बड़ी ताकत

    इलाही ने कहा कि आने वाले समय में भारत, चीन, रूस और अमेरिका दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में शामिल होंगे। हालांकि, उनका आरोप है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर अपनी ताकत को साझा नहीं करना चाहता और इसी कारण वह वैश्विक स्तर पर टकराव की स्थितियां बनाए रखता है।

    ईरान ने नहीं, अमेरिका ने शुरू किया संघर्ष

    ईरानी अधिकारी ने यह भी कहा कि मौजूदा युद्ध की शुरुआत ईरान ने नहीं की, बल्कि अमेरिका और इजरायल ने सैन्य कार्रवाई कर इसे शुरू किया। इससे पहले ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी Ali Larijani ने भी कहा था कि ईरान केवल अपनी रक्षा कर रहा है। उनके अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरानी नागरिकों और ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिसके जवाब में ईरान प्रतिक्रिया दे रहा है।

    लारिजानी ने यह भी कहा कि चूंकि संघर्ष की शुरुआत अमेरिका की ओर से हुई है, इसलिए इसे खत्म करने की जिम्मेदारी भी उसी की है।

    लंबा खिंच सकता है संघर्ष

    इस बीच विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य ढांचे और नौसैनिक अड्डों पर किए गए हमलों के बाद यह संघर्ष लंबा चल सकता है। इन हमलों में ईरान के कुछ वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने की खबरें भी सामने आई हैं।

    जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत होने और कई अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

  • दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान में UAE के तीन शहर

    दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान में UAE के तीन शहर

    नई दिल्‍ली। मध्य पूर्व में पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। इस संघर्ष का प्रभाव संयुक्त अरब अमीरात के शानदार शहरों अबू धाबी और दुबई तक भी पहुंच रहा है, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित ठिकाने और वैश्विक संघर्षों से अलग-थलग माना जाता रहा है।

    मध्य पूर्व में पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। इस संघर्ष का प्रभाव संयुक्त अरब अमीरात के शानदार शहरों अबू धाबी और दुबई तक भी पहुंच रहा है, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित ठिकाने और वैश्विक संघर्षों से अलग-थलग माना जाता रहा है। दरअसल, अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियानों में ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों और अमेरिकी सेना के ठिकानों सहित पूरे क्षेत्र में जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।

    दुबई तक मिसाइल और ड्रोन हमलों की पहुंच के साथ ही वैश्विक संघर्षों से दुनिया के कई स्थानों के अछूते न रहने की चिंताएं बढ़ गई हैं। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी तनाव के बीच, यहां दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित शहरों की सूची दी गई है। यह सूची Numbeo द्वारा तैयार की गई है (Safety Index 2026 के आधार पर)।
    दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित शहर

    किंगदाओ (किंगडाओ), शेडोंग, चीन
    अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात
    दोहा, कतर
    शारजाह, संयुक्त अरब अमीरात
    दुबई, संयुक्त अरब अमीरात
    ताइपे, ताइवान
    मनामा, बहरीन
    मस्कट, ओमान
    द हेग (डेन हाग), नीदरलैंड्स
    आइंडहोवन, नीदरलैंड्स

    गौरतल है कि Numbeo का डेटा वेबसाइट पर आने वाले आगंतुकों द्वारा दिए गए सर्वेक्षणों के आधार पर तैयार किया जाता है, जो स्थापित वैज्ञानिक और सरकारी सर्वेक्षणों की तरह संरचित होते हैं। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात खुद दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित देशों की सूची में शामिल नहीं है।

    इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा जारी ग्लोबल पीस इंडेक्स (2025) के अनुसार, दुनिया के 10 सबसे शांतिपूर्ण (सुरक्षित) देश निम्नलिखित हैं…
    दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित देश

    आइसलैंड: ग्लोबल पीस इंडेक्स में सबसे ऊपर, स्कोर 1.10 (लगभग)
    आयरलैंड: स्कोर 1.26
    न्यूजीलैंड: स्कोर 1.28
    ऑस्ट्रिया: स्कोर 1.29
    स्विट्जरलैंड: स्कोर 1.29
    सिंगापुर: स्कोर 1.36
    पुर्तगाल: स्कोर 1.37
    डेनमार्क: स्कोर 1.39
    स्लोवेनिया: स्कोर 1.409 (लगभग)
    फिनलैंड: स्कोर 1.42 (लगभग)

    बता दें कि यह वैश्विक शांति सूचकांक 23 मात्रात्मक और गुणात्मक संकेतकों पर आधारित है, जिन्हें 1-5 के पैमाने पर भारित किया जाता है। स्कोर जितना कम, देश उतना ही अधिक शांतिपूर्ण और सुरक्षित माना जाता है। यह सूचकांक विश्व की 99.7 प्रतिशत आबादी को कवर करता है और उच्च सम्मानित स्रोतों से डेटा लेकर तैयार किया जाता है।

  • गोविंदा का छलका दर्द: बोले- "बदनामी हर बड़े एक्टर का हिस्सा", विरार वाले अंदाज में जब दी थी धमकियां देने वालों को मात!

    गोविंदा का छलका दर्द: बोले- "बदनामी हर बड़े एक्टर का हिस्सा", विरार वाले अंदाज में जब दी थी धमकियां देने वालों को मात!


    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के नंबर 1अभिनेता गोविंदा इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ और पुराने विवादों को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल ही में सिद्धार्थ कनन को दिए एक विशेष इंटरव्यू में गोविंदा ने अपने जीवन के उन पहलुओं पर खुलकर बात की, जिनसे उनके फैंस अब तक अनजान थे। गोविंदा ने बड़े ही बेबाक अंदाज में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसा वक्त जरूर आता है, जब लगभग हर बड़े कलाकार को कड़वी आलोचनाओं और सोची-समझी बदनामी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इसे इंडस्ट्री का एक कड़वा दस्तूर बताया।

    बदनामी पर गोविंदा का दार्शनिक अंदाज
    जब गोविंदा से उनकी छवि को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही गहराई से जवाब दिया। गोविंदा ने कहा कि ऐसा कभी नहीं होता कि ईश्वर ने आपको किसी विशेष प्रतिभा या सफलता से नवाजा हो और दुनिया में आपकी जबरदस्ती बदनामीन की जाए। अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकारों-अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना और आमिर खान का उदाहरण दिया। गोविंदा के अनुसार, इन महानायकों ने भी अपने करियर के चरम पर भारी आलोचनाएं और बदनामी झेली है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक बुरा ‘फेज’ होता है और उस कठिन समय से आप खुद को कैसे बाहर निकालते हैं, वही असली खेल है।

    कब जरूरी है पलटवार करना?
    अक्सर शांत रहने वाले गोविंदा ने स्पष्ट किया कि हमेशा हर बात पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं होता, लेकिन आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए कभी-कभी बोलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर आप चुप रहेंगे, तो लोग आपको ही गलत समझ लेंगे। ऐसे में सामने वाले को उसकी ही भाषा में जवाब देना अनिवार्य हो जाता है।इसी संदर्भ में उन्होंने एक बेहद हैरान कर देने वाला किस्सा साझा किया। गोविंदा ने बताया कि एक बार एक म्यूजिक डायरेक्टर के भाई उनके पास आए थे। उस शख्स को लगा कि गोविंदा का करियर अब खत्म हो चुका है और वह ‘फ्लॉप’ हो गए हैं। वह शख्स गोविंदा को धमकी देने लगा।

    विरार का अंदाज और वो धमकी
    गोविंदा ने उस वाकये को याद करते हुए बताया कि उन्होंने उस व्यक्ति को वहीं रोक दिया और कहा, सर, ये धमकी तो मैं तब भी नहीं सहता था जब मैं विरार के छोटे से कमरे में रहता था। जूता मारूंगा खींच के, सब भूल जाओगे! अभी उठो और बाहर निकलो।गोविंदा ने आगे उस शख्स को चेतावनी देते हुए कहा कि जो तुम आज मेरे साथ करने की कोशिश कर रहे हो, याद रखना कल को यह तुम्हारे साथ भी हो सकता है।

    लेट आने के आरोपों पर सफाई

    इंटरव्यू के दौरान गोविंदा ने उन आरोपों पर भी नाराजगी जताई जो अक्सर उनकी अनुशासनहीनता या सेट पर देरी से आने को लेकर लगाए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक दौर ऐसा था जब उनके पास फिल्मों का इतना अंबार था कि हर जगह समय पर पहुँचना नामुमकिन था। हालांकि, उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वे इतने टैलेंटेड थे कि जो डायलॉग दूसरे कलाकार 6-6 घंटे रिहर्सल करके बोलते थे, वे उसे एक बार में ही परफेक्ट बोलकर निकल जाते थे। आज भी उनके फैंस उनके इसी हुनर के कायल हैं और उनकी पत्नी सुनीता के साथ चल रहे विवादों के बीच भी उनका पूरा समर्थन कर रहे हैं।

  • न्यूजीलैंड के बल्लेबाज फिन एलन ने जड़ा टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास का सबसे तेज शतक, बनाए 5 बड़े रिकॉर्ड्स

    न्यूजीलैंड के बल्लेबाज फिन एलन ने जड़ा टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास का सबसे तेज शतक, बनाए 5 बड़े रिकॉर्ड्स


    नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के स्टार सलामी बल्लेबाज फिन एलन ने कोलकाता के ईडन गार्डन्स में साउथ अफ्रीका के गेंदबाजों को बुरी तरह हरा दिया। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका ने न्यूजीलैंड के सामने 170 रनों का लक्ष्य रखा, जिसे कीवी टीम ने मात्र 12.5 ओवर में 9 विकेट रहते हासिल कर लिया। इस मैच में फिन एलन ने 33 गेंदों पर तूफानी शतक जड़कर टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास का सबसे तेज शतक बनाया और वेस्टइंडीज के पूर्व धाकड़ बल्लेबाज क्रिस गेल का 10 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया।

    सबसे तेज शतक और नॉकआउट की धाक
    फिन एलन ने 33 गेंदों में शतक बनाकर टी20 वर्ल्ड कप की सबसे तेज सेंचुरी का नया रिकॉर्ड कायम किया। इससे पहले क्रिस गेल ने 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ 47 गेंदों में शतक लगाया था। इसके अलावा फिन एलन टी20 वर्ल्ड कप नॉकआउट में शतक लगाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इससे पहले श्रीलंका के तिलकरत्ने दिलशान का 2009 सेमीफाइनल में 96 रनों का रिकॉर्ड था।

    फुल मेंबर टीम के खिलाफ शतक और बाउंड्री का जलवा
    फिन एलन टी20 क्रिकेट में किसी फुल मेंबर टीम के खिलाफ सबसे कम गेंदों में शतक लगाने वाले बल्लेबाज भी बन गए। इससे पहले डेविड मिलर ने 35 गेंदों पर बांग्लादेश और रोहित शर्मा ने 35 गेंदों पर श्रीलंका के खिलाफ शतक बनाया था। इस पारी में फिन एलन ने 18 बाउंड्री (10 चौके और 8 छक्के) मारी, जो टी20 वर्ल्ड कप की किसी पारी में सबसे ज्यादा हैं। उनके आठ छक्के न्यूजीलैंड के लिए किसी पारी में सबसे ज्यादा हैं और यह टी20 वर्ल्ड कप के नॉकआउट मैच में किसी खिलाड़ी के लिए भी सर्वाधिक हैं।

    बाउंड्री रन का रिकॉर्ड
    फिन एलन ने 88 रन बाउंड्री से बनाकर टी20 वर्ल्ड कप की किसी पारी में सबसे ज्यादा बाउंड्री रन का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इससे पहले क्रिस गेल ने 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ 88 रन बाउंड्री से बनाए थे।

  • सऊदी से रक्षा समझौते के बाद भी खामोश पाकिस्तान, ईरानी हमलों पर नहीं दिखी सैन्य प्रतिक्रिया

    सऊदी से रक्षा समझौते के बाद भी खामोश पाकिस्तान, ईरानी हमलों पर नहीं दिखी सैन्य प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुआ संघर्ष अब कई देशों को प्रभावित करता नजर आ रहा है। इसी बीच आशंका जताई जा रही है कि इसका असर पाकिस्तान तक भी पहुंच सकता है। इसकी वजह पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ सुरक्षा समझौता है, जिसके मुताबिक किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। हालांकि हालिया हालात में पाकिस्तान इस समझौते के अनुरूप कदम उठाता नजर नहीं आ रहा है। ईरान पहले ही सऊदी अरब के कई इलाकों पर हमले कर चुका है।

    क्या है समझौते की शर्तें
    सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता (SMDA) हुआ था, जिसने दोनों देशों के सुरक्षा सहयोग को औपचारिक रूप दिया। समझौते के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया था कि किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और दोनों मिलकर उसका जवाब देंगे।

    रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते में यह भी प्रावधान है कि यदि किसी तीसरे देश द्वारा पाकिस्तान पर हमला होता है, तो उसे सऊदी अरब पर हमला माना जाएगा और सऊदी अरब को भी जवाब देने का अधिकार होगा।

    ईरान के हमले, लेकिन पाकिस्तान की चुप्पी
    हाल के समय में ईरान ने सऊदी अरब के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। सऊदी अरब की रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया। इसके बावजूद पाकिस्तान की ओर से समझौते के तहत किसी तरह की सैन्य कार्रवाई या जवाबी कदम सामने नहीं आए हैं।

    अपने ही समझौते में उलझा पाकिस्तान?
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन हमलों की निंदा करते हुए सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई है। हालांकि उन्होंने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने या ईरान के खिलाफ कार्रवाई की कोई घोषणा नहीं की। इससे यह संदेश जा रहा है कि पाकिस्तान फिलहाल इस समझौते को पूरी तरह लागू करने से बच रहा है।

    विदेश मंत्री ने क्या कहा
    पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने मंगलवार को कहा कि संघर्ष शुरू होने के समय वह सऊदी अरब और ईरान के नेताओं के संपर्क में थे। उन्होंने इस्लामाबाद में मीडिया को बताया कि उस समय वह इस्लामी सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेने के लिए सऊदी अरब में मौजूद थे और उन्होंने सऊदी अरब तथा ईरान के विदेश मंत्रियों से बातचीत की।

    डार के मुताबिक उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष को बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ पारस्परिक रक्षा समझौता है। इस पर ईरानी पक्ष ने उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा कि सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न हो।

    उन्होंने दावा किया कि इस बातचीत के बाद सऊदी अरब पर युद्ध का प्रभाव बेहद सीमित रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस संघर्ष को खत्म करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

    विदेश मंत्री ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उन्होंने तुर्की, बांग्लादेश, फिलिस्तीन, ईरान, उज्बेकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, ओमान, इराक, बहरीन और अजरबैजान के विदेश मंत्रियों के अलावा यूरोपीय संघ के उपाध्यक्ष और संयुक्त अरब अमीरात के उपप्रधानमंत्री से भी फोन पर बातचीत की है।

  • 13 मार्च को शनि होंगे अस्त, साढ़ेसाती के कठोर प्रभाव से मिलेगी राहत, इन राशियों को होगा फायदा

    13 मार्च को शनि होंगे अस्त, साढ़ेसाती के कठोर प्रभाव से मिलेगी राहत, इन राशियों को होगा फायदा



    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्मों का फल देने वाला ग्रह माना जाता है। यह ग्रह सबसे धीमी गति से चलता है और एक राशि में लगभग ढाई साल तक ठहरता है, जिससे इसका प्रभाव लंबे समय तक रहता है। इस समय शनि मीन राशि में हैं और 2 जून 2027 तक यहीं रहेंगे। इस दौरान शनि मार्गी, वक्री और अस्त-उदय की अवस्थाओं में रहेंगे।

    शनि अस्त का समय
    द्रिक पंचांग के अनुसार, 13 मार्च 2026, शुक्रवार को शाम 7:13 बजे शनि मीन राशि में अस्त हो जाएंगे। वे लगभग 40 दिनों तक अस्त रहेंगे और 22 अप्रैल 2026, बुधवार को सुबह 4:49 बजे दोबारा उदित होंगे। ज्योतिषियों के अनुसार, शनि के अस्त होने से उनके कठोर प्रभाव कुछ हद तक कम हो जाते हैं और कुछ राशियों को राहत और लाभ मिल सकते हैं।

    मेष राशि
    मेष राशि वालों के लिए शनि का अस्त होना राहत देने वाला साबित हो सकता है। शनि आपके बारहवें भाव में अस्त होंगे, जहां पहले से साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। इस दौरान खर्चों पर नियंत्रण आ सकता है, आर्थिक स्थिति सुधर सकती है और स्वास्थ्य में राहत मिल सकती है। विदेश से जुड़े कामों में सफलता और लंबे समय से अटके कामों में प्रगति देखने को मिल सकती है। कार्यस्थल पर विवादों से दूर रहना आवश्यक है।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि का अस्त कई मामलों में फायदेमंद रहेगा। शनि आपके पांचवें भाव में अस्त होंगे, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और रुके हुए काम फिर से शुरू हो सकते हैं। नौकरी और व्यापार में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं, प्रमोशन या नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। व्यापारियों को नए ऑर्डर या डील मिल सकती हैं। हालांकि, पढ़ाई और संतान से जुड़ी चिंताओं पर ध्यान देना आवश्यक है, और खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।

    कुंभ राशि
    कुंभ राशि वालों के लिए शनि का अस्त मिलाजुला असर देगा, लेकिन कुल मिलाकर लाभ के संकेत हैं। शनि आपके दूसरे भाव में अस्त होंगे और साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। इस दौरान आमदनी के नए रास्ते खुल सकते हैं और मेहनत का फल मिल सकता है। नौकरी में सराहना मिलेगी और संपत्ति से लाभ हो सकता है। हालांकि बोलचाल में सख्ती और खर्चों पर नियंत्रण बनाए रखना आवश्यक है, ताकि रिश्तों में तनाव न बढ़े।

  • मिडिल ईस्ट वॉर और यश की 'टॉक्सिक' का क्या है कनेक्शन? जानें क्यों 19 मार्च की जगह अब 4 जून को मचेगा गदर!

    मिडिल ईस्ट वॉर और यश की 'टॉक्सिक' का क्या है कनेक्शन? जानें क्यों 19 मार्च की जगह अब 4 जून को मचेगा गदर!


    नई दिल्ली । कन्नड़ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ की रिलीज डेट अचानक बदलने से फिल्म जगत और फैंस के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है। “रॉकिंग स्टार” यश ने एक आधिकारिक बयान जारी कर फिल्म को 19 मार्च के बजाय अब 4 जून को रिलीज करने का फैसला लिया है। इस फैसले के पीछे का सबसे प्रमुख और चौंकाने वाला कारण मिडिल ईस्ट क्राइसिस (US-Israel-Iran तनाव) बताया गया है। अक्सर लोग यह सोच सकते हैं कि सात समंदर पार चल रहे युद्ध या तनाव का एक भारतीय फिल्म की रिलीज से क्या लेना-देना हो सकता है, लेकिन इसके पीछे एक बहुत ही गहरा व्यापारिक और रणनीतिक कारण छिपा है।

    मिडिल ईस्ट: भारतीय फिल्मों का नया ‘पावर हाउस’
    आज के दौर में दुबई, सऊदी अरब और कतर जैसे देश भारतीय फिल्मों, खासकर साउथ और बॉलीवुड की एक्शन फिल्मों के लिए दुनिया के सबसे बड़े ओवरसीज मार्केट्स में से एक बन चुके हैं। बड़े बजट की फिल्मों, जैसे ‘KGF 2’, ‘जवान’ और ‘पठान’ की कुल कमाई का लगभग 15% से 25% हिस्सा अकेले इसी क्षेत्र से आता है। यश जानते हैं कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सिनेमाघर बंद होते हैं या दर्शक सुरक्षा कारणों से बाहर नहीं निकलते, तो फिल्म को सीधे तौर पर 100 से 200 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो सकता है।

    सिर्फ भारत का बॉक्स ऑफिस अब काफी नहीं
    आज की ‘पैन-इंडिया’ फिल्में 300 से 500 करोड़ के भारी बजट पर तैयार होती हैं। ऐसे में केवल भारतीय बॉक्स ऑफिस के भरोसे मुनाफा कमाना मुश्किल होता जा रहा है। यश ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि ‘टॉक्सिक’ को कन्नड़ और अंग्रेजी में शूट किया गया है, जिसका सीधा अर्थ है कि उनकी नजर केवल भारत पर नहीं, बल्कि वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर है। जब कोई निर्माता ‘ग्लोबल सिनेमा’ बनाने का दावा करता है, तो उसके लिए दुनिया की स्थिरता और सुरक्षा पहली प्राथमिकता बन जाती है।

    एक तीर से दो निशाने: क्लैश का खतरा टला
    रिलीज डेट आगे बढ़ाने का फायदा केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि भारतीय बॉक्स ऑफिस पर भी मिलेगा। 19 मार्च को रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ के साथ क्लैश होने से दोनों फिल्मों का बिजनेस बंटने का खतरा था। अब ‘टॉक्सिक’ के हटने से ‘धुरंधर 2’ को सोलो रिलीज का मौका मिलेगा, जिससे क्लैश की वजह से होने वाला घाटा कम होगा। साथ ही, यश अब जून में बिना किसी बड़े मुकाबले के हिंदी दर्शकों को अधिक प्रभावी ढंग से आकर्षित कर पाएंगे।

    4 जून ही क्यों?
    फिल्म जानकारों का मानना है कि जून तक मिडिल ईस्ट के हालात सुधरने की उम्मीद है, जिससे फिल्म को एक बड़ी ‘विंडो’ मिल सकेगी। इसके अलावा, 4 जून के आसपास कोई बड़ी हाइप वाली फिल्म रिलीज नहीं हो रही है, जिससे ‘टॉक्सिक’ को लंबी रनिंग और रिकॉर्ड तोड़ कमाई का अवसर मिलेगा।

    मिडिल ईस्ट में भारतीय फिल्मों का जलवा (पिछला रिकॉर्ड)
    खाड़ी देशों में भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘पठान’ ने पहले पांच दिनों में वहाँ से 26.20 मिलियन डॉलर का बिजनेस किया था, जबकि ‘जवान’ ने UAE से लगभग 9.2 मिलियन कमाए थे। खुद यश की ‘KGF: चैप्टर 2’ ने UAE में 8.15 मिलियन डॉलर का रिकॉर्ड बनाया था।

    सार: रचनात्मकता के साथ ग्लोबल बिजनेस विजन

    फिल्म ‘टॉक्सिक’ को पोस्टपोन करना पूरी तरह से एक सधा हुआ बिजनेस डिसीजन है। यह साफ दिखाता है कि आज का भारतीय फिल्म निर्माता केवल अपनी कला तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक ग्लोबल बिजनेसमैन की तरह सोच रहा है। मिडिल ईस्ट में शांति केवल राजनीति के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के ‘1000 करोड़ी क्लब’ के सपने को पूरा करने के लिए भी बेहद जरूरी है।