Blog

  • जबलपुर में बीजेपी नेत्री का नेत्रहीन महिला से अभद्र व्यवहार धर्म परिवर्तन विवाद पर वीडियो वायरल

    जबलपुर में बीजेपी नेत्री का नेत्रहीन महिला से अभद्र व्यवहार धर्म परिवर्तन विवाद पर वीडियो वायरल


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में बीजेपी की जिला उपाध्यक्ष अंजू भार्गव का एक विवादास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडियो में अंजू भार्गव ने एक नेत्रहीन महिला से अभद्र व्यवहार किया है। यह घटना 20 दिसंबर को जबलपुर के गोरखपुर क्षेत्र स्थित एक चर्च परिसर में हुई थी। बताया गया है कि अंजू भार्गव और अन्य हिंदू संगठन के लोग कथित तौर पर धर्म परिवर्तन का विरोध कर रहे थे।
    उनका आरोप था कि चर्च में नेत्रहीन बच्चों का धर्म परिवर्तन किया जा रहा था। इस दौरान एक नेत्रहीन महिला के साथ अंजू भार्गव की बहस हो गई और वीडियो में अंजू भार्गव महिला का मुंह दबाते हुए उसे अपशब्द कहती नजर आ रही हैं। वायरल वीडियो में यह भी दिखाया गया कि भार्गव ने महिला का हाथ पकड़कर धक्का-मुक्की की और कहा कि अगले जन्म में भी वह अंधी ही रहेगी।

    इस वीडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस ने भाजपा को घेरते हुए पार्टी पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे क्रूरता का उदाहरण बताते हुए भाजपा की आलोचना की और कहा कि पार्टी अपनी कथनी और करनी में अंतर दिखा रही है।

    भाजपा की चुप्पी

    इस मामले पर अभी तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि इस घटना के बाद से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी जारी है।

    पुलिस का बयान

    इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी ने बीच-बचाव करते हुए स्थिति को शांत करने की कोशिश की लेकिन वीडियो में जो दिखाया गया वह पूरे मामले को और संवेदनशील बना रहा है।यह घटना मध्य प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक माहौल को और तंग कर सकती है जहां धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दे अक्सर विवादों का कारण बनते हैं।

  • महाकाल मंदिर में 31 दिसंबर को भस्म आरती ऑफलाइन बुकिंग बंद 1 जनवरी से चलायमान दर्शन होंगे

    महाकाल मंदिर में 31 दिसंबर को भस्म आरती ऑफलाइन बुकिंग बंद 1 जनवरी से चलायमान दर्शन होंगे


    उज्जैन । उज्जैन महाकाल मंदिर में नए साल के मौके पर भक्तों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए 31 दिसंबर को भस्म आरती की ऑफलाइन बुकिंग व्यवस्था बंद रहेगी। साथ ही 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक ऑनलाइन बुकिंग भी ब्लॉक कर दी जाएगी ताकि दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि 31 दिसंबर को अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नए साल 2026 के मौके पर महाकाल मंदिर में दर्शनार्थियों की अत्यधिक संख्या की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए दर्शन की व्यापक योजना बनाई गई है।

    जनवरी को चलायमान दर्शन

    जनवरी को दर्शनार्थियों को कार्तिकेय मंडपम से चलायमान दर्शन कराया जाएगा। यह दर्शन सुबह 4:15 बजे से शुरू होंगे और भस्म आरती के बाद सामान्य दर्शन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके बाद सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर से शक्तिपथ के रास्ते त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से महाकाल महालोक होते हुए मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।
    दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से मंदिर के बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर और हरसिद्धि चौराहा होते हुए पुनः चारधाम मंदिर लौटेंगे। महाकाल मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को सूचित किया है कि इस व्यवस्था का पालन करके वे अधिक सुविधा और आराम से दर्शन कर सकेंगे। इस विशेष व्यवस्था से श्रद्धालुओं को मंदिर में दिक्कत नहीं होगी और सभी को दर्शन का अवसर मिलेगा।

  • इंदौर में अनोखी पहल: इंसानों के लिए बंद, पक्षियों के लिए खुला गार्डन बना शहरी बर्ड हैबिटेट

    इंदौर में अनोखी पहल: इंसानों के लिए बंद, पक्षियों के लिए खुला गार्डन बना शहरी बर्ड हैबिटेट


    इंदौर।मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने वाली एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। शहर के सत्यदेव नगर क्षेत्र में एक ऐसा अनोखा गार्डन विकसित किया गया है, जो पूरी तरह पक्षियों के लिए समर्पित है। इस गार्डन की सबसे खास बात यह है कि यहां आम लोगों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित है, ताकि पक्षियों को बिना किसी बाधा के सुरक्षित वातावरण और प्राकृतिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके। करीब एक बीघा भूमि पर विकसित यह बर्ड गार्डन जनसहयोग से तैयार किया गया है। इस पहल का उद्देश्य शहरीकरण के कारण लगातार कम होते पक्षी आवास को बचाना और शहर में ही उनके लिए सुरक्षित ठिकाना तैयार करना है। गार्डन में 300 से अधिक फलदार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें अंजीर, आम, जामुन, बेर, शहतूत सहित करीब 30 किस्म के वृक्ष शामिल हैं।

    हाईब्रिड पौधों से मिलेगा सालभर भोजन
    इस बर्ड गार्डन में लगाए गए सभी पौधे हाईब्रिड किस्म के हैं, जो सामान्य पौधों की तुलना में जल्दी फल देने लगते हैं। जानकारों के अनुसार, ये पौधे डेढ़ से दो साल के भीतर फल देना शुरू कर देंगे, जिससे पक्षियों को पूरे साल प्राकृतिक भोजन उपलब्ध रहेगा। फलदार पेड़ों की बहुलता के कारण यहां विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के आने की संभावना बढ़ गई है।

    पानी और सुरक्षा की भी पूरी व्यवस्था

    सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि पक्षियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गार्डन में पानी की भी विशेष व्यवस्था की गई है। यहां एक कमल कुंड तालाब बनाया गया है, जिसमें मछलियां छोड़ी गई हैं। इसका उद्देश्य जल आधारित पक्षियों, विशेषकर किंगफिशर जैसे पक्षियों को आकर्षित करना है। हाल ही में इस क्षेत्र में किंगफिशर के दिखने की पुष्टि भी हुई है, जिसे इस पहल की शुरुआती सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

    एक पेड़ से निकला बड़ा विचार

    इस गार्डन की अवधारणा वार्ड पार्षद अभिषेक शर्मा बबलू के व्यक्तिगत अनुभव से निकली। उनके घर के सामने वर्षों पुराना एक शहतूत का पेड़ है, जिस पर नियमित रूप से कोयल और अन्य पक्षी आते रहे हैं। इसी अनुभव से उन्हें यह विचार आया कि यदि शहर में ऐसे और स्थान विकसित किए जाएं, तो पक्षियों को भोजन और आश्रय के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। इस विचार को जब स्थानीय रहवासियों के साथ साझा किया गया, तो सभी ने सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया।

    पूरी तरह जनसहयोग से हुआ विकास

    गार्डन के निर्माण में नगर निगम से पौधे नहीं लिए गए। स्थानीय नागरिकों ने अपनी ओर से पौधे उपलब्ध कराए, जिनकी कीमत 300 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक बताई जा रही है। नगर निगम की भूमिका केवल रख-रखाव तक सीमित रखी गई है। खास बात यह है कि फिलहाल लगाए गए सभी पौधों का सर्वाइवल रेट 100 प्रतिशत बताया जा रहा है।

    प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का समर्थन

    इस पहल को शहर के जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का भी समर्थन मिला है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और उद्यान प्रभारी राजेंद्र राठौर ने इस प्रयास की सराहना की है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गार्डन का उद्घाटन करते हुए शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के बर्ड गार्डन विकसित करने की घोषणा की है।

    पर्यावरण और शहर के लिए मिसाल
    शहरी विकास के इस दौर में सत्यदेव नगर का यह बर्ड गार्डन यह संदेश देता है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चल सकते हैं। यह पहल न केवल पक्षियों की सुरक्षा और जैव विविधता को बढ़ावा देगी, बल्कि नागरिकों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की भावना भी मजबूत करेगी। आने वाले समय में यह मॉडल इंदौर के साथ-साथ अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

  • इंदौर में 23 दिसंबर को जारी होगी ड्राफ्ट मतदाता सूची ऑनलाइन देख सकेंगे अपना नाम; त्रुटि पर शिकायत का मौका

    इंदौर में 23 दिसंबर को जारी होगी ड्राफ्ट मतदाता सूची ऑनलाइन देख सकेंगे अपना नाम; त्रुटि पर शिकायत का मौका


    इंदौर। इंदौर जिले में आगामी 23 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। यह कदम विशेष गहन पुनरीक्षण एसआइआर प्रक्रिया के तहत उठाया जा रहा है जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करना है। इस सूची में इंदौर जिले के सभी मतदाता अपना नाम देख सकेंगे। यदि किसी का नाम सूची से कट गया है या उसमें कोई त्रुटि है तो वे उसे सुधारने के लिए शिकायत दर्ज करवा सकेंगे।

    इस प्रक्रिया के तहत जिले के सभी 2625 बूथों पर मतदाता सूची देखी जा सकेगी। इसके अलावा ऑनलाइन भी मतदाता अपनी जानकारी जांच सकते हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मतदाता सूची में शामिल सभी मतदाताओं के अलावा अनुपस्थित स्थानांतरित और मृतक मतदाताओं की जानकारी भी उपलब्ध होगी।

    नाम कटने या त्रुटि पर शिकायत की प्रक्रिया

    ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद दावे और आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सभी बूथों पर बूथ लेवल आफिसर बीएओ दावे और आपत्तियों की सुनवाई करेंगे। यह प्रक्रिया 22 जनवरी तक चलेगी। जिन मतदाताओं का नाम सूची से हट गया है वे अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं। सुनवाई के दौरान रजिस्ट्रीकरण अधिकारी इआरओ और सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एइआरओ दस्तावेजों की जांच करेंगे और यदि आवश्यकता पड़ी तो संबंधित मतदाता के नाम को सूची में वापस जोड़ा जाएगा।

    राजनीतिक दलों के साथ बैठक

    अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी नवजीवन विजय पंवार ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ ही राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों की बैठक भी आयोजित की जाएगी। इसके अलावा सूची को सभी मतदान केंद्रों पर चस्पा किया जाएगा और संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजकर जानकारी दी जाएगी।

    मैपिंग से बाहर रहने वाले मतदाता

    जिले में कुल 24 लाख 20 हजार 170 मतदाता हैं। इनमें से 1.33 लाख मतदाताओं की मैपिंग 2003 की सूची से नहीं हो पाई है। ऐसे मतदाताओं को चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित 11 प्रकार के दस्तावेज दिखाने होंगे ताकि उनकी पहचान प्रमाणित हो सके। इन मतदाताओं को एक सप्ताह का समय दिया जाएगा और सात दिन बाद उनकी सुनवाई शुरू की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत निर्वाचन आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी मतदाता की जानकारी सही और अपडेटेड हो ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की त्रुटि या धोखाधड़ी की संभावना न रहे।

  • मध्य प्रदेश विधानसभा होगी पेपरलेस: दिल्ली से आए विशेषज्ञ विधायकों को देंगे ऑनलाइन कार्यवाही की ट्रेनिंग

    मध्य प्रदेश विधानसभा होगी पेपरलेस: दिल्ली से आए विशेषज्ञ विधायकों को देंगे ऑनलाइन कार्यवाही की ट्रेनिंग


    मध्य प्रदेश। विधानसभा को आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य में विधानसभा की कार्यवाही को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी क्रम में मंगलवार को भोपाल में विधायकों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें उन्हें ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से विधानसभा कार्यवाही संचालित करने की जानकारी दी जाएगी। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन NeVA परियोजना के तहत आयोजित किया जा रहा है। विधानसभा सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार, यह सत्र मंगलवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक विधानसभा परिसर स्थित मानसरोवर सभागार में होगा। इसमें प्रदेश के विधायक भाग लेंगे और उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से जुड़े विभिन्न संसदीय कार्यों की प्रक्रिया समझाई जाएगी।

    दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम

    इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली से विशेषज्ञों की एक टीम भोपाल पहुंची है। ये विशेषज्ञ विधायकों को बताएंगे कि किस प्रकार मोबाइल टैबलेट, लैपटॉप या अन्य डिजिटल उपकरणों के माध्यम से विधानसभा की कार्यवाही में भाग लिया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान लाइव डेमो के जरिए डिजिटल सिस्टम का उपयोग भी दिखाया जाएगा, ताकि विधायकों को व्यवहारिक अनुभव मिल सके।विशेषज्ञों द्वारा विधायकों को यह सिखाया जाएगा कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रश्न कैसे दर्ज करें, विधेयकों का अध्ययन कैसे करें और सदन की कार्यसूची, रिपोर्ट एवं अन्य दस्तावेजों तक तुरंत कैसे पहुंचें।

    कागज से मिलेगी छुटकारा

    NeVA परियोजना के लागू होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही में कागजों का इस्तेमाल लगभग समाप्त हो जाएगा। प्रश्नोत्तर काल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, विधेयकों की प्रतियां, कार्यसूची, मतदान प्रक्रिया और उपस्थिति से संबंधित सभी जानकारियां डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेंगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि दस्तावेजों के रखरखाव और रिकॉर्ड प्रबंधन में भी आसानी होगी।विधानसभा सचिवालय का मानना है कि डिजिटल कार्यप्रणाली से सदन की पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यवाही अधिक सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी।

    क्या है NeVA प्लेटफॉर्म

    NeVA यानी नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन एक ऐसा डिजिटल सिस्टम है, जिसके माध्यम से विधानसभा की पूरी कार्यवाही रियल-टाइम में दर्ज की जाती है। इस प्लेटफॉर्म पर विधायकों को व्यक्तिगत लॉगिन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे सदन से जुड़े सभी दस्तावेज, प्रस्ताव और रिपोर्ट तुरंत देख सकते हैं।यह परियोजना वन नेशन, वन एप्लिकेशन की अवधारणा पर आधारित है, जिसका उद्देश्य देश की संसद और सभी राज्य विधानसभाओं को एक समान डिजिटल प्रणाली से जोड़ना है।

    चरणबद्ध तरीके से होगा लागू
    विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के अनुसार, प्रशिक्षण के बाद चरणबद्ध तरीके से पेपरलेस कार्यप्रणाली को पूरी तरह लागू किया जाएगा। शुरुआती चरण में तकनीकी सहायता टीम भी तैनात रहेगी, ताकि विधायकों को किसी भी तरह की तकनीकी परेशानी न हो।अधिकारियों का कहना है कि विधायकों की सुविधा और कार्यकुशलता को ध्यान में रखते हुए डिजिटल सिस्टम को धीरे-धीरे पूरी तरह लागू किया जाएगा।

    क्यों अहम है यह कदम

    विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि इससे विधानसभा की कार्यक्षमता, पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। कागजों की खपत कम होने से लागत में भी कमी आएगी।मध्य प्रदेश विधानसभा का यह डिजिटल बदलाव आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है और देश की विधायी प्रक्रिया को आधुनिक स्वरूप देने में सहायक होगा।

  • इंडिगो की उड़ानें फिर से शुरू होने से भोपाल में हवाई यात्री बढ़े, टूटा पुराना रिकॉर्ड

    इंडिगो की उड़ानें फिर से शुरू होने से भोपाल में हवाई यात्री बढ़े, टूटा पुराना रिकॉर्ड


    भोपाल । इस माह इंडिगो की उड़ानों के अचानक रद्द होने के कारण भोपाल में हवाई यातायात पर गहरा असर पड़ा था। यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा था और उन्होंने जमकर हंगामा भी किया था। हालांकि अब इंडिगो की सभी उड़ानें फिर से बहाल हो चुकी हैं और इसका सीधा असर यात्रियों की संख्या पर देखने को मिल रहा है। रविवार को भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर एक नया रिकॉर्ड बना जब एक ही दिन में 6000 से ज्यादा यात्रियों ने हवाई सफर किया।
    यह आंकड़ा एयरपोर्ट के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इंडिगो की उड़ानों के बहाल होने से यात्रियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। इस महीने जब इंडिगो की उड़ानें रद्द हो रही थीं तब रोजाना के यात्री केवल 3000 के करीब थे लेकिन अब यह संख्या दोगुनी होकर 6000 के पार पहुँच गई है।

    भोपाल में अब हवाई यात्रा केवल उच्च वर्ग के नहीं बल्कि मध्यम वर्ग के लोगों में भी सामान्य हो गई है। पहले जहां लोग मुख्यत ट्रेन से यात्रा करते थे अब विमान में सफर करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। दरअसल तीन से चार साल पहले तक भोपाल से विमान यात्रा करने वाले यात्री कम हुआ करते थे लेकिन अब लोग बढ़े हुए किराए के बावजूद भी हवाई यात्रा को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    भोपाल से दिल्ली तक की ट्रेन कनेक्टिविटी बहुत सरल और सुलभ है फिर भी हवाई यात्रा की ओर रुझान बढ़ा है। भोपाल से दिल्ली तक की पांच नियमित और एक साप्ताहिक उड़ानें उपलब्ध हैं जिनमें 90 प्रतिशत तक पैसेंजर लोड देखा जा रहा है। यह कनेक्टिविटी अब यात्रियों की प्राथमिकता बन गई है जो यात्री संख्या में वृद्धि का मुख्य कारण है।

  • राजस्थान के जालोर में पंचायत का फरमान: 15 गांवों की बहुएं और लड़कियां नहीं रखेंगी स्मार्टफोन, सिर्फ कीपैड मोबाइल की अनुमति

    राजस्थान के जालोर में पंचायत का फरमान: 15 गांवों की बहुएं और लड़कियां नहीं रखेंगी स्मार्टफोन, सिर्फ कीपैड मोबाइल की अनुमति


    नई दिल्ली।राजस्थान के जालोर जिले से एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परंपरा, तकनीक और महिलाओं की आज़ादी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जिले की एक ग्राम पंचायत ने अपने क्षेत्र में आने वाले 15 गांवों की महिलाओं और लड़कियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। पंचायत के इस निर्णय के अनुसार अब बहुएं और बेटियां कैमरा फोन या स्मार्टफोन का उपयोग नहीं कर सकेंगी और केवल साधारण कीपैड मोबाइल ही रख पाएंगी।यह फैसला जालोर जिले के गाजीपुर गांव में आयोजित चौधरी समुदाय की एक बड़ी पंचायत बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता समाज के वरिष्ठ सदस्य सुजनाराम चौधरी ने की। पंचायत में मौजूद पंचों और समाज के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित किया, जिसे आगामी 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस से लागू किया जाएगा।

    सामाजिक कार्यक्रमों में मोबाइल पूरी तरह प्रतिबंधित

    पंचायत के फैसले के अनुसार महिलाओं और लड़कियों को न केवल स्मार्टफोन से दूर रहना होगा, बल्कि उन्हें किसी भी सामाजिक आयोजन, शादी-ब्याह, पारिवारिक समारोह या यहां तक कि पड़ोस के घर जाते समय भी मोबाइल फोन साथ ले जाने की अनुमति नहीं होगी। पंचायत का मानना है कि इससे सामाजिक मर्यादाओं का पालन होगा और पारिवारिक माहौल बेहतर बनेगा।

    पढ़ाई कर रही छात्राओं के लिए अलग नियम


    हालांकि पंचायत ने स्कूली छात्राओं के लिए कुछ शर्तों के साथ छूट भी तय की है। जो लड़कियां पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करती हैं, वे केवल अपने घर में ही फोन चला सकेंगी। स्कूल, ट्यूशन, सामाजिक कार्यक्रम या किसी रिश्तेदार के घर जाते समय मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह वर्जित रहेगा। पंचायत के पंच हिम्मतराम ने गांव में मुनादी कराकर इस निर्णय की जानकारी सार्वजनिक रूप से दी है।

    आंखों की सेहत और बच्चों का हवाला

    पंचायत के इस फैसले को लेकर जब सवाल उठे, तो पंचायत अध्यक्ष सुजनाराम चौधरी ने इसके पीछे तर्क पेश किया। उन्होंने कहा कि गांव की महिलाएं अक्सर घरेलू काम के दौरान बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल फोन दे देती हैं, जिससे बच्चों की आंखों की रोशनी पर बुरा असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, छोटे बच्चों में मोबाइल की लत बढ़ रही है, जो भविष्य के लिए खतरा बन सकती है।
    उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले का उद्देश्य महिलाओं को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है। पंचायत का दावा है कि मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से पारिवारिक संवाद कम हो रहा है और सामाजिक मूल्यों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

    15 गांवों में होगा लागू

    यह निर्णय केवल गाजीपुर गांव तक सीमित नहीं है। पंचायत के अंतर्गत आने वाली 14 पट्टियों के 15 गांवों में इसे सख्ती से लागू करने की तैयारी की जा रही है। पंचायत ने साफ किया है कि सभी परिवारों को इस नियम का पालन करना अनिवार्य होगा और सामुदायिक स्तर पर इसकी निगरानी भी की जाएगी।

    उठने लगे सवाल

    हालांकि पंचायत के इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया और सामाजिक संगठनों में सवाल भी उठने लगे हैं। कई लोग इसे महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे परंपरा और सामाजिक अनुशासन का मामला बता रहे हैं। फिलहाल पंचायत अपने फैसले पर अडिग नजर आ रही है और 26 जनवरी से इसे लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

  • क्रिसमस 2025: भारत की इन जगहों पर मनाएं त्योहार, जश्न बन जाएगा यादगार

    क्रिसमस 2025: भारत की इन जगहों पर मनाएं त्योहार, जश्न बन जाएगा यादगार


    नई दिल्ली/हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला क्रिसमस ईसाई समुदाय के लिए सबसे पवित्र और उल्लासपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह दिन ईसा मसीह के जन्म का प्रतीक है, जिसे पूरी दुनिया में रोशनी, सजावट, प्रार्थना और खुशियों के साथ मनाया जाता है। भारत में भी क्रिसमस का रंग देखते ही बनता है, खासकर उत्तर-पूर्वी राज्यों में, जहां यह पर्व पूरे उत्साह और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। अगर आप इस क्रिसमस घूमने और कुछ अलग अनुभव करने का प्लान बना रहे हैं, तो उत्तर-पूर्व भारत की ये जगहें आपके सफर को खास बना सकती हैं।

    शिलांग: रोशनी और संगीत से सजा क्रिसमस शहर
    मेघालय की राजधानी शिलांग को ‘ईस्ट का स्कॉटलैंड’ कहा जाता है और क्रिसमस के दौरान यह शहर किसी परी लोक से कम नहीं लगता। यहां के चर्च रंग-बिरंगी लाइट्स से सज जाते हैं और खास प्रार्थनाओं का आयोजन होता है। क्रिसमस ट्री, कैरोल सिंगिंग और स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम शहर को जीवंत बना देते हैं। स्थानीय संगीत और नृत्य यहां के जश्न को और खास बना देते हैं।

    मेचुका: बर्फीली वादियों में सादगी भरा जश्न

    अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी सियांग जिले में स्थित मेचुका उन यात्रियों के लिए है, जो शांति और प्रकृति के करीब रहकर क्रिसमस मनाना चाहते हैं। बर्फ से ढके पहाड़, साफ नदियां और शांत वातावरण इस जगह को खास बनाते हैं। क्रिसमस के समय यहां ठंड काफी होती है, लेकिन यही ठंड इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देती है।

    असम: परंपरा, प्रकृति और आस्था का संगम

    असम अपने चाय बागानों, वन्यजीव अभयारण्यों और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। क्रिसमस पर यहां के चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क, माजुली द्वीप और ऐतिहासिक शहरों की सैर के साथ क्रिसमस मनाना एक अनोखा अनुभव देता है।

    तवांग: शांति और आध्यात्म के बीच क्रिसमस

    अरुणाचल प्रदेश का तवांग अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बौद्ध संस्कृति के लिए मशहूर है। एशिया का दूसरा सबसे बड़ा तवांग मठ यहां स्थित है। क्रिसमस के दौरान बर्फ से ढका तवांग और उसका शांत माहौल सुकून और यादगार अनुभव देता है।

    गंगटोक: पहाड़ों में जश्न का अनोखा रंग

    सिक्किम की राजधानी गंगटोक क्रिसमस पर बेहद खूबसूरत नजर आती है। यहां के चर्चों में खास आयोजन होते हैं और शहर की सजी-धजी गलियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। त्सोमगो झील और रुमटेक मठ की सैर इस यात्रा को और खास बना देती है।उत्तर-पूर्व भारत की ये जगहें न सिर्फ क्रिसमस के जश्न को खास बनाती हैं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और शांति का ऐसा अनुभव देती हैं, जो लंबे समय तक याद रहता है।

  • बिना खर्च और बिना केमिकल, घर पर पाएँ खूबसूरत और दमकती त्वचा

    बिना खर्च और बिना केमिकल, घर पर पाएँ खूबसूरत और दमकती त्वचा

    नई दिल्ली
    ।महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स के दौर में भी पुराने देसी नुस्खे अपनी जगह बनाए हुए हैं। बलिया में आज भी एक खास घरेलू उपाय चर्चा में है, जो त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ, मुलायम और चमकदार बनाने में असरदार साबित हो रहा है। सरसों का उबटन सदियों से त्वचा की देखभाल का सबसे भरोसेमंद तरीका रहा है। यह नुस्खा न केवल सस्ता है, बल्कि ठंड के मौसम में डेड स्किन हटाकर त्वचा को पोषण और नमी भी देता है।

    देसी नुस्खों की वापसी और महंगे प्रोडक्ट्स की तुलना

    आज बाजार में तरह-तरह के महंगे लोशन और क्रीम मौजूद हैं, लेकिन आम लोगों के लिए उनकी कीमत बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में पुराने समय से चले आ रहे देसी नुस्खे एक बार फिर भरोसे का विकल्प बनकर सामने आए हैं। बलिया के वरिष्ठ नागरिक आसिफ जैदी बताते हैं कि उनके बचपन में दादी और नानी के घरेलू नुस्खों में सरसों के उबटन का खास महत्व था। लोग इसे पूरे शरीर पर लगाकर धूप में बैठते और धीरे-धीरे मालिश करते थे, जिससे त्वचा की गहराई से सफाई होती थी।

    सरसों का उबटन: सदियों पुरानी परंपरा

    सरसों का उबटन कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है। पुराने जमाने में जब बाजारू साबुन और क्रीम नहीं होती थीं, तब यही उबटन त्वचा की देखभाल का सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता था। जब यह उबटन शरीर पर सूखता है, तो डेड स्किन को अपने साथ हटाता है और त्वचा को साफ, कोमल और चमकदार बनाता है। खास बात यह है कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते, जो इसे आधुनिक केमिकल युक्त उत्पादों से अलग बनाता है।

    घर पर ऐसे तैयार करें सरसों का उबटन

    सरसों के दानों को धीमी आंच पर हल्का भूनकर हल्दी के साथ पीस लें। तैयार पाउडर में थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे पूरे शरीर पर लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें। जब उबटन सूख जाए, तो साफ पानी से नहा लें। इसके नियमित उपयोग से त्वचा में प्राकृतिक ग्लो आता है, टैनिंग की समस्या कम होती है और त्वचा भीतर से मजबूत बनती है।

    स्वास्थ्य और रक्त संचार के लिए भी फायदेमंद

    सरसों का उबटन सिर्फ त्वचा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है। मालिश से रक्त संचार बेहतर होता है, थकान दूर होती है और मांसपेशियों को आराम मिलता है। एड़ियों की फटने की समस्या में भी राहत मिलती है। एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण इसे ठंड के मौसम में विशेष रूप से लाभकारी बनाते हैं।

  • दिल्ली में AAP के प्रदूषण वाले मजाक पर बीजेपी ने कसा तंजकहा जनता के दर्द से खेलना ठीक नहीं

    दिल्ली में AAP के प्रदूषण वाले मजाक पर बीजेपी ने कसा तंजकहा जनता के दर्द से खेलना ठीक नहीं


    नई दिल्ली । दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सियासत गरमा गई है आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के बयान पर दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कड़ा ऐतराज जताया है सचदेवा ने कहा कि प्रदूषण जैसे गंभीर मसले पर सुपरमैनस्पाइडरमैनबैटमैन और सैंटा क्लोज की बेहोशी का जिक्र कर हास्य व्यंग्य करना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह दिल्ली की जनता की तकलीफ का मजाक उड़ाने जैसा है । वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आज दिल्लीवासी जिस प्रदूषण का दंश झेल रहे हैंवह अरविंद केजरीवाल की दिल्ली और पंजाब सरकारों की लापरवाही का सीधा परिणाम है उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद आम आदमी पार्टी ने प्रदूषण रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए ।

    सौरभ भारद्वाज के स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल पर सवाल

    दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने सौरभ भारद्वाज के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वह केजरीवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थेतब भी उनकी सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया सचदेवा के मुताबिक दस साल में प्रदूषण की रोकथाम के लिए कोई ठोस काम नहीं हुआ और उसी दौरान दिल्ली सरकार के अस्पतालों में नकली दवाएं बांटे जाने के मामले सामने आए । वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी जिन मोहल्ला क्लीनिकों को अपनी उपलब्धि बताती रहीवे भी बाद में घोटालों के केंद्र बनकर सामने आए उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार ने केवल प्रचार पर ध्यान दिया ।

    गंभीरता से काम लें आप नेता

    बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि यह खेदपूर्ण है कि जब अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज सत्ता में थेतब उन्होंने प्रदूषण के कारकों को गंभीरता से नहीं संभाला अब विपक्ष में आने के बाद वही नेता हास्यास्पद बयान देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि सत्ता में रहते काम न करके और अब प्रदूषण पर मजाकिया बयान देकर दोनों नेता जनता के बीच अपनी छवि खो रहे हैं । उन्होंने सलाह दी कि बेहतर होगा दोनों नेता गंभीरता से काम लें और प्रदूषण पर हास्य व्यंग्य की नौटंकी करने के बजाय दिल्लीवासियों और सरकार को प्रदूषण की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने दें ।