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  • महाराष्ट्र की राजनीति में नई समस्या… अजित पवार के निधन के बाद उलझी NCP के दोनों गुटों के विलय की गुत्थी?

    महाराष्ट्र की राजनीति में नई समस्या… अजित पवार के निधन के बाद उलझी NCP के दोनों गुटों के विलय की गुत्थी?


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में एक नई असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जब अजित पवार (Ajit Pawar) के आकस्मिक निधन ने एनसीपी (NCP) के दोनों गुटों के विलय की संभावना को लेकर विरोधाभासी दावे सामने ला दिए हैं। शरद पवार (Sharad Pawar) ने यह संकेत दिया कि अजित पवार के साथ विलय को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत चल रही थी, जबकि देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और अजित पवार के गुट के अन्य वरिष्ठ नेता इस दावे से पूरी तरह इनकार कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि अजित पवार उनके साथ लगातार संपर्क में थे, लेकिन उन्होंने कभी भी विलय का विषय उठाया नहीं। फडणवीस ने यह भी कहा कि महायुति सरकार में अजित पवार की स्थिति मजबूत थी, और ऐसे में पार्टी छोड़ने या विलय की संभावना बेहद कम थी।

    एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल ने भी यह स्पष्ट किया कि 2023 में एनडीए में शामिल होने का फैसला अंतिम था और शरद पवार के साथ विलय पर कोई बातचीत नहीं हुई थी। तटकरे ने यह भी कहा कि अब एनसीपी (अजित पवार गुट) एनडीए का हिस्सा है, और शरद पवार पर निर्भर है कि वे अपनी पार्टी को सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल करना चाहते हैं या नहीं।


    शरद पवार का बयान: बंद दरवाजे की बातचीत

    इस बीच, शरद पवार ने इन दावों का जवाब देते हुए कहा कि विलय की चर्चा ‘बंद दरवाजे’ में हुई थी, जिसमें केवल अजित पवार, जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले और रोहित पवार शामिल थे। उनका कहना था कि देवेंद्र फडणवीस और सुनील तटकरे जैसे लोग इस मामले से बाहर थे, और इसलिए उनके पास इस पर कोई सही जानकारी नहीं थी। इसके साथ ही, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में नेतृत्व संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रफुल पटेल और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता अब सुनेत्रा पवार को उनके दिवंगत पति के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।


    पार्थ पवार को कम प्रोफाइल रखने की सलाह

    सुनेत्रा पवार को पार्टी के विधायक दल का नेता चुना गया है और उन्होंने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ भी ली है। शरद पवार ने इस स्थिति के बारे में भी कोई जानकारी नहीं होने की बात कही, जिससे पार्टी और परिवार के बीच तनाव और गहरा गया। खासतौर पर तब, जब भाजपा ने पार्थ पवार को हालिया विवादों के मद्देनजर लो प्रोफाइल बनाए रखने की सलाह दी। यह चर्चा भी उठी कि एनसीपी पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है, क्योंकि यह सीट उनकी मां सुनेत्रा के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई है।

    वहीं, पार्थ पवार और शरद पवार एक बंद कमरे में अपने पिता के मेमोरियल पर चर्चा कर रहे थे, जबकि उनकी मां सुनेत्रा पवार राज्य की उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले रही थीं। इस समय, भाजपा शरद पवार गुट को महायुति में शामिल करने को लेकर संकोच कर रही है, जिससे दोनों गुटों के विलय की संभावनाओं पर ब्रेक लग रहा है।


    एनसीपी का भविष्य और राजनीति की जटिलता

    इस स्थिति के चलते एनसीपी का भविष्य अब अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि दोनों गुट सत्ता पर नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा पर्दे के पीछे राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर रही है, जिससे एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की प्रक्रिया रुक गई है।

  • अनूपपुर में मवेशियों की रहस्यमयी मौत से हड़कंप: दो दिनों में 12 पशु मरे, फूड प्वाइजनिंग की आशंका

    अनूपपुर में मवेशियों की रहस्यमयी मौत से हड़कंप: दो दिनों में 12 पशु मरे, फूड प्वाइजनिंग की आशंका


    अनूपपुर । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में मवेशियों की अचानक हो रही मौतों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बीते दो दिनों में 10 से 12 मवेशियों की रहस्यमयी बीमारी से मौत हो चुकी है। यह मामला कोतमा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत दूल्ही बांध के मुसवा झोरखी गांव का बताया जा रहा है जहां एक के बाद एक पशुओं की मौत ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है।

    ग्रामीणों के अनुसार बीमार मवेशियों में अचानक लार गिरना पेट फूलना सांस लेने में तकलीफ और कमजोरी जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं। हालत इतनी तेजी से बिगड़ रही है कि कुछ मवेशियों की कुछ ही घंटों के भीतर मौत हो जा रही है। बीमारी के तेजी से फैलने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने एहतियातन अपने मवेशियों को बांधकर रखना शुरू कर दिया है ताकि संक्रमण अन्य पशुओं तक न पहुंचे।

    मामले की जानकारी मिलते ही पशु चिकित्सा विभाग की चलित टीम गांव पहुंची और बीमार व स्वस्थ मवेशियों के ब्लड सैंपल लेकर जांच शुरू की। साथ ही एहतियात के तौर पर टीकाकरण का कार्य भी किया जा रहा है। बिजुरी के पशु चिकित्सक डॉ. गुप्ता ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला फूड प्वाइजनिंग से जुड़ा हो सकता है हालांकि बीमारी की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और लैब जांच आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    इस बीच ग्रामीणों ने पशु चिकित्सा विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर ही निगवानी क्षेत्र के पशु चिकित्सक डॉ. पांडे को सूचना देकर टीकाकरण की मांग की थी लेकिन ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी की ओर से समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आरोप है कि इसी लापरवाही के कारण दो दिनों में 12 मवेशियों की जान चली गई।

    ग्रामीणों ने बताया कि जब मामले की शिकायत कलेक्टर तक पहुंचाई गई तब जाकर पशु चिकित्सा विभाग हरकत में आया और टीम को गांव भेजा गया। फिलहाल गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है और पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर चिंतित हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद बीमारी के कारणों पर स्थिति साफ हो सकेगी। तब तक एहतियात बरतने और मवेशियों को खुले में चरने से रोकने की सलाह दी गई है।

  • एक पेड़ मां के नाम’ बना वैश्विक अभियान: इजराइल के नेवातिम में रोपे गए 300 पेड़, भारत–इजराइल दोस्ती हुई मजबूत

    एक पेड़ मां के नाम’ बना वैश्विक अभियान: इजराइल के नेवातिम में रोपे गए 300 पेड़, भारत–इजराइल दोस्ती हुई मजबूत

    नई दिल्‍ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी महत्वाकांक्षी पहल ‘एक पेड़ मां के नाम’ अब भारत की सीमाओं को पार कर वैश्विक स्वरूप लेती नजर आ रही है। इसी कड़ी में इजराइल के नेगेव क्षेत्र स्थित मोशव नेवातिम में 300 पेड़ लगाए गए, जिसने न केवल हरियाली का संदेश दिया बल्कि भारत और इजराइल के गहरे और ऐतिहासिक संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान की। यह विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम यहूदी पर्व ‘तु बिश्वत’ के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसे इजराइल में पेड़ों का नया साल और पर्यावरण जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस तरह भारतीय पहल और यहूदी परंपरा का संगम प्रकृति, संस्कृति और साझा मूल्यों का प्रतीक बनकर सामने आया।

    नेवातिम में हरियाली के साथ दोस्ती का उत्सव

    मोशव नेवातिम में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, बच्चों और समुदाय के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारत के दूतावास, केरेन कायेमेट ले इजराइल KKL-JNF और मोशव नेवातिम के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम के तहत कुल 300 पौधे लगाए गए।

    यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे भारत और इजराइल के बीच लोगों से लोगों के रिश्तों को मजबूत करने के एक सशक्त माध्यम के रूप में देखा गया। बच्चों की भागीदारी ने इस संदेश को और भी भावनात्मक बना दिया कि प्रकृति की रक्षा की जिम्मेदारी अगली पीढ़ियों के साथ साझा है।

    भारत–इजराइल की साझा सोच और प्रतिबद्धता

    कार्यक्रम में इजराइल के पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय के महानिदेशक रामी रोजेन, भारत के इजराइल में राजदूत जेपी सिंह और ब्नेई शिमोन क्षेत्रीय परिषद के प्रमुख निर जामिर की उपस्थिति ने आयोजन को और भी खास बना दिया। सभी वक्ताओं ने सतत विकास, जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर भारत और इजराइल की साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल किसी एक देश का मुद्दा नहीं, बल्कि यह एक वैश्विक जिम्मेदारी है। ऐसे में ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलें दुनिया को यह संदेश देती हैं कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना संभव है।

    राजदूत जेपी सिंह का भावनात्मक संबोधन

    भारतीय राजदूत जेपी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ‘तु बिश्वत’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ दोनों ही परंपराएं प्रकृति, समुदाय और भावनात्मक जुड़ाव को केंद्र में रखती हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह मां जीवन का आधार होती है, उसी तरह पेड़ धरती पर जीवन को संजोए रखते हैं।राजदूत ने विश्वास जताया कि नेवातिम में लगाए गए ये पेड़ आने वाले वर्षों में भारत–इजराइल मित्रता के स्थायी प्रतीक बनेंगे और जब ये पेड़ बड़े होंगे, तो वे आने वाली पीढ़ियों को दोनों देशों के बीच गहरे रिश्तों की कहानी सुनाएंगे।

    भारतीय विरासत से गहराई से जुड़ा नेवातिम

    नेवातिम का भारत से ऐतिहासिक रिश्ता भी इस आयोजन को विशेष बनाता है। इस मोशव की स्थापना भारत के कोचीन क्षेत्र से आए यहूदियों ने की थी। आज भी नेवातिम में भारतीय यहूदी विरासत जीवंत रूप में मौजूद है। यहां स्थित भारतीय यहूदी विरासत केंद्र और कोचिनी शैली का सिनेगॉग इस ऐतिहासिक संबंध की गवाही देते हैं।हाल ही में यहां भारतीय महाराजा जाम साहिब की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदी शरणार्थियों की मदद के लिए जाने जाते हैं। यह प्रतिमा भारत और यहूदी समुदाय के बीच मानवीय रिश्तों की एक और मजबूत कड़ी है।

    एक पहल, कई संदेश

    कुल मिलाकर, इजराइल के नेवातिम में आयोजित यह वृक्षारोपण कार्यक्रम केवल पेड़ लगाने का आयोजन नहीं था, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक जुड़ाव और भारत–इजराइल मित्रता का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल अब एक वैश्विक संदेश बनती दिख रही है ऐसा संदेश, जिसमें प्रकृति के प्रति सम्मान, मां के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जिम्मेदारी एक साथ जुड़ी हुई है।

  • एमपी सरकार फिर लेगी 5200 करोड़ का कर्ज: 2026 में दूसरी बार ऋण, चालू वित्तीय वर्ष में आंकड़ा 62,300 करोड़ पहुंचा

    एमपी सरकार फिर लेगी 5200 करोड़ का कर्ज: 2026 में दूसरी बार ऋण, चालू वित्तीय वर्ष में आंकड़ा 62,300 करोड़ पहुंचा


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़ा कर्ज लेने जा रही है। वर्ष 2026 में यह सरकार का दूसरा ऋण होगा। आगामी 7 फरवरी को राज्य सरकार को 5200 करोड़ रुपये का कर्ज मिलेगा। इसके साथ ही चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में लिया गया कुल ऋण बढ़कर 62300 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। इससे पहले सरकार इस वित्तीय वर्ष में 57100 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है।

    सरकारी जानकारी के अनुसार 5200 करोड़ रुपये के इस ऋण को तीन अलग-अलग किस्तों में लिया जा रहा है। पहली किस्त के तहत 1200 करोड़ रुपये का कर्ज 7 वर्ष की अवधि के लिए होगा जिसकी ब्याज सहित भुगतान की अंतिम तिथि 4 फरवरी 2033 तय की गई है। दूसरी किस्त में 2000 करोड़ रुपये का कर्ज 17 वर्ष की अवधि के लिए लिया जा रहा है जिसे 4 फरवरी 2043 तक चुकाया जाएगा। वहीं तीसरी किस्त में 2000 करोड़ रुपये का ऋण 22 वर्षों की अवधि के लिए लिया गया है जिसका भुगतान ब्याज सहित किया जाएगा।

    बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा लिया जा रहा यह कर्ज विकास कार्यों योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर राज्य की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    अगर पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 की बात करें तो सरकार लगभग हर महीने बाजार से ऋण लेती नजर आई है। 7 मई 2025 को 5000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया। इसके बाद 4 जून को 4500 करोड़ 8 जुलाई को 4800 करोड़ और 30 जुलाई को 4300 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया। अगस्त महीने में भी सरकार ने दो बार कर्ज लिया—5 अगस्त को 4000 करोड़ और 26 अगस्त को 4800 करोड़ रुपये।

    सितंबर में 9 तारीख को 4000 करोड़ 23 सितंबर को 3000 करोड़ और 30 सितंबर को फिर 3000 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया। इसके बाद 28 अक्टूबर को 5200 करोड़ 11 नवंबर को 4000 करोड़ 2 दिसंबर को 3000 करोड़ और 30 दिसंबर 2025 को 3500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया। लगातार बढ़ते कर्ज के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन पैसों का उपयोग किस तरह करती है और आने वाले समय में राज्य की आर्थिक सेहत को संतुलित रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • इस हफ्ते SME सेगमेंट के 3 नए पब्लिक इश्यू खुलेंगे, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

    इस हफ्ते SME सेगमेंट के 3 नए पब्लिक इश्यू खुलेंगे, निवेशकों के लिए बड़ा मौका


    नई दिल्‍ली । यूनियन बजट 2026 के बाद शेयर बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बजट के ऐलान के साथ ही निवेशकों की नजर अब नए निवेश अवसरों पर टिक गई है और इसी कड़ी में इस सप्ताह आईपीओ बाजार काफी सक्रिय रहने वाला है। खास बात यह है कि इस हफ्ते खुलने वाले सभी नए पब्लिक इश्यू एसएमई  SME सेगमेंट से जुड़े हुए हैं, जो छोटे और मझोले निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

    इस सप्ताह कुल तीन नए आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए ओपन होने जा रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह हफ्ता बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि सही कंपनी में निवेश कर अच्छे रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं इन तीनों आईपीओ के बारे में-

    Grover Jewells IPO

    ज्वेलरी सेक्टर की कंपनी Grover Jewells अपना आईपीओ 4 फरवरी को निवेशकों के लिए खोलने जा रही है। इस पब्लिक इश्यू में निवेशक 6 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। कंपनी इस आईपीओ के जरिए कुल 33.83 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है।

    Grover Jewells ने अपने शेयरों का प्राइस बैंड 83 से 88 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इस आईपीओ में एक लॉट 1600 शेयरों का होगा, यानी निवेशकों को न्यूनतम निवेश इसी लॉट साइज के अनुसार करना होगा। सब्सक्रिप्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 11 फरवरी को NSE SME प्लेटफॉर्म पर हो सकती है। ज्वेलरी सेक्टर में रुचि रखने वाले निवेशकों के लिए यह आईपीओ आकर्षक विकल्प माना जा रहा है।

    Biopol Chemicals IPO

    केमिकल सेक्टर से जुड़ी कंपनी Biopol Chemicals अपना पब्लिक इश्यू 6 फरवरी से सब्सक्रिप्शन के लिए खोलने जा रही है। निवेशक इस आईपीओ में 10 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। कंपनी इस इश्यू के जरिए 31.26 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। Biopol Chemicals ने आईपीओ के लिए 102 से 108 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इसमें एक लॉट 1200 शेयरों का रखा गया है। सब्सक्रिप्शन बंद होने के बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 13 फरवरी को NSE SME प्लेटफॉर्म पर होने की संभावना है। केमिकल इंडस्ट्री में बढ़ती मांग को देखते हुए इस आईपीओ पर निवेशकों की खास नजर बनी हुई है।

    NFP Sampoorna Foods IPO

    फूड प्रोसेसिंग सेक्टर की कंपनी NFP Sampoorna Foods का आईपीओ 4 फरवरी से निवेशकों के लिए ओपन हो रहा है। इस इश्यू में निवेशक 6 फरवरी तक अपनी बोली लगा सकते हैं। कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए कुल 24.53 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है।

    कंपनी ने अपने शेयरों का प्राइस बैंड 52 से 55 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इस आईपीओ में निवेश के लिए एक लॉट में 2000 शेयर शामिल किए गए हैं। सब्सक्रिप्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 11 फरवरी को NSE SME प्लेटफॉर्म पर हो सकती है। कम प्राइस बैंड होने के कारण यह आईपीओ छोटे निवेशकों के लिए खासा आकर्षक माना जा रहा है।

    निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह सप्ताह

    बजट 2026 के बाद बाजार में बने सकारात्मक माहौल के बीच इन तीनों एसएमई आईपीओ को निवेश के नए अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, एसएमई आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, बिजनेस मॉडल और भविष्य की योजनाओं का आकलन करना जरूरी होता है।गौरतलब है कि यह सप्ताह उन निवेशकों के लिए खास हो सकता है जो बजट के बाद उभरते अवसरों का फायदा उठाना चाहते हैं और एसएमई सेगमेंट में निवेश करने में रुचि रखते हैं।

  • सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण

    सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण


    सीधी । सोशल मीडिया के दौर में अगर आवाज बुलंद हो और इरादे मजबूत हों तो बदलाव मुमकिन हैयह साबित कर दिखाया है सीधी जिले की यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर लीला साहू ने। वर्षों से खराब सड़क को लेकर संघर्ष कर रहीं लीला की मांग अब पूरी हो गई है। सड़क निर्माण का काम शुरू होते ही गांव में खुशी और उत्साह का माहौल है।

    जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर ग्राम खड्डी से बैगहा टोला तक करीब 10 किलोमीटर का यह सड़क मार्ग वर्षों से बदहाल स्थिति में था। खासकर बरसात के मौसम में हालात इतने खराब हो जाते थे कि गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। गर्भवती महिलाओं बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल ले जाना मानो टेढ़ी खीर बन गया था। इसी दुर्दशा को लेकर लीला साहू ने सोशल मीडिया को हथियार बनाया और सड़क की सच्चाई देश-दुनिया के सामने रखी।

    लीला साहू ने सड़क की बदहाली को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जो देखते ही देखते वायरल हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री तक गुहार लगाई वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांसदों पर भी नाराजगी जाहिर की थी। उनके वीडियो ने न सिर्फ प्रशासन का ध्यान खींचा बल्कि यह मुद्दा प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया।

    अब जब सड़क निर्माण कार्य शुरू हो गया है तो लीला साहू ने गांव वालों के साथ खुशी जाहिर करते हुए एक बार फिर सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में उन्होंने प्रदेश के मुखिया स्थानीय सांसद और मीडिया का धन्यवाद किया है। उनका कहना है कि यह जीत अकेले उनकी नहीं बल्कि पूरे गांव की है जिसने वर्षों तक कठिनाइयों का सामना किया।

    ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क बनने से अब उन्हें शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। बच्चों को स्कूल पहुंचने में आसानी होगी और आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना सरल होगा। गांव में विकास की नई उम्मीद जगी है।

    लीला साहू की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब आम नागरिक अपनी बात मजबूती से और सही मंच पर रखता है तो सिस्टम को भी सुनना पड़ता है। सोशल मीडिया की ताकत और जनआवाज ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बदलाव संभव है।

  • U-19 वर्ल्ड कप 2026 सेमीफाइनल: भारत बनाम अफगानिस्तान की जंग …

    U-19 वर्ल्ड कप 2026 सेमीफाइनल: भारत बनाम अफगानिस्तान की जंग …


    नई दिल्‍ली । आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। टूर्नामेंट का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला आज, 4 फरवरी (बुधवार) को क्रिकेट प्रेमियों को जबरदस्त रोमांच देने के लिए तैयार है, जहां भारत और अफगानिस्तान की अंडर-19 टीमें आमने-सामने होंगी। यह हाई-वोल्टेज मुकाबला जिम्बाब्वे के हरारे स्थित हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। दोनों टीमें इस मैच को जीतकर फाइनल में अपनी जगह पक्की करने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी।

    शानदार लय में भारतीय अंडर-19 टीम

    भारतीय अंडर-19 टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अब तक बेहतरीन प्रदर्शन किया है और उसे खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। ग्रुप स्टेज में भारत ने अपने सभी मुकाबले जीतकर ग्रुप बी में शीर्ष स्थान हासिल किया। टीम ने अमेरिका, बांग्लादेश और न्यूजीलैंड जैसी टीमों को हराकर अपनी मजबूत तैयारी और संतुलित संयोजन का परिचय दिया।

    इसके बाद सुपर सिक्स चरण में भी भारत का दबदबा साफ नजर आया। अपने पहले मुकाबले में टीम इंडिया ने मेजबान जिम्बाब्वे को 204 रनों के विशाल अंतर से हराकर टूर्नामेंट में अपनी ताकत का ऐलान कर दिया। वहीं, निर्णायक मुकाबले में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम ने संयमित, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन करते हुए शानदार जीत दर्ज की। कप्तान आयुष म्हात्रे की अगुवाई में भारतीय टीम बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में संतुलित नजर आ रही है।

    अफगानिस्तान भी किसी से कम नहीं

    दूसरी ओर, अफगानिस्तान अंडर-19 टीम ने भी इस वर्ल्ड कप में सभी को चौंकाया है। टीम ने ग्रुप स्टेज में लगातार तीन मुकाबले जीतकर सुपर सिक्स में प्रवेश किया। हालांकि सुपर सिक्स चरण में श्रीलंका के खिलाफ अफगानिस्तान को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बाद टीम ने जबरदस्त वापसी करते हुए आयरलैंड को 191 रनों के बड़े अंतर से हराया और सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की।

    कप्तान महबूब खान के नेतृत्व में अफगानिस्तान की टीम आत्मविश्वास से लबरेज दिख रही है। उनकी गेंदबाजी आक्रमण ने पूरे टूर्नामेंट में विपक्षी बल्लेबाजों को काफी परेशान किया है, वहीं बल्लेबाजी में भी टीम ने अहम मौकों पर दम दिखाया है। अफगानिस्तान की कोशिश होगी कि वह भारत जैसी मजबूत टीम को हराकर इतिहास रचे और पहली बार अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचे।

    कहां और कैसे देखें मुकाबला लाइव

    भारत बनाम अफगानिस्तान अंडर-19 सेमीफाइनल मुकाबले का लाइव टेलीकास्ट टीवी पर स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा। वहीं, मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मैच की लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। क्रिकेट फैंस इस रोमांचक मुकाबले को घर बैठे लाइव देख सकेंगे।

    दोनों टीमों के स्क्वॉड

    भारत (U-19):
    आयुष म्हात्रे (कप्तान), आरएस एम्ब्रिश, कनिष्क चौहान, दीवेंद्रन दीपेश, मोहम्मद एनान, एरोन जॉर्ज, अभिज्ञान कुंडू, किशन कुमार सिंह, विहान मल्होत्रा, उधव मोहन, हेनिल पटेल, खिलन पटेल, हरवंश सिंह, वैभव सूर्यवंशी, वेदांत त्रिवेदी।

    अफगानिस्तान (U-19):
    महबूब खान (कप्तान), खालिद अहमदजई, उस्मान सादात, फैसल खान, उजैरुल्लाह नियाजई, अजीज मिया खिल, नाजीफ अमीरी, खातिर स्टानिकजई, नूरिस्तानी, अब्दुल अजीज, सलाम खान, वाहिद जादरान, जैतुल्लाह शाहीन, रोहुल्लाह अरब, अकील खान ओबैद।

    आपको बतादें कि यह सेमीफाइनल मुकाबला रोमांच, जुनून और युवा प्रतिभाओं की परीक्षा होने वाला है। जहां भारत अपने शानदार रिकॉर्ड और आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगा, वहीं अफगानिस्तान उलटफेर कर इतिहास रचने की पूरी कोशिश करेगा। क्रिकेट फैंस को एक बेहद रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है।

  • 50 साल के कब्जे, कोर्ट के स्टे और चार रजिस्ट्री के बावजूद गरजा बुलडोजर: मऊगंज में प्रशासन बनाम गरीब

    50 साल के कब्जे, कोर्ट के स्टे और चार रजिस्ट्री के बावजूद गरजा बुलडोजर: मऊगंज में प्रशासन बनाम गरीब


    मऊगंज । कहते हैं कानून अंधा होता है लेकिन मऊगंज का राजस्व अमला इस कहावत से भी एक कदम आगे नजर आ रहा है यहां कानून न सिर्फ अंधा बल्कि बहरा भी दिखाई दे रहा है। देवतालाब उप-तहसील के नौडिया गांव में प्रशासन ने जिस तरह भारी पुलिस बल के साथ गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी की उसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। यह कार्रवाई उस जमीन पर की जा रही है जिस पर लोग पिछले करीब 50 वर्षों से काबिज हैं और जहां सिविल कोर्ट का स्पष्ट स्थगन आदेश स्टे भी लागू है।

    पूरा विवाद 1988 में की गई एक रजिस्ट्री से शुरू होता है। आरोप है कि भगवानदीन पटेल नाम के एक रसूखदार पटवारी ने जमीन की रजिस्ट्री करवाई नामांतरण भी हुआ लेकिन इसके बाद खेल शुरू हुआ। पटवारी के भाई ने अपील दायर कर खरीदारों का नाम रिकॉर्ड से कटवा दिया और जमीन दोबारा अपने नाम दर्ज करा ली। हैरानी की बात यह है कि जिस अपील के आधार पर मालिकाना हक बदला गया उसका कोई रिकॉर्ड आज राजस्व विभाग के पास मौजूद नहीं है।

    यहीं से जमीन की जालसाजी का सिलसिला तेज हो गया। आरोप है कि एक ही जमीन की चार बार रजिस्ट्री की गई। 1988 के बाद वर्षों तक लोग उसी जमीन पर मकान बनाकर रहते रहे फिर 2022 में दोबारा खरीद-फरोख्त हुई। एक ही खसरे की जमीन अलग-अलग लोगों को बेची जाती रही और प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा। अब जब विवाद कोर्ट में है और मामला विचाराधीन है तो अचानक प्रशासन को यह जमीन “सरकारी” नजर आने लगी।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सिविल कोर्ट का स्टे ऑर्डर प्रभावशील है तो प्रशासन किस कानून के तहत अतिक्रमण हटाने पहुंचा? क्या मऊगंज का राजस्व अमला खुद को माननीय न्यायालय से ऊपर समझता है? कार्रवाई के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ लोगों ने आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश क किसी ने हाथ की नस काट ली तो किसी ने खुद को घर में बंद कर लिया।

    विडंबना यह भी है कि जिस जमीन को सरकारी बताया जा रहा है उससे जुड़े पुख्ता दस्तावेज प्रशासन के पास नहीं हैं। न यह स्पष्ट है कि जमीन कब और कैसे सरकारी घोषित हुई। इसके बावजूद कार्रवाई के दौरान जब लोगों ने विरोध किया तो अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया भले ही रोक दी गई लेकिन वर्तमान पटवारी ने पीड़ितों पर ही “कानूनी हंटर” चला दिया। नौ लोगों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा और गाली-गलौज जैसी धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया।

    आज नौडिया गांव के लोग अपनी ही जमीन पर खुद को बेगाना महसूस कर रहे हैं। सवाल यह है कि जिसने 27 डिसमिल हिस्से में 40 डिसमिल जमीन बेच दी उस पूर्व पटवारी पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ गरीबों के घर गिराना है या उस सिस्टम को दुरुस्त करना भी है जो भ्रष्टाचार को संरक्षण देता है?

  • ‘हिंदू कार्ड’ या सियासी पाखंड? बांग्लादेश में चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी की कथित समावेशिता पर सवाल

    ‘हिंदू कार्ड’ या सियासी पाखंड? बांग्लादेश में चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी की कथित समावेशिता पर सवाल


    नई दिल्‍ली । बांग्लादेश की राजनीति इन दिनों एक गंभीर विरोधाभास से गुजर रही है। एक तरफ देश में हिंदू समुदाय पर हमलों, हिंसा और कथित नरसंहार की खबरें सामने आ रही हैं, तो दूसरी ओर कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी खुद को “समावेशी” और “धर्मनिरपेक्ष” दिखाने की कोशिश कर रही है। इस कोशिश का ताजा उदाहरण खुलना-1 संसदीय सीट से हिंदू प्रकोष्ठ के नेता कृष्ण नंदी को उम्मीदवार बनाए जाने के रूप में सामने आया है। हालांकि, कई रिपोर्ट्स और खुद पार्टी के संविधान की धाराएं इस कदम को महज एक सियासी दिखावा और ‘हिंदू कार्ड’ करार दे रही हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि जमात-ए-इस्लामी का यह कदम वास्तविक समावेशिता से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अल्पसंख्यकों को गुमराह करने की रणनीति है। पार्टी के संविधान में निहित प्रावधान यह साफ करते हैं कि कोई भी हिंदू या गैर-मुस्लिम कभी भी जमात-ए-इस्लामी का पूर्ण सदस्य नहीं बन सकता। ऐसे में सवाल उठता है कि जब किसी समुदाय को संगठन के भीतर बराबरी का अधिकार ही नहीं दिया जा सकता, तो उसे चुनावी उम्मीदवार बनाना कितना ईमानदार कदम कहा जा सकता है।

    संविधान की सख्त शर्तें, गैर-मुस्लिमों को बराबरी नहीं

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी के संविधान की धारा 11 स्पष्ट रूप से कहती है कि कोई भी गैर-मुस्लिम केवल “एसोसिएट सदस्य” ही बन सकता है। इसका मतलब यह है कि हिंदू या अन्य गैर-मुस्लिम नेताओं को पार्टी की कोर कमिटी, नीति-निर्माण या अहम फैसलों में कोई भूमिका नहीं मिलेगी। पूर्ण सदस्यता केवल मुसलमानों के लिए आरक्षित है। ऐसे में कृष्ण नंदी जैसे नेताओं को उम्मीदवार बनाना प्रतीकात्मक कदम से ज्यादा कुछ नहीं लगता।

    यही नहीं, पार्टी के संविधान की धारा 7 और 9 में पूर्ण सदस्य बनने के लिए जिन शर्तों का उल्लेख है, वे किसी भी स्वाभिमानी हिंदू या गैर-मुस्लिम के लिए स्वीकार्य नहीं मानी जा सकतीं। इन धाराओं के तहत पार्टी सदस्य को अल्लाह, पैगंबर मोहम्मद और कुरान को एकमात्र आदर्श मानना अनिवार्य है। साथ ही, सदस्य को शरिया कानून के अनुसार जीवन जीने और इस्लामी कर्तव्यों का पालन करने की शपथ लेनी होती है। इसके अलावा, “इस्लाम से भटके हुए लोगों” से दूरी बनाए रखने की शर्त भी संविधान में दर्ज है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी ने वर्ष 2008 में अपने संविधान में कुछ सीमित बदलाव किए थे, लेकिन ये बदलाव भी कथित तौर पर चुनाव आयोग और जनप्रतिनिधित्व आदेश के नियमों से बचने के लिए किए गए थे, ताकि पार्टी का पंजीकरण रद्द न हो। मूल विचारधारा और कट्टर इस्लामी सोच में कोई ठोस बदलाव नहीं किया गया। इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि बिना बुनियादी सुधार के समावेशिता की बात करना महज राजनीतिक अवसरवाद है।

    चुनाव का माहौल और बदली हुई सियासी तस्वीर

    बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद यह देश का पहला आम चुनाव है। अब तक बांग्लादेश की राजनीति मुख्य रूप से अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे वह चुनाव नहीं लड़ पा रही है।

    इस राजनीतिक खालीपन का फायदा उठाकर जमात-ए-इस्लामी खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि हिंदू उम्मीदवार उतारना इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पार्टी पर लगने वाले कट्टरपंथी और अल्पसंख्यक विरोधी छवि के आरोपों को कमजोर किया जा सके।

    महिलाओं को लेकर भी कट्टर रुख

    जमात-ए-इस्लामी की कथित समावेशिता की पोल महिलाओं के मुद्दे पर भी खुलती है। पार्टी ने इस चुनाव में एक भी महिला उम्मीदवार नहीं उतारा है। पार्टी प्रमुख शफीकुर रहमान का साफ कहना है कि जमात-ए-इस्लामी की कभी कोई महिला प्रमुख नहीं बन सकती। उनके अनुसार, “अल्लाह ने पुरुष और महिलाओं को अलग-अलग बनाया है” और महिलाएं पार्टी का नेतृत्व नहीं कर सकतीं।

    शफीकुर रहमान का एक और बयान काफी विवादित रहा, जिसमें उन्होंने कामकाजी महिलाओं की तुलना वेश्यावृत्ति से कर दी। इस बयान के बाद ढाका समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए और जमात-ए-इस्लामी की सोच पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। उल्‍लेखनीय है कि बांग्लादेश में जहां एक ओर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं, वहीं जमात-ए-इस्लामी का ‘हिंदू उम्मीदवार’ उतारना वास्तविक बदलाव से ज्यादा राजनीतिक दिखावा प्रतीत होता है। पार्टी का संविधान, उसकी विचारधारा और नेताओं के बयान यह संकेत देते हैं कि बिना ठोस वैचारिक और संरचनात्मक सुधार के यह समावेशिता केवल एक चुनावी रणनीति है, जिसका उद्देश्य सत्ता की दौड़ में अपनी छवि को चमकाना भर है।

  • पश्चिमी विक्षोभ की वापसी से उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड

    पश्चिमी विक्षोभ की वापसी से उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड


    नई दिल्‍ली । हिमालयी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ के एक बार फिर सक्रिय होने से उत्तर भारत में सर्दी ने जोरदार वापसी कर ली है। पहाड़ों पर चल रही बर्फीली हवाओं का असर अब मैदानी इलाकों में भी साफ नजर आने लगा है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में ठिठुरन, गलन और शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया है। मौसम विभाग ने आज भी कई राज्यों में बारिश, बर्फबारी और घने कोहरे को लेकर अलर्ट जारी किया है।

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 3 फरवरी को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश और भारी बर्फबारी की संभावना है। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य भारत से जुड़े मैदानी इलाकों में भी हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सिस्टम के चलते अगले कुछ दिनों तक ठंड का असर बना रहेगा।

    IMD ने बताया है कि 5 फरवरी के बाद मौसम में धीरे-धीरे बदलाव आएगा और लोगों को ठंड से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि तब तक नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विभाग ने खास तौर पर अपील की है कि लोग घर से बाहर निकलते समय मौसम की ताजा जानकारी जरूर लें और पहाड़ी इलाकों में यात्रा या छुट्टियों की योजना बनाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। ठंड के इस दौर में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की भी सलाह दी गई है।

    दिल्ली-एनसीआर में सर्दी और बारिश का असर

    मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर की सुबह हल्के से मध्यम कोहरे के साथ हुई। ठंडी हवाओं के चलते लोगों को सुबह और देर रात खासा सर्दी का एहसास हुआ। मौसम विभाग के अनुसार, आज दिल्ली में अधिकतम तापमान 21 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। राजधानी में हल्की बारिश के लिए येलो अलर्ट भी जारी किया गया है।हालांकि ठंड के बीच एक राहत की खबर यह है कि दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में कुछ सुधार दर्ज किया गया है। अफ्रीका एवेन्यू इलाके में सुबह 6 बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 142 रिकॉर्ड किया गया, जो ‘मॉडरेट’ श्रेणी में आता है। वहीं दिल्ली के अन्य प्रमुख इलाकों में AQI अभी भी चिंताजनक बना हुआ है। पूसा में AQI 248, शादीपुर में 238, पंजाबी बाग-शिवाजी पार्क में 269, नॉर्थ कैंपस दिल्ली मिल्क स्कीम कॉलोनी में 249 और मुंडका इलाके में 278 दर्ज किया गया।

    पहाड़ों पर माइनस में तापमान

    पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ी इलाकों में तापमान तेजी से गिर गया है। जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में तापमान माइनस 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि लद्दाख के द्रास में माइनस 15 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मनाली और आसपास के क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के चलते कई सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भी बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है।

    कोहरे और शीतलहर का अलर्ट

    IMD के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और उत्तरी मध्य प्रदेश में आज घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। उत्तर प्रदेश और बिहार में कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां दृश्यता बेहद कम हो सकती है। राजस्थान के 17 जिलों में कोहरे के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि मध्य प्रदेश के करीब 20 जिलों में बारिश की चेतावनी दी गई है।

    बिहार और यूपी में बदलेगा मौसम

    बिहार के पांच जिलों में घने कोहरे की चेतावनी जारी की गई है। राजधानी पटना में हल्के बादल छाए रहेंगे और धुंधली धूप के बीच ठंड का असर बढ़ सकता है। वहीं उत्तर प्रदेश में प्रयागराज, वाराणसी, चित्रकूट, झांसी, आजमगढ़ और बलिया समेत कई जिलों में शीतलहर और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, मथुरा और आगरा में घना कोहरा छाए रहने की आशंका है।

    मध्य प्रदेश और राजस्थान में अलर्ट

    मध्य प्रदेश के जबलपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, सिवनी, डिंडोरी और पांढुर्ना जिलों में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं राजस्थान में धौलपुर, जयपुर, अजमेर, अलवर, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर और बूंदी में येलो अलर्ट घोषित किया गया है। चित्तौड़गढ़, चूरू और दौसा में आंधी-तूफान की भी चेतावनी दी गई है।कुल मिलाकर, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर भारत में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। आने वाले कुछ दिनों तक ठंड, कोहरा, बारिश और बर्फबारी लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मौसम विभाग की सलाह मानते हुए सतर्क रहना और आवश्यक सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है।