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  • पश्चिम एशिया तनाव के बीच एयर इंडिया ग्रुप आज 30 उड़ानें संचालित करेगा

    पश्चिम एशिया तनाव के बीच एयर इंडिया ग्रुप आज 30 उड़ानें संचालित करेगा


    नई दिल्ली।
    अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव के बावजूद एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने 23 मार्च को पश्चिम एशिया के लिए कुल 30 उड़ानें संचालित करने का फैसला किया है। एयरलाइन के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह उड़ानें निर्धारित (शिड्यूल्ड) और गैर-निर्धारित (नॉन-शिड्यूल्ड) दोनों श्रेणियों में होंगी।

    एयर इंडिया ग्रुप जेद्दा के लिए कुल 10 उड़ानें संचालित करेगा। इनमें दिल्ली और मुंबई से एयर इंडिया की उड़ानें शामिल हैं, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस बेंगलुरु, कोझिकोड और मंगलुरु से सेवाएं देगा।

    एयर इंडिया एक्सप्रेस मस्कट के लिए चार और रियाद के लिए चार उड़ानें संचालित करेगा। इसके अलावा, 12 अतिरिक्त गैर-निर्धारित उड़ानें संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के लिए चलाई जाएंगी, जो परिचालन स्थितियों और स्लॉट उपलब्धता पर निर्भर करेंगी।

    यूएई में दुबई, अबू धाबी और शारजाह के लिए विशेष उड़ानें संचालित की जाएंगी। एयर इंडिया दिल्ली-दुबई रूट पर सेवा देगा, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस दिल्ली, मुंबई और मंगलुरु से कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।

    हालांकि, दोहा, कुवैत सिटी और तेल अवीव समेत कई गंतव्यों के लिए उड़ानें फिलहाल स्थगित रहेंगी।

    एयरलाइन ने प्रभावित यात्रियों को बिना अतिरिक्त शुल्क के टिकट री-बुकिंग या पूर्ण रिफंड का विकल्प दिया है। साथ ही, व्हाट्सएप और कस्टमर सपोर्ट के जरिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

    एयर इंडिया ग्रुप ने कहा कि वह हालात पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त उड़ानें संचालित करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को कम से कम असुविधा हो।

  • परमाणु ठिकानों पर हमलों से बढ़ा खतरा, डब्ल्यूएचओ ने दी गंभीर चेतावनी

    परमाणु ठिकानों पर हमलों से बढ़ा खतरा, डब्ल्यूएचओ ने दी गंभीर चेतावनी


    जिनेवा।
    अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर किए हमले से पश्चिम एशिया में संकट की स्थिति बनी हुई है। इस बीच ईरान के परमाणु ठिकानों पर हो रहे हमलों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।

    डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने बताया कि नतांज एनरिचमेंट कॉम्प्लेक्स और डिमोना जैसे संवेदनशील परमाणु स्थलों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी इन घटनाओं की जांच कर रही है। फिलहाल किसी तरह के रेडिएशन स्तर में वृद्धि के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    टेड्रोस ने चेतावनी दी कि परमाणु ठिकानों को निशाना बनाना बेहद खतरनाक है, क्योंकि इससे बड़े पैमाने पर जनस्वास्थ्य संकट और पर्यावरणीय नुकसान हो सकता है। अगर ऐसे हमले जारी रहते हैं, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

    डब्ल्यूएचओ ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से 13 देशों में अपने स्टाफ और संयुक्त राष्ट्र के कर्मियों को संभावित न्यूक्लियर आपात स्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

    डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाई में संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए और मौजूदा संकट का समाधान केवल शांति और संवाद के जरिए ही संभव है।

  • ढेकियाजुली में भीषण सड़क हादसा, 8 लोगों की मौके पर मौत

    ढेकियाजुली में भीषण सड़क हादसा, 8 लोगों की मौके पर मौत


    शोणितपुर (असम)।
    असम के ढेकियाजुली क्षेत्र में रविवार रात एक भीषण सड़क हादसे में आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा एक एम्बुलेंस और ट्रक के बीच आमने-सामने की टक्कर के कारण हुआ।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, एम्बुलेंस में सवार एक मरीज समेत कुल आठ लोग इस दुर्घटना में मारे गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि सभी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

    घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गई। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

  • मप्रः आईएएस विकास मिश्रा बने सीधी के नए कलेक्टर, हितिका वसाल गुना एसपी की कमान

    मप्रः आईएएस विकास मिश्रा बने सीधी के नए कलेक्टर, हितिका वसाल गुना एसपी की कमान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में प्रशासनिक सख्ती के बीच सरकार ने सीधी और गुना जिलों में बड़े स्तर पर बदलाव किए हैं। सीधी में नए कलेक्टर के रूप में वर्ष 2013 बैच के आईएएस अधिकारी विकास मिश्रा की पदस्थापना की गई है, जबकि गुना जिले की पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी आईपीएस अधिकारी हितिका वसाल को सौंपी गई है।

    रविवार देर शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त रुख के बाद यह बदलाव किया गया है। दरअसल, मुख्यमंत्री रविवार को मिर्जापुर से सीधे सीधी जिला मुख्यालय पहुंचे थे। यहां स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान उन्हें कई शिकायतें मिलीं। जिसके बाद उन्होंने ये एक्शन लिया।

    मुख्यमंत्री ने सीधी जिले में अचानक पहुंचकर स्थानीय नागरिकों से सीधा संवाद कर प्रशासनिक व्यवस्था और योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी ली थी। उन्होंने जनसंवाद के दौरान आमजन और जनप्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर की गई शिकायतों और जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों की कार्य प्रणाली पर विस्तार से समीक्षा एवं फीडबैक लिया था।

    इसी दौरान मुख्यमंत्री ने प्राप्त शिकायतों के दृष्टिगत सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को तत्काल प्रभाव से हटाने और जिला सहकारी बैंक के महाप्रबधंक पीएस धनवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिये थे। साथ ही गुना जिले में तलाशी के दौरान मिली नगद राशि में हेरफेर के मामले में पुलिस अधीक्षक गुना अंकित सोनी की भूमिका को यथोचित न मानते हुए पुलिस अधीक्षक पद से हटाने के निर्देश भी दिये थे।

    मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य शासन ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लेते हुए गुना हवालाकांड के बाद एसपी अंकित सोनी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उन्हें पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है। इंदौर में 15वीं बटालियन की कमांडेंट हितिका वसल को उनकी जगह गुना का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। 2017 बैच की आईपीएस अधिकारी हितिका वसाल को अब गुना जिले की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    वहीं, सीधी में जनप्रतिनिधियों से मिली शिकायतों के बाद सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग में ओएसडी और सह आयुक्त बनाया गया है। उनकी जगह 2013 बैच के विकास मिश्रा को नया कलेक्टर बनाया है। विकास मिश्रा इससे पहले मुख्यमंत्री सचिवालय में अपर सचिव के साथ आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी का दायित्व संभाल रहे थे। अब उन्हें सीधी जिले की कमान सौंपी गई है।

  • मध्य प्रदेश में एलपीजी का संकट, 12 दिन से होटल-रेस्टोरेंट को नहीं मिले सिलेंडर

    मध्य प्रदेश में एलपीजी का संकट, 12 दिन से होटल-रेस्टोरेंट को नहीं मिले सिलेंडर


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में एलपीजी का संकट बना हुआ है। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत ने होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की कमर तोड़ दी है। लगातार 12 दिन से होटल और रेस्टोरेंट को कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई नहीं हुई है।

    इसे लेकर रविवार को नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया मध्य प्रदेश चैप्टर और फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने प्रदेश की खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि शमी से मुलाकात की। मुख्य सचिव शमी ने छुट्टी के दिन होटल संचालकों से बात और ऑयल कंपनियों के साथ बैठक भी की।

    दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण देश में गैस आपूर्ति बाधित हुई है। केंद्र सरकार द्वारा शुरुआत में आपूर्ति बंद करने के बाद इसे 20 प्रतिशत तक बहाल करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर यह राहत अब तक व्यवसायियों तक नहीं पहुंच सकी है। इस कारण प्रदेश के 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट पर संकट के बादल छाए हुए हैं। वे बंद होने की कगार पर है।

    होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए मध्य प्रदेश होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने खाद्य आपूर्ति सचिव रश्मि अरुण शमी से बातचीत की। प्रदेश भर के होटल संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि केंद्र के 20 प्रतिशत आपूर्ति के आदेश के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर वितरण व्यवस्था ठप पड़ी है।

    सूरी ने कहा कि हमने सरकार के सामने अपनी मांगे रखी हैं और हमें उम्मीद है कि जल्द से जल्द हमें मदद मिलेगी। होटल और रेस्टोरेंट एसोसिशन से लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। सभी के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सुमित सूरी के अनुसार संगठन की प्रमुख मांग है कि वर्तमान 20 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाए, ताकि व्यवसायों का संचालन सुचारू रूप से हो सके। इसके अलावा उन्होंने एक नया प्रस्ताव भी रखा है कि सभी संस्थानों के लिए आपूर्ति का एक समान नियम नहीं होना चाहिए। होटलों की श्रेणी और उनकी मांग के आधार पर गैस का कोटा निर्धारित किया जाना चाहिए। बड़े संस्थानों को उनकी खपत के अनुसार अधिक और छोटे संस्थानों को उनके अनुपात में गैस उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही पीएनजी सप्लाई को भी मांग के अनुरूप बढ़ाने की मांग रखी गई है।

    इधर, भोपाल होटल एवं रेस्तरां संघ के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली ने बताया कि कमर्शियल गैस आपूर्ति पर सख्त पाबंदी के कारण होटल व्यवसाय ठप होने की कगार पर है, जिसके समाधान को लेकर अपर मुख्य सचिव से चर्चा कर गैस की निर्बाध आपूर्ति बहाल करने की मांग की और ज्ञापन सौंपा गया है।

    पाली ने बताया कि भोपाल के होटल, रेस्तरा, ढाबों, खान-पान सेवा आदि रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर के अभाव में संचालन व्यवस्था में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि भोपाल के पंजीकृत होटलों और रेस्तरांओं को उनकी वास्तविक परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों का एक सीमित कोटा आवंटित किया जाए। प्रत्येक प्रतिष्ठान को आवश्यक रसोई संचालन बनाए रखने और खाद्य सेवाओं में व्यवधान से बचने के लिए वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर प्रदाय किए जाए। भोपाल में 2 हजार होटल और रेस्टोरेंट है। जहां हालात गंभीर हो गए हैं।

    नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन के प्रतिनिधि अभिषेक बाहेती ने बताया कि कमर्शियल गैस नहीं मिलने की बात से मुश्किलें बढ़ गई हैं। गैस के अभाव में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों पर बड़ा संकट खड़ा हुआ है। इसे दूर करने की मांग की गई है।

  • मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद

    मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 (महाकुंभ) से पहले अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद सामने आया है। इस पद पर दो दावे किए जा रहे हैं। 13 अखाड़े दो गुट में बंटे नजर आ रहे हैं। एक धड़ा निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी को अध्यक्ष मानता है, जबकि दूसरा महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी को अध्यक्ष बता रहा है। एक जैसा नाम होने से असमंसज की स्थिति बनी है।

    दरअसल, उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर जहां एक और सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी पिछले छह महीनों से अध्यक्ष के रूप में उज्जैन आते-जाते रहे हैं। इस दौरान प्रशासन ने उन्हें शिप्रा नदी प्रोजेक्ट सहित मेले की तैयारियों की जानकारी भी दी, लेकिन अब साधु संतों में दो फाड़ दिखाई दे रही है। देश के 13 अखाड़े में से आठ अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है।

    रविवार को उज्जैन में मंगलनाथ मार्ग स्थित निर्वाणी अणि अखाड़ा में संतों का समागम हुआ। इसमें बड़ी संख्या में संत मौजूद रहे। संतों के इस समागम में 13 में से आठ अखाड़ों के साधु संत शामिल हुए। खास बात यह रही कि यहां हरिद्वार से पहली बार आए महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव संत रविंद्र पुरी महाराज स्वागत सम्मान हुआ। ढोल-नगाड़ों के बीच संतों में उत्साह नजर आया। कार्यक्रम में महंत सत्यानंद महाराज (बड़ा उदासीन), महंत मंगलदास जी (नया अखाड़ा), महंत विनीत गिरी (महानिर्वाणी), महंत रामेश्वर दास, भगवान दास और दिग्विजय दास सहित विभिन्न अखाड़ों के संत-महंत शामिल हुए।

    कार्यक्रम के बाद रविंद्र पुरी महाराज ने मीडिया से कहा कि वे खुद वर्तमान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके साथ में निर्मोही अणि अखाड़े के राजेंद्र दास सचिव हैं। उन्हें लिखित और चयनित दोनों रूपों में 13 में से आठ अखाड़े का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद चार संप्रदाय से मिलकर बनी है। इसमें संन्यासी, उदासीन, वैष्णव और निर्मल शामिल है। इन चारों संप्रदाय के अखाड़े उनके नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद में शामिल हैं। इसीलिए वे खुद अखाड़ा परिषद के चुने गए अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 मे सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। सिंहस्थ कुंभ के आयोजन को लेकर हमारी समय समय पर अधिकारियों से सूक्ष्म चर्चा होती रहती है। हम लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे।


    इन अखाड़ों का समर्थन बताया

    देश के 13 अखाड़े में से 8 अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है। इन अखाड़ों में 1- महानिर्वाणी अखाड़ा, 2- अटल अखाड़ा, 3-निर्मल अखाड़ा, 4- नया उदासी अखाड़ा, 5- बड़ा उदासीन अखाड़ा, 6-निर्वाणी अणि अखाड़ा, 7- दिगंबर अणि अखाड़ा और 8-निर्मोही अणि अखाड़ा शामिल है। इस प्रकार बहुमत के आधार पर अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पुरी महाराज ही होंगे।

    इधर निरंजनी अखाड़े से जुड़े रविंद्र पूरी महाराज ने कहा कि कुम्भ आ रहा है, ऐसे कई संत अपने आप को अध्यक्ष बताएंगे। सर्वसम्मति से मुझे अध्यक्ष बनाया गया था। जब मैंने इस्तीफा दिया नहीं तो महानिर्वाणी वाले रविंद्र पूरी कैसे अध्यक्ष बन सकते है।

  • चैत्र नवरात्रि पर शिवसिटी में निकली एक किलोमीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा, विशाल भंडारे का भी आयोजन

    चैत्र नवरात्रि पर शिवसिटी में निकली एक किलोमीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा, विशाल भंडारे का भी आयोजन

    भोपाल। राजधानी भोपाल के अरहेड़ी रोड स्थित शिवसिटी कॉलोनी में रविवार को चैत्र नवरात्रि के अवसर पर खेड़ापति हनुमान मंदिर से भव्य चुनरी यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।

    जानकारी के अनुसार, अयोध्या नगर से लगे अरहेड़ी रोड की शिवसिटी कॉलोनी से शुरू हुई करीब एक किलोमीटर लंबी इस यात्रा में श्रद्धालु डीजे, ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ आगे बढ़ते रहे। दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम के तहत भगवान शनिदेव की स्थापना भी की गई। इसके बाद चुनरी यात्रा निकाली गई और श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।

    इस आयोजन में शिवसिटी के साथ ही शिवालय कॉलोनी और शिवधाम कॉलोनी के नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भक्तिमय वातावरण में संपन्न कार्यक्रम के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और धार्मिक उत्सव का आनंद लिया।

  • लेक न्योस का खौफनाक सच 1986 की त्रासदी और दुनिया की सबसे खतरनाक झील

    लेक न्योस का खौफनाक सच 1986 की त्रासदी और दुनिया की सबसे खतरनाक झील

    नई दिल्ली:दुनिया में कई प्राकृतिक स्थल अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं लेकिन कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां सुंदरता के पीछे खतरनाक रहस्य छिपा होता है कैमरून की लेक न्योस ऐसी ही एक झील है जो देखने में शांत और आकर्षक लगती है लेकिन इसका इतिहास एक भयानक त्रासदी से जुड़ा है

    लेक न्योस कैमरून के ओकू ज्वालामुखी क्षेत्र में स्थित एक क्रेटर झील है जो एक निष्क्रिय ज्वालामुखी के गड्ढे में बनी है वैज्ञानिकों के अनुसार इस झील की गहराई में मौजूद मैग्मा लगातार कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ता रहता है यह गैस पानी में घुलकर झील के तल में जमा होती रहती है और जब दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है तो यह गैस अचानक विस्फोट की तरह बाहर निकल सकती है

    इस घटना को लीम्निक विस्फोट कहा जाता है 21 अगस्त 1986 को लेक न्योस से अचानक बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का घातक बादल निकला यह बादल लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आसपास की घाटी में फैल गया इस भयावह घटना में करीब 1800 लोगों की जान चली गई इसके अलावा हजारों मवेशी और कई पक्षी भी इस गैस के कारण मारे गए लोग ज्यादातर अपने घरों में सो रहे थे और उन्हें सांस लेने का मौका तक नहीं मिला

    गैस का यह बादल भारी होने के कारण जमीन के करीब ही फैल गया और इसमें ऑक्सीजन की कमी थी जिससे सांस लेना असंभव हो गया यह घटना इतिहास की सबसे दर्दनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जाती है

    घटना के बाद वैज्ञानिकों ने लेक न्योस के रहस्य को समझने के लिए विस्तृत अध्ययन किया और पाया कि झील के नीचे जमा गैस ही इस त्रासदी का कारण थी इसके बाद इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए उपाय किए गए

    साल 2001 में झील में एक डीगैसिंग सिस्टम लगाया गया जिसमें पाइपों के जरिए धीरे धीरे गैस को बाहर निकाला जाने लगा ताकि दबाव खतरनाक स्तर तक न पहुंचे बाद में 2011 में और पाइप लगाए गए जिससे गैस के सुरक्षित निष्कासन को और बेहतर बनाया गया

    इस तकनीक की मदद से अब झील से कार्बन डाइऑक्साइड नियंत्रित तरीके से बाहर निकल रही है और बड़े विस्फोट का खतरा काफी हद तक कम हो गया है वैज्ञानिक अभी भी अन्य अफ्रीकी झीलों जैसे लेक मोनन पर नजर बनाए हुए हैं जहां ऐसी ही खतरनाक स्थिति बन सकती है जो यह याद दिलाती है कि प्रकृति जितनी सुंदर है उतनी ही अनिश्चित और खतरनाक भी हो सकती है

  • लिथियम से लेकर टाइटेनियम तक भारत की नई खनिज नीति से आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

    लिथियम से लेकर टाइटेनियम तक भारत की नई खनिज नीति से आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल


    नई दिल्ली:
    देश की आर्थिक उन्नति और भविष्य की ऊर्जा परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है सोमवार से खनिज ब्लॉकों की नीलामी के सातवें चरण की शुरुआत होगी इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे द्वारा किया जाएगा। भारत के खान मंत्रालय के अनुसार यह नीलामी देश की खनिज सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए बेहद अहम मानी जा रही है
    आज के समय में जब दुनिया स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रही है तब लिथियम ग्रेफाइट दुर्लभ पृथ्वी तत्व टंगस्टन वैनेडियम और धातुओं जैसे खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है हालांकि इन खनिजों की उपलब्धता सीमित है और कुछ ही क्षेत्रों में केंद्रित होने के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना रहता है।
    46 खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर चुकी है जिसे उद्योग जगत से पॉजिटिव रिएक्शन मिला है इससे यह संकेत मिलता है कि भारत के खनिज क्षेत्र में निवेश और भागीदारी बढ़ रही है सातवें चरण में इस रेट को जारी रखते हुए कई राज्यों में 19 नए ब्लॉक नीलामी के लिए पेश किए जाएंगे जिनमें स्वच्छ ऊर्जा उर्वरक और खनिज उद्योगों के लिए जरूरी खनिज शामिल हैं

    नीलामी प्रक्रिया को ज्यादा उचित और असरदार बनाने के लिए सरकार ने नियमों में भी कई सुधार किए हैं 2025 और 2026 के संशोधनों के तहत प्रदर्शन सुरक्षा अग्रिम भुगतान और अन्य गतिविधियों को सरल बनाया गया है साथ ही बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा गारंटी बॉन्ड की सुविधा भी दी गई है जिससे भारतीयों को आसानी होगी

    यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन दो चरणों वाली उचित नीलामी प्रणाली के तहत आयोजित की जाएगी जिसमें उच्चतम बोली लगाने वाले को खनन का अधिकार मिलेगा इस पहल से न केवल देश की खनिज आपूर्ति मजबूत होगी बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता भी वहीं

    आने वाले समय में यह कदम भारत को स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है

  • डिमोना-अराद मिसाइल स्ट्राइक: ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया

    डिमोना-अराद मिसाइल स्ट्राइक: ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया


    नई दिल्ली । इजरायल के दक्षिणी शहरों डिमोना और अराद में शनिवार को ईरान ने बड़े पैमाने पर मिसाइल हमला किया जिसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। घायलों में से 11 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इजरायली मीडिया के अनुसार ईरान की ओर से ताबड़तोड़ हमलों में इजरायली एयर डिफेंस कम से कम दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा।

    हमलों के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायल डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा कि देश अपने दुश्मनों से हर मोर्चे पर लड़ता रहेगा। हमलों में गंभीर रूप से घायल लोगों में डिमोना में हुए हमले के कारण 12 साल का एक लड़का और अराद में 5 साल की एक लड़की शामिल हैं।

    डिमोना इलाके में ईरान ने कई मिसाइल हमले किए जिन्हें न्यूक्लियर रिसर्च फैसिलिटी को निशाना बनाने के लिए किया गया था। यह फैसिलिटी डिमोना से लगभग 10 किलोमीटर और अराद से 30 किलोमीटर दूर स्थित है। ईरानी मीडिया ने बताया कि यह हमला इजरायल के परमाणु केंद्रों पर बदले के तौर पर किया गया है। अमेरिका और इजरायल पहले से ही ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए लगातार दबाव डाल रहे हैं।

    इजरायल के मैगन डेविड एडोम इमरजेंसी सर्विस के अनुसार डिमोना में हमले के दौरान गंभीर रूप से घायल लड़के के अलावा 30 साल की एक महिला को भी कांच के टुकड़ों से मामूली चोटें आईं। शहर में 31 अन्य लोगों को हल्की चोटों का इलाज किया गया जबकि 14 लोगों को एक्यूट एंग्जायटी के लिए मेडिकल सहायता मिली। एमडीए पैरामेडिक कार्मेल कोहेन ने कहा कि हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मची हुई थी और बहुत ज्यादा नुकसान हुआ।

    बीर्शेबा के सोरोका मेडिकल सेंटर ने जानकारी दी कि हमले में घायल सात लोगों को भर्ती किया गया जिनमें गंभीर रूप से घायल 12 साल का बच्चा भी शामिल था। बच्चों और अन्य गंभीर घायलों का इलाज ट्रॉमा रूम और सर्जिकल इमरजेंसी रूम में किया जा रहा है।

    डिमोना में हुए हमले के कुछ घंटों बाद पास के अराद में भी एक बैलिस्टिक मिसाइल के टकराने से कई इमारतों को नुकसान हुआ। एमडीए की टीम ने अराद में हमले के दौरान 71 लोगों का इलाज किया और उन्हें अस्पताल भेजा। इसमें 10 गंभीर घायल शामिल थे जिनमें 5 साल की बच्ची भी थी। 13 लोगों की हालत स्थिर बताई गई जबकि 48 लोगों को हल्की चोटें आईं। चार और लोगों को अतिरिक्त इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    इस हमले ने इजरायल के न्यूक्लियर शहरों और नागरिक सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न किया है। विशेषज्ञ इसे ईरान की ओर से इजरायल के परमाणु कार्यक्रम और सुरक्षा रणनीति पर बड़ा प्रहार मान रहे हैं। इस घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक स्थिरता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।