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  • मुनाफावसूली के चलते सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, कीमतें करीब 1% तक लुढ़कीं!

    मुनाफावसूली के चलते सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, कीमतें करीब 1% तक लुढ़कीं!


    नई दिल्ली।सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को Multi Commodity Exchange (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में करीब 1% तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग में कमी आने से कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।

    सोने में हल्की कमजोरी, लेकिन सपोर्ट कायम

    एमसीएक्स पर सोने का जून वायदा करीब 0.55% गिरकर 1,52,585 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा। कारोबार के दौरान यह 1,52,419 रुपये के निचले स्तर तक गया, जबकि ऊपरी स्तर 1,52,990 रुपये रहा। विश्लेषकों का मानना है कि सोना फिलहाल 1,52,500 रुपये के आसपास सपोर्ट ले रहा है। निचले स्तरों पर खरीदारी जरूर देखने को मिल रही है, लेकिन मजबूत तेजी के संकेत अभी नहीं हैं। अगर कीमत 1,53,000 रुपये के ऊपर टिकती है, तो यह 1,55,000 रुपये तक जा सकती है। वहीं, अगर सोना 1,52,000 रुपये के नीचे फिसलता है, तो इसमें और गिरावट आकर यह 1,50,000 से 1,48,000 रुपये तक जा सकता है।

    चांदी भी दबाव में, लेकिन इंडस्ट्रियल डिमांड से सहारा

    चांदी का मई वायदा भी करीब 0.96% गिरकर 2,41,435 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता नजर आया। दिन के दौरान यह 2,41,510 रुपये के निचले स्तर तक पहुंचा, जबकि ऊपरी स्तर 2,43,704 रुपये रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी को 2,42,000 रुपये के आसपास सपोर्ट मिल रहा है, जहां सेफ-हेवन और इंडस्ट्रियल डिमांड दोनों का सहारा बना हुआ है। हालांकि, इसकी चाल फिलहाल सतर्क बनी हुई है।

    आगे क्या रहेगा रुख?

    चांदी के लिए 2,45,000 से 2,47,000 रुपये के बीच मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। अगर यह स्तर टूटता है, तो कीमत 2,50,000 से 2,52,000 रुपये तक जा सकती है। वहीं नीचे की ओर 2,40,000 रुपये का स्तर अहम है, जिसके टूटने पर यह 2,36,000 से 2,35,000 रुपये तक गिर सकती है।

    बाजार का मूड बदल रहा है

    हाल के दिनों में निवेशक सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों से हटकर शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कुछ नरमी के संकेत भी सेफ-हेवन डिमांड को कमजोर कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच जारी अनिश्चितता के कारण सोना-चांदी में बड़ी गिरावट फिलहाल सीमित रह सकती है।

  • अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए 15 अप्रैल से शुरू होगा पंजीकरण अभियान…

    अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए 15 अप्रैल से शुरू होगा पंजीकरण अभियान…


    नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। बाबा बर्फानी के पवित्र दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों भक्त कठिन लेकिन आस्था से भरी इस यात्रा का हिस्सा बनते हैं। आगामी यात्रा के लिए प्रशासनिक तैयारियां तेज हो चुकी हैं और पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण दिशा निर्देश सामने आ गए हैं। इस बार भी यात्रा को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

    पंजीकरण प्रक्रिया की शुरुआत और व्यवस्था
    अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए पंजीकरण 15 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 20 मई 2026 तक चलेगा। देशभर में निर्धारित बैंक शाखाओं के माध्यम से श्रद्धालु अपना एडवांस रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इसके लिए बड़ी संख्या में बैंक शाखाओं को अधिकृत किया गया है ताकि देश के अलग अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को आसानी से सुविधा मिल सके। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर के कई जिलों में भी पंजीकरण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

    इस बार पंजीकरण प्रक्रिया को आधार आधारित बायोमैट्रिक प्रणाली से जोड़ा गया है ताकि पहचान और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। व्यक्तिगत और समूह दोनों प्रकार के पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। समूह पंजीकरण में निर्धारित संख्या के अनुसार श्रद्धालु एक साथ आवेदन कर सकते हैं और इसके लिए एक जिम्मेदार समूह लीडर की नियुक्ति अनिवार्य होगी जो सभी औपचारिकताओं को पूरा करेगा।

    आयु सीमा और स्वास्थ्य संबंधी सख्त नियम

    यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इस बार भी आयु सीमा से जुड़े नियम लागू किए गए हैं। 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी जबकि 70 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालु भी इस यात्रा में शामिल नहीं हो सकेंगे। यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    हर श्रद्धालु के लिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र अनिवार्य किया गया है। यह प्रमाणपत्र केवल अधिकृत चिकित्सक या मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य संस्थान से ही जारी होना चाहिए। बिना वैध स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के किसी भी प्रकार का पंजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा के दौरान संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना है।

    यात्रा परमिट और मार्ग व्यवस्था
    पंजीकरण पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को यात्रा परमिट जारी किया जाएगा जिसमें उनके यात्रा मार्ग और तारीख की पूरी जानकारी होगी। अमरनाथ यात्रा दो प्रमुख मार्गों से संचालित होती है जिनमें पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग शामिल हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा और शारीरिक क्षमता के अनुसार किसी भी मार्ग का चयन कर सकते हैं।

    इस बार RFID आधारित पहचान प्रणाली को अनिवार्य किया गया है। बिना RFID कार्ड के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह प्रणाली यात्रा के दौरान सुरक्षा और निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी।

    विदेशी श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रावधान
    विदेशी श्रद्धालुओं के लिए अलग पंजीकरण व्यवस्था लागू की गई है। उन्हें निर्धारित बैंकिंग और प्रशासनिक माध्यमों के जरिए आवेदन करना होगा और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें पासपोर्ट और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं।

    विदेशी श्रद्धालुओं के लिए अलग शुल्क निर्धारित किया गया है और समूह में आवेदन करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यह प्रक्रिया भी पहले आओ पहले पाओ के आधार पर लागू होगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

    यात्रा अवधि और प्रशासनिक तैयारी

    परंपरागत रूप से यह यात्रा जून के अंत में प्रारंभ होकर अगस्त में रक्षा बंधन के आसपास समाप्त होती है। इस दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा, चिकित्सा और आपातकालीन सेवाओं को और मजबूत किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति की पूरी जांच अवश्य कराएं और ऊंचाई वाले क्षेत्रों की जलवायु को ध्यान में रखते हुए उचित तैयारी के साथ यात्रा पर निकलें। समय पर पंजीकरण, सही दस्तावेज और नियमों का पालन इस पवित्र यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • कैलाश खेर के नाम पर संगीत सहयोग का झांसा देकर लाखों की ठगी का आरोप..

    कैलाश खेर के नाम पर संगीत सहयोग का झांसा देकर लाखों की ठगी का आरोप..


    नई दिल्ली।मनोरंजन जगत से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर के नाम का गलत इस्तेमाल कर एक गीतकार से लाखों रुपये की ठगी किए जाने का आरोप लगाया गया है। यह मामला न केवल डिजिटल भरोसे की कमजोरी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह पहचान और प्रसिद्ध हस्तियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को आसानी से निशाना बनाया जा रहा है।

    संगीत सहयोग के नाम पर रची गई ठगी की योजना
    पीड़ित गीतकार चैतन्य गोविंद कन्हैया, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और वर्तमान में मुंबई में रहते हैं, एक परिचित के माध्यम से आरोपी से जुड़े थे। आरोपी ने खुद को ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जो कैलाश खेर से उनका गाना रिकॉर्ड करवा सकता है। शुरुआती बातचीत के दौरान कुछ ऐसी स्थितियां बनाई गईं जिससे पीड़ित का विश्वास धीरे धीरे मजबूत होता गया और उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि यह अवसर पूरी तरह वास्तविक है।

    ऑनलाइन बातचीत और मुलाकात से बढ़ा भरोसा
    आरोपी ने कथित रूप से पीड़ित की ऑनलाइन बातचीत एक ऐसे व्यक्ति से करवाई, जिसे कैलाश खेर बताया गया। बातचीत के दौरान यह आश्वासन दिया गया कि आगे की प्रक्रिया उनके मैनेजर के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके बाद दोनों के बीच व्यक्तिगत मुलाकात भी हुई, जहां रिकॉर्डिंग और कॉन्ट्रैक्ट को अंतिम रूप देने के नाम पर वित्तीय मांग की गई। इस दौरान पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि यह एक पेशेवर संगीत प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

    एडवांस भुगतान के बाद टूटा भरोसा
    विश्वास में आकर पीड़ित ने आरोपी द्वारा बताए गए खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। भुगतान के बाद आरोपी ने संपर्क बनाए रखना बंद कर दिया। जब पीड़ित ने दबाव बनाना शुरू किया, तो उन्हें एक चेक दिया गया जो बाद में बाउंस हो गया। इस घटना के बाद उन्हें संदेह हुआ और जब उन्होंने वास्तविक मैनेजमेंट टीम से संपर्क किया, तो सामने आया कि इस तरह की किसी भी परियोजना या बातचीत की कोई पुष्टि नहीं थी।

    पुलिस में शिकायत और जांच शुरू
    सच्चाई सामने आने के बाद पीड़ित ने संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस तरह की ठगी में और कौन कौन शामिल हो सकता है।

    डिजिटल युग में बढ़ते फ्रॉड पर चेतावनी
    यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि डिजिटल और पेशेवर संपर्कों में बिना पूरी पुष्टि के किसी भी वित्तीय लेनदेन से बचना चाहिए। खासकर जब मामला किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ा हो, तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है।

  • इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच होगी अहम वार्ता, पाकिस्तान मेजबान, इजरायली हमलों ने बढ़ाई चिंता

    इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच होगी अहम वार्ता, पाकिस्तान मेजबान, इजरायली हमलों ने बढ़ाई चिंता


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की मेजबानी पाकिस्तान करने जा रहा है। शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली इस अहम बैठक से पहले पाकिस्तान ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी है। हालांकि, क्षेत्रीय हालात और इजरायल के हालिया हमलों को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

    ईरान की कड़ी चेतावनी से बढ़ी चिंता

    वार्ता से ठीक पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने चेतावनी दी है कि लेबनान पर इजरायल के हमले शुरुआती युद्धविराम का उल्लंघन हैं और इससे बातचीत पर गंभीर असर पड़ सकता है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि ऐसे कदम शांति प्रक्रिया को “निरर्थक” बना सकते हैं। लेबनान में हुए हालिया हमलों में भारी जनहानि की रिपोर्ट के बाद तेहरान का रुख और सख्त हो गया है, और उसने संकेत दिया है कि वह अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा।

    इस्लामाबाद में हाई-लेवल डिप्लोमैसी की तैयारी

    पाकिस्तान इस पूरी वार्ता प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख के बीच क्षेत्रीय शांति प्रयासों की समीक्षा भी की गई है। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को भरोसा दिलाया है कि सभी विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को “पूर्ण सुरक्षा” प्रदान की जाएगी और बातचीत को सफल बनाने के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा।

    ईरानी पक्ष में अब भी संशय बरकरार
    पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघादम ने स्पष्ट किया है कि इजरायली हमलों के चलते शांति वार्ता को लेकर गंभीर संदेह बना हुआ है। इसके बावजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहा है और प्रस्तावित 10-बिंदु एजेंडे पर बातचीत करेगा।

    सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी

    वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें वरिष्ठ अमेरिकी नेतृत्व के साथ प्रमुख रणनीतिक सलाहकार भी मौजूद हो सकते हैं। पाकिस्तान ने अमेरिकी पक्ष को आश्वासन दिया है कि उनकी यात्रा के दौरान अभेद्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इस बीच सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा के लिए एक विशेष टीम पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुकी है।

    शांति समझौते पर वैश्विक नजरें
    इस वार्ता में मुख्य ध्यान दीर्घकालिक शांति ढांचे पर रहेगा, जिसमें प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा गारंटी और ईरान के परमाणु व मिसाइल कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बातचीत सफल होती है या असफल, इसका सीधा असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ेगा।

  • जेन-Z पार्टी की अटकलें: AAP के राघव चड्ढा के इंस्टा पोस्ट से बढ़ी चर्चाएं

    जेन-Z पार्टी की अटकलें: AAP के राघव चड्ढा के इंस्टा पोस्ट से बढ़ी चर्चाएं

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) में कथित मतभेदों के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर नई राजनीतिक संभावनाओं की चर्चा तेज हो गई है। खासकर उनके इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो और उस पर की गई टिप्पणी ने यह अटकलें पैदा कर दी हैं कि वह युवाओं, खासकर जेन-Z को केंद्र में रखकर नई पार्टी बनाने पर विचार कर सकते हैं।

    दरअसल, राज्यसभा में AAP के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने तीन वीडियो जारी किए हैं। इन वीडियो में उन्होंने संकेत दिया कि वह इस बदलाव को सहज रूप से स्वीकार करने वाले नहीं हैं और सार्वजनिक मुद्दों को उठाते रहेंगे। इसी बीच इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक रील ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    इंस्टाग्राम रील से शुरू हुई चर्चा
    चड्ढा ने “Seedhathok” नाम के एक क्रिएटर की रील शेयर की, जिसमें समर्थक ने सुझाव दिया कि उन्हें युवाओं के लिए “Gen-Z” आधारित नई राजनीतिक पार्टी बनानी चाहिए। इस रील पर चड्ढा ने “दिलचस्प विचार” लिखकर प्रतिक्रिया दी। बस इसी टिप्पणी के बाद नई पार्टी को लेकर अटकलें तेज हो गईं।

    समर्थक ने क्या कहा?
    रील में क्रिएटर रिहान ने कहा कि कई युवा चाहते हैं कि चड्ढा मौजूदा मतभेदों के बावजूद अपनी पार्टी बनाएं। उनका मानना है कि किसी दूसरी पार्टी में जाने की बजाय नई पार्टी बनाना उनके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि युवा वर्ग उन्हें व्यापक समर्थन दे सकता है।

    पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी हलचल
    पिछले सप्ताह AAP ने चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाकर उनकी जगह सांसद अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया। यह फैसला कथित तौर पर चड्ढा और पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच मतभेदों की खबरों के बीच लिया गया।

    ‘पिक्चर अभी बाकी है’ वाला संदेश
    AAP द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में चड्ढा ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने पंजाब से जुड़े मुद्दों—भूजल संकट, भगत सिंह से जुड़े संदर्भ और अन्य क्षेत्रीय विषय—उठाए। वीडियो को उन्होंने “छोटा सा ट्रेलर” बताते हुए कहा, “पिक्चर अभी बाकी है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब उनके लिए केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनका घर और कर्तव्य है।

    फिलहाल, चड्ढा ने नई पार्टी बनाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सोशल मीडिया संकेतों और हालिया घटनाक्रमों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।

  • आईपीएल सट्टेबाजी का भंडाफोड़: भाजपा मंडल उपाध्यक्ष समेत छह गिरफ्तार, नकदी व उपकरण बरामद

    आईपीएल सट्टेबाजी का भंडाफोड़: भाजपा मंडल उपाध्यक्ष समेत छह गिरफ्तार, नकदी व उपकरण बरामद

    मथुरा। आईपीएल मैचों पर सट्टेबाजी के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक मंडल उपाध्यक्ष भी शामिल है। पुलिस ने मौके से नकदी, मोबाइल फोन और सट्टेबाजी से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं।
    थाना सदर बाजार पुलिस और एसओजी टीम ने संयुक्त छापेमारी करते हुए शिवधाम कॉलोनी, औरंगाबाद स्थित एक मकान से आईपीएल सट्टेबाजी गिरोह का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके पास से 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, चार्जर, कैलकुलेटर, एक्सटेंशन बोर्ड, तीन नोटबुक (सट्टा डायरी), दो पेन, चेकबुक और 1,63,530 रुपये नकद बरामद किए।

    शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई
    पुलिस को पिछले कुछ समय से शहर में आईपीएल सट्टेबाजी संचालित होने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद एसएसपी श्लोक कुमार ने क्राइम ब्रांच को कार्रवाई के निर्देश दिए।

    बुधवार रात सीओ सिटी आशना चौधरी के नेतृत्व में एसओजी और थाना सदर बाजार टीम ने संयुक्त रूप से छापा मारा।

    भाजपा नेता समेत ये आरोपी गिरफ्तार
    पुलिस के अनुसार आदिल, रिजवान, किशोर, मुकेश, बांके बिहारी और बॉबी को मौके से गिरफ्तार किया गया। इनमें बांके बिहारी भाजपा सदर मंडल के उपाध्यक्ष बताए जा रहे हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर चालान किया गया है।

    राजनीतिक हलकों में चर्चा
    भाजपा महानगर अध्यक्ष हरिशंकर राजू यादव से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

    हाल ही में मंडल कार्यकारिणी के गठन के बाद इस गिरफ्तारी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

    कार्रवाई में शामिल टीम
    छापेमारी में प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार, एसओजी प्रभारी संदीप कुमार सहित थाना सदर और एसओजी की संयुक्त टीम शामिल रही।

    पुलिस का कहना है कि आईपीएल सट्टेबाजी में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है और जांच जारी है।

  • पाक मंत्री के बयान से बढ़ा विवाद, इजरायल ने दी कड़ी चेतावनी, कहा- ये टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं करेंगे

    पाक मंत्री के बयान से बढ़ा विवाद, इजरायल ने दी कड़ी चेतावनी, कहा- ये टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं करेंगे


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय विवाद में घिर गया है। लेबनान में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान ने इजरायल को भड़का दिया है। इजरायल ने साफ चेतावनी दी है कि इस तरह की टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

    लेबनान हमलों पर बयान से बढ़ा तनाव
    ख्वाजा आसिफ ने लेबनान पर इजरायली हमलों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उसे नरसंहार बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इजरायल को मानवता के लिए खतरा और “कैंसर” तक कह दिया। अपने बयान में उन्होंने गाजा, ईरान और लेबनान में जारी हिंसा का हवाला देते हुए तीखी आलोचना की।

    इजरायल की तीखी प्रतिक्रिया

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस बयान को बेहद आपत्तिजनक बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के लिए इजरायल के विनाश की बात स्वीकार्य नहीं हो सकती, खासकर तब जब वह खुद को शांति प्रक्रिया में निष्पक्ष मध्यस्थ बताता हो।

    विदेश मंत्री ने बताया अनुचित बयान

    इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी इस टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे यहूदी-विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान शांति वार्ता की भावना के खिलाफ हैं और ऐसे शब्द किसी जिम्मेदार राष्ट्र के अनुरूप नहीं हैं।

    शांति वार्ता के बीच बढ़ा सैन्य तनाव
    इस बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि इजरायल लेबनान के साथ जल्द सीधी बातचीत शुरू करना चाहता है। हालांकि हाल के दिनों में इजरायल ने हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं, जिनमें भारी नुकसान की खबर है।

    ईरान की चेतावनी, बातचीत पर असर
    लेबनान पर हमलों के बाद ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उसका कहना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई से शांति वार्ता का महत्व कम हो जाता है और बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

  • दिन में मशहूर आर्किटेक्ट, रात में सीरियल किलर: ‘गिलगो बीच’ केस में पिज्जा के टुकड़े से पकड़ा गया आरोपी

    दिन में मशहूर आर्किटेक्ट, रात में सीरियल किलर: ‘गिलगो बीच’ केस में पिज्जा के टुकड़े से पकड़ा गया आरोपी

    न्यूयॉर्क। करीब दो दशकों तक दहशत फैलाने वाले चर्चित ‘गिलगो बीच’ सीरियल किलर मामले में बड़ा मोड़ आया है। लॉन्ग आइलैंड के 62 वर्षीय आर्किटेक्ट रेक्स ह्युएरमैन ने अदालत में महिलाओं की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली है। 1993 से 2010 के बीच कई महिलाओं की गला घोंटकर हत्या की गई थी और उनके शवों को समुद्र तटीय इलाके में फेंक दिया जाता था।

    इस सनसनीखेज मामले पर Netflix ने ‘Gone Girls: The Long Island Serial Killer’ नाम से डॉक्यूमेंट्री सीरीज भी बनाई है, जिसने इस केस को वैश्विक चर्चा में ला दिया।

    कैसे खुला राज?

    मामले की परतें 2010 में 23 वर्षीय शैनन गिल्बर्ट के लापता होने के बाद खुलनी शुरू हुईं। उसने 911 पर मदद मांगते हुए कॉल किया था। तलाश के दौरान ओशन पार्कवे के पास पुलिस को कई मानव अवशेष मिले, जिससे सीरियल किलर की आशंका पुख्ता हुई।

    शुरुआत में चार पीड़ितों—मेलिसा बार्थेलेमी, मौरीन ब्रेनार्ड-बार्न्स, एम्बर लिन कॉस्टेलो और मेगन वाटरमैन—को “गिलगो फोर” नाम दिया गया।

    दोहरी जिंदगी जी रहा था आरोपी

    रेक्स ह्युएरमैन मैनहट्टन में एक सफल आर्किटेक्ट था और ‘RH Consultants & Associates’ नाम की कंपनी चलाता था। पड़ोसियों के मुताबिक वह शांत स्वभाव का पारिवारिक व्यक्ति लगता था, लेकिन जांच में सामने आया कि वह दोहरी जिंदगी जी रहा था।

    पुलिस ने उसके घर की 12 दिन तक तलाशी ली, जिसमें बेसमेंट की तिजोरी से 279 हथियार और कंप्यूटर से हत्या की योजना से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए।

    कैसे फंसा ‘पिज्जा’ से?

    जांच के दौरान पुलिस को एक फेंके गए पिज्जा बॉक्स से डीएनए सैंपल मिला, जिसे ह्युएरमैन से मैच किया गया। यही अहम सबूत उसे गिरफ्तारी तक ले आया।

    अदालत में कबूलनामा

    8 अप्रैल को आरोपी ने माना कि उसने बर्नर फोन से महिलाओं को पैसों का लालच देकर बुलाया, घर में हत्या की और शवों को बोरियों में लपेटकर गिलगो बीच इलाके में फेंक दिया।

    अब क्या होगी सजा?

    आगामी 17 जून को उसे फर्स्ट-डिग्री मर्डर के लिए बिना पैरोल उम्रकैद और सेकंड-डिग्री मर्डर के मामलों में 25 साल से उम्रकैद तक की सजा सुनाई जा सकती है।

    सफोल्क काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी रे टियरनी ने कहा कि आरोपी आम पारिवारिक व्यक्ति होने का दिखावा करता रहा, जबकि वह महिलाओं को निशाना बनाकर उनकी हत्या करता था।

  • ज्योतिराव फुले ने शिक्षा को बनाया सामाजिक क्रांति का सबसे बड़ा हथियार..

    ज्योतिराव फुले ने शिक्षा को बनाया सामाजिक क्रांति का सबसे बड़ा हथियार..


    नई दिल्ली। भारत के सामाजिक इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे रहे हैं जिन्होंने परंपराओं और रूढ़ियों की जड़ों को चुनौती देकर एक नए युग की नींव रखी। ज्योतिराव गोविंदराव फुले ऐसे ही एक क्रांतिकारी विचारक और समाज सुधारक थे, जिन्होंने शिक्षा को हथियार बनाकर जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़ी। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि परिवर्तन केवल विचारों से नहीं बल्कि साहसिक कदमों से भी आता है।

    एक घटना जिसने बदल दिया जीवन का उद्देश्य
    साल 1848 के आसपास की एक घटना ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। एक पारिवारिक विवाह समारोह में शामिल होने के दौरान उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा और अपमानजनक व्यवहार के कारण उन्हें वहां से बाहर कर दिया गया। यह अनुभव उनके लिए केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं था बल्कि एक गहरी सामाजिक सच्चाई का सामना था। इसी क्षण उन्होंने तय किया कि उनका जीवन अब इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था को चुनौती देने के लिए समर्पित होगा।

    शिक्षा को बनाया परिवर्तन का सबसे बड़ा साधन

    ज्योतिराव फुले ने यह समझ लिया था कि समाज में फैली अज्ञानता ही असमानता की जड़ है। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक मुक्ति का सबसे शक्तिशाली माध्यम माना और इसे तृतीय नेत्र की संज्ञा दी, जो व्यक्ति को सोचने और समझने की क्षमता प्रदान करता है। इसी सोच के तहत उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को पढ़ाना शुरू किया और जल्द ही शिक्षा आंदोलन की शुरुआत की नींव रखी।

    भारत में पहली लड़कियों की शिक्षा की शुरुआत

    उस दौर में जब महिलाओं और निम्न वर्गों के लिए शिक्षा की कल्पना भी असंभव मानी जाती थी, फुले दंपति ने पुणे में लड़कियों के लिए पहला विद्यालय स्थापित किया। यह कदम सामाजिक परंपराओं के खिलाफ एक बड़ा विद्रोह था। सावित्रीबाई फुले जब स्कूल पढ़ाने जाती थीं, तो उन्हें सामाजिक विरोध और हिंसा का सामना करना पड़ता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और शिक्षा के मिशन को आगे बढ़ाया।

    सामाजिक सुधार की व्यापक पहल
    फुले का कार्य केवल शिक्षा तक सीमित नहीं था। उन्होंने बाल विवाह जैसी कुप्रथा का विरोध किया और विधवा महिलाओं की सुरक्षा के लिए अपने घर को एक आश्रय स्थल में बदल दिया। यहां उन्होंने परित्यक्त महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा देने की पहल की, जो उस समय के समाज के लिए एक असाधारण कदम था।

    सत्यशोधक समाज और सामाजिक समानता का आंदोलन
    साल 1873 में उन्होंने सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य समाज में धार्मिक और सामाजिक बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना था। उनका मानना था कि मनुष्य और ईश्वर के बीच किसी मध्यस्थ की आवश्यकता नहीं है। इस आंदोलन ने विवाह और सामाजिक अनुष्ठानों को सरल और समानता आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    लेखन और वैचारिक क्रांति

    फुले ने अपने लेखन के माध्यम से भी समाज को जागरूक किया। उनकी कृतियों में समाज की असमानता, किसानों की स्थिति और प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों को उजागर किया गया। उन्होंने केवल समस्याएं नहीं बताईं बल्कि समाधान की दिशा भी दिखाई, जिसमें शिक्षा, कृषि सुधार और सामाजिक न्याय प्रमुख थे।

    जीवन का अंतिम पड़ाव और अमर विरासत
    उनके विचारों और योगदान को देखते हुए उन्हें समाज ने महात्मा की उपाधि दी। उनका जीवन संघर्ष, विचार और सेवा का प्रतीक बन गया। जीवन के अंतिम वर्षों में भी उनका उद्देश्य समाज में समानता और न्याय की स्थापना ही रहा। उनका योगदान आज भी सामाजिक सुधार आंदोलनों के लिए प्रेरणा स्रोत बना हुआ है।

  • ‘अपने बयान पर कायम हूं’: कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी मामले में माफी से किया इनकार

    ‘अपने बयान पर कायम हूं’: कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी मामले में माफी से किया इनकार

    महाराष्ट्र। मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा गुरुवार को महाराष्ट्र विधानसभा की एक कमेटी के सामने पेश हुए।
    यह मामला उनके द्वारा राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है। पूछताछ के दौरान कामरा ने स्पष्ट कहा कि उन्हें अपने बयान पर कोई पछतावा नहीं है और वे माफी भी नहीं मांगेंगे।

    कमेटी के समक्ष पेशी के बाद कामरा ने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि वे अपने बयान पर कायम हैं और झूठी या औपचारिक माफी नहीं देंगे। उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी होने के बाद इस मामले की जांच के लिए विधानसभा की कमेटी गठित की गई थी।

    कमेटी में पूछे गए सवाल

    कमेटी के अध्यक्ष प्रसाद लाड ने बताया कि कामरा से करीब 24 सवाल पूछे गए। उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अपने बयान पर पछतावा है, जिस पर उन्होंने इनकार किया। माफी मांगने के सवाल पर भी उन्होंने साफ कहा कि यदि वे माफी मांगते हैं तो वह सच्ची नहीं होगी और इससे कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

    माफी पर कमेटी का रुख

    कमेटी ने कामरा को बताया कि यदि वे बिना शर्त माफी मांगते हैं तो मामले पर अलग तरीके से विचार किया जा सकता है। इस पर उनके वकील ने कहा कि वे इस बारे में चर्चा कर लिखित जवाब ईमेल के जरिए देंगे।

    गौरतलब है कि इस मामले की शिकायत प्रवीण दरेकर ने दर्ज कराई थी, जो भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य हैं।