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  • 60 तक खेल सकता हूं, MS Dhoni ने IPL भविष्य पर दिया बड़ा संकेत, फैंस में जबरदस्त उत्साह

    60 तक खेल सकता हूं, MS Dhoni ने IPL भविष्य पर दिया बड़ा संकेत, फैंस में जबरदस्त उत्साह


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 से पहले चेन्नई सुपर किंग्स के एक फैन इवेंट में एम.एस. धोनी ने अपने रिटायरमेंट को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने एक बार फिर चर्चाओं को तेज कर दिया। 44 वर्षीय धोनी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह 60 साल की उम्र तक भी आईपीएल खेल सकते हैं। उनके इस बयान से स्टेडियम में मौजूद फैंस जोश से भर गए।

    चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान अभिनेता शिवकार्तिकेयन ने धोनी से कहा कि वह रिटायरमेंट की बातों को नजरअंदाज कर लंबे समय तक खेलते रहें। इस पर धोनी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, मुश्किल होगा लेकिन कोशिश कर सकता हूं। इसके बाद पूरा स्टेडियम ‘धोनी-धोनी’ के नारों से गूंज उठा। इस पल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    आईपीएल इतिहास में एम.एस. धोनी का नाम सबसे सफल खिलाड़ियों में शुमार है। उन्होंने अब तक 278 मैचों में 5439 रन बनाए हैं और चेन्नई सुपर किंग्स को 5 बार खिताब दिलाया है। आईपीएल 2026 उनका 19वां सीजन होगा। हालांकि, उन्होंने 2024 से पहले कप्तानी छोड़ दी थी और टीम की जिम्मेदारी ऋतुराज गायकवाड़ को सौंप दी गई थी।

    क्या होगा आखिरी सीजन?
    धोनी के भविष्य को लेकर अटकलें लगातार जारी हैं। चेन्नई सुपर किंग्स के CEO काशी विश्वनाथन ने संकेत दिए हैं कि धोनी 2026 का सीजन खेलेंगे, लेकिन उनकी भूमिका पहले से अलग हो सकती है।

    पिछले कुछ सीजन में उनके रोल में बदलाव साफ देखा गया है अब वह कप्तान नहीं हैं, निचले क्रम में फिनिशर की भूमिका निभाते हैं और इम्पैक्ट प्लेयर नियम के कारण उनकी भागीदारी सीमित हो गई है।

    टीम में नए खिलाड़ियों के आने से विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी भविष्य में साझा की जा सकती है, लेकिन धोनी का अनुभव अब भी टीम के लिए बेहद अहम बना हुआ है। खासकर तब, जब 2025 में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था।

    नई शुरुआत या विदाई का संकेत?

    आईपीएल 2026 चेन्नई सुपर किंग्स के लिए बदलाव का साल हो सकता है और संभव है कि यह एम.एस. धोनी के करियर का आखिरी अध्याय भी साबित हो। हालांकि फैंस की उम्मीद अब भी कायम है कि ‘माही’ एक बार फिर मैदान पर अपना जादू दिखाएंगे, चाहे वह 60 तक खेलने की बात मजाक में ही क्यों न हो।

  • Finance Bill 2026-27 आज पेश, कॉर्पोरेट कानून में भी बड़े बदलाव की तैयारी

    Finance Bill 2026-27 आज पेश, कॉर्पोरेट कानून में भी बड़े बदलाव की तैयारी


    नई दिल्ली। देश की आर्थिक दिशा तय करने वाले अहम कदम के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया। यह दोनों विधेयक आने वाले वित्त वर्ष के लिए सरकार की नीतियां, बजट नीतियां और कॉर्पोरेट नीतियां में सुधार को लागू करने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    वित्त विधेयक 2026-27: बजट लागू करने की दिशा में अहम कदम

    वित्त विधेयक 2026-27 का मुख्य उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट नीतियों को कानूनी रूप देना है। इसके जरिए सरकार कराधान, खर्च और आर्थिक नीतियों को लागू करेगी। संसद में इस पर चर्चा होगी और इसे पारित कराने की कोशिश की जाएगी। यह विधेयक देश की आर्थिक रणनीति, विकास योजनाओं और राजकोषीय संतुलन को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

    कॉर्पोरेट कानून में बदलाव की तैयारी

    इसके साथ ही निर्मला सीतारमण कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 भी पेश किया, जिसमें कंपनी अधिनियम 2013 और सीमित देयता भागीदारी अधिनियम 2008 में बदलाव प्रस्तावित हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करना, हस्तांतरण बढ़ाना और कंपनियों के संचालन को अधिक पक्षपाती बनाना है।

    कंपनी अधिनियम कंपनियों के गठन, प्रबंधन और बंद होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, जबकि एलएलपी अधिनियम संयंत्रों को सीमित दायित्वों के साथ काम करने का अवसर देता है। नए संशोधनों से निवेश माहौल को और बेहतर बनाने की उम्मीद है।

    IBC संशोधन का रास्ता भी साफ

    सरकार ने पहले ही दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को इसे हरी झंडी दी थी, जिससे मौजूदा सत्रों में IBC संशोधन विधेयक पेश होने का रास्ता साफ हो गया है।

    संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित बदलाव

    प्रस्तावित संशोधन बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। समिति ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें दिवालियापन प्रक्रिया को तेज करने और देरी को कम करने पर जोर दिया गया था।

    समिति ने सुझाव दिया:

    दिवालियापन मामलों के समाधान के लिए सख्त समयसीमा
    लेनदारों की समिति (CoC) को अधिक अधिकार
    सीमा पार दिवालियापन के लिए नया ढांचा
    निवेश और अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

    इन विधेयकों के लागू होने से भारत में वित्तीय माहौल और मजबूत होने की उम्मीद है। तेज दिवालियापन प्रक्रिया और बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस से भारतीयों का भरोसा बढ़ेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

  • वित्त विधेयक और कॉर्पोरेट कानून संशोधन 2026-27 पर सरकार का बड़ा कदम संसद में पेश होंगी अहम नीतियां

    वित्त विधेयक और कॉर्पोरेट कानून संशोधन 2026-27 पर सरकार का बड़ा कदम संसद में पेश होंगी अहम नीतियां


    नई दिल्ली:
    केंद्र सरकार आर्थिक और कॉर्पोरेट ढांचे में बड़े सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman सोमवार को संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक 2026 पेश करेंगी इन विधेयकों का उद्देश्य देश की वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाना और व्यावसायिक वातावरण को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है

    वित्त विधेयक 2026-27 का मुख्य उद्देश्य आगामी वित्तीय वर्ष के लिए केंद्र सरकार की वित्तीय योजनाओं और कर संबंधी प्रावधानों को लागू करना है यह विधेयक सरकार की बजटीय घोषणाओं को कानूनी रूप देने के साथ-साथ आर्थिक नीतियों को व्यवहार में लाने का आधार प्रदान करता है इसके पारित होने के बाद देश की राजकोषीय व्यवस्था और विकास योजनाओं को नई दिशा मिलेगी

    इसके साथ ही कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक 2026 भी पेश किया जाएगा जिसमें कंपनी अधिनियम 2013 और सीमित देयता भागीदारी अधिनियम 2008 में बदलाव का प्रस्ताव है यह विधेयक कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाने निवेशकों के हितों की रक्षा करने और कंपनियों के संचालन को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

    कंपनी अधिनियम कंपनियों के गठन संचालन और विघटन को नियंत्रित करता है जबकि सीमित देयता भागीदारी अधिनियम साझेदारों को सीमित देयता के साथ एक लचीला ढांचा प्रदान करता है इन दोनों कानूनों में प्रस्तावित संशोधन व्यवसायों के लिए अधिक अनुकूल और आधुनिक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है

    इसके अतिरिक्त सरकार ने हाल ही में दिवालियापन और दिवालिया संहिता में संशोधन को मंजूरी दी है जिससे देश में संकटग्रस्त कंपनियों के समाधान की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है इस पहल का उद्देश्य देरी को कम करना और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना है

    इस संबंध में एक संसदीय समिति ने भी महत्वपूर्ण सिफारिशें दी हैं जिसका नेतृत्व भाजपा सांसद Baijayant Panda ने किया था समिति ने मौजूदा दिवालियापन प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए यह सुझाव दिया कि मामलों के निपटान के लिए सख्त समयसीमा निर्धारित की जाए इससे समाधान प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी हो सकेगी

    समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि लेनदारों की समिति को अधिक अधिकार दिए जाएं ताकि वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी ला सकें और ऋणदाताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके इसके अलावा सीमा पार दिवालियापन के लिए एक समर्पित ढांचे की सिफारिश की गई है जिससे अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियों और विदेशी लेनदारों से जुड़े मामलों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके

    इन विधेयकों और संशोधनों का उद्देश्य भारत के वित्तीय और कॉर्पोरेट ढांचे को अधिक मजबूत पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाना है यदि ये प्रस्ताव पारित हो जाते हैं तो आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक नीतियों और निवेश वातावरण पर इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है

  • सोना-चांदी धड़ाम! कीमतों में बड़ी गिरावट, 14,500 रुपये तक सस्ता हुआ गोल्ड

    सोना-चांदी धड़ाम! कीमतों में बड़ी गिरावट, 14,500 रुपये तक सस्ता हुआ गोल्ड


    नई दिल्ली। सोने और चांदी के जिले में सोमवार को आंशिक ढलान वाला दृश्य मिला, जिसने अवशोषण को चौंका दिया। घरेलू बाजार बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोना और चांदी दोनों में तेजी से बिकवाली दर्ज की गई। सोने का दाम 1.37 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे चला गया है, जबकि चांदी का दाम भी 2.13 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर से नीचे चला गया है। यह गिरावट हाल के समय की सबसे बड़ी गिरावट में से एक पैसा जा रही है।

    MCX पर सोने- पानी के भाव में भारी गिरावट

    2 अप्रैल 2026 को फॉक्सवैगन्स की कीमत 7,619 रुपए पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान सोना 1,36,403 रुपये के रु. तक पहुंच गया, जबकि ऊपरी स्तर 1,40,158 रुपये रहा। वहीं चांदी के 5 मई 2026 के दशक में और भी तेज गिरावट देखने को मिली। चांदी का भाव 14,495 रुपये पर 6.39 प्रतिशत टूटकर 2,12,277 रुपये पर आ गया। इंट्रा-डे में चांदी 2,11,086 रुपये तक।

    अंतर्राष्ट्रीय इस्टेट का दिखावा भी असरदार

    वैश्विक संस्था में भी मंदी का रुख देखने को मिला। COMEX (कॉमेक्स) पर सोना 5.50 प्रतिशत टूटकर 4,359 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया, जबकि सिल्वर 6.65 प्रतिशत टूटकर 65.08 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस गिरावट का सीधा असर भारतीय उद्योग पर भी डाला गया है।

    इतनी बड़ी गिरावट क्यों?

    विशेषज्ञ के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। मोती लाल ओसवाल के कमोडिटी पसन्द मानव मोदी का कहना है कि अमीर भाई-बहनों ने सोने की मांग को कमजोर कर दिया है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है।

    राजनीतिक तनाव और असहमति की रणनीति

    हालांकि आम तौर पर ग्लोबल टेंशन के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार की तस्वीर अलग नजर आती है। भीष्म रुचि की आशा और डॉलर की रेस्तरां के विद्यार्थियों ने सोने से दूरी बना ली। वहीं मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, जिसका असर कमोडिटी बाजार पर भी पड़ा है।

    आगे क्या रहेगा रुख?

    विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आने वाले सोने और चांदी के सिक्कों में दिन जारी कर सकते हैं। संस्था की नजरें अब सांख्यिकी के आंकड़े, मध्याह्न के बिंदु और वैश्विक राजनीतिक संकट पर रहेंगे। यदि हितधारकों के पास स्वामित्व है, तो सोने में दबाव बनाया जा सकता है।

  • पश्चिम एशिया तनाव पर IEA प्रमुख की चेतावनी, बोले-‘वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा’

    पश्चिम एशिया तनाव पर IEA प्रमुख की चेतावनी, बोले-‘वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा’


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने अब पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। International Energy Agency (आईईए) के प्रमुख Fatih Birol ने साफ कहा है कि यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। Iran, United States और Israel के बीच जारी टकराव का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में साफ दिखने लगा है। ऑस्ट्रेलिया में एक कार्यक्रम के दौरान बिरोल ने कहा कि दुनिया इस समय एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रही है और अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो कोई भी देश इसके प्रभाव से बच नहीं पाएगा।

    होर्मुज स्ट्रेट बना संकट की जड़, तेल सप्लाई पर असर

    इस पूरे संकट का सबसे बड़ा केंद्र Strait of Hormuz है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। दुनिया भर में खपत होने वाले करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है और रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल यहां से गुजरता है। मौजूदा तनाव के कारण इस मार्ग से शिपिंग प्रभावित हुई है, जिससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में अस्थिरता बढ़ गई है। हालांकि ईरान ने दावा किया है कि स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं है और नेविगेशन जारी है, लेकिन जमीनी हालात निवेशकों और देशों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

    महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने के संकेत

    तेल सप्लाई में रुकावट का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और रोजमर्रा की चीजों की लागत बढ़ जाती है। बिरोल ने इसे ग्लोबल ऑयल मार्केट के इतिहास की सबसे बड़ी सप्लाई बाधाओं में से एक बताया है। उन्होंने कहा कि अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो ऊर्जा संकट गहरा सकता है और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं दबाव में आ सकती हैं।

    कोई देश नहीं बचेगा असर से

    आईईए प्रमुख ने स्पष्ट कहा कि यह संकट किसी एक या दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर विकसित और विकासशील-दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जहां महंगाई और चालू खाते के घाटे पर असर पड़ सकता है।

    IEA की सलाह: ऊर्जा बचत ही समाधान

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आईईए ने सरकारों, कंपनियों और आम लोगों के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं। इसमें जहां तक संभव हो वर्क फ्रॉम होम अपनाना, अनावश्यक हवाई यात्रा से बचना और ईंधन की खपत कम करना शामिल है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक कुकिंग और अन्य आधुनिक विकल्पों को अपनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि एलपीजी और तेल पर निर्भरता कम की जा सके।

  • ईरान-इजरायल तनाव के बीच राष्ट्रपति हर्जोग का कड़ा संदेश न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले के बाद बढ़ा संघर्ष

    ईरान-इजरायल तनाव के बीच राष्ट्रपति हर्जोग का कड़ा संदेश न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले के बाद बढ़ा संघर्ष


    नई दिल्ली:ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने एक बार फिर गंभीर मोड़ ले लिया है हाल ही में 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए सैन्य संघर्ष के दौरान ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर शहर अराद और डिमोना को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमले किए इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय चिंता को और बढ़ा दिया है क्योंकि पहली बार इस संघर्ष में न्यूक्लियर ठिकानों पर सीधा हमला हुआ

    हमले के बाद इजरायली राष्ट्रपति Isaac Herzog ने तुरंत प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और हालात का जायजा लिया अराद में स्थित एक बेकरी को भी इस हमले में नुकसान पहुंचा जहां उन्होंने बेकरी मालिक से मुलाकात कर उनकी स्थिति को जाना हालांकि इस हमले में किसी भी नागरिक की मौत नहीं हुई लेकिन इमारतों को क्षति पहुंची

    राष्ट्रपति हर्जोग ने अपने दौरे के दौरान स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए बताया कि संकट के बावजूद नागरिकों ने सतर्कता और अनुशासन का परिचय दिया उन्होंने कहा कि सायरन बजते ही लोग सुरक्षित स्थानों और बंकरों में चले गए जिससे बड़ी जनहानि टल गई यह दर्शाता है कि नागरिक सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी ने संभावित बड़े नुकसान को रोका

    हर्जोग ने सोशल मीडिया पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए एक परिवार की कहानी का उल्लेख किया जिनका बेकरी व्यवसाय हमले की चपेट में आया उन्होंने बताया कि इस परिवार के बेटे को 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के दौरान अगवा कर लिया गया था और बाद में उसे एक बंधक समझौते के तहत वापस लाया गया यह परिवार कई कठिनाइयों का सामना कर चुका है लेकिन इसके बावजूद उनकी हिम्मत और सकारात्मकता इजरायली समाज की मजबूती को दर्शाती है

    उन्होंने आगे कहा कि छोटे व्यवसायों का समर्थन करना केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि राष्ट्र की भावना को मजबूत करना है उन्होंने नागरिकों के धैर्य और साहस की सराहना करते हुए कहा कि इजरायली आत्मा इन कठिन परिस्थितियों में भी मजबूत बनी हुई है

    ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा कि मिसाइलों और हिंसा के जरिए इंसानियत को नुकसान पहुंचाने का प्रयास गलत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इजरायल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा और किसी भी खतरे का जवाब देने में सक्षम है

    अपने बयान में उन्होंने यह भी दोहराया कि इजरायल की रणनीति स्पष्ट है और वह अपने उद्देश्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है उन्होंने जोर देकर कहा कि संघर्ष का अंत तभी संभव है जब ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार और बैलिस्टिक क्षमताएं नहीं रहेंगी

    यह पूरा घटनाक्रम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को दर्शाता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता को और गहरा करता है इस संघर्ष का भविष्य क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है

  • क्यों धड़ाम हुआ बाजार? सेंसेक्स की भारी गिरावट के पीछे की असली वजहें

    क्यों धड़ाम हुआ बाजार? सेंसेक्स की भारी गिरावट के पीछे की असली वजहें


    नई दिल्ली।  सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद खराब रही। सोमवार के महीने के सत्र में बीएसई सेंसेक्स करीब 1,772 अंक यानी 2.32% 72,803 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 भी 565 अंक (2.44%) पर कारोबार कर 22,549 पर पहुंचा।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी गिरावट
    सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक में भी जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 3.78% टूटकर 52,789 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 4.12% टूटकर 15,070 पर पहुंच गया। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है, जिससे बाजार में चौतरफा मंदी बनी हुई है।

    मध्य पूर्व तनाव बना सबसे बड़ा कारण
    इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में भारी तनाव है। डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज झील के लिए 48 घंटे की अंतिम घोषणा और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी में गिरावट और नीचे दिए गए। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्रीय हमलों और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दी है। यह संघर्ष अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है, जिससे अल्पावधि में डर और अनिश्चितता बढ़ गई है।

    वैश्विक उपकरण से मिले ख़राब संकेत
    अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गिरावट ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बनाया। टोक्यो, सोल, हांगकांग, शंघाई और बैंकॉक जैसे प्रमुख एशियाई देशों में 2% से 6.5% तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरेलू उद्यमियों का भरोसा टूट गया।

    कच्चे तेल की इकाइयों ने चिंता व्यक्त की
    तेल बाजार में तेजी से भी गिरावट की अहम वजह बनी। ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति डॉलर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 100 डॉलर प्रति डॉलर के आसपास पहुंच गया। तेल के रासायनिक यौगिक भारत जैसे तेल उत्पादक देशों के लिए औद्योगिक और आर्थिक दबाव बढ़ाते हैं, जिससे बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    एफआईआई की बिकवाली से बढ़ा दबाव
    विदेशी बिजनेसमैन की बिकवाली ने भी बाजार को झटका दिया। पिछले मत्स्य सत्र में एफओवाई ने 5,518 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जबकि डीईओआई ने 5,706 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इसके बावजूद बाजार में गिरावट को रोकना मुश्किल साबित हुआ।

    विपक्ष में सोनम कपूर
    इन सभी सामानों के सामान बाजार में डर और शांति का मोहरा बना हुआ है। पर्यटक पर्यटक आकर्षण अपनाते नजर आ रहे हैं और आगे की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

  • IPL 2026 में फिर दिखेगा राशिद खान का जलवा, गुजरात टाइटंस से जुड़ते ही बोले—खुशी का माहौल है

    IPL 2026 में फिर दिखेगा राशिद खान का जलवा, गुजरात टाइटंस से जुड़ते ही बोले—खुशी का माहौल है

      नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 से पहले राशिद खान के गुजरात टाइटंस से जुड़ते ही टीम के रूम में जोश का माहौल नजर आ रहा है। फ़्रैंचाइज़ी ने सोशल मीडिया पर सोशल मीडिया पर एक खास पोस्ट शेयर करते हुए लिखा- ”खुशी का माहौल है, क्योंकि गुजरात की शान घर आ गई हैं।”

      पिछला सीज़न रहा, इस बार वापसी की उम्मीद है
      राशिद खान का आईपीएल 2025 में प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने 15 मैचों में सिर्फ 9 विकेट लिए और 9.35 की इकोनोमी से रन खर्च किया। हालांकि, उनकी काबिलियत पर किसी को शक नहीं है और यही वजह है कि टीम इस बार दमदार वापसी की उम्मीद कर रही है।

      टी20 वर्ल्ड कप में दिखा पुराना अंदाज
      हाल ही में आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 में रशीद ने शानदार प्रदर्शन किया।अफगानिस्तान की ओर से 4 मैचों में 6 विकेट लेने के साथ उन्होंने केवल 6.68 की इकोनॉमी रन दी। इस प्रदर्शन में साफ कर दिया गया कि रशीद फॉर्म में वापस आये हैं।

      गुजरात का पिछला सफर शानदार रहा
      शुबमन गिल की ओर से गुजरात टाइटंस ने आईपीएल 2025 में शानदार प्रदर्शन किया था। टीम ने 14 से 9 रॉकेट रॉकेट एलिमिनेटर तक का सफर तय किया। हालांकि, एलिमिनेटर में मुंबई इंडियंस के खिलाफ हार के साथ उनका सफर खत्म हो गया।

      वैकल्पिक रूप से दिखावा दम, बदले में चमके कृष्णा
      गुजरात के लिए गिल और साई सुदर्शन ने बनाई शानदार फिल्म। गिल ने 650 रन बनाए, जबकि साई सुदर्शन ने 759 रन ठोककर टीम की बढ़त को मजबूत किया। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा ने टूर्नामेंट में 25 विकेट लेकर टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट हासिल किए।

      नई खरीद से टीम और मजबूत
      आईपीएल 2026 ऑक्शन में गुजरात में जेसन होल्डर, टॉम बैंटन और ल्यूक वुड शामिल हैं।
      इन खिलाड़ियों के आने से टीम का बैलेंस और मजबूत नजर आ रही है, खासकर ऑलराउंड में चौथे नंबर पर बढ़त मिली है।

      रशीद पर टिकी नजरें
      इस सीज़न में गुजरात की सफलता काफी हद तक रशीद खान के प्रदर्शन पर असंतुलित है। यदि वह अपनी पुरानी लय में हैं, तो टीम खिताब की प्रबल दावेदारी बन सकती है।
  • सामाजिक न्याय के पुरोधा को राष्ट्र का नमन लोहिया जयंती पर पीएम मोदी ने याद किए उनके क्रांतिकारी विचार

    सामाजिक न्याय के पुरोधा को राष्ट्र का नमन लोहिया जयंती पर पीएम मोदी ने याद किए उनके क्रांतिकारी विचार


    नई दिल्ली:
    देश के प्रखर समाजवादी चिंतक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम मनोहर लोहिया की जयंती के अवसर पर राष्ट्रभर में उन्हें रक्षाबंधन के अवसर पर इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके विचारों और योगदान को याद करते हुए कहा कि गरीबों और संप्रदायों के संप्रदाय के प्रति उनकी विचारधारा आज भी देश को प्रेरित करती है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने केवल स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों को एकजुट नहीं किया बल्कि आजादी के बाद भारत के सामाजिक और राजनीतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि समाजवादी विचारधारा केवल आर्थिक समानता तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने लैंगिक समानता और सहभागी शासन जैसे सिद्धांतों पर भी गहनता से अपने सिद्धांत पर जोर दिया, आज भी समग्र विकास और लोकतांत्रिक विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में सुझाव दिए गए हैं।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रयोगशाला को याद दिलाते हुए कहा कि वे आजादी के आंदोलन से लेकर समाज सुधार तक हर क्षेत्र में सक्रिय हैं, उन्होंने शिक्षा और स्वभाषा के लिए वकालत की और अपने आचरण से सामाजिक जीवन में शुचिता का उदाहरण प्रस्तुत किया।

    स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नडडा ने उन्हें सामाजिक न्याय का संदेश देते हुए कहा कि छोटू ने अपना पूरा जीवन समूह के विकास के लिए अपना विचार समर्पित किया है और आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं।

    कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि समाज के शोषित और कृषि उत्पादों के केंद्र उनके प्रयासों को हमेशा प्रेरणा देते रहे हैं, वहीं किरण रिजिजू ने कहा कि समाज के शोषित और कृषि उत्पादों की दिशा में दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

    विपक्ष के अध्यक्ष ओम बिरला ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डॉली ने अपने जीवन में असंगत सामाजिक न्याय और जनभागीदारी के सिद्धांतों को स्वीकार किया है और अंतिम व्यक्ति तक विकास की दिशा तय की है, उनके विचार आज भी एक समावेशी और न्यायपूर्ण भारत के निर्माण में प्रेरणा देते हैं।

    देश के विभिन्न राज्यों के नेताओं ने भी इस अवसर पर अपने विचारों को याद किया, योगी आदित्यनाथ, मोहन यादव, भजन लाल शर्मा, नायब सिंह सैनी और पुष्कर सिंह धामी सहित कई लोगों ने अपने विचारों को याद करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति को याद किया। तक विकास संकल्प के संकल्प को परिभाषित करें

    राम मनोहरला का जीवन और उनके विचार भारतीय राजनीति और समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने कहा कि वे आज भी देश के विकास के लिए समान विचारधारा वाले हैं और उनकी विरासत हमें सिखाती है कि सच्चा लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब समाज का हर वर्ग और सहभागी बने।

  • IPL कप्तानी का 'गोल्डन रिकॉर्ड': इन 4 कप्तानों ने रचा इतिहास, कमान संभालते ही अपनी टीम की किस्मत बदल डाली!

    IPL कप्तानी का 'गोल्डन रिकॉर्ड': इन 4 कप्तानों ने रचा इतिहास, कमान संभालते ही अपनी टीम की किस्मत बदल डाली!


    नई दिल्ली: 
    इंडियन प्रीमियर लीगIPL दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण और हाई-प्रेशर क्रिकेट लीग मानी जाती है। यहाँ केवल मैदान पर प्रदर्शन करना ही काफी नहीं है, बल्कि कप्तानी के मोर्चे पर भी हर पल पैनी नजर और सही फैसलों की जरूरत होती है। IPL 2026 यानी इस रंगारंग लीग के 19वें सीजन का शुभारंभ होने ही वाला है, और इस उत्साह के बीच हम आपके लिए कुछ ऐसे रोचक आंकड़े लेकर आए हैं जो कप्तानी की दुनिया में ‘गोल्डन स्टैंडर्ड’ माने जाते हैं। आईपीएल के इतिहास में अब तक केवल 4 ऐसे कप्तान हुए हैं, जिन्होंने अपनी कप्तानी के पहले ही सीजन में टीम को चैंपियन बनाकर इतिहास रच दिया। इस खास लिस्ट में तीन भारतीय चेहरों के साथ एक विदेशी दिग्गज का नाम भी शामिल है, जिन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।

    इस फेहरिस्त की शुरुआत होती है साल 2008 से, जब ऑस्ट्रेलिया के महान लेग स्पिनर शेन वॉर्न ने राजस्थान रॉयल्स की कमान संभाली। उस समय राजस्थान की टीम में नामी सितारों की कमी थी, लेकिन वॉर्न ने भारतीय घरेलू क्रिकेटरों के भीतर ऐसा आत्मविश्वास भरा कि टीम ने अविश्वसनीय प्रदर्शन किया। पूरे सीजन में केवल 2 मैच हारने वाली इस टीम ने फाइनल में चेन्नई सुपर किंग्स को हराकर पहला आईपीएल खिताब जीता। इसके बाद साल 2013 में एक नया सितारा उभरा, जिसका नाम था रोहित शर्मा। मुंबई इंडियंस ने सीजन के बीच में रोहित को कप्तानी सौंपी और उन्होंने पिछले 5 सालों से ट्रॉफी के लिए तरस रही मुंबई की झोली में पहला खिताब डाल दिया। रोहित की कप्तानी का यह सफर इतना शानदार रहा कि उन्होंने मुंबई को कुल 5 बार चैंपियन बनाया और टीम को आईपीएल की सबसे सफल फ्रेंचाइजी में शुमार कर दिया।

    कप्तानी के इस ‘डेब्यू मैजिक’ का तीसरा उदाहरण साल 2022 में देखने को मिला, जब हार्दिक पांड्या ने नई फ्रेंचाइजी गुजरात टाइटंस की कमान संभाली। मुंबई के साथ चार खिताब जीतने का अनुभव रखने वाले हार्दिक ने आशीष नेहरा की सटीक प्लानिंग के साथ मिलकर गुजरात को उसके पहले ही सीजन में चैंपियन बना दिया। हार्दिक ने साबित किया कि उनके पास न केवल ऑलराउंड क्षमता है, बल्कि एक लीडर के रूप में गेम को समझने की जबरदस्त समझ भी है। वहीं, इस लिस्ट का सबसे ताजा और चौंकाने वाला नाम रजत पाटीदार का है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरुRCB, जो अनिल कुंबले और विराट कोहली जैसे दिग्गजों की कप्तानी में भी ट्रॉफी नहीं जीत पाई थी, उसकी किस्मत साल 2025 में बदली। आरसीबी प्रबंधन ने रजत पाटीदार को कप्तान बनाने का साहसिक फैसला लिया और पाटीदार ने पहले ही सीजन में टीम को चैंपियन बनाकर विराट कोहली का बरसों पुराना सपना पूरा कर दिया।

    ये चार कप्तान इस बात का सबूत हैं कि आईपीएल में लेगेसी और दबाव के बावजूद, अगर नेतृत्व में स्पष्टता और जज्बा हो, तो पहले ही प्रयास में शिखर को छुआ जा सकता है। अब जब आईपीएल 2026 का आगाज होने जा रहा है, तो फैंस की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या कोई नया चेहरा इस विशिष्ट क्लब में शामिल हो पाता है या फिर पाटीदार अपनी टीम को बैक-टू-बैक दूसरा खिताब दिलाकर एक नई इबारत लिखेंगे। आईपीएल का यह सफर जितना पुराना होता जा रहा है, इसके आंकड़े उतने ही दिलचस्प और रोमांचक होते जा रहे हैं।