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  • गर्मियों में फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ा, ये 13 गलतियां पड़ सकती हैं भारी

    गर्मियों में फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ा, ये 13 गलतियां पड़ सकती हैं भारी


    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम जहां राहत और ठंडे फलों का आनंद लेकर आता है वहीं यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है तेज गर्मी और बढ़ता तापमान खाने को जल्दी खराब कर देता है जिससे फूड प्वाइजनिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि केवल बाहर का खाना ही नुकसानदायक होता है लेकिन सच यह है कि घर का खाना भी अगर सही तरीके से न संभाला जाए तो वह बीमारी का कारण बन सकता है

    गर्मी के मौसम में बैक्टीरिया और जर्म्स तेजी से बढ़ते हैं यही कारण है कि थोड़ी सी लापरवाही भी उल्टी दस्त पेट दर्द और डायरिया जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है कई बार यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है और अस्पताल तक जाने की नौबत आ जाती है इसलिए जरूरी है कि खाने से जुड़ी छोटी छोटी बातों का ध्यान रखा जाए

    सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं वह है कटे हुए फल को लंबे समय तक रखना कई लोग आधा फल खाकर बाकी फ्रिज में रख देते हैं लेकिन ऐसा करना खतरनाक हो सकता है कटे हुए फल में जल्दी बैक्टीरिया पनपने लगते हैं इसलिए फलों को हमेशा ताजा काटकर तुरंत खाना चाहिए

    इसी तरह फल और सब्जियों को काटते समय साफ चाकू और साफ हाथों का इस्तेमाल करना जरूरी है गंदे हाथ या गंदे बर्तन से बैक्टीरिया सीधे खाने में पहुंच जाते हैं कटे हुए फलों को नल के पानी से धोना भी सही नहीं माना जाता क्योंकि इससे जर्म्स और बढ़ सकते हैं

    गर्मी में एक और बड़ी गलती है खाना लंबे समय तक बाहर रखना पका हुआ खाना दो घंटे से ज्यादा बाहर रखने पर खराब होने लगता है इसलिए इसे जल्दी फ्रिज में रखना चाहिए लेकिन ध्यान रहे कि एक बार फ्रिज से निकालकर गर्म किया गया खाना दोबारा फ्रिज में नहीं रखना चाहिए इससे उसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं

    बासी खाना खाना भी फूड प्वाइजनिंग का बड़ा कारण है कई लोग सुबह का बना खाना रात में या रात का खाना अगले दिन खा लेते हैं जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है बार बार खाना गर्म करना भी नुकसानदायक होता है क्योंकि इससे उसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है

    बाजार में खुले में बिकने वाले खाने से भी बचना चाहिए खासकर वह खाना जो लंबे समय से रखा हो ऐसे खाने में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है इसके अलावा अगर खाने में किसी तरह की गंध रंग या स्वाद में बदलाव महसूस हो तो उसे तुरंत फेंक देना ही बेहतर होता है

    गर्मियों में सुरक्षित रहने के लिए जरूरी है कि हमेशा ताजा और साफ खाना खाएं हाथों की सफाई का ध्यान रखें और खाने को सही तरीके से स्टोर करें छोटी छोटी सावधानियां अपनाकर बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है यह मौसम सतर्क रहने का है ताकि आप और आपका परिवार स्वस्थ रह सके

  • बुद्ध पूर्णिमा 2026 का शुभ पर्व 1 मई को, जानें स्नान दान का सही समय और आसान पूजा विधि

    बुद्ध पूर्णिमा 2026 का शुभ पर्व 1 मई को, जानें स्नान दान का सही समय और आसान पूजा विधि


    नई दिल्ली । वैशाख माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला बुद्ध पूर्णिमा का पर्व धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है यह दिन भगवान बुद्ध के जन्म ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण तीनों से जुड़ा हुआ माना जाता है इसलिए इस तिथि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 1 मई को मनाया जाएगा

    पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल की रात 9 बजकर 12 मिनट से प्रारंभ होकर 1 मई की रात 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगी उदयातिथि के अनुसार 1 मई को ही स्नान दान और पूजा करना अधिक शुभ माना गया है इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करते हैं और व्रत रखकर भगवान का ध्यान करते हैं

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा के दिन किया गया स्नान दान और पूजा व्यक्ति के जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है इस दिन जरूरतमंद लोगों की सहायता करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है कहा जाता है कि इस दिन किए गए अच्छे कार्यों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है

    स्नान और दान के लिए प्रातः काल का समय सबसे शुभ माना गया है इस दिन सुबह 4 बजकर 15 मिनट से 4 बजकर 58 मिनट तक स्नान और दान का विशेष मुहूर्त बताया गया है इस समय पवित्र स्नान कर गरीबों को अन्न वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत फलदायी होता है

    पूजा विधि की बात करें तो सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है दिनभर सात्विकता का पालन करते हुए भगवान का स्मरण किया जाता है शाम के समय जब चंद्रमा उदित होता है तब चंद्रमा को जल अर्पित किया जाता है इस दौरान सफेद फूल चावल और कुमकुम का प्रयोग किया जाता है अर्घ्य देते समय मन में अपनी इच्छाओं को रखते हुए प्रार्थना करना शुभ माना जाता है

    इस दिन कुछ विशेष कार्य करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है जैसे भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना या करवाना जरूरतमंद लोगों को भोजन या कपड़े देना और भगवान शिव माता पार्वती की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है इसके अलावा हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने से मानसिक शांति मिलती है

    हालांकि इस दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए पूजा में बासी फूल या टूटे हुए चावल का उपयोग नहीं करना चाहिए और गुस्से तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए तामसिक भोजन से बचना चाहिए और यदि व्रत न कर सकें तो सात्विक आहार ही ग्रहण करना चाहिए

    रात्रि में चंद्रमा की रोशनी में बैठकर ॐ सोमाय नमः मंत्र का जाप करना भी विशेष लाभकारी माना गया है इससे मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है बुद्ध पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं बल्कि आत्म शुद्धि और सद्भावना का संदेश देने वाला दिन है जो हर व्यक्ति को अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देता है

  • ज्येष्ठ माह का पहला बड़ा मंगल 2026, सुंदरकांड पाठ की सही विधि और लाभ जानना है जरूरी

    ज्येष्ठ माह का पहला बड़ा मंगल 2026, सुंदरकांड पाठ की सही विधि और लाभ जानना है जरूरी

    नई दिल्ली । ज्येष्ठ माह में आने वाले मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है और यह दिन भगवान हनुमान की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी महीने के एक मंगलवार को भगवान राम और भगवान हनुमान की पहली भेंट हुई थी यही कारण है कि इस पूरे महीने के मंगलवार विशेष महत्व रखते हैं इसके अलावा यह भी माना जाता है कि इसी माह में हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त हुआ था

    वर्ष 2026 में ज्येष्ठ माह 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक रहेगा इस बार अधिक मास के कारण एक दुर्लभ संयोग बन रहा है जिसमें कुल आठ मंगलवार पड़ रहे हैं आमतौर पर चार या पांच बड़ा मंगल ही होते हैं लेकिन इस बार श्रद्धालुओं को हनुमान भक्ति के अधिक अवसर मिलेंगे पहला बड़ा मंगल 5 मई को मनाया जाएगा

    इस दिन सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है सुंदरकांड गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस का एक महत्वपूर्ण भाग है जिसमें भगवान राम की महिमा और हनुमान जी की भक्ति का अद्भुत वर्णन किया गया है धार्मिक मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं

    सुंदरकांड पाठ करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है पाठ शुरू करने से पहले स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करना चाहिए इसके बाद पूजा स्थान को साफ कर हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें प्रतिमा ऐसी हो जिसमें भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण भी दिखाई दें पाठ करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है

    पाठ के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखना चाहिए और सात्विक भाव से भगवान का स्मरण करना चाहिए सुंदरकांड का पाठ एक बार में पूरा किया जा सकता है या फिर इसे नियमित रूप से कुछ दिनों तक किया जा सकता है कई लोग 11 दिन 21 दिन 31 दिन या 41 दिन तक इसका पाठ करते हैं जिससे विशेष फल की प्राप्ति होती है यदि ब्रह्म मुहूर्त में यह पाठ किया जाए तो इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुंदरकांड का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है भय और संकट समाप्त होते हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है और उनकी कृपा से भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं

    यह व्रत और पाठ केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है बल्कि यह जीवन में विश्वास शक्ति और धैर्य को मजबूत करने का माध्यम भी है बड़ा मंगल के दिन श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया सुंदरकांड पाठ व्यक्ति के जीवन में सुख शांति और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है

  • मई में कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत 2026, पूजन विधि से लेकर सामग्री तक सबकुछ यहां जानें

    मई में कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत 2026, पूजन विधि से लेकर सामग्री तक सबकुछ यहां जानें


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह का विशेष महत्व माना जाता है और इसी महीने में आने वाला वट सावित्री व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण होता है यह व्रत पति की लंबी आयु सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं और माता सावित्री का स्मरण करती हैं जिन्होंने अपने तप और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे

    पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को रखा जाएगा इस बार अमावस्या तिथि 16 मई शनिवार को सुबह 5 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर देर रात 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगी उदयातिथि के आधार पर व्रत 16 मई को ही रखा जाएगा इस दिन शनिवार होने के कारण शनि अमावस्या का विशेष संयोग भी बन रहा है जिससे इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है

    पूजन के लिए अभिजीत मुहूर्त को अत्यंत शुभ माना गया है इस दिन सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक का समय पूजा के लिए श्रेष्ठ रहेगा इस समय में विधिपूर्वक वट वृक्ष की पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है

    वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं इसके बाद सोलह श्रृंगार कर व्रत का संकल्प लिया जाता है महिलाएं वट वृक्ष के पास जाकर पूजा करती हैं और जल अक्षत तिल फूल और सिंदूर अर्पित करती हैं इसके साथ ही कच्चे सूत को वट वृक्ष के चारों ओर लपेटते हुए उसकी परिक्रमा की जाती है यह परिक्रमा सात इक्कीस या एक सौ आठ बार की जा सकती है

    पूजा के दौरान वट सावित्री व्रत कथा का पाठ करना भी आवश्यक माना गया है कथा के माध्यम से माता सावित्री के अद्भुत साहस और पतिव्रता धर्म का स्मरण किया जाता है इसके बाद महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुख समृद्धि की कामना करती हैं

    पूजन सामग्री में तांबे का लोटा गंगाजल सिंदूर रोली कलावा कच्चा सूत अगरबत्ती दीपक फूल तिल अक्षत फल मिठाई और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल होती हैं पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को विशेष रूप से वर वधू के प्रतीक स्वरूप वस्त्र भी रखने होते हैं

    धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनों का वास होता है इसलिए इसकी पूजा करने से त्रिदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है यह व्रत केवल परंपरा नहीं बल्कि वैवाहिक जीवन में प्रेम विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है जो परिवार में सुख शांति और समृद्धि लाने का संदेश देता है

  • हाईटेक सुरक्षा कवच में चलेगी कश्मीर की वंदे भारत ट्रेन, आरपीएफ कमांडो संभालेंगे मोर्चा

    हाईटेक सुरक्षा कवच में चलेगी कश्मीर की वंदे भारत ट्रेन, आरपीएफ कमांडो संभालेंगे मोर्चा

    नई दिल्ली । जम्मू-श्रीनगर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इस रूट की संवेदनशीलता को देखते हुए अब ट्रेन की सुरक्षा में रेलवे सुरक्षा बल के विशेष कमांडो दस्ते को तैनात किया जाएगा, जो आधुनिक हथियारों और उन्नत सुरक्षा उपकरणों से लैस रहेंगे।

    यह पूरा फैसला इस बात को ध्यान में रखकर लिया गया है कि यह रेल मार्ग रणनीतिक और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जम्मू से कश्मीर घाटी को जोड़ने वाली यह ट्रेन न केवल यात्रियों के लिए तेज और आधुनिक यात्रा का साधन है, बल्कि क्षेत्रीय संपर्क के लिहाज से भी इसकी अहम भूमिका है। ऐसे में इसकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

    तैनात किए जाने वाले कमांडो विशेष रूप से प्रशिक्षित होंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति या खतरे से तुरंत निपटा जा सके। इन सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक हथियारों के साथ-साथ निगरानी और संचार से जुड़े आधुनिक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे ट्रेन के भीतर और बाहर दोनों जगह मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार रहेगा।

    सुरक्षा योजना केवल ट्रेन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे रूट पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। खासकर सुरंगों, पुलों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। स्टेशनों पर भी कड़ी जांच और सतर्कता बढ़ाई जाएगी ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।

    इसके साथ ही सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया गया है, जिससे किसी भी स्थिति में तुरंत और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके। यह समन्वय पूरे सिस्टम को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाता है।

    वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड और आधुनिक ट्रेन के लिए सुरक्षा का यह स्तर जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि यात्रियों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल खतरे से बचाव करना नहीं, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा अनुभव देना भी है।

    जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन की सुरक्षा को लेकर उठाया गया यह कदम न केवल एक मजबूत सुरक्षा ढांचे की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि संवेदनशील क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित बलों के जरिए यात्रा को और सुरक्षित बनाया जा रहा है।

  • नरसिंह जयंती पर पढ़ें अद्भुत कथा: जब खंभे से प्रकट होकर भगवान ने खत्म किया अधर्म का आतंक

    नरसिंह जयंती पर पढ़ें अद्भुत कथा: जब खंभे से प्रकट होकर भगवान ने खत्म किया अधर्म का आतंक


    नई दिल्ली । आज पूरे देश में नरसिंह जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह पावन दिन भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और कथा श्रवण करने से जीवन के सभी भय, संकट और बाधाएं दूर होती हैं तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    सनातन परंपरा के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह जयंती मनाई जाती है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इसी दिन प्रदोष काल में भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण कर अधर्म का अंत किया और अपने परम भक्त Prahlada की रक्षा की। यही कारण है कि यह पर्व धर्म की विजय और आस्था की शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

    पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में दिति और ऋषि कश्यप के दो पुत्र हुए जिनका नाम हिरण्याक्ष और Hiranyakashipu था। दोनों ही अत्यंत शक्तिशाली लेकिन अहंकारी दैत्य थे। हिरण्याक्ष ने अपने अभिमान में पृथ्वी को रसातल में ले जाने का प्रयास किया जिसे भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर समाप्त किया। अपने भाई की मृत्यु से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान प्राप्त किया जिससे वह लगभग अजेय हो गया।

    इस वरदान के कारण हिरण्यकश्यप का अहंकार बढ़ता गया और उसने स्वयं को ही भगवान घोषित कर दिया। उसने अपने राज्य में भगवान विष्णु की पूजा पर रोक लगा दी और सभी को अपनी ही आराधना करने के लिए बाध्य किया। इसी बीच उसके घर पुत्र प्रह्लाद का जन्म हुआ जो बचपन से ही भगवान विष्णु के परम भक्त थे।

    हिरण्यकश्यप ने कई बार प्रह्लाद को अपनी भक्ति छोड़ने के लिए कहा लेकिन वे अडिग रहे। क्रोध में आकर उसने अपने ही पुत्र को मारने के कई प्रयास किए लेकिन हर बार भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए। अंततः जब उसने प्रह्लाद से पूछा कि उसका भगवान कहां है और प्रह्लाद ने उत्तर दिया कि वह हर जगह मौजूद हैं तो हिरण्यकश्यप ने एक खंभे की ओर इशारा करते हुए चुनौती दी।

    तभी उस खंभे से भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में प्रकट हुए। यह रूप आधा मनुष्य और आधा सिंह का था। भगवान ने संध्या काल में, घर की दहलीज पर, हिरण्यकश्यप को अपनी गोद में रखकर अपने नाखूनों से उसका वध कर दिया। इस प्रकार उन्होंने ब्रह्मा के वरदान की सभी शर्तों को पूर्ण करते हुए अधर्म का अंत किया।

    इसके बाद भगवान नरसिंह ने अपने भक्त प्रह्लाद को आशीर्वाद दिया और सभी देवताओं ने उनकी स्तुति की। यह कथा इस बात का प्रतीक है कि सच्ची भक्ति और विश्वास के आगे सबसे बड़ा अहंकार भी टिक नहीं सकता।

    नरसिंह जयंती का यह पर्व हमें सिखाता है कि जब भी धर्म पर संकट आता है तब भगवान स्वयं अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। इस दिन व्रत, पूजा और कथा का श्रवण करने से जीवन में साहस, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा सभी प्रकार के भय और कष्ट दूर होते हैं।

  • आज नरसिंह जयंती का महापर्व: दुर्लभ संयोग में करें सही पूजा, इन गलतियों से दूर रहें वरना मिलेगा विपरीत फल

    आज नरसिंह जयंती का महापर्व: दुर्लभ संयोग में करें सही पूजा, इन गलतियों से दूर रहें वरना मिलेगा विपरीत फल


    नई दिल्ली । आज पूरे देश में नरसिंह जयंती का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान विष्णु के उग्र और रक्षक अवतार भगवान नरसिंह को समर्पित है जिनकी पूजा से भक्तों के जीवन से भय, बाधाएं और शत्रु समाप्त होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष फल मिलता है लेकिन छोटी-छोटी गलतियां भी पूजा का प्रभाव कम कर सकती हैं इसलिए सावधानी बेहद जरूरी मानी गई है।

    पंचांग के अनुसार इस वर्ष चतुर्दशी तिथि 29 अप्रैल की शाम से शुरू होकर 30 अप्रैल की रात तक रहेगी और उदयातिथि के आधार पर आज गुरुवार को ही नरसिंह जयंती मनाई जा रही है। इस बार का पर्व इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन दो बेहद शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहे हैं जो इसकी आध्यात्मिक शक्ति को कई गुना बढ़ा देते हैं।

    पहला संयोग है गुरुवार का जो भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित दिन माना जाता है। ऐसे में नरसिंह जयंती का इस दिन पड़ना इसे और भी फलदायी बना देता है। दूसरा बड़ा संयोग है रवि योग का निर्माण जिसे ज्योतिष शास्त्र में सभी दोषों को समाप्त करने वाला और कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में की गई पूजा, व्रत और दान अक्षय फल प्रदान करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

    इस पावन अवसर पर भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ-सुथरे तथा पीले या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान नरसिंह की मूर्ति या तस्वीर का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के दौरान भगवान को प्रसन्न करने के लिए सत्तू, तिल और गुड़ का दान करना भी विशेष फलदायी बताया गया है। इन उपायों से भगवान की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

    लेकिन जितना जरूरी सही पूजा करना है उतना ही जरूरी कुछ गलतियों से बचना भी है। इस दिन घर में किसी भी प्रकार का झगड़ा या क्लेश करना अशुभ माना जाता है क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और पूजा का फल नष्ट हो सकता है। इसके अलावा प्याज, लहसुन या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सात्विकता बनाए रखना बेहद आवश्यक है।

    इसके साथ ही किसी भी असहाय या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान करना बहुत बड़ा दोष माना गया है। नरसिंह भगवान को धर्म और न्याय का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस दिन करुणा, दया और सेवा भाव रखना विशेष रूप से जरूरी होता है। ऐसा करने से ही पूजा का पूरा लाभ प्राप्त होता है।

    नरसिंह जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि यह आस्था और विश्वास का प्रतीक भी है। यह हमें सिखाता है कि यदि विश्वास अटूट हो तो भगवान किसी भी रूप में अपने भक्त की रक्षा के लिए प्रकट हो सकते हैं। इसलिए इस दिन श्रद्धा, नियम और सकारात्मक भाव के साथ पूजा करना ही सबसे बड़ा उपाय है जो जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा प्रदान करता है।

  • मजबूत घरेलू खपत और बैंकिंग सिस्टम ने वैश्विक झटकों को किया बेअसर।

    मजबूत घरेलू खपत और बैंकिंग सिस्टम ने वैश्विक झटकों को किया बेअसर।

    नई दिल्ली । दुनिया भर में छाई आर्थिक अनिश्चितता और विशेष रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था एक सुरक्षित और मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में पैदा हुई बड़ी बाधाओं के बावजूद भारत की आंतरिक मजबूती इसके बचाव में सबसे बड़ी ढाल बनी हुई है। रिपोर्ट यह रेखांकित करती है कि देश की मजबूत घरेलू मांग, प्रभावी सरकारी निवेश और एक बेहद लचीली वित्तीय प्रणाली ने मिलकर अर्थव्यवस्था को एक ऐसा सुरक्षा कवच प्रदान किया है, जो बाहरी झटकों को सहने में पूरी तरह सक्षम है।

    बाजार के वर्तमान आंकड़ों पर नजर डालें तो खपत का स्तर उम्मीद से कहीं बेहतर है। मार्च महीने के दौरान वाहनों और ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री में हुई बढ़ोतरी इस बात का प्रमाण है कि देश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मांग का पहिया तेजी से घूम रहा है। हालांकि, समीक्षा में इस बात को लेकर आगाह भी किया गया है कि भविष्य की आर्थिक दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनपुट लागत और आपूर्ति श्रृंखला पर कितना दबाव रहता है। उम्मीद जताई गई है कि साल 2026 के उत्तरार्ध तक मध्य पूर्व की स्थितियों में सुधार देखने को मिल सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार को राहत मिलेगी।

    चुनौतियों के मोर्चे पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसके राजकोषीय प्रभाव पड़ना तय है। इससे न केवल केंद्र बल्कि राज्यों की राजस्व प्राप्ति और खर्च करने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

    ऊर्जा और उर्वरक की आपूर्ति में संभावित अनिश्चितता मुद्रास्फीति (महंगाई) और व्यापार घाटे को बढ़ा सकती है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत का व्यापार घाटा पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़कर 333.2 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, और यह प्रवृत्ति अगले वित्त वर्ष में भी जारी रहने की संभावना है। इसके बावजूद, सरकार ने ‘आर्थिक स्थिरीकरण कोष’ जैसी रणनीतियों के माध्यम से किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त राजकोषीय गुंजाइश बना रखी है।

    आर्थिक विकास की इस गति को भविष्य में भी बनाए रखने के लिए सरकार अब नई तकनीकों और कौशल विकास पर दांव लगा रही है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और टिकाऊ व्यापार कौशल में निपुण बनाकर घरेलू विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।

    इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत के निर्यात की हिस्सेदारी भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सावधानीपूर्ण नीतिगत फैसलों और आंतरिक मजबूती के दम पर भारत वैश्विक संकटों के बीच भी अपनी विकास दर को सुरक्षित रखने में कामयाब रहेगा।

  • अदाणी पोर्ट्स का रिकॉर्ड प्रदर्शन, 50 करोड़ टन कार्गो के साथ आय और लाभ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी

    अदाणी पोर्ट्स का रिकॉर्ड प्रदर्शन, 50 करोड़ टन कार्गो के साथ आय और लाभ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी

    नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2026 अदाणी पोर्ट्स के लिए मजबूत प्रदर्शन और विस्तार का वर्ष साबित हुआ है, जहां कंपनी ने अपने मुनाफे और आय दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है। इस दौरान कंपनी ने न केवल वित्तीय रूप से मजबूती दिखाई, बल्कि परिचालन स्तर पर भी कई नए रिकॉर्ड स्थापित किए।

    कंपनी का शुद्ध लाभ इस वित्त वर्ष में 16 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12,782 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं, कुल आय में भी उल्लेखनीय उछाल देखा गया, जो 25 प्रतिशत बढ़कर 38,736 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि कंपनी ने अपने विभिन्न कारोबार क्षेत्रों में संतुलित और प्रभावी रणनीति अपनाई है।

    इस दौरान परिचालन लाभ यानी एबिटा में भी 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो 22,851 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आंकड़ा कंपनी की मजबूत कार्यप्रणाली और लागत नियंत्रण को दर्शाता है।

    परिचालन उपलब्धियों की बात करें तो कंपनी ने इस वर्ष एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया। एक ही वर्ष में 50 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक कार्गो को संभालना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, जिसने कंपनी को देश के अग्रणी एकीकृत परिवहन ऑपरेटर के रूप में स्थापित किया है।

    कंपनी के लॉजिस्टिक्स कारोबार ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई। इस सेगमेंट में 55 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई सेवाओं के विस्तार के कारण संभव हो पाई। वहीं समुद्री कारोबार में 134 प्रतिशत की तेज वृद्धि ने कंपनी के कुल प्रदर्शन को और मजबूती दी। बेड़े में जहाजों की संख्या बढ़ने से इस क्षेत्र में तेजी आई है।

    अंतरराष्ट्रीय संचालन से भी कंपनी को सकारात्मक परिणाम मिले हैं। विदेशी बंदरगाहों से प्राप्त राजस्व में 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो वैश्विक स्तर पर कंपनी के विस्तार को दर्शाता है।

    वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में भी कंपनी का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। इस अवधि में आय में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मुनाफा 9 प्रतिशत बढ़कर 3,308 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि वर्ष के अंत तक भी कंपनी की विकास दर बनी रही।

    भविष्य की योजनाओं को लेकर कंपनी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में वह अपनी क्षमता और दायरे को और बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने, सेवाओं का विस्तार करने और निवेश को संतुलित बनाए रखने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।