Blog

  • ‘द राजा साहब’ का बॉक्स ऑफिस डेब्यू: प्रभास ने मचाया धमाल या मिली शिकायतें? सोशल मीडिया में हुई बहस

    ‘द राजा साहब’ का बॉक्स ऑफिस डेब्यू: प्रभास ने मचाया धमाल या मिली शिकायतें? सोशल मीडिया में हुई बहस

    नई दिल्‍ली  । तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास की बहुप्रतीक्षित हॉरर-कॉमेडी ‘द राजा साहब’ आखिरकार रिलीज हो चुकी है। सुबह के शो से पहले ही थिएटरों के बाहर भीड़ थी। पोस्टर के सामने सेल्फी, हाथों में पॉपकॉर्न और आंखों में जबरदस्‍त उत्‍साह लिए दर्शक सिनेमाघरों दिखाई दिए। जैसे ही पर्दा उठा, डर और ठहाकों के वादे के साथ फिल्म ने देशभर में हाउसफुल शोज की शुरुआत की। पहले दिन की जबरदस्त ओपनिंग ने बॉक्स ऑफिस पर गर्मी बढ़ा दी, लेकिन सोशल मीडिया खासतौर पर X (पूर्व ट्विटर) पर बहस भी उतनी ही तेज देखी जा रही है।

    रिलीज से पहले हाइप अपने चरम पर था। थलपति विजय की ‘जना नयांगन’ के स्थगित होने से ‘द राजा साहब’ को 9,000 से अधिक शोज़ के साथ सिंगल रिलीज़ का फायदा मिला। Sacnilk के मुताबिक एडवांस बुकिंग से भारत में ही 5.66 करोड़ रुपये जुटे। ‘सालार’ और ‘कल्कि 2898 AD’ के बाद प्रभास को एक अलग अवतार में देखने की उत्सुकता फैंस में साफ झलक रही थी। निर्देशक मारुति ने इस बार उन्हें एक भूतिया हवेली में फंसे राजा के रूप में पेश किया, जहां डर के बीच हंसी की गुंजाइश भी है।

    पहले शो के बाद ट्विटर पर आग
    जैसे ही पहला शो खत्म हुआ, #TheRajaSaab और #Prabhas ट्रेंड करने लगे। प्रतिक्रियाएं तीखी थीं। एक यूज़र ने लिखा, “पहला हाफ ढीला है, कहानी खिंची हुई लगती है। लॉजिक की कमी खलती है, अब दूसरा हाफ ही फैसला करेगा।” वहीं VFX पर सवाल उठाते हुए किसी ने कहा, “सेट भव्य हैं, पर डरावने सीन असर नहीं छोड़ते। बैकग्राउंड म्यूजिक जरूरत से ज्‍यादा तेज है।”

    आलोचनाओं के बीच प्रशंसा की आवाजें भी कम नहीं थीं। एक फैन अकाउंट ने जोश में लिखा, “आखिरी 40 मिनट फायर हैं! अस्पताल वाला सीन और क्लाइमेक्स, पूरा पैसा वसूल।” किसी ने प्रभास की एनर्जी और स्क्रीन प्रेजेंस को फिल्म की जान बताया। यही वजह है कि शुरुआती बहस का फोकस एक सवाल पर टिक गया! क्या कमजोर पहला हाफ मजबूत क्लाइमेक्स की भरपाई कर पाएगा?

    कहानी, कास्ट और कॉकटेल
    ‘द राजा साहब’ की कहानी एक पुरानी हवेली के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां राजा (प्रभास) का सामना अजीब तरह की भूतिया घटनाओं से होता है। हॉरर के बीच कॉमेडी ट्रैक्स दर्शकों को हंसाने का दावा करते हैं। मालविका मोहनन का तेलुगु डेब्यू चर्चा में है। प्रभास के साथ उनकी केमिस्ट्री को सराहा गया है। संजय दत्त का खलनायक अवतार और बोमन ईरानी, निधि अग्रवाल, रिद्धि कुमार व जरीना वहाब की मौजूदगी कहानी को सहारा देती है। राकुल प्रीत सिंह का आइटम सॉन्ग पहले से ही चार्ट में जगह बना चुका है।

    प्रोडक्शन वैल्यूज पर उंगली उठाना मुश्किल है। Ramoji Film City में शूट हुए ग्रैंड सेट्स, बड़े एक्शन सीक्वेंस और स्केल इस सब को लेकर कह सकते हैं कि सब कुछ फिल्म को ‘इवेंट’ बनाता है। मारुति ने पहले ही कहा था कि यह प्रभास के लिए एक लाइट-हार्टेड ब्रेक है ‘बाहुबली’ सरीखे भारी एक्शन के बाद।

    बॉक्स ऑफिस की नब्‍ज
    पहले दिन भारत में 25–30 करोड़ रुपये की कमाई का अनुमान है, जिसमें तेलुगु बेल्ट का योगदान सबसे बड़ा है। हिंदी वर्ज़न ने भी पांच करोड़ से अधिक जुटाकर सरप्राइज दिया। ओवरसीज़ में अमेरिका-यूके से 10 करोड़ के आसपास की ओपनिंग के साथ वर्ल्डवाइड कलेक्शन 40 करोड़ के पार बताया जा रहा है। सवाल यही है कि मिली-जुली प्रतिक्रियाओं के बीच वर्ड ऑफ माउथ किस तरफ झुकेगा?

    इस वक्‍त देखने में आ रहा है कि देश भर में अधिकांश महानगरों में मल्टीप्लेक्स में हाउसफुल बोर्ड लग जा रहे हैं। स्थानीय थिएटर मालिकों का कहना है कि युवाओं में प्रभास का क्रेज़ जबरदस्त है और वीकेंड पर भीड़ और बढ़ेगी। राज्य की फिल्म प्रमोशन पॉलिसी के चलते साउथ फिल्मों की पहुंच भी मजबूत हो रही है। प्रभास को लेकर फिलहाल यही है कि ‘द राजा साहब’ उनका पहला हॉरर-कॉमेडी प्रयोग है, फ्रेश भी, रिस्की भी। OTT राइट्स पहले ही बिक चुके हैं, लेकिन असली इम्तिहान सिनेमाघरों में है। क्या यह फिल्म 500 करोड़ क्लब की ओर बढ़ेगी या बहसों में उलझकर रफ्तार खो देगी? पहले दिन की ओपनिंग ने उम्मीद जगा दी है, अब फैसला दर्शक करेंगे।

  • नियम तोड़े, नहीं बख्शेंगे! RBI ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द

    नियम तोड़े, नहीं बख्शेंगे! RBI ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द

    नई दिल्‍ली। वित्तीय अनुशासन को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। रेगुलेटरी नियमों का लगातार उल्लंघन करने पर आरबीआई ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। इस कार्रवाई के साथ ही केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि ये कंपनियां अब किसी भी तरह का एनबीएफसी से जुड़ा कारोबार नहीं कर सकेंगी। यह फैसला आम निवेशकों और कर्ज लेने वालों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है।

    दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक ने यह कार्रवाई आरबीआई एक्ट, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए की है। केंद्रीय बैंक के अनुसार ये कंपनियां लंबे समय से जरूरी शर्तों और नियामकीय मानकों का पालन नहीं कर रही थीं, जिसके चलते उन्हें एनबीएफसी के रूप में काम करने की अनुमति वापस ले ली गई।

    मामले में सामने आया है कि आरबीआई द्वारा सात जनवरी 2026 को जारी सर्कुलर में बताया गया है कि इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के आदेश अलग-अलग तारीखों पर 9 दिसंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच जारी किए गए थे। इसका सीधा मतलब है कि इन तारीखों के बाद ये कंपनियां कानूनी रूप से किसी भी तरह का एनबीएफसी कारोबार नहीं कर सकतीं।

    क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?

    आरबीआई के मुताबिक, जिन 35 एनबीएफसी के खिलाफ यह कदम उठाया गया है, उन्होंने कई अहम नियमों का उल्लंघन किया। इनमें न्यूनतम नेट ओन्ड फंड (NOF) बनाए न रखना, पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) का पालन न करना, समय पर वित्तीय रिपोर्टिंग न करना और एसेट क्लासिफिकेशन से जुड़े मानकों की अनदेखी शामिल है। कई कंपनियां लंबे समय से निष्क्रिय (डोरमेंट) स्थिति में थीं, लेकिन इसके बावजूद उनका रजिस्ट्रेशन बरकरार था, जो वित्तीय प्रणाली के लिए जोखिम पैदा कर रहा था।

    आर्थ‍िक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई आरबीआई के ‘स्केल-बेस्ड रेगुलेशन’ और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की नीति का हिस्सा है। इससे पहले भी 2023 और 2024 में कई एनबीएफसी के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं।

    ये है 35 NBFCs की पूरी सूची

    सत्य प्रकाश कैपिटल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड

    AG सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

    ALB लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड

    ATM क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    कॉर्पोरेट कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

    डेसिसिव फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड

    डिवाइन इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    लिबर्टी प्राइवेट लिमिटेड सेल्स

    पर्ल्स हायर परचेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड

    क्वासर इंडिया फिनकैप प्राइवेट लिमिटेड

    सनलाइफ सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

    सनराइज मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड

    स्वितो फाइनेंस एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड

    त्रिवेणी विनिमय प्राइवेट लिमिटेड

    ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी मार्केटिंग लिमिटेड

    यूनिट्रॉन फिनलीज लिमिटेड

    वीरा सिक्योरिटीज एंड फिनलीज प्राइवेट लिमिटेड

    विनी फाइनेंशियल एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    शिवोम इन्वेस्टमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड

    अधिनाथ इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    एग्रोहा सेविंग्स लिमिटेड

    अहुसंस फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    अल्टर इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड

    एसोसिएटेड लीजिंग लिमिटेड

    अटलांटिक लीजिंग लिमिटेड

    BHL फॉरेक्स एंड फिनलीज लिमिटेड

    भरतपुरिया फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड

    दादा देव फाइनेंस एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड

    ईस्ट दिल्ली लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड

    इकोनॉमिक कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

    ESN फाइनेंस एंड कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड

    FMI इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    गणपति फिनकैप सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड

    गुडवर्थ सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

    गोपाल ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड

    बाजार और निवेशकों पर असर

    आरबीआई के इस कदम को वित्तीय बाजार में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। कमजोर और नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों के बाहर होने से एनबीएफसी सेक्टर की साख मजबूत होगी। दूसरी ओर इससे जुड़ा एक पक्ष ये भी है कि जिन निवेशकों या ग्राहकों का पैसा इन कंपनियों में फंसा है, उनके लिए यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है। ऐसे मामलों में निवेशकों को कानूनी रास्ता अपनाना पड़ सकता है, क्योंकि आरबीआई इन कंपनियों के लेन-देन की गारंटी नहीं देता।

    आम जनता के लिए आरबीआई की अहम सलाह

    आरबीआई ने इस मौके पर आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि किसी भी निवेश, लोन या वित्तीय लेन-देन से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित कंपनी आरबीआई में पंजीकृत है या नहीं। इसके लिए आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध एनबीएफसी की सूची देखी जा सकती है।

  • Magh Mela 2026: मकर संक्रांति पर शुभ स्नान का महासंयोग! नोट करें शुभ समय और महत्व

    Magh Mela 2026: मकर संक्रांति पर शुभ स्नान का महासंयोग! नोट करें शुभ समय और महत्व

    Magh Mela 2026 Snan: माघ मेले का दूसरा प्रमुख स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर किया जाएगा. मकर संक्रांति साल की सभी संक्रांतियों में खास स्थान रखती है, क्योंकि इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और इसे देवताओं का समय, अत्यंत शुभ और मंगलकारी काल माना जाता है. इस दिन प्रयागराज के माघ मेले के दौरान गंगा में स्नान करना बेहद पुण्यकारी माना जाता है और इसे हजारों यज्ञ करने के समान फल मिलता है. मकर संक्रांति के इस शुभ और महापुण्य काल में दान, त्याग और साधना करने का फल भी अत्यधिक बढ़ जाता है. यही कारण है कि माघ मेले में मकर संक्रांति का स्नान और दान लोगों के लिए विशेष महत्व रखते हैं.

    माघ मेले का दूसरा स्नान

    प्रयागराज का माघ मेला इस बार 45 दिनों तक चलेगा. मकर संक्रांति इस वर्ष 14 जनवरी को है, और इसी दिन षटतिला एकादशी भी है, जिससे स्नान का पुण्य और दोगुना हो जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, पौष पूर्णिमा पर संगम में 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया था. मकर संक्रांति पर लगभग 1 करोड़ श्रद्धालु स्नान करने का अनुमान है.मकर संक्रांति उत्तरायण सूर्य के आगमन का प्रतीक है और इसे अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना जाता है. इस दिन गंगा में स्नान और दान करने से आत्मा की शुद्धि, मानसिक शांति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.

    मकर संक्रांति स्नान का शुभ मुहूर्त

    इस वर्ष मकर संक्रांति पर विशेष पुण्यकाल दोपहर 3:13 बजे से शुरू होकर शाम 5:20 बजे तक रहेगा. इसी समय को महापुण्यकाल भी माना गया है, जब किए गए धार्मिक कर्म और दान अत्यधिक फलदायी माने जाते हैं.
    ब्रह्म मुहूर्त स्नान

    शास्त्रों के अनुसार माघ मेले के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इस बार मकर संक्रांति पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 बजे से लेकर 5:44 बजे तक रहेगा, जो भक्तों के लिए स्नान और ध्यान का सर्वोत्तम समय है.

    माघ मेले में मकर संक्रांति स्नान का महत्व

    मकर संक्रांति का स्नान आत्मा, आध्यात्म और गहरी आस्था का अद्वितीय महासंगम माना जाता है. इस दिन सूर्य अपने उत्तरायण पथ पर निकलता है. माघ मेले में गंगा में स्नान करने वाले श्रद्धालु भी अपने जीवन के अंधकार जैसे पाप, अशांति और बाधाओं को दूर करने की कामना करते हैं.

    स्नान के साथ दान, पूजा और भजन-कीर्तन भी पुण्य को बढ़ाते हैं. मकर संक्रांति पर माघ मेले में डुबकी लगाने से न केवल आत्मिक शुद्धि होती है, बल्कि मानसिक शांति, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है. यही कारण है कि माघ मेले का मकर संक्रांति स्नान लाखों श्रद्धालुओं के लिए जीवन में नए आरंभ और आध्यात्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक बन जाता है.

    माघ मेंले में होते हैं ये स्नान

    1. पौष पूर्णिमा स्नान

    तिथि: 3 जनवरी 2026

    माघ मेले की शुरुआत इसी दिन होती है. संगम में स्नान किया जाता है . इससे पूर्वजों को तृप्ति मिलती है.
    2. माघी पूर्णिमा स्नान

    तिथि: 17 जनवरी 2026

    इस दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है.

    3. मकर संक्रांति स्नान

    तिथि: 15 जनवरी 2026

    मकर संक्रांति के दिन सूर्य का उत्तरायण में प्रवेश होता है. इस दिन संगम में स्नान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है .

    4. मौनी अमावस्या स्नान

    तिथि: 18 जनवरी 2026

    मौनी अमावस्या माघ मेले का सबसे पवित्र दिन माना जाता है. मौन व्रत रखने और संगम में स्नान करने से आत्मिक शांति मिलती है.

    5. महाशिवरात्रि स्नान

    तिथि: 15 फरवरी 2026

    माघ मेले का समापन महाशिवरात्रि के दिन होता है. इस दिन संगम में स्नान करने से सभी पाप समाप्त होते हैं . इस स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

  • कड़ाके की ठंड ने मचाई परेशानी, ग्वालियर-चंबल अंचल में अगले दो दिन और सर्दी का असर रहेगा

    कड़ाके की ठंड ने मचाई परेशानी, ग्वालियर-चंबल अंचल में अगले दो दिन और सर्दी का असर रहेगा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में इस समय कड़ाके की सर्दी का दौर जारी है, और गुरुवार को कई इलाकों में कोल्ड डे की स्थिति रही। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक मौसम का मिजाज इसी तरह सर्द और शीतल रहेगा। ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के जिलों में घना कोहरा और शीतल दिन बने रहने की संभावना है। इस ठंड का असर फसलों पर भी पड़ सकता है, जिससे पाला पड़ने का खतरा बढ़ गया है।
    गुरुवार को प्रदेश में खजुराहो में सबसे कम तापमान 3.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा, शहडोल में भी शीतलहर का प्रभाव देखा गया। ग्वालियर और दतिया में अति घना कोहरा था, जिससे तापमान में गिरावट आई। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 10.4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जो उसके न्यूनतम तापमान 7.1 डिग्री सेल्सियस से महज 3.3 डिग्री अधिक था, और यह अब तक का सबसे कम दिन का तापमान था। प्रदेश के अन्य इलाकों में भी सर्दी का असर बना हुआ है। मुरैना, भिंड, श्यौपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर जैसे जिलों में शीतल दिन की स्थिति बनी रही।
    इन इलाकों में सुबह से ही घना कोहरा और सर्द हवाएं चल रही हैं, जिससे दिन के तापमान में अधिक वृद्धि नहीं हो पा रही है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इस कड़ाके की ठंड के कारण अगले दो दिनों तक प्रदेश में मौसम का यही हाल रहेगा। खासकर ग्वालियर, चंबल, रीवा, और सागर जैसे इलाकों में घना कोहरा और शीतल दिन का असर बने रहने की संभावना है। इसके अलावा, शीतलहर के चलते किसानों के लिए चिंता बढ़ गई है। ठंड के कारण फसलों पर पाले का असर पड़ सकता है, जिससे उत्पादकों को नुकसान होने का खतरा है।
    इस दौरान गेहूं, सरसों और अन्य ठंडी फसलों पर पाले का प्रभाव हो सकता है। इस सर्दी के कारण जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है। लोग ठंड से बचने के लिए घरों में कैद हो गए हैं, और सड़कों पर भी कम लोग नजर आ रहे हैं। खासकर सुबह और शाम के समय सर्दी का असर ज्यादा महसूस हो रहा है। ठंड के बढ़ते असर को देखते हुए सरकार और प्रशासन ने भी सतर्कता बरतने की अपील की है और लोगों से घनी धुंध में गाड़ी चलाते समय सावधानी बरतने की चेतावनी दी है।

  • स्लीपर बस या चलता-फिरता खतरा? सैकड़ों मौतों के बाद सरकार ने कसे शिकंजे

    स्लीपर बस या चलता-फिरता खतरा? सैकड़ों मौतों के बाद सरकार ने कसे शिकंजे

    नई दिल्ली। पिछले छह महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में स्लीपर कोच बसों से जुड़े भीषण सड़क हादसों और आग की घटनाओं ने परिवहन व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया। इन दुर्घटनाओं में अब तक करीब 145 यात्रियों की जान जा चुकी है। खासतौर पर रात के समय लंबी दूरी की यात्रा करने वाली स्लीपर बसों में आग लगने और आपात निकास की कमी के चलते जान-माल का भारी नुकसान हुआ। बढ़ते हादसों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया है।
    मान्यता प्राप्त कंपनियां ही बनाएंगी स्लीपर बस
    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नए नियमों की घोषणा करते हुए कहा कि अब स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल वही ऑटोमोबाइल कंपनियां या बॉडी बिल्डर्स कर सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त होगी। स्थानीय और मैनुअल बॉडी बिल्डर्स को स्लीपर बस बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे निर्माण गुणवत्ता में सुधार होगा और सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा।
    मौजूदा बसों में भी अनिवार्य होंगे नए सेफ्टी फीचर्स
    सरकार ने केवल नई बसों ही नहीं, बल्कि सड़कों पर चल रही सभी मौजूदा स्लीपर बसों में भी अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया है। इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, सेफ्टी हैमर, ड्राइवर की नींद का अलर्ट देने वाला सिस्टम और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) शामिल हैं। इन सुविधाओं से आपात स्थिति में यात्रियों की जान बचाने में मदद मिलेगी।
    AIS-052 बस बॉडी कोड का पालन जरूरी
    नए नियमों के तहत सभी स्लीपर बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड और संशोधित बस बॉडी कोड का पालन करना अनिवार्य होगा। यह संशोधित कोड 1 सितंबर 2025 से प्रभावी हो चुका है। बिना इस मानक को पूरा किए किसी भी स्लीपर बस का रजिस्ट्रेशन या संचालन संभव नहीं होगा। जो बसें इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें सड़कों से हटाया जा सकता है।
    यात्रियों की सुरक्षा होगी मजबूत
    AIS-052 भारत का आधिकारिक बस बॉडी सेफ्टी और डिजाइन मानक है, जिसमें बस की संरचना, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रावधान तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन सख्त कदमों का मकसद भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोकना और स्लीपर कोच सेवाओं को सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक बनाना है। नए नियमों से न सिर्फ यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि देश में सड़क सुरक्षा को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
  • राज्यपाल सीवी आनंद बोस को बम से उड़ाने की धमकी! पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट

    राज्यपाल सीवी आनंद बोस को बम से उड़ाने की धमकी! पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट

    पश्चिम बंगाल । पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकी मिलने के बाद राज्य और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। ‘बम से उड़ा देंगे’ जैसे गंभीर शब्दों वाली इस धमकी के बाद पूरे सुरक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है। राज्य पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त तैनाती के बीच राज्यपाल की जेड-प्लस सुरक्षा को और मजबूत किया गया है, जबकि धमकी देने वाले की पहचान और गिरफ्तारी के लिए साइबर और तकनीकी जांच तेज कर दी गई है।

    दरअसल, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को गुरुवार देर रात एक ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकी मिलने से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। धमकी भरे ईमेल में साफ शब्दों में लिखा गया कि राज्यपाल को बम से उड़ा दिया जाएगा। इस गंभीर मामले के सामने आते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया और आधी रात को उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक बुलाई गई।

    लोक भवन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह ईमेल रात करीब 11 बजे प्राप्त हुआ, जिसके तुरंत बाद राज्यपाल की सुरक्षा में तैनात एजेंसियों ने स्थिति की समीक्षा की। मामले की जानकारी पश्चिम बंगाल के डीजीपी, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी दे दी गई है।

    ईमेल में मोबाइल नंबर, जांच तेज

    इस मामले में एक अधिकारी ने बताया, धमकी देने वाले व्यक्ति ने ईमेल में अपना मोबाइल नंबर भी दिया है। इससे जांच एजेंसियों को तकनीकी तौर पर बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है। पुलिस का साइबर सेल ईमेल की आईपी ट्रैकिंग, मोबाइल नंबर की लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालने में जुटा है। आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं और यह भी जांच की जा रही है कि धमकी किसी संगठित साजिश या आतंकी नेटवर्क से तो जुड़ी नहीं है। धमकी के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस की सुरक्षा को और मजबूत कर दिया गया है। उन्हें पहले से ही जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन अब इसमें अतिरिक्त केंद्रीय बल जोड़े गए हैं।

    अधिकारियों के मुताबिक, राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के बीच समन्वय के तहत राज्यपाल की सुरक्षा में लगभग 60 से 70 केंद्रीय पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। राजभवन परिसर में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी और प्रवेश बिंदुओं पर सख्त चेकिंग की जा रही है। राज्यपाल के आवागमन के दौरान बुलेटप्रूफ वाहनों और एस्कॉर्ट की संख्या भी बढ़ा दी गई है।

    राज्य और केंद्र सतर्क

    इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय लगातार राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में है। केंद्र ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्यपाल की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर कोई चूक न हो। राज्य पुलिस को भी अतिरिक्त संसाधन और बल मुहैया कराए गए हैं।

    राजनीतिक घमासान तेज

    राज्यपाल को मिली धमकी के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति भी सुरक्षित नहीं हैं।

    भाजपा नेताओं का कहना है कि यह घटना राज्य में बढ़ते अपराध और राजनीतिक हिंसा का प्रमाण है। पार्टी ने मांग की है कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था पर तुरंत नियंत्रण करे और इस मामले में पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करे। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भाजपा के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि राज्य पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है और आरोपी को जल्द पकड़ लिया जाएगा।

    पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां

    आपको बतादें कि यह पहली बार नहीं है जब राज्यपाल सीवी आनंद बोस को धमकी मिली हो। पिछले कुछ वर्षों में उन्हें ईमेल और फोन के जरिए धमकियां मिलती रही हैं, जिसके चलते उनकी सुरक्षा को क्रमशः बढ़ाया गया था। मौजूदा घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा व्यापक समीक्षा की जा रही है। गौरतलब है कि इस धमकी ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • मध्य प्रदेश: सरकारी स्कूलों में 19 जनवरी को होगी पीटीएम, अभिभावकों को दिखायी जाएंगी प्रीबोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं

    मध्य प्रदेश: सरकारी स्कूलों में 19 जनवरी को होगी पीटीएम, अभिभावकों को दिखायी जाएंगी प्रीबोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 19 जनवरी को होने वाली पैरेंट्स-टीचर मीटिंग ,पीटीएम में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। इस दिन छात्रों के अभिभावकों को उनके बच्चों की प्रीबोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं भी दिखाई जाएंगी ताकि वे अपने बच्चों के प्रदर्शन का जायजा ले सकें और आगामी बोर्ड परीक्षा की तैयारी में सुधार कर सकें।इस साल, 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों की प्रीबोर्ड परीक्षाएं 13 जनवरी तक चल रही हैं, और इनके मूल्यांकन के बाद छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका दिखाई जाएगी।
    इसके बाद 19 जनवरी को आयोजित होने वाली पीटीएम के दौरान अभिभावकों को भी उनके बच्चों की उत्तरपुस्तिका दिखायी जाएगी। इस कदम से अभिभावकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके बच्चे की तैयारी किस स्तर पर है और उन्हें किन क्षेत्रों में और सुधार की आवश्यकता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में त्रैमासिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के दौरान छात्रों के प्रदर्शन को देखा गया था। इसके आधार पर विभाग ने कमजोर प्रदर्शन करने वाले छात्रों की पहचान की और उन्हें विशेष ध्यान और मार्गदर्शन देने का निर्णय लिया।

    प्रीबोर्ड परीक्षा के बाद का योजनाबद्ध तरीका

    प्रीबोर्ड परीक्षा के बाद छात्रों को अगले विषय की तैयारी के लिए अतिरिक्त कक्षाएं दी जा रही हैं। शिक्षक उन्हें यह भी बता रहे हैं कि बोर्ड परीक्षा में प्रश्न किस प्रकार के आ सकते हैं और उत्तर को लिखने के उचित तरीके क्या होंगे। इस प्रक्रिया से छात्रों को आत्मविश्वास मिलेगा और वे परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में सक्षम होंगे। शिक्षा विभाग का उद्देश्य यह है कि छात्र बिना किसी भ्रम के परीक्षा की तैयारी करें और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन मिले। इसके अलावा, विभाग ने छात्रों को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करने के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन देने के कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है।
  • इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का संक्रमण फैला, 5013 घरों तक पहुंची एनएचएम की टीम

    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का संक्रमण फैला, 5013 घरों तक पहुंची एनएचएम की टीम


    इंदौर ।इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से उत्पन्न संक्रमण की स्थिति गंभीर हो गई है। नेशनल हेल्थ मिशन के रैपिड एक्टिव सर्विलांस के दौरान यह सामने आया कि पूरे क्षेत्र में दूषित पानी का संक्रमण फैल चुका है। एनएचएम की 200 टीमों ने डेढ़ दिन तक घर-घर जाकर सर्वे किया, जिसके बाद यह निष्कर्ष निकला कि 463 घरों में उल्टी और दस्त की शिकायत वाले मरीज सामने आए हैं। सर्वे में 5013 घरों तक पहुंचने और 25,100 लोगों की जानकारी एकत्र करने में सफलता मिली है।

    एनएचएम के स्टेट सर्विलांस अफसर डॉ. अश्विन भागवत ने बताया कि सर्वे के दौरान जिन 463 घरों में उल्टी-दस्त के मरीज मिले, वहां से अब संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक गली या एक क्लस्टर से मरीज नहीं मिले, बल्कि पूरे क्षेत्र से ही मरीजों की सूचना प्राप्त हुई। इस बात ने क्षेत्र में दूषित पानी के व्यापक फैलाव को उजागर किया है।

    सर्वे के बाद, प्रशासन ने जल वितरण व्यवस्था में सुधार की दिशा में त्वरित कदम उठाए हैं। जल आपूर्ति को शुद्ध करने और उपचार की सुविधा देने से मरीजों की संख्या में काफी कमी आई है। इसके साथ ही, जिओ मैपिंग तकनीक के माध्यम से मरीजों की पहचान की गई है, ताकि संक्रमण फैलने के अन्य कारणों का पता लगाया जा सके और उनका इलाज किया जा सके।

    इस सर्वे से यह भी पता चला कि संक्रमण के कारण प्रभावित घरों में समय पर इलाज मिलने और जल वितरण व्यवस्था के सुधार से अब स्थिति नियंत्रण में आ रही है। हालांकि, स्थिति अभी भी चिंताजनक है और प्रशासन लगातार इलाके में सफाई अभियान और पानी की गुणवत्ता को लेकर काम कर रहा है। अब तक, प्रशासन ने क्षेत्र में त्वरित सुधार कार्यों के साथ-साथ नागरिकों को दूषित पानी से बचने के लिए जागरूक किया है। इंदौर नगर निगम और अन्य प्रशासनिक विभागों का कहना है कि जल आपूर्ति में सुधार के बाद, 11 जनवरी से भागीरथपुरा के लोग पीने योग्य पानी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे दूषित पानी के कारण उत्पन्न स्वास्थ्य संकट को समाप्त करने में मदद मिलेगी।

  • इंदौर: भागीरथपुरा में 11 जनवरी से मिलेगा पीने योग्य नर्मदा जल

    इंदौर: भागीरथपुरा में 11 जनवरी से मिलेगा पीने योग्य नर्मदा जल


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हो रही बीमारियों और मौतों के मामलों के बाद प्रशासन ने नर्मदा पेयजल आपूर्ति को सुनिश्चित करने का दावा किया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि 11 जनवरी से इस क्षेत्र के नागरिकों को पीने योग्य नर्मदा पानी मिलना शुरू हो जाएगा। नर्मदा जल की लाइनों को पूरी तरह से साफ किया जा चुका है और पानी के सैंपल लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच भी की जा रही है।

    कलेक्टर के अनुसार, गुरुवार रात को भागीरथपुरा में नर्मदा पेयजल पाइपलाइन को प्रेशर से क्लोरीन द्वारा फ्लश किया गया था। इसके बाद पानी के सैंपल लिए गए और उनका परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण की रिपोर्ट मिलने के बाद 11 जनवरी से लोगों को नर्मदा जल पीने के लिए उपलब्ध होगा।कलेक्टर ने यह भी कहा कि फिलहाल क्षेत्र के सभी बोरिंग में क्लोरीन डाला जा चुका है और इन्हें केवल घरेलू उपयोग के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बीच, प्रशासन द्वारा टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई भी की जा रही है ताकि लोगों को पानी की समस्या से राहत मिल सके।

    भागीरथपुरा में नर्मदा जल आपूर्ति की व्यवस्था को लेकर स्थानीय निवासियों में उम्मीद जगी है। लंबे समय से यहां के लोग दूषित पानी से हो रही स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और अब प्रशासन की ओर से सुधार के प्रयासों से उम्मीद जताई जा रही है कि जल समस्या जल्द हल हो जाएगी।नर्मदा जल की आपूर्ति से पहले, भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए पाइप लाइनों की मरम्मत और सफाई का काम जोरों से चल रहा है। फिलहाल, कलेक्टर और प्रशासन का कहना है कि 11 जनवरी तक नर्मदा जल क्षेत्रवासियों को सुरक्षित, शुद्ध और पीने योग्य पानी उपलब्ध करवा दिया जाएगा।

  • इंदौर में तेज रफ्तार कार की ट्रक से टक्कर, पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की बेटी समेत तीन की मौत

    इंदौर में तेज रफ्तार कार की ट्रक से टक्कर, पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की बेटी समेत तीन की मौत


    इंदौर ।इंदौर के तेजाजी नगर क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाली दुर्घटना हुई, जिसमें तीन युवाओं की मौत हो गई। दुर्घटना उस समय घटी जब एक तेज रफ्तार कार रालामंडल इलाके में ट्रक से टकरा गई। हादसे में मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की बेटी प्रेरणा बच्चन, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आनंद कासलीवाल के बेटे प्रखर कासलीवाल और मान संधू की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में कार सवार एक अन्य युवती, अनुष्का राठी, गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे अस्पताल में भर्ती कर इलाज चल रहा है।

    यह दुर्घटना शुक्रवार सुबह उस समय हुई जब कार सवार युवक-युवतियां एक पार्टी से लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि कार की रफ्तार काफी तेज थी, और अचानक ट्रक से टकराने के कारण कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस के मुताबिक ट्रक का चालक दुर्घटना के बाद मौके से फरार हो गया। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर शवों को बाहर निकाला और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर भारी संख्या में लोग जमा हो गए, और सड़क पर यातायात बाधित हो गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और फरार ट्रक चालक की तलाश जारी है।

    घटना के बाद बाला बच्चन और कासलीवाल परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन ने दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और अपने परिवार के साथ इस कठिन समय को सहन करने की अपील की है। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने भी इस हादसे पर दुख जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इस दुर्घटना ने एक बार फिर इंदौर में तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा की आवश्यकता पर सवाल उठाए हैं। पुलिस ने बताया कि सड़क पर तेज रफ्तार से गाड़ियां चलाना बहुत खतरनाक हो सकता है, और ऐसे हादसों से बचने के लिए यातायात नियमों का पालन जरूरी है।

    इंदौर में इस प्रकार की दुर्घटनाएं आम हो गई हैं, और लोग सड़क सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए दुर्घटनाओं से बचने की कोशिश नहीं करते। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक और बार यह साबित करता है कि सड़कों पर अनियंत्रित और लापरवाह ड्राइविंग से न केवल वाहन चालकों, बल्कि पैदल चलने वालों और अन्य लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।