Blog

  • हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र की प्रेयर मीट में न जाकर लिया सही फैसला मनोज देसाई ने किया खुलासा

    हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र की प्रेयर मीट में न जाकर लिया सही फैसला मनोज देसाई ने किया खुलासा


    नई दिल्ली । धर्मेंद्र के निधन के बाद उनके परिवार ने दो अलग-अलग प्रेयर मीट आयोजित की थीं। पहली प्रेयर मीट उनके बेटों सनी और बॉबी देओल द्वारा रखवाई गई थी जबकि दूसरी प्रेयर मीट हेमा मालिनी ने अपने घर में आयोजित की थी। अब इस मामले पर गैलेक्सी थिएटर के मालिक मनोज देसाई ने अपनी राय दी है जिसमें उन्होंने बताया कि हेमा मालिनी का यह कदम एक समझदारी भरा निर्णय था।

    मनोज देसाई ने क्यों कहा ‘हेमा ने सही फैसला लिया

    धर्मेंद्र के निधन से उनके परिवार और फैंस को गहरा सदमा लगा। दोनों प्रेयर मीट के दौरान भारी भीड़ जुटी थी और मनोज देसाई ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विकी लालवाणी से बात करते हुए कहा “हेमा जी ने जो फैसला लिया वह बिल्कुल सही था। किसी भी प्रकार की विवाद से बचने के लिए उन्होंने अलग से प्रेयर मीट रखवाई। अगर वह सनी और बॉबी की प्रेयर मीट में शामिल होतीं तो शायद कोई न कोई विवाद उत्पन्न हो जाता। इसलिए यह सही था कि उन्होंने अपने घर पर एक अलग प्रेयर मीट रखवाई। मनोज का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के बीच के रिश्ते गहरे थे लेकिन इस तरह के संवेदनशील मौकों पर परिवार के भीतर किसी भी तरह की तकरार से बचने के लिए हेमा का कदम समझदारी से लिया गया था।

    प्रेयर मीट में उमड़ी भीड़

    मनोज ने यह भी बताया कि प्रेयर मीट में शामिल होने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग गई थीं। उन्होंने बताया “मेरी कार 86वें नंबर पर थी और मुझे इंतजार करना पड़ा क्योंकि इतनी भीड़ थी। सनी देओल से मेरी मुलाकात हुई और मैंने कहा कि इतनी भीड़ है इसलिए मैं फ्रंट गेट से आ रहा हूं। उन्होंने मुझे धन्यवाद कहा। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि प्रेयर मीट के दौरान भजन भी गाए गए थे और यह एक बहुत ही भावुक अवसर था।

    धर्मेंद्र की प्रेयर मीटएक ऐतिहासिक घटना

    मनोज देसाई ने कहा “मैंने कई आर्टिस्ट की प्रेयर मीट में हिस्सा लिया है जैसे राजेश खन्ना और यश चोपड़ा की प्रेयर मीट में। लेकिन धर्मेंद्र जी जैसी प्रेयर मीट मैंने कभी नहीं देखी। ऐसा लगा जैसे पूरा देश वहां आ गया था। यह बयान इस बात को दर्शाता है कि धर्मेंद्र का प्रभाव इंडस्ट्री में कितना गहरा था और उनके निधन से जो खालीपन हुआ है वह केवल उनके परिवार के लिए नहीं बल्कि पूरे फिल्म इंडस्ट्री के लिए था।

    धर्मेंद्र के निधन के बाद उनके परिवार ने जो भी कदम उठाए वह उनके सम्मान और शांति को बनाए रखने के लिए थे। मनोज देसाई के बयान से यह साफ है कि हेमा मालिनी का अलग प्रेयर मीट रखना एक सही निर्णय था ताकि कोई भी विवाद न हो और धर्मेंद्र की यादों को शांति से श्रद्धांजलि दी जा सके। धर्मेंद्र का योगदान सिनेमा में हमेशा याद रखा जाएगा और उनके चाहने वालों के लिए यह एक अभूतपूर्व क्षण था।

  • कुमार सानू ने एक्स वाइफ रीता के खिलाफ दर्ज किया मानहानि का केस 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग

    कुमार सानू ने एक्स वाइफ रीता के खिलाफ दर्ज किया मानहानि का केस 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग


    नई दिल्ली । कुमार सानू ने अपनी एक्स वाइफ रीता के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज किया है और मुआवजे के रूप में 30 लाख रुपये की मांग की है। यह मामला तब सामने आया जब रीता ने कई मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुमार सानू पर गंभीर आरोप लगाए।

    क्या है मामला

    रीता ने अपने बयानों में दावा किया था कि कुमार सानू ने उनकी प्रेग्नेंसी के दौरान उनका बहुत बुरा व्यवहार किया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि कुमार सानू ने उन्हें भूखा रखा किचन में बंद कर दिया और प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें दूध और मेडिकल केयर तक नहीं दिया। रीता का यह भी कहना था कि कुमार सानू ने इस दौरान कोर्ट के मामलों को भी जारी रखा था।

    इन आरोपों को लेकर कुमार सानू ने मानहानि की याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि इन झूठे आरोपों के कारण उनकी इमेज को काफी नुकसान पहुंचा है और उन्होंने मानसिक तनाव का सामना भी किया है। कुमार सानू का कहना है कि इन आरोपों के कारण उनकी पब्लिक इमेज खराब हुई है और इसका असर उनके प्रोफेशनल करियर पर भी पड़ा है।

    याचिका में क्या कहा गया

    याचिका में कहा गया है कि इन बयानों ने सिंगर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है और उन्हें सोशल मीडिया पर भी निगेटिव प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा है। इस मानहानि के मामले में रीता और संबंधित मीडिया पोर्टल्स को लीगल नोटिस भेजा गया है। कुमार सानू ने यह भी कहा कि इन आरोपों से उन्हें आर्थिक और प्रतिष्ठा संबंधी भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा रीता ने यह भी आरोप लगाया था कि शादी के दौरान कुमार सानू के कई अफेयर थे जो मामला और पेचीदा बना रहा है।

    सना रईस खान ने लिया कुमार सानू का पक्ष

    कुमार सानू की ओर से इस मानहानि केस की याचिका वकील सना रईस खान द्वारा दायर की गई है। सना रईस खान बिग बॉस 17 की कंटेस्टेंट भी रह चुकी हैं और उन्होंने ही कुमार सानू का कानूनी प्रतिनिधित्व किया है।

    कुमार सानू और रीता का तलाक

    कुमार सानू और रीता का तलाक 2001 में हुआ था। दोनों का एक बेटा है जान कुमार सानू जो बिग बॉस 14 में बतौर कंटेस्टेंट नजर आ चुके थे। जान कुमार सानू का नाम भी इस विवाद से जुड़ा है लेकिन अभी तक उन्होंने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह विवाद सिंगर कुमार सानू और उनकी एक्स वाइफ रीता के बीच बढ़ता जा रहा है। यदि कोर्ट इस मामले में फैसला देता है तो यह देखना दिलचस्प होगा कि मानहानि के इस केस में क्या परिणति होती है और क्या कुमार सानू को मुआवजा मिलता है।

  • नया साल 2026 CNG PNG के दाम घटेंगे रेलवे रिजर्वेशन में बदलाव NPS निवेशकों को राहत

    नया साल 2026 CNG PNG के दाम घटेंगे रेलवे रिजर्वेशन में बदलाव NPS निवेशकों को राहत


    नई दिल्ली । नया साल 2026 आपके लिए कई महत्वपूर्ण बदलावों और राहतों के साथ आ रहा है। इन बदलावों से आम आदमी की जिंदगी में राहत मिलेगी खासकर सीएनजी और पीएनजी के दामों में कटौती रेलवे रिजर्वेशन में नए नियम और राष्ट्रीय पेंशन योजना NPS के निवेशकों के लिए राहत।
    सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में कटौती
    1 जनवरी 2026 से संपीडित प्राकृतिक गैस CNG और घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस PNG के दामों में कटौती हो सकती है। सीएनजी की कीमतें दो से ढाई रुपये तक घट सकती हैं जबकि पीएनजी के दाम में करीब दो रुपये तक की कमी आ सकती है। इसके अलावा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड PNGRB ने गैस के परिवहन शुल्क को सरल और तर्कसंगत बनाने का फैसला किया है। पहले यह शुल्क दूरी के हिसाब से तीन हिस्सों में बांटा गया था अब इसे दो हिस्सों में बांटा जाएगा। इससे 40 सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों और 312 भौगोलिक क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।यह परिवर्तन गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आएगा और उनकी जीवनशैली को और भी किफायती बनाएगा।
    रेलवे रिजर्वेशन में बदलाव
    रेलवे बोर्ड ने रिजर्वेशन चार्ट बनाने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ट्रेनों का रिजर्वेशन चार्ट 10 से 12 घंटे पहले तैयार किया जाएगा। इससे यात्रियों को यह जानने में आसानी होगी कि उनका टिकट कंफर्म हुआ है या नहीं खासकर दूरदराज क्षेत्रों से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह बहुत सहूलियतपूर्ण रहेगा। पहले ट्रेन खुलने से चार घंटे पहले रिजर्वेशन चार्ट तैयार किया जाता था जिससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था अब सुबह 5 बजे से दोपहर 2 बजे तक की ट्रेनों का रिजर्वेशन चार्ट एक दिन पहले रात 8 बजे तैयार किया जाएगा। यह बदलाव यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित होगा खासकर यात्रा की प्लानिंग को लेकर।
    NPS निवेशकों के लिए राहत
    पीएफआरडीए ने राष्ट्रीय पेंशन योजना NPS के निवेशकों के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। अब गैर सरकारी NPS खाताधारकों को पेंशन प्लान एन्युटी में सिर्फ 20 फीसदी राशि निवेश करनी होगी। शेष 80 फीसदी राशि को एकमुश्त या किश्तों में निकाला जा सकेगा। यह नियम 15 साल NPS में निवेश करने वालों और 60 वर्ष की उम्र पार करने या रिटायर होने वाले निवेशकों के लिए लागू होगा। पहले के नियमों के तहत निवेशक को 40 फीसदी राशि पेंशन प्लान में डालने की बाध्यता थी लेकिन अब 20 फीसदी राशि से काम चल जाएगा।
    इसके अलावा 8 लाख रुपये तक की कुल राशि पर पूरी निकासी की अनुमति दी जाएगी। हालांकि सरकारी कर्मचारियों के लिए पुराने नियम लागू रहेंगे। 2026 का नया साल देशवासियों के लिए खुशखबरी लेकर आ रहा है। गैस की कीमतों में कमी रेलवे के रिजर्वेशन चार्ट में बदलाव और NPS निवेशकों के लिए नए नियम ये सभी बदलाव आम जनता के लिए बड़ी राहत साबित होंगे। इस साल का आगमन नए अवसर और सस्ती सेवाओं के साथ होगा जिससे लोगों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आएगा।

  • लोकसभा में हंगामे के बीच VB–G Ram G बिल पास, विपक्ष ने फाड़े कागज और किया नारेबाजी

    लोकसभा में हंगामे के बीच VB–G Ram G बिल पास, विपक्ष ने फाड़े कागज और किया नारेबाजी


    नई दिल्ली/18 दिसंबर 2025 को लोकसभा में एक बार फिर हंगामे का माहौल देखने को मिला। भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण यानी VB–G Ram G बिल पर मतदान के दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध किया। विरोध के स्वर इतना तेज थे कि कई सांसद वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे और बिल से जुड़े कागज फाड़कर सदन में फेंक दिए। इसके चलते लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।

    विपक्ष का कड़ा विरोध
    विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस अहम बिल को पर्याप्त चर्चा और बहस के बिना जल्दबाजी में पास करवा दिया। उनका कहना था कि ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक और खुली बहस आवश्यक थी। हंगामे के दौरान विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी कर रहे थे और सदन की कार्यवाही बाधित होती रही।विपक्ष का मुख्य आरोप यह भी था कि विधेयक पारित करते समय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और पारदर्शिता की अनदेखी की गई। विपक्ष ने कहा कि इस बिल का उद्देश्य भले ही ग्रामीण रोजगार सृजन और आजीविका बढ़ाना है, लेकिन इसे बिना पर्याप्त चर्चा के पास कराना संसद की गरिमा के खिलाफ है।

    कृषि मंत्री का जवाब
    बिल पर चर्चा के दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री ने कहा, हम किसी से भेदभाव नहीं करते। बापू हमारी प्रेरणा और श्रद्धा हैं। हमारे लिए पूरा देश एक है। देश केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक है।
    उन्होंने आगे बताया कि सरकार का उद्देश्य हर जरूरतमंद तक रोजगार और आजीविका के अवसर पहुंचाना है। इस बिल के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लाखों ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार के अवसर मिलेंगे।

    सदन में बढ़ता हंगामा और स्थगन

    मंत्री के जवाब के बावजूद विपक्ष का विरोध कम नहीं हुआ। सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी और कई ने कागज फाड़कर सदन में फेंक दिए। लगातार हंगामे के चलते स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित करने का फैसला किया। यह स्थिति यह दर्शाती है कि बिल का पारित होना राजनीतिक तौर पर कितनी संवेदनशील स्थिति पैदा कर गया है।

    राजनीतिक सरगर्मी तेज

    VB–G Ram G बिल के पारित होने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। जहां सरकार इसे ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इस बिल को लेकर संसद के बाहर भी राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।विशेषज्ञों का कहना है कि इस बिल के प्रभाव और इसके क्रियान्वयन की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आजीविका के अवसर और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बिल का क्रियान्वयन प्रभावी और पारदर्शी होना चाहिए।VB–G Ram G बिल न केवल ग्रामीण भारत के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि यह संसद में कानून बनाने की प्रक्रिया, बहस और राजनीतिक गतिशीलता का उदाहरण भी बन गया है। यह देखना रोचक होगा कि अगले हफ्तों में इस बिल को लेकर क्या नीति और क्रियान्वयन कदम उठाए जाते हैं।

  • दतिया में खूनी 'इश्क' का अंत मंदिर से लौट रही युवती के सीने में मारी गोली फिर शादीशुदा प्रेमी ने खुद को उड़ाया

    दतिया में खूनी 'इश्क' का अंत मंदिर से लौट रही युवती के सीने में मारी गोली फिर शादीशुदा प्रेमी ने खुद को उड़ाया


    दतिया । दतिया मध्य प्रदेश के दतिया जिले में प्रेम प्रसंग के चलते एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। गोंदन थाना क्षेत्र के कमलापुरी गांव के पास एक सिरफिरे युवक ने बीए की छात्रा पर जानलेवा हमला करने के बाद अपनी जीवनलीला भी समाप्त कर ली। यह घटना उस वक्त हुई जब युवती मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपने घर लौट रही थी।

    वारदात का क्रम पहले रास्ता रोका फिर दागी गोली

    प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़िता शाहपुर स्थित हनुमान मंदिर से दर्शन कर लौट रही थी। रास्ते में आरोपी मानवेंद्र यादव 25 वर्ष ने उसका रास्ता रोका। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच कुछ कहासुनी हुई और देखते ही देखते मानवेंद्र ने अवैध कट्टे से युवती के सीने पर गोली चला दी। युवती को लहूलुहान हालत में सड़क पर गिरता देख आरोपी ने जरा भी देरी नहीं की और उसी हथियार से खुद के सिर में गोली मारकर मौके पर ही दम तोड़ दिया।

    चमत्कार हार्ट के पास से गुजरी गोली बची जान

    गोली चलने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस को सूचना दी। युवती को पहले इंदरगढ़ अस्पताल ले जाया गया जहां से उसे गंभीर हालत में दतिया जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। मेडिकल जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया गोली युवती के दिल हार्ट के बिल्कुल पास से होकर शरीर के आर-पार निकल गई। इसी मामूली अंतर की वजह से युवती की जान बच गई हालांकि उसकी हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।

    3 साल का प्रेम प्रसंग और आरोपी का डबल लाइफ

    पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह मामला एक तरफा जुनून या उलझे हुए प्रेम प्रसंग का नजर आ रहा है। आरोपी मानवेंद्र पहले से शादीशुदा था और एक बच्चे का पिता भी था। बताया जा रहा है कि आरोपी और युवती के बीच पिछले 2-3 वर्षों से संबंध थे। दोनों के गांव की दूरी महज 3 किलोमीटर है। पुलिस अब इस बिंदु पर जांच कर रही है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने मानवेंद्र को इस खौफनाक कदम की ओर धकेल दिया।

    पुलिस की कार्रवाई

    गोंदन थाना प्रभारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि पुलिस ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है। आरोपी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अस्पताल में भर्ती युवती के बयान और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स के आधार पर पुलिस आगे की कड़ियां जोड़ रही है। स्थान कमलापुरी गांव के पास दतिया म.प्र. मुख्य पात्र मानवेंद्र यादव मृत और 20 वर्षीय युवती घायल । हथियार अवैध कट्टा। वजह संदिग्ध प्रेम प्रसंग और आपसी विवाद।

  • महाकाल मंदिर उज्जैन अब भक्तों को नहीं होगी नकद की चिंतादान से लेकर प्रसाद तक सब कुछ हुआ कैशलेस

    महाकाल मंदिर उज्जैन अब भक्तों को नहीं होगी नकद की चिंतादान से लेकर प्रसाद तक सब कुछ हुआ कैशलेस


    उज्जैन । उज्जैन विश्व के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शुमार भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने एक बड़ी सुविधा शुरू की है। अब देश-विदेश से आने वाले भक्तों को मंदिर में दान देने या अन्य सेवाओं के लिए नकद रखने की अनिवार्यता नहीं होगी। मंदिर समिति ने पूरे परिसर को कैशलेस ट्रांजेक्शन से जोड़ते हुए जगह-जगह क्यूआर कोड और बारकोड लगा दिए हैं।

    इन सेवाओं में मिलेगी कैशलेस सुविधा

    मंदिर प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालु बिना किसी आर्थिक उलझन के बाबा के दर्शन कर सकें। वर्तमान में निम्नलिखित सेवाओं में ई-वॉलेट और डिजिटल भुगतान का लाभ मिल रहा है भस्म आरती बुकिंग ऑनलाइन पोर्टल पर ई-वॉलेट के जरिए बुकिंग पहले से जारी है। शीघ्र दर्शन टिकट सशुल्क दर्शन के लिए काउंटर पर डिजिटल पेमेंट की सुविधा। दान काउंटर मंदिर के विभिन्न दान काउंटरों पर बारकोड के माध्यम से सीधा भुगतान। लड्डू प्रसाद अब महाकाल का सुप्रसिद्ध लड्डू प्रसाद भी ऑनलाइन पेमेंट के जरिए लिया जा सकेगा। धर्मशाला एवं अन्न क्षेत्र महाकालेश्वर और हरसिद्धि धर्मशाला में रुकने का शुल्क और अन्न क्षेत्र का सहयोग भी कैशलेस किया गया है।

    नेटवर्क की चिंता नहीं नकद भुगतान भी रहेगा जारी

    डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ मंदिर समिति ने व्यवहारिकता का भी ध्यान रखा है। अक्सर मंदिर परिसर में भीड़ और तकनीकी कारणों से नेटवर्क की समस्या आ जाती है। इसे देखते हुए समिति ने स्पष्ट किया है कि नकद भुगतान की सुविधा भी अनिवार्य रूप से बनी रहेगी। यदि ई-पेमेंट में कोई तकनीकी खामी आती हैतो दर्शनार्थी पुराने तरीके से भी भुगतान कर सकेंगे ताकि उनकी व्यवस्था प्रभावित न हो।

    मंदिर परिसर में हर जगह उपलब्ध हैं बारकोड

    भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर के प्रमुख स्थानोंविश्राम धाम और कार्यालयों के बाहर बारकोड लगाए गए हैं। श्रद्धालु अपने मोबाइल से किसी भी यूपीआई ऐप जैसे PhonePeGoogle PayPaytm के माध्यम से सुरक्षित रूप से दान राशि जमा कर सकते हैं। इसकी रसीद भी डिजिटल या भौतिक रूप से प्राप्त करने की व्यवस्था की जा रही है।

    प्रशासक का विजन सुलभ और पारदर्शी व्यवस्था

    मंदिर समिति के अनुसारइस कदम से न केवल भक्तों को सुविधा होगीबल्कि मंदिर के कोष और लेखा-जोखा में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। डिजिटल लेन-देन से रिकॉर्ड रखने में आसानी होती है और सुरक्षा की दृष्टि से भी यह बेहतर है। सुविधा दानप्रसादऔर बुकिंग के लिए कैशलेस व्यवस्था। माध्यम बारकोडक्यूआर कोड और ई-वॉलेट। विकल्प डिजिटल के साथ नकद भुगतान की सुविधा भी बरकरार। स्थान महाकालेश्वर मंदिरउज्जैन।

  • जबलपुर के डॉक्टरों का चमत्कार 22 साल की महिला के पेट से निकाला 22 किलो का ट्यूमरनया जीवन दान

    जबलपुर के डॉक्टरों का चमत्कार 22 साल की महिला के पेट से निकाला 22 किलो का ट्यूमरनया जीवन दान



    जबलपुर । जबलपुर संस्कारधानी के चिकित्सा इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। यहाँ के सुखसागर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अपनी निपुणता का परिचय देते हुए एक 22 वर्षीय युवती को नया जीवन प्रदान किया है। युवती के पेट में पिछले काफी समय से एक विशालकाय गांठ पल रही थीजिसे एक बेहद चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के बाद सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया।

    22 किलो का विशालकाय ट्यूमर देख कर डॉक्टर भी रह गए हैरान
    मरीज जब अस्पताल पहुँचीतो उसका पेट काफी फूल चुका था और उसे सांस लेने व चलने-फिरने में गंभीर समस्या हो रही थी। जांच के बाद पता चला कि उसके पेट में इंट्रा-एब्डॉमिनल पेल्विक ट्यूमर है। इस ट्यूमर का आकार और वजन इतना अधिक था कि इसने शरीर के अन्य अंगों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। ऑपरेशन के बाद जब ट्यूमर का वजन किया गयातो वह लगभग 22 किलो निकला। युवती की उम्र और ट्यूमर के वजन का यह दुर्लभ संयोग चिकित्सा क्षेत्र में एक रिकॉर्ड माना जा रहा है।

    आयुष्मान भारत योजना बनी मददगार

    इस मामले की सबसे सुखद बात यह रही कि गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली इस युवती को इलाज के लिए एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ा। आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना AB-PMJAY के तहत यह पूरी सर्जरीदवाइयाँ और अस्पताल का खर्च पूरी तरह निःशुल्क रहा। इस योजना ने एक बार फिर साबित किया कि यह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

    अनुभवी टीम का समन्वय और सफलता

    यह सर्जरी बेहद जोखिम भरी थीक्योंकि इतने बड़े ट्यूमर को निकालते समय रक्तस्राव और अंगों की क्षति का खतरा बना रहता है। अस्पताल की अनुभवी सर्जिकल टीमएनेस्थीसिया विशेषज्ञों और ओटी स्टाफ के बेहतर तालमेल और तकनीकी दक्षता के कारण यह ऑपरेशन सफल रहा। सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया हैजहाँ उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है।

    संस्थान का संकल्प सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज

    सुखसागर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इस सफलता पर डॉक्टरों की टीम को बधाई दी है। संस्थान ने दोहराया कि उनका मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। इस सफल ऑपरेशन ने न केवल अस्पताल का मान बढ़ाया हैबल्कि जबलपुर को चिकित्सा हब के रूप में भी मजबूती दी है मरीज 22 वर्षीय युवती। ट्यूमर का वजन लगभग 22 किलोग्राम। अस्पताल सुखसागर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटलजबलपुर। योजना आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज। र्जरी का प्रकार दुर्लभ इंट्रा-एब्डॉमिनल पेल्विक ट्यूमर।

  • MP में आयकर विभाग का बड़ा धमाका जबलपुर और कटनी में माइनिंग कारोबारियों और BJP नेता के ठिकानों पर रेड

    MP में आयकर विभाग का बड़ा धमाका जबलपुर और कटनी में माइनिंग कारोबारियों और BJP नेता के ठिकानों पर रेड


    जबलपुर ।  मध्य प्रदेश के जबलपुर/कटनी में भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के खिलाफ जांच एजेंसियों ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार तड़के आयकर विभाग की टीमों ने जबलपुर और कटनी में एक साथ दबिश देकर खनन कारोबारियों और रसूखदार नेताओं के होश उड़ा दिए। यह पूरी कार्रवाई आय से अधिक संपत्तिटैक्स चोरी और संदिग्ध लेन-देन की शिकायतों के आधार पर की गई है।

    स्वच्छता अभियान का स्टिकर लगा कर पहुँची टीम
    इस छापेमारी में सबसे चौंकाने वाली बात आयकर विभाग की रणनीति रही। विभाग के अधिकारी किसी सरकारी गाड़ी के बजाय ऐसी कारों में पहुँचे जिन पर स्वच्छता जागरूकता अभियान 2025 के पोस्टर लगे थे। जबलपुर के सिविल लाइन स्थित खनन कारोबारी राजीव चड्ढा के घर जब ये गाड़ियां रुकींतो सुरक्षाकर्मियों को लगा कि नगर निगम की टीम किसी सर्वे के लिए आई है। लेकिन जैसे ही अधिकारियों ने अपना परिचय दियाहड़कंप मच गया।

    BJP नेता और माइनिंग किंग रडार पर

    छापेमारी का मुख्य केंद्र कटनी और जबलपुर रहे। कटनी में जिला पंचायत उपाध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अशोक विश्वकर्मा के ठिकानों पर आयकर विभाग ने घेराबंदी की है। अशोक विश्वकर्मा की फर्म वीएमसी विश्वकर्मा माइंस  के नाम से संचालित होती है। अधिकारियों ने अशोक विश्वकर्मा के निवास के साथ-साथ उनके तीन भाइयों शंकर लाल विश्वकर्मा व अन्य के ठिकानों पर भी एक साथ छापा मारा। ग्राम टिकरिया और सिघनपुरी स्थित खदानों पर भी टीम की मौजूदगी रही। वहींजबलपुर के रसल चौक और सिविल लाइन इलाके में बड़े खनन कारोबारी राजीव चड्ढा और नितिन शर्मा के घर और दफ्तरों को खंगाला जा रहा है। चड्ढा माइन्स के ऑफिस से भारी मात्रा में दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

    25 सदस्यों की टीम और भारी पुलिस बल

    सूत्रों के अनुसारइस पूरी कार्रवाई में भोपालइंदौर और जबलपुर के लगभग 25 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम में महिला अधिकारियों को भी शामिल किया गया है ताकि घरों की सघन तलाशी ली जा सके। खबर लिखे जाने तकअधिकारियों ने डिजिटल सबूतबैंक लॉकर के कागजात और संदिग्ध निवेश से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया है।

    करोड़ों की टैक्स चोरी का अनुमान

    आयकर विभाग को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि खनन के कारोबार में बड़े पैमाने पर कैश का लेन-देन हो रहा है और वास्तविक आय को छुपाया जा रहा है। जांच टीम का मानना है कि इस छापेमारी के अंत तक करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी और बेनामी संपत्तियों का खुलासा हो सकता है। फिलहालकिसी भी अधिकारी ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया हैक्योंकि सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। मध्य प्रदेश में चुनाव के बाद आर्थिक अनियमितताओं पर यह अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाहियों में से एक मानी जा रही है।
    भाजपा नेता के घर हुई इस रेड ने सियासी गलियारों में भी चर्चा तेज कर दी है। अब देखना यह है कि जांच के बाद क्या बड़े खुलासे होते हैं। लोकेशन जबलपुर सिविल लाइनरसल चौक और कटनी जलपा वार्डटिकरिया। निशाने पर राजीव चड्ढानितिन शर्मा और भाजपा नेता अशोक विश्वकर्मा। वजह आय से अधिक संपत्तिटैक्स चोरी और अवैध माइनिंग लेन-देन। विभाग आयकर विभाग भोपाल और इंदौर की संयुक्त टीम।

  • ग्वालियर में अपात्र लोगों को पुलिस सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब..

    ग्वालियर में अपात्र लोगों को पुलिस सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब..


    ग्वालियर/मध्यप्रदेश के ग्वालियर में अपात्र और निजी व्यक्तियों को दी जा रही पुलिस सुरक्षा का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट के संज्ञान में आया है। इस मुद्दे को गंभीर जनहित से जुड़ा मानते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि पुलिस बल का इस तरह दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है।यह मामला याचिकाकर्ता नवल किशोर शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद निजी व्यक्तियों को दी जा रही पुलिस सुरक्षा की कोई प्रभावी समीक्षा नहीं की गई। इसके कारण आज भी कई ऐसे लोग पुलिस सुरक्षा का लाभ उठा रहे हैं, जो इसके पात्र नहीं हैं।

    याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डीपी सिंह ने अदालत को बताया कि ग्वालियर में पुलिस बल की पहले से ही भारी कमी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी निजी व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। इससे न केवल आम जनता की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।वकील ने अदालत के सामने उदाहरण पेश करते हुए बताया कि विनय सिंह नामक व्यक्ति को दी गई पुलिस सुरक्षा के दौरान ही उनके खिलाफ वसूली सहित पांच आपराधिक मामले दर्ज हुए। यह साफ तौर पर पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब सुरक्षा पाने वाले ही अपराधों में लिप्त हों, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।

    हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि पूर्व आदेश के बाद सूचना के अधिकार RTI के तहत जो जानकारी सामने आई, वह और भी चिंताजनक है। RTI से खुलासा हुआ कि 19 व्यक्तियों की सुरक्षा में 33 पुलिसकर्मी तैनात थे, जबकि इनमें से अधिकांश व्यक्ति सुरक्षा के पात्र ही नहीं थे। यह स्थिति तब है जब शहर में आम नागरिकों को पर्याप्त पुलिस सहायता नहीं मिल पा रही है।इससे पहले भी हाईकोर्ट इस तरह के मामलों में सख्त रुख अपना चुका है। दिलीप शर्मा और संजय शर्मा को दी गई पुलिस सुरक्षा के मामले में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए दोनों भाइयों से सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश दिए थे। उस समय कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी तुच्छ या अपात्र व्यक्ति को सरकारी खर्च पर पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा सकती।

    न्यायालय ने अपने पुराने आदेशों में यह भी कहा था कि पुलिस सुरक्षा देने के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और ठोस नियम बनाए जाने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि सुरक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था का इस्तेमाल केवल वास्तविक और प्रमाणित खतरे वाले मामलों में ही होना चाहिए, न कि प्रभाव या रसूख के आधार पर।हाईकोर्ट ने यह सुझाव भी दिया था कि जिन मामलों में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा या निजी कारणों से खतरे की आशंका हो, और संबंधित परिवार के पास लाइसेंसी हथियार उपलब्ध हों, वहां निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था एक बेहतर विकल्प हो सकती है। कोर्ट के अनुसार, निजी सुरक्षा गार्ड कई बार पुलिसकर्मियों की तुलना में ज्यादा सजग और प्रभावी साबित हो सकते हैं, जबकि पुलिस बल को कानून-व्यवस्था के मूल कामों में लगाया जाना चाहिए।

    ताजा सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक पूर्व आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया और अपात्र लोगों को दी जा रही सुरक्षा पर क्या कार्रवाई की गई है। नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।यह मामला न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे प्रदेश में पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और जवाबदेही से जुड़ा एक अहम उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले समय में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और कोर्ट का अगला रुख इस व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

  • बीजिंग ने कैसे तोड़ा प्रदूषण का घेरा? ‘गैस चैंबर’ बनती दिल्ली के लिए चीन की स्टेप-बाय-स्टेप सीख

    बीजिंग ने कैसे तोड़ा प्रदूषण का घेरा? ‘गैस चैंबर’ बनती दिल्ली के लिए चीन की स्टेप-बाय-स्टेप सीख


    नई दिल्ली /दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि सरकार को वर्क फ्रॉम होम निर्माण गतिविधियों पर रोक और बिना पीयूसी पेट्रोल-डीजल न मिलने जैसी सख्त पाबंदियां लागू करनी पड़ी हैं। गैस चैंबर बनती राजधानी के बीच अब चीन का उदाहरण चर्चा में है। चीन के दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने बताया है कि बीजिंग ने किस तरह प्रदूषण को मात दी और कैसे एक दशक में हवा की गुणवत्ता में ऐतिहासिक सुधार किया।यू जिंग ने दिल्ली और बीजिंग की तुलना करते हुए आंकड़े साझा किए। उनके अनुसार वर्ष 2013 में बीजिंग में पीएम 2.5 का औसत स्तर 101.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। यह स्तर 2024 तक घटकर 30.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ जब चीन में तेज शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार जारी रहा। इसके बावजूद लगातार और कठोर नीतियों के कारण बीजिंग आज प्रदूषण नियंत्रण की मिसाल बन चुका है।

    वाहनों पर सबसे पहला वार

    चीन की रणनीति का पहला और सबसे अहम कदम था वाहन उत्सर्जन पर सख्त नियंत्रण। बीजिंग में यूरोपियन मानकों के बराबर कड़े उत्सर्जन नियम लागू किए गए। पुराने और ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाया गया। निजी वाहनों की संख्या सीमित करने के लिए लाइसेंस प्लेट लॉटरी सिस्टम ऑड-ईवन जैसी योजनाएं और सप्ताह के कुछ तय दिनों में गाड़ी चलाने पर रोक लगाई गई।इसके साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन को मजबूत किया गया। मेट्रो और बस नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा दिया गया। आज बीजिंग में इलेक्ट्रिक बसों और टैक्सियों की संख्या लाखों में है जिससे प्रदूषण पर सीधा असर पड़ा।

    उद्योगों पर सख्त फैसला

    बीजिंग में प्रदूषण का बड़ा स्रोत भारी उद्योग भी थे। चीन ने इस मोर्चे पर भी कोई नरमी नहीं दिखाई। शहर से 3000 से अधिक बड़ी और प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों को या तो बंद कराया गया या फिर शहर से बाहर स्थानांतरित किया गया। देश की बड़ी स्टील कंपनी शौगांग को हटाने से ही हवा में खतरनाक कणों में लगभग 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।दिलचस्प बात यह है कि जिन इलाकों में पहले फैक्ट्रियां थीं वहां अब पार्क व्यावसायिक क्षेत्र और तकनीकी हब विकसित किए गए। शौगांग का पुराना औद्योगिक परिसर 2022 के शीतकालीन ओलंपिक का प्रमुख स्थल बना जो पर्यावरणीय बदलाव का प्रतीक बन गया।

    क्षेत्रीय सहयोग बना गेमचेंजर

    चीन ने सिर्फ बीजिंग तक सीमित रहकर कदम नहीं उठाए। आसपास के 26 शहरों को साथ लेकर साझा प्रदूषण नियंत्रण रणनीति अपनाई गई। कोयले का उपयोग न केवल उद्योगों में बल्कि घरों में भी चरणबद्ध तरीके से खत्म किया गया। स्वच्छ ईंधन और गैस आधारित प्रणालियों को बढ़ावा दिया गया।

    भारत के लिए क्या सीख?

    भारत में भी स्वच्छ ईंधन निजी वाहनों पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की विशेषज्ञ अनुमिता रॉय चौधरी का कहना है कि फर्क नीति के इरादे और उसके पैमाने का है। चीन ने सालभर सख्ती बरती जबकि दिल्ली में अधिकतर कदम आपात स्थिति में ही उठाए जाते हैं।विशेषज्ञ मानते हैं कि दिल्ली में उद्योगों को पूरी तरह हटाना मुश्किल है लेकिन बेहतर तकनीक साझा प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और लगातार निगरानी से हालात सुधारे जा सकते हैं। बीजिंग का अनुभव बताता है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो और नीतियां लंबी अवधि की हों तो प्रदूषण जैसे जटिल संकट पर भी काबू पाया जा सकता है।