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  • NDA में भी 'G Ram G' विधेयक पर विरोध TDP और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन की तैयारी

    NDA में भी 'G Ram G' विधेयक पर विरोध TDP और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन की तैयारी


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’ को लेकर अब एनडीए में भी विरोध की स्थिति बन गई है। जहां एक ओर विपक्ष ने इस विधेयक को महात्मा गांधी का अपमान मानते हुए उसका विरोध किया है वहीं एनडीए का एक प्रमुख सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी  भी सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया है।

    यह विधेयक मनरेगा योजना के स्थान पर लाया गया है लेकिन विपक्ष और सरकार के सहयोगी दलों में इसके नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तेलुगु देशम पार्टी के सांसद लवु श्री कृष्ण देवरयालु ने विधेयक के तहत राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश जैसे राज्य पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और इस नए बदलाव से उन्हें और ज्यादा बोझ पड़ेगा।

    देवरयालु ने आगे कहा “कुछ सालों से मनरेगा में सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी और यह विचार संसद के बाहर और अंदर कई बार उठाए गए थे। हाल ही में काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 किया गया जो एक सकारात्मक कदम है। लेकिन इस योजना का खर्च राज्यों पर डालने का प्रस्ताव खासकर आंध्र प्रदेश जैसे राज्य के लिए सही नहीं है।
    टीडीपी के प्रवक्ता एन विजय कुमार ने इस नए वर्जन का स्वागत तो किया लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार से 40 फीसदी भुगतान के प्रावधान पर पुनः विचार करने की अपील की। उनका कहना था कि इस भुगतान व्यवस्था से राज्यों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

    वहीं कांग्रेस ने भी इस विधेयक पर विरोध जताया है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम हटाना उनके अपमान के समान है। कांग्रेस ने इसे एक “राजनीतिक कदम बताया है और दावा किया कि मोदी सरकार गांधी के विचारों से मुंह मोड़ रही है। कांग्रेस ने इसके खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।

    ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस विधेयक को संसद में पेश करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं और उनका नाम किसी योजना से हटाना उनका अपमान नहीं है। यह सरकार गांधीजी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के समय भी ‘जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला गया था और तब क्या यह पंडित नेहरू का अपमान था?

    चौहान ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं और अब इस नए विधेयक के तहत 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि इस योजना के लिए प्रावधानित की गई है जो गांवों के समग्र विकास के लिए उपयोग की जाएगी।

    यह विधेयक ध्वनिमत से पास हुआ है लेकिन इसके बावजूद विपक्ष और एनडीए के भीतर ही इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर उन राज्यों के लिए यह विधेयक एक चुनौती बन सकता है जो पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। सरकार की योजना है कि इस विधेयक से ग्रामीण भारत का समग्र विकास होगा और विकसित भारत की दिशा में एक ठोस कदम उठाया जाएगा। लेकिन इसके नाम उद्देश्य और वित्तीय बोझ को लेकर बढ़ते विवाद से यह साफ है कि आगामी दिनों में इस पर और भी राजनीतिक बहस होने की संभावना है।

  • NCR में अपराध पर लगाम के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, एक ही पुलिस और विशेष अदालत की वकालत

    NCR में अपराध पर लगाम के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, एक ही पुलिस और विशेष अदालत की वकालत


    नई दिल्ली /राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR में बढ़ते संगठित अपराध और अपराधियों की बदलती रणनीतियों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक अहम सुझाव दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि दिल्ली नोएडा गुरुग्राम फरीदाबाद और गाजियाबाद जैसे NCR के अलग-अलग इलाकों में अपराध करने वाले गिरोह अक्सर राज्य सीमाओं का फायदा उठाकर पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे NCR में एक समान पुलिस एजेंसी और विशेष अदालत की व्यवस्था पर विचार करने की सलाह दी है।यह टिप्पणी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ ने की जिसमें मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल थे। अदालत का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों की पुलिस और अदालतों के अधिकार क्षेत्र के चलते संगठित अपराधियों को अनुचित लाभ मिल जाता है।

    अपराधियों की रणनीति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NCR में सक्रिय अपराधी गिरोह अक्सर दिल्ली में वारदात को अंजाम देने के बाद तुरंत उत्तर प्रदेश या हरियाणा के इलाकों-जैसे नोएडा गुरुग्राम या फरीदाबाद-में भाग जाते हैं। इस तरह वे गिरफ्तारी से बचने या जांच और ट्रायल में देरी करने में सफल हो जाते हैं। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि यदि कोई गैंगस्टर या संगठित गिरोह कई राज्यों में अपराध करता है तो उसके खिलाफ एक ही एजेंसी द्वारा कार्रवाई और एक ही अदालत में मुकदमा चलाया जाना ज्यादा प्रभावी होगा।

    NIA जैसी एजेंसी को अधिकार देने का सुझाव

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संगठित अपराध से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी को पूरे NCR में जांच और ट्रायल का अधिकार दिया जा सकता है। इससे अपराधी यह तर्क नहीं दे पाएंगे कि अपराध अलग-अलग राज्यों में हुआ है और इसलिए अलग-अलग अदालतों में मुकदमा चले।अदालत ने माना कि एकीकृत व्यवस्था से जांच तेज होगी और न्यायिक प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी बनेगी।

    विशेष अदालत बनाने की वकालत

    मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ASG ऐश्वर्य भाटी से सवाल किया कि क्यों न NCR के लिए एक विशेष अदालत बनाई जाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह यूएपीए पीएमएलए और एनडीपीएस जैसे केंद्रीय कानूनों के तहत विशेष अदालतें बनाई गई हैं उसी तर्ज पर NCR में संगठित अपराध के मामलों के लिए भी एक सक्षम और केंद्रीकृत अदालत हो सकती है।ऐसी अदालत में यह मायने नहीं रखेगा कि अपराध किस राज्य में हुआ है बल्कि पूरा मामला एक ही जगह सुना और निपटाया जा सकेगा।

    कानूनी खामियों से अपराधियों को फायदा

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि वर्तमान व्यवस्था में क्षेत्राधिकार जूरिस्डिक्शन की जटिलता संगठित अपराधियों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। अलग-अलग राज्यों में एफआईआर जांच और ट्रायल होने से मामलों में देरी होती है। इसका नतीजा यह होता है कि कई कुख्यात अपराधी जमानत पाने में सफल हो जाते हैं जो समाज और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।
    समाज और जनहित के लिए जरूरी कदम
    पीठ ने जोर देकर कहा कि NCR जैसे संवेदनशील और घनी आबादी वाले क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए मजबूत और प्रभावी कानूनी ढांचे की जरूरत है। एक ही पुलिस एजेंसी और विशेष अदालत से न केवल त्वरित कार्रवाई संभव होगी बल्कि पीड़ितों को भी जल्द न्याय मिल सकेगा।सुप्रीम कोर्ट ने इसे जनहित और समाज की सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।फिलहाल यह एक सुझाव है लेकिन अगर इसे लागू किया जाता है तो NCR में अपराध से निपटने की रणनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। आने वाले समय में केंद्र सरकार इस पर क्या फैसला लेती है इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • पश्चिम बंगाल में SIR के दूसरे चरण के बाद 58 लाख मतदाताओं के नाम कटे 1.9 करोड़ को नोटिस जारी

    पश्चिम बंगाल में SIR के दूसरे चरण के बाद 58 लाख मतदाताओं के नाम कटे 1.9 करोड़ को नोटिस जारी


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR के दूसरे चरण के तहत मंगलवार को जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुए हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक राज्य में अब कुल 7.1 करोड़ मतदाता रह गए हैं जबकि 29 अक्टूबर 2025 तक 7.6 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम मृत स्थानांतरित अनुपस्थित या डुप्लीकेट होने के कारण हटाए गए हैं। इसके अलावा 1.9 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किया जाएगा क्योंकि उनकी पंजीकरण जानकारी में तार्किक विसंगतियां पाई गईं हैं जिन्हें चुनाव अधिकारियों के अनुसार अगले चरण में स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

    इन विसंगतियों में मुख्य रूप से ‘पिता के नाम में गड़बड़ी’ एक ही अभिभावक से छह या उससे अधिक संतान का नामांकन और असामान्य उम्र के अंतर की प्रविष्टियां शामिल हैं। कुछ मामलों में ऐसे व्यक्ति भी पंजीकृत पाए गए हैं जिनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक थी लेकिन उनका पहले कभी मतदाता सूची में नामांकन नहीं हुआ था। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि SIR के दूसरे चरण में दस्तावेज़ जमा करना अनिवार्य नहीं था जिससे कई अधूरे या गलत विवरण सामने आए। इस दौरान 28 लाख गणना फॉर्म पिछली SIR सूची से मेल नहीं खा पाए जबकि 1.65 करोड़ फॉर्म में तार्किक विसंगतियां पाई गईं। इन मामलों में मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है और उन्हें सुनवाई के दौरान अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा। यदि वे अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाते हैं तो उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।

    जिला स्तर पर मतदाता सूची में कटौती की दर में भी बड़ा अंतर देखने को मिला। कोलकाता उत्तर में 25.9 प्रतिशत और कोलकाता दक्षिण में 23.8 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए जबकि पूर्व मेदिनीपुर में यह दर सबसे कम रही केवल 3.3 प्रतिशत। पश्चिम बर्दवान में भी 13.1 प्रतिशत नाम सूची से हटाए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों में नाम कटने की दर राज्य औसत से कम रही। हालांकि इन जिलों में ‘पिता के नाम में असंगति’ की दर अधिक पाई गई। मालदा उत्तर दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में इस दर की 12 से 16 प्रतिशत के बीच वृद्धि हुई जो अन्य जिलों से कहीं अधिक है।

    सभी विसंगतियों और गलत नामांकन के बाद चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों को मृत स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची सौंपी है। साथ ही ये जानकारी सार्वजनिक वेबसाइटों पर भी उपलब्ध कराई गई है। आयोग के अनुसार 15 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं जबकि सत्यापन प्रक्रिया 7 फरवरी 2026 तक चलेगी। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों और अन्य चुनावों की पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेष गहन पुनरीक्षण से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि केवल योग्य और वास्तविक मतदाता ही मतदान में हिस्सा लें।

  • दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा पिकअप गाड़ी में लगी आग 3 की जलकर मौत

    दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा पिकअप गाड़ी में लगी आग 3 की जलकर मौत


    अलवर । राजस्थान के अलवर जिले में दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसमें तीन लोग जिंदा जलकर मारे गए। यह हादसा रैणी थाना क्षेत्र के चैनल नंबर 131 के पास हुआ जब एक पिकअप गाड़ी दिल्ली से जयपुर जा रही थी और दूसरे वाहन से टकरा गई। टक्कर के बाद पिकअप गाड़ी में आग लग गई और इसमें सवार तीनों लोग अंदर फंसे रह गए। आग लगने के बाद मौके पर पहुंचे लोग पिकअप में फंसे लोगों को बचाने का प्रयास करते रहे लेकिन सब बेकार गया।

    हादसा इतना भीषण था कि पिकअप गाड़ी का अगला हिस्सा पूरी तरह से नष्ट हो गया था जिससे सवार लोग अंदर फंस गए और बाहर नहीं निकल सके। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि तीनों लोग जलकर मारे गए। हादसे में पिकअप का ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर रेफर कर दिया गया है। मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है और पुलिस ने शवों को रैणी अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मृतकों की पहचान के लिए काम चल रहा है और यह जांच की जा रही है कि ये लोग कहाँ के निवासी थे और किस स्थान से आ रहे थे।

    हादसा बुधवार तड़के करीब 300 बजे हुआ। दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर अचानक हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया। हादसे की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल विभाग ने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन पिकअप पूरी तरह से जल चुकी थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह हादसा बेहद दर्दनाक था और उन्होंने पिकअप में सवार लोगों को बाहर निकालने के लिए अपनी ओर से मदद की कोशिश की। लेकिन जलती हुई गाड़ी में फंसे हुए लोगों को बचाना संभव नहीं हो सका।

    दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर यह हादसा एक बड़ी दुर्घटना का रूप ले लिया। दुर्घटना की वजह से मार्ग पर कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हो गया था लेकिन पुलिस ने जल्द ही रास्ते को साफ कर दिया।पुलिस अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि टक्कर के कारण क्या था और दुर्घटना के वक्त पिकअप गाड़ी के ड्राइवर की क्या स्थिति थी। हादसा इतना भीषण था कि स्थानीय लोग भी दंग रह गए और कुछ समय के लिए समझ ही नहीं पाए कि क्या हो रहा है।अलवर और रैणी पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और साथ ही मृतकों के परिवारों को सूचना दी जा रही है।

  • उत्तराखंड धर्मांतरण कानून पर राज्यपाल ने दी ब्रेक सरकार को वापस लौटा बिल

    उत्तराखंड धर्मांतरण कानून पर राज्यपाल ने दी ब्रेक सरकार को वापस लौटा बिल


    नई दिल्ली । उत्तराखंड की धामी सरकार ने जबरन धर्मांतरण के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान रखने वाले संशोधित उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2025 को राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा था। हालांकि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सेनि ने विधेयक को मंजूरी देने के बजाय तकनीकी आधार पर पुनर्विचार के लिए सरकार को लौटा दिया है। सूत्रों के मुताबिक लोकभवन ने विधेयक के ड्राफ्ट में कुछ तकनीकी गलतियों की वजह से यह कदम उठाया है।

    अब राज्य सरकार के सामने दो विकल्प हैं। पहला सरकार इस विधेयक को अगले विधानसभा सत्र में फिर से पारित कराए या दूसरा राज्यपाल की मंजूरी के बिना अध्यादेश लाकर इसे तत्काल लागू किया जाए। अगर सरकार अध्यादेश लाती है तो यह विधेयक तत्काल प्रभाव से लागू हो सकता है लेकिन विधानसभा में इसे फिर से पारित करना अधिक सुरक्षित रास्ता हो सकता है।

    यह विधेयक उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण पर सजा को और भी कड़ा करता है। इसे पहले 2018 में लागू किया गया था और 2022 में इसमें कुछ संशोधन किए गए थे। 13 अगस्त 2025 को राज्य सरकार ने एक बार फिर इस कानून में बदलाव करते हुए उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2025 को मंजूरी दी थी। इस बिल के तहत धर्मांतरण के मामलों में सजा को और सख्त किया गया है जिससे राज्य में इस पर पूरी तरह से अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।

    नए विधेयक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति छल-बल से धर्मांतरण कराता है तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी। पहले यह सजा तीन से 10 साल तक थी जिसे अब बढ़ाकर तीन से 20 साल तक किया गया है। इसके अलावा अगर कोई धर्मांतरण के लिए नाबालिगों का शोषण करता है या महिला को विवाह के झांसे में फंसा कर धर्म परिवर्तन कराता है तो उसे न्यूनतम 20 साल की सजा और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही ऐसे मामलों में जुर्माना भी 10 लाख रुपये तक हो सकता है।

    इसके अलावा अब किसी भी व्यक्ति को धर्मांतरण के मामलों की शिकायत करने का अधिकार होगा जबकि पहले यह केवल खून के रिश्तेदारों तक सीमित था। इस विधेयक में एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि जिलाधिकारी को गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोपी की संपत्ति कुर्क करने का अधिकार दिया गया है।

    हालांकि राज्यपाल ने विधेयक को तकनीकी गलतियों के कारण वापस कर दिया है लेकिन यह स्पष्ट है कि धामी सरकार धर्मांतरण के मामलों में कठोर कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस विधेयक को फिर से कैसे पारित करती है और इसे लागू करने के लिए कौन सा रास्ता अपनाती है।

  • दिल्ली में शराब खरीदने का बदलेगा तरीका, मोबाइल ऐप से बुकिंग और पिकअप की सुविधा..

    दिल्ली में शराब खरीदने का बदलेगा तरीका, मोबाइल ऐप से बुकिंग और पिकअप की सुविधा..


    नई दिल्ली /दिल्ली में शराब खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राजधानी में अक्सर लोगों को अपनी पसंदीदा शराब ढूंढने के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान के चक्कर लगाने पड़ते हैं। खासकर वीकेंड त्योहारों या शादी के सीजन में यह परेशानी और भी बढ़ जाती है। अब इस समस्या का समाधान निकालते हुए दिल्ली आबकारी विभाग ने एक नया मोबाइल ऐप तैयार किया है जिसका नामई-आबकारी दिल्ली रखा गया है। इस ऐप के जरिए शराब खरीदने की प्रक्रिया को न सिर्फ आसान बनाया जाएगा बल्कि इसे ज्यादा पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल भी बनाया जाएगा। विभाग का कहना है कि ऐप फिलहाल ट्रायल मोड में है और जल्द ही इसे आम लोगों के लिए आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा।

    ऐप से मिलेगी शराब की पूरी जानकारी

    ई-आबकारी दिल्ली ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए उपभोक्ता घर बैठे यह जान सकेंगे कि उनकी पसंदीदा शराब किस दुकान पर उपलब्ध है। ऐप पर ब्रैंड का नाम उपलब्ध स्टॉक और संबंधित दुकान की लोकेशन जैसी जानकारी रियल-टाइम में दिखाई जाएगी।अब ग्राहकों को यह जानने के लिए अलग-अलग दुकानों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि किसी खास ब्रैंड की बोतल उपलब्ध है या नहीं। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि बेवजह की भागदौड़ भी खत्म होगी।

    प्री-बुकिंग और पिकअप की सुविधा

    इस ऐप में प्री-बुकिंग का विकल्प भी प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत ग्राहक अपनी पसंद की शराब को पहले से बुक कर सकेंगे। बुकिंग के बाद दुकानदार ग्राहक के लिए उस ब्रैंड को एक तय समय तक रिजर्व रखेगा।प्रस्तावित नियमों के अनुसार ग्राहक को बुकिंग के बाद एक घंटे के भीतर दुकान पर पहुंचकर अपना ऑर्डर पिकअप करना होगा। यदि तय समय में ग्राहक नहीं पहुंचता है तो दुकानदार उस शराब को किसी अन्य ग्राहक को बेचने के लिए स्वतंत्र होगा।इस व्यवस्था से दुकानों पर भीड़ कम होगी और स्टॉक मैनेजमेंट भी बेहतर तरीके से हो सकेगा। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्री-बुकिंग पर कोई अतिरिक्त चार्ज लिया जाएगा या नहीं। इस पर अंतिम फैसला ऐप लॉन्च के समय लिया जा सकता है।

    मिलावटी शराब और ओवरचार्जिंग पर लगेगी लगाम

    ई-आबकारी ऐप का एक अहम उद्देश्य मिलावटी शराब और अधिक कीमत वसूलने जैसी शिकायतों पर नियंत्रण करना भी है। ऐप के जरिए उपभोक्ता सीधे आबकारी विभाग तक अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।यदि किसी दुकान पर तय कीमत से ज्यादा पैसे लिए जाते हैं या शराब की गुणवत्ता को लेकर संदेह होता है तो ग्राहक ऐप के माध्यम से तुरंत शिकायत कर सकता है। इसके अलावा शराब की प्रमाणिकता से जुड़ी जानकारी भी ऐप पर उपलब्ध होगी जिससे नकली और मिलावटी शराब पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

    ग्राहकों और दुकानदारों-दोनों को फायदा

    यह ऐप न केवल उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद साबित होगा बल्कि दुकानदारों के लिए भी राहत लेकर आएगा। ग्राहकों को सही जानकारी मिलने से दुकानों पर अनावश्यक भीड़ कम होगी और दुकानदार बेहतर तरीके से अपने स्टॉक का प्रबंधन कर सकेंगे।साथ ही डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध गतिविधियों पर भी नजर रखना आसान होगा।

    कब होगा लॉन्च?

    दिल्ली आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार ई-आबकारी दिल्ली ऐप फिलहाल ट्रायल मोड में है। तकनीकी खामियों को दूर करने और फीडबैक लेने के बाद इसे जल्द ही आम जनता के लिए लॉन्च किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यह ऐप दिल्ली में शराब खरीदने के अनुभव को पूरी तरह बदल देगा। कुल मिलाकर यह पहल दिल्ली के लोगों के लिए बड़ी सुविधा साबित हो सकती है। मोबाइल ऐप के जरिए शराब की जानकारी बुकिंग और शिकायत की सुविधा मिलने से खरीदारी आसान तेज और पारदर्शी हो जाएगी।

  • CM योगी का सख्त संदेश: नकली डीएपी-यूरिया बेचने वालों पर लगेगा NSA, किसानों से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त

    CM योगी का सख्त संदेश: नकली डीएपी-यूरिया बेचने वालों पर लगेगा NSA, किसानों से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त


    नई दिल्ली /उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नकली, मिलावटी खाद और उर्वरकों की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि डीएपी, यूरिया या किसी भी प्रकार की खाद में मिलावट कर किसानों के साथ धोखा करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम NSA जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह निर्देश एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए, जिसमें प्रदेश में खाद की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और कालाबाजारी की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अन्नदाता किसानों की मेहनत और फसलों के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है।

    खाद की उपलब्धता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खाद की समुचित उपलब्धता और उसका पारदर्शी वितरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सहकारिता और कृषि विभाग को निर्देश दिए कि वे प्रतिदिन खाद की उपलब्धता और वितरण की समीक्षा करें। मुख्यमंत्री कार्यालय से सभी जिलों की सीधी निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डीएपी, यूरिया और पोटाश केवल निर्धारित सरकारी दरों पर ही किसानों को उपलब्ध कराए जाएं। ओवर रेटिंग, जबरन टैगिंग या खाद के साथ अन्य सामान बेचने जैसी शिकायतें बिल्कुल भी स्वीकार नहीं की जाएंगी।

    औचक निरीक्षण और सख्त जवाबदेही

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारियों और उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे खाद की दुकानों, सहकारी समितियों और वितरण केंद्रों पर नियमित और औचक निरीक्षण करें। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या कालाबाजारी सामने आती है तो तुरंत जिम्मेदार अधिकारियों और दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर खुले रूप से विजिलेंस जांच कराई जाए और दोषियों को कानून के तहत सख्त सजा दी जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि कृत्रिम खाद संकट पैदा करने या किसानों को गुमराह करने वालों के खिलाफ सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करेगी।

    प्रदेश में खाद की वर्तमान स्थिति

    बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रदेश में खाद की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। बताया गया कि 16 दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश में कुल 9.57 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 3.77 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 3.67 लाख मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है।यूरिया की बात करें तो सहकारी क्षेत्र में 3.79 लाख मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 5.78 लाख मीट्रिक टन का भंडार मौजूद है। डीएपी में सहकारी क्षेत्र के पास 1.47 लाख मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र के पास 2.30 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध है। वहीं एनपीके उर्वरक में सहकारी क्षेत्र में 0.88 लाख मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 2.79 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक है।

    किसानों को न हो कोई परेशानी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि रबी फसलों की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और इस समय गेहूं की फसल में टॉप ड्रेसिंग के लिए यूरिया की सबसे अधिक जरूरत होती है। वर्तमान में प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 54,249 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा रहा है।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को खाद के लिए भटकना न पड़े और समय पर उन्हें जरूरत के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी सुरक्षा व सुविधा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

  • प्रदूषण पर चीन की भारत को नसीहत, बीजिंग–दिल्ली की तुलना कर बोला-अनुभव साझा करने को तैयार

    प्रदूषण पर चीन की भारत को नसीहत, बीजिंग–दिल्ली की तुलना कर बोला-अनुभव साझा करने को तैयार

    नई दिल्ली/दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण ने एक बार फिर लोगों की सांसें मुश्किल कर दी हैं। घना स्मॉगजहरीली हवा और बेहद खराब एयर क्वालिटी के बीच अब चीन ने भी इस मुद्दे पर भारत को सलाह दी है। चीन के दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने दिल्ली के प्रदूषण को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए न सिर्फ चिंता जताईबल्कि बीजिंग और नई दिल्ली की तुलना करते हुए चीन को एक उदाहरण के तौर पर पेश किया।

    यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि चीन और भारत दोनों ही तेजी से शहरीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और इसी कारण प्रदूषण एक साझा चुनौती बन चुका है। उन्होंने बीजिंग और दिल्ली की हवा की गुणवत्ता की तुलना करते हुए तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में बीजिंग का एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI 68 दिखाया गयाजो संतोषजनक श्रेणी में आता हैजबकि दिल्ली का AQI 447 दर्ज किया गयाजिसे गंभीर स्तर माना जाता है।अपने पोस्ट में यू जिंग ने लिखाचीन भी कभी गंभीर स्मॉग से जूझता था। लेकिन पिछले एक दशक में लगातार और सख्त प्रयासों से हमने स्थिति में बड़ा सुधार किया है। आने वाले दिनों में हम अपने अनुभवों को छोटी-छोटी सीरीज के जरिए साझा करेंगे। इस बयान के बाद भारत और चीन के बीच प्रदूषण को लेकर तुलना और चर्चा तेज हो गई है।

    दिल्ली में हालात बेहद गंभीर

    दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति इस समय चिंताजनक बनी हुई है। हवा में PM2.5 और PM10 जैसे खतरनाक कण कई गुना ज्यादा दर्ज किए जा रहे हैं। हालात को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट-CAQM ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान-GRAP का स्टेज-4 लागू कर दिया है। इसके तहत निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोकडीजल वाहनों पर पाबंदीट्रकों की एंट्री पर नियंत्रण और अन्य आपातकालीन कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद लोगों को साफ हवा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

    चीन ने प्रदूषण से निपटने के लिए क्या किया?
    चीन की प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत 2008 के बीजिंग ओलंपिक के दौरान अस्थायी उपायों से हुई थी। इसके बाद 2013 में प्रदूषण को राष्ट्रीय संकट मानते हुए एक व्यापक एक्शन प्लान लागू किया गया।चीन ने कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता कम कीफैक्ट्रियों के लिए सख्त उत्सर्जन मानक लागू किए और पुराने उद्योगों को बंद या अपग्रेड किया। नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर दिया गया और इलेक्ट्रिक वाहनों तथा पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया गया। इसके साथ ही बीजिंगतियानजिन और हेबेई जैसे पड़ोसी इलाकों के साथ मिलकर साझा लक्ष्य तय किए गएताकि क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण पर भारी निवेश भी किया। 2013 से 2017 के बीच इस क्षेत्र में खर्च कई गुना बढ़ाजिससे नीतियों को जमीन पर उतारने में मदद मिली।

    चीन को क्या नतीजे मिले?

    इन सख्त कदमों का असर साफ दिखाई दिया। 2013 से 2017 के बीच बीजिंग में PM2.5 का स्तर करीब 35% तक कम हुआ। हालिया आंकड़ों के अनुसारपिछले साल बीजिंग में करीब 290 दिन अच्छी हवा वाले दर्ज किए गएजो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिकचीन ने दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषण कम करने वाले देशों में अहम स्थान बनाया है।

    दिल्ली के लिए क्या सबक?

    चीन का अनुभव बताता है कि प्रदूषण से लड़ने के लिए सख्त नीतियांक्षेत्रीय सहयोगपारदर्शी डेटालगातार फंडिंग और मजबूत अमल जरूरी है। भारत में भी नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम-NCAP चल रहा हैलेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और तेज कार्रवाई की जरूरत है।चीन का यह बयान ऐसे समय में आया हैजब दिल्ली के लोग साफ हवा के लिए जूझ रहे हैं। यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच पर्यावरण सहयोग की संभावनाओं को भी दिखाता हैहालांकि भारत में इस नसीहत को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक बहस भी तेज हो सकती है।

  • गुरुवार को पीले कपड़े पहनने के फायदे: जानें क्यों यह रंग लाता है खुशहाली और सफलता

    गुरुवार को पीले कपड़े पहनने के फायदे: जानें क्यों यह रंग लाता है खुशहाली और सफलता


    नई दिल्ली ।
    गुरुवार को पीले कपड़े पहनने से जुड़े धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व को भारतीय संस्कृति में बहुत अहमियत दी जाती है। यह परंपरा न केवल शुभता और आस्था से जुड़ी हुई है बल्कि इसका मानसिक और शारीरिक लाभ भी होता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवताओं के गुरु बृहस्पति को समर्पित होता है और पीला रंग इस दिन विशेष महत्व रखता है। आइए जानते हैं कि क्यों गुरुवार को पीले कपड़े पहनना हमारे जीवन में खुशहाली सफलता और मानसिक शांति लाता है।

    पीला रंग क्यों होता है शुभ

    पीला रंग सदैव से ऊर्जा ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। यह रंग मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है और व्यक्ति के आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है। यही कारण है कि धार्मिक कार्यों में हल्दी का उपयोग किया जाता है क्योंकि हल्दी का रंग भी पीला होता है और इसे शुभता का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि गुरुवार के दिन पीला रंग पहनने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

    गुरुवार को पीले कपड़े पहनने के लाभ 

    गुरुवार को पीले कपड़े पहनने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। भगवान विष्णु घर में सुख-शांति बनाए रखने वाले देवता माने जाते हैं और उनका आशीर्वाद मिलते ही घर की समस्याएं हल होने लगती हैं। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होने के कारण उनकी पूजा और पीले वस्त्र पहनने से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है जो जीवन में खुशहाली और शांति लेकर आता है।

    कार्यों में सफलता मिलती है

    गुरुवार को किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति को इंटरव्यू परीक्षा या किसी बड़े व्यापारिक सौदे में सफलता की कामना है तो पीले रंग के कपड़े पहनना विशेष लाभकारी होता है। पीला रंग मन को शांत और सकारात्मक बनाए रखता है जिससे मनोबल बढ़ता है और कार्यों में सफलता प्राप्त करने के अवसर अधिक होते हैं।

    मानसिक तनाव से मुक्ति

    पीला रंग मानसिक तनाव को कम करने और चिंता को दूर करने में सहायक होता है। विशेषकर उन लोगों के लिए जिनका मानसिक स्वास्थ्य कमजोर होता है या जो तनाव चिंता और अवसाद से जूझ रहे हैं उन्हें गुरुवार को पीले कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है। इससे मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है।

    विवाह संबंधों में सुधार

    यदि किसी लड़की के विवाह में बार-बार अड़चनें आ रही हों या विवाह के मामलों में कोई समस्या हो तो गुरुवार को पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करना एक प्रभावी उपाय माना जाता है। इस उपाय से अच्छे रिश्ते आने लगते हैं और विवाह संबंधी समस्याओं का समाधान होता है। पीला रंग खासतौर पर रिश्तों में संतुलन और सामंजस्य बनाए रखने में मदद करता है।

    पीले कपड़े न पहनने पर क्या करें

    कभी कभी ऐसी स्थिति आती है जब हम किसी कारणवश पीले कपड़े नहीं पहन पाते हैं। ऐसे में एक सरल और प्रभावी उपाय है हल्दी का उपयोग। हल्दी जो कि पीले रंग की होती है उसे अपने कपड़ों पर लगाकर भी गुरुवार के दिन शुभता प्राप्त की जा सकती है। हल्दी लगाने से भी पीले रंग का प्रभाव पाया जाता है और इसके समान ही मानसिक शांति और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    गुरुवार को पीले कपड़े पहनने की परंपरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह मानसिक और शारीरिक लाभ भी प्रदान करती है। पीला रंग ज्ञान खुशी और ऊर्जा का प्रतीक है और इस दिन इसे पहनने से न केवल आंतरिक शांति मिलती है बल्कि कार्यों में सफलता तनाव से मुक्ति और सुख-शांति का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। अगर आप गुरुवार को पीले कपड़े पहनने की परंपरा को अपनाते हैं तो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं और आपका मनोबल बढ़ सकता है।

  • Billionaires list में टेक दिग्गजों का जलवा.. कई देशों की GDP एलन मस्क के नेटवर्थ से कम

    Billionaires list में टेक दिग्गजों का जलवा.. कई देशों की GDP एलन मस्क के नेटवर्थ से कम


    वाशिंगटन।
    दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची (World’s Richest People list) में एक बार फिर टेक्नोलॉजी के दिग्गजों (Technology Giants) का जलवा बरकरार है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, टेस्ला और स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क ने $638 बिलियन की कुल संपत्ति के साथ टॉप पोजीशन पर बरकरार रखा है।

    यह आंकड़ा न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ है, बल्कि एक ही दिन में 167 बिलियन की जबरदस्त बढ़ोतरी और YTD (ईयर-टू-डेट) में +$205 बिलियन का उछाल दर्शाता है। मस्क की संपत्ति में यह उछाल टेस्ला के शेयरों की तेजी और स्पेसएक्स के वैल्यूएशन से जुड़ा है।

    130 से अधिक देशों की जीडीपी एलन मस्क की दौलत से कम
    IMF डेटा के अनुसार, 2025 के लिए लगभग 130 से अधिक देशों की नाममात्र GDP 600 अरब डॉलर से कम अनुमानित है। दुनिया में कुल 195 संप्रभु देश हैं, जिनमें से शीर्ष 60-65 अर्थव्यवस्थाओं (जैसे अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी आदि) की GDP इससे ऊपर है, जबकि बाकी छोटे द्वीप राष्ट्र, अफ्रीकी और कुछ एशियाई देश इससे नीचे आते हैं। IMF की 2025 अपडेटेड अनुमानों के मुताबिक कई विकासशील देशों की GDP $100B से भी कम है।

    टॉप-10 में अमेरिकी टेक मैग्नेट्स का कब्जा
    टॉप 10 में अमेरिकी टेक मैग्नेट्स का कब्जा साफ दिख रहा है। गूगल के सह-संस्थापकों लैरी पेज ($265B) और सर्गेई ब्रिन ($246B) ने दूसरे और तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया, हालांकि हालिया बदलाव में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

    जेफ बेजोस (246 अरब डॉलर), लैरी एलिसन (238 अरब डॉलर), मार्क जुकरबर्ग (229 अरब डॉलर), स्टीव बाल्मर (166 अरब डॉलर) और एनवीडिया के जेंसन हुआंग (153 अरब डॉलर) भी टेक सेक्टर से ही हैं। हुआंग की संपत्ति में इस साल अबतक 39 अरब डॉलर की शानदार बढ़ोतरी हुई, जो AI चिप डिमांड का असर दिखाती है।

    फ्रांस के बर्नार्ड अर्नाल्ट ($202B) लक्जरी कंज्यूमर सेक्टर से अकेले गैर-अमेरिकी नाम हैं, जबकि वॉरेन बफे ($152B) डाइवर्सिफाइड निवेश से 10वें स्थान पर हैं। वॉल्टन फैमिली के जिम वॉल्टन (141 अरब डॉलर) रिटेल से हैं, लेकिन कुल मिलाकर टॉप 11 में 9 अमेरिकी और ज्यादातर टेक से जुड़े हैं।

    क्या कहते हैं आंकड़े?
    टेक स्टॉक्स की रैली ने इन बिलियनेयर्स को आसमान छू लिया है, खासकर AI और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के बूम से, लेकिन हालिया घाटे (जैसे बेजोस के -$3.47B) बाजार की अस्थिरता की ओर इशारा करते हैं। भारतीय निवेशकों के लिए यह सबक है कि टेक पर दांव लगाना फायदेमंद तो है, मगर जोखिम भरा भी।